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रूस-अमेरिका टकराव: पुतिन का जुकरबर्ग को सबक, चीन पर भी नजर

मॉस्को  मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने आरोप लगाया है कि रूस ने देश में उसकी सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक करने की कोशिश की है, ताकि यूजर्स को स्‍टेट सपोर्टेड डोमेस्टिक ऐप की ओर मोड़ा जा सके. Meta Platforms के स्वामित्व वाले इस ऐप के प्रवक्ता ने बताया कि रूस का यह कदम इंटरनेट स्पेस पर नियंत्रण बढ़ाने और विदेशी टेक कंपनियों की भूमिका सीमित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. तो क्‍या रूस भी चीन की राह पर चलने की तैयारी कर रहा है. दिलचस्‍प है कि चीन ने मैसेजिंग एप से लेकर सोशल साइट्स तक खुद की डेवलप की है. बीजिंग का उद्देश्‍य है कि इसके जरिये देश में पश्चिमी देशों के प्रभाव को रोका जा सकेगा और अमेरिका-यूरोप के टेक्‍नोलॉजी मोनोपोली पर लगाम लगाया जाएगा. अब रूस के कदम ने एक तरफ जहां मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग को उनकी औकात दिखा दी तो दूसरी तरफ अमेरिकी दादागिरी को भी ठोस चुनौती दी है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद मॉस्को और वेस्‍टर्न टेक्‍नोलॉजिकल कंपनियों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है. रूसी अधिकारी घरेलू स्तर पर विकसित ऐप ‘MAX’ को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसे सरकार समर्थित बताया जा रहा है. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस ऐप का इस्तेमाल यूजर्स की निगरानी और डेटा ट्रैकिंग के लिए किया जा सकता है, लेकिन सरकारी मीडिया ने इन आरोपों को निराधार करार दिया है. WhatsApp ने कहा कि रूस द्वारा उठाए गए कदम यूजर्स को एक सरकारी-स्वामित्व वाले सर्विलांस ऐप की ओर धकेलने की कोशिश है. कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘हम उपयोगकर्ताओं को जुड़े रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे.’ हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूस में सेवा बहाली को लेकर आगे की रणनीति क्या होगी. WhatsApp पर सख्‍ती इस बीच, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए वीडियो बयान में कहा कि WhatsApp की वापसी रूसी कानूनों के पालन पर निर्भर करेगी. उन्होंने कहा, ‘अगर Meta कॉरपोरेशन कानून का पालन करती है और रूसी अधिकारियों के साथ संवाद करती है, तो समझौते की संभावना बन सकती है. लेकिन यदि कंपनी अडिग रुख अपनाती है और कानून के अनुरूप ढलने के लिए तैयार नहीं होती, तो कोई संभावना नहीं है.’ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के संचार नियामक रोसकोमनादज़ोर ने WhatsApp को अपने ऑनलाइन डायरेक्टरी से हटा दिया है. बताया जाता है कि रूस में इस ऐप के करीब 10 करोड़ यूजर्स हैं, जो इसे देश के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक बनाता है. इस कदम को रूस की डिजिटल नीति में एक और सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है. Apple पर भी गाज रूस ने पिछले साल WhatsApp और टेलीग्राम जैसी विदेशी मैसेजिंग सेवाओं पर कुछ कॉल सुविधाओं को सीमित करना शुरू कर दिया था. अधिकारियों का आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी और आतंकवाद से जुड़े मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करने से इनकार करते हैं. इसके अलावा दिसंबर में Apple के वीडियो-कॉलिंग ऐप FaceTime को भी ब्लॉक कर दिया गया था. टेलीग्राम के रूसी मूल के संस्थापक पावेल ड्यूरोव पहले ही कह चुके हैं कि उनकी कंपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और यूजर्स की गोपनीयता की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहेगी. वहीं, मानवाधिकार संगठनों और डिजिटल राइट ग्रुप्‍स का कहना है कि रूस द्वारा घरेलू प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देना और विदेशी सेवाओं को सीमित करना इंटरनेट स्वतंत्रता पर गंभीर असर डाल सकता है. डिजिटल संप्रभुता विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल तकनीकी कंपनियों और सरकारों के बीच नियामक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल संप्रभुता, डेटा नियंत्रण और नागरिकों की ऑनलाइन स्वतंत्रता जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है. WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म के संभावित पूर्ण प्रतिबंध से रूस में लाखों यूजर्स की रोजमर्रा की संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. संकेत साफ है कि रूस और वेस्‍टर्न टेक कंपनियों के बीच टकराव आने वाले समय में और गहरा सकता है, जिसका असर वैश्विक डिजिटल इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है.

सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के भत्तों में बदलाव, राज्य सरकार ने नई दरें तय की

भोपाल मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को लेकर एक बडी खबर आई है। जो प्रदेश के लाखो कर्मचारियो के लिए अहम हो सकता है। दरअसल निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों के भत्तों पर बड़ा फैसला आया है। यह फैसला यात्रा भत्ता की नई दरों को लेकर है। दरअसल मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम MPLUN ने यात्रा भत्ता की नई दरें लागू करने का निर्णय लिया है। निगम यात्रा भत्तों की नई दरों को किया गया लागू निगम की संचालक मंडल बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया है। दरअसल लघु उद्योग निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए संचालक मंडल की बैठक बड़ा कुछ लेकर आई है। बैठक में यात्रा भत्तों के संबंध में बहुत अहम निर्णय लिया गया है । संचालक मंडल ने निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों के यात्रा भत्तों की नई दरें लागू करने का निर्णय लिया। इसमें खास बात यह है कि अब कर्मचारियों और अधिकारियों को मध्यप्रदेश शासन के समान ही यात्रा भत्ता देय होगा। आपको बता दें कि  लघु उद्योग निगम के संचालक मंडल की यह 294 वीं बैठक थी। बैठक में एमएसएमई प्रमुख सचिव और निगम प्रबंध संचालक दिलीप कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद थे।इस दौरान आडिट रिपोर्ट की समीक्षा भी गई। वहीं संचालक मंडल की बैठक में ये भी फैसला लिया है कि निगम आय बढ़ाने के लिए आगामी वित्त वर्ष में बड़ी मात्रा में कार्य आदेश जारी करेगा। लिहाजा निगम कर्मचारियों के लिए यात्रा भत्ता की नई दरें लागू होने का फैसला काफी बड़ा है। ‍मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम MPLUN के संचालक मंडल की बैठक राज्य के एमएसएमई मंत्री व निगम के अध्यक्ष चैतन्य कुमार काश्यप की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर जहां चर्चा हुई वहीं विचार विमर्श भी किया गया।

भोपाल में ईरानी डेरा पर छापा, पुलिस ने अपराधियों को धर-दबोचा, 1 करोड़ का गोल्ड जब्त

भोपाल   कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भोपाल पुलिस ने ईरानी डेरे पर बड़ा प्रहार किया है। मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात पुलिस की बड़ी टीम ने ईरानी डेरे पर प्रहार किया है। इस दौरान सैकड़ों पेंडिंग वारंट तामील करवाए गए हैं। साथ ही दर्जनों संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया है। भोपाल पुलिस ने पूरे ऑपरेशन को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया है। ईरानी डेरा अमन कॉलोनी के पास है। अलग-अलग राज्यों के अपराधी छुपे यहां भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के अनुसार यहां अलग-अलग जिलों और राज्यों के अपराधी छिपे हुए थे। ये उन जगहों के वांटेड क्रिमिनल थे। पुलिस ने इस ऑपरेशन के लिए डीसीपी जोन-4 मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में एक टीम बनाई थी। इसके बाद बेहद गोपनीय तरीके से पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है। 400 जवान हुए शामिल वहीं, स्पेशल टीम में 9 असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर, 16 इंस्पेक्टर और 400 पुलिस बल के जवान थे। निशातपुरा थाना क्षेत्र के अमन कॉलोनी की घेराबंदी की गई। इसे ही ईरानी डेरा भी कहा जाता है। घेराबंदी के बाद कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान कुछ स्थानीय लोग और महिलाओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। लेकिन पुलिस टीम ने सख्ती बरती और उन्हें रोक दिया गया। साथ ही कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। यूपी का मोस्टवांटेड शहादत भी गिरफ्तार इस कार्रवाई के दौरान भोपाल पुलिस ने 31 आदमी और 8 औरतों को गिरफ्तार किया है। इसमें शहादत भी शामिल है जो यूपी पुलिस का वांटेड क्रिमिनिल है। साथ ही उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपए से ज्यादा का इनाम है। गिरफ्तार आरोपियों कई लोग भोपाल ही नहीं, दूसरे राज्यों में भी वॉन्टेड थे। इनके पास से पुलिस ने चोरी के 17 टू-व्हीलर, 644 ग्राम सोना, 240 ग्राम चांदी, 39 मोबाइल फोन, 1.34 लाख रुपए कैश और 1.7 केजी गांजा बरामद किया है। गौरतलब है कि भोपाल पुलिस ने वारंटियों को गिरफ्तार करने के लिए पूरे शहर में अभियान चलाया था। पुलिस ने 238 परमानेंट वारंट, 125 अरेस्ट वारंट और 121 बेलेबल वारंट तामील करवाए हैं। इसके अलावे 21 दूसरे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें फरार, गाड़ी चोर और जिले के बाहर के क्रिमिनल शामिल हैं। साथ ही गंभीर क्राइम के पेंडिंग केस में आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है।

NIA की जांच में बड़ा खुलासा: रांची में पल रहे ISIS के संभावित सदस्य

रांची  भारत में कट्टरपंथ के जरिए आईएसआईएस आतंकी संगठन की विचाराधार फैलाने से जुड़े केस में एनआईए को महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। रांची एनआईए ने आईएसआईएस मॉडयूल से जुड़े केस की जांच में पाया है कि मध्यप्रदेश का रतलाम निवासी राहुल सेन उर्फ उमर बहादुर ने धर्म परिवर्तन के बाद सनातन समेत कई नामों से भी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाई थी। इसका एडमिन वह खुद था। इस प्रोफाइल्स पर आईएसआईएस का प्रोपगेंडा वीडियो डालकर भ्रम फैलाता था। ISIS के वीडियो से युवाओं को बनाना था कट्टरपंथी एनआईए को मिले तथ्यों के अनुसार, राहुल उर्फ उमर आईएसआईएस के वीडियो को एडिट कर अपलोड करता था। उसका उद्देश्य इन वीडियो के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर भारत के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना था। एनआईए को राहुल के मोबाइल फोन से कई चैट मिले हैं। जिसमें वह युवाओं को आईएसआईएस से जुड़ने की सलाह दे रहा है। एनआईए ने पाया है कि राहुल ने महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, यूपी, पंजाब और बिहार में नेटवर्क बनाए थे। 14 सितंबर 2023 से उमर राहुल उर्फ उमर जेल में है। सिरिया के अबू उमर से जुड़ा था उमर उर्फ राहुल एनआईए ने जांच में पाया है कि राहुल सेन उर्फ उमर सिरिया के आईएस आतंकी अबू उमर से जुड़ा हुआ था। दोनों इंस्टाग्राम में एक-दूसरे से मुसाफिर नाम की आईडी से जुड़े थे। पूछताछ में उमर ने खुलासा किया है कि उसकी इच्छा सिरिया जाकर आईएस से जुड़ने की थी। इससे पूर्व राहुल सेन के सहयोगी फैजान अंसारी के पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में होने की पुष्टि एनआईए की जांच में हुई थी। राहुल ने सनातनी, मुसाफिर, राहुल ओ, राहुल सेन नाम से इंस्टाग्राम, जबकि उमर बहादुर, खालिद, दाईसी, ओसाम बिन लादेन, बकिया, दवाला जैसे नामों से टेलीग्राम चैनल बनाए थे। सनातनी आरएस नाम के एक चैनल पर उसने हथियार व मैगजीन बेल्ट के साथ तस्वीर भी लगाई थी। जन्नत, जिहाद और पैसा- कट्टरपंथियों की कहानी राहुल सेन उर्फ उमर लोहरदगा निवासी फैजान अंसारी से जुड़े नेटवर्क में अहम कड़ी था। जिन युवाओं को कट्टरपंथी संगठन से जोड़ने की कोशिश हुई थी, उसमें से 38 की गवाही एनआईए ने ली है। एनआईए ने जांच में पाया है कि आईएसआईएस संगठन सीधी लड़ाई के बजाय प्रोपगेंडा के प्रसार में जुटा है। इसके लिए ऑडियो, वीडियो, पीडीएफ माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तल्हा जरनैल नाम के डिजिटल मार्केटिंग कर्मी ने एनआईए को बताया है कि फैजान अंसारी ने उसे आईआईएस से जुड़ने को कहा था, इसके लिए उसे जन्नत मिलने की बात कही थी। फैजान ने तल्हा को राहुल सेन के द्वारा धर्मांतरण करने और जेहाद में शामिल होने का उदाहरण भी दिया था। बम बनाकर पैसे कमाने की बात भी फैजान ने कही थी।

पंजाब में सख्त एक्शन, ‘प्रहार 2.0’ के तहत हजारों संदिग्धों पर शिकंजा

चंडीगढ़   पंजाब में अपराध और नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब पुलिस ने 'ऑपरेशन प्रहार 2.0' के तहत राज्यभर में एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस ऑपरेशन के तहत अब तक 1,600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के मुताबिक, यह अभियान पूरी तरह इंटेलिजेंस इनपुट पर आधारित है और इसे सभी जिलों में एक साथ, वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में अंजाम दिया जा रहा है। करीब 12 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को मैदान में उतारा गया है, जिन्होंने अलग-अलग इलाकों में एक साथ दबिश दी। जानकारी के अनुसार, अब तक 2,706 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की गई है, जिनका संबंध वांछित अपराधियों, गैंगस्टरों या ड्रग नेटवर्क से बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि इस अभियान का मकसद सिर्फ गिरफ्तारी करना नहीं, बल्कि अपराध की जड़ों तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क को तोड़ना है। खासतौर पर गैंगस्टर गतिविधियों और नशे के कारोबार पर सख्त नजर रखी जा रही है। ‘गैंगस्टरों पर वार’ थीम के तहत चल रहे इस अभियान को लेकर पुलिस का दावा है कि इससे अपराधियों में हड़कंप मचा है और कई सक्रिय गिरोहों की गतिविधियां ठप हुई हैं। अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की जा रही है और आम, शांतिप्रिय नागरिकों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। पुलिस ने जनता से सहयोग की अपील भी की है। अगर किसी को गैंगस्टर या आपराधिक गतिविधि से जुड़ी कोई जानकारी मिलती है, तो वह एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन 93946-93946 पर गुमनाम तरीके से सूचना दे सकता है। पंजाब पुलिस का कहना है कि राज्य को ड्रग-फ्री और क्राइम-फ्री बनाना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए इस तरह के सख्त और सुनियोजित अभियान आगे भी जारी रहेंगे। फिलहाल ऑपरेशन प्रहार 2.0 जारी है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

जैश ने किया हमला, पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ा

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मंच संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हुआ है. यूएन की सुरक्षा परिषद की नवीनतम रिपोर्ट में बीते साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाहर हुए आतंकवादी विस्फोट के तार सीधे तौर पर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं. रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति की रिपोर्ट में जैश को कई हालिया आतंकी हमलों से लिंक किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार जैश प्रमुख मसूद अजहर ने आठ अक्टूबर को महिलाओं की विशेष शाखा ‘जमात-उल-मोमिनात’ बनाने की घोषणा की थी. इस शाखा का मुख्य उद्देश्य आतंकी गतिविधियों में सहयोग और समर्थन प्रदान करना बताया गया है. रिपोर्ट में एक सदस्य देश ने पुष्टि की कि जैश ने कई हमलों की जिम्मेदारी खुद ली है, जिसमें लाल किले के पास का विस्फोट भी शामिल है. दूसरी ओर, एक अन्य सदस्य देश ने जैश को निष्क्रिय बताया, जिसे विशेषज्ञ पाकिस्तान की ओर से दिए गए संकेत के रूप में देख रहे हैं. यह विरोधाभासी बयान सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के दोहरे रवैये को उजागर करता है. रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि 28 जुलाई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में शामिल तीन संदिग्ध आतंकी मारे गए थे. पहलगाम हमले की जिम्मेदारी हालांकि अप्रैल में पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, लेकिन जैश के लिंक को अलग से हाइलाइट किया गया है. पहलगाम हमले के बाद भारत ने निर्णायक कार्रवाई की थी. मई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचे पर सटीक हमले किए, जिसके परिणामस्वरूप चार दिनों तक सीमा पर तीव्र संघर्ष हुआ. इन कार्रवाइयों से जैस और लश्कर के कई ठिकाने नष्ट हुए और कई हाईप्रोफाइल आतंकी मारे गए. भारत ने इन हमलों को आत्मरक्षा में जरूरी बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की मांग की. रिपोर्ट में जैश और लश्कर को 1990 के दशक से अल-कायदा से संबंधों के कारण संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति के तहत प्रतिबंधित रखा गया है. दोनों संगठनों पर हथियार प्रतिबंध, यात्रा प्रतिबंध और वित्तीय प्रतिबंध लागू हैं. मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किया जा चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा परिषद की यह रिपोर्ट पाकिस्तान के अच्छे आतंकवादी-बुरे आतंकवादी वाली नीति को एक बार फिर उजागर करती है. जैस की महिलाओं की नई शाखा बनाने की घोषणा से साफ है कि संगठन अपनी गतिविधियां बढ़ाने और नई भर्ती के लिए प्रयासरत है. लाल किले के पास का हमला दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला था, जिसने राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया.

निक-प्रियंका की शादी पर उठे सवाल, एक्ट्रेस ने तोड़ी चुप्पी

मुंबई  ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपनी इंडियन सिनेमा में कमबैक फिल्म 'वाराणसी' को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं. उनके इंडियन फैन्स उन्हें फिर से बड़े पर्दे पर इंडियन अवतार में देखने के लिए उत्सुक हैं. हाल ही में प्रियंका ने एक इंटरव्यू में अपनी अपकमिंग फिल्म से लेकर पर्सनल लाइफ से जुड़ी कुछ बातें साझा की हैं. निक से शादी के वक्त उठे सवाल? प्रियंका चोपड़ा ने वैराइटी इंडिया से अपनी चर्चित शादी को लेकर बात की है. उन्होंने बताया कि कैसे हॉलीवुड के फेमस सिंगर-एक्टर निक जोनस संग शादी को लेकर कई लोगों को आपत्ति थी. एक्ट्रेस ने साथ ही साथ अपनी शादी टूटने की बातों पर भी रिएक्ट किया. प्रियंका ने कहा, 'हमारी शादी को अब 8 साल हो गए हैं. अगर लोग अभी भी इंतजार कर रहे हैं कि ये रिश्ता कब टूटेगा या बर्बाद होगा, तो वो उनकी मर्जी.' 'मैंने तो अब इसके बारे में सोचना ही छोड़ दिया है. पता नहीं हमने ऐसा क्या किया जो लोगों को हमारा रिश्ता इतना खटकता था. शायद इसलिए क्योंकि हम अलग-अलग देशों से हैं, अलग-अलग धर्म के हैं, और उम्र में भी फर्क है. ये सब सुनकर बहुत दुख होता था.' प्रियंका बताती हैं कि उन्हें अब अपने रिश्ते को लेकर होने वाली चर्चाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता. वो और निक अब एक-दूसरे में खोए रहते हैं, बाहरी दुनिया से खुद को अलग कर चुके हैं.  पति निक की तारीफ में क्या बोलीं प्रियंका? प्रियंका ने आगे अपने पति निक जोनस के बारे में भी बात की और उनकी तारीफ में भी कुछ बातें कहीं. उन्होंने कहा, 'हमारी शादी बहुत जल्दी हो गई थी, मिलने के सिर्फ छह महीने में. जब मैंने निक से शादी की, तो मुझे भी लग रहा था कि ये सच में हो रहा है या नहीं. उनका ये वाला हिस्सा… मतलब मुझे लगा कि ये सब नकली है, ये दिखावा है, ये पागलपन है. लेकिन निक में सच्चाई है, पूरी ईमानदारी है. ये बात मुझे हर रोज इंस्पायर करती है.' 'मेरे प्रोफेशन में तो हर बार कुछ ना कुछ बनना पड़ता है, रोल बदलना पड़ता है, जो दिखाना हो वो दिखाना पड़ता है. लेकिन निक दिन भर जो भी बात करते हैं, जिससे भी बात करते हैं, वो हमेशा बिल्कुल सच्चे रहते हैं. वो बहुत छोटी उम्र से काम करने लगे थे. उनके मम्मी-पापा बहुत अच्छे, समझदार और सच्चे इंसान हैं, संत जैसे. तो मुझे पता चल गया कि ये गुण कहां से आए. ये उनकी ऐसी खूबी है जो सबको हैरान कर देती है, कोई बचाव नहीं कर पाता.'  प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस की शादी साल 2018 में हुई थी. दोनों के बीच लगभग 10 साल का अंतर है, जिसपर कई लोगों ने सवाल खड़े किए थे. मगर कपल ने हमेशा उन सभी सवालों का अपनी दमदार केमिस्ट्री से मुंह तोड़ जवाब दिया. अब दोनों एक बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनस के पेरेंट्स भी हैं, जिनका जन्म साल 2022 में हुआ था.

वन मेले हर दौर की जरूरत, वनौषधियों से असंभव बीमारी का भी इलाज संभव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय समुदाय की समृद्धि का आधार बन रहे हैं वन मेले : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन मेले हर दौर की जरूरत, वनौषधियों से असंभव बीमारी का भी इलाज संभव "समृद्ध वन-खुशहाल जन की थीम पर उज्जैन में पहली बार लगा ‘ महाकाल वन मेला’ महाकाल स्मृति उपहार किट और महाकाल वन प्रसादम् का किया शुभारंभ  वनौषधियों के जानकार वनरक्षक  जगदीश प्रसाद अहिरवार प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित मुख्यमंत्री ने वन मेले का किया शुभारंभ, 16 फरवरी तक चलेगा वन मेला उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन हमारी वसुंधरा का वैभव हैं, धरती की धरोहर और धरा का अलंकरण हैं। वन हमारी राष्ट्रीय पूंजी हैं। इनका संरक्षण एवं संवर्धन करना हम सबकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन मेले प्रदेश की समृद्ध जैविक और वानस्पतिक विविधताओं को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम हैं। इनके जरिए हमारे जनजातीय भाई-बहनों को अपने वनोत्पाद और काष्ठ शिल्प विक्रय करने का सुनहरा मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि ‘ महाकाल वन मेले’ की आज से शुरूआत हो गई है। ये मेला शीघ्र ही अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। मेले में प्रदर्शित जड़ी-बूटियां तथा विभिन्न प्रकार के शुद्ध एवं सुरक्षित अकाष्ठीय लघु वनोत्पाद आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों से रोगोपचार में बेहद उपयोगी होते हैं। वनौषधियां हर रोग के इलाज में कारगर साबित हो रही हैं। इनसे असंभव रोग का इलाज भी संभव हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय बजट-2026 में एम्स की तर्ज पर देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोलने की घोषणा की गई है। इनमें से एक अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान भगवान धनवंतरी की कर्मभूमि और सिंहस्थ भूमि उज्जैन में स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को धार्मिक नगरी उज्जैन में पहली बार आयोजित ‘ महाकाल वन मेला-2026’ का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इस वन मेले में नागरिकों को प्राकृतिक रंग-गुलाल मिलेंगे। इसमें नाड़ी वैद्य और आयुर्वेदिक चिकित्सक भी अपनी सेवाएं देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन मेले में प्रदर्शित काष्ठ और बांस से निर्मित एथनिक क्रॉफ्ट आइटम्स न केवल पारम्परिक शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, बल्कि सबके घरों की शोभा भी बढ़ाते हैं। उन्होंने उज्जैन के नागरिकों से अपील की कि वे इस वन मेले का भरपूर लाभ उठाएं और प्रदेश की वन संपदा तथा जनजातीय उत्पादों का उपयोग कर सबको प्रोत्साहित भी करें। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ‘महाकाल वन मेले’ के जरिए स्थानीय वन उत्पादों और शिल्पकारों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। पर्यावरण जागरूकता, आयुर्वेदिक उत्पादों के प्रचार-प्रसार और आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक सार्थक कदम है। उज्जैन के दशहरा मैदान में यह वन मेला 16 फरवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार तेजी से प्रदेश में मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों की संख्या में वृद्धि कर रही है। पिछले साल हमने विभिन्न जिलों में 8 नए आयुर्वेदिक कॉलेज शुरू किए हैं। इस साल हम और भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विंध्य हर्बल के प्राकृतिक रंग-गुलाल, महाकाल स्मृति उपहार किट एवं 'महाकाल वन प्रसादम्' का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना जिले के वन औषधियों से उपचार पद्धति के विशेष जानकार वनरक्षक  जगदीश प्रसाद अहिरवार को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। प्रधानमंत्री  मोदी ने 25 जनवरी को 'मन की बात' में वनरक्षक  अहिरवार द्वारा वनौषधियों के देशज ज्ञान के संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की थी।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश के जनजातीय और वनांचल को समृद्धि देने के लिए भोपाल और उज्जैन जैसे वन मेले प्रदेश भर में लगाए जाने की आवश्यकता है। उज्जैन में महाशिवरात्रि और विक्रमोत्सव के अवसर पर आयोजित वन मेला प्रदेशवासियों के लिए अद्भुत है। वन विभाग ने प्राकृतिक रूप से महाकाल वन प्रसादम् तैयार किया है। इसमें काष्ठ से बने गमले में एक पौधा लगाया गया है। यह गमला महाकाल को भेंट स्वरूप दिया जाएगा। वापस मिलने पर इसे किसी भी जगह पर सीधे रोपित कर दिया जाएगा। काष्ठ गलकर खाद बन जाएगा और पौधा बिना गमला निकालते ही निर्बाध रूप से पल्लवित होता रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के  महाकाल वन मेले में महुआ के लड्डू, अन्नों से बनी मिष्ठान्न सहित अनेक वनोपज उत्पाद भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन के वन मेले में आए वैद्य और चिकित्सक अनेक असाध्य रोगों के उपचार के लिए नागरिकों को नि:शुल्क सेवाएं देंगे। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में जनजातीय समुदायों की आय बढ़ाने के लिए वन विभाग लगातार काम कर रहा है। उज्जैन की धरती पर आयोजित यह वन मेला निश्चित रूप से भोपाल वन मेले की तरह सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। यहां विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक औषधियां एवं बांस से बने उत्पाद उपलब्ध हैं। नागरिक इसका भरपूर लाभ उठाएं। अपर मुख्य सचिव वन एवं सहकारिता  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के शहर-शहर में वन मेला लगाने की शुरुआत की है। भोपाल के बाहर यह पहला वन मेला उज्जैन में लगाया गया है। वन मेलों के दो उद्देश्य होते हैं। इनसे जनजातीय समुदायों को तो आमदनी होती ही है, शहरी लोगों को प्राकृतिक उत्पाद खरीदने और नेचर के साथ चलने-संवरने का अवसर भी मिल जाता है। उन्होंने बताया कि म.प्र. लघु वनोपज संघ के जरिए प्रदेश के 30 लाख जनजातीय संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। भोपाल में डेढ़ माह पहले हुए वन मेले में 3 करोड़ रुपए से अधिक की बिक्री हुई थी।  महाकाल वन मेला में प्रदेशभर के विभिन्न उत्पादों के 250 स्टॉल लगाए गए हैं। इसके अलावा यहां 150 से अधिक वैद्य एवं आयुर्वेदिक चिकित्सक लोगों को परामर्श प्रदान करेंगे। वन मेले के शुभारंभ अवसर पर विधायक  अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक  सतीश मालवीय, विधायक  जितेंद्र पंड्या, जिला पंचायत अध्यक्ष उज्जैन मती कमला कुंवर सहित डॉ. प्रभुराम जाटवा,  उमेश सेंगर,  राजेश पांचाल,  बहादुर सिंह,  ओम जैन, वन बल प्रमुख  वीएन अंबाड़े, प्रबंध संचालक, मप्र लघु वनोपज संघ डॉ. समिता राजौरा, सीएफ उज्जैन  आलोक पाठक, अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी सहित बड़ी संख्या में … Read more

हड़ताल का असर: कई जगह कर्मचारी सिर्फ सांकेतिक विरोध में शामिल, स्कूल और बाजार सामान्य

भोपाल  केंद्र सरकार की ' नो वर्क नो पे' (No Work No Pay) सहित अन्य जनविरोधी और कॉर्पोरेट परस्त आर्थिक नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी गुरुवार को देशव्यापी आम हड़ताल का बिगुल फूंका गया है। ग्वालियर में भी इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को छोड़कर सभी राष्ट्रीयकृत बैंक इस हड़ताल में शामिल होने जा रहे हैं। नए लेबर लॉ समेत कई मुद्दों के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संगठन आज हड़ताल कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में इसका मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है।जबलपुर और इटारसी में डिफेंस फैक्टरियों के सामने कर्मचारियों ने प्रदर्शन ​​किया। इटारसी में एक घंटा विरोध करने के बाद कर्मचारी काम पर लौट गए। हालांकि, इन जगह स्कूल, कॉलेज और बाजार खुले हुए हैं। हड़ताल में ट्रेड यूनियन के संयुक्त मोर्चा- आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा, बैंक, बीमा, केंद्रीय कर्मचारी, बीएसएनएल के संगठन शामिल हैं।मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया, हड़ताल में सरकारी के साथ प्राइवेट बैंक भी शामिल होंगे। भारतीय स्टेट बैंक यूनियन ने हड़ताल का समर्थन किया है, लेकिन वह सीधे तौर पर हड़ताल में शामिल नहीं रहेगा। हड़ताल का असर बीमा सेक्टर पर भी पड़ेगा। भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल रहेंगे। वहीं, बीएसएनएल-डाक विभाग में भी हड़ताल का असर दिखाई देगा। बीओआइएसयूइयू के एजीएस सौरभ सिकरवार ने बताया कि ग्वालियर में राष्ट्रीयकृत 11 बैंकों की 70 शाखाओं के 900 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी इस हड़ताल में 'नो वर्क-नो पे' के आधार पर शामिल होंगे। हड़ताल के चलते कल सुबह 9 से 11 बजे तक फूलबाग स्थित बैंक ऑफ इंडिया के सामने जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान बैंक, बीमा, बीएसएनएल, डाक, आयकर और आंगनबाड़ी जैसे विभागों में भी काम पूरी तरह ठप रहेगा।  हड़ताल में ये भी शामिल ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मोर्चा मध्य प्रदेश के प्रवक्ता वीके शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ देशभर के दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों एवं सौ से अधिक स्वतंत्र ट्रेड यूनियंस के आह्वान पर देशभर के 25 अधिकारी- इस राष्ट्रव्यापी आम हड़‌ताल में भाग लेंगे। इस हड़ताल में बैंक, बीमा, केंद्र, बीएसएनएल, पोस्टल, आयकर, आंगनबाड़ी, आशाकर्मी, मध्यान्ह भोजन कर्मी, खेतिहर मजदूर, किसान संघ, पेंशनर्स, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, हम्माल मजदूर सभा आदि से संबंधित यूनियंस के साथ-साथ इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआइयूटीयूसी, सेवा समेत दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों एवं अन्य संस्थानों में कार्यरत ट्रेड यूनियंस के सदस्य भाग ले रहे हैं। संगठनों की प्रमुख मांगें     चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और उनसे जुड़े नियमों को रद्द करने की मांग।     ड्राफ्ट सीड बिल को वापस लेने की मांग।     बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करने की मांग।     SHANTI Act (न्यूक्लियर एनर्जी से संबंधित कानून) को वापस लेने की मांग।     मनरेगा की बहाली की मांग।     विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को रद्द करने की मांग।

परिवार में मचा हड़कंप: 10 महीने बाद फिर भागी सास, इस बार जीजा के साथ

 अलीगढ़  अलीगढ़ की वह सास, जो पिछले साल अपने होने वाले दामाद के साथ भाग गई थी, एक बार फिर चर्चा में है. करीब दस महीने तक दामाद राहुल के साथ बिहार में पति-पत्नी की तरह रहने के बाद अब उसने उसे भी अलविदा कह दिया है. इस बार वह अपने जीजा के साथ भाग गई और जाते-जाते दो लाख रुपये नकद व जेवर भी साथ ले गई. परेशान राहुल शिकायत लेकर अलीगढ़ पहुंचा, लेकिन पुलिस ने यह कहकर लौटा दिया कि मामला बिहार का है. रिश्तों की यह उलझी कहानी अब एक नए मोड़ पर खड़ी है.  जब बेटी की शादी से पहले बदल गई कहानी यह पूरा घटनाक्रम अप्रैल 2025 से शुरू होता है. 16 अप्रैल को महिला की बेटी की शादी तय थी. घर में रंगाई-पुताई, रिश्तेदारों की आवाजाही और शादी की तैयारियां जोरों पर थीं. लेकिन शादी से महज 12 दिन पहले ऐसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. जिस युवक राहुल से बेटी की शादी होने वाली थी, उसी के साथ सास घर से चली गई. आरोप लगा कि वह घर से लाखों रुपये के जेवर और नकदी लेकर फरार हुई. परिवार ने तब दावा किया था कि करीब पांच लाख रुपये के जेवर और साढ़े तीन लाख रुपये कैश गायब थे. बेटी ने मीडिया के सामने कहा था, मां घर में दस रुपये भी नहीं छोड़कर गईं. मोबाइल से शुरू हुई नजदीकियां परिवार के मुताबिक, महिला ने राहुल को एक स्मार्टफोन दिलवाया था. धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी. पहले शादी की तैयारियों के नाम पर बात होती थी, फिर घंटों-घंटों फोन कॉल चलने लगे. महिला के पति जितेंद्र ने तब आरोप लगाया था कि जब वह शादी की तैयारी के सिलसिले में घर आए तो पता चला कि पत्नी और राहुल के बीच 15-20 घंटे तक फोन पर बातचीत हो रही है. पहले उन्होंने इसे सामान्य माना, लेकिन बाद में शक गहराता गया. भागकर कहां-कहां पहुंचे जब मामला सुर्खियों में आया और पुलिस सक्रिय हुई, तब पता चला कि दोनों अलीगढ़ से कासगंज, फिर बरेली होते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचे थे. कुछ दिन वहीं रुके. यहां तक कि नेपाल बॉर्डर जाने की भी योजना बनाई गई थी. राहुल ने बाद में बताया था कि जब उन्होंने मोबाइल चलाया तो देखा कि दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं. हर तरफ चर्चा थी. तब दोनों ने खुद लौटने का फैसला किया. मुजफ्फरपुर से बस पकड़कर वे उत्तर प्रदेश लौटे और अंततः थाना दादों पहुंचकर सरेंडर कर दिया. पुलिस के सामने क्या कहा था थाने में पूछताछ के दौरान सास ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था. उसने कहा कि उसका पति शराब पीकर मारपीट करता था, अपमानित करता था और अक्सर घर से निकाल देने की धमकी देता था. सास का कहना था कि जब राहुल फोन करता था तो कभी बेटी बात करती थी, कभी वह खुद. इसी बात को लेकर घर में विवाद बढ़ता गया. पति ताने मारते थे अब तो राहुल के साथ ही भाग जाओ. उसने पुलिस के सामने कहा था कि जब हालात असहनीय हो गए तो उसने वही किया जो उसे उस समय ठीक लगा. राहुल ने भी बयान दिया था कि वह महिला को पहले से जानता था और उसके कहने पर ही साथ गया. वह रोती थी, कहती थी कि अब जीने का मन नहीं करता. मुझे लगा कि उसे अकेला छोड़ना ठीक नहीं होगा. पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर महिला को राहुल के साथ जाने की अनुमति दे दी थी. दस महीने साथ रहने के बाद नया मोड़ करीब दस महीने तक दोनों बिहार में साथ रहे. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वे पति-पत्नी की तरह रह रहे थे. लेकिन हाल ही में राहुल ने आरोप लगाया कि महिला उसे छोड़कर अपने जीजा के साथ चली गई है. राहुल का कहना है कि जाते समय वह दो लाख रुपये नकद और कुछ जेवर भी साथ ले गई. राहुल ने कहा कि मैंने उसके लिए अपना घर छोड़ा, समाज की बातें सुनीं. अब वह मुझे ही छोड़कर चली गई.  शिकायत और पुलिस का जवाब राहुल अलीगढ़ पहुंचा और थाना दादों में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की. लेकिन पुलिस ने क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए कहा कि कथित घटना बिहार में हुई है, इसलिए वहीं की पुलिस कार्रवाई करेगी. अब राहुल बिहार जाकर शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में है.