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सिंहस्थ में फूलों की खेती के लिए 4200 हेक्टेयर जमीन, विशेष क्लस्टर के लिए केंद्र से मंजूरी की अपील

उज्जैन  उज्जैन और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण धार्मिक दृष्टि से अहम इंदौर जिले में अब फूलों की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी है। राज्य सरकार ने इंदौर सहित कुछ जिलों को चिह्नित करते हुए पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना बनाई है। इस योजना के तहत इंदौर जिले में 110 हेक्टेयर भूमि पर फूलों की खेती का लक्ष्य तय किया गया है। 110 हेक्टेयर में सिर्फ गुलाब की खेती का लक्ष्य योजना के पहले चरण में 83.87 हेक्टेयर भूमि पर 142 हितग्राही किसानों को चयनित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक पूरे 110 हेक्टेयर क्षेत्र में केवल गुलाब की खेती की जाए। इससे धार्मिक आयोजनों में फूलों की बढ़ती मांग को स्थानीय स्तर पर पूरा किया जा सकेगा। मुख्य सचिव करेंगे प्रोजेक्ट की निगरानी इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग खुद मुख्य सचिव अनुराग जैन करेंगे। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इस योजना पर चर्चा के बाद उद्यानिकी विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उप संचालक उद्यान को योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया है। सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन के लिए बड़ा प्लान सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिले के लिए भी बड़ी योजना बनाई गई है। यहां 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती के क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भारत सरकार से विशेष प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ मेले के दौरान बड़ी मात्रा में फूलों की आवश्यकता होगी। इंदौर में रोज 8 से 12 टन फूलों की आवक इंदौर फूल बाजार एसोसिएशन के अनुसार शहर में प्रतिदिन 8 से 12 टन फूलों की आवक होती है। त्योहारी और पीक सीजन में यह मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। नवरात्रि, दीपावली और विवाह आयोजनों के दौरान आवक 30 से 70 टन तक पहुंच जाती है। बाजार में मुख्य रूप से गेंदा, गुलाब और सेवंती की आपूर्ति होती है। प्रदेश में तेजी से बढ़ रही फूलों की खेती प्रदेश में फूलों की खेती लगातार बढ़ रही है और मध्यप्रदेश पूरे देश में तीसरे स्थान पर है। गेंदा सबसे अधिक क्षेत्र में उगाया जाता है, इसके बाद गुलाब, क्रिसैंथेमम, ग्लैडियोलस, ट्यूबरोज और अन्य मौसमी फूलों की खेती होती है। राज्य में लगभग 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 5.12 लाख टन से अधिक फूलों का उत्पादन हुआ। धार्मिक स्थलों के कारण बढ़ी मांग उज्जैन, ओंकारेश्वर के अलावा देवास, सलकनपुर, नीमच, मंदसौर, महेश्वर, नलखेड़ा, परशुराम लोक सहित कई धार्मिक और तीर्थ स्थल इस क्षेत्र में स्थित हैं। इसी वजह से यहां फूलों की खेती पर विशेष फोकस किया जा रहा है। मंत्री बोले, बाहर से फूल मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने हाल ही में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि उज्जैन और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर साल भर फूलों की भारी मांग रहती है। सिंहस्थ मेले के दौरान यह मांग कई गुना बढ़ जाती है। सरकार की योजना है कि स्थानीय किसानों से ही फूलों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, जिससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे।   

सऊदी अरब में शराब पर लगेगी नई छूट, क्राउन प्रिंस ने दिया फरमान, खुली पहली शराब की दुकान

रियाद सऊदी अरब ने चुपचाप अमीर विदेशी निवासियों को शराब खरीदने की इजाजत देना शुरू कर दिया है। यह खुलासा बीबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। इसमें कहा गया है कि सऊदी अरब ने 73 साल पहले शराब पर प्रतिबंध लगाया था। इसे सऊदी अरब के कानूनों में बहुत बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले सऊदी अरब ने विदेशी डिप्लोमेट्स को शराब खरीदने और उसका सेवन करने की इजाजत दी थी। हालांकि, सऊदी अरब में आज भी आम लोगों और मध्यम या गरीब तबके को शराब खरीदने या उसका सेवन करने की इजाजत नहीं है। सऊदी अरब में शराब की बिक्री पर कब लगा था प्रतिबंध सऊदी अरब इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों का घर है। उसने 1952 में शराब की बिक्री पर बैन लगा दिया था। लेकिन अपनी छवि को बदलने के बड़े प्रयास के तहत, सऊदी अरब ने हाल के सालों में बड़े सामाजिक और आर्थिक सुधार किए हैं। उसने खुद को एक ज्यादा उदार और निवेश-अनुकूल देश के रूप में पेश करने का प्रयास भी किया है। ये बदलाव क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में आए हैं, जो सऊदी अरब के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन उन्हें किंगडम के असली शासक माना जाता है। सऊदी अरब में हो रहे बदलावों को जानें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में सऊदी अरब में सिनेमाघर फिर से खोले गए हैं, बड़े म्यूजिक फेस्टिवल और फैशन शो आयोजित किए हैं, महिलाओं के ड्राइविंग पर बैन हटाया है, और धार्मिक पुलिस की शक्तियों को कम किया गया है। हालांकि शराब की बिक्री से प्रतिबंध हटाने का फैसला सबसे बड़ा और साहसिक कदम माना जा रहा है। सऊदी अरब में शराब की बिक्री शुरू सऊदी अरब में शराब की पहली दुकान जनवरी 2024 में रियाद में खुली थी। लेकिन, शुरुआत में इसमें खरीदारी की सिर्फ गैर-मुस्लिम डिप्लोमैट्स को ही इजाजत दी गई थी। अब रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 के आखिर में बिना किसी घोषणा के लागू किए गए नए नियमों के तहत, अमीर, गैर-मुस्लिम विदेशी निवासी अब बीयर, वाइन और स्पिरिट खरीदने के लिए वहां जा सकते हैं। सऊदी अरब में शराब खरीदने की योग्यता क्या है रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब में शराब खरीदने के लिए योग्यता एक विदेशी के पास या तो प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट होना चाहिए, जिसकी कीमत सालाना 100,000 सऊदी रियाल ($27,000; £19,300) है; या यह दिखाना होगा कि वह हर महीने कम से कम 50,000 रियाल कमाता है। प्रीमियम रेजिडेंसी स्कीम के लिए अलग-अलग योग्यता मानदंड हैं, और यह आमतौर पर सीनियर विदेशी अधिकारियों, निवेशकों और खास स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स के लिए खुली है।  

मायावती ने लखनऊ में बुलाई अहम बैठक, 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारियों पर होगी चर्चा

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती आज लखनऊ में संगठन की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगी। इस बैठक में प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के साथ-साथ सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों के अध्यक्षों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की तैयारियों की समीक्षा करना है। बसपा लंबे समय से चुनावों की रणनीति पर काम कर रही बसपा लंबे समय से आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत पहले ही जिला और विधानसभा स्तर की इकाइयों को संगठन विस्तार, समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने तथा बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने जैसे निर्देश दिए जा चुके हैं। साथ ही, भाईचारा कमेटियों को भी पार्टी की चुनावी रणनीति के अनुरूप जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। अब तक हुए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट लेंगी आज की बैठक में मायावती अब तक हुए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट लेंगी और संगठन की कमजोरियों व मजबूती दोनों पर मंथन करेंगी। इसके साथ ही वे कोर वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए नए वर्गों को जोड़ने की रणनीति स्पष्ट करेंगी। ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर सूत्रों के अनुसार, इस बार बसपा प्रमुख ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही हैं। बैठक में इस दिशा में भी संगठन को ठोस दिशा-निर्देश दिए जाने की संभावना है।

जहां 90% बिकती हैं इलेक्ट्रिक कारें, वहीं TESLA की सेल्स 88% गिरी, जानें वजह

 नई दिल्ली     यूरोप में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बात हो और टेस्ला का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है. लेकिन इस बार कहानी थोड़ी उलटी है. जिस नॉर्वे को टेस्ला अपना सबसे मजबूत किला मानती रही, वहीं अब उसके दरवाजे चरमराते दिख रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि नॉर्वे की सड़कों पर इलेक्ट्रिक कारों की बाढ़ है, लेकिन EV की इस भीड़ में टेस्ला की नाव लड़खड़ा गई है. सवाल सिर्फ बिक्री घटने का नहीं है, सवाल यह है कि क्या यूरोप में टेस्ला का जादू सच में कमजोर पड़ने लगा है. बिक्री के मोर्चे पर आई सुस्ती का असर अब उन बाजारों में भी नजर आने लगा है, जिन्हें टेस्ला का गढ़ माना जाता था. नॉर्वे ऐसा ही एक देश है, जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की जबरदस्त मांग रहती है, लेकिन अब यहां भी टेस्ला की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है. जनवरी 2026 के नए रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के अनुसार, नॉर्वे में Tesla Model Y की सिर्फ 62 यूनिट्स बिकीं. यह कुल नई कार बिक्री का केवल 2.8 प्रतिशत है. पूरी टेस्ला रेंज की बात करें तो कंपनी ने कुल 83 कारें बेचीं, जो पिछले साल जनवरी में बेचे गए कारों के मुकाबले 88 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है.  वहीं दूसरी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं. फॉक्सवैगन ID.3 ने 299 यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप पोजिशन हासिल की, जो टेस्ला से लगभग पांच गुना ज्यादा है. नॉर्वे में टेस्ला के लिए जनवरी भले ही मुश्किल रहा, लेकिन इस देश में इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड बनी हुई है. पिछले महीने नॉर्वे में बिकने वाली नई गाड़ियों में से करीब 94 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कारें थीं. डीजल गाड़ियों की सिर्फ 98 यूनिट्स बिकीं, जबकि पेट्रोल कारों का आंकड़ा केवल 7 पर सिमट गया. यह अब तक का सबसे कम रिकॉर्ड है. कुछ यूरोपीय देशों में टेस्ला की वापसी नॉर्वे में गिरावट के बावजूद टेस्ला को यूरोप के कुछ अन्य देशों में राहत मिली है. स्पेन में कंपनी की बिक्री 70 प्रतिशत बढ़कर 456 यूनिट्स तक पहुंच गई. इटली में 75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 713 कारें बिकीं. स्वीडन में बिक्री 26 प्रतिशत बढ़कर 512 यूनिट्स रही, जबकि डेनमार्क में 3 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ आंकड़ा 458 यूनिट्स तक पहुंचा. इन देशों में आई तेजी का कारण टेस्ला की नई और किफायती स्टैंडर्ड मॉडल्स मानी जा रही हैं. कंपनी ने हाल ही में Model 3 और Model Y के किफायती वेरिएंट को लॉन्च किया है. जो काफी बजट फ्रेंडली है. जानकारों का मानना है कि, कम कीमत और बेहतर रेंज के चलते इन कारों को लोग प्राथमिकता दे रहे हैं. भारत में बिक्री बढ़ाने के लिए खास ऑफर भारतीय बाजार की बात करें तो यहां भी टेस्ला की हालत खराब ही है. बीते साल जुलाई में टेस्ला ने बड़े जोर-शोर के साथ इंडिया एंट्री का ऐलान किया था. कंपनी ने मुंबई के ब्रांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स (BKC) में अपना पहला शोरूम शुरू किया. जिसे बाद में दिल्ली और गुरुग्राम तक बढ़ा दिया गया है. टेस्ला ने भारत में अपनी पहली कार के तौर पर Model Y को लॉन्च किया है, जिसकी कीमत 59.89 लाख रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए 73.89 लाख रुपये तक जाती है. दरअसल, हाई इंपोर्ट ड्यूटी के चलते टेस्ला की कार यहां काफी महंगी पड़ रही है. शुरुआत में ऐसी रिपोर्ट आई थी कि, कुछ ग्राहकों ने टेस्ला मॉडल वाई की बुकिंग कराई थी, लेकिन बाद में उन्होंने कैंसिल करा दी. खैर, टेस्ला भारत में भी बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर रही है. कंपनी टेस्ला मॉडल Y पर खास स्कीम्स दे रही है. इसके तहत पेट्रोल या डीजल गाड़ी के बदले एक्सचेंज कराने पर ग्राहकों को 3 लाख रुपये तक का एक्सचेंज बोनस ऑफर किया जा रहा है.   

40 साल की मौनी रॉय ने बिकिनी में किया इटराकर पोज, पूल के किनारे दिखा ग्लैमरस लुक

मुंबई  टीवी से बॉलीवुड तक का सफर तय करने वालीं मौनी रॉय अपनी दमदार एक्टिंग के साथ बोल्ड लुक से भी फैंस को दीवाना बना देती हैं. मौनी ने अब बिकिनी में अपनी सेंशुअस तस्वीरें शेयर की हैं. 40 साल की मौनी रॉय नई तस्वीरों में सुपर गॉर्जियस लग रही हैं. एक्ट्रेस प्रिंटेड बिकिनी में कहर ढाती नजर आईं. उनके लुक से नजरें हटाना भी मुश्किल है.   बिकिनी संग मौनी ने ब्लैक सनग्लासेस लगाकर अपना लुक कंप्लीट किया है. ओपन हेयर और सटल मेकअप में एक्ट्रेस का सिजलिंग लुक देखते ही बनता है.  मौनी ने बिकिनी में पूल किनारे कई किलर पोज दिए. वो कभी बैठकर पोज देती दिखीं, तो कभी सुकून के पल बिताती नजर आईं. एक्ट्रेस की अदाओं पर फैंस अपना दिल हार बैठे हैं. मौनी ने कुछ सेल्फी फोटोज भी शेयर किए हैं. वो काफी स्टनिंग लग रही हैं. मौनी रॉय की बिकिनी फोटोज इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं. फैंस कमेंट सेक्शन में एक्ट्रेस की तारीफ करते थक नहीं रहे हैं. मौनी को कोई गॉर्जियस बता रहा है, तो कोई सनशाइन. कई लोग फायर और हार्ट इमोजी के साथ उनकी तस्वीरों पर रिएक्ट कर रहे हैं.    मौनी रॉय की बात करें तो उन्हें सबसे पहले पॉपुलर टीवी सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से खास पहचान मिली थी. इसके बाद वो कई शोज में नजर आईं. टीवी पर धमाल मचाने के बाद मौनी ने फिल्मों का रुख किया. मौनी फिल्म ब्रह्मास्त्र, द भूतनी जैसी फिल्मों में दिखाई दे चुकी हैं. 

FASTag से आगे की तकनीक: बिना टोल प्लाजा के कटेगा अब टोल टैक्स

नई दिल्ली देश में हाईवे नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और रोज लाखों वाहन लंबी दूरी तय करते हैं. लेकिन टोल प्लाजा पर रुकना यात्रियों के सफर को स्लो कर देता है. फास्टैग के बाद भी कई जगह कतारें, जाम और समय की बर्बादी आम है. अब इस परेशानी का समाधान नई तकनीक से किया जा रहा है.  देश का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ गुजरात के सूरत में शुरू किया गया है. यहां वाहन बिना रुके निकल जाएंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. इस सिस्टम में हाई रिजोल्यूशन कैमरे, जीपीएस और ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. यानी अब टोल देने का तरीका पूरी तरह डिजिटल और स्मूथ होने जा रहा है. जान लें पूरी खबर. बिना टोल प्लाजा के टोल कलेक्शन नए टोल प्लाजा सिस्टम में टोल प्लाजा पर बैरियर नहीं होगा. सड़क पर लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे हर गुजरने वाले वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे. अगर गाड़ी पर फास्टैग नहीं भी है. तब भी नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान हो जाएगी. सिस्टम इसे टोल उल्लंघन के तौर पर दर्ज करेगा और वाहन मालिक को ई चालान भेजा जाएगा.  हर लेन में रडार और लिडार आधारित कैमरे 360 डिग्री रिकॉर्डिंग करेंगे. पूरा डेटा कंट्रोल रूम और एनएचएआई सर्वर पर रियल टाइम दर्ज होगा. यानी कोई भी वाहन बिना पेमेंट के नहीं निकल सकेगा. यह टेक्नोलॉजी दुबई, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ही इस्तेमाल की जा रही है फास्टैग है लेकिन बैलेंस कम है तो क्या होगा? अगर आपकी गाड़ी में  फास्टैग लगा है लेकिन उसमें बैलेंस कम है या ब्लैकलिस्टेड है. तब भी सिस्टम उसे पहचान लेगा. ऐसे मामलों में वाहन को डिफॉल्टर के रूप में दर्ज किया जाएगा. वाहन मालिक को एसएमएस और ऐप के जरिए अलर्ट मिलेगा. तय समय के भीतर रिचार्ज न करने पर ई चालान जारी होगा.  जानबूझकर टोल चोरी करने की कोशिश करने वालों पर भी यह सिस्टम नजर रखेगा. कैमरे हर एंगल से रिकॉर्डिंग करते हैं. इसलिए बच निकलना मुश्किल होगा. आने वाले समय में यह बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम देश के बाकी हाईवे पर भी लागू किया जा सकता है. इससे सफर तेज और आसान हो जाएगा. 

9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस पर नई श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला का आयोजन

9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का भी होगा विमोचन भोपाल  श्रम विभाग ने 9 फरवरी को 'बंधक श्रम उन्मूलन दिवस' पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है। उद्घाटन सुबह 10 बजे श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। कार्यशाला में राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी होगा। पूरे मध्य प्रदेश में महीनेभर चलेगा अभियान बंधक श्रम (बंधुआ मजदूरी) कराने वालों के विरुद्ध मध्यप्रदेश का श्रम विभाग 9 फरवरी 'बंधक श्रम उन्मूलन दिवस' से विशेष अभियान भी शुरू करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री की पहल पर विभाग ने बाल एवं बंधक श्रम को रोकने और जागरुकता लाने एक विशेष 'वेदा पहल' की शुरुआत की है। कार्यशाला के प्रमुख चार बिंदु पहला: बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षण, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी। दूसरा: बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के क्रियान्वयन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिनियम की उपलब्धियों एवं वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। तीसरा: नई चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। चौथा: राज्य एक्शन प्लान के माध्यम से विभागीय समन्वय, प्रवर्तन व्यवस्था एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी। श्रम विभाग के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य कानून, नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य में बाल एवं बंधुआ श्रम के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।  

उज्जैन में शुरू होगा ‘विक्रमोत्सव’, 12 फरवरी से 139 दिनों तक चलेगा, महानाट्य और विज्ञान का अनोखा मिलन

उज्जैन  उज्जैन में 12 फरवरी से 30 जून तक 139 दिन का विक्रमोत्सव होगा। इसमें कलश यात्रा, नाटक मंचन, वैचारिक समागम, शोध संगोष्ठी, फिल्मों के प्रदर्शन, वेद अंताक्षरी और सूर्योपासना के आयोजन होंगे। प्रदेश के नगरों में विक्रमादित्य महानाट्य मंचन व शिक्षण संस्थाओं में सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता की जाएंगी। 15 फरवरी को प्रदेश में शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ 15 फरवरी को प्रदेश में शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ होगा। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने शुक्रवार को विक्रमोत्सव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इसकी रूपरेखा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के वैज्ञानिक पक्ष को भी प्रचारित किया जाएगा। विज्ञान सम्मत कार्यों के संबंध में विज्ञान महाविद्यालयों, अभियांत्रिकी महाविद्यालयों और पालिटेक्निक को जोड़कर अभिनव कार्यक्रम किए जाएंगे। 15 फरवरी को प्रदेश में महादेव की कलाओं के शिवार्चन, कलश यात्रा, बैंड प्रस्तुति, शिवनाद और विक्रम व्यापार मेले का आयोजन होगा। 16 से 20 फरवरी तक शिव पुराण, 16 से 25 फरवरी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नाट्य प्रस्तुतियां और 26 से 28 फरवरी तक इतिहास समागम, पुतुल समारोह और अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी जैसी गतिविधियां होंगी। कवि गोष्ठियां, शोध संगोष्ठियां, फिल्म प्रदर्शन, गुड़ी पड़वा पर कार्यक्रम वैचारिक समागम, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, विभिन्न भाषाओं और बोलियों में लोकरंजन के तहत कवि गोष्ठियां, शोध संगोष्ठियां, फिल्म प्रदर्शन, गुड़ी पड़वा पर उज्जैन के रामघाट (दत्त अखाड़ा) पर सूर्य उपासना का कार्यक्रम होगा। उज्जयिनी गौरव दिवस अंतर्गत शिप्रा तट पर सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण और विक्रम पंचांग 2082-83 और आर्ष भारत के द्वितीय संस्करण का लोकार्पण होगा। महादेव की नदी कथा-नृत्य नाट्य और पार्श्व गायकों द्वाराT सांगीतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। 15 फरवरी को शुभारंभ, 25 फरवरी तक नाट्य प्रस्तुतियां सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, विक्रमोत्सव का शुभारंभ 15 फरवरी को शिवरात्रि मेलों, भव्य कलश यात्रा और कलाकारों के समूह द्वारा प्रस्तुत 'शिवोहम' संगीतमय प्रस्तुति के उद्घाटन के साथ किया जाएगा. इसके बाद विक्रम थिएटर महोत्सव के अंतर्गत 16 से 25 फरवरी के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित नाट्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जिसमें ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित नाटक होंगे. कठपुतली महोत्सव, बौद्धिक सम्मेलन और फिर कवि सम्मेलन 26 से 28 फरवरी के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन, कठपुतली महोत्सव और अनुसंधान संगोष्ठी का आयोजन प्रस्तावित है. वहीं, सम्राट विक्रमादित्य के युग में न्याय व्यवस्था और शासन प्रणाली पर केंद्रित एक बौद्धिक सम्मेलन 28 फरवरी से 1 मार्च तक आयोजित किया जाएगा. इसके पश्चात 7 मार्च को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें देशभर के प्रसिद्ध कवि भाग लेंगे. पौराणिक फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव विक्रमोत्सव के तहत अन्य प्रमुख कार्यक्रमों में 20 से अधिक देशों की प्रविष्टियों के साथ पौराणिक फिल्मों का एक अंतरराष्ट्रीय महोत्सव, वेद अंताक्षरी तथा गुड़ी पड़वा के अवसर पर रामघाट और दत्त अखाड़ा में सूर्योदय पूजा शामिल हैं. यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक विमर्श का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा. कार्यक्रम के अंतिम दिन, 19 मार्च को, वर्ष प्रतिपदा और सृष्टि आरंभ दिवस के अवसर पर 'उज्जयिनी गौरव दिवस' के रूप में मनाया जाएगा. सरकार के अनुसार, इस दिन शिप्रा नदी के तट पर मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य पुरस्कार का वितरण, विक्रम पंचांग 2082-83 का विमोचन, 'अर्शा भारत' के दूसरे संस्करण का लोकार्पण तथा नृत्य-नाट्य प्रस्तुति 'महादेव की नदी कथा' प्रमुख आकर्षण होंगे. CM मोहन यादव का अधिकारियों को निर्देश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विक्रमोत्सव में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और कृतित्व के सभी आयामों की प्रभावी और व्यापक प्रस्तुति सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक निरंतरता को सशक्त बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक योगदान से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है. सीएम मोहन यादव ने यह भी निर्देश दिए कि विज्ञान महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों को विक्रमोत्सव से जोड़ा जाए, ताकि सम्राट विक्रमादित्य के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कालगणना, खगोल विज्ञान तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को उजागर करने वाले विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें.   

छत्तीसगढ़ में रेल विकास को मिलेगी तेजी, ₹7,470 करोड़ का बजट और ₹51,080 करोड़ की परियोजनाओं पर काम जारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य में रेल अधोसंरचना के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण को निरंतर गति प्रदान करने के उद्देश्य से भारतीय रेल द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए राज्य को ₹7,470 करोड़ का बजट अनुदान प्रदान किया गया है। इस अनुदान के माध्यम से राज्य में रेल संपर्क को मजबूत करने, यात्री सुविधाओं में सुधार, माल परिवहन क्षमता बढ़ाने तथा सुरक्षा मानकों को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न विकासात्मक कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में ₹51,080 करोड़ की लागत की रेल परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं के अंतर्गत नई रेल लाइनों का निर्माण, अतिरिक्त लाइनों का विकास, स्टेशनों का पुनर्विकास, रेल संरक्षा कार्य तथा आधुनिक तकनीक आधारित अवसंरचना का विकास किया जा रहा है, जिससे राज्य के औद्योगिक, सामाजिक एवं आर्थिक विकास को निरंतर बल मिल रहा है। वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित प्रमुख रेल परियोजनाओं में  बिलासपुर–झारसुगुड़ा चौथी लाइन परियोजना शामिल है, जिसकी कुल लंबाई 206 किलोमीटर तथा लागत ₹2,135.34 करोड़ है। इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 175 किलोमीटर से अधिक चौथी रेल लाइन का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जिससे इस व्यस्त रेलखंड पर परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।  बिलासपुर–नागपुर रेल खंड पर बिलासपुर से गोंदिया के बीच विभिन्न खंडों (पैचों) में चौथी रेल लाइन का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।  दल्लीराझरा–रावघाट नई रेल लाइन परियोजना, जिसकी कुल लंबाई 95 किलोमीटर एवं लागत ₹16,275.56 करोड़ है, के अंतर्गत 77.35 किलोमीटर नई रेल लाइन का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। यह परियोजना विशेष रूप से दुर्गम एवं आदिवासी क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य में खरसिया–नया रायपुर–परमालकसा नई रेल लाइन परियोजना भी प्रगति पर है, जिसकी कुल लंबाई 278 किलोमीटर तथा अनुमानित लागत ₹7,854 करोड़ है। यह परियोजना राज्य की राजधानी क्षेत्र सहित औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों को बेहतर रेल संपर्क प्रदान करेगी।  सरदेगा–भालूमाड़ा नई रेल लाइन परियोजना, जिसकी लंबाई 37.24 किलोमीटर एवं लागत ₹1,282 करोड़ है, क्षेत्रीय संपर्क को सुदृढ़ करने के साथ-साथ खनिज परिवहन को अधिक सुगम बनाएगी।  रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन परियोजना, जिसकी कुल लंबाई 140 किलोमीटर तथा लागत ₹3,513 करोड़ है, बस्तर अंचल को रेल नेटवर्क से जोड़ते हुए क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। यात्री सुविधाओं के उन्नयन की दिशा में अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों का आधुनिक सुविधाओं के साथ पुनर्विकास किया जा रहा है।  राज्य में वर्तमान में वंदे भारत एक्सप्रेस की दो जोड़ी सेवाएँ ( बिलासपुर नागपुर बिलासपुर एवं दुर्ग विशाखापट्टनम दुर्ग ) तथा अमृत भारत एक्सप्रेस की एक जोड़ी सेवा ब्रह्मपुर (ओडिशा)-उधना (सूरत गुजरात) के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन संचालित की जा रही हैं, जिससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित एवं आधुनिक रेल यात्रा का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही राज्य में रेल नेटवर्क का निरंतर विस्तार करते हुए पिछले 10-11 वर्षों में नई रेल पटरियों का निर्माण, संपूर्ण रेल विद्युतीकरण तथा 170 फ्लाईओवर एवं अंडरपास का निर्माण किया गया है, जिससे रेल एवं सड़क यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है।  वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कुल 1,083 रेलवे कार्य स्वीकृत हैं, जिनमें से 845 कार्य विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। ये सभी प्रयास छत्तीसगढ़ को एक आधुनिक, सुरक्षित एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित रेल नेटवर्क प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

अग्नि-3 मिसाइल की शक्तिशाली दहाड़, पूरी बंगाल की खाड़ी में हलचल, चीन-पाक के पास नहीं है कोई सशक्त प्रतिद्वंदी

भुवनेश्वर  भारत ने  सुबह ओडिशा के तट से एक ऐसा धमाका किया है, जिसकी गूंज ने सीमा पार बैठे दुश्मनों के बंकरों को हिला कर रख दिया है. भारत ने अपनी घातक इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) ‘अग्नि-3’ का सफल परीक्षण किया. इसकी सफलता ने चीन और पाकिस्तान को सीधा मैसेज भेजा है कि अगर आंख दिखाई, तो घर में घुसकर मारेंगे. इस मिसाइल को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से जब स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड ने दागा. रक्षा सूत्रों ने बताया कि लॉन्च के दौरान सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल पैरामीटर्स 100% सटीक पाए गए. DRDO द्वारा तैयार किया गया यह ‘ब्रह्मास्त्र’ अब पूरी तरह से अपने शिकार को तबाह करने के लिए तैयार है. बीजिंग और रावलपिंडी की ‘डेथ रेंज’ में एंट्री- इस परीक्षण ने पड़ोसी मुल्कों में खलबली मचा दी है. यह मिसाइल सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है, बल्कि इसकी रेंज इतनी भयानक है कि पाकिस्तान का कोना-कोना इसकी जद में है. वहीं, अपनी विस्तारवादी सोच रखने वाला चीन भी अब सुरक्षित नहीं है. अग्नि-3 की मारक क्षमता चीन के बीजिंग और शंघाई जैसे प्रमुख शहरों तक तबाही मचाने का दम रखती है. मध्यम दूरी की मिसाइल स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड ने ओडिशा के चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सफलतापूर्वक टेस्ट फायर किया. रक्षा सूत्रों की ओर से बताया गया कि लॉन्च में सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल पैरामीटर्स सही पाए गए. बताते चलें कि भारत की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM – Intermediate Range Ballistic Missile) है. इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है. अग्नि रेंज की मिसाइलों का लगातार परीक्षण हाल के दिनों में अग्नि सीरीज़ की दूसरी मिसाइलों का परीक्षण किया गया है. इसमें इसके अपग्रेडेड वेरिएंट भी शामिल हैं, का टेस्ट-फायर किया गया है. बता दें कि इन सब परीक्षण के बावजूद अग्नि-3 भारत की रक्षा ताकत में एक स्ट्रेटेजिक महत्व रखती है. यह मिसाइल दो-स्टेज वाला सिस्टम है जो सॉलिड फ्यूल से चलता है. पहला स्टेज जलने के बाद, दूसरा स्टेज जलता है ताकि मिसाइल अपने रास्ते पर आगे टारगेट की ओर बढ़े, जिससे स्टेबिलिटी और एक्यूरेसी पक्की होती है. अग्नि-3 का रेंज कितनी है अग्नि-3 दो-चरण की ठोस ईंधन वाली मिसाइल है. इसमें 1.5 टन तक का परमाणु या पारंपरिक वॉरहेड ले जाने की क्षमता है. साथ ही बताया गया कि इसकी अधिकतम रेंज 3,500 किलोमीटर होती है. हालांकि, अभी तक इसकी 3,000 से 3,200 किलोमीटर तक की रेंज में सफल परीक्षण हुआ है. इसकी विशेषताओं के बारे में बात करें तो-     लंबाई: इसकी लंबाई लगभग 17 मीटर तक है.     वजन: अग्नि-3 का वजन लगभग 48-50 टन है.     गति: यह मैक 7-8 यानी कि ध्वनि की गति से 7 से 8 गुना उड़ान भरने की क्षमता रखती है.     लक्ष्य सटीकता:  इसकी Circular Error Probable 40 मीटर से कम बताया जाता रहा है. पड़ोसी देश के कई शहर जद में मिसाइल पाकिस्तान के अधिकांश हिस्सों और चीन के कई महत्वपूर्ण शहरों जैसे बीजिंग तक नहीं, लेकिन शंघाई, चोंगकिंग आदि तक को कवर कर सकती है. वहीं, इसके जद में पाकिस्तान के अधिकांश शहर हैं. बताते चलें कि अग्नि-3 को 2006 के बाद कई बार सफलतापूर्वक परीक्षिण किया गया है. हालांकि, यह अग्नि-4 और अग्नि-5 की तुलना में छोटी लेकिन बहुत प्रभावी मिसाइल है.