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कृषि मंडी अधिकारी पर यौन शोषण का मामला, शिकायत के बाद भेजा गया जेल

कोरबा महिला से यौन उत्पीड़न के एक मामले में कटघोरा में पदस्थ रहे पूर्व कृषि मंडी अधिकारी राहुल साहू को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस टीम ने रायगढ़ जिले के घरघोड़ा से आरोपी को गिरफ्तार कर कटघोरा लाया, जहां उसे न्यायालय में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला ने शिकायत में बताया कि राहुल साहू कटघोरा कृषि मंडी में अधिकारी के पद पर कार्यरत था। इसी दौरान उसने महिला से दोस्ती की और शादी का प्रलोभन देकर करीब एक साल तक शारीरिक संबंध बनाया। महिला का आरोप है कि दोनों की इसी माह शादी होने वाली थी, लेकिन इसी बीच राहुल साहू ने शादी से साफ इंकार कर दिया। महिला की शिकायत पर कटघोरा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया। वहीं कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे रायगढ़ जिले के घरघोड़ा से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

बाहर होने के बाद राशिद खान का दर्द छलका, ICC से की अपील- छोटी टीमों को मिले बराबरी का मंच

नई दिल्ली अफगानिस्तान के कप्तान राशिद खान ने अपने आखिरी ग्रुप मैच में कनाडा को हराकर टी20 वर्ल्ड कप से शानदार तरीके से विदा लेने के बाद कहा कि क्रिकेट खेलने वाले मजबूत देशों के साथ और द्विपक्षीय सीरीज होनी चाहिए क्योंकि इनसे अनुभव मिलता है। अफगानिस्तान ने टूर्नामेंट रोमांचक क्रिकेट खेला और एक मुकाबले में स्कोर बराबर होने के बाद दूसरे सुपर ओवर में साउथ अफ्रीका से हार गया। हालांकि स्पिन गेंदबाजी के इस दिग्गज ने कहा कि अगर अफगानिस्तान को नियमित रूप से क्रिकेट खेलने वाले मजबूत देशों के खिलाफ मौके मिलते हैं तो वह काफी आगे बढ़ सकता है। राशिद ने कनाडा को 82 रन से हराने के बाद कहा, ''कुछ विभाग में सुधार की जरूरत है। बड़ी टीमों के खिलाफ मध्यक्रम बल्लेबाजी बिखर गई और डेथ ओवर में गेंदबाजी में भी सुधार चाहिए। पर यह सुधार तब होता है जब आप द्विपक्षीय सीरीज में बड़ी टीमों के साथ खेलते हैं।'' उन्होंने मैच में 19 रन देकर दो विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया। इस दिग्गज खिलाड़ी ने कहा कि टीम टूर्नामेंट के लिए अच्छी तैयारी के साथ आई थी और उसने जबरदस्त क्रिकेट खेला। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि दक्षिण अफ्रीका से मिली करीबी हार महंगी पड़ी। राशिद ने कहा, ''हम (टूर्नामेंट के लिए) अच्छी तरह तैयार थे। हमने जबरदस्त क्रिकेट खेला। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच ने सच में सभी को दुखी किया। हमें उन (पहले दो) मैचों में से एक में जीत दर्ज करनी थी और देखना था कि टूर्नामेंट कैसा होता है। हम इस विश्व कप से सकारात्मक चीजें लेकर आगे बढ़ेंगे। '' मुख्य कोच जोनाथन ट्रॉट का कार्यकाल खत्म हो गया और राशिद ने इसे टीम के लिए भावुक पल बताया। उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि हमने उसके साथ कुछ बहुत अच्छे पल बिताए। हम अभी जहां हैं, वहां उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई है। उनका जाना हमारे लिए भावनात्मक पल है। लेकिन जिंदगी ऐसी ही होती है। हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं। '' इब्राहिम जदरान को 56 गेंद में नाबाद 95 रन बनाने के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।

विधायकों में तीखी भिड़ंत, विजय सिन्हा ने की विवादित टिप्पणी

पटना बिहार विश्वविद्यालयों में और उच्च शिक्षण संस्थाओं में यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन को लागू करने का प्रस्ताव विपक्ष की ओर से माले विधायक संदीप सौरभ ने पेश किया। इस दौरान में उन्होंने 'ब्राह्मणवाद'  शब्द का जिक्र कर दिया। इस पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक हंगामा करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने 'ब्राह्मणवाद' शब्द को फौरन सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। इसके बावजूद पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच आपस में भिड़ंत हो गई। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। विपक्ष की ओर से राजद विधायक आलोक मेहता ने भी पटलवार किया। सदन में क्या-क्या हुआ आइए जानते हैं? पहले जानिए माले विधायक ने क्या कहा?  माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार समेत विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न का मामला सामने आता है। उन्होंने रोहित वेमुला केस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी की ओर दी गई रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षक संस्थाओं में जाति आधारित उत्पीड़न के मामलों में 2019 से 2024 में 118 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसके अलोक 2026 में इक्विटी गाइडलाइन की घोषणा की गई। लेकिन, इसे मजबूति से लागू करने की जगह ब्राह्मणवादी मानसिकता से प्रायोजित आंदोलन के बाद इसके स्थगित कर दिया गया। विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण स्थानों में जातीय उत्पीड़न को बिहार सरकार कानून लाकर लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह मांग करती है कि अध्यादेश लाकर इसे कानून का रूप देने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करे। साथ ही यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन को लागू करने का प्रस्ताव पारित करने की मांग करते हैं। डिप्टी सीएम ने कहा- यह लोग गद्दारी करते हैं माले विधायक संदीप सौरभ के बयान का भाजपा विधायक विरोध करने लगे। देखते ही देखते पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच नोंकझों होने लगी। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सदन की कार्यवाही से ब्राह्मण शब्द को हटाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत में सदन में जाति सूचक शब्द का प्रयोग नहीं करें। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि सदस्यों से अपील है कि अगर उन्हें संविधान में विश्वास है तो इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करें। हर समाज का सम्मान होता है। वह संविधान और संवैधानिक संस्था के निर्णय पर प्रश्न कैसे उठा सकते हैं। उनकी मानसिकता साफ झलकती है। हर समाज का मैं सम्मान करता हूं। इस तरह की मानसिकता गलत है। आज देश को कमजोर करने में, समाज में जहर घोलकर वो राष्ट्र के हितैषी नहीं हो सकते हैं। मैं भी टेक्निकल कॉलेज में पढ़ता था। किस तरह से मुजफ्फपुर में रैगिंग करवाई जाती थी। उस समय सत्ता किसकी थी। मैं भूमिहार ब्राह्मण समाज से आता हूं। हॉस्टल से बाहर निकलने पर विवश किया गया। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जातिगत भेदभाव से यह लोग बाबा साहेब के सपनों को तार-तार करना चाहते हैं। यह लोग राष्ट्र के हितैषी नहीं है। यह लोग समाज के साथ गद्दारी करते हैं। विजय सिन्हा की इस बात पर विपक्ष के विधायकों ने जमकर हंगामा किया। राजद और भाजपा विधायक ने क्या कहा? राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा कि जातिवादी लोगों की मानसिकता साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि विधायक संदीप सौरभ ने किसी जाति का नाम नहीं लिया। उन्होंने ब्राह्मणवाद का नाम लिया। ब्राह्मणवाद कोई जाति नहीं है। जहां तक जाति की बात है कि पिछड़ा और दलित की बात कही जा रही है। उन्होंने विजय सिन्हा पर तंज कसते हुए कहा कि वह इस तरह की शब्दों का प्रयोग कर बता रहे है कि वह किस तरह की मानसिकता के हैं। जो लोग गलत किए हैं, उन्हें मिर्ची लग रही है। इसके बाद भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विपक्ष के लोग ब्राह्मणवाद को समझते नहीं हैं। लेकिन, इन्हें ब्राह्मणों से काफी तकलीफ है। उन्होंने जिस ब्राह्मण का पैर तीनों लोकों के स्वामी भगवान कृष्ण अपने आंसुओं से करते हैं। जिस ब्राह्मण के बिना न शादी होती है और न श्राद्ध होती है। जिस ब्राह्मण ने भिक्षा मांगकर कासी हिन्दू विश्वविद्यालय बना दिया। आज इन्हें ब्राह्मण से परेशानी हो रही है।

मां की ममता का अनोखा नज़ारा: जंगल से सामने आई हाथियों की बेहद खूबसूरत तस्वीर

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के जंगल से हाथियों के दल का एक शानदार तस्वीर आई है. 11 हाथियों के दल बीच दो नन्हें शावक सुरक्षित घेरे में विचरण करते नजर आ रहे हैं, मामला धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज का है. रायगढ़ जिले के जंगल से हाथियों के दल का ड्रोन कैमरे का एक शानदार तस्वीर सामने आई है. 11 हाथियों के दल में दो नन्हे शावक हैं जो अपनी मां के साथ जंगलों में घूमते नजर आ रहे हैं. हाथियों का यह दल छाल रेंज के कुडेकेला परिसर के गूडाघाट डेम किनारे विचरण कर रहा था. वीडियो में देखा जा सकता है कि मादा हाथी अपने शावक को सुरक्षित घेरे में रखते हुए जंगल में आगे बढ़ते नजर आ रही है. बताया जा रहा है कि दोनों हाथी शावक की उम्र करीब 6 महीने के आसपास है. वन विभाग एवं हाथी मित्र दल की टीम ने कुडेकेला, बांसाझार के अलावा आस-पास गांव के ग्रामीणों को सावधानी बरतने के साथ-साथ किसी भी काम के सिलसिले जंगल तरफ नही जाने की अपील की है. बताया जा रहा है कि हाथियों का यह दल अब घरघोड़ा रेंज में चला गया है. दल में शावक होने की स्थिति पर इस दल पर विशेष रूप से निगरानी की जा रही है.

विवाहिता की गैंगरेप के बाद हत्या के दोषियों को मिली फांसी की सजा

दौसा. दौसा जिले के लालसोट में गैंगरेप के बाद महिला की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश न्यायालय ने शुक्रवार को दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। मामला करीब चार साल पुराना है। जब विवाहिता ससुराल से पीहर जा रही थी, तभी आरोपियों ने अपहरण के बाद विवाहिता से सामूहिक दुष्कर्म किया और हत्या के बाद शव को कुएं में फेंक दिया था। इससे पहले कोर्ट ने गुरुवार को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुर​क्षित रखा था। एडीजे ऋतु चौधरी ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। न्यायालय में राज्य पक्ष से नियुक्त विशिष्ट लोक अभियोजक महावीर सिंह ने घटना को जघन्य बताते हुए कड़ी सजा की दलील रखी। बचाव पक्ष ने आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने का हवाला देते हुए नरमी की अपील की। जज ने फैसला सुनाते हुए पढ़ी ये कविता जज ने फैसला सुनाते हुए कविता पढ़ते हुए कहा कि गूंजती है आज भी फिजा में हजारों सिसकियां, घुट-घुट कर तड़पती हैं इस समाज में बेटियां। किस्सा बलात्कार का आज फिर अखबार में छपेगा, एक बेटी के खून से आज फिर अखबार सनेगा, क्या था कसूर मेरा, क्या बेटी होना ही कसूर था मेरा। कैसे जिए इस समाज में नारी जहां दरिंदे बसते हों, भेड़ियों ने जहां इंसान के चेहरे पहने हों, आखिर कब तक नारी की इज्जत यूं तार-तार होगी, आखिर कब इस समाज की गलियां बेटियों के लिए सुरक्षित होगी। सिर झुकाएं पुलिस के साथ पहुंचे अदालत में अपने ससुराल से पीहर जा रही महिला के साथ एक जघन्य अपराध करने वाले दोनों आरोपियों को गुरुवार को न्यायालय में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया था। इस दौरान दोनो आरोपी सिर झुकाए न्यायालय में पहुंचे और सिर झुकाएं ही खड़े रहे, कुछ देर बाद जब उन्हे दोषी करार दिया तो पुलिस उन्हे वहा से ले गई थी। नाबालिग व सीसीटीवी से खुला मामला घटना 23 अप्रैल 2022 की है। महिला जिले के एक गांव में बस से उत्तरने के बाद लापता हो गई थी। 24 अप्रेल को गुमशुदगी दर्ज हुई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और एक नाबालिग छात्र की जानकारी के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। 25 अप्रैल को आरोपी कालूराम की गिरफ्तारी के बाद उसी रात कुएं से शव बरामद किया गया, जबकि दूसरे आरोपी संजू मीना को 26 अप्रैल को पकड़ा गया। विशेष अनुसंधान दल गठित कर जुलाई 2022 में चार्जशीट पेश की गई। 45 गवाहों के बयान और 145 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। दोनों आरोपी रामगढ़ पचवारा थाना क्षेत्र के सिसोदिया गांव के एक ही परिवार के चाचा ताऊ के लड़के हैं। यूं चला घटनाक्रम 23 अप्रेल 2022 को सुबह मृतक अपने ससुराल से हुई रवाना 23 अप्रेल 2022 को दोपहर 1 बजे सोनड़ मोड़ पर बस से उतरी 24 अप्रेल 2022 को हुआ गुमशुदगी का मामला दर्ज 25 अप्रेल 2022 को एक आरोपी कालूराम मीना गिरफ्तार 25 अप्रेल 2022 की आधी रात्रि को मृतका का शव कुएं से बरामद 26 अप्रेल 2022 को संजू मीना की गिरफ्तारी 4 मई 2022 को हुआ एसआईटी का गठन जुलाई 2022 में न्यायालय में हुई चार्जशीट पेश 19 फरवरी 2026 को दोनों आरोपियों को किया न्यायालय ने दोषी करार 20 फरवरी 2026 को दोनों दोषियों को फांसी की सजा

झारखंड विधानसभा में ₹6450 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश

रांची. झारखंड विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो चुका है. आज (शुक्रवार, 20 फरवरी) सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 6450 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया. आज की कार्यवाही में प्रश्नकाल के दौरान जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने प्रवासियों के पंजीकरण को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने सदन में सरकार से पूछा कि क्या ये बात सही है कि राज्य में 16 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर हैं, लेकिन सिर्फ 1 लाख 91 हजार ही पंजीकृत है. प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण और सुविधाओं के लिए झारखंड प्रवासी श्रमिक आयोग का गठन करने का विचार कर रही है. प्रवासी मजदूर के निधन पर 5 लाख मिले. जयराम महतो के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री संजय यादव ने बताया कि 2 लाख 29 हजार प्रवासी मजदूर रजिस्टर्ड हैं. प्रचार प्रसार के माध्यम से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी है. इस मामले पर सरकार और विभाग काफी गंभीर है. किसी को भी अगर विदेशों में परेशानी हुई है तो सरकार आगे आई है. प्रवासी नियंत्रण कक्ष रांची में है. कोई लापरवाही नहीं होती, इसीलिए आयोग की कोई जरूरत नहीं है. प्रवासी मजदूरों के निधन पर राशि बढ़ाने पर विचार हो सकता है. वहीं चन्द्रदेव महतो ने पूछा कि क्या प्रवासी नियंत्र कक्ष बनाया गया गया है. सरकार ने अलग से डायरेक्टरेट बनाने का आश्वासन दिया था. अभी काम करने वाले एनजीओ है, पावर सीमित है. इस पर मंत्री ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए जो जरूरी होगा, वो किया जाएगा. बाबूलाल मरांडी ने पूछा कि बाहर राज्यों में भाषा की भी दिक्कत होती है. सरकार से आग्रह है कि उन शहरों में कोई मैकेनिज्म तैयार करें तो मजदूरों की कठिनाई दूर हो सकती है. मृत को 50 हजार मिलता है, लेकिन उनके घर उजड़ जाते हैं. आवास सुनिश्चित हो, सरकारी राशन मिले और शिक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो. हम सब का यह दायित्व बनता है. वहीं अरूप चैटर्जी ने कहा कि काम के बाद भी कई बार मजदूरों को हाजरी नहीं दी जाती. एक अधिकारी अगर उन राज्यों में बैठे तो उन्हें मदद मिलेगी और निदेशालय जल्द से जल्द बने. मानसिक तौर पर प्रताड़ित मजदूर जब आत्महत्या करता है तो उस मजदूर के बॉडी लाने की भी व्यवस्था की जानी चाहिए? इस पर मंत्री संजय यादव ने बताया कि मामला गंभीर हैं. सीएम से बात करके राज्य हित में फैसला लिया जाएगा. विधायक निर्मल महतो ने पूछा कि 10 हजार सहिया धरने पर बैठी हैं. पूरे राज्य में 2007 से 42000 सहिया, सहिया साथी 2500 और 688 टीटी सहिया स्वास्थ्य विभाग में कार कर रहे हैं. कोरोनाकाल में कई सहियाओं की जान गई है. इस सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य में लगभग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 64 हजार सहिया हैं. सहिए के प्रति सरकार संवेदनशील है. कोरोनाकाल में सहियाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग दिया. कोरोनाकाल में 1 महिला रेनी देवी की मौत हुई है. सरकार ने हर संभव मदद की है. विधायक ने कहा कि प्रतिमाह मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए. एम्बुलेंस की व्यवस्था बढ़े. धरना पर सरकार बात करे. मंत्री ने कहा कि इंसेंटिव के तहत रखा जाता है. विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि मैया सम्मान में ढाई हजार रुपये स्वास्थ्य सहिया का वेतन बढ़ाया जाए. मंत्री ने कहा कि हर माह इंटेंसिव के तहत काम होता है. जो भी कार्यक्रम चलाए जाते है. उसमें इंटेंसिव मिलता है. प्रति माह 10 से 1 हजार आमदनी होती है. 8 मार्च को एक साल का एकमुश्त राशि महिला दिवस पर सहियाओं को दी जाएगी. 

गरीबों को बड़ी राहत: दिल्ली में खुलीं 24 अटल कैंटीन, 5 रुपये में मिलेगी थाली

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में सस्ती और सम्मानजनक भोजन उपलब्ध कराने वाली योजना को बड़ा विस्तार मिला है। 24 नई अटल कैंटीनों की शुरुआत के साथ शहर में इनकी कुल संख्या बढ़कर 70 हो गई है। कृष्णा नगर की नर्सरी बस्ती से डिजिटल माध्यम से आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में विनय कुमार सक्सेना और रेखा गुप्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं ने आम नागरिकों के साथ बैठकर भोजन किया और योजना की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि नई अटल कैंटीनों के शुरू होने से राजधानी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कम कीमत पर भोजन की सुविधा और मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उनके अनुसार, सस्ती दरों पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने से दिहाड़ी मजदूरों, जरूरतमंदों और निम्न आय वर्ग के लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिल रहा है। उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि शहर के अधिक से अधिक इलाकों तक इस योजना का विस्तार किया जाए, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति भूखा न रहे और सम्मान के साथ भोजन प्राप्त कर सके।     दिल्ली को चलाने वाले, दिल्ली को बनाने वाले हर मेहनतकश, हर जरूरतमंद के लिए अटल कैंटीन एक भरोसा है कि यह शहर उसका भी है, और यह व्यवस्था उसके साथ खड़ी है। सम्मानजनक और पौष्टिक भोजन पर जोर रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार की नई कैंटीन पहल मेहनतकश और कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि मात्र पांच रुपये में पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और स्वाद के मानकों का सख्ती से पालन किया जाए ताकि जरूरतमंदों को सम्मानपूर्वक भोजन मिल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि योजना पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है और इसका उद्देश्य दिहाड़ी मजदूरों सहित उन लोगों को राहत देना है जो रोज कमाकर जीवन यापन करते हैं। इन कैंटीनों का संचालन दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड द्वारा किया जा रहा है। उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, शहरी विकास मंत्री आशीष सूद और कृष्णा नगर के विधायक डॉ. अनिल गोयल सहित कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कैंटीनों का मुख्य उद्देश्य दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, रेहड़ी-पटरी संचालकों, सफाई कर्मचारियों और अन्य कम आय वर्ग के लोगों को स्वच्छ, सस्ता और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि महंगाई के दौर में उन्हें राहत मिल सके। अटल जयंती से शुरू हुई योजना उपराज्यपाल ने जानकारी दी कि इस जनकल्याणकारी योजना की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर की गई थी। उन्होंने बताया कि तब से इस पहल को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक थाली पर 25 रुपये की सब्सिडी दे रही है, जिससे गरीब और मेहनतकश लोगों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके। यह योजना खासतौर पर दिहाड़ी मजदूरों और कम आय वर्ग के लोगों के लिए राहत का काम कर रही है। 100 कैंटीन का लक्ष्य, समावेशी विकास पर फोकस मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य राजधानी में 100 अटल कैंटीन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल सस्ता भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को सुरक्षा तथा सम्मान का एहसास दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री का कहना था कि कैंटीनों के विस्तार के साथ अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिलेगा, खासकर दिहाड़ी मजदूरों और कम आय वर्ग के परिवारों को। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार के सतत प्रयासों से राजधानी में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए, इस लक्ष्य की ओर लगातार काम किया जा रहा है।

डिजिटल सुविधा केंद्र में 86 वर्षीय भक्तिन राय को अंगूठे के निशान पर मिल रही सुविधाएं

  रायपुर, उम्र 86 साल, चेहरे पर झुर्रियां, लेकिन आँखों में आत्मनिर्भरता की चमक।  कबीरधाम जिले के ग्राम राजानवागांव की भक्तिन राय के लिए डिजिटल तकनीक अब केवल शब्द नहीं, बल्कि उनके बुढ़ापे की लाठी बन गई है। 30 साल पहले पति को खोने के बाद जिस पेंशन के लिए उन्हें बैंक के चक्कर काटने पड़ते थे, आज वही पैसा उनके गांव के डिजिटल सुविधा केंद्र  में एक अंगूठे के निशान पर मिल जाता है। आज एक छोटा सा केंद्र भक्तिन राय जैसे हजारों ग्रामीणों के लिए  डिजिटल वरदान साबित हो रहा है। भक्तिन राय के पति का देहांत लगभग 30 साल पहले हो गया था। लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने के बाद अब उन्हें निराश्रित विधवा पेंशन और महतारी वंदन योजना की राशि हर महीने नियमित रूप से मिल रही है। पहले उन्हें पैसे निकालने के लिए बैंक जाना पड़ता था, जिससे समय और मेहनत दोनों लगते थे। अब गांव के डिजिटल सुविधा केंद्र से ही उन्हें तुरंत पैसा मिल जाता है और यह भी पता चल जाता है कि उनके खाते में कितनी राशि आई है। उनके बेटा और बहू मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बहू को भी महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है, जिससे घर के खर्च में सहारा मिलता है। इलाज और दवाइयों के लिए मिलने वाली पेंशन की राशि भक्तिन राय के लिए बहुत बड़ा सहारा बन गई है। भक्तिन राय का घर भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बना है, जिससे उन्हें सुरक्षित रहने की सुविधा मिली है। वे बताती हैं कि अब गांव में ही सभी काम आसानी से हो जाते हैं, जिससे उन्हें कहीं दूर नहीं जाना पड़ता। राजानवागांव के डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से अब तक लगभग 18 लाख रुपए से अधिक का ट्रांजैक्शन किया जा चुका है। यहां ग्रामीणों को कई तरह की वित्तीय और सरकारी सेवाएं मिल रही हैं। केंद्र में नगद आहरण, फंड ट्रांसफर, जीवन, सामान्य और कृषि बीमा, पेंशन, पैन कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं का पंजीयन, बिजली बिल भुगतान, ट्रेन और हवाई यात्रा की टिकट बुकिंग तथा ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं के माध्यम से प्रमाण पत्र भी बनाए जा रहे हैं। गांव के लोग यहां से दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन, महतारी वंदन योजना की राशि निकालने, दूसरे के खाते में पैसा जमा करने, आवास योजना की राशि की जानकारी लेने और अन्य जरूरी काम आसानी से कर पा रहे हैं। डिजिटल सुविधा केंद्र ने खासकर बुजुर्ग, महिलाओं और जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी राहत दी है। भक्तिन राय जैसे लोगों के लिए यह केंद्र अब केवल एक सेवा केंद्र नहीं, बल्कि जीवन को आसान बनाने वाला एक मजबूत सहारा बन गया है।

दिल्ली के ट्रैफिक पर ऋषि सुनक की चुटकी: बोले, ‘एआई भी यहां बेबस है’

नई दिल्ली ऋषि सुनक ने राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इंपैक्ट समिट के कार्यक्रम में पहुंचने में देरी होने पर हल्के-फुल्के अंदाज़ में दिल्ली के ट्रैफिक पर तंज कसा। उन्होंने मंच से कहा कि सेशन के लेट शुरू होने की जिम्मेदारी उनकी है और मजाकिया लहजे में जोड़ा “एआई बहुत सारी समस्याओं को कम कर सकता है, लेकिन दिल्ली का ट्रैफिक कम करना उसके लिए भी मुश्किल है।” उनकी इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी। सुनक का यह बयान दिल्ली के भारी ट्रैफिक की ओर इशारा करता है, जो अक्सर बड़े आयोजनों और व्यस्त समय में और बढ़ जाता है। भारत से अच्छी इसके लिए कोई जगह नहीं-सुनक ऋषि सुनक ने एआई इंपैक्ट समिट में भारत की जमकर सराहना करते हुए कहा कि एआई ट्रांसफॉर्मेशन पर चर्चा के लिए भारत से बेहतर जगह कोई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से केवल विकसित देशों को ही नहीं, बल्कि विकासशील देशों को भी बड़ा लाभ मिलने वाला है। सुनक के मुताबिक, दुनिया को एक ऐसे नियमित फोरम की जरूरत है जहां तकनीक और एआई पर गंभीर चर्चा हो सके। सुनक ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध हुआ है, जहां यह समझने का मौका मिल रहा है कि एआई किस तरह वैश्विक स्तर पर बदलाव ला सकता है। उनके अनुसार, यह मंच विकसित और विकासशील देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने और एआई के फायदे को व्यापक रूप से साझा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। ऋषि सुनक ने एआई इंपैक्ट समिट के इस सेशन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबके लिए होना चाहिए, और इसी उद्देश्य से इस मंच पर “एआई इंपैक्ट” पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने भारत की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने एआई की क्षमता को बहुत अच्छी तरह समझा है, इसलिए यहां इसे बड़े स्तर पर लागू करने की बात हो रही है। सुनक के अनुसार, एआई से आम जनता को वास्तविक लाभ पहुंचाने के लिए बड़ा टैलेंट पूल, मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, सपोर्टिव टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की जरूरत होती है, और भारत इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सुनक ने यह भी कहा कि एआई को लेकर दुनिया में अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। उनके मुताबिक, भारत में एआई को लेकर जबरदस्त आशावाद और भरोसा है, जबकि पश्चिमी देशों में फिलहाल चिंता ज्यादा दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि इस भरोसे के अंतर को पाटना केवल तकनीकी नहीं, बल्कि नीतिगत चुनौती भी है। अब एआई पर वैश्विक बहस तकनीक से आगे बढ़कर रणनीति पर केंद्रित हो गई है। सुनक के शब्दों में “मुद्दा अब यह नहीं है कि ये उपकरण क्या कर सकते हैं, बल्कि यह है कि देश इनके साथ क्या करना चुनते हैं।” ऋषि सुनक ने एआई इंपैक्ट समिट में कहा कि राजनीतिक नेतृत्व के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब हाशिये का विषय नहीं, बल्कि सरकारों की केंद्रीय जिम्मेदारी बन चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नेतृत्व केवल नए आविष्कार करने से तय नहीं होता, बल्कि इस बात से भी तय होता है कि किसी देश द्वारा उस तकनीक को किस तरह लागू किया जाता है और समाज तक उसका लाभ कैसे पहुंचाया जाता है। सुनक के मुताबिक, भारत एआई के क्षेत्र में नेतृत्व करने की मजबूत स्थिति में है। इसके पीछे उन्होंने तीन प्रमुख कारण बताए गहरी प्रतिभा संपदा (टैलेंट पूल),मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, प्रौद्योगिकी के प्रति बेहद सकारात्मक जनमानस उन्होंने कहा कि इन कारकों के कारण भारत में एआई की व्यापक स्वीकार्यता दिखाई दे रही है, जो देश को न केवल एआई अपनाने बल्कि समाज में इसके बड़े पैमाने पर उपयोग और तैनाती का उदाहरण पेश करने में सक्षम बनाती है।

प्रख्यात अमेरिकी वैदिक विद्वान ने लखनऊ में की मुख्यमंत्री से मुलाकात

योग, आयुर्वेद और सनातन संस्कृति पर चर्चा, बोले- नाथ परंपरा से प्रशस्त हो रही वैश्विक कल्याण की नई राह लखनऊ,  अमेरिका के प्रख्यात वैदिक विद्वान डॉ. डेविड फ्रॉले ने राजधानी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री से योग, आयुर्वेद व सनातन संस्कृति पर चर्चा की। मुख्यमंत्री के बहुआयामी व्यक्तित्व के प्रशंसक डॉ. फ्रॉले ने कहा कि योगी आदित्यनाथ राजनीति का शुद्धिकरण कर रहे हैं। उन्होंने नाथ परंपरा का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे वैश्विक कल्याण की नई राह प्रशस्त हो रही है। अमेरिकी विद्वान ने योगी सरकार द्वारा अयोध्या का पुरातन गौरव लौटाने की सराहना की और कहा कि अयोध्या का कायाकल्प वेदों की ओर लौटने का मार्ग है। डॉ. फ्रॉले ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ समय बिताना मेरे लिए अत्यंत सम्मान और सौभाग्य की बात रही। गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी उस नाथ परंपरा से जुड़े हुए हैं, जो प्राचीन योग संस्कृति से जुड़ी है और इसे भारत में जीवंत बनाए हुए है। वे इन परंपराओं को न केवल संरक्षित कर रहे हैं, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर विस्तार भी दे रहे हैं। साथ ही वे शरीर, मन, समाज के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ राजनीति का शुद्धिकरण भी कर रहे हैं। भारत की वे सभी परंपराएं, जो संपूर्ण मानवता के लिए प्रासंगिक हैं, योगी आदित्यनाथ के माध्यम से नई ऊर्जा प्राप्त कर रही हैं। सीएम योगी से मिलकर प्रफुल्लित डॉ. डेविड फ्रॉले ने ‘नई अयोध्या’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि अयोध्या का कायाकल्प अत्यंत प्रसन्नता की बात है। प्रभु श्रीराम का दर्शन आध्यात्मिक रूप से अत्यंत सुखद अनुभव देता है। भगवान राम भारत की आत्मा के प्रतीक हैं। वे हमें सूर्यवंश से जोड़ते हैं और समस्त धार्मिक परंपराओं को एक सूत्र में पिरोते हैं। आज विश्व धीरे-धीरे अपनी आध्यात्मिक चेतना खोता जा रहा है। ऐसे में वेद, योग, आयुर्वेद और अन्य भारतीय परंपराओं तक, सबका नवोन्मेष और पुनर्जीवन मौजूदा परिवेश में अत्यंत आवश्यक है। ऐसे समय में योगी जी जैसा नेतृत्व मिलना भारत ही नहीं, पूरे विश्व के लिए वरदान है। डॉ. फ्रॉले ने कहा कि योगी जी में तेज है, क्योंकि वे ‘आदित्य’ हैं, सूर्य तत्व से जुड़े हैं। आत्मविद्या के लिए हम आदित्य की ओर देखते हैं और सूर्य ही योग का आधार है। योगी जी के साथ कुछ क्षण बिताना भी जीवनभर के लिए यादगार पल है। विसकॉन्सिन (अमेरिका) में एक कैथोलिक परिवार में जन्मे डॉ. डेविड फ्रॉले की गिनती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदुत्व के प्रमुख विचारकों में होती है। उन्होंने करीब एक दशक तक आयुर्वेद का भी अध्ययन किया है। उन्होंने वेद, हिंदू धर्म, योग, आयुर्वेद व ज्योतिष शास्त्र पर कई पुस्तकें लिखी हैं। वर्ष 2015 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया। उसी वर्ष मुंबई में साउथ इंडियन एजुकेशन सोसायटी ने भी आयुर्वेद, योग व वैदिक ज्योतिष शास्त्र के क्षेत्र में डॉ. फ्रॉले के उल्लेखनीय योगदान को देखते उन्हें ‘नेशनल एमिनेंस अवार्ड’ से सम्मानित किया था।