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हिंदू लड़की-मुस्लिम युवक की शादी पर सवाल क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने कहा—समाज को रखना होगा ‘मोटी चमड़ी’

नई दिल्ली 'Yadav Ji ki love story' फिल्म के खिलाफ दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिका के जरिए विश्व यादव समाज ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। कोर्ट का कहना है कि फिल्म के नाम में ऐसा कोई भी शब्द नहीं है, जो यादव समुदाय की खराब छवि पेश कर रहा हो। इस दौरान अदालत ने हाल ही में घूसखोर पंडत के मामले में दिए फैसले का भी जिक्र किया। याचिका में फिल्म बैन की मांग याचिका में कहा गया था कि फिल्म का नाम यादव समाज की एक आपत्तिजनक तस्वीर बना रहा है। साथ ही दावा किया गया कि फिल्म में दिखाया गया है कि यादव समाज से आने वाली एक हिंदू लड़की मुस्लिम पुरुष के प्रेम में पड़ जाती है। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील का कहना था कि फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट नहीं हुआ सहमत याचिका पर जस्टिस बीवी नागरत्न और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच सुनवाई कर रही थी। बेंच ने सवाल किया, 'हिंदू लड़की का मुस्लिम लड़के से शादी करना देश के ताने बाने को खराब कर रहा है।' बेंच ने कहा, 'हमने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री देखी है। मुख्य शिकायत यह है कि आने वाली फिल्म का नाम समाज में यादव समुदाय की छवि खराब करता है। इसलिए तर्क दिया जा रहा है कि फिल्म का नाम बदला जाना चाहिए। हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि किसी फिल्म का शीर्षक किसी समुदाय को गलत तरीके से कैसे पेश कर सकता है। फिल्म के शीर्षक में कहीं भी ऐसा कोई शब्द नहीं है जो यादव समुदाय को खराब रोशनी में दिखाता हो। ये आशंकाएं पूरी तरह से निराधार हैं।' दूसरी फिल्म का किया जिक्र अदालत ने कहा कि घूसखोर का अंग्रेजी में मतलब भ्रष्ट होता है। ऐसे में एक समुदाय से गलत बात जोड़ी जा रही थी। कोर्ट ने कहा, 'इस केस में ऐसी कोई भी गलत बात यादव समाज से नहीं जोड़ी गई है।' उन्होंने कहा कि यह नाम किसी भी तरह से यादव समुदाय को गलत तरह से नहीं दिखा रहा है। इस दौरान बेंच ने बेंडिट क्वीन फिल्म का भी जिक्र किया। बेंच ने कहा, 'बेंडिट क्वीन फिल्म में वो कह रहे थे कि गुज्ज समुदाय को गलत तरीके से दिखाया गया है। तब इस कोर्ट ने कहा था कि नहीं ऐसा नहीं है।' कोर्ट ने कहा, 'मोटी चमड़ी रखें। यह काल्पनिक है। एक सप्ताह में सब खत्म हो जाएगा। कोई भी आजकल थियेटर नहीं जा रहा है। सभी फोन पर देख रहे हैं।'  

जहरीला पानी बना जानलेवा, दो लोगों की मौत पर TS सिंहदेव का हमला—स्वास्थ्य सुरक्षा ट्रिपल इंजन सरकार की जिम्मेदारी

सरगुजा गर्मी की आहट के साथ ही अंबिकापुर शहर में पीलिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। नमनाकला खटिकपारा में 13 वर्षीय बालक दिव्यांश राय की पीलिया से मौत के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इससे पहले 22 फरवरी को झंझटपारा नवापारा निवासी 40 वर्षीय सोना लाल की भी पीलिया से मौत हो चुकी है। लगातार हो रही मौतों से लोगों में दहशत का माहौल है। वहीं पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया है। दूषित पेयजल से फैली बीमारी, 40 से अधिक लोग पीलिया से ग्रसित शहर में फैल रहे पीलिया के पीछे दूषित पेयजल आपूर्ति को मुख्य कारण माना जा रहा है। नवागढ़, घुटरापारा, नमनाकला सहित कई वार्डों में पीलिया के मरीज सामने आ चुके हैं। अब तक 40 से अधिक लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई किया जा रहा है। कई बार शिकायत के बावजूद नगर निगम द्वारा समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में पानी के सैंपल लेकर जांच शुरू कर दी है और मरीजों की स्क्रीनिंग भी की जा रही है। विभाग का दावा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नए मरीज लगातार सामने आ रहे हैं। कांग्रेस ने निगम कार्यालय का किया घेराव इधर दूषित पेयजल सप्लाई और पीलिया से हो रही मौतों को लेकर शहर की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज नगर निगम कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा की शहर सरकार लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम रही है। निगम की लापरवाही से लोगों के घरों तक दूषित पानी पहुंचा, जिससे बड़ी संख्या में लोग पीलिया से ग्रसित हुए। इस दौरान कांग्रेस ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों से इस्तीफे की भी मांग की गई है। पीलिया से अब तक जिन दो लोगों की मौत हुई है, उनमें-     जनजातपरा निवासी सोना लाल (40 वर्ष), मृत्यु दिनांक 22 फरवरी 2026     खटिकपारा निवासी दिव्यांश राय (13 वर्ष), मृत्यु दिनांक 23 फरवरी 2026 टीएस सिंहदेव ने साधा निशाना इस पूरे मामले पर पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि नमनाकला खटिकपारा, अंबिकापुर में पीलिया से 13 वर्षीय छात्र की मृत्यु का समाचार बेहद पीड़ादायक और अत्यंत चिंताजनक है। शोकाकुल परिवार के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि हम पिछले कई हफ्तों से इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर ध्यान दिला रहे थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन की लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि आज एक मासूम ज़िंदगी चली गई। 2–3 दिन पहले भी पीलिया से एक युवक की दर्दनाक मृत्यु हुई थी। यह साफ़ संकेत है कि हालात को हल्के में लिया गया। नमनाकला खटिकपारा, अंबिकापुर में पीलिया से 13 वर्षीय छात्र की मृत्यु का समाचार बेहद पीड़ादायक और अत्यंत चिंताजनक है। शोकाकुल परिवार के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। टीएस सिंहदेव ने कहा, क्षेत्र की ट्रिपल इंजन सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करे। दुर्भाग्य से लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है- न रोकथाम की ठोस व्यवस्था है, न समय पर इलाज की समुचित पहुंच। जवाबदेही तय हो और गैर-ज़िम्मेदार लोगों पर तत्काल कार्रवाई हो। अंबिकापुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के प्रभावित इलाकों में तुरंत व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान चलाए जाएं। स्वच्छ पानी, जांच और उपचार की सुविधाएं हर ज़रूरतमंद तक शीघ्र पहुंचाई जाएं। लोगों की जान ऐसी बीमारी से नहीं जानी चाहिए जो रोकी भी जा सकती है और समय पर इलाज से ठीक भी हो सकती है।

सूखे हालात से परेशान किसान: हरियाणा के गांव में गेहूं की बिजाई ठप, वजह चौंकाने वाली

जुलाना जुलाना क्षेत्र के मालवी गांव के किसानों को इस बार दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। बरसाती पानी के कारण खेतों में लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रही, जिससे पहले तो धान की फसल पूरी तरह से खराब हो गई और अब करीब सैकड़ों एकड़ भूमि में गेहूं की बिजाई भी नहीं हो सकी। लगातार नुकसान से किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं और प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि बारिश के दौरान निकासी व्यवस्था ठीक न होने के कारण पानी कई दिनों तक खेतों में खड़ा रहा। इससे धान की फसल सड़ गई और उत्पादन शून्य के बराबर रहा। किसानों को उम्मीद की थी कि धान के नुकसान की भरपाई गेहूं की फसल से हो जाएगी, लेकिन खेतों में अत्यधिक नमी और कीचड़ के चलते समय पर जुताई और बिजाई संभव नहीं हो पाई। परिणामस्वरूप लगभग सैकड़ों एकड़ में गेहूं की बुआई नहीं हो सकी। किसानों ने बताया कि उन्होंने सरकार द्वारा शुरू किए गए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपना पंजीकरण भी कराया है और संबंधित दस्तावेज जमा करवाए हैं। इसके बावजूद अभी तक किसी भी किसान को मुआवजे की राशि प्राप्त नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि खाद, बीज और सिंचाई पर पहले ही हजारों रुपये खर्च हो चुके थे। धान की फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब गेहूं की बिजाई न होने से पूरे सीजन की आमदनी पर संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द सर्वे करवाकर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए और शीघ्र मुआवजा जारी किया जाए।

भोजशाला से कमाल मौला मस्जिद तक: धार में हिंदू-मुस्लिम टकराव की जड़ क्या है?

धार मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला परिसर से जुड़ी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद एक बार फिर यह विवाद चर्चा में आ गया है। सैकड़ों सालों से हिंदू और मुसलमान इस पर अपना-अपना दावा पेश करते रहे हैं। इस बीच हाई कोर्ट में एएसआई ने जो रिपोर्ट पेश की है उसमें कहा गया है कि कमाल मौला मस्जिद को मंदिर के पुराने अवशेषों से बनाया गया है। आइए नजर डालते हैं भाजशाला परिसर के एक साल के पुराने इतिहास पर। 1034 ईस्वी में भोजशाला की स्थापना 1010 से 1055 तक मालवा क्षेत्र में राजा भोज का शासन था। इस दौरान उन्होंने 1034 में सरस्वती सदन की स्थापना की, जिसे भोजशाला भी कहा जाता है। यहां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। मुस्लिम शासकों का आगमन और कमाल मौला 1305-1531- इस कालखंड में अलाउद्दीन खिलजी और दिलावर खान गोरी ने महालकदेव और गोलादेव को हराकर धार पर कब्जा कर लिया। उन्होंने राजा भोज के समय बने कई मंदिरों और स्मारकों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद यहां स्वतंत्र मालवा सत्नत की स्थापना की गई और भोजशाला के अधिकांश हिस्से को भी ध्वस्त कर दिया गया। यहीं 1459 में मौलना कमालुद्दीन का मकबरा भी बनाया गया जिन्हें कमाल मौला के नाम से भी जाना जाता है। कमाल मौला का वास्तविक नाम शेख कमल अल-दीन था। वह मालवा में 14वीं शताब्दी के प्रमुख सूफी संत थे। निजामुद्दीन औलिया के प्रमुख शिष्य रहे कमाल मौला का देहांत 1331 में हुआ था। कहा जाता है कि औलिया ने उन्हें मालवा क्षेत्र में धार और आसपास के इलाकों में इस्लाम के प्रचार के लिए भेजा गया था। कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के चेयरमैन अब्दुल समद कहते हैं कि कमाल मौला मकबरा मस्जिद और विवादित भोजशाला के करीब है। कैसे वाग्देवी की प्रतिमा पहुंच गई लंदन 1732- में धार पर मराठा शासकों का कब्जा हो गया। 1875 में भोजशाला के पास खुदाई के दौरान वाग्देवी की प्रतिमा मिली, जिसे 1880 में एक अंग्रेज अधिकारी लेकर लंदन चला गया। तब से वाग्देवी की प्रतिमा लंदन के एक म्यूजियम में है। फिर कैसे आई मौजूदा व्यवस्था 1909 में धार शासकों ने प्राचीन स्मारक कानून 1904 लागू किया और धार दरबार गैजेट जारी करते हुए इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया। 1934 में धार के शासकों ने यहां से अवैध अतिक्रमण हटाते हुए भोजशाला का साईनबोर्ड लगाया। 1934 में तब के धार के दीवान के नादकर ने भोजशाला को कमाल मौलाना मस्जिद घोषित किया और मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी। हिंदू मुस्लिम टकराव और ASI के हवाले भोजशाला 1944 में मौलाना कमलुद्दीन का पहला उर्स हुआ और हिंदू-मुसलमानों के बीच इस स्थल को लेकर टकराव बढ़ गया। 1952 में हिंदुओं ने बसंत पंचमी पर भोज उत्सव का आयोजन किया। 1952 में एएसआई ने भोजशाला को संरक्षित घोषित किया। 1988 में भी मरम्मत के दौरान यहां एक मूर्ति मिली थी। 1997 में धार के कलेक्टर ने शुक्रवार को मुसलमानों को नमाज और बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी। अप्रैल 2003 में एएसआई ने हिंदुओं को फूल और अक्षत से हर मंगलवार को पूजा की अनुमति दी, जबकि मुसलमान शुक्रवार को नमाज अदा कर सकते हैं। जब शुक्रवार के दिन आई बसंत पंचमी 2006 में शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी होने की वजह से कर्फ्यू लागू करना पड़ा। कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों समुदायों ने अपने आयोजन किए। इसके बाद 2013 में भी जब ऐसा मौका आया तो कड़ी सुरक्षा और तनाव के बीच पूजा और नमाज हुई। हालांकि,तब लोगों ने आरोप लगाया कि आम लोगों को वहां नहीं जाने दिया गया और पुलिसकर्मियों ने ही परंपरा निभाई। 2016 में भी जब ऐसा मौका आया तो वहां दोनों समुदाय के लोग आपस में भिड़ गए थे। मार्च 2024 में सर्वेक्षण का आदेश मध्य प्रदेश की इंदौर बेंच ने मार्च 2024 में भोजशाला परिसर में सर्वे का आदेश दिया। इसे छह महीने सप्ताह में पूरा करना था। मार्च 2024 में एएसआई ने सर्वे की शुरुआत की जो 98 दिनों तक चला। 15 जुलाई 2024 को एएसआई ने 2189 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पेश की। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को एएसआई रिपोर्ट को खोलने और सभी पक्षों को देने को कहा। इके बाद हाई कोर्ट ने रिपोर्ट की समीक्षा शुरू की और सभी पक्षों को दो सप्ताह में अपनी आपत्तियां, विचार, सलाह, सिफारिश आदि दोनों को कहा है।

मध्य प्रदेश में गौशालाओं की देखरेख करेंगे ऑस्ट्रेलिया और दुबई की संस्थाएं, 3 माह में सड़कों पर गायें नहीं दिखेंगी

भोपाल मध्य प्रदेश में सड़कों पर घूम रहे गौवंश को स्थायी आसरा देने का वर्किंग प्लान और उसकी समय सीमा तय हो गई है. प्रदेश की मोहन सरकार में पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी है. विधानसभा में कांग्रेस नेता अजय सिंह और कैलाश कुशवाहा द्वारा प्रदेश में निराश्रित पशुओं का मुद्दा ध्यानाकर्षण में उठाया था. चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को सुझाव दिया कि गौपालकों को प्रति गौवंश 40 रुपए के हिसाब से राशि दी जानी चाहिए. मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि मध्य प्रदेश में गौशालाओं के संचालन के लिए दुबई और ऑस्ट्रेलिया की संस्थाएं भी आगे आई हैं. कामधेनु निवास के लिए 7 स्थानों पर जमीन चिन्हित पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने कहा कि "सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गौवंश के लिए प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाओं कामधेनु निवास के लिए प्रदेश में 29 स्थान चयनित कर लिए गए हैं. उधर 7 स्थानों पर राजस्व विभाग द्वारा पशुपालन विभाग को जमीन आवंटित कर दी गई है. इसके तहत जबलपुर में 461 एकड़, रायसेन में 320 एकड़, सागर में 411 एकड़, अशोकनगर में 293 एकड, खरगौन में 133 और रीवा में 135 एकड़ भूमि आवंटन सहित 7 स्थान पर काम चल रहा है." उन्होंने कहा कि "अगले 10 दिनों में गौशाला बनाने के लिए अनुबंध की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी. जल्द ही इनका भूमि पूजन किया जाएगा. मंत्री ने दावा किया कि देश में यह पहली योजना है, जिसमें निराश्रित गौवंश को रखा जाएगा. मंत्री ने कहा कि इनमें कई गौशालाएं ऐसी होंगी, जिसमें 20 हजार गौवंश को एक स्थान पर रखा जाएगा." दुबई, ऑस्ट्रेलिया की संस्था ने भी डाला टेंडर मंत्री लखन पटेल ने कहा कि "स्वावलंबी गौशालाओं के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है. टेंडर प्रकिया में ऑस्ट्रेलिया और दुबई की भी 2 संस्थाओं द्वारा हिस्सा लिया जा रहा है. टेंडर प्रक्रिया अगले एक माह में पूरी कर ली जाएगी. गौशालाओं को पूरी तरह से तैयार होने में 2 साल का वक्त लेगा. इसके बाद एक भी गौवंश सड़क पर दिखाई नहीं देगा." मंत्री ने सफाई दी कि "गौशालाओं को पूरी तरह से बनने के पहले ही गौवंशों को इनमें पहुंचाना शुरू कर दिया जाएगा. बरसात के पहले सभी गौवंशों को इनमें पहुंचा दिया जाएगा. इसके लिए जरूरी सुविधाएं जल्द से जल्द की जाएंगी."     मंत्री को नेता प्रतिपक्ष का सुझाव आया पसंद ध्यानाकर्षण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि "आमतौर पर दूध देना बंद कर देने के बाद किसान ही गौवंश को छोड़ देता है. जब सरकार गौशालाओं को प्रति गाय के हिसाब से 40 रुपए प्रतिदिन की राशि दे रही है, तो सीधी किसानों को यह राशि क्यों नहीं दी जाती. एआई के दौर में ऐसे पशुपालकों की निगरानी भी की जा सकती है." जवाब में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सुझाव की तारीफ करते हुए कहा कि इस पर सरकार विचार करेगी.

मध्य प्रदेश में अब तक केवल बालाघाट का ‘चिन्नौर’ धान और रीवा का ‘सुंदरजा’ आम को मिला जीआइ टैग

भोपाल  मध्य प्रदेश के दो पारंपरिक कृषि उत्पादों बालाघाट के चिन्नौर धान और रीवा के सुंदरजा आम को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है. इससे इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है. विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित जवाब में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से इन दोनों उत्पादों का पंजीयन कराया गया. चिन्नौर धान के लिए 60 किसानों और सुंदरजा आम के लिए 20 किसानों का समिति में पंजीयन किया गया है। ‘किसी भी GI टैग को निरस्त नहीं किया गया’ मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में किसी भी उत्पाद का जीआई टैग निरस्त नहीं किया गया है. लुवाई धान, टर्री भरी धान और सातिया धान को भी जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया जारी है. वहीं चार अन्य उत्पादों बैंगनी अरहर, नागफनी कुटकी, सिताही कुटकी और महाकौशल क्षेत्रीय धान को जीआई रजिस्ट्री की वेबसाइट पर विज्ञापित किया जा चुका है। बासमती को लेकर कानूनी विवाद मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने के प्रयास 2008 से जारी हैं. जीआई रजिस्ट्री चेन्नई ने पहले मध्यप्रदेश को बासमती के दायरे में शामिल नहीं किया था. बाद में प्रदेश सरकार की आपत्ति पर संशोधित आवेदन की प्रक्रिया चली. यह मामला मद्रास हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां 27 फरवरी 2020 को याचिका निरस्त कर दी गई थी. हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए मामले में आगे की सुनवाई का रास्ता साफ किया है. प्रदेश सरकार का कहना है कि बासमती को जीआई टैग दिलाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे, ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके। क्या होता है जीआइ टैग किसी भी रीजन का जो क्षेत्रीय उत्पाद होता है उससे उस क्षेत्र की पहचान होती है। उस उत्पाद की ख्याति जब देश-दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया होती है जिसे जीआइ टैग यानी जीओ ग्राफिकल इंडीकेटर कहते हैं। जिसे हिंदी में भौगोलिक संकेतक नाम से जाना जाता है। बालाघाट के 60, रीवा के 20 किसान पंजीकृत प्रदेश में उत्पादित बासमती धान के लिए चिन्नौर के लिए वर्ष 2008 से प्रयास किए जा रहे थे। जीआइ टैग प्राप्त बालाघाट चिन्नौर धान उत्पाद के लिए 60 किसानों का समिति में पंजीकरण किया गया है। रीवा सुंदरजा आम के लिए 20 किसानों का समिति में पंजीकरण कराया गया। 

इन मार्गों पर नहीं होंगे धरना-प्रदर्शन व जुलूस, पुलिस आयुक्त ने लगाया प्रतिबंध

रायपुर राजधानी रायपुर की हेवी ट्रैफिक वाली सड़कों पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने को लेकर रायपुर कमिश्नरेट ने नया आदेश जारी किया है. 4 प्रमुख मार्गों पर अब रैली, जुलूस और प्रदर्शन जैसे सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी लगा दी गई है. अगले दो महीने तक के लिए आदेश लागू किया गया है.   जारी आदेश के मुताबिक, सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक बीएनएसएस 2023 की धारा 163 तक सार्वजनिक आयोजन पर प्रतिबंध रहेगा. आदेश का आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी. पुलिस कमिश्नर ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे शहर में शांति और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन का सहयोग करें. इन सड़कों पर नहीं निकाल सकेंगे रैली 1. जी.ई. रोड: शारदा चौक से जयस्तंभ चौक होते हुए फूल चौक तक. 2. एम.जी. रोड: जयस्तंभ चौक से कोतवाली चौक तक. 3. सदर बाजार रोड: कोतवाली से सत्ती बाजार चौक तक. 4. एम.जी. रोड: मौलाना चौक से शारदा चौक तक.

केरल के बाद अब दिल्ली का नाम बदलने की चर्चा, बीजेपी सांसद ने रखीं ये दलीलें

नई दिल्ली केरल का नाम बदलकर केरलम किए जाने के फैसले पर केंद्र सरकार की मुहर लगने के बाद अब दिल्ली की नई पहचान की मांग भी उठ गई है। भाजपा के सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने दिल्ली का नाम बदलकर 'इंद्रप्रस्थ' करने की मांग की है। उन्होंने इसके लिए गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लेटर लिखकर अपनी दलीलें पेश की हैं। दिल्ली के चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने पर विचार करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि ऐसा कदम भारत की राजधानी की ऐतिहासिक और सभ्यतागत पहचान को पुनर्स्थापित करेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली में किसी स्थान पर,संभवतः पुराना किला में पांडवों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएं, जिससे दिल्ली की प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित किया जा सके। विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने का सुझाव खंडेलवाल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी लेटर लिखा है और उनसे अनुरोध किया है कि दिल्ली विधानसभा में दिल्ली का नाम 'इंद्रप्रस्थ' करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे एक लेटर में खंडेलवाल ने कहा कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है और उसकी राष्ट्रीय राजधानी का नाम भी उसके गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए। और क्या दलीलें खंडेलवाल ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और दीर्घकालिक सभ्यतागत परंपराएं यह स्थापित करती हैं कि वर्तमान दिल्ली ही प्राचीन इंद्रप्रस्थ का स्थल है, जो पांडवों द्वारा स्थापित भव्य राजधानी थी, जैसा कि महाकाव्य महाभारत में वर्णित है। महाभारत में इंद्रप्रस्थ को यमुना नदी के तट पर बसा एक समृद्ध और भव्य नगर बताया गया है, जो आज की दिल्ली के भौगोलिक स्वरूप से पूरी तरह मेल खाता है। उन्होंने आगे बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पुराना किला में की गई खुदाई में लगभग 1000 ईसा पूर्व के प्राचीन बसावट के प्रमाण मिले हैं, जिनमें पेंटेड ग्रे वेयर (PGW) संस्कृति के अवशेष भी शामिल हैं, जिन्हें महाभारत काल से जोड़ा जाता है। उनके अनुसार ये खोजें इस ऐतिहासिक धारणा को मजबूत करती हैं कि प्राचीन इंद्रप्रस्थ इसी स्थान पर स्थित था जहां आज दिल्ली है। खंडेलवाल ने कहा कि 'दिल्ली' नाम अपेक्षाकृत बाद के मध्यकालीन दौर में प्रचलन में आया, जिसे इतिहासकार ढिल्लिका या देहली जैसे नामों से जोड़ते हैं। लेकिन यह इसकी मूल और प्राचीन सभ्यतागत पहचान का प्रतिनिधित्व नहीं करता। सांसद ने बताया क्या होगा फायदा खंडेलवाल ने कहा, 'इंद्रप्रस्थ राजधानी की मूल सभ्यतागत पहचान का प्रतीक है, जबकि दिल्ली इतिहास के एक बाद के चरण को दर्शाता है। राजधानी का नाम इंद्रप्रस्थ करना भारत की प्राचीन विरासत से उसके संबंध को पुनर्स्थापित करेगा और भारत की सांस्कृतिक निरंतरता को मजबूत करेगा।' खंडेलवाल ने यह भी कहा कि भारत में कई शहरों के ऐतिहासिक नाम पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और प्रयागराज प्रमुख उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि इंद्रप्रस्थ नाम पहले से ही दिल्ली के कई प्रमुख संस्थानों और स्थानों में प्रचलित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस ऐतिहासिक नाम को समाज में स्वाभाविक स्वीकृति प्राप्त है। खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करना भारत की राजधानी की सभ्यतागत पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा, जिससे राष्ट्रीय गौरव मजबूत होगा और विश्व के सामने भारत की प्राचीन विरासत और भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत होगी। औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग उन्होंने गृह मंत्री श्री अमित शाह से आग्रह किया कि इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और अन्य विशेषज्ञों से परामर्श कर इस प्रस्ताव पर औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाए। खंडेलवाल ने कहा, 'यह कदम न केवल एक ऐतिहासिक विसंगति को दूर करेगा, बल्कि भारत की महान सभ्यता की विरासत को सम्मान देने और उसे संरक्षित रखने की हमारी प्रतिबद्धता को भी सशक्त करेगा।'  

बोर्ड एग्जाम में सख्ती: केंद्रों पर पुलिस तैनात, DC ने संभाली कमान

गुड़गांव हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की वार्षिक बोर्ड की परीक्षाएं आज से शुरू हो गई हैं। आज कक्षा 12वीं का अंग्रेजी विषय का पेपर जिले में शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी ढंग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सभी परीक्षा केंद्रों पर समयबद्ध तरीके से परीक्षा कराई गई और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार निगरानी रखी गई। उन्होंने बताया कि कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा 26 फरवरी से प्रारंभ होगी, जिसके लिए भी जिले में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्था और सुरक्षा के इंतजाम जांचने के लिए आज जिला उपायुक्त अजय कुमार स्वयं मैदान में उतरे। उन्होंने कई परीक्षा केंद्रों का जायजा भी लिया।   इसके साथ ही डीसी ने लघु सचिवालय में संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक ली और कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा संबंधित अधिकारी अपनी ड्यूटी पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाएं। इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के साथ समीक्षा बैठक कर निर्देश दिए हैं कि बोर्ड परीक्षाएं पूरी तरह नकल मुक्त, पारदर्शी और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराई जाएं।   डीसी ने बताया कि जिले में इस वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। 10वीं कक्षा में कुल 15,943 परीक्षार्थी (8000 छात्र व 7,943 छात्राएं) तथा 12वीं कक्षा में 14,446 परीक्षार्थी (7,290 छात्र व 7,156 छात्राएं) परीक्षा देंगे। विद्यार्थियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि 10वीं कक्षा की परीक्षाएं 26 फरवरी से 20 मार्च तक तथा 12वीं कक्षा की परीक्षाएं 25 फरवरी से 1 अप्रैल तक आयोजित होंगी। इसके लिए जिले में कुल 65 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 25 ग्रामीण और 40 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। डीसी अजय कुमार ने बताया कि जिले के एक परीक्षा केंद्र को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल, विशेष निगरानी और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की गई है। नकल की किसी भी संभावना को रोकने के लिए उड़नदस्तों का गठन किया गया है, जो परीक्षा अवधि के दौरान औचक निरीक्षण करेंगे। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन, डिजिटल वॉच व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे तथा विद्यार्थियों की प्रवेश से पूर्व सघन जांच की जाएगी। इसके साथ ही सभी परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, बिजली, शौचालय, बैठने की समुचित व्यवस्था, साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन ने अभिभावकों और आमजन से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें। भ्रामक सूचना या फेक न्यूज फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में गुरुग्राम के एसडीएम परमजीत चहल, बादशाहपुर के एसडीएम संजीव सिंगला, सोहना के एसडीएम अखिलेश, जिला शिक्षा अधिकारी इंदु बोकन सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।  

अब नहीं रहेगी दो बच्चों की शर्त! कैबिनेट बैठक में बड़ा बदलाव, चुनाव लड़ने का रास्ता साफ

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को विधानसभा सचिवालय में आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 और राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 लाने, राजस्व आसूचना एवं आर्थिक अपराध निदेशालय के गठन सहित कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ एवं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कैबिनेट बैठक के बाद विधानसभा में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-19 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा-24 में संशोधन कर राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 और राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 लाने का महत्वपूर्ण निर्णय किया गया है। इससे जिन व्यक्तियों के दो से अधिक संतान हैं वे पंचायतीराज संस्थाओं एवं नगरपालिकाओं के चुनाव लड़ सकेंगे। उन्होंने बताया कि दो से अधिक संतान पर चुनाव लड़ने का प्रतिबंध उस समय लागू किया गया था, जब जनसंख्या विस्फोट पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता थी। वर्ष 1991-94 के बीच प्रजनन दर 3.6 थी, जो वर्तमान में घटकर 2 रह गई है। ऐसे में इन प्रावधानों का प्रत्यक्ष प्रभाव अब कम होता जा रहा है। पटेल ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की अनुपालना में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24 में संशोधन कर धारा 2 को संशोधित करते हुए शब्द कुष्ठ रोग को खतरनाक रोग की श्रेणी से हटाया गया है। जिससे नगरपालिका के आगामी चुनाव में सभी व्यक्तियों को चुनाव लड़ने का समान अवसर मिल सकेगा और कुष्ठ रोगियों का सम्मान भी सुनिश्चित हो सकेगा। भूमि पर अवैध कब्जों से लेकर फर्जी दस्तावेजों जैसे आर्थिक अपराधों की होगी प्रभावी जांच उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि आर्थिक अपराधों पर प्रभावी रोकथाम तथा वित्तीय अनुशासन के लिए राज्य राजस्व आसूचना निदेशालय को समाप्त कर राजस्व आसूचना एवं आर्थिक अपराध निदेशालय के गठन का निर्णय मंत्रिमण्डल में किया गया। उन्होंने बताया कि इससे रियल एस्टेट में धोखाधड़ी, बैंक-बीमा-एनबीएफसी एवं शेयर बाजार से जुड़े वित्तीय अपराध, मल्टी लेवल मार्केटिंग ठगी, झूठा दिवालियापन, फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी तथा फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से नौकरी या प्रवेश से संबंधित मामलों पर शीघ्र कार्रवाई हो सकेगी। साथ ही, सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या विक्रय, स्टाम्प एवं पंजीयन अनियमितताएं, फर्जी कंपनियों का गठन, सहकारी समितियों में घोटाले जैसे आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सकेगा और अपराधियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित होगी। उन्होंने बताया कि यह निदेशालय वाणिज्यिक कर, आबकारी, परिवहन, पंजीयन एवं मुद्रांक, खनिज सहित विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर राजस्व लीकेज पर निगरानी रखेगा तथा टैक्स चोरी को रोकेगा। इससे राजस्व संबंधी सूचनाओं और आर्थिक अपराधों की जांच का कार्य एकीकृत रूप से किया जा सकेगा। राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति, 2026 में मिलेगा पूंजीगत अनुदान उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड ने बताया औद्योगिक विकास को नई गति देने, निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने तथा सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति, 2026 लाई जाएगी। इस नीति के अंतर्गत निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए मॉडल-ए (पूर्णतः रीको द्वारा आवंटित भूमि पर विकास), मॉडल-बी (80 प्रतिशत भूमि विकासकर्ता द्वारा अधिग्रहण एवं शेष 20 प्रतिशत भूमि रीको द्वारा निर्धारित दरों पर), मॉडल-सी (संपूर्ण भूमि की विकासकर्ता द्वारा व्यवस्था) तथा मॉडल-डी (पीपीपी मॉडल) निर्धारित किए हैं। उन्होंने बताया कि इस नीति के अंतर्गत निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्कों के लिए कम से कम 50 एकड़ क्षेत्रफल तथा न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी। राज्य सरकार औद्योगिक पार्क के लिए सामान्य अवसंरचना विकास पर 20 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान भी देगी। इसकी अधिकतम सीमा 100 एकड़ तक के पार्क हेतु 20 करोड़ रुपए, 100 से 250 एकड़ हेतु 30 करोड़ तथा 250 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल हेतु 40 करोड़ रुपए होगी। साथ ही, हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए सीईटीपी पर व्यय का 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति (अधिकतम 12.5 करोड़ रुपए प्रति पार्क) का प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने बताया कि पार्क के लिए अनुमोदन प्रक्रिया राज निवेश पोर्टल के माध्यम से सिंगल विंडो प्रणाली द्वारा समयबद्ध एवं पारदर्शी रूप से की जाएगी। औद्योगिक इकाई हेतु भूमि आवंटन, स्टील वैल्यू चैन को मिलेगी मजबूती कर्नल राठौड़ ने बताया कि मैसर्स ग्रोथ इण्डस्ट्रीयल मिनरल्स प्रा. लि. को ग्राम रामल्यावार्स, तहसील नीमकाथाना में औद्योगिक प्रयोजन के लिए 53 हैक्टेयर की भूमि राजस्थान औद्योगिक क्षेत्र आवंटन नियम, 1959 के प्रावधानों के अंतर्गत आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। कम्पनी द्वारा करीब 500 करोड़ रुपए के निवेश से इस जमीन पर आधुनिक तकनीक आधारित बेनिफिकेशन एवं पेलेट प्लांट की स्थापना कर लगभग 565 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही, इससे प्रदेश में स्टील वैल्यू चैन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम साबित होगा तथा प्रदेश के राजस्व में भी वृद्धि होगी। राजस्थान मंडपम एवं अन्य प्रोजेक्ट्स के संशोधित प्रस्ताव का अनुमोदन, 10 करोड़ की आय संभावित उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने बताया कि राज्य मंत्रिमण्डल की 23 अगस्त 2025 को आयोजित बैठक में टोंक रोड, बी2 बाईपास, जयपुर स्थित रीको की भूमि पर 3 हजार 55 करोड़ रुपये की लागत से राजस्थान मंडपम, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर एवं अन्य विकास कार्यों के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई थी। इस प्रस्ताव के अंतर्गत 635 करोड़ रुपए की राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जानी थी। मंत्रिमण्डल की बैठक में आज संशोधित वित्तीय मॉडल का अनुमोदन किया गया। जिसके अंतर्गत परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5 हजार 815 करोड़ रुपए तथा अनुमानित राजस्व प्राप्ति 5 हजार 825 करोड़ रुपये है। इस संशोधित मॉडल में लगभग 10 करोड़ रुपए की शुद्ध आय भी संभावित है। इसमें अब राज्य सरकार पर पूर्व में अनुमानित 635 करोड़ का वित्तीय दायित्व भी नहीं रहेगा। परियोजना पूर्णतः स्व-वित्तपोषित मॉडल पर क्रियान्वित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर की स्थापना से युवाओं को रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित होंगे। राजस्थान आयुर्वेद, योग तथा नेचुरोपैथी विश्वविद्यालय, अजमेर विधेयक-2026 के प्रारूप का अनुमोदन डॉ. बैरवा ने बताया कि प्रदेश में भारतीय चिकित्सा पद्धति की अत्याधुनिक चिकित्सकीय सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए दि राजस्थान आयुर्वेद, योग एण्ड नेचुरोपैथी यूनिवर्सिटी, अजमेर विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन … Read more