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जनप्रतिनिधियों की अनदेखी नहीं चलेगी! यूपी सरकार का आदेश, 10 मिनट में कॉल रिस्पॉन्स अनिवार्य

लखनऊ यूपी में जनप्रतिनिधियों की शिकायत अब दूर हो जाएगी। अफसर अब उनका फोन उठाने में आनाकानी नहीं कर सकते। 17 फरवरी को प्रदेश की विधानसभा तक में यह मामला उठ गया था। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा था कि विधायकों के फोन नहीं उठाने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। अब प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद को अधिक सुगम, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए एक और कदम उठाया गया है। 25 फरवरी से जनप्रतिनिधि-अधिकारी ‘संवाद सेतु’ (जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर) व्यवस्था लागू की जाएगी। यह व्यवस्था पायलट प्रॉजेक्ट के रूप में गाजियाबाद, हरदोई और कन्नौज जनपदों में शुरू होगी। इस संबंध में समयबद्ध तैयारियों को लेकर समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने तीनों जनपदों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं। ताकि योजना सुचारु रूप से लागू हो सके। फोन न उठने की समस्या का समाधान इस नई व्यवस्था के अंतर्गत हर जनपद में जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर स्थापित किया जाएगा। अगर किसी अधिकारी द्वारा जनप्रतिनिधि की कॉल 10 मिनट के भीतर रिसीव या कॉल बैक नहीं की जाती है, तो जनप्रतिनिधि कमांड सेंटर को सूचित कर सकेंगे। कमांड सेंटर संबंधित अधिकारी को तुरंत कॉल बैक के लिए निर्देशित करेगा और संवाद सुनिश्चित करेगा। सम्मान भी, जिम्मेदारी भी यह व्यवस्था केवल कार्य दिवसों और कार्यालय समय में और सरकारी (CUG) नंबरों पर लागू होगी। बेहतर संवाद और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही की स्थिति में रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। गौरतलब है कि यह पहल विधानसभा में उठे मुद्दे के बाद अमल में लाई जा रही है। इस संबंध में राज्यमंत्री असीम अरुण ने सुझाव दिया था। विधानसभा में हुई थी ये बात नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा विधानसभा में यह मामला उठाए जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्पष्ट किया था कि कार्यपालिका द्वारा विधायिका और न्यायापालिका के क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप करने की सूचना संविधान के प्रावधानों के संदर्भ में होने के कारण इसे स्वीकारा गया है। उन्होंने कहा था कि नियम 300 के अंतर्गत नेता प्रतिपक्ष की सूचना के बारे में चर्चा से यह परिलक्षित होता है कि अधिकारियों के स्तर पर विधायकों को सहयोग नहीं किया जा रहा है। यह चिंता का विषय है। यह स्पष्ट करना भी उपयुक्त होगा कि संविधान के अनुच्छेद 164 (2) के अंतर्गत मंत्री परिषद राज्य की विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी। विधानसभा के किसी सदस्य द्वारा यदि अधिकारियों से जनहित के कार्यों के लिए संपर्क किया जाता है तो वह सम्मान और समय दें और सुनवाई का अवसर प्रदान करें।  

मिडिल ईस्ट की नई रणनीति: नेतन्याहू का ‘हेक्सागन एलायंस’ क्या बदल देगा समीकरण?

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से दो दिनों के आधिकारिक दौरे पर इजरायल जा रहे हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले सप्ताह इस खबर पर मुहर लगाई थी, जिसके बाद भारत ने भी इसकी पुष्टि की है। यहां पीएम मोदी नेतन्याहू और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से मुलाकात करेंगे। वहीं इस दौरान उनका 'नेसेट' (इजरायली संसद) को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है। दौरे से पहले नेतन्याहू ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत रिश्तों पर जोर देते हुए कहा है कि पीएम की यह यात्रा कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ एक नया गठबंधन बनाने में मदद करेगी। नेतन्याहू ने एक नए वैश्विक संगठन ‘हेक्सागन एलायंस’ का जिक्र किया है। क्या बोले बेंजामिन नेतन्याहू? नेतन्याहू ने रविवार को कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत में इजरायल की संसद का जिक्र करते हुए कहा, "बुधवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां पहुंचेंगे। वह नेसेट में भाषण देंगे।" नेतन्याहू ने दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी की तारीफ की। उन्होंने कहा, "रिश्तों का ताना-बाना और मजबूत हुआ है, और मोदी यहां इसलिए आ रहे हैं ताकि हम इसे और भी मजबूत कर सकें।" नेतन्याहू ने आगे कहा कि इजरायल-भारत धुरी एक बड़े क्षेत्रीय गठबंधन का हिस्सा होगी, जिसे उन्होंने ‘हेक्सागन’ नाम दिया है। क्या है हेक्सागन एलायंस? ‘हेक्सागन ऑफ एलायंस’ छह देशों की एक रणनीतिक समूह होगी, जिसकी पहल नेतन्याहू ने की है। इसका मकसद पश्चिम एशिया और भूमध्यसागर क्षेत्र में आर्थिक, कूटनीतिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाना है। इसे ईरान के प्रभाव और क्षेत्रीय खतरों का जवाब माना जा रहा है। इस प्रस्तावित समूह में इजरायल, भारत, ग्रीस और साइप्रस का नाम लिया गया है। वहीं कुछ अरब और अफ्रीकी देशों का जिक्र किया गया है, लेकिन उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। नेतन्याहू ने कहा कि वे मध्य पूर्व के आसपास या भीतर एक पूरा हेक्सागन गठबंधन बनाना चाहते हैं, जिसमें भारत, अरब देश, अफ्रीकी देश, भूमध्यसागर के देश जैसे ग्रीस और साइप्रस तथा एशिया के कुछ अन्य देश शामिल होंगे, जिनका विवरण वे बाद में देंगे। क्या मकसद? नेतन्याहू के मुताबिक इस गठबंधन का मकसद कट्टर धुरियों के खिलाफ समान सोच रखने वाले देशों को एक साथ लाना है। उन्होंने कट्टर ‘शिया धुरी’ के जिक्र के साथ ही उभरती ‘कट्टर सुन्नी धुरी’ का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक नेतन्याहू का यह दांव ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ को सीधी चुनौती है। हालांकि अब तक किसी भी देश ने इस प्रस्ताव को आधिकारिक समर्थन नहीं दिया है। इतना ही नहीं ग्रीस और साइप्रस उसी इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के सदस्य हैं, जिस आईसीसी ने गाजा में युद्ध अपराधों के आरोप में नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अगर वे इन देशों में जाते हैं तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नेतन्याहू का सपना अभी दूर है।

बिहार सरकार का दावा- खजाना खाली नहीं, होली से पहले मिलेगी तनख्वाह

पटना बिहार के सरकारी कर्मचारियों को फरवरी महीने की सैलरी होली से पहले ही खाते में मिल जाएगी। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को विधान परिषद में यह घोषणा की। उन्होंने बिहार का खजाना खाली होने के आरोप को भी पूरी तरह खारिज कर दिया। दरअसल, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत अन्य विपक्षी दलों के नेता आरोप लगा रहे हैं कि बिहार का सरकारी खजाना खाली है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को कहा था कि आने समय में सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं होंगे। विधान परिषद के बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान मंगलवार को दूसरी पाली में बिहार विनियोग विधेयक (संख्या 2) 2026 पर चर्चा हुई। विनियोग विधेयक सदन से पारित कर दिया गया। इस विधेयक पर बोलते हुए वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा, “विपक्ष के जो लोग कह रहे हैं कि खजाना खाली है, तो सरकार ने निर्णय लिया है कि फरवरी महीने का वेतन होली से पहले ही दे दिया जाएगा।” उन्होंने विपक्षी सदस्यों की चुटकी लेते हुए यह भी कहा, “हम कोशिश करेंगे कि फरवरी में विरोधी दल का तनख्वाह नहीं मिले।” वित्त मंत्री की इस बात पर सत्ता पक्ष के सदस्य ठहाके लगाने लगे। तेजस्वी ने क्या कहा था दरअसल, आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा था कि बीते 21 साल से जनता ने एनडीए सरकार को मौका दिया। इस दौरान बिहार सबसे गरीब और बेरोजगार राज्य बन गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 21 सालों में केवल अपराध, भ्रष्टाचार, तानाशाही का राज रहा। भ्रष्टाचारियों ने सरकार का खजाना खाली कर दिया। कुछ दिनों बाद कर्मचारियों को पैसा देने की भी स्थिति बिहार सरकार की नहीं रहेगी। तेजस्वी ने दावा किया कि सरकार में कोई कार्रवाई और सुनवाई नहीं हो रही है। आरजेडी ने पूछा- विशेष राज्य के दर्जे का क्या हुआ, मंत्री ने दिया जवाब आरजेडी के एमएलसी अब्दुल बारी सिद्दिकी ने मंगलवार को सदन में मुद्दा उठाया कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का कोई उल्लेख बजट में नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्पेशल इकॉनोमिक जोन का पैसा गुजरात में चला जाता है, बिहार को नहीं मिलता है। इस पर, वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद देश की इकॉनमी दुनिया में तीसरे नंबर पर जा रही है। अब कोई स्पेशल कैटगरी का राज्य नहीं होता है। केंद्र सरकार की ओर से बिहार को नेशनल हाईवे समेत अन्य योजनाओं में बहुत अधिक राशि दी जा रही है। केंद्र की इस मदद से बिहार काफी विकास कर रहा है।  

शर्टलेस प्रदर्शन पर कार्रवाई: उदय भानु चिब को 4 दिन की पुलिस रिमांड

नई दिल्ली दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान शर्टलेस प्रदर्शन केस में मंगलवार को गिरफ्तार किए गए यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब को 4 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि ने एआई समिट प्रोटेस्ट में चिब की भूमिका के बारे में उनसे पूछताछ करने के लिए दिल्ली पुलिस को 4 दिन की कस्टडी दी है। क्या है मामला एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस सदस्यों ने बीते शुक्रवार को सम्मेलन स्थल भारत मंडपम के हॉल नंबर 5 के अंदर शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने सरकार तथा भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के खिलाफ नारे छपी हुई टी-शर्ट हाथ में लेकर नारे लगाए थे, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों द्वारा उन्हें वहां से हटा दिया गया। आरोपी पक्ष ने अभियोजन पक्ष की रिमांड याचिका का विरोध किया तथा इस बात से इनकार किया कि कोई "दंगे जैसी स्थिति" बनी थी। प्रदर्शन में शामिल लोगों को पीटने का आरोप उन्होंने हिरासत में लेकर टी-शर्ट बरामद करने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोग निहत्थे थे और उन्हें पीटा गया था। आरोपी ने इसे "आलोचना का साधारण मामला" बताते हुए सवाल किया, "क्या हम आलोचना भी नहीं झेल सकते?" उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस पर हमला करने या देश की संप्रभुता को खतरे में डालने का कोई इरादा नहीं था। यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के वकील ने यह दलील दी कि उनके मुवक्किल घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे और उनसे पहले ही पूछताछ की जा चुकी है। उन्होंने रिमांड याचिका को "तुच्छ और अप्रासंगिक" बताया। साथ ही, उन्होंने अभियोजन पक्ष से प्रथम दृष्टया कोई साजिश का प्रमाण प्रस्तु करने के लिए कहा। सरकारी वकील अतुल कुमार श्रीवास्तव ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि आरोपी घटनास्थल पर खुद मौजूद नहीं थे, लेकिन ‘हर चीज पर वह निगरानी कर रहे थे’ और वह ही इस घटना के 'मास्टरमाइंड' थे। उन्होंने कहा कि आरोपी की इसकी पर्याप्त जानकारी थी कि इस कृत्य से दंगे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है और यूथ कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में चिब की ‘एक्सट्रा जिम्मेदारी’ है। दिल्ली पुलिस शुक्रवार को इस सिलसिले में बिहार से यूथ कांग्रेस के नेशनल सेक्रेटरी कृष्ण हरि; बिहार के स्टेट सेक्रेटरी कुंदन यादव; उत्तर प्रदेश के स्टेट प्रेसिडेंट अजय कुमार; और तेलंगाना से नरसिम्हा यादव को समिट में एक एग्जीबिशन हॉल के अंदर 'शर्टलेस प्रोटेस्ट' करने के लिए गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरों वाली टी-शर्ट पहनी हुई थीं, जिन पर सरकार और इंडिया-US ट्रेड डील के खिलाफ नारे लिखे थे। यह भी कहा जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने वेन्यू पर तैनात सिक्योरिटी वालों और पुलिस स्टाफ के साथ हाथापाई भी की थी।  

रिकॉर्ड छुपाने के मामले में देवेंद्र यादव की अर्जी नामंजूर

बिलासपुर छत्तीसगढ़ भिलाई से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने हाई कोर्ट में लंबित चुनावी याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद उनकी विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी है। बता दें इससे पहले हाई कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज करते हुए चुनावी याचिका को सुनवाई योग्य माना था। विधायक देवेंद्र पर चुनाव के दौरान गलत जानकारी देने और आपराधिक रिकार्ड छुपाने का आरोप है। भिलाई विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रहे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय चुनाव हार गए थे। इसके बाद देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देते हुए प्रेमप्रकाश पांडेय ने हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की। इसमें कहा गया कि देवेंद्र यादव ने लोक प्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन किया है। चुनाव आयोग हर प्रत्याशी से शपथपत्र में आपराधिक और संपत्ति संबंधी मामलों की जानकारी मांगता है। लेकिन, आयोग से जानकारी छिपाना प्रविधानों का उल्लंघन है। छत्तीसगढ़ के 21 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले, दो साल में चार नए केस यदि कोई उम्मीदवार इस तरह की जानकारी छिपाता है, तो उसका निर्वाचन शून्य घोषित किया जा सकता है। याचिका में कहा है कि देवेंद्र यादव ने जनप्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन कर अपनी संपत्ति की जानकारी छिपाई है। साथ ही आपराधिक मामलों का भी शपथत्र में जिक्र नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी स्पेशल लीव पिटीशन हाई कोर्ट ने भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम प्रकाश पांडेय की चुनाव याचिका स्वीकार कर लिया था। साथ ही निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को कोर्ट ने सुनवाई योग्य माना। विधायक देवेंद्र यादव ने इस याचिका को खारिज करने की मांग की थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ देवेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। प्रारंभिक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देवेंद्र यादव को राहत दी थी। जिसमें चुनाव याचिका पर स्टे दे दिया था। याचिका को पूरी तरह से गलत बताया था सुप्रीम कोर्ट में विधायक देवेंद्र यादव ने याचिका को पूरी तरह से गलत बताया था। अधिवक्ता ने दलील दी थी कि हाई कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन को खारिज करने की गलती की है। जिससे प्रेम प्रकाश पाण्डेय की चुनाव याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठता है। मामले में प्रेम प्रकाश पांडेय की तरफ से उनके वकील ने तर्क दिया। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विधायक देवेंद्र यादव की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी है।  

इंडियन टीम की इमेज पर असर! गौतम गंभीर की पॉलिटिक्स पर पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर का बड़ा बयान

नई दिल्ली अहमद शहजाद ने इंडिया के कोच गौतम गंभीर की आलोचना करते हुए कहा कि वह इंडियन टीम के माहौल में पॉलिटिक्स ले आए हैं। टी20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली बड़ी हार के बाद गौतम गंभीर पर प्रेशर बढ़ रहा है। पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर अहमद शहजाद ने इंडिया के कोच गौतम गंभीर की आलोचना करते हुए कहा कि वह इंडियन टीम के माहौल में पॉलिटिक्स ले आए हैं। टी20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली बड़ी हार के बाद गौतम गंभीर पर प्रेशर बढ़ रहा है। सेमीफाइनल की दौड़ में भारत और तब पिछड़ा जब वेस्टइंडीज ने जिम्बाब्वे के खिलाफ बड़े अंतर से जीत दर्ज की। टी20 वर्ल्ड कप में भारत की इस स्थिति के बाद हर कोई कोच गौतम गंभीर के फैसलों पर सवाल उठा रहा है। भारत का अगला सुपर-8 का मुकाबला जिम्बाब्वे से 26 फरवरी को है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ अहम मुकाबले में अक्षर पटेल की जगह वॉशिंगटन सुंदर को चुनने पर गंभीर की आलोचना हुई, जिसमें आर अश्विन समेत कई खिलाड़ियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए थे। हारना मना है पर बात करते हुए, शहजाद ने कहा कि 2019-24 के दौरान भारतीय राजनीति में अपने समय के दौरान गंभीर की सोच बदल गई, जब वे पूर्वी दिल्ली से सांसद थे। शहजाद ने कहा, “जब आप किसी भी फील्ड में जाते हैं, तो पूरा फोकस करना होता है। गंभीर पॉलिटिक्स में आए, और जाहिर है उनका माइंडसेट बदल गया। वह पॉलिटिक्स में ज्यादा सफल नहीं रहे, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्होंने वही पॉलिटिक्स टीम के माहौल में ला दी है। गौतम गंभीर की इस सारी पॉलिटिक्स ने इंडियन टीम की इमेज को नुकसान पहुंचाया है।” शहजाद ने गंभीर पर अपने रिसोर्स का सही इस्तेमाल न करने का आरोप लगाया और कुलदीप यादव का उदाहरण दिया, जिन्होंने मौजूदा T20 वर्ल्ड कप में सिर्फ एक मैच खेला है। शहजाद ने आगे कहा, "टीम के रिसोर्स का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है – गौतम गंभीर उन्हें ठीक से मैनेज नहीं कर रहे हैं। आपके पास कुलदीप यादव जैसा मैच-विनर है, लेकिन उसे सही तरीके से हैंडल नहीं किया जा रहा है।" उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के साथ मैच के बाद एक घटना हुई थी, जिसमें सूर्यकुमार यादव ने उन्हें बाहर कर दिया था। लोग अब कह रहे हैं कि शायद कुलदीप यादव को डिसिप्लिनरी इशू या सूर्यकुमार यादव के साथ कोई प्रॉब्लम की वजह से बाहर किया गया। नहीं तो, उन्हें बाहर नहीं किया जाता। कुलदीप यादव वैरिएशन लाते हैं और मैच-विनर हैं।"  

कर्मचारियों की सुरक्षा पर सख्त पुष्कर सिंह धामी, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

हरिद्वार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी कार्यालयों और कार्यस्थलों पर अधिकारी- कर्मचारी और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए मुख्य सचिव को SOP बनाने के निर्देश दिए हैं।  उत्तराखण्ड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी से भेंट की। पदाधिकारियों ने 21 फरवरी को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुई घटना के साथ ही हाल के समय में अन्य स्थानों पर सरकारी अधिकारी- कर्मचारियों के साथ हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए, ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार कार्मिकों के मान – सम्मान और सुरक्षा को लेकर हमेशा गंभीर रही है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को फोन कर अधिकारी,  कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए SOP तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने DGP को भी निर्देश दिए हैं कि सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, साथ ही इस तरह की घटनाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए, उन्होंने SSP देहरादून को भी शिक्षा निदेशालय में हुई घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। इस मौके पर राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री प्रताप सिंह पंवार, उत्तराखण्ड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष  राम सिंह चौहान, महामंत्री  मुकेश बहुगुणा एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।  

सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, CJI की अगुवाई वाली पीठ भाजपा नेता पर भड़की

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो टूक कहा है कि वह आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल या धोखाधड़ी से जारी होने के दावों की जांच नहीं कर सकता, और ऐसे मामलों को केंद्र सरकार को देखना चाहिए। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह बात कही। पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या शरणार्थियों को कथित रूप से फर्जी आधार कार्ड जारी किए जाने के आरोपों पर सुनवाई करते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों की जांच अदालत के दायरे में नहीं आती और इस विषय पर केंद्र सरकार से संपर्क किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा हो सकता है, लेकिन इसके लिए विस्तृत जांच और नीतिगत निर्णय की आवश्यकता है, जो न्यायालय के बजाय सरकार के स्तर पर ही संभव है। भाजपा नेता ने क्या मुद्दा उठाया था? भाजपा नेता और एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने SIR प्रक्रिया में आधार कार्ड की स्वीकृति और इस्तेमाल के बारे में कोर्ट द्वारा जारी एक क्लैरिफिकेशन के संबंध में यह मुद्दा उठाया गया था। इस मामले में कोर्ट से और स्पष्टीकरण की मांग करते हुए उपाध्याय ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में, खासकर रोहिंग्याओं को, आधार कार्ड धोखाधड़ी से जारी किए जा रहे हैं। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि उपाध्याय रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट सहित कानून में बदलाव के लिए भारत संघ को रिप्रेजेंटेशन दे सकते हैं। आधार को हमें मानना होगा: SC बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक,जस्टिस बागची ने आगे कहा, “अगर आधार को इंडस्ट्रियल लेवल पर धोखे से खरीदा जाता है, तो इसे कानूनी तौर पर रेगुलेट किया जाना चाहिए। आधार को पहचान के सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए एक डॉक्यूमेंट के तौर पर लाया गया था और हमें यह मानना ​​होगा। आधार पर नागरिकता का पता लगाने का कोई सवाल ही नहीं है।” CJI सूर्यकांत ने क्या कहा? CJI सूर्यकांत ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा, "इसकी गहरी जांच की जरूरत है और कोर्ट इसके लिए कोई फोरम नहीं है।" मुख्य न्यायाधीश ने भी कहा कि इस तरह के आरोपों की गहराई से जांच की जरूरत है और अदालत इस तरह के मामलों के लिए उपयुक्त मंच नहीं है। अदालत का यह रुख साफ संकेत देता है कि आधार कार्ड के दुरुपयोग जैसे संवेदनशील मामलों में नीति निर्माण और कार्रवाई का दायित्व कार्यपालिका पर ही है। मामला क्या है? सितंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) और उसकी अथॉरिटीज को बिहार राज्य की रिवाइज़्ड वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने या हटाने के मकसद से पहचान के सबूत के तौर पर आधार कार्ड को स्वीकार करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट, 1950 के सेक्शन 23(4) के मुताबिक, आधार कार्ड किसी व्यक्ति की पहचान साबित करने के मकसद से बताए गए डॉक्यूमेंट्स में से एक है। कोर्ट ने तब आदेश दिया था, "इस मकसद के लिए, अथॉरिटीज़ आधार कार्ड को 12वां डॉक्यूमेंट मानेंगी। हालांकि, यह साफ़ किया जाता है कि अथॉरिटीज़ को दूसरे बताए गए डॉक्यूमेंट्स की तरह, आधार कार्ड के असली होने और असली होने को वेरिफ़ाई करने का अधिकार होगा, और इसके लिए वे और सबूत/डॉक्यूमेंट्स मांगेंगे।"  

टीम इंडिया को झटका, पारिवारिक कारणों से रिंकू सिंह का अचानक प्रस्थान

नई दिल्ली  रिंकू सिंह के पिता की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई है। रिंकू सिंह के पिता को 4th स्टेज का लिवर कैंसर है। वह वेंटिलेटर पर हैं। वह अचानक इंडिया कैंप छोड़कर फैमिली इमरजेंसी की वजह से घर लौट गए हैं। रिंकू सिंह जारी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम का हिस्सा है। रिंकू सिंह ने अचानक छोड़ा टीम इंडिया का साथ, पिता के लिए आनन फानन में लौटे घर टीम इंडिया के स्टार फिनिशर रिंकू सिंह अचानक इंडिया कैंप छोड़कर फैमिली इमरजेंसी की वजह से घर लौट गए हैं। रिंकू सिंह जारी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम का हिस्सा है। भारत का अगला मैच जिम्बाब्वे स 26 फरवरी को है। रिपोर्ट्स के अनुसार रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई है। रिंकू सिंह के पिता को 4th स्टेज का लिवर कैंसर है। वह वेंटिलेटर पर हैं। बता दें, रिंकू सिंह के लिए अभी तक टी20 वर्ल्ड कप कुछ शानदार नहीं रहा है। 5 मैचों में उन्होंने मात्र 24 रन बनाए हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ पिछले मैच में तो वह खाता भी नहीं खोल पाए थे। रिंकू के पिता खानचंद सिंह की हालत गंभीर है और उन्हें ग्रेटर नोएडा के एक लोकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। रिंकू सोमवार, 23 फरवरी को इंडियन टीम के साथ चेन्नई गए थे, जहां भारत को सुपर-8 का अगला मैच जिम्बाब्वे से खेलना है। सूत्रों ने बताया कि लेफ्ट-हैंडर अपने पिता को देखने के लिए मंगलवार सुबह चेन्नई से निकले, जो लाइफ सपोर्ट (वेंटिलेटर) पर हैं। उनके 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ टीम के मैच में खेलने की संभावना नहीं है। इस घटना के कारण रिंकू मंगलवार शाम को प्रैक्टिस के लिए उपलब्ध नहीं थे। भारत की सेमीफाइनल की राह हुई कठिन साउथ अफ्रीका से भारत को मिली 76 रनों से हार के बाद टीम इंडिया की सेमीफाइनल की राह कठिन हो गई है। इसके बाद वेस्टइंडीज ने जिम्बाब्वे को हराकर भारत की मुश्किलें और बढ़ा दी है। टीम इंडिया को अगर सेमीफाइनल की दौड़ में बना रहना है तो उन्हें जिम्बाब्वे के खिलाफ सिर्फ जीत नहीं, बल्कि बड़ी जीत दर्ज करनी होगी। इसके अलावा साउथ अफ्रीका के खिलाफ वेस्टइंडीज की हार की दुआ करनी होगी।

भोजशाला सर्वे रिपोर्ट पर बड़ा खुलासा: दो साल पहले ही पक्षकारों तक पहुंच चुकी थी रिपोर्ट

इंदौर धार भोजशाला मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की जिस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट सीलबंद मान रहा था, वह दो साल से पक्षकारों के पास है। यह खुलासा सोमवार को उस वक्त हुआ जब हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए सर्वेक्षण रिपोर्ट के बारे में जानकारी मांगी। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट पूर्व में ही पक्षकारों को सौंपी जा चुकी है, लेकिन यह जानकारी न शासन ने सुप्रीम कोर्ट को दी न पक्षकारों ने, हालांकि इसके पीछे किसी की कोई दुर्भावना नहीं थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट पक्षकारों के पास है, वे चाहें तो इसे लेकर अपने सुझाव, आपत्ति 16 मार्च से पहले लिखित में कोर्ट में दे सकते हैं। आपत्ति, सुझाव पर सुनवाई के बाद कोर्ट इस मामले को अंतिम सुनवाई के लिए नियत कर देगी। बता दें कि भोजशाला मामले को लेकर हाई कोर्ट में चार याचिकाएं और एक अपील चल रही है। सोमवार को इन सभी की सुनवाई एक साथ हुई। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को आदेश दिया था कि वह ज्ञानवापी की तरह भोजशाला का भी विज्ञानी सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह सर्वे 98 दिन चला जिसके बाद एएसआई ने 2189 पेज की सर्वे रिपोर्ट तैयार की थी। 4 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट के आदेश पर इस रिपोर्ट की प्रतिलिपि सभी पक्षकारों को उपलब्ध करवाई गई थी। इस बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया जिसके बाद कोर्ट ने रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में रखने के आदेश दिए थे।   जिन पक्षकारों के पास एएसआई सर्वे रिपोर्ट की प्रति है उन्होंने बताया कि-     एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सर्वे में पाए गए स्तंभों और स्तंभों की कला और वास्तुकला से यह कहा जा सकता है ये स्तंभ पहले मंदिर का हिस्सा थे, बाद में मस्जिद के स्तंभ बनाते समय उनका पुन: उपयोग किया गया था।     मौजूदा संरचना में चारों दिशाओं खड़े 106 और आड़े 82 इस तरह से कुल 188 स्तंभ मिले हैं। इन सभी की वास्तुकला से इस बात की पुष्टि होती है कि ये स्तंभ मूल रूप से मंदिरों का ही हिस्सा थे।     उन्हें वर्तमान संरचना के लिए पुनर्उपयोग में लाने के लिए उन पर उकेरी गई देवताओं और मनुष्यों की आकृतियों को विकृत कर दिया गया।     मानव और जानवरों की कई आकृतियां, जिन्हें मस्जिदों में रखने की अनुमति नहीं है, उन्हें छैनी जैसे किसी वस्तु का इस्तेमाल कर विकृत किया गया था।     एएसआई ने रिपोर्ट में यह दावा भी किया है कि मौजूदा संरचना में संस्कृत और प्राकृत भाषा में लिखे कई शिलालेख मिले हैं, जो भोजशाला के ऐतिहासिक, साहित्यिक और शैक्षिक महत्व को उजागर करते हैं।     एएसआई टीम को सर्वे में एक ऐसा शिलालेख मिला जिस पर परमार वंश के राजा नरवर्मन का उल्लेख है। नरवर्मन ने 1094-1133 इस्वी के बीच शासन किया था। सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि पश्चिम क्षेत्र में लगाए गए कई स्तंभों पर उकेरे गए ''कीर्तिमुख'', मानव, पशु और मिश्रित चेहरों वाले सजावटी सामग्री को नष्ट नहीं किया गया था।