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बोत्सवाना से उड़कर भारत पहुंचे 9 चीते, कूनो पार्क में क्वारंटीन, केंद्रीय मंत्री ने किया प्रतीकात्मक रिलीज

श्योपुर चीता परियोजना के लिए दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना से 9 चीते सुरक्षित रूप से कूनो नेशनल पार्क पहुंच चुके हैं। लगभग 12 घंटे की हवाई यात्रा के बाद वे ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां से तीन हेलीकॉप्टरों के जरिए उन्हें कूनो लाया गया। नई खेप के साथ देश में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो गई है।  हेलीकॉप्टर से पहुंची 9 चीतों की खेप कुनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से आए 9 चीतों की खेप पहुंचने के बाद भारत में चीता प्रोजेक्ट के इतिहास में एक और नया अध्याय जुड़ गया है. 2022 में पहली बार भारत की धरती पर चीतों की वापसी हुई थी. इसके बाद से लगातार चीतों के बढ़ने का सफर जारी है. शनिवार सुबह करीब 9.30 पर हेलीकॉप्टर से चीतों की खेप बोत्सवाना से ग्वालियर एयरबेस पर पहुंची. केंद्रीय मंत्री ने किया प्रतीकात्मक रिलीज इस मौके पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव कूनो में मौजूद रहे। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से क्रेट का हैंडल घुमाकर चीतों को विशेष क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ा। नई खेप में 6 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे कूनो में लिंगानुपात संतुलित होगा और भविष्य में प्रजनन की संभावनाएं मजबूत होंगी। निर्धारित कार्यक्रम के तहत केंद्रीय मंत्री सुबह नई दिल्ली से रवाना होकर ग्वालियर पहुंचे। वहां से वे हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो पहुंचे और सुबह करीब 9:30 बजे चीतों को पार्क में रिलीज किया गया। बढ़ गया कूनो में चीतों का कुनबा नए चीतों के आने से अब भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 48 हो चुकी है. अब तक कूनो नेशनल पार्क में 36 चीते थे, जिनमें 26 व्यस्क और 10 शावक थे. व्यस्कों में 14 नर चीते और 12 मादा चीता रह रही हैं. वहीं अब 9 नए वयस्क चीतों के आने से कूनो में कुल 45 वयस्क चीते हो गए हैं, वहीं नर चीतों की संख्या 17 और मादा चीतों की संख्या 18 हो गई है. इनके अलावा मध्य प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य में भी 3 चीते शिफ्ट किए जा चुके हैं. फरवरी के माह में ही चीता प्रोजेक्ट के लिए दूसरी खुशखबरी है. इससे पहले हाल ही में कूनो में रह रही मादा चीता गामिनी ने शावकों को जन्म दिया था. पहले तीन शावक पैदा होने की जानकारी सामने आई थी. लेकिन शुक्रवार को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने चौथे चीता शावक की अधिकारिक जानकारी सोशल मीडिया के जरिए साझा की थी. जेनेटिक विविधता होगी मजबूत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब बोत्सवाना से चीतों के आने से कूनो में जेनेटिक विविधता और सुदृढ़ होगी। पार्क में अब 18 मादा और 16 नर वयस्क चीते हैं। सभी नए चीतों को लगभग एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाएगा। संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि तीन अलग-अलग देशों के चीतों का संगम परियोजना की सफलता के लिए निर्णायक साबित होगा। गामिनी ने दिए 4 शावक परियोजना के लिए एक और खुशखबरी यह रही कि मादा चीता गामिनी ने 18 फरवरी को तीन नहीं बल्कि चार शावकों को जन्म दिया। घनी झाड़ियों के कारण चौथा शावक पहले नजर नहीं आया था लेकिन मॉनिटरिंग टीम और पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसकी पुष्टि हो गई। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था। गौरतलब है कि 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए थे, जबकि 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो पहुंचे थे। अब बोत्सवाना से आए 9 नए चीतों के साथ परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है। 

भोपाल के बड़ा तालाब में 50 मीटर के दायरे में अवैध निर्माण, खानूगांव में 15 सरकारी जमीनों पर कब्जे

भोपाल: SDM की लीडरशिप में डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की टीमें अपर लेक के फुल टैंक लेवल से नो-कंस्ट्रक्शन जोन की पहचान करने और उस एरिया में कब्ज़ों की पहचान करने के लिए एक और सर्वे कर रही हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह काम आखिरकार अपने लॉजिकल नतीजे पर पहुंचेगा। अपर लेक के आसपास के कब्ज़ों को हटाने का काम नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और कोर्ट के निर्देश पर पहले कम से कम तीन बार किया जा चुका है और फिर भी अपर लेक के किनारों पर कब्जे साल भर में बढ़ते रहे हैं। ये इलाके हैं नो-कंस्ट्रक्शन जोन लेक के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर का एरिया, जो भोज वेटलैंड और रामसर साइट का भी हिस्सा है, वेटलैंड नियमों के तहत नो-कंस्ट्रक्शन जोन है और अभी भी इस जोन में सैकड़ों फार्म हाउस, बंगले, मैरिज हॉल, रेस्टोरेंट से लेकर छोटे घर और झुग्गियां बनी हुई हैं। इन सब में बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव, बैरागढ़ और ऐसे एरिया सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। टास्क फोर्स ने नया सर्वे शुरू किया डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर द्वारा बनाई गई 17 लोगों की टास्क फोर्स को ADM अंकुर मेश्राम लीड कर रहे हैं। यह टीम झील के आसपास के मना किए गए एरिया में सर्वे और डिमार्केशन और बाद में पहचाने गए अतिक्रमणों को हटाने के प्रोसेस पर नजर रखेगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन इस बार अतिक्रमण हटाने को लेकर सीरियस है, तो उन्होंने कहा, 'प्रोसेस पहले ही शुरू हो चुका है। अगर आपके मन में कोई खास स्ट्रक्चर है और जब उसे गिरा दिया जाता है, तभी आप मानेंगे कि अतिक्रमण हटाया जा रहा है, यह एक अलग बात है।' उन्होंने कहा कि, 'मैं यह साफ कर दूं कि टास्क फोर्स न तो सर्वे में शामिल होगी और न ही अतिक्रमणों को गिराने में शामिल होगी। यह काम संबंधित SDM की लीडरशिप वाली टीमों को करना है और वे काम पर हैं। जब हम बात कर रहे हैं, तब SDM, टी टी नगर, अपने अधिकार क्षेत्र में कहीं न कहीं तोड़फोड़ कर रही हैं।' जब उनसे पूछा गया कि जब हाल ही में दो बार सर्वे हो चुका है, तो सर्वे क्यों जरूरी है, तो उन्होंने कहा, 'अगर कोई SDM कहता है कि उसके पास इलाके में अतिक्रमण की पूरी लिस्ट है और इलाके में सीमांकन भी पूरा हो गया है, तो हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन जहां काम अधूरा है, उन्हें इसे पूरा करके टास्क फोर्स को रिपोर्ट करना होगा. टास्क फोर्स में कौन-कौन? उन्होंने बताया कि टास्क फोर्स में रेवेन्यू, बीएमसी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, MP पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड जैसे सभी संबंधित डिपार्टमेंट के सदस्य, सभी SDM, पुलिस अधिकारी और दो प्राइवेट सदस्य हैं, जो एनवायरनमेंट एक्टिविस्ट हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में लोकल MP आलोक शर्मा की मीटिंग के बाद टास्क फोर्स बनाई गई थी, जिसमें अपर लेक के आस-पास से अतिक्रमण हटाने पर चर्चा की गई थी। सांसद क्या बोले? भोपाल से सांसद आलोक शर्मा ने पर्यावरण पर संसद की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य के तौर पर पहल की थी। जब उनसे पूछा गया कि यह काम कितना आगे जाएगा, तो उन्होंने कहा, 'मैं अपर लेक को बचाना चाहता हूं। मेरे लिए, यह भोपाल की शान है। अजीब बात है, राजा भोज ने 11वीं सदी में यह खूबसूरत इंसानों की बनाई बड़ी झील बनवाई और हम इसे बर्बाद कर रहे हैं, जबकि यह हमारे लिए पीने के पानी का सोर्स है।' कब्जा हटाना क्यों है मुश्किल? कमेटी के प्राइवेट मेंबर नितिन श्रीवास्तव ने कहा, 'अगर कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की नीयत भी अच्छी हो, तो भी इस काम में दो बड़ी दिक्कतें हैं। एक, कुछ लोग भोपाल के पुराने राजाओं के हबीनामा या इनायतनामा दिखाते हैं या कागजात दिखाते हैं कि जिस जमीन पर उनका कब्जा है, वह वक्फ बोर्ड की है। आपके पास अमीर और ताकतवर लोग हैं, जिनके जमीन पर फार्महाउस और बंगले या होटल या मैरिज गार्डन हैं और एडमिनिस्ट्रेशन उन पर एक्शन लेने से कतराता है।' पहले भी जारी हुए हैं आदेश NGT की सेंट्रल बेंच ने 15 फरवरी को आर्या श्रीवास्तव की पिटीशन पर अपने ऑर्डर में भोपाल म्युनिसिपल कमीशन (BMC) के वकील से सख्ती से कहा था कि वह जमीन पर टाइटल या हक तय करने के लिए नहीं है, बल्कि अतिक्रमण हटाना चाहता है। उन्होंने कहा कि भदभदा की तरफ अपर लेक के किनारे 35 अतिक्रमण पहचाने गए थे, लेकिन लोकल लोगों के विरोध के कारण सिर्फ 9 ही हटाए जा सके। कुछ मामलों में, पार्टियों के अधिकार, टाइटल और हित को लेकर कोर्ट में केस पेंडिंग है। 5 प्वॉइंट में पढ़िए पूरी खबर का सार 1. रामसर साइट और वेटलैंड नियमों के तहत तालाब के FTL (Full Tank Level) से 50 मीटर तक कोई भी पक्का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। 2. बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव और बैरागढ़ में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें रसूखदारों के बंगले और मैरिज हॉल शामिल हैं। 3. NGT के निर्देशों पर पहले भी तीन बार सर्वे हो चुका है, लेकिन इस बार टास्क फोर्स में राजस्व, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पर्यावरणविद भी शामिल हैं। 4. हब्बीनामा, इनायतनामा और वक्फ बोर्ड की जमीनों के दावों के कारण प्रशासन को कड़ी चुनौती मिल रही है, जिसे लेकर NGT पहले ही नाराजगी जता चुका है। 5. SDM टी.टी. नगर ने अपने क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है, जो संकेत है कि इस बार मामला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा

स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी: शिक्षा विभाग ने स्कूलों को दिए नए आदेश, बढ़ेगी सुविधा

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में स्कूली बच्चों पर बढ़ते भारी स्कूल बैग का बोझ अब कम किया जाएगा। बच्चों की सेहत और रीढ़ की हड्डी की समस्यओं को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। किसी भी विद्यार्थी का स्कूल बैग अब उसके शरीर के वजन के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होगा। विभाग द्वारा सर्कुलर में साफ किया गया है कि सिर्फ प्रवानित सिलेबस में तय पाठ-पुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी। कोई भी स्कूल एक्स्ट्रा गाइडबुक, रेफरेंस बुक या वर्कबुक को जरुरी नहीं बनाएगा। स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे टाइमटेबल इस तरह बनाएं कि स्टूडेंट्स एक ही दिन में सभी सब्जेक्ट की किताबें न लाएं। क्लास के हिसाब से भी गाइडलाइन जारी की गई हैं। प्री-प्राइमरी और ग्रेड 1 और 2 को होमवर्क से बचने और कम से कम किताबों के साथ एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। क्लास 3 से 5 को सब्जेक्ट के हिसाब से लिमिटेड किताबें रखने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि क्लास 6 से 8 को रोज का काम का बोझ कम करने के लिए सब्जेक्ट के हिसाब से टाइमटेबल लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। हर स्कूल के लिए स्कूल बैग निगरानी कमेटी बनाना जरूरी जहां तक ​​हो सके क्लास 9 से 12 तक के बच्चों के लिए लॉकर की सुविधा देने और एक सही टाइमटेबल अपनाने पर जोर दिया गया है। स्कूलों को क्लासरूम में लॉकर या शेल्फ की सुविधा देने की भी सलाह दी गई है ताकि बच्चों को हर दिन घर से भारी किताबें न लानी पड़ें। इसके साथ ही, हर स्कूल के लिए स्कूल हेड की अगुवाई में एक स्कूल बैग मॉनिटरिंग कमेटी बनाना जरूरी कर दिया गया है। सर्कुलर के मुताबिक हर 15 दिन में कम से कम एक बार स्टूडेंट्स के बैग का वजन चेक किया जाएगा और एक लिखा हुआ रिकॉर्ड रखा जाएगा। स्कूलों को 7 दिनों के अंदर ऑर्डर के पालन पर रिपोर्ट देने का निर्देश इस प्रोसेस में पेरेंट्स को शामिल करते हुए, स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे पेरेंट्स को तय नियमों के बारे में बताएं और उन्हें सलाह दें कि वे अपने बच्चों के बैग में गैर-जरूरी चीजें न भेजें। जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर ने सभी स्कूलों को 7 दिनों के अंदर इस ऑर्डर के पालन पर रिपोर्ट देने को कहा है। आदेश में साफ किया गया है कि ऑर्डर का उल्लंघन करने पर इसे गंभीरता से लिया जाएगा और नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है।

किम जोंग उन ने अधिकारियों को गिफ्ट की स्नाइपर राइफल, बेटी ने भी दिखाया निशाना लगाना

फियोंगयांग उत्तर कोरिया की सत्ताधारी पार्टी के शीर्ष पद पर चुने जने के बाद किम जोंग उन ने अपने शीर्ष अधिकारियों और कमांडरों को नई स्निपर राइफल गिफ्ट की हैं। एक समारोह के दौरान किम जोंग उन ने लोगों को राइफल का तोहफा दिया। वहीं उनकी बेटी राइफल से निशाना लगाती नजर आई। चर्चा है कि किम जोंग उन बेटी को ही अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं। किम जोंग उन ने कहा कि राइफल गिफ्ट करना दिखाता है कि उनका अपने अधिकारियों पर पूर्ण विश्वास है। इसके अलावा वर्कर्स पार्टी के लिए वह पूरी तरह से ईमानदार हैं. हाल ही में किम की ब हन किम यो जोंग भी अमरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ काफी बयान दे रही थीं। ऐसे में उनको लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि एक बार फिर किम जोंग उन को ही वर्कर्स पार्टी का चीफ चुना गया। स्थानीय मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों में दिखाया गया कि किम यो जोंग के हाथ में भी राइफल है। बेटी किम जू ए को लेकर क्या है प्लान किम जोंग की बेटी की उम्र अभी 13 साल है। वैसे तो किम जोंग उन अपने परिवार को सार्वजनिक रूप से कहीं ले नहीं जाते हैं। हालांकि हाल ही में एक मिसाइल टेस्ट के दौरान वह अपनी बेटी को लेकर गए थे। इसके अलावा उनकी बहन की भी कई तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। हाल ही में जब किम जोंग उन चीन की यात्रा पर गए थे तब भी वह बेटी को साथ लेकर गए थे। वर्कर्स पार्टी ने सात दिनों का एक वार्षिक समारोह किया जिसमें किम जोंग उन का जमकर गुणगान किया गया। अमेरिका को दे दी धमकी किम जोंग उन ने कहा है कि यदि अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण नीति छोड़कर उत्तर कोरिया के परमाणु संपन्न राष्ट्र के संवैधानिक दर्जे को स्वीकार करता है, तो उत्तरी कोरिया अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए तैयार होगा। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के अनुसार वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की नौवीं कांग्रेस के अवसर पर आयोजित एक परमाणु सैन्य परेड में श्री किम ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा 'यदि अमेरिका उत्तर कोरिया के संविधान में परिभाषित परमाणु राष्ट्र की वर्तमान स्थिति का सम्मान करता है और उत्तर कोरिया के प्रति अपनी शत्रुतापूर्ण नीति वापस लेता है, तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि हम अमेरिका के साथ अच्छे संबंध स्थापित न कर सकें।' किम ने कहा कि अमेरिका और उत्तर कोरिया साथ चल सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब अमेरिका यह स्वीकार कर ले कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार स्थायी रूप से रहेंगे। उत्तरी कोरिया के सुप्रीम लीडर की टिप्पणियों को अप्रैल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा से पहले अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खोलने के रूप में देखा गया। श्री किम ने हालांकि दक्षिण कोरिया के साथ किसी भी राजनयिक सुधार की उम्मीदों को खारिज करते हुए उन्हें सबसे बड़ा शत्रु करार दिया।

हार में भी जीत! पाकिस्तान से हारने के बाद भी श्रीलंका को मिलेगा करोड़ों का फायदा

कोलंबो पाकिस्तान की टीम का भविष्य टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अंधकार में है। पाकिस्तान का आखिरी मुकाबला बाकी है, जो आज यानी शनिवार 28 फरवरी को खेला जाएगा। श्रीलंका से ये मैच पाकिस्तान को खेलना है, जो टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है। इस मैच को जीतकर भी पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल में नहीं जा सकती, लेकिन एक सिनेरियो को पूरा करके टीम को सेमीफाइनल का टिकट मिल सकता है। वहीं, हार या जीत उससे श्रीलंका को कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर पाकिस्तान ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया तो फिर श्रीलंका के लिए ये फायदे का सौदा जरूर होगा। दरअसल, श्रीलंका की टीम तो टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाएगी, लेकिन पाकिस्तान की टीम अगर श्रीलंका को 65 से ज्यादा रनों से या 13 ओवर से पहले रन चेज में हरा देती है तो फिर पाकिस्तान को सेमीफाइनल का टिकट मिल सकता है। अपनी हार में श्रीलंका का फायदा छिपा हुआ है, क्योंकि अगर पाकिस्तान ने सेमीफाइनल में प्रवेश किया तो फिर सेमीफाइनल मुकाबला श्रीलंका में खेला जाएगा, अगर पाकिस्तान की टीम भी बाहर हो गई तो पहला सेमीफाइनल कोलंबो की जगह कोलकाता में खेला जाएगा। श्रीलंका का फायदा इसमें ये है कि श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को सेमीफाइनल के लिए होस्टिंग फीस मिलेगी। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को मेजबानी का फायदा मिलेगा। श्रीलंका का भी फायदा होगा, क्योंकि फैंस मुकाबला देखने पहुंचेंगे, तो वीजा, फ्लाइट, होटल, खाना-पीना और ट्रेवलिंग पर खर्चा श्रीलंकाई मुद्रा में करेंगे। बड़ा रेवेन्यू इससे आएगा, क्योंकि हजारों फैंस मैच के लिए पहुंचते हैं। पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल में पहुंचकर जीतती है तो फिर फाइनल भी श्रीलंका में आयोजित होगा। ऐसे में श्रीलंका का इस मैच को हार जाने में ही तगड़ा फायदा है। पैसों के इस खेल में श्रीलंका की टीम इस मैच को सीरियस लेगी भी या नहीं? कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि दुनिया को सिर्फ अपना फायदा देखना होता है और श्रीलंका भी ऐसा करे तो इसमें कोई गुनाह नहीं होगा, बर्शते जानबूझकर कोई ऐसी हरकतें न हो कि मैच फिक्सिंग जैसी चीजें उठने लगें।  

ममता सरकार को SC की चेतावनी: ‘चुनाव आयोग नहीं तो ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी किसकी?’

मुंबई  सुप्रीम कोर्ट ने  पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को पूरा करने में देरी करने के उद्देश्य से बार-बार 'अस्पष्ट और अप्रासंगिक' कारणों के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाने पर राज्य सरकार के प्रति गहरी नाराजगी जताई। गौरतलब है कि इस मतदाता सूची की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा- कृपया अस्पष्ट कारणों के साथ अदालत में न आएं और प्रक्रिया में देरी करने की कोशिश न करें। हर दिन कोई न कोई बेमतलब का बहाना नहीं हो सकता। इसे अब खत्म होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा- हमने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर (संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए) उन न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का निर्देश दिया है, जो काम मूल रूप से चुनाव आयोग (EC) के अधिकार क्षेत्र का है। लेकिन आप (राज्य सरकार) बेवजह की शिकायतें कर रहे हैं। कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप  रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत की यह टिप्पणी तब आई जब पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सीजेआई और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष गंभीर आरोप लगाए। सिब्बल ने कहा कि अजीब चीजें हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के अधिकारी उन न्यायिक अधिकारियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं (जिन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा तैनात किया गया था) कि मतदाताओं के दावों के साथ जमा किए गए किन दस्तावेजों को स्वीकार किया जाना है। सिब्बल ने तर्क दिया कि यह सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया था कि इसके 'तौर-तरीके' कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा तय किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल की दलील को किया खारिज पीठ ने बंगाल सरकार द्वारा आए दिन इस मुद्दे को उठाए जाने पर नाखुशी जताई। अदालत ने सिब्बल की दलीलों से असहमति जताते हुए स्पष्ट किया- जब हमने कहा था कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तौर-तरीके तय करेंगे, तो हमारा मतलब यह था कि वह यह तय करेंगे कि किस न्यायिक अधिकारी को कहां तैनात किया जाएगा और उन्हें क्या सुविधाएं दी जाएंगी। दावों का निपटान और मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की वैधता पर निर्णय केवल न्यायिक अधिकारी ही लेंगे। जस्टिस बागची का स्पष्टीकरण और मुख्य सचिव का मुद्दा जस्टिस बागची ने स्थिति साफ करते हुए कहा- अगर चुनाव आयोग के अधिकारी न्यायिक अधिकारियों को ट्रेनिंग नहीं देंगे, तो और कौन देगा? हमारा आदेश दिन के उजाले की तरह साफ है। हमने SIR की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए न्यायिक अधिकारियों को एक ऐसी जिम्मेदारी दी है जो उनके सामान्य कामकाज से अलग है। राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों को मिलकर उनके लिए काम करने का अनुकूल माहौल बनाना चाहिए। इस दौरान, खुद को बचाव की मुद्रा में पाते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य की मुख्य सचिव भी अदालत में मौजूद हैं क्योंकि दुर्भाग्य से चुनाव आयोग द्वारा उनके खुद के मतदान के अधिकारों पर सवाल उठाया जा रहा है। पीठ का अंतिम निर्देश इस पर पीठ ने निर्देश दिया- अपने मुख्य सचिव से कहें कि वह SIR को शीघ्र पूरा करने के लिए चुनाव आयोग और न्यायिक अधिकारियों के साथ मिलकर काम करें। अंत में सिब्बल ने अदालत से यह भी मांग की कि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद, जैसे-जैसे न्यायिक अधिकारी मतदाताओं के नामों को शामिल करने का फैसला लें, चुनाव आयोग को 'पूरक मतदाता सूची' भी प्रकाशित करनी चाहिए। इसके जवाब में पीठ ने स्पष्ट किया कि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह से अदालत के आदेशों के अनुसार ही की जाएगी, जिसमें यह पहले से ही निर्दिष्ट है कि दावों की जांच के लिए किन दस्तावेजों को स्वीकार किया जाना है।

हिसार में दूषित पानी पीने के कारण 90 बीमार

हिसार. पड़ाव चौक, प्रताप नगर व यादव मुहल्ला में बीते 6 माह से लगातार एक हजार घरों में दूषित पानी सप्लाई आने से क्षेत्रवासी परेशान है। जिससे उपरोक्त तीनों क्षेत्रों के 90 लोग उल्टी, दस्त, टाइफाइड व वायरल से ग्रस्त हो चुके हैं, जिनमें 20 बच्चे भी शामिल है। समस्या को लेकर पब्लिक हेल्थ के दफ्तरों के चक्कर काटने से परेशान क्षेत्रवासियों का सब्र का बांध टूट गया और दोपहर 1 बजे पड़ाव चौक पर जाम लगा दिया। करीब डेढ़ घंटे तक जाम लगने से राहगीरों सहित लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना की जानकारी पुलिस व पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों को लगी तो वे जाम खुलवाने के लिए घटनास्थल की तरफ दौड़े। जहां आक्रोशित क्षेत्रवासियों ने दूषित पानी सप्लाई होने की पीड़ा बताई और दैनिक दिनचर्या से लेकर बच्चे सहित लोगों को बीमारी से ग्रस्त होने का दर्द भी बताया। दूसरी तरफ पुलिस व पब्लिक हेल्थ के अधिकारी समझाने में लगे रहे। करीब डेढ़ घंटे बाद शुक्रवार शाम तक घरों में स्वच्छ पानी सप्लाई देने के आश्वासन पर जाम खोल दिया गया। क्षेत्र विवाद पर दो पार्षदों में भी हुई खींचतान पड़ाव चौक निवासी मनोज ने बताया कि जाम के दौरान घटनास्थल पर दो पार्षद भी पहुंचे, जिनमें वार्ड नंबर-2 के मोहित सिंगला व वार्ड नंबर-6 के कुलदीप शामिल रहे। क्षेत्रवासी ने बताया कि उपरोक्त दोनों पार्षदों में क्षेत्र को लेकर खींचतान हो गई। दोनों पार्षदों का कहना था कि पड़ाव चौक, प्रताप नगर व यादव मुहल्ला उनके अधीनस्थ क्षेत्र में नहीं है। इसलिए वे कुछ नहीं कर सकते। लेकिन पेयजल को लेकर किसी भी पार्षद ने सुध नहीं ली और खींचतान जारी रखी। क्षेत्रवासी बोले: पुलिस ने मामला दर्ज करने का डर दिखाया पड़ाव चौक निवासी मनोज, कपिल, कमला, विमला, राजबाला ने बताया कि जाम खुलवाने के लिए पुलिस ने उन पर मामला दर्ज करने का डर दिखाया। जबकि पेयजल को लेकर पुलिस ने किसी तरह की जानकारी नहीं जुटाई। उपरोक्त क्षेत्रवासियों का आरोप है कि जाम लगाने पर पुलिस ने उन पर मामला दर्ज का डर दिखाया। जबकि मूलभूत सुविधा जिसमें पेयजल खराब हालत को लेकर पब्लिक हेल्थ पर किसी तरह की कोई कार्रवाई करने तक की बात नहीं की। लोग बोले- 24 घंटे में पानी साफ नहीं आया तो जाम लगाएंगे क्षेत्रवासी कविता, सजना, मुन्नी, विमला, फूली ने बताया कि अगर 24 घंटे तक पानी की समस्या का निदान नहीं हुआ तो वे फिर से जाम लगाएंगे। हालांकि दूषित पानी को लेकर पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दे दी गई है।

दिल्ली-अंबाला सेक्शन पर दो नई रेल लाइनों का काम शुरू

अंबाला. दिल्ली-अंबाला सेक्शन पर दो नई रेल लाइनों (अप-डाउन) का सर्वे शुरू हो गया है। करीब 194 किलोमीटर रेल लाइनों से प्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर लाभान्वित होंगे। इस पर करीब 5,983 करोड़ रुपये निर्धारित कर दिए गए हैं। रेलवे के लिए यह परियोजना रेलवे के लिए अहम है। इससे रेलयात्रियों और रेलवे को तो फायदा होगा, रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। यात्रियों को नो-रूम जैसी स्थिति से छुटकारा मिल जाएगा। नई रेल लाइनों के लिए कई स्थानों पर जमीन का अधिग्रहण भी होगा। चार साल में पूरा होगा लक्ष्य यह परियोजना अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत के यात्रियों के लिए सबसे बड़ा फायदा देगा। चार वर्षों में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पानीपत जंक्शन से अंबाला तक डाउन लाइन की तरफ और दिल्ली की तरफ अपलाइन के साथ नई लाइनें बिछेंगी। दिल्ली से आई टीम ने अंबाला की ओर सर्वे शुरू कर दिया है। ट्रेनों के क्रॉसिंग में लगने वाला समय कम होगा वर्तमान में ट्रेनों को क्रास करने में समय लगता है। यदि किसी ट्रेन को क्रास करवाना है, तो उसके लिए एक ट्रेन को रोका जाता है। कई बार तो एक से ज्यादा ट्रेनों को क्रास कराया जाता है। ऐसे में जिस ट्रेन को रोका जाता है, उसके यात्री परेशान होते हैं और ट्रेन अपने समय पर भी गंतव्य तक नहीं पहुंच पाती। नई रेल लाइनें बिछने के बाद ट्रेनों की क्रासिंग का समय भी कम होगा। ट्रेनों का संचालन बढ़ेगा : दो नई लाइनों के बिछने के बाद इस रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी। अभी स्थिति ऐसी हो जाती है कि ट्रेनों में नो रूम बन जाता है। यानी टिकट ही नहीं मिल पाते। ट्रेनें बढ़ने से यात्रियों को ट्रेनों में सीट मिल जाएगी और रेलवे को राजस्व मिल सकेगा। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे दिल्ली-अंबाला नई रेल का यह प्रोजेक्ट रोजगार के मौके भी बढ़ाएगा। ट्रेनों के लिए जहां प्लेटफार्मों का विस्तार होगा, वहीं स्टालों की संख्या भी बढ़ जाएगी। इसी तरह यात्रियों के लिए टिकट लेना और आरामदायक करने के लिए रेलवे द्वारा स्टेशन परिसर से बाहर भी टिकट घर दिए जा सकेंगे। इसके लिए रेलवे द्वारा निर्धारित फीस ली जाएगी, यात्रियों को सुविधा होगी कि वे स्टेशन की बजाए बाहर से टिकट खरीद सकेंगे। जंक्शन पर ठहरती है 114 ट्रेनें रेलवे जंक्शन पर रोजाना 170 करीब ट्रेनें गुजरती है, इसमें मालगाड़ी के साथ यात्री ट्रेन शामिल है। प्रतिदिन 114 से अधिक ट्रेनों का ठहराव पानीपत में होता है। इसमें वंदे भारत, शताब्दी, जन शताब्दी, सुपरफास्ट, मेल एक्सप्रेस के अलावा पैसेंजर ट्रेन शामिल है। अंबाला से जालंधर तीसरी रेल लाइन बिछेगी रेलवे की ओर से अंबाला से जालंधर तक तीसरी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस योजना पर लगभग 3200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस मार्ग पर लगातार बढ़ रही ट्रेनों की संख्या को देखते हुए रेलवे ने यह फैसला किया है। इस योजना के तहत सर्वे पूरा करवा लिया है। रेलवे के निर्माण विभाग ने भी प्रस्ताव तैयार करके रेलवे बोर्ड के पास मान्यता के लिए भेज दिया है। नई लाइन के लिए हरियाणा और पंजाब में 20 से 30 फीट तक जालंधर से अंबाला की तरफ आने वाली पुरानी लाइन के साथ ही भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। दिल्ली से अंबाला और फिर अंबाला से लुधियाना-जालंधर तक लगभग 153 किमी का सर्वे किया गया। यह है प्रोजेक्ट  रेलवे अधिकारियों की ओर से दिल्ली-अंबाला रेल लाइन को बिछाने से पहले सर्वे किया गया, जिसके बाद यह पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसमें रेलवे द्वारा जमीन अधिग्रहण को भी ध्यान में रखा गया है। पांच जिलों से यह रेल लाइन निकलेगी, वहां के कुल 32 स्टेशनों पर सुविधाओं को भी बढ़ाया जाएगा। इस नई रेल लाइन पर 29 पुल बनाए जाएंगे, जबकि पुराने पुलों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। दावा है कि यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद करीब 43 करोड़ किलो कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन रुकेगा। नई रेल लाइनों से ट्रेनें बढ़ेंगी दो लाइनों के विस्तार किया जाएगा। सर्वे के लिए दिल्ली और अंबाला की टीमें कार्य कर रही हैं। नई रेल लाइनों से ट्रेनें बढ़ेंगी और ट्रेनों की गति भी बढ़ेगी। – रमेश चंद्र, स्टेशन अधीक्षक, पानीपत।

CM नायब सैनी ने मंत्री अनिज विज के घर पहुंचकर जाना हाल चाल

अंबाला. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार को विशेष रूप से अंबाला छावनी स्थित शास्त्री कॉलोनी पहुंचे। मुख्यमंत्री यहां प्रदेश के परिवहन मंत्री अनिल विज के आवास पर उनका हालचाल जानने आए थे। इस मौके पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज , उनके भाई राजिंद्र विज व कपिल विज ने मुख्यमंत्री के यहां पहुंचने पर उन्हें सम्मानपूर्वक शॉल भेंटकर स्वागत सत्कार किया। गौरतलब है कि पिछले दिनों अनिल विज के पैर में फ्रैक्चर हो गया था, जिसके बाद से वे अपने निवास पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। मुख्यमंत्री सैनी ने अनिल विज से उनके स्वास्थ्य को लेकर काफी देर तक बातचीत की। उन्होंने डॉक्टरों द्वारा दिए गए उपचार और रिकवरी की प्रगति के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही पैर में फ्रैक्चर के कारण डॉक्टरों ने अनिल विज को पूरी तरह बेड रेस्ट और चलने-फिरने से परहेज करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री ने भी उन्हें जल्दबाजी न करने और पूरी तरह ठीक होने तक आराम करने का आग्रह किया। हालांकि, यह एक व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी मुलाकात थी, लेकिन प्रदेश के दो बड़े दिग्गजों की इस मुलाकात को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विज के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की ताकि वे जल्द ही दोबारा अपने कार्यभार को संभाल सकें। अनिल विज के चोटिल होने के बाद से ही हरियाणा भाजपा के तमाम बड़े नेताओं का उनके आवास पर आना-जाना लगा हुआ है।

होली पर मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलेगा, आंधी और बारिश की संभावना, ग्वालियर-चंबल में असर

भोपाल   मध्य प्रदेश में होली के आसपास एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है। दो मार्च से हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हो रहा वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) प्रदेश पर भी प्रभाव डाल सकता है। इसका असर विशेष रूप से ग्वालियर-चंबल अंचल में देखने को मिल सकता है, जहां बादल छाने और आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती परिसंचरण) सिस्टम सक्रिय हैं। इसके साथ ही एक ट्रफ लाइन की गतिविधि भी बनी हुई है। इसी कारण शुक्रवार को भोपाल समेत कई जिलों में बादल छाए रहे। हालांकि, तापमान में कोई खास गिरावट दर्ज नहीं की गई। अब 2 मार्च के बाद मौसम एक बार फिर करवट बदलेगा और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण होली पर प्रदेश में मावठा यानि हल्की बारिश के आसार है। 34°C पार रहा तापमान, खरगोन सबसे गर्म आंधी-बारिश और ओले का दौर थमने के बाद प्रदेश में अप्रैल जैसी गर्मी पड़ रही है। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी कई शहरों में दिन का तापमान 34 डिग्री के पार रहा। वहीं, रात में यह 18 डिग्री से ज्यादा पहुंच गया है। शुक्रवार को प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में ही पारा 27.6 डिग्री दर्ज किया गया। बाकी शहरों में तापमान 30 डिग्री या इससे अधिक ही रहे। सबसे गर्म खरगोन में तापमान 34.8 डिग्री पहुंच गया। वहीं, 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 32.4 डिग्री, इंदौर में 31.2 डिग्री, ग्वालियर में 32.7 डिग्री, उज्जैन-जबलपुर में 33 डिग्री रहा। रात के तापमान की बात करें तो पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री दर्ज किया गया। सागर में सबसे ज्यादा 18.4 डिग्री और नर्मदापुरम में 18.2 डिग्री रहा। श्योपुर, सिवनी, गुना, खंडवा-टीकमगढ़ में 16 डिग्री और रतलाम-धार में 17 डिग्री या इससे ज्यादा पहुंच गया। इधर, आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का दौर थमने के बाद प्रदेश में गर्मी ने भी रफ्तार पकड़ ली है। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी कई शहरों में दिन का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा, जबकि रात का तापमान 18 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में अधिकतम तापमान 27.6 डिग्री दर्ज हुआ, जबकि अन्य शहरों में पारा 30 डिग्री या उससे ज्यादा रहा। खरगोन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 34.8 डिग्री तक पहुंच गया। पांच बड़े प्रमुख शहरों के तापमान की बात करें तो भोपाल में 32.4 डिग्री, इंदौर में 31.2 डिग्री, ग्वालियर में 32.7 डिग्री, उज्जैन में 33 डिग्री और जबलपुर में 33 डिग्री दर्ज किया गया। रात के तापमान में पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री दर्ज किया गया। सागर में 18.4 डिग्री और नर्मदापुरम में 18.2 डिग्री रहा। श्योपुर, सिवनी, गुना, खंडवा और टीकमगढ़ में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया, जबकि रतलाम और धार में यह 17 डिग्री या उससे अधिक रहा। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को मौसम साफ रहने की संभावना है और फिलहाल कहीं भी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। फरवरी में 4 बार बदला बारिश का दौर बता दें कि इस बार फरवरी में मौसम का मिजाज चार बार बदला है। शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रह चुका है। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। फिर चौथी बार 23-24 फरवरी को भी ओले-बारिश का दौर रहा। 20 जिलों में बिगड़ चुका मौसम इससे पहले 24 और 25 फरवरी को साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) और ट्रफ की वजह से प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला रहा। 2 दिन में 20 से ज्यादा जिलों में तेज आंधी-बारिश का दौर रहा। कुछ में ओले भी गिरे। इस वजह से गेहूं-चने की फसलों पर असर पड़ा। मौसम विभाग की माने तो शनिवार को मौसम साफ रहेगा। कहीं भी बारिश का अलर्ट नहीं है।