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नक्सल संगठन को तगड़ा झटका, देवजी के बाद 124 माओवादी आत्मसमर्पण को तैयार

जगदलपुर.  तेलंगाना में शनिवार को होने जा रहा 124 माओवादियों का सामूहिक समर्पण वाम उग्रवाद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। माओवादी सैन्य प्रमुख थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रभारी मल्लाजी रेड्डी के नेतृत्व में यह समर्पण शाम चार बजे मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के सामने होगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक समर्पण करने वालों में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) से जुड़े कई सक्रिय कैडर शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस समर्पण के साथ ही माओवादी संगठन की सैन्य इकाई लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। दरअसल माओवादियों की सक्रिय और संगठित सैन्य संरचना अब केवल दंडकारण्य क्षेत्र तक सीमित रह गई थी। देवा भी समर्पण कर चुका है सूत्रों के अनुसार माओवादियों की इकलौती सक्रिय बटालियन भी इसी इलाके में संचालित हो रही थी, जिसका प्रभारी हाल ही में मारा गया कुख्यात कमांडर माड़वी हिड़मा और कमांडर बा देवा था। इस बटालियन को संगठन की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई माना जाता था। यह छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा से लगे जंगलों में सक्रिय रहती थी। बड़ी संख्या में कैडरों के समर्पण के बाद इस बटालियन की संरचना भी लगभग समाप्त मानी जा रही है। हिड़मा के मारे जाने के बाद देवा भी समर्पण कर चुका है। हाल के महीनों में संगठन के शीर्ष नेता देवजी और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रभारी मल्ला राजी रेड्डी और तेलंगाना के प्रभारी दामोदर के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद कैडरों में भी संगठन छोड़ने की प्रवृत्ति बढ़ी है। माओवादी संगठन का ढांचा तेजी से कमजोर पड़ रहा सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार सुरक्षा अभियानों, मजबूत खुफिया नेटवर्क और पुनर्वास नीति के कारण माओवादी संगठन का ढांचा तेजी से कमजोर पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह सामूहिक समर्पण दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन के घटते प्रभाव का संकेत है। आने वाले समय में और भी कैडरों के मुख्यधारा में लौटने की संभावना जताई जा रही है।

क्वींस ऑन द व्हील्स 3.0 को CM मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी

भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 'नारी सशक्तिकरण' और 'साहस' की एक नई मिसाल पेश की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास से 'क्वींस ऑन द व्हील्स 3.0' (Queens on The Wheel 3.0) के तहत देश के कोने-कोने से आई 25 महिला सुपर बाइकर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। महिला बाइकर्स 7 दिन में 1400 किमी का सफर तय कर एमपी के पर्यटन का प्रचार करेंगी। सांची, चंदेरी, कूनो, ग्वालियर और ओरछा होते हुए खजुराहो जाएंगी। 1400 किलोमीटर की यह रोमांचक बाइक ट्रायल 13 मार्च को भोपाल में समाप्त होगी। 7 दिन और 1400 किलोमीटर का सफर 'क्वींस ऑन द व्हील्स' बाइक रैली का यह तीसरा संस्करण एक बड़े उद्देश्य के साथ शुरू हुआ है। 25 सुपर बाइकर्स का यह ग्रुप अगले 7 दिनों तक मध्यप्रदेश की सड़कों पर 1400 किलोमीटर का सफर तय करेगा। यह यात्रा भोपाल से शुरू होकर सांची, चंदेरी, कूनो नेशनल पार्क, ग्वालियर और ओरछा जैसे प्रमुख ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थलों से गुजरते हुए खजुराहो पहुँचेगी। नारी शक्ति और सुरक्षा का संदेश कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुपर बाइकर्स को शुभकामनाएं दी, उन्होंने कहा कि "देश का दिल मध्यप्रदेश अजब भी है, गजब भी है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सजग भी है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आयोजन केवल एक बाइक रैली नहीं है, बल्कि यह बदलते समाज की सकारात्मक तस्वीर है। यह रैली 'रिस्पॉन्सिबल ट्रैवल' (जिम्मेदार पर्यटन) को प्रोत्साहित करेगी और यह दिखाएगी कि प्रदेश की सड़कें महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्वींस ऑन द व्हील 3.0 केवल एक बाइक रैली नहीं, बल्कि नारी सशक्तिकरण, साहस और पर्यटन के माध्यम से मध्यप्रदेश की पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने का अनूठा अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा- 'देश का दिल' मध्य प्रदेश अजब भी है, गजब भी है और महिलाओं के लिए सुरक्षित व सजग भी है। ऐतिहासिक स्थलों का होगा प्रचार-प्रसार इस यात्रा का रूट मैप प्रदेश के समृद्ध इतिहास और वन्यजीवों की झलक दिखाने के लिए तैयार किया गया है। बाइकर्स जहाँ चंदेरी की बुनाई और सांची के स्तूपों को करीब से देखेंगी, वहीं कूनो में चीतों की धरती का अनुभव भी लेंगी। इस साहसिक यात्रा का समापन 13 मार्च को वापस भोपाल में ही होगा।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: युद्ध लंबा खिंचा तो महंगाई बढ़ने के संकेत, भारत पर सीमित प्रभाव— SBI

नई दिल्ली. खाड़ी क्षेत्र में चल रहा संघर्ष, जिसमें इजरायल, ईरान और अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकाने शामिल हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है। शनिवार को जारी एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह संघर्ष लंबा चलता है तो इससे वैश्विक मंदी का दबाव, महंगाई में वृद्धि और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के घरेलू वित्तीय बाजारों को फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कदमों से सपोर्ट मिला है। आरबीआई ने सरकारी बॉन्ड (जी-सेक) यील्ड को संतुलित रखने और रुपए की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो इससे भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतकों पर भी दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई ने स्पॉट मार्केट में हस्तक्षेप करके रुपए की अधिक अस्थिरता को कम किया है और इसे 92 के स्तर से नीचे रखने में सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा अनिश्चितता के बीच यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार इसी मार्ग से होता है, इसलिए यहां बाधा आने से तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत 91.84 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई 89.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी होती है, तो वित्त वर्ष 2027 में चालू खाते का घाटा (सीएडी) करीब 36 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत तक आ सकती है। एसबीआई रिसर्च ने ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी इस संघर्ष का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह युद्ध कोंड्राटिएफ वेव के अंतिम चरण के दौरान हो रहा है, जो लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक चक्र का सिद्धांत है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संरचनात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष में कुछ देशों को फायदा भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका को तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से लाभ मिल सकता है। साथ ही, यूरोप की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम होने से अमेरिका के लिए नए अवसर बन सकते हैं। वहीं, दुनिया के अधिकांश अन्य क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच कई केंद्रीय बैंक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिलहाल लगभग 17.6 प्रतिशत हिस्सा सोने का है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष का असर भारत पर कई तरीकों से पड़ सकता है। इसमें खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस, कच्चे तेल का आयात और पश्चिम एशियाई देशों के साथ व्यापार शामिल हैं। हालांकि रूसी कच्चे तेल की खरीद और फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स जैसे कदमों के कारण आपूर्ति से जुड़े जोखिम कुछ हद तक कम हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय बैंक और निजी कंपनियां भी उन क्षेत्रों से जुड़ी हैं जो इस संघर्ष से प्रभावित हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता तेल की कीमतों, महंगाई की उम्मीदों और निवेशकों के भरोसे को आने वाले समय में प्रभावित करती रहेगी। इसलिए नीति निर्माताओं और निवेशकों को इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगरा- मथुरा दौरा आज

यथार्थ अस्पताल का उद्घाटन, विकास कार्यों और धार्मिक परियोजनाओं की करेंगे समीक्षा आगरा/ मथुरा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज ताजनगरी आगरा और धर्मनगरी मथुरा के महत्वपूर्ण दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी सौगात देने के साथ-साथ ब्रज क्षेत्र के विकास कार्यों और धार्मिक परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री योगी अपने दौरे की शुरुआत आगरा से करेंगे। वह सुबह करीब 10 बजे आगरा पहुंचेंगे। फतेहाबाद रोड स्थित होटल अमर में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद वह राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर स्थित  यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन करेंगे। 250 बेड वाला यह टर्शियरी केयर अस्पताल अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस है। यहां हृदय रोग, न्यूरोसर्जरी, लिवर व किडनी ट्रांसप्लांट और क्रिटिकल केयर जैसी जटिल सर्जरी की सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। बेहतरीन नर्सिंग और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के साथ यह अस्पताल आगरा और आसपास के जिलों के लिए स्वास्थ्य सेवा का नया केंद्र बनेगा। मथुरा में उ.प्र. ब्रज तीर्थ विकास परिषद की बैठक आगरा के कार्यक्रम के पश्चात सीएम योगी मथुरा के लिए प्रस्थान करेंगे। यहां वे यमुना एक्सप्रेस-वे के क्षेत्रीय कार्यालय सभागार में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक लेंगे। करीब एक घंटे चलने वाली इस बैठक में मथुरा- वृंदावन में चल रही विकास परियोजनाओं, सौंदर्यीकरण कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया जाएगा। अन्नपूर्णा रसोई का निरीक्षण करेंगे सीएम योगी विकास कार्यों की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री योगी मथुरा-वृंदावन मार्ग पर जयपुर मंदिर के पास स्थित अन्नपूर्णा रसोई पहुंचेंगे। ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा निर्मित इस दो मंजिला इमारत में 'मंगलमय परिवार न्यास' के सहयोग से श्रद्धालुओं को निःशुल्क सात्विक भोजन और प्रसाद वितरित किया जाता है। सीएम योगी यहां की व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे और श्रद्धालुओं को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता का निरीक्षण करेंगे। श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में करेंगे दर्शन- पूजन दौरे के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्री कृष्ण जन्मभूमि पहुंचेंगे, जहां वे गर्भगृह व केशव देव मंदिर में विधि- विधान से दर्शन- पूजन करेंगे। धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात शाम करीब 5 बजे मुख्यमंत्री राजकीय हेलीकॉप्टर से लखनऊ के लिए रवाना हो जाएंगे।

रसोई गैस कीमत बढ़ने पर सियासत तेज, खड़गे ने कहा— जनता को राहत देने में नाकाम सरकार

नई दिल्ली.  कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा होने के बाद केंद्र सरकार का निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर्याप्त तेल-गैस और उर्वरक मुहैया कराने में लाचार है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "घरेलू एलपीजी सिलेंडर में 60 रुपए का इजाफा और कमर्शियल एलपीजी में 115 रुपए का मुनाफा कमाया। पहले कम अंतर्राष्ट्रीय दामों का लाभ जनता से छीना और अब महंगाई के बोझ से जनता का पसीना निकाला। जंग होने पर 'सब चंगा सी' वाली दावेबाज मोदी सरकार, पर्याप्त तेल-गैस और उर्वरक मुहैया कराने में लाचार है।" इससे पहले, कांग्रेस ने आधिकारिक 'एक्स' अकाउंट से पोस्ट किया, "सरकार ने जनता को झटका दिया है। सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम सीधे 60 रुपए बढ़ा दिए हैं। वहीं, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के लिए अब आपको 115 रुपए ज्यादा चुकाने होंगे। पिछले 3 महीने में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम 307 रुपए बढ़ गए हैं। सरकार लगातार जनता पर महंगाई का हंटर चला रही है।" आम आदमी पार्टी ने भी एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने पर सरकार को घेरा। पार्टी ने 'एक्स' पोस्ट पर लिखा, "सरकार ने जनता को होली गिफ्ट दिया है। देश की जनता बढ़ती महंगाई से पहले ही त्रस्त है और उसके ऊपर से सरकार ने एक और बम फोड़ा है। सरकार ने घरों में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपए और बढ़ा दिए हैं।" बता दें कि तेल कंपनियों ने शनिवार को घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा किया। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार, नई दिल्ली में 14.2 किलो के बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए कर दी गई है, जो पहले 853 रुपए थी। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक साल से भी कम समय में यह दूसरी बार बढ़ोतरी हुई है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी प्रति यूनिट 114.5 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।

पत्नी से विवाद के बाद आरोपी ने ससुराल पक्ष पर किया हमला, हत्या के प्रयास में जेल भेजा गया

 अनूपपुर फरियादी राजू सिंह पिता सोभा सिंह पंद्राम उम्र 42 साल निवासी डोड़िया थाना राजेन्द्रग्राम का दिनांक 05.03.26 को रिपोर्ट किया कि मेरी भांजी खेलन बाई नेताम तीन दिन पहले मेरे घर ग्राम मौहारी से मेहमानी में आयी थी । दिनांक 05.03.26 को आरोपी सोहन सिंह निवासी उमरिया थाना जैतहरी का अपनी पत्नी से वाद होने के कारण हत्या करने की नियत से उमरिया थाना जैतहरी से आकर उसकी पत्नी का मामा राजू सिंह गोंड़ ग्राम डोड़िया  के घर आकर हत्या करने की नियत से मारपीट कर सिर में पत्थर पटक कर हत्या करने का प्रयास किया गया रिपोर्ट पर आरोपी के विरूद्ध अपराध धारा 296(a),115(2),351(3),109(1) बीएनएस.कायम कर 24 घण्टे के अन्दर बाद विवेचना आरोपी  माननीय न्यायालय के माध्यम से जिला जेल अनूपपुर दाखिल किया गया । आरोपी गिरफ्तारी में श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय अनूपपुर , अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय अनूपपुर के मार्गदर्शन व श्रीमान् एस.डी.ओ.पी.नवीन तिवारी पुष्पराजगढ़ के निर्देश में थाना प्रभारी पी.सी.कोल , सहा.उपनिरी.आनन्द प्रकाश बेक, सहा.उपनिरी.अवधलाल अहिरवार, प्र.आर.42 राजेन्द्र यादव की सराहनीय भूमिका रही है ।

सीएम योगी ने पूर्व गृह मंत्री व उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री ‘भारत रत्न’ पं. गोविंद बल्लभ पंत की पुण्यतिथि पर अर्पित की श्रद्धांजलि

  पं. गोविंद बल्लभ पंत के कार्य प्रेरणास्रोत, आज भी कर रहे हमारा मार्गदर्शनः मुख्यमंत्री लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के पूर्व गृह मंत्री व उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री ‘भारत रत्न’ पंडित गोविंद बल्लभ पंत की पुण्यतिथि पर शनिवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने लोकभवन स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें भारत मां का महान सपूत, प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कुशल अधिवक्ता व सुयोग्य प्रशासक बताया। सीएम ने कहा कि पं. गोविंद बल्लभ पंत के कार्य हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने अपने समय में उत्तर प्रदेश के विकास व सुधार के लिए अनेक कदम उठाए। राष्ट्रपिता के आह्वान पर वकालत छोड़कर स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े थे पं. पंत मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जन्म वर्तमान उत्तराखंड में हुआ था, उस समय उत्तराखंड संयुक्त प्रांत का हिस्सा था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर वह वकालत छोड़कर स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े थे। जब देश गुलाम था, तब 1937 में उत्तर प्रदेश के प्रीमियर के रूप में उनका चयन हुआ था। उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में पं. गोविंद बल्लभ पंत जी का स्मरण सभी करते हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने रखी थी विकास की आधारशिला सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पंत जी ने विकास की जो आधारशिला रखी और जो विजन प्रस्तुत किया, उसका अनुसरण करते हुए उत्तर प्रदेश आज भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बना हुआ है। यूपी आज जो कुछ भी कर पा रहा है, उसके पीछे पं. गोविंद बल्लभ पंत की सोच है। उन्होंने अपने समय में उत्तर प्रदेश के विकास व सुधार के लिए अनेक कदम उठाए। उन्होंने गृह मंत्री के रूप में देश को अमूल्य सेवाएं दीं। राजभाषा हिंदी के प्रोत्साहन, प्रचार-प्रसार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। देश की स्वाधीनता में अमूल्य योगदान तथा उत्तर प्रदेश व देश की बहुमूल्य सेवा के लिए 1957 में उन्हें ‘भारत रत्न’ प्रदान किया गया। पं. गोविंद बल्लभ पंत के कार्य आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक जय देवी, अमरेश कुमार, विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा आदि मौजूद रहे।

पंजाब में नई औद्योगिक नीति में रोजगार कंपनियों को सब्सिडी

चंडीगढ़. पंजाब कैबिनेट ने बुधवार को राज्य की नई औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दे दी, जिसमें सबसे बड़ा बदलाव रोजगार सृजन से जुड़े प्रोत्साहनों को आसान बनाना है। राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति में रोजगार मुहैया करवाने वाली कंपनियों को सब्सिडी के रूप में प्रति कर्मचारी पैसा दिया जाएगा। पुरुषों के मामले में यह तीन हजार और महिलाओं को रोजगार देने में यह चार हजार रुपए दिए जाएंगे। अनुसूचित जाति/जनजाति और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए 4000 रुपये प्रति माह तय की गई है। आईटी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए यह सहायता 5000 रुपये और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों के लिए 7500 रुपये प्रति माह तक होगी। रोजगार , नई औद्योगिक नीति में मुख्य फोकस के रूप में रखा गया है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सरकार ने अब तक बड़ी इंडस्ट्री में निवेश करने पर जो सब्सिडी दी जा रही थी उसे कम करके मध्यम दर्जे की इंडस्ट्री पर लाया गया है। यानी अब उद्योगों को रोजगार सब्सिडी के लिए पात्र होने हेतु 250 करोड़ रुपये निवेश और 1000 कर्मचारियों की शर्त पूरी नहीं करनी होगी। नई नीति में इस सीमा को घटाकर 25 करोड़ रुपये निवेश और 50 कर्मचारियों तक कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। निवेश आकर्षित करने की कोशिश मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूर इस नीति को पंजाब में निवेश आकर्षित करने और उद्योगों को प्रतिस्पर्धी माहौल देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि नई नीति के माध्यम से पंजाब को फिर से औद्योगिक निवेश के प्रमुख केंद्रों में शामिल किया जाए। यह पालिसी उस समय आई जब अगले हफ्ते सरकार मोहाली में औद्योगिक समिट करने जा रही है जहां बड़े उद्योगों को पंजाब में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह नीति उद्योग जगत के व्यापक परामर्श के बाद तैयार की गई है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए 24 सेक्टर कमेटियों का गठन किया गया था। इन समितियों ने उद्योगों से जुड़े मुद्दों और आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा के बाद सरकार को 601 सिफारिशें सौंपीं, जिनमें से लगभग 77 प्रतिशत को नीति में शामिल किया गया। 20 अलग-अलग प्रकार के इंसेंटिव उपलब्ध होंगे नई औद्योगिक नीति का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि निवेशकों को अपने प्रोजेक्ट के अनुसार प्रोत्साहन चुनने की सुविधा मिले। इसके तहत उद्योगों को लगभग 20 अलग-अलग प्रकार के इंसेंटिव उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें एसजीएसटी रीइंबर्समेंट, रोजगार सृजन सब्सिडी, बिजली ड्यूटी में छूट और स्टांप ड्यूटी में छूट प्रमुख हैं। इसके अलावा राज्य सरकार ने पहली बार उद्योगों के लिए कैपिटल सब्सिडी का प्राविधान भी किया है, जिससे नए उद्योगों को शुरुआती निवेश में राहत मिल सकेगी। इंसेंटिव की अवधि को बढ़ाया गया सरकार ने औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए इंसेंटिव की अवधि भी बढ़ा दी है। पहले उद्योगों को मिलने वाले प्रोत्साहन 7 से 10 वर्ष तक सीमित थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 10 से 15 वर्ष कर दिया गया है। इससे निवेशकों को लंबे समय तक लाभ मिल सकेगा। नई नीति में कुछ क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इनमें फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, स्पोर्ट्स गुड्स, ऑटो और ऑटो कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी-आईटीईएस, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डिफेंस और एयरोस्पेस जैसे सेक्टर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निवेश करने वाली इकाइयों को 25 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। बॉर्डर एरिया के लिए विशेष पैकेज इसके साथ ही सीमावर्ती जिलों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की गई है। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का जैसे जिलों में स्थापित होने वाले उद्योगों को भी 25 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भी नीति में कई प्रावधान किए गए हैं। शुरुआती स्टार्टअप के लिए सीड ग्रांट को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा स्टार्टअप के विस्तार के लिए 10 लाख रुपये की दूसरी किस्त का प्राविधान भी किया गया है। मोहाली में इनोवेशन हब स्थापित करने की योजना राज्य सरकार मोहाली में इनोवेशन और स्टार्टअप हब स्थापित करने की योजना बना रही है, जिसे उत्तर भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति में पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया गया है। उद्योगों को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम स्थापित करने के लिए 10 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी और पराली आधारित बॉयलर अपनाने के लिए 7.5 करोड़ रुपये तक की सहायता देने का प्रावधान किया गया है। उद्योगों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। आईटी और डेटा सेंटर को औद्योगिक दरों पर बिजली देने के साथ ही ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए 5 रुपये प्रति यूनिट टैरिफ तय किया गया है। 45 कार्य दिवसों के भीतर अनुमतियां देने का लक्ष्य सरकार का कहना है कि इन सुधारों से उद्योगों के लिए लागत कम होगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा उद्योग लगाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए फास्ट ट्रैक पोर्टल के जरिए समयबद्ध मंजूरी की व्यवस्था भी की गई है, जिसके तहत 45 कार्य दिवसों के भीतर अनुमतियां देने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार का अनुमान है कि नई औद्योगिक नीति के लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में पंजाब में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार ने 2026 तक लगभग 75,000 करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश का लक्ष्य तय किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नीति का प्रभावी क्रियान्वयन होता है और बिजली, भूमि व लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों का समाधान किया जाता है तो पंजाब में औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है।

ईरानी जहाज विवाद पर विदेश मंत्री जयशंकर की दो टूक, कहा— भारत का फैसला सही था

नई दिल्ली.  भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना संवाद 2026 में मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच ईरानी नौसैनिक पोत को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति देने के फैसले का बचाव किया है। जयशंकर ने ईरानी जहाजों से जुड़ी घटनाओं को लेकर कहा कि भारत ने यह कदम कानूनी जटिलताओं से ऊपर उठकर विशुद्ध रूप से मानवीय आधार पर उठाया है। दरअसल, भारत की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब 4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिससे हिंद महासागर में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से मिला संदेश विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि एक जहाज, जो संभवतः उस समय हमारी सीमा के सबसे करीब था, हमारे बंदरगाह में आना चाहता था। उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ समस्याएं आ रही हैं। 1 मार्च को हमने उन्हें अंदर आने की अनुमति दे दी, लेकिन उन्हें आने में कुछ दिन लग गए और फिर वे कोच्चि में रुके। उनमें कई युवा कैडेट थे। जब जहाज रवाना हुए थे और जब वे यहां पहुंचे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी। वे अपने बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे, और फिर वे किसी तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए।" ईरानी जहाजों को लेकर टिप्पणी बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की ये टिप्पणियां तीन ईरानी नौसैनिक जहाजों के संदर्भ में आई हैं, जिनमें मार्च के पहले सप्ताह में ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के केंद्र में आ गए थे। ये जहाज- आईरिस डेना, आईरिस लवन और आईरिस बुशहर- हिंद महासागर में परिचालन कर रहे थे और फरवरी में विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और मिलान 2026 अभ्यासों में भाग ले चुके थे। मैनें जो किया वो सही… विदेश मंत्री जयशंकर इस बात पर जोर दिया कि भारत का दृष्टिकोण मानवीय विचारों से प्रेरित है। जयशंकर ने कहा, "श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी, उन्होंने वही फैसला लिया जो उन्होंने लिया और दुर्भाग्य से उनमें से एक की जान नहीं बच पाई… हमने कानूनी मुद्दों से परे मानवता के नजरिए से इस स्थिति का सामना किया और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया।" बताते चले के कि बीते 4 मार्च को, श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर गाले के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की पनडुब्बी से दागे गए एक टॉरपीडो से ईरानी फ्रिगेट आईआरआईआईएस डेना को निशाना बनाया गया था। इस हमले के कारण जहाज डूब गया। श्रीलंकाई अधिकारियों ने 87 शव बरामद किए, जबकि 32 नाविकों को जीवित बचा लिया गया और उन्हें चिकित्सा उपचार के लिए गाले ले जाया गया।

योगी सरकार की पहल से प्रतिभाशाली युवाओं को मिल रहा सफलता के लिए मजबूत आधार

समाज कल्याण विभाग की आवासीय कोचिंग और मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम का असर, निःशुल्क मार्गदर्शन से युवाओं ने हासिल की सफलता भागीदारी भवन की आवासीय कोचिंग से 2 और मॉक इंटरव्यू से जुड़े 4 अभ्यर्थियों ने पाई कामयाबी लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के मेधावी युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में चलाई जा रही मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना एक बार फिर अपने प्रभावशाली परिणामों के साथ सामने आई है। समाज कल्याण विभाग द्वारा गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में संचालित आवासीय कोचिंग और मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम से जुड़े 6 अभ्यर्थियों का चयन सिविल सेवा परीक्षा (यूपीएससी-2025) में हुआ है। योगी सरकार की इस पहल के माध्यम से प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता के लिए मजबूत आधार मिल रहा है। इससे न केवल युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं में उत्तर प्रदेश की भागीदारी भी लगातार मजबूत हो रही है। चयनितों को दी मंत्री असीम अरुण ने बधाई इन सभी चयनित अभ्यर्थियों को समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं को भी सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। अभ्यर्थियों का शानदार प्रदर्शन समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह के अनुसार, भागीदारी भवन में संचालित आवासीय कोचिंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विमल कुमार को 107वीं और विपिन देव यादव को 316वीं रैंक प्राप्त हुई है। वहीं, भागीदारी भवन आवासीय कोचिंग एवं अभ्युदय योजना के अंतर्गत आयोजित मॉक इंटरव्यू में शामिल मानसी को 444वीं, महेश जायसवाल को 590वीं, अदिति सिंह को 859वीं और तनीषा सिंह को 930वीं रैंक हासिल हुई है। विषय विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन समाज कल्याण विभाग द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भागीदारी भवन में आवासीय कोचिंग का संचालन किया जा रहा है। यहां सिविल सेवा मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विषय विशेषज्ञों के साथ-साथ वरिष्ठ आईएएस और पीसीएस अधिकारी अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इन अभ्यर्थियों को आवासीय कोचिंग के दौरान निशुल्क आवास, भोजन, पुस्तकालय, अध्ययन सामग्री और ऑनलाइन-ऑफलाइन कक्षाओं की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।