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पैक्स सिलिका: भारत की भागीदारी से बदला वैश्विक समीकरण, जानें सदस्य देश

नई दिल्ली  भारत शुक्रवार को अमेरिका की अगुवाई वाले ‘पैक्स सिलिका’ अलायंस में औपचारिक रूप से शामिल हो गया। AI इंपैक्ट समिट के दौरान दोनों देशों ने इस पहल से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। दिसंबर 2025 में जब इस अलायंस की औपचारिक घोषणा हुई थी, तब भारत इसका हिस्सा नहीं था। अब इस रणनीतिक गठबंधन में शामिल होकर भारत तकनीक के क्षेत्र में अमेरिका के विश्वसनीय साझेदारों में शामिल हो गया है। इस कदम को AI, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनिरल्स की सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग और केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। आइए, जानते हैं, क्‍या है पैक्‍स‍ सलिका और इसका मकसद क्‍या है। क्या है पैक्स सिलिका? पैक्स सिलिका अमेरिकी सरकार का एक प्रमुख रणनीतिक फ्रेमवर्क है। इसके तहत अमेरिका अपने विश्वसनीय साझेदार देशों के साथ तकनीक और औद्योगिक इकोसिस्टम का साझा नेटवर्क विकसित कर रहा है। इसे वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। पैक्स सिलिका में कौन-कौन से देश? इसका मुख्य उद्देश्य AI और सेमीकंडक्टर इंडस्‍ट्री के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद ग्‍लोबल सप्लाई चेन तैयार करना है। तकनीकी विकास के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स की लगातार आपूर्ति इस रणनीति का अहम हिस्सा है। दिसंबर में बने इस समूह में जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और इस्राइल सहित कई देश शामिल हैं। अब भारत के औपचारिक रूप से जुड़ने के बाद इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है। क्यों बनाया गया यह गठबंधन यह गठबंधन पूरी चिप निर्माण प्रक्रिया को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है। यानी खदानों से निकलने वाले जरूरी खनिजों से लेकर चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों तक और उन डेटा सेंटर्स तक, जहां अडवांस AI चलाया जाता है- हर स्तर पर सुरक्षा और भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करना इसका उद्देश्य है। क्या इससे और गहरे होंगे रिश्ते? भारत ऐसे समय इस पहल में शामिल हुआ है जब हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में ट्रेड डील और अन्य वैश्विक मुद्दों को लेकर कुछ असहजता देखी गई थी। हालांकि हाल ही में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते पर सहमति बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से द्विपक्षीय सहयोग, खासकर इमरजिंग टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में, और गहरा होगा। चीन के दबदबे को संतुलित करने की रणनीति में भारत की भूमिका मजबूत होगी।

भारत-इजरायल संबंधों में नया अध्याय! नेतन्याहू ने PM मोदी की यात्रा को बताया खास और ऐतिहासिक

इजरायल प्रधानमंत्री Narendra Modi 25-26 फरवरी को इजरायल के दौरे पर जा रहे हैं। इस यात्रा से पहले भारत में इजरायल के राजदूत Reuven Azar ने कहा है कि भारत और इजरायल सिर्फ साझेदार नहीं, बल्कि “सच्चे दोस्त” हैं, जो मिलकर भविष्य को आकार दे रहे हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह दौरा भारत और इजरायल के “विशेष संबंधों” को और मजबूत करेगा। नेतन्याहू ने कहा कि उनकी और पीएम मोदी की व्यक्तिगत मित्रता भी दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दे रही है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी इजरायल की संसद Knesset को संबोधित करेंगे और यरुशलम में एक इनोवेशन कार्यक्रम में भाग लेंगे। दोनों नेता Yad Vashem भी जाएंगे, जो होलोकॉस्ट पीड़ितों की स्मृति में बना आधिकारिक स्मारक है। भारत-इजरायल संबंध पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हुए हैं। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम में दोनों देश एक-दूसरे के पूरक हैं।यह दौरा न सिर्फ द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देगा, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति में दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा। राजदूत अजार ने कहा कि जब भारत और इजरायल साथ आते हैं तो वह सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं होती, बल्कि यह विश्वास, तकनीक और साझा चुनौतियों की समझ पर आधारित साझेदारी होती है। राजदूत अजारने बताया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेंगे। मौजूदा सुरक्षा समझौतों को अपडेट किया जाएगा ताकि संवेदनशील परियोजनाओं पर मिलकर काम किया जा सके। भारत और इजरायल वर्षों से रक्षा क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। अब बदलती वैश्विक परिस्थितियों और खतरों को देखते हुए दोनों देश नई तकनीकी साझेदारी पर ध्यान देंगे।AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े समझौते होने की उम्मीद है। दोनों देशों ने हाल ही में द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर किए हैं और इस साल फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम हो रहा है। इजरायल चाहता है कि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां वहां निवेश करें। वित्तीय सहयोग को भी आसान बनाने पर जोर रहेगा।  

‘भारत टैक्सी’ से नई क्रांति: अमित शाह बोले—अब टैक्सी ड्राइवर खुद होंगे मालिक, खत्म होगी बिचौलियों की भूमिका

नई दिल्ली दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की भारत टैक्सी सर्विस से जुड़े ड्राइवरों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों के बीच हुई इस बैठक का उद्देश्य Central Government Cooperative Models को मजबूत करना है। इसी के साथ शाह ने कहा कि इस नई व्यवस्था में गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर महज एक कर्मचारी नहीं, बल्कि खुद मालिक की भूमिका में होगा।   सहकारी मॉडल से बदलेगी ड्राइवरों की किस्मत जानकारी के लिए बता दें कि यह सर्विस 5 फरवरी को लॉन्च की थी। 'भारत टैक्सी' देश का ऐसा पहला ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म है जो Cooperative Principlesपर काम करता है। शाह ने चालकों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य बिचौलियों को खत्म कर सीधा लाभ उन लोगों तक पहुँचाना है जो जमीन पर पसीना बहाते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मॉडल के तहत होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा सीधे ड्राइवरों की जेब में जाएगा। समस्याओं और सुझावों पर हुई खुली चर्चा कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री ने केवल अपनी बात नहीं रखी, बल्कि ड्राइवरों की चुनौतियों को भी करीब से समझा। उन्होंने 'भारत टैक्सी' के सारथियों से उनकी समस्याओं पर फीडबैक लिया और भविष्य में इस सेवा को और बेहतर बनाने के लिए उनके सुझाव मांगे। शाह ने दोहराया कि सहकारिता क्षेत्र का विस्तार करना प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है, ताकि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को आर्थिक आजादी मिल सके।

रंगों और भक्ति का महीना मार्च: होलिका दहन से चैत्र नवरात्र तक छुट्टियों की भरमार

नई दिल्ली साल 2026 का मार्च महीना आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों से सराबोर रहने वाला है। इस महीने में न केवल रंगों का महापर्व होली मनाया जाएगा, बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत और चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व भी आएगा। मार्च के पहले ही सप्ताह में होलाष्टक समाप्त होंगे, जिसके बाद शुभ कार्यों की शुरुआत (March 2026 Festivals List) हो जाएगी। होली और चंद्र ग्रहण का संयोग इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च को मनाया जाएगा। विशेष बात यह है कि इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 06:48 बजे से रात 08:50 बजे तक रहेगा। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को रंगवाली होली खेली जाएगी और इसी दिन से चैत्र माह का प्रारंभ होगा।  8 मार्च को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इसी के साथ मार्च में छुट्टियों की भी लंबी लिस्ट (March Holidays List) है। इसे जानकर आप अपना धूमने या सेलिब्रेट करने प्लान भी बना सकते हैं।   चैत्र नवरात्रि और घटस्थापना वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा 19 मार्च से शुरू होंगे। कलश स्थापना के लिए दो विशेष मुहूर्त उपलब्ध हैं। पहला सामान्य मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:46 तक है, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:52 तक रहेगा। नवरात्रि के नौ दिनों के बाद 26 मार्च को राम नवमी का महापर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।

घर बैठे एड्रेस अपडेट का नया नियम, एक सेल्फ डिक्लेरेशन से काम पूरा

नई दिल्ली अगर आपके मोबाइल पर बैंक की ओर से KYC अपडेट का मैसेज आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसका मकसद आपकी बैंकिंग सेवाओं को बिना रुकावट जारी रखना है। KYC यानी Know Your Customer वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए बैंक अपने ग्राहकों की पहचान की पुष्टि करते हैं। समय-समय पर इसे अपडेट करना जरूरी होता है, ताकि खाते से जुड़ी जानकारी सही बनी रहे। सिर्फ पता बदला है तो आसान है प्रक्रिया यदि आपकी अन्य जानकारी पहले जैसी ही है और केवल पता बदला है, तो आप सेल्फ डिक्लेरेशन देकर एड्रेस अपडेट करवा सकते हैं। इसके लिए भारी दस्तावेज जमा करने या लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ती। घर बैठे भी कर सकते हैं KYC आधार OTP आधारित e-KYC: ऑनलाइन माध्यम से आसानी से पूरा किया जा सकता है। वीडियो KYC: बैंक अधिकारी वीडियो कॉल के जरिए पहचान सत्यापित करते हैं। ब्रांच में दस्तावेज जमा: चाहें तो मान्य दस्तावेज की कॉपी शाखा में भी दे सकते हैं। सावधानी जरूरी KYC के नाम पर किसी अज्ञात लिंक या कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें। हमेशा बैंक के आधिकारिक माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी करें। Reserve Bank of India भी ग्राहकों को सुरक्षित बैंकिंग के प्रति जागरूक करता रहता है। ‘आरबीआई कहता है’ जैसे अभियानों के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि सतर्कता और सही जानकारी ही धोखाधड़ी से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।  

सरसों किसानों की बढ़ी उम्मीदें: भावांतर योजना में शामिल, कम कीमत का नुकसान भरेगी सरकार

भोपाल मध्य प्रदेश में किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सोयाबीन की तरह ही सरसों पर भावांतर दिया जाएगा। जो पंजीकृत किसान मंडियों में उपज बेचेंगे, उन्हें योजना का लाभ मिलेगा। इतना ही नहीं उड़द पर प्रति किसान प्रति क्विंटल छह सौ रुपये का बोनस भी दिया जाएगा। चना, मसूर और तुअर का प्राइस सपोर्ट स्कीम में उपार्जन करने के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भी भेजा गया है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने यह जानकारी सोमवार को विधानसभा में दी। वर्ष 2026 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित उन्होंने कृषि पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। किसान को अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता की तरह उद्यमी बनाने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश को खाद्यान्न उत्पादों का हब बनाया जाएगा। सोयाबीन में समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने के लिए 6.86 लाख किसानों को 1,492 करोड़ रुपये का भावांतर दिया गया। इस योजना को पूरे देश में सराहा गया। इसे आगे बढ़ाते हुए सरसों में भी लागू किया जा रहा है।   दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन और केंद्र को भेजे गए उपार्जन प्रस्ताव अभी मंडी में सरसों का भाव 5,500 से 6,000 के बीच चल रहा है। इसका समर्थन मूल्य 6,200 रुपये है। इसमें भावांतर लागू किए जाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया है। प्रदेश में सरसों के क्षेत्र में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादन 15.71 लाख टन होने का अनुमान है। दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। वैसे भी प्रदेश में बिजली और पानी की कोई कमी नहीं है। ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर उड़द को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति क्विंटल छह सौ रुपये बोनस दिया जाएगा। चना, मसूर और तुअर के उपार्जन का प्रस्ताव भी भेजा है। इसमें 6.45 लाख टन चना और एक लाख टन मसूर शामिल है। इसी तरह तुअर भी प्राइस सपोर्ट स्कीम में खरीदा जाएगा। विपक्ष ने उठाए बिजली और गेहूं पंजीयन के मुद्दे इस पर प्रतिपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि 12 घंटे बिजली किसानों को मिलनी चाहिए। मक्का खरीदने का प्रस्ताव ही सरकार ने भारत सरकार को नहीं भेजा। गेहूं का पंजीयन सही नहीं हो रहा है। सर्वर डाउन होने की शिकायतें मिल रही हैं। ओलावृष्टि से नुकसान पर सर्वे और मुआवजे का आश्वासन उधर, प्रश्नकाल में ओलावृद्धि से गेहूं, धनिया, अफीम सहित अन्य फसलों के खराब होने का मुद्दा ध्यानाकर्षण के माध्यम से कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने उठाया। सभी ने कहा कि सर्वे ठीक से नहीं हो रहा है। अफीम की फसल नीमच, रतलाम और मंदसौर में खराब हो गई। गुना में धनिया बर्बाद हो गया। गेहूं की फसल खेत में लेट गई है। उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो गई। उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। फसल बीमा के लिए किसान परेशान हो रहे हैं। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि सर्वे कराया जा रहा है। कहीं 10 प्रतिशत नुकसान हुआ है तो कहीं 15। सर्वे होने के बाद सही स्थिति सामने आएगी और मापदंड के अनुसार सरकार राहत देगी।

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी में महिलाओं की हिस्सेदारी 3 साल में ढाई फीसदी बढ़ी, आधी दुनिया की ताकत में इजाफा

भोपाल  मप्र में पुरुषों के मुकाबले सरकारी नौकरी में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते तीन साल में ही बढ़ोतरी तकरीबन ढाई प्रतिशत देखी गई। जबकि पुरुषों का प्रतिशत घट गया। आर्थिक सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि क्लास-वन, क्लास-टू और क्लास-थ्री श्रेणी में महिलाओं की संख्या बीते वर्षों की तुलना में बढ़ी है। ये सब श्रेणियां अफसर के स्तर की होती हैं। तीनों में प्रतिशत 30 से ऊपर है, जबकि चतुर्थ श्रेणी में प्रतिशत 20.54 है। क्लास-टू में तो आंकड़ा 33 प्रतिशत से भी अधिक हो गया है। प्रदेश के कुल 22 विश्वविद्यालयों में जरूर महिलाओं की संख्या घटी है। दो विवि ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विवि और महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विवि उज्जैन में तो एक-एक ही महिला रह गई हैं। भोपाल के राष्ट्रीय विधि संस्थान विवि (एनएलआईयू) में सिर्फ तीन महिलाएं हैं। यह दस फीसदी से भी कम है। सर्वाधिक 37 से अधिक महिलाएं भोपाल के हिंदी विवि में हैं। नौकरियां घटीं… 2024 के मुकाबले 2025 में 16,396 नौकरी कम हुईं रिपोर्ट में यह जानकारी भी सामने आई कि सरकार के 54 विभागों में एक मार्च 2024 से एक मार्च 2025 के बीच सिर्फ 282 लोगों को नियमित (रेग्यूलर) नौकरी मिली है। यानी आंकड़ा 6 लाख 6 हजार 876 से बढ़कर 6 लाख 7 हजार 158 हुआ जो सिर्फ 0.05 प्रतिशत बढ़ोतरी बता रहा है। दूसरी तरफ सरकारी नौकरी से इतर राज्य के सार्वजनिक उपक्रम व अर्द्धशासकीय संस्थाओं में संख्या 3447 घट गई। पांच सालों में 2021 से 2025 के बीच सार्वजनिक उपक्रम व अर्द्धशासकीय संस्थाओं में 15 हजार लोगों की नौकरी घटी है। यही हाल नगरीय निकायों का भी है। यहां 450 नौकरी कम हुई। ग्रामीण निकायों में 38, विकास प्राधिकरण व विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में 98 और विवि में 130 नौकरियां कम हुई हैं। तमाम वर्गों को देखें तो 2024 के मुकाबले मप्र में 2025 में 16 हजार 396 नौकरी कम हुई है। नियमित कर्मचारी… भोपाल-इंदौर में और स्कूल शिक्षा में सर्वाधिक सरकार के नियमित कर्मचारियों में 39.8% जिलों में काम करते हैं। इसमें भोपाल में सर्वाधिक नियमित कर्मियों की संख्या 6.65% है। दूसरे नंबर पर इंदौर 4.47, फिर ग्वालियर 3.50 और धार 3.36 प्रतिशत है। इसी तरह प्रदेश में कुल नियमित कर्मचारियों में सर्वाधिक 37.66% लोग स्कूल शिक्षा विभाग में पदस्थ हैं। दूसरा नंबर गृह विभाग का है, जहां 15.18% लोग हैं। इसके बाद तीसरे और चौथे नंबर पर क्रमश आदिम जाति व अनुसूचित जाति कल्याण एवं लोक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग आते हैं।

इंदौर में एआई-सैटेलाइट मॉडल से भूमि मूल्य तय करने का प्रस्ताव, तैयार हो रहा है

 इंदौर आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में संपत्तियों की गाइडलाइन दरों में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। शासन से प्राप्त ऑनलाइन डाटा और स्थानीय स्तर पर एकत्र जानकारी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से विश्लेषण कर नई गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव अप्रैल से लागू होने वाली नई दरों का आधार बनेगा। पंजीयन विभाग ने पहली बार एआई और सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर नई गाइडलाइन तैयार करना शुरू किया है। इससे नए विकास का सही आकलन हो सकेगा और जमीन का मूल्य वास्तविक बाजार के अनुरूप हो सकेगा। संपत्ति सौदों का अध्ययन किया गया उप पंजीयन कार्यालयों में वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान हुए संपत्ति सौदों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। जिन स्थानों पर जमीन या संपत्ति की खरीद-फरोख्त तय गाइडलाइन दर से अधिक मूल्य पर हुई है, वहां दर बढ़ाने की सिफारिश की जा रही है। विशेष रूप से ऐसी लोकेशन को बढ़ोतरी में शामिल किया जा रहा है, जहां 10 प्रतिशत से अधिक दस्तावेज गाइडलाइन दर से ऊंचे मूल्य पर पंजीकृत हुए हैं। एआई तकनीक से बढ़ोतरी वाली लोकेशन का आकलन किया जा रहा है। अनुमान है कि जिले में तीन हजार से अधिक लोकेशन पर दरों में बढ़ोतरी होगी। मार्च में शासन को भेजेंगे प्रस्ताव वर्तमान में उप पंजीयन कार्यालयों में गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। एसडीएम की अध्यक्षता वाली समितियों की बैठक में स्वीकृति के बाद प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। यहां पर स्वीकृति के बाद दावे-आपत्ति बुलाकर निराकरण कर प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा। केंद्रीय मूल्यांकन समिति पूरे प्रदेश के प्रस्तावों का निराकरण कर प्रस्ताव स्वीकृति के लिए शासन को भेजेगी और इसके बाद नई दरें लागू होंगी। 270% तक बढ़ी थीं दरें मौजूदा वित्त वर्ष में भी कई क्षेत्रों में गाइडलाइन दरों में 20 से लेकर 270 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी। सबसे ज्यादा वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि में देखी गई थी। अधिक कीमत पर रजिस्ट्रियां होने और भूमि अधिग्रहण से जुड़े विरोध को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किए गए थे।

भोपाल में सेंट्रल विस्टा डिजाइन को मंजूरी, स्टेट कैपिटल कांप्लेक्स के निर्माण पर खर्च होंगे एक हजार करोड़ रुपये

भोपाल  नए सेंट्रल विस्टा (स्टेट कैपिटल कांप्लेक्स प्रोजेक्ट) का डिजाइन फाइनल हो गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की बैठक में इस योजना के प्राथमिक स्वरूप पर सहमति दे दी गई है। बैठक में हाउसिंग बोर्ड को चार महीने यानी 30 जून के पहले इसकी डीपीआर फाइनल करने को कहा है। इसके तहत बोर्ड ने टेंडर के माध्यम से आर्किटेक्ट के रूप में फर्म मेसर्स सीपी कुकरेजा का चुनाव कर लिया है। प्रस्तावित नया प्रोजेक्ट लगभग एक हजार करोड़ रुपये का होगा। 33 विभागों ने मांगी जगह जीएडी ने सभी सरकारी विभागों को पत्र लिखकर उनकी ऑफिस की जरूरतों और स्थानांतरण को लेकर जानकारी मांगी थी। जीएडी को 58 विभागों के 84 कार्यालयों से पत्र प्राप्त हुआ है। 33 विभाग के 59 कार्यालय सेंट्रल विस्टा में स्थानांतरण के इच्छुक हैं। इन विभागों ने कुल एक लाख तीन हजार वर्ग मीटर जगह मांगी है। बाकी छह कार्यालय रेनोवेशन व प्रस्तावित भवन के कारण सहमत नहीं है। 19 अन्य के अपने स्वतंत्र और पर्याप्त ऑफिस हैं। हाईटेक होगा ऑफिस सूत्रों के मुताबिक जिन भी ऑफिस में रेनोवेशन या निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, वहां काम रोका जा सकता है। किसी को भी नई जमीन आवंटित नहीं होगी। सभी को सेंट्रल विस्टा में ही जगह दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट में सभी आधुनिक तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कॉर्पोरेट की तरह यह हाईटेक आफिस होगा। 12 नये टावर बनाने का प्लान पुराने हो चुके सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह नया सेंट्रल विस्टा बनेगा। पुराने दोनों भवनों का निर्मित क्षेत्रफल 76,500 वर्ग मीटर है। नये सेंट्रल विस्टा में लगभग दोगुना यानी 1.60 लाख वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्रफल होगा। नई योजना में 12 नये टावर बनाने की योजना है। ग्रीन एरिया और पार्किंग पर विशेष फोकस पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हरित क्षेत्र को 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर 22.46 हेक्टेयर (लगभग चार गुना) किया जा रहा है। साथ ही अगले 50 वर्षों की जरूरतों को देखते हुए विशाल पार्किंग बनाई जाएगी। आम जनता की सुविधा के लिए मेट्रो स्टेशन से कवर्ड पाथ-वे, हाकर्स कार्नर और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था भी इस मास्टर प्लान का हिस्सा है। साझा छत से बिजली व शीतलता प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता 12 टावरों को जोड़ने वाली एक साझा छत (परगोला) होगी। इससे न केवल परिसर का तापमान कम रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर सोलर ऊर्जा भी पैदा की जाएगी। हालांकि, साधिकार समिति ने इस पर आने वाले अतिरिक्त खर्च का विवरण मांगा है। नागरिकों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट     प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आम नागरिकों की सुविधा के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। मप्र शासन की मंशा के अनुरूप बोर्ड इस पर तेजी से काम कर रहा है। – गौतम सिंह, कमिश्नर, एमपी हाउसिंग बोर्ड  

आस्था पर संकट! ओंकारेश्वर में नर्मदा में गिर रहा सीवेज, पवित्रता पर उठे सवाल

खंडवा देश के बारह ज्योतिर्लिंग में शामिल ओंकारेश्वर में मां नर्मदा का आंचल मैला हो रहा है। यहां नालों का पानी नदी में मिल रहा है। नर्मदा में स्नान और भगवान ओंकारेश्वर के दर्शनार्थ देशभर से श्रद्धालु यहां आते हैं लेकिन घाटों पर गंदगी और गंदे पानी की वजह से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ हो रहा है। वहीं ओंकारेश्वर की छवि भी धूमिल हो रही है। सिंहस्थ-2028 को लेकर तीर्थनगरी में अरबों रुपये के विकास कार्य हो रहे हैं, लेकिन यहां बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिला प्रशासन और नगर परिषद द्वारा गंदे पानी के उपचार के लिए एमपीयूडीसी को जिम्मेदार ठहरा कर दायित्वों की इतिश्री कर ली जाती है। तीर्थ नगरी में नर्मदा की बदहाली को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी वीडियो बहुत प्रसारित हो रहे हैं।   ओंकारेश्वर में पुण्य सलिला मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त करने पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद हालातों में बदलाव नहीं हो रहा है। नर्मदा क्षेत्र में नालों के माध्यम से लाखों लीटर गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन द्वारा पानी उपचार के बाद छोड़ने का दावा किया जाता है। वहीं स्थानीय लोग इसे खानापूर्ति बता रहे हैं। ओंकार मठ में मिल रहा गंदा पानी समाजसेवी व पर्यावरण प्रेमी प्रदीप ठाकुर ने बताया कि ओंकार मठ घाट पर बना वाटर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पिछले कई दिनों से बंद पड़ा है। इसकी क्षमता प्रतिदिन ढाई लाख लीटर पानी शुद्ध करने की है। ऐसे में कई क्षेत्रों का गंदा पानी अब सीधा नाली के माध्यम से ओंकार मठ घाट पर मिल रहा है। यह ओंकार पर्वत परिक्रमा का रास्ता भी है। घाट पर भी नाली का पानी फैलता रहता है। शिवपुरी क्षेत्र में चार से पांच स्थानों से बस्ती का पानी सीधे नर्मदा नदी में जाता है। इस ओर नगर परिषद ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं लगाए हैं। कांग्रेस ने भी लगाए थे आरोप ओंकारेश्वर में नर्मदा प्रदूषित होने से स्थानीय लोगों के साथ ही हाल ही में कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने घाटों का जायजा लेकर नर्मदा में गंदा पानी मिलने के आरोप लगाए थे। कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने ओंकारेश्वर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट क्षमता अनुरूप नहीं होने और कई बंद होने के आरोप लगाए थे। इससे नर्मदा नदी में होटल और घरों के शौचालय का गंदा पानी मिल रहा है, जो प्रशासन की नाकामी और श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ है। दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद ओंकारेश्वर में पांच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट होने के बाद भी नर्मदा का आंचल मैला हो रहा है। नगर का गंदा पानी आठ नालों के माध्यम से नर्मदा में मिल रहा है। ओंकारेश्वर में चार स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए गए, लेकिन आरोप है कि इसमें भी तीन प्लांट चल रहे है, दो बंद हैं, जिससे लाखों लीटर गंदा पानी प्रतिदिन नर्मदा में मिल रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट चालू होने का दावा ओंकारेश्वर में एमपीयूडीसी द्वारा संचालित एसटीपी की क्षमता और क्रियाशीलता को लेकर हमेशा आरोप लगते रहे हैं। एमपीयूडीसी के वरिष्ठ अधिकारी ट्रीटमेंट प्लान सही ढंग से काम करने के दावे करने के साथ ही इनकी कार्य क्षमता बढ़ाने का आश्वासन देखकर पल्ला झाड़ लेते हैं।