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आर्थिक सुधारों से बदली तस्वीर, भारत में नए बिजनेस रजिस्ट्रेशन 27% उछले

नई दिल्ली मोदी सरकार की ओर से लगातार किए जा रहे आर्थिक सुधारों का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा रहा है। देश में नए बिजनेस की संख्या में 27 प्रतिशत का बड़ा इजाफा देखने को मिला है। सरकार द्वारा गुरुवार को जारी फैक्टशीट के मुताबिक, भारत में चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2025-26) के पहले 10 महीनों (3 फरवरी 2026 तक) में 1.98 लाख नए बिजनेस पंजीकृत हुए हैं, जिनकी संख्या 2020-21 में 1.55 लाख थी। आधिकारिक बयान में कहा गया कि सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में डिजिटल ट्रेड सुविधा,कर निश्चितता, अनुपालन और मुकदमेबाजी में कमी, विश्वास आधारित सीमा शुल्क प्रणाली और निवेश-अनुकूल कर व्यवस्था के जरिए व्यापार में आसानी बढ़ाने पर फोकस किया है। बयान में आगे कहा गया कि स्टार्ट-अप इंडिया, क्रेडिट गारंटी योजना, डिजिटल क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल आदि जैसे संस्थागत सुधार एक पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-सक्षम और निवेशक-अनुकूल वातावरण का निर्माण कर रहे हैं। इस प्रयास को जन विश्वास अधिनियम, आईबीसी, एमएटी आदि जैसे समानांतर नियामक सुधारों का समर्थन प्राप्त है, जो क्षमता निर्माण, नियामक सामंजस्य और विश्वास एवं जवाबदेही पर आधारित शासन मॉडल को प्राथमिकता दे रहे हैं। फरवरी 2026 तक 2.16 लाख से अधिक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के साथ, भारत विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक के रूप में मजबूती से खड़ा है। 2016 से शुरू किए गए स्टार्टअप्स के लिए नियामक सुधारों का उद्देश्य स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए व्यापार करने में आसानी, पूंजी जुटाने में आसानी और अनुपालन बोझ को कम करना है। स्टार्टअप इंडिया के अलावा, मोदी सरकार की कई पहलों ने तकनीकी नवाचार, ग्रामीण उद्यमिता, अकादमिक अनुसंधान और क्षेत्रीय समावेशन को बढ़ावा देकर भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूत किया है। ये पहलें सुनिश्चित करती हैं कि स्टार्टअप समर्थन व्यापक, विकेंद्रीकृत और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ निकटता से जुड़ा रहे। पिछले कुछ वर्षों में, भारत न केवल निवेश के लिए बल्कि कारोबार करने के लिए भी सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक बनकर उभरा है। देश की सुधार-आधारित विकास रणनीति उद्यमिता को मजबूत करने, वित्त तक पहुंच बढ़ाने, नियामक ढांचे का आधुनिकीकरण करने और व्यापार सुविधा को बढ़ाने पर केंद्रित है। बयान में आगे कहा गया है कि ये सभी उपाय न केवल कारोबार करने में आसानी बढ़ाते हैं बल्कि वित्तीय समावेशन को भी गहरा करते हैं, नवाचार को बढ़ावा देते हैं, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास में तेजी लाते हैं और भारत को एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापार और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं।

पश्चिम बंगाल के गवर्नर सीवी आनंद बोस ने दिया इस्तीफा, ममता बनर्जी ने जताया हैरानी

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के गवर्नर सीवी आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे की वजहों का पता नहीं चल पाया है. इस्तीफा देने के बाद वे दिल्ली रवाना हो गए हैं. सीवी आनंद बोस 3.5 वर्षों से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे. इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पीटीआई से बात करते हुए कहा है कि 'मैंने राजभवन में पर्याप्त समय गुजार लिया है.' बता दें कि पश्चिम बंगाल में इसी वर्ष अप्रैल-मई में चुनाव होने को हैं. इस बीच ये घटनाक्रम सामने आया है. सीवी आनंद बोस केरल के कोट्टायम के रहने वाले हैं. उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी पी.के. वासुदेवन नायर थे. वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनुयायी थे. इसलिए उनके नाम में 'बोस' जोड़ा गया. वह 1977-बैच के रिटायर्ड भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं. उन्हें 23 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया. वह भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं. आनंद बोस ने सरकार के सचिव के पद पर कार्य किया है. भारत के मुख्य सचिव और विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे हैं. वह संयुक्त राष्ट्र के साथ परामर्शदात्री स्थिति में पर्यावास गठबंधन के अध्यक्ष हैं और संयुक्त राष्ट्र पर्यावास शासी परिषद के सदस्य थे. राज्यपाल बोस ने शिक्षा, वन और पर्यावरण, श्रम और सामान्य प्रशासन जैसे कई मंत्रालयों में जिला कलेक्टर और प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में काम किया है. ममता ने जताई हैरानी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीवी आनंद बोस के इस्तीफ़ की अचानक आई खबर पर हैरानी जताई है. उन्होंने कहा कि मैं हैरान और बहुत परेशान हूं. उनके इस्तीफ़े के पीछे की वजहें मुझे अभी पता नहीं हैं. हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए मुझे हैरानी नहीं होगी अगर आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गवर्नर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कुछ राजनीतिक फायदे के लिए दबाव डाला हो. केंद्रीय गृह मंत्री ने अभी मुझे बताया कि आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का गवर्नर बनाया जा रहा है. उन्होंने इस बारे में तय रिवाज के मुताबिक मुझसे कभी सलाह नहीं ली.

क्या आपको ऐपल का सबसे सस्ता मैकबुक लेना चाहिए? जानिए 4 फायदे और 3 नुकसान

नई दिल्ली होली की रात 4 मार्च को ऐपल ने भारतीय ग्राहकों के लिए बहुत बड़ी पेशकश कर दी। उसने अपना अबतक का सबसे सस्‍ता मैकबुक (MacBook Neo) लॉन्‍च कर दिया, जिसकी शुरुआती कीमत 69,900 रुपये है। आज के जमाने में इस कीमत में नॉर्मल विंडोज लैपटॉप आ रहे हैं। अगर कोई प्रीमियम एंड्रॉयड टैबलेट खरीदने जाए तो टैब+कीबोर्ड लेने में उसके भी 60 से 65 हजार रुपये चल जाएंगे। MacBook Neo इन सभी के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे भारतीय ग्राहक जिन्‍हें मैकबुक खरीदने की चाहत है, लेकिन बजट टाइट है, उनके लिए MacBook Neo तोहफे जैसा होने वाला है। लेकिन क्‍या इसमें वो सब फीचर्स हैं जो मैकबुक एयर में मिलते हैं? MacBook Neo लेने की योजना बना रहे लोगों को इसे खरीदने के 4 कारण और ना खरीदने के 3 कारण जान लेने चाहिए। MacBook Neo मेटल बिल्‍ड MacBook Neo को ऐपल ने उसी तरह से डिजाइन और बिल्‍ड किया है जैसे वह मैकबुक एयर को करती है। यह देखने में ब‍िलकुल भी चीप या सस्‍ते नहीं लगेंगे। उसी प्रीमियनेस का एहसास होगा। एल्‍युमीनियम बिल्‍ड होने के कारण गिरने पर लैपटॉप में डेंट आ सकता है, लेकिन यह टूटेगा नहीं। इसके चारों तरफ से राउंडेड ऐज हैं तो मैकबुक निओ को पकड़ने में हैंडी बनाते हैं। इन्‍हें इस तरह से बनाया गया है कि सामने वालों को यह पता ही नहीं चलेगा कि आप कौन सा मैकबुक इस्‍तेमाल कर रहे हैं बशर्ते कि उसे कलर वेरिएंट की जानकारी ना हो। कलर ऑप्‍शंस बिलकुल अलग MacBook Neo के कलर ऑप्‍शंस एकदम अलग हैं। इसे सिल्‍वर, ब्‍लश, सिटरस और इंडिगो कलर्स में लाया गया है। वो यूजर्स जिन्‍हें चटख रंगों वाली डिवाइस पसंद हैं, उनके लिए MacBook Neo एक ट्रेंडी गैजेट बन सकता है। ऐसा लगता है क‍ि ऐपल ने यूथ और कॉलेज गोइंड स्‍टूडेंट्स को ध्‍यान में रखकर मैकबुक निओ के कलर ऑप्‍शंस का चुनाव किया है। आज तक नहीं चलाया मैकबुक तो बनेगा ग्रेट डील भारत में बहुत बड़ी आबादी अभी ऐपल के इकोसिस्‍टम से जुड़ी नहीं है। ऐसे यूजर्स जिन्‍होंने आज तक मैकबुक इस्‍तेमाल नहीं किया, लेकिन उसे चलाने की दिली ख्‍वाहिश है, उनके लिए लिए MacBook Neo ग्रेट डील बनेगा। फर्स्‍ट टाइम बायर्स मैकबुक निओ के साथ इसके यूजर इंटरफेस से परिच‍ित हो सकते हैं और भविष्‍य में एयर या प्रो मॉडल लेने के बारे में फैसला ले सकते हैं। लंबे समय तक अपडेट, परफॉर्मेंस भी बरकरार ऐपल अपने प्रोडक्‍ट्स को लंबे समय तक अपडेट देती है। मैकबुक निओ को लंबे समय तक अपडेट मिलने से यह नया बना रहेगा और खास बात है कि मैकबुक की परफॉर्मेंस जल्‍दी कमजोर नहीं पड़ती। वह कई साल तक भी पूरी क्षमता के साथ काम करते हैं। MacBook Neo में लगा A18 Pro चिपसेट सबसे पहले साल 2024 में आए आईफोन्‍स में देखा गया था। यह मैकबुक को चलाने के लिए भी पर्याप्‍त है। अगर आप बहुत हैवी यूजर नहीं हैं। बिजनेस जरूरतों के लिए मैकबुक चलाना चाहते हैं तो MacBook Neo निराश नहीं करेगा। इन 3 वजहों से कर सकते हैं रिजेक्‍ट     MacBook Neo में बैकलिट कीबोर्ड नहीं है। जिन्‍हें बैकलिट की आदत है यह जरूरी फीचर है, उन्‍हें इसे नहीं लेना चाहिए।     मैकबुक के लोकप्र‍िय फीचर्स में शामिल टच आईडी, MacBook Neo में सिर्फ 512 जीबी वेरिएंट में मिलती है। 256 जीबी वेरिएंट में यह नहीं मिलेगी।     MacBook Neo को लाइट वर्क के लिए लाया गया है। स्‍टूडेंट्स और बिजनेसेस के लिए यह बना है। बहुत ज्‍यादा हैवी टास्‍क करने हैं तो इसे खरीदने की योजना ना बनाएं। MacBook Neo Vs MacBook Air एक्‍सपर्ट के अनुसार, MacBook Neo और MacBook Air का डिस्‍प्‍ले लगभग एक जैसा है। प्रमुख फर्क चिपसेट का है। मैकबुक एयर में M सीरीज डेस्कटॉप-लेवल चिप इस्तेमाल की गई है। जबकि Neo में A18 Pro चिपसेट है, जिसे हमने आईफोन्‍स में देखा है। हालांकि दोनों ही Mac ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं। Neo में बैकलिट कीबोर्ड कीज नहीं हैं। 512GB ऑप्शन में फिंगरप्रिंट स्कैनर यानी टच आईडी मिलती है। इसमें कम स्पीकर्स और माइक्रोफोन्स हैं। निओ में 3.5mm हेडफोन जैक तो है, लेकिन चार्जिंग के लिए कोई खास MagSafe पोर्ट नहीं है।

ईरान का अमेरिका पर तीखा वार: ‘भारत के मेहमान’ पर अटैक की कीमत चुकानी होगी

वाशिंगटन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिका का हमला और उसमें ईरानी पोत को तबाही जारी युद्ध को और विध्वंसक बना सकती है। ईरान की तरफ से इस हमले को अत्याचार करार दिया गया है। साथ ही कहा कि 'भारतीय नौसेना के मेहमान' पर हमला करने की अमेरिका भारी कीमत चुकाएगा। जहाज पर करीब 180 लोग सवार होने की खबरें हैं, जिनमें से 32 को बचा लिया गया था। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा, 'लगभग 130 नाविकों को ले जा रहे और भारत की नौसेना के अतिथि पोत 'फ्रिगेट देना' पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। मेरी बात याद रखना- अमेरिका ने जो उदाहरण पेश किया है, उसे उस पर अत्यधिक पछतावा होगा।' ईरानी पोत हाल में भारत की तरफ से आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास में शामिल हुआ था। पनडुब्बी से बनाया निशाना अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वॉशिंगटन में कहा था कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह किसी दुश्मन युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोने की पहली घटना है। हेगसेथ ने पत्रकारों से कहा, 'एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था। लेकिन उसे टॉरपीडो से डुबो दिया गया।' उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने उस ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसका नाम 'सुलेमानी' के नाम पर रखा गया था। सुलेमानी, पूर्व ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी थे, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी सेना ने मार गिराया था। क्या है IRIS Dena ईरान के सबसे नए युद्धपोतों में से एक, आईरिस देना, मौदगे श्रेणी का एक फ्रिगेट है जो ईरानी नौसेना के लिए समुद्र में गश्त करता है। यह भारी तोपों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, पोत-रोधी मिसाइलों और टॉरपीडो से लैस था। पोत पर एक हेलीकॉप्टर भी था। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि मौजूदा युद्ध के दौरान कम से कम 17 ईरानी नौसैनिक पोतों को डुबो दिया गया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, 'हम ईरानी नौसेना को भी डुबो रहे हैं – पूरी नौसेना को।' श्रीलंका ने किया रेस्क्यू विदेश मंत्री विजिथा हेराथ ने संसद को बताया कि श्रीलंकाई नौसेना और तटरक्षक बल को तड़के पांच बजकर आठ मिनट पर दक्षिणी बंदरगाह जिले गॉल से लगभग 40 समुद्री मील की दूरी पर स्थित 'आईरिस देना' नामक पोत के डूबने की सूचना मिली थी। हेराथ ने कहा कि श्रीलंकाई नौसेना और वायु सेना ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया। उन्होंने कहा, 'उनमें से 30 को बचा लिया गया जबकि जहाज पर लगभग 180 लोगों के सवार होने की खबर है।' मंत्री ने कहा कि जहाज के डूबने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। ईरानी पोत ने हाल ही में भारत द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लिया था।  

दशकों बाद युद्ध में टॉरपीडो की वापसी, दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार चर्चा में

विदेश  ईरान-अमेरिका के युद्ध में मिसाइलों के बाद अब टॉरपीडो की एंट्री भी हो गई है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि हिंद महासागर में ईरान का एक युद्धपोत अमेरिका ने टॉरपीडो से हमला करके डुबो दिया है.अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा है कि हिंद महासागर में अमेरिका ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसे लगा कि वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित है. कई सालों बाद टॉरपीडो का इस्तेमाल होने से इसकी काफी चर्चा हो रही है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये होता क्या है और कैसे इससे नुकसान पहुंचाया जाता है… साथ ही जानते हैं कि क्या भारत के पास भी ये हथियार हैं… वर्ल्ड वॉर में हुआ था इस्तेमाल क्या आप जानते हैं दूसरे वर्ल्ड वॉर के बाद टॉरपीडो से किसी जहाज को डुबोए जाने की यह चौथी घटना है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने किसी दुश्मन जहाज को टॉरपीडो से निशाना बनाया है.  है क्या टॉरपीडो? टॉरपीडो एक ऑटोमैटिक हथियार है, जिसे पानी की सतह के ऊपर या नीचे से दागा जा सकता है और ये पानी के अंदर टारगेट को हिट करता है. ज्यादातर इसका इस्तेमाल पनडुब्बियों और जहाजों को टारगेट करने के लिए किया जाता है. इसमें एक विस्फोटक सामग्री होती है, जो टारगेट से टकराने पर या उसके पास पहुंचने पर फट जाती है. हालांकि, टॉरपीडो का इस्तेमाल खासकर पनडुब्बियों में किया जाता है, लेकिन इन्हें सतह पर मौजूद युद्धपोतों से भी दागा जा सकता है या विमानों द्वारा गिराया जा सकता है. आधुनिक टॉरपीडो को आमतौर हल्के या भारी टॉरपीडो में बांट दिया गया है, जिससे कई  तरह के टारगेट को हिट करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. इसे 1960 के दशक में दुश्मन की पनडुब्बियों और सतह के हथियारों दोनों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया था.  इसे सबसे पहली बार 19वीं शताब्दी में ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य में बनाया गया था, जिसके बाद धीरे-धीरे इनका उपयोग विश्वभर की नेवी में फैल गया. शुरुआत में इन्हें छोटे, तीव्र गति वाले जहाजों पर लगाया जाता था, जिनका उद्देश्य उस समय के बड़े, भारी कवच ​​वाले, लेकिन धीमी गति वाले युद्धपोतों और ड्रेडनॉट्स को चुनौती देना था.  पहले और दूसरे विश्व युद्ध में हुआ था इस्तेमाल टॉरपीडो का पहला बड़े पैमाने पर उपयोग प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुआ, जब जर्मन पनडुब्बियों (जिन्हें यू-बोट के नाम से जाना जाता था) ने ब्रिटिश द्वीपों की ओर जाने वाले अटलांटिक महासागर में व्यापारिक जहाजों पर हमला करने के लिए इनका इस्तेमाल किया. हालांकि, टॉरपीडो युद्ध अपने चरम पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पहुंचा, जब सभी प्रमुख शक्तियों ने अपने सतही जहाजों, पनडुब्बियों और विमानों को टॉरपीडो से लैस कर दिया. उस वक्त कई टॉरपीडो का इस्तेमाल किया गया था. क्या भारत के पास भी है.. अमेरिका के मार्क 48, चीन के यू-6, इटली के ब्लैक शार्क, रूस के टाइप 53 टॉरपीडो को दुनिया भर की नेवी में सबसे अहम हथियार माना जाता है. इसमें भारत का वरुणस्त्र आदि भी शामिल हैं. वरुणस्त्र को डीआरडीओ की ओर से एंटी-एयरक्राफ्ट गन (एएसडब्ल्यू) के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो एक स्वदेशी हथियार है. वरुणस्त्र का उपयोग भारतीय नौसेना के कई जहाजों में किया जाता है. भारतीय नेवी की पनडुब्बियां सोवियत-युग के टाइप 53 टॉरपीडो का उपयोग करती हैं, जबकि स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां फ्रांसीसी F21 और इतालवी ब्लैक शार्क हैवीवेट टॉरपीडो के मिश्रण का उपयोग करती हैं. वहीं, नौसेना के P-8 पोसाइडन और MH-60R सीहॉक एएसडब्ल्यू विमान, अमेरिका से प्राप्त एयर-ड्रॉप किए जाने वाले मार्क 54 लाइटवेट टॉरपीडो का उपयोग करते हैं. भारतीय नौसेना की ओर से इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे शक्तिशाली टॉरपीडो सुपरसोनिक मिसाइल-असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो या स्मार्ट सिस्टम है. ये 643 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों को भेद सकता है. 

Shakira India Tour: दिल्ली और मुंबई में कॉन्सर्ट, आगे की सीट के लिए कितने लाख देने होंगे?

लॉस एंजिल्स करीब दो दशकों के बाद भारत में शकीरा को लेकर एक बार फिर से फैन्स के बीच चर्चा तेज हो गई है। ग्लोबल पॉप स्टार शकीरा एक बार फिर भारत में लाइव परफॉर्म करने के लिए यहां आ रही हैं। शकीरा के कॉन्सर्ट दिल्ली और मुंबई दोनों जगह होने हैं। आइए जानते हैं पॉर सिंगर के शो के लिए फ्रंट सीट के लिए आपको कितने रुपये खर्च करने होंगे। म्यूजिक और खासकर पॉप के फैन्स के लिए ये एक फेस्टिवल से कम नहीं। शकीरा भारत के दो शहरों मुंबई और दिल्ली में कॉन्सर्ट करने जा रही है। मजेदार ये है कि शकीरा का ये परफर्मेंस करीब 19 साल बाद भारत में होने जा रहा है। इसे लेकर म्यूजिक लवर्स के बीच गजब का उत्साह है। मुंबई कॉन्सर्ट के टिकट अलग-अलग कैटिगरी भारत में शकीरा का ये इवेंट एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन फीडिंग इंडिया के तहत आयोजित किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बताया जा रहा है कि शकीरा के मुंबई कॉन्सर्ट के टिकट अलग-अलग कैटिगरी हैं। सबसे प्रीमियम ऑप्शन HSBC स्टारस्ट्रक लाउंज पास की कीमत ₹ 32,000 है, जिसमें ₹ 28,500 के टिकट , ₹ 200 डिलीवरी चार्ज और जीएसटी समेत ₹ 3,363 का बुकिंग फीस शामिल है। 24,500 रुपये का प्लैटिनम लाउंज अन्य कैटिगरी की बात करें तो ₹ 24,500 का प्लैटिनम लाउंज है जिसमें , ₹ 14,500 का वीआईपी सेक्शन और ₹ 6,000 से शुरू होने वाले जेनरल एडमिशन टिकट शामिल हैं। इन सभी में बुकिंग और डिलीवरी चार्ज शामिल नहीं हैं। सीटों की लेआउट कुछ इस हिसाब से तैयार की गऊ है कि यहां स्टेज सीधा दिखाई देगा और दर्शकों को सबसे आगे बैठने का अनुभव मिलेगा। 32,000 का टिकट खरीदने वालों को मिलेगी ढेरों सुविधा हालांकि, बताया जा रहा है कि ₹ 32,000 का टिकट खरीदने वालों को प्रीमियम एक्सपीरियंस होगा, जिन्हें विशेष सुविधाएं मिलेंगी। इस पैकेज में वीआईपी लाउंज, लिमिटेड फैन पिट में एंट्री, वेन्यू की एंट्री से लेकर लाउंज तक शटल सर्विस, एक स्पेशल स्टैंडिंग ज़ोन, कॉम्प्लिमेंट्री एल्कोहलिक बेवरेज, प्रीमियम फूड स्टॉल तक पहुंचने और एक डेडिकेटेड एंट्री लेन जैसी खास सुविधाएं शामिल हैं। दिल्ली में टिकटों की कीमतें वहीं खबर है कि दिल्ली में भी टिकटों की कीमतें काफी अधिक रखी गई हैं, जहां एचएसबीसी स्टारस्ट्रक लाउंज के कीमत करीब ₹ 30,500 रखी गई है। पहली बार भारत में दो जगहों पर शकीरा करेंगी परफॉर्म आयोजकों की ओर से मिली हालिया जानकारी के मुताबिक, शकीरा 10 अप्रैल को मुंबई में और 15 अप्रैल को दिल्ली में परफॉर्म करने जा रही हैं। यह पहली बार है कि शकीरा का भारत दौरा दो शहरों में आयोजित किया जा रहा है। दोनों ही शहरों में उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। उम्मीद जताई जै रही है कि शकीरा को लेकर होनेवाले ये कॉन्सर्ट्स पूरी तरह हाउसफुल रहेंगे। शकीरा की एनर्जी, डांस मूव्स और सुपरहिट गानों का जादू भारतीय दर्शकों के सिर चढ़कर बोलेगा। भारत में अपनी वापसी को लेकर शकीरा भी उत्साहित शकीरा ने आखिरी बार साल 2007 में मुंबई में परफॉर्म किया था। उस समय वह अपनी 'ओरल फिक्सेशन टूर' के तहत भारत आई थीं। अब लगभग 19 साल बाद फैंस को उनकी लाइव परफॉर्मेंस देखने के लिए मिलेगी। भारत में अपनी वापसी को लेकर शकीरा काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा है कि भारत में परफॉर्म करना हमेशा उनके लिए खास रहा है। मुंबई और दिल्ली के फैंस से दोबारा जुड़ना एक यादगार अनुभव होगा। शकीरा का करियर करीब तीन दशकों से भी ज्यादा लंबा रहा है। उन्होंने 1990 के शुरुआती दौर में अपने म्यूजिक सफर की शुरुआत की थी और धीरे-धीरे वह दुनिया की सबसे पॉप्युलर पॉप सिंगर्स की लिस्ट में शामिल हो गईं। शकीरा को 'हिप्स डोंट लाइ', 'व्हेनएवर, वेयरएवर', 'वाका वाका', 'शी वुल्फ' और 'ला टोर्टुरा' जैसे गानों से ग्लोबल पहचान मिली है।

ईरान-इजरायल तनाव का असर: फरीदकोट में पेट्रोल पंपों पर किसानों की भीड़, डीजल स्टॉकिंग बढ़ी

फरीदकोट  फरीदकोट में पेट्रोल पंपों पर अचानक से किसानों की भीड़ उमड़ गई है। वह ड्रम लेकर पेट्रोल-डीजल लेने के लिए पहुंच रहे हैं। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के चलते पंजाब में फरीदकोट जिले के कोटकपूरा शहर में पेट्रोल पंपों पर किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी। वीरवार को शहर के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल भरवाने के लिए लंबी कतारें देखने को मिलीं। खासकर किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ड्रम और कैन लेकर पहुंचे और बड़ी मात्रा में डीजल भरवाकर स्टोर करते नजर आए। दरअसल, गेहूं की कटाई का सीजन करीब एक महीने बाद शुरू होने वाला है। ऐसे में किसानों को डर है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ते हैं तो तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के चलते किसान अभी से डीजल जमा करने में जुट गए हैं ताकि कटाई के समय उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। किसान बोले- युद्ध की वजह से तेल की कमी होने की चर्चा पेट्रोल पंपों पर पहुंचे किसानों का कहना है कि युद्ध की खबरों के कारण तेल की कीमतें बढ़ने और कमी होने की चर्चा चल रही है। इसी वजह से वे एहतियात के तौर पर डीजल स्टोर कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि कटाई के दौरान ट्रैक्टर, कंबाइन और अन्य कृषि मशीनों के लिए बड़ी मात्रा में डीजल की जरूरत पड़ती है, इसलिए वे पहले से तैयारी कर रहे हैं। वहीं, पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि तेल की सप्लाई नियमित रूप से आ रही है, लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण कुछ जगहों पर भीड़ और लंबी कतारें लग रही हैं। प्रशासन भी लोगों से संयम बरतने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रहा है। भाजपा नेता ने की अफवाहों से बचने की अपील इस मामले में भाजपा नेता प्रदीप शर्मा ने लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देश में तेल की कोई कमी नहीं है और केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय हालात चाहे जैसे हों, भारत में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि घबराकर तेल जमा करने की बजाय सामान्य तरीके से ही खरीदारी करें।

दूषित पानी मामले में हाईकोर्ट सख्त, निगम को 10 दिन में न्यायिक आयोग को रिकॉर्ड देने के निर्देश

इंदौर भागीरथपुरा में रहवासियों को मल-मूत्र युक्त पानी पिलाने वाले नगर निगम की एक और लापरवाही सामने आई है। कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद निगम ने मामले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग को अब तक भागीरथपुरा क्षेत्र में बिछाई गई पाइप लाइनें, टेंडर से जुड़े दस्तावेज, दूषित पानी की वजह से जान गंवाने वालों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं सौंपे। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और आदेश दिया कि निगम दस दिन के भीतर पूरे दस्तावेज आयोग को सौंप दे। मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही पांच अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को एक साथ सुनवाई हुई। दस्तावेज न मिलने से जांच के अंतिम निष्कर्ष में बाधा आयोग ने गुरुवार को अंतरिम जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। इसमें कहा है कि चूंकि निगम से पूरे दस्तावेज नहीं मिले हैं, इसलिए जांच के अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच पाना संभव नहीं है। कोर्ट ने आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दे दिया। अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि वे कौन अधिकारी थे जिनकी लापरवाही की वजह से भागीरथपुरा दूषित पानी कांड हुआ और 36 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सीवेज मौत पर 30 लाख, भागीरथपुरा कांड में सिर्फ 2 लाख सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि सीवेज लाइन में उतरे दो लोगों की मृत्यु पर उनके परिजनों को तो 30-30 लाख रुपये का मुआवजा दे दिया, लेकिन भागीरथपुरा कांड में सिर्फ दो-दो लाख रुपये दिए गए। इस पर कोर्ट ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट सामने आने दीजिए, इस बारे में भी विचार करेंगे। गुरुवार दोपहर ठीक 2.30 बजे न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष भागीरथपुरा मामले की सुनवाई शुरू हुई। दस्तावेज सौंपने में देरी पर कोर्ट सख्त, आयोग में कर्मचारी तैनात करने के निर्देश एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे पढ़ने के बाद कोर्ट ने निगम के वकील से कहा कि निगम को दस्तावेज सौंपने में क्या दिक्कत है। निगम के वकील ने कहा – हम दस्तावेज दे रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट दो मार्च को तैयार की है और इसमें साफ लिखा है कि दस्तावेज नहीं मिले हैं। सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि आमजन आयोग के पास भागीरथपुरा मामले में दस्तावेज, साक्ष्य, शिकायत लेकर पहुंच तो रहे हैं, लेकिन वहां कोई कर्मचारी ही नहीं है जो उनकी शिकायत या दस्तावेज ले सके। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि आयोग में इस कार्य के लिए कर्मचारी तैनात किए जाएं। क्या पानी में मिलाया गया था जानलेवा केमिकल? सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि शहर में 110 टंकियां हैं, लेकिन सिर्फ भागीरथपुरा टंकी से वितरित हुए पानी से ही मौतें हुई हैं। जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि भागीरथपुरा टंकी में कुछ ऐसा मिलाया गया जो जानलेवा साबित हुआ। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह बात भी सामने आई है कि भागीरथपुरा टंकी में केमिकल की कुछ अतिरिक्त मात्रा मिलाई गई थी। उन्होंने इस संबंध में एक पेन ड्राइव भी कोर्ट में प्रस्तुत की मुआवजे की राशि पर एडवोकेट मनीष यादव की दलील एडवोकेट मनीष यादव ने मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले शहर में सीवेज में उतरने से हुई दो लोगों की मौत के मामले में शासन ने उनके परिजनों को 30-30 लाख रुपये की सहायता की, जबकि भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में जान गंवाने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये दिए गए। यह राशि भी शासन ने नहीं दी बल्कि रेडक्रास सोसायटी से दी गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट में इसे लेकर कहा है कि अंतिम रिपोर्ट में इस बिंदु को शामिल करेंगे। आयोग नियुक्त करेगा शिकायत अधिकारी कोर्ट ने न्यायिक आयोग से कहा है कि वह आमजन की शिकायत, सुझाव, दस्तावेज, साक्ष्य आदि दर्ज कराने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति करे ताकि आमजन सुविधाजनक तरीके से इस मामले में साक्ष्य दे सकें। आयोग ने कोर्ट को यह भी बताया कि कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। सुनवाई के दौरान एडवोकेट अनिल ओझा, एडवोकेट विभोर खंडेलवाल, निगम की ओर से एडवोकेट ऋषि तिवारी आदि ने पैरवी की। अदालत में हुई जिरह के कुछ अंश     कोर्ट: आप यह बताओ पूरा रिकॉर्ड कब देंगे?     निगम के वकील: रिकॉर्ड दे दिया था, आयोग ने दो मार्च को पत्र जारी कर कुछ और रिकॉर्ड मांगा है।     कोर्ट: रिकॉर्ड देने में क्या दिक्कत है?     निगम के वकील: कुछ रिकॉर्ड आईडीए से संबंधित है। वहां से बुलवाना पड़ेगा, जैसे ही रिकॉर्ड वहां से मिलेगा हम सौंप देंगे।     कोर्ट: आप दस दिन में अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड उपलब्ध करवा दें।  

‘शून्य अंक’ वाले अभ्यर्थी कैसे बने सरकारी कर्मचारी? राजस्थान हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई है। मामला सरकारी नौकरियों में क्लास IV कर्मचारियों की भर्ती से जुड़ा है, जहां आरक्षित वर्ग के लिए कट-ऑफ अंक जीरो के करीब रखे गए थे। जस्टिस आनंद शर्मा ने इस स्थिति को बेहद हैरान करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि भले ही नौकरी छोटे पद की हो, लेकिन सरकार को भर्ती के लिए एक न्यूनतम मानक जरूर रखना चाहिए। कोर्ट ने कहा, जो शख्स परीक्षा में शून्य या उससे भी कम नंबर लाता है, वह सरकारी काम करने के लायक कैसे हो सकता है? कोर्ट ने साफ किया कि नियुक्ति प्राधिकारी के रूप में राज्य से यह अपेक्षा की जाती है कि वह भर्ती में न्यूनतम मानक सुनिश्चित करे, ताकि चयनित उम्मीदवार अपने कर्तव्यों का संतोषजनक ढंग से पालन कर सकें। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक उम्मीदवार ने कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें बताया गया कि हाल ही में हुई एक भर्ती प्रक्रिया में कुछ आरक्षित श्रेणियों के लिए कट-ऑफ महज 0.0033 रखी गई थी। माइनस में नंबर, फिर भी नौकरी ना मिलने की शिकायत दिलचस्प बात यह है कि याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा इसलिए खटखटाया क्योंकि उसके अंक शून्य से भी कम थे और इसी आधार पर उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी। उसने कोर्ट से शिकायत की कि जब सरकार ने पास होने के लिए कोई न्यूनतम नंबर तय ही नहीं किए हैं, तो उसे फेल क्यों किया गया? जांच में पता चला कि कुछ श्रेणियों में कट-ऑफ महज 0.0033 थी। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि या तो परीक्षा का पेपर जरूरत से ज्यादा कठिन था या फिर भर्ती प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि उन्होंने पास होने के लिए कम से कम नंबर की सीमा तय क्यों नहीं की? अब राजस्थान हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव से जवाब मांगा है। उन्हें हलफनामा देकर यह बताना होगा कि भविष्य में ऐसी स्थिति को सुधारने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी।

सतपुड़ा, अमरकंटक और सिंगाजी ने 100% से अधिक उपयोगिता दर से स्थापित किया नया मानक

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने विद्युत उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि अर्जित की है। कंपनी के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया व अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई को फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक, सुनियोजित एवं अधिकतम उपयोग के लिये किए जा रहे सतत् प्रयास करने के लिए गोवा में आयोजित 15 वें फ्लाई ऐश उपयोगिता पुरस्कार 2026 समारोह में चार प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को प्रोत्साहित करने वाली एक प्रतिष्ठित संस्था मिशन एनर्जी फाउंडेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय समारोह में यह सम्मान प्रदान किए गए। सिंगाजी ताप विद्युत गृह को मिले दो पुरस्कार समारोह में सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी को स्टेट सेक्टर 500 से 1500 मेगावाट तक वर्ग में और अमरकंटक ताप विद्युत गृह को स्टेट सेक्टर पब्लिक यूटिलिटी 500 मेगावाट से कम वर्ग में फ्लाई ऐश के उत्कृष्ट व असाधारण उपयोग करने करने के लिए पुरस्कृत किया गया। वहीं सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना को दो सर्वोच्च सम्मान फ्लाई ऐश के उत्कृष्ट व असाधारण उपयोग करने और ओवरऑल चैंपियन-फ्लाई ऐश मैनेजमेंट एक्सीलेंस के लिए प्रदान किए गए। एक करोड़ से अधिक मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का निस्तरण सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया (खंडवा) द्वारा वित्तीय वर्ष 2024–25 के दौरान कुल 61,21,066 मीट्रिक टन ऐश का सफलतापूर्वक निस्तारण एवं उपयोग सुनिश्चित किया गया। यह उपलब्धि 161 प्रतिशत उपयोगिता दर को दर्शाती है। यह न केवल वर्तमान फ्लाई ऐश के शत-प्रतिशत उपयोगिता का प्रमाण है, बल्कि पूर्व में संचित (लीगेसी) ऐश के बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक निस्तारण को भी रेखांकित करती है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी ने वित्तीय वर्ष 2023 से 2025 तक के निर्धारित किए गए लक्ष्य को 119 प्रतिशत की संचयी उपयोगिता दर से आसानी से हासिल कर 34,12,785 मीट्रिक टन रख को निष्पादित किया। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 204 प्रतिशत की उपयोगिता दर से 6,66,438 मीट्रिक टन राख का निस्तारण किया। इस प्रकार तीन ताप विद्युत गृहों द्वारा 1,02,00,289 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का निस्तारण किया।