samacharsecretary.com

किसानों के लिए खुशखबरी: हरियाणा में रबी फसलों की खरीद शुरू, MSP के अनुसार भुगतान होगा

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने रबी विपणन सीजन 2026-27 की फसलों की खरीद प्रक्रिया घोषित कर दी है। राज्य में मसूर की खरीद 20 मार्च से आरंभ होकर 30 अप्रैल तक होगी, जबकि सरसों की खरीद 28 मार्च से आरंभ होकर एक मई तक संचालित होगी। चने की खरीद एक अप्रैल से आरंभ होगी, जो कि 10 मई तक चलेगी। ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद 15 मई से 20 जून तक और सूरजमुखी की खरीद एक जून से 30 जून तक की जाएगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने  चंडीगढ़ में सीजन 2026-27 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत सरसों, चना, मसूर, सूरजमुखी तथा ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद को लेकर किए जा रहे खरीद प्रबंधों की समीक्षा की। बैठक के दौरान बताया गया कि वर्ष 2025-26 में प्रमुख फसलों के रकबे और उत्पादन में वृद्धि हुई है। सरसों का उत्पादन लगभग 13.17 लाख टन होने का अनुमान है। सूरजमुखी का उत्पादन 0.70 लाख टन रहने की संभावना है, जबकि चना और मसूर के उत्पादन में भी सुधार दर्ज किया गया है। ग्रीष्मकालीन मूंग का उत्पादन 98 टन तक बढ़ने का अनुमान है। मुख्य सचिव ने उच्च उत्पादन अनुमानों पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि समयबद्ध खरीद सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को बिना किसी विलंब के लाभकारी मूल्य मिल सके। साथ ही, किसानों में एमएसपी और खरीद प्रक्रिया के संबंध में व्यापक जागरूकता सुनिश्चित की जाए। बैठक में चालू सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की भी समीक्षा की गई। सरसों के लिए एमएसपी 6,200 रुपये प्रति क्विंटल, चने के लिए 5,875 रुपये, मसूर के लिए 7,000 रुपये, सूरजमुखी के लिए 7,721 रुपये तथा ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए 8,768 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। 28 मार्च से होगी सरसों की सरकारी खरीद सरसों की सरकारी खरीद 28 मार्च से शुरू होगी और 1 मई तक अनाज मंडियों में सरसों को खरीदा जाएगा. चने की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होकर 10 मई तक चलेगी जबकि ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद 15 मई से 20 जून तक और सूरजमुखी की खरीद 1 जून से 30 जून तक चलेगी. चीफ सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी ने रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत सरसों, चना, मसूर, सूरजमुखी तथा ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद को लेकर किए जा रहे खरीद प्रबंधों की समीक्षा बैठक बुलाई थी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि समयबद्ध तरीके से खरीद सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को बिना किसी देरी के MSP का लाभ मिल सके. साथ ही, किसानों में MSP और खरीद प्रक्रिया के संबंध में व्यापक जागरूकता सुनिश्चित की जाए. यह रहेगा न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बैठक में चालू सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की भी समीक्षा की गई. सरसों के लिए MSP 6,200 रुपये प्रति क्विंटल, चने के लिए 5,875 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर के लिए 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल, सूरजमुखी के लिए 7,721 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए 8,768 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है. पूर्व वर्षों की खरीद की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा ने मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत प्रभावी खरीद सुनिश्चित की है। वर्ष 2024-25 में 8.12 लाख टन से अधिक सरसों की खरीद की गई। वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार की स्वीकृतियों के अनुरूप खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने एजेंसियों को निर्देश दिए कि वे मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत निर्धारित 25 प्रतिशत खरीद सीमा सहित सभी मानकों का कड़ाई से पालन करें। यदि आवश्यक हो तो किसानों के हित में इस सीमा से अधिक खरीद के लिए भी आवश्यक वित्तीय प्रविधान सुनिश्चित करें।

राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा, कहा—एग्जाम में शून्य अंक वालों को नहीं मिल सकती सरकारी नौकरी

जयपुर  राजस्थान हाई कोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार से यह बताने को कहा कि उसने रिज़र्व कैटेगरी के तहत क्लास IV सरकारी कर्मचारियों की भर्ती के लिए कट-ऑफ मार्क्स ज़ीरो क्यों तय किए हैं. कोर्ट ने यह सवाल विनोद कुमार बेटे प्यारेलाल बनाम राजस्थान राज्य के मामले में सुनवाई के दौरान पूछी है. इस हालात को चौंकाने वाला बताते हुए, जस्टिस आनंद शर्मा ने कहा कि इस मामले पर गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है, क्योंकि यह सरकारी नौकरी में बेसिक स्टैंडर्ड बनाए रखने को लेकर चिंता पैदा करता है। ‘सरकारी कर्मचारी को बेसिक काम तो ठीक से आना ही चाहिए’ कोर्ट ने कहा, ‘अपॉइंटिंग अथॉरिटी के तौर पर, राज्य से उम्मीद की जाती है कि वह रिज़र्व कैटेगरी के लिए भी भर्ती में मिनिमम स्टैंडर्ड पक्का करे, ताकि चुने गए उम्मीदवार बेसिक काम ठीक से कर सकें, चाहे वे क्लास-IV कर्मचारी ही क्यों न हों. जो व्यक्ति लगभग ज़ीरो या नेगेटिव मार्क्स लाता है, उसे सही नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह आदेश एक रिट पिटीशन पर दिया जिसमें कहा गया था कि हाल ही में एक सरकारी डिपार्टमेंट में क्लास-IV एम्प्लॉई के लिए एक रिक्रूटमेंट प्रोसेस में, कुछ रिज़र्व्ड कैटेगरी के लिए कट-ऑफ मार्क्स 0.0033 जितने कम थे। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक उम्मीदवार ने कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें बताया गया कि हाल ही में हुई एक भर्ती प्रक्रिया में कुछ आरक्षित श्रेणियों के लिए कट-ऑफ महज 0.0033 रखी गई थी। माइनस में नंबर, फिर भी नौकरी ना मिलने की शिकायत दिलचस्प बात यह है कि याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा इसलिए खटखटाया क्योंकि उसके अंक शून्य से भी कम थे और इसी आधार पर उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी। उसने कोर्ट से शिकायत की कि जब सरकार ने पास होने के लिए कोई न्यूनतम नंबर तय ही नहीं किए हैं, तो उसे फेल क्यों किया गया? जांच में पता चला कि कुछ श्रेणियों में कट-ऑफ महज 0.0033 थी। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि या तो परीक्षा का पेपर जरूरत से ज्यादा कठिन था या फिर भर्ती प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि उन्होंने पास होने के लिए कम से कम नंबर की सीमा तय क्यों नहीं की? अब राजस्थान हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव से जवाब मांगा है। उन्हें हलफनामा देकर यह बताना होगा कि भविष्य में ऐसी स्थिति को सुधारने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी।  

पहले ही फ्रेंडली में छाए भारतीय अंडर-17 खिलाड़ी, म्यांमार को चटाई शिकस्त

म्यांमार भारतीय अंडर-17 पुरुष राष्ट्रीय टीम ने पहले मैत्री मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान म्यांमार को 2-1 से हराया। यांगून के थ्वुन्ना स्टेडियम में मंगलवार को खेले गये मुकाबले के पहले हाफ में वाशिंगटन सिंह न्गांगोम (11वें) और गुनलेइबा वांगखेइराकपाम (24वें) मिनट में गोलकर भारतीय टीम को बढ़त दिलाई। हाफ-टाइम के बाद म्यांमार की ओर म्यिंट म्याट को ने (54वें) मिनट में गोल करके स्कोरशीट में जगह बनाई, लेकिन अंतत: भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2-1 जीत दर्ज की। भारतीय टीम इस साल के आखिर में होने वाले एएफसी अंडर-17 एशियन कप सऊदी अरब 2026 की तैयारी कर रहे हैं।  

हार हमारे चेहरे पर थप्पड़ की तरह थी: दक्षिण अफ्रीका के कोच शुकरी कॉनराड

कोलकाता दक्षिण अफ्रीका का नॉक आउट गेम्स में हारने का पुराना रिकॉर्ड रहा है। टी20 विश्व कप 2026 में भी इस रिकॉर्ड से दक्षिण अफ्रीका का पीछा नहीं छूटा। बुधवार को कोलकाता में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को 9 विकेट से करारी हार का सामना करना पड़ा। दक्षिण अफ्रीका के कोच शुकरी कॉनराड ने इस हार को ‘खूनी मार’ की संज्ञा दी है। मैच के बाद शुकरी कॉनराड ने कहा, “मुझे नहीं पता कि आज रात चोक थी या नहीं। मुझे लगा कि यह एक खूनी मार थी। चोक होने के लिए, आपको गेम में थोड़ी सी भी पकड़ होनी चाहिए। हमें कोई पकड़ नहीं मिली। यह ऐसा था जैसे चेहरे पर थप्पड़ मारा गया हो।” कॉनराड ने कहा, “आज रात बहुत कुछ ठीक नहीं हुआ, लेकिन शायद ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वे बहुत अच्छे थे और उन्होंने हमें कभी मौका नहीं दिया। मैं यहां बैठकर बुरी रात के लिए बहाने नहीं बनाऊंगा। हम अच्छे नहीं थे और वे बहुत अच्छे थे। उन्होंने हमें आगे से रोक दिया, हमने विकेट गंवाए और हमें कोई मोमेंटम नहीं मिला।” दक्षिण अफ्रीका के कोच ने कहा, “आज रात की गेंदबाजी की क्षमता और विकेट ने हमारे लिए मैच को मुश्किल बना दिया।” न्यूजीलैंड की तारीफ करते हुए कॉनराड ने कहा, “न्यूजीलैंड ने आज रात सच में बहुत, बहुत अच्छा खेला। उन्होंने हमें बिल्कुल मौका नहीं दिया और सच में बहुत अच्छा दबाव बनाया। उनके स्पिनर बहुत अच्छे रहे।” टी20 विश्व कप 2026 में अजेय रही और ग्रुप स्टेज में न्यूजीलैंड को हरा चुकी दक्षिण अफ्रीका को सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ एकतरफा हार का सामना करना पड़ा। टॉस गंवाकर दक्षिण अफ्रीका ने 8 विकेट पर 169 रन बनाए थे। फिन एलन के 33 गेंदों पर बनाए 100 रन और टिम साइफर्ट के 33 गेंदों पर बनाए 58 रन की मदद से न्यूजीलैंड ने 12.5 ओवर में 1 विकेट के नुकसान पर 173 रन बनाकर मैच 9 विकेट से जीतते हुए फाइनल में जगह बना ली।  

कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने राज्यपाल से की सौजन्य भेंट

रायपुर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने मंगलवार को कुलाधिपति एवं राज्यपाल माननीय श्री रमेन डेका से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दयाल ने विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य करने का अवसर देने और विकास के प्रति विश्वास जताने के लिए कुलाधिपति के प्रति आभार व्यक्त किया।  प्रोफेसर दयाल ने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय के हित, प्रगति और शैक्षणिक गुणवत्ता को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सभी प्रयास कुलाधिपति के मार्गदर्शन में किए जाएंगे। भेंट के दौरान विश्वविद्यालय के भावी विकास के लिए तैयार रोडमैप, रूपरेखा और विभिन्न योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दयाल ने उच्च शिक्षा सचिव तथा उच्च शिक्षा आयुक्त से भी मुलाकात कर विश्वविद्यालय की प्रगति, शैक्षणिक गुणवत्ता और विकास संबंधी योजनाओं पर चर्चा की। अधिकारियों ने विश्वविद्यालय की उन्नति के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

आंगनवाड़ी में 6110 पदों के लिए दोबारा खुली आवेदन विंडो

चंडीगढ़. पंजाब सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास निदेशालय (SSWCD Punjab) ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक के 6110 पदों पर भर्ती 2026 के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती के तहत 12वीं और 10वीं पास योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 25 फरवरी 2026 से दोबारा शुरू हो चुकी है और 11 मार्च 2026 तक चलेगी। इच्छुक अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। भर्ती का संक्षिप्त विवरण विवरण     जानकारी पोस्ट नाम     आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW), आंगनवाड़ी सहायक (AWH) पदों की संख्या     1316 AWW, 4794 AWH (कुल 6110) वेतन     पंजाब सरकार के मानदंडों के अनुसार योग्यता     10वीं, 12वीं उत्तीर्ण आयु सीमा     18 से 37 वर्ष (दिनांक 01-07-2025 तक) ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ तिथि     19.11.2025 (सुबह 9:00 बजे) ऑनलाइन आवेदन अंतिम तिथि     10.12.2025 (रात 11:59 बजे) पुनः ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि     11-03-2026 आधिकारिक वेबसाइट      sswcd.punjab.gov.in कौन कर सकता है आवेदन? पंजाब सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास द्वारा जारी भर्ती के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW) के 1316 पद निर्धारित किए गए हैं, जिनके लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। वहीं आंगनवाड़ी सहायक (AWH) के 4794 पदों के लिए उम्मीदवार का 10वीं पास होना आवश्यक है। इस भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष तय की गई है। हालांकि, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु में छूट प्रदान की जाएगी। इतना लगेगा आवेदन शुल्क आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 500 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अतिरिक्त जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 250  रुपये शुल्क तय किया गया है। ऐसे करें आवेदन सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। नए उम्मीदवार पहले रजिस्ट्रेशन करें। लॉगिन करके ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज और प्रमाणपत्र पीडीएफ फॉर्मेट में अपलोड करें। यदि लागू हो तो आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें। सभी भरी गई जानकारी को दोबारा जांच लें। अंतिम तिथि से पहले आवेदन फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

बीकानेर कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल मिलते ही मचा हड़कंप

बीकानेर बीकानेर शहर के न्यायालय परिसर में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने की सूचना सामने आई। धमकी की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमला तुरंत सक्रिय हो गया और एहतियातन पूरे कोर्ट परिसर को खाली करवाया जाने लगा। ई-मेल के जरिए मिली धमकी मिली जानकारी के अनुसार किसी अज्ञात व्यक्ति ने ई-मेल भेजकर बीकानेर कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सुरक्षा के मद्देनजर परिसर में मौजूद अधिवक्ताओं, पक्षकारों और कर्मचारियों को बाहर निकलने के निर्देश दिए गए। मौके पर पहुंची एडीएसपी घटना की सूचना पर एडीएसपी चक्रवती सिंह राठौड़ भी मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पुरोहित ने सभी अधिवक्ताओं और न्यायिक कर्मचारियों को तुरंत अदालत परिसर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की। सुरक्षा एजेंसियों ने चलाया तलाशी अभियान अजय पुरोहित ने कहा कि अदालत परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है, इसलिए सभी लोग तत्काल परिसर खाली कर दें। साथ ही जो अधिवक्ता अभी तक कोर्ट नहीं पहुंचे हैं, उन्हें भी फिलहाल अपने घरों में ही सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है। धमकी के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

बलतेज पन्नू का बयान: पंजाब सरकार नशा तस्करी के खिलाफ जंग में कड़ी मेहनत कर रही

लुधियाना  आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज और नशा मुक्ति मोर्चा के मुख्य प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने मोहन दई अस्पताल में इलाज करा रहे एक नशा विरोधी कार्यकर्ता से मुलाकात की। बता दें कि यह कार्यकर्ता नशा तस्करी में शामिल लोगों द्वारा किए गए हमले में घायल हो गया था। अपनी इस यात्रा के दौरान बलतेज पन्नू ने पीड़ित और उनके परिवार से मिलकर एकजुटता का इजहार किया और पंजाब सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। बलतेज पन्नू के साथ विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू और नशा मुक्ति मोर्चा पंजाब के सदस्य भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार उन लोगों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है जो नशे की इस बुराई का बहादुरी से सामना कर रहे हैं और तस्करी में शामिल लोगों को बेनकाब कर रहे हैं। बलतेज पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब सरकार नशा तस्करों और स्मगलरों के खिलाफ लगातार और बहुआयामी जंग लड़ रही है। उन्होंने कहा कि हम पंजाब से इस अभिशाप को पूरी तरह खत्म करके ही दम लेंगे। उन्होंने दोहराया कि 'नशों के खिलाफ युद्ध' अभियान अपने अंतिम और सबसे गंभीर चरण में प्रवेश कर चुका है और पंजाब सरकार राज्य से नशों के पूर्ण सफाए के लिए दृढ़ संकल्पित है। बलतेज पन्नू ने घायल कार्यकर्ता के परिवार को यह भी भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार उन्हें हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवार को पूरा सहयोग दे रही है। मैं निजी तौर पर उनके लगातार संपर्क में रहूंगा और इलाज के दौरान हर संभव मदद सुनिश्चित करूंगा। नशा तस्करी में शामिल लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि नशा तस्कर या तो पंजाब छोड़ दें या फिर सख्त और बिना किसी समझौते वाली कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि जब तक पंजाब से नशों की बुराई पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, हम चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब सरकार ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां करके, नशा तस्करों की संपत्तियां कुर्क करके, एनडीपीएस एक्ट के तहत सजाएं दिलवाकर और जनभागीदारी के जरिए अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। नशा मुक्ति मोर्चा के लगभग 1.5 लाख वालंटियर पंजाब से नशों के खात्मे के इस अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग दे रहे हैं।

वेतन कटौती विवाद: MP में 1 लाख कर्मचारियों को बड़ा झटका, मोहन सरकार सुप्रीम कोर्ट में ले जाएगी केस; 400 करोड़ रु. बकाया

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा प्रोबेशन पीरियड वेतन कटौती मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें नए नियुक्त कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि के दौरान पूरा वेतन देने के बजाय 70%, 80% और 90% वेतन देने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने इसे भेदभावपूर्ण और अवैध करार देते हुए स्पष्ट कहा था कि प्रभावित कर्मचारियों को काटी गई राशि एरियर सहित लौटाई जाए। इस निर्णय से करीब 1 लाख कर्मचारियों में उम्मीद जगी थी कि उन्हें लगभग 400 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान मिल सकेगा। अब सर्वोच्च अदालत की शरण में जाने की तैयारी हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामला थमता नजर आ रहा था, लेकिन अब मोहन सरकार ने इसे चुनौती देने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की योजना बना रही है। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो एरियर भुगतान पर फिलहाल रोक लग सकती है, जिससे कर्मचारियों की आर्थिक उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा। इस कदम को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। वेतन कटौती केस, SC जाएगी सरकार मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान वेतन कटौती का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने वाला है। जबलपुर हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें नए कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड के दौरान शत-प्रतिशत वेतन न देकर 70%, 80% और 90% वेतन देने का प्रावधान था। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि प्रभावित कर्मचारियों को काटा गया वेतन एरियर्स समेत लौटाया जाए। हालांकि, अब मोहन सरकार इस फैसले को मानने के बजाय इसे चुनौती देने का मन बना चुकी है। एमपी हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला  बीजेपी ने कमलनाथ सरकार की तरफ से लागू किए गए इस नियम को बदलने का वादा किया था. लेकिन, एमपी सरकार की तरफ से अब तक यह नियम नहीं बदला गया है. ऐसे में कर्मचारी संगठनों ने एमपी का हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रोबेशन पीरियड 2 साल ही करने और पूरी सैलरी देने को लेकर याचिका लगाई. जहां एमपी हाईकोर्ट ने मामले में बड़ा फैसला सुनाया. जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोत की डिवीजन बेंच ने मामले में कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से न केवल भेदभावपूर्ण है. बल्कि कर्मचारियों को वेतन कम देना भी नियम नहीं है. क्योंकि जब कर्मचारियों से काम पूरा लिया जा रहा है तो फिर उन्हें वेतन भी पूरा देना चाहिए. हाईकोर्ट ने इसे समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन मानते हुए कर्मचारियों को सामान वेतन और एरियर देना का फैसला सुनाया.  सु्प्रीम कोर्ट जाएगी एमपी सरकार  अब इस मामले में एमपी सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है. क्योंकि एमपी हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी का हवाला दिया था. जिसमें कहा गया था कि एमपीपीएससी के तहत होने वाली नियुक्तियों में दो साल का प्रोबेशन पीरियड और सैलरी भी पूरी दी जाती है. तो फिर कर्मचारी चयन मंडल में यह अंतर क्यों हो रहा है. अब सरकार का कहना है कि एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती प्रक्रियाओं में अंतर है. एमपीपीएससी में प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार होता है, जबकि कर्मचारी चयन मंडल में केवल एक परीक्षा होती है. ऐसे में दोनों की चयन प्रक्रिया अलग है.  400 करोड़ मामला अगर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो इस अवधि में चयनित 1 लाख सरकारी कर्मचारियों को हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक एरियर के जो 400 करोड़ रुपए मिलने थे. वह फिलहाल अटक सकते हैं. क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जो फैसला आएगा यह एरियर उस फैसले पर मायने रखेगा.   सरकार के वादे और कर्मचारियों का संघर्ष साल 2019 में कमलनाथ सरकार ने प्रोबेशन पीरियड को 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दिया था और वेतन में कटौती लागू की थी। 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कई बार सार्वजनिक मंचों से इस नियम को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन यह कभी लागू नहीं हो सका। शिवराज सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो थक-हारकर कर्मचारियों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 2019 का आदेश और बढ़ी परिवीक्षा अवधि का प्रभाव विवाद की जड़ 2019 का वह शासनादेश है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार ने प्रोबेशन अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष कर दी थी। साथ ही इस अवधि में पूर्ण वेतन के स्थान पर चरणबद्ध वेतन देने का नियम लागू किया गया था। नए कर्मचारियों को पहले वर्ष 70%, दूसरे वर्ष 80% और तीसरे वर्ष 90% वेतन दिया जाता था। चौथे वर्ष के बाद ही उन्हें नियमित वेतनमान का लाभ मिलता था। इस नीति का तर्क वित्तीय भार कम करना बताया गया था, लेकिन कर्मचारियों ने इसे अन्यायपूर्ण माना। सत्ता परिवर्तन के बाद अधूरे रहे वादे 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई मंचों से इस वेतन कटौती नियम को समाप्त करने का आश्वासन दिया था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि नई सरकार इस प्रावधान को खत्म कर देगी, लेकिन व्यवहार में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लंबे इंतजार और अनदेखी के बाद कर्मचारी संगठनों ने न्यायिक हस्तक्षेप का रास्ता चुना और हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 1 लाख कर्मचारियों की उम्मीदों पर असमंजस हाईकोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारियों को राहत की उम्मीद बंधी थी। अनुमान है कि लगभग 1 लाख कर्मचारियों को मिलाकर करीब 400 करोड़ रुपये का एरियर बनता है। यदि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहता है तो भुगतान प्रक्रिया अनिश्चित काल तक टल सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह केवल वेतन का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और समानता का प्रश्न भी है। आगे क्या? कानूनी और राजनीतिक दोनों दांव अब यह मामला कानूनी लड़ाई के अगले चरण में प्रवेश कर सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन देता है … Read more

नीतीश चले दिल्ली: बिहार की सियासत में बड़ा मोड़, क्या भाजपा संभालेगी सीएम की कुर्सी?

पटना बिहार की राजनीति में एक बड़े युग का समापन होने जा रहा है। महज 105 दिन पहले 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार का बिहार की सत्ता छोड़ना राज्य में पीढ़ीगत बदलाव का अंतिम चरण है। उनके इस फैसले ने न केवल जदयू के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी- भाजपा के लिए बिहार की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके खुद यह जानकारी दी है। नीतीश के राज्यसभा जाने का मतलब है राज्य की सत्ता में बहुत कुछ बदलने जा रहा है। राज्य में नई सरकार बनेगी। महज 105 दिन पहले दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश नौवीं बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। आइये जानते हैं नीतीश के कुर्सी छोड़ने से बिहार के लिए और क्या-क्या बदल जाएगा? 1. पहली बार बिहार की सत्ता की बागडोर संभाल सकती है भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के नामांकन की बात कहने के साथ ही यह तय हो गया है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। बीते नवंबर राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत के साथ जीत मिली थी। 89 सीटें जीतकर भाजपा विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसके बाद भी चुनाव पूर्व किए वादे के मुताबिक, राज्य की बागडोर 85 सीटें जीतने वाले जदयू के नीतीश कुमार के हाथ में आई। नीतीश के सत्ता संभालने के महज 105 दिन बाद यह तय हो गया है कि बिहार में नीतीश राज का अंत होने जा रहा है। इसके साथ ही इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि राज्य में पहली बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकती है।   2. हिंदी हार्टलैंड का आखिरी किला फतह करेगी भाजपा 1980 में अपने जन्म के साथ ही भाजपा को हिंदी भाषी राज्यों की पार्टी के रूप में पहचना मिली। बीते साढ़े चार दशक में पार्टी दो लोकसभा सीट से 300 से अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बन चुकी है। एक समय देश के 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार रही। अभी भी पार्टी 20 राज्यों की सत्ता में हिस्सेदार है। इन सबके बावजूद हिंदी हार्टलैंड की पार्टी कही जाने वाली भाजपा देश के दूसरे सबसे बड़े हिंदी भाषी राज्य में अब तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकी है। इसके अलावा अन्य हिंदी भाषी राज्यों की बात करें तो यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश की सत्ता में भाजपा दो या दो से ज्यादा बार से सत्ता में है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी ने पांच साल बाद फिर से सत्ता में वापसी की है। राजधानी दिल्ली में भी 27 साल बाद पार्टी ने सत्ता में वापसी की है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, झारखंड में भी पार्टी अपना मुख्यमंत्री बना चुकी है।  बिहार इकलौता हिंदी भाषी राज्य है जहां भाजपा अब तक अपना मुख्यमंत्री बनने का इंतजार कर रही है। 3. नौवीं बार कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे नीतीश नीतीश कुमार बीते दो दशक के बिहार की सत्ता का पर्याय बने हुए हैं। इस दौरान उनकी पार्टी राज्य की पहले नंबर की पार्टी रही हो या तीसरे नंबर की मुख्यमंत्री नीतीश ही बनते रहे। 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले नीतीश का पहला कार्यकाल महज सात दिन का रहा था। इसके बाद 2005 में राज्य के मुख्यमंत्री बने नीतीश ने अपना दूसरा कार्यकाल पूरा किया। 2010 में उन्होंने प्रचंड जीत के साथ तीसरी बार शपथ ली, लेकिन कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। दरअसल, भाजपा ने जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित किया तो नीतीश ने अपनी राह बदल ली। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी अकेले उतरी और बुरी तरह हारी। पार्टी को राज्य की 40 में से महज दो सीटों पर जीत मिली। इस हार के बाद नीतीश ने कुर्सी छोड़ दी और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया। महज नौ महीने बाद नीतीश ने फिर से सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ले ली। इसके बाद 2015 का विधानसभा चुनाव नीतीश ने अपने धुर विरोधी लालू यादव के साथ मिलकर लड़ा और एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। 2017 में उन्होंने फिर से भाजपा का दामन थाम लिया और एक बार फिर राज्य की बागडोर संभाली। 2020 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद फिर से नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे, जबकि उनकी पार्टी सीटों के लिहाज से राज्य में तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। 2022 में नीतीश ने फिर से लालू का साथ पकड़ा और फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2024 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले नीतीश फिर से भाजपा के साथ आ गए और फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2025 में विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश ने 10वीं बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेने महज 105 दिन बाद यह तय हो गया कि नीतीश नौवीं बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। शायद ये आखिरी बार भी होगा। 4. बिहार की सियासत में पीढ़ीगत बदलाव आपातकाल के दौर में बिहार की सियासत में कई युवा चेहरे उभरे। ये चेहरे दशकों तक बिहार की सियासत का पर्याय रहे। लालू प्रसाद यादव, सुशील मोदी, रामविलास पासवान, शरद यादव, नीतीश कुमार इनमें सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे। इन चेहरों में से रामविलास पासवान, सुशील मोदी और शरद यादव का निधन हो चुका है। लालू यादव चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराए जाने के बाद से सक्रिय सियासत से दूर हैं। अब इस पीढ़ी के आखिरी बड़े चेहरे नीतीश के दिल्ली जाने के साथ ही बिहार की सियासत में एक पीढ़ी का लगभग अंत हो जाएगा। 5. बीस साल से बिहार की सत्ता में काबिज जदयू पहली बार बैक सीट पर होगी पिछले बीस साल और चार चुनाव से बिहार की सत्ता की बागडोर जदयू के हाथ में है। अब अगर राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है तो जदयू के गठन के बाद यह पहली बार होगा जब जदयू सहयोगी के रूप में बिहार की सत्ता में होगी। 6. दूसरी बार जदयू का शीर्ष नेता बिहार की सत्ता का हिस्सेदार नहीं होगा ये दूसरा मौका होगा जदयू सत्ता की … Read more