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मध्यप्रदेश में मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, 5 डिब्बे पटरी से उतरे; बिलासपुर-कटनी रूट पर ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित

बिलासपुर. बिलासपुर से कोयला लेकर बड़ोदरा जा रही एक मालगाड़ी बिलासपुर बीना मार्ग पर कटनी मुड़वारा स्टेशन से पहले बेपटरी हो गई। जिससे रूट का रेल आवागमन प्रभावित हुआ है। ट्रैक को सुधारने और पटरी से उतरे डिब्बों को वापस पटरी पर लाने का कार्य जारी है। मौके पर डीआरएम सहित वरिष्ठ अधिकारी और कई स्थानों की राहत टीम मौजूद हैं। बिलासुपर से बड़ोदरा जा रही थी मालगाड़ी जानकारी के अनुसार, बिलासपुर से एक मालगाड़ी कोयला लोड करके बड़ोदरा जा रही थी। लगभग 11 बजे जैसे ही वह एनकेजे से कटनी मुड़वारा की ओर बढी बाबा घाट के पास बने केबिन के पास अचानक से धमाके के साथ मालगाड़ी के एक के बाद एक पांच डिब्बे पटरी से उतर गए और कोयला ट्रैक पर बिखर गया। किसी तरह से चालक ने गाड़ी रोकी और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचना दी गई। मालगाड़ी के लिए बेपटरी होने की सूचना मिलते ही अफरा-तफरी मच गई और एनकेजे, कटनी सहित जबलपुर और सतना से टीम में मौके पर बुलाई गई है। खाली किया जा रहा कोयला वहीं, जबलपुर डीआरएम कमल तलरेजा सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और डिब्बों को काटकर अलग करते हुए पटरी पर बिखरे कोयले को अलग करने का कार्य किया जा रहा है। वहीं डिब्बों में भरे कोयले को भी मजदूर और मशीनों की मदद से खाली कराया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द रेलवे ट्रैक का सुधार करते हुए यातायात को बहाल किया जा सके। ट्रेनें प्रभावित वही, बिलासपुर बीना रेलखंड के बंद होने से मुड़वारा से बिलासपुर शहडोल की ओर जाने वाली यात्री ट्रेनें और मालगाड़ी प्रभावित हैं। जिनको अलग-अलग स्टेशनों पर रोका गया है।  

कैंसर, दृष्टिबाधा और असफलताएं भी नहीं रोक पाईं कदम, संजय दहरिया ने तीसरे प्रयास में क्रैक की UPSC

नई दिल्ली. जुनून, लगन और हार न मानने की जिद। इन सबका जीता जागता उदाहरण हैं संजय दहरिया। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के संजय दहरिया ने छह साल तक कैंसर से जूझने और तीन नौकरियां छोड़ने के बाद अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की है। बेलटुकरी के एक किसान के 38 साल के इस पुत्र ने अपने परिवार और गांव के लोगों को अपार गर्व और खुशी दी है। दहरिया की शैक्षणिक यात्रा एक स्थानीय सरकारी स्कूल से शुरू हुई। कक्षा 5 में जवाहर नवोदय विद्यालय, माना (रायपुर) में चयन होने के बाद इसमें एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। दहरिया के लिए सिविल सेवाओं तक का सफर पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों ही दृष्टि से चुनौतियों से भरा था। पश्चिम बंगाल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 2009 से 2011 तक काम करने के बाद उन्होंने उच्च लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इस्तीफा दे दिया। हालांकि, 2012 में उन्हें लार ग्रंथियों के कैंसर का पता चला, जिसके कारण छह साल तक उनका कठिन इलाज चला। दृष्टिबाधित होने के बावजूद दहरिया ने हार नहीं मानी और सिविल सेवाओं में अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखा। उन्होंने रायपुर के एक बैंक और महासमुंद डाकघर में काम करते हुए अपने करियर को आगे बढ़ाया। उन्होंने 2022 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में भाग लेना शुरू किया और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर 2025 में तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। दहरिया ने अपनी सफलता का श्रेय बीमारी के दौरान अपने परिवार और मार्गदर्शकों के अटूट समर्थन को दिया। उन्होंने कहा कि मैं सिविल सेवाओं के माध्यम से देश की सेवा करने की आशा रखता हूं। चाहे मुझे आईएएस कैडर मिले या कोई अन्य सेवा, लोक सेवा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता दृढ़ रहेगी। महासमुंद के कलेक्टर विनय कुमार लांगेह और जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने दहरिया को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि की सराहना की, जो साहस और दृढ़ता का एक उदाहरण है।

पैतृक गांव में कप्तान शुभमन गिल ने दादा-दादी के साथ बिताया समय

फाजिल्का. भारतीय वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल ने अपने पैतृक गांव जैमलवाला पहुंचने की तस्वीरों को अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर सांझा किया है। मिली जानकारी के अनुसार वह बीते दिन अपने दादा-दादी के पास गए थे। सबसे पहले उन्होंने अपने दादा-दादी के साथ समय बिताया और परिवार के साथ कई भावुक पल साझा किए। परिवार के बुजुर्गों के साथ मुलाकात के बाद उन्होंने सीधे गांव के खेल मैदान का रुख किया, जहां क्रिकेट सीख रहे नन्हे खिलाड़ी बेसब्री से उनका इंतजार कर रहे थे। मैदान में पहुंचते ही शुभमन गिल ने बच्चों के साथ पूरी सहजता से बातचीत शुरू की। उन्होंने खिलाड़ियों की प्रैक्टिस को ध्यान से देखा और उनके खेल में आ रही कमियों की ओर इशारा करते हुए तुरंत सुधार के सुझाव दिए। इस दौरान उनके साथ उनके दादा दीदार सिंह भी मौजूद रहे, जिन्होंने बच्चों को शुभमन के शुरुआती संघर्ष और मेहनत के किस्से भी सुनाए। नन्हें युवाओं को दिए बैटिंग टिप्स क्रिकेट के प्रति बच्चों का उत्साह देखकर शुभमन गिल भी काफी खुश नजर आए। उन्होंने खिलाड़ियों को बैटिंग तकनीक, संतुलन, फुटवर्क और शॉट चयन के बारे में विस्तार से समझाया। किसी खिलाड़ी को उन्होंने फ्रंट-फुट मूवमेंट सही करने की सलाह दी, तो किसी को बैट का फेस सही समय पर खोलने और सीधा खेलने के बारे में बताया। सिर्फ सलाह देने तक ही सीमित न रहते हुए शुभमन खुद भी नेट पर उतर गए और बल्लेबाजी करके बच्चों को सही तकनीक का उदाहरण दिया। जब गेंदबाजों ने तेज गेंदबाजी की तो उन्होंने उसी गति के अनुसार सही शॉट चयन दिखाया, जिससे युवा खिलाड़ियों को सीखने का अच्छा अवसर मिला। युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए दी खेल सामग्री इस दौरान शुभमन गिल ने गांव के खिलाड़ियों को क्रिकेट किट, ग्लव्स और अन्य जरूरी खेल सामग्री भी उपलब्ध करवाई। इससे बच्चों में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिला। कई खिलाड़ियों ने कहा कि टीम इंडिया के कप्तान से सीधे सीखना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। शुभमन गिल के पिता लखविंदर सिंह ने बताया कि बचपन से ही शुभमन का क्रिकेट के प्रति समर्पण अलग था। वह घंटों मैदान में अकेले अभ्यास करते रहते थे। गांव के खुले मैदानों में की गई वही मेहनत आगे चलकर उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने की मजबूत नींव बनी। गांव के बच्चों को संबोधित करते हुए शुभमन गिल ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास ही खिलाड़ी को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि अगर वे ईमानदारी से मेहनत करते रहें तो कोई भी सपना दूर नहीं रहता।

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का समर्थन करेगी TMC

नई दिल्ली. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अब ममता बनर्जी की टीएमसी भी सहमत हो गई है। सूत्रों की मानें तो टीएमसी इस अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष का साथ देने को तैयार है। इससे पहले पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का साथ देने से इनकार कर दिया था। सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया गया लोकसभा ने ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने से संबंधित प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी सदस्यों के एक नोटिस को सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया है। पीठासीन सभापति द्वारा बुलाए जाने पर सदन के 50 सदस्यों को खड़ा होना होगा और फिर नोटिस स्वीकृत माना जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होगा। यदि 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता है। प्रस्ताव होगा पराजित? आगामी सोमवार के लिए तय एजेंडा पेपर के अनुसार, यह प्रस्ताव ही दिन के कामकाज के रूप में सूचीबद्ध एकमात्र विषय है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को इस मुद्दे पर विचार के समय सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। सदन में संख्या बल सरकार के पक्ष में काफी अधिक है, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रस्ताव पराजित हो जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने हाल ही में "पीटीआई-भाषा" को बताया था कि यह प्रस्ताव 9 मार्च को सदन के समक्ष आएगा । नोटिस तीन कांग्रेस सदस्यों मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि द्वारा पेश किया जाएगा। प्रस्तावित प्रस्ताव में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं देने और "विपक्ष की महिला सांसदों के खिलाफ अनुचित आरोप लगाने" के लिए अध्यक्ष के आचरण पर सवाल उठाया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि लोक महत्व के मुद्दे उठाने पर आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ की गई "अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियों" पर उन्हें नहीं टोका गया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि विपक्ष को लगता है कि बिरला अब सदन के सभी पक्षों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक निष्पक्षता नहीं बरत रहे हैं। उनके पक्षपातपूर्ण रवैये से सदस्यों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है और ऐसी व्यवस्थाएं दी जा रही हैं जो इन अधिकारों को कमजोर करते हैं। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि बिरला "सभी विवादास्पद मामलों में खुले तौर पर सत्तारूढ़ दल का पक्ष लेते हैं" और यह सब सदन के सुचारु संचालन तथा जनता की चिंताओं और शिकायतों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए गंभीर खतरा है। इसलिए उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। संविधान के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष नोटिस पर विचार किए जाने के दौरान सदन में उपस्थित रह सकते हैं। वह प्रस्ताव पर अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं, लेकिन जब इस विषय पर चर्चा होगी तब वे कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। इस दौरान सदन में उनके बैठने को लेकर हालांकि नियम स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन वे संभवतः सत्तापक्ष की प्रमुख पंक्तियों में बैठ सकते हैं।

इस्लामिक नाटो बनाकर ईरान पर हमला करने अचानक सऊदी पहुंचे मुनीर

तेहरान. मध्य पूर्व में लगातार बदल रहे हालात के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान से मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में सऊदी अरब की अरामको तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ है। इसके अलावा, अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के मारे जाने के बाद तेहरान ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में कड़ी जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका पैदा हो गई है। सऊदी रक्षा मंत्री ने 'एक्स' पर असीम मुनीर के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए इस बैठक की जानकारी दी। उन्होंने लिखा- पाकिस्तान के सेना प्रमुख और रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। हमने किंगडम पर ईरानी हमलों और हमारे 'संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते' के ढांचे के भीतर उन्हें रोकने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की। हमने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करती हैं और उम्मीद जताई कि ईरानी पक्ष समझदारी दिखाएगा और किसी भी गलत कदम से बचेगा। रणनीतिक महत्व और 'इस्लामिक नाटो' की सुगबुगाहट इस बैठक को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ महीने पहले तुर्की ने परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ मिलकर त्रिकोणीय 'इस्लामिक नाटो' जैसा रक्षा गठबंधन बनाने की कोशिश की थी। इसका उद्देश्य अशांत मध्य पूर्व और उसके बाहर सुरक्षा समीकरणों को फिर से आकार देना है। पाकिस्तान का समर्थन हाल ही में जब सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी पर ईरानी हमले हुए, तो पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रियाद और अन्य खाड़ी देशों के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त की थी। ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया केवल 'मौखिक निंदा' तक सीमित रहेगी? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने '2025 रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए हैं। जिसके तहत 'एक देश पर हमला मतलब दोनों देशों पर हमला' माना जाएगा। नाटो के 'अनुच्छेद 5' जैसा क्लॉज इस समझौते में नाटो के 'आर्टिकल 5' के समान एक प्रावधान है, जिसमें कहा गया है कि किसी एक सदस्य के खिलाफ आक्रामकता को सभी पर हमला माना जाएगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के हवाले से सूत्रों ने बताया है कि इस रक्षा व्यवस्था में तुर्की को शामिल करने पर बातचीत अंतिम चरण में है। यह संभावित विस्तार दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बढ़ते साझा रणनीतिक हितों को दर्शाता है। सैन्य हस्तक्षेप या कूटनीति: क्या करेगा पाकिस्तान? भले ही इस समझौते में एक पर हमला, सब पर हमला जैसी बात कही गई हो, लेकिन इसके मुख्य प्रावधान पारंपरिक सैन्य सहयोग जैसे- संयुक्त सैन्य अभ्यास, खुफिया जानकारी साझा करना और ड्रोन तकनीक पर ही केंद्रित हैं; इसमें कोई परमाणु प्रतिबद्धता शामिल नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत में पूर्ण एकजुटता तो दिखाई है, लेकिन सैन्य तैनाती के बजाय शांति प्रयासों का समर्थन किया है।जानकारों का मानना है कि अपनी सेना भेजने से पाकिस्तान एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में फंस सकता है, जिससे उसकी पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और आतंरिक सुरक्षा स्थिति और बिगड़ जाएगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस्लामाबाद अपनी सेना भेजने के बजाय सऊदी अरब का समर्थन केवल कूटनीति, रसद और अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति देने तक ही सीमित रखेगा।

बिहार और बंगाल को काटकर बनेगा नया केंद्र शासित प्रदेश?

नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में बिहार के सीमांचल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने बिहार के बड़े अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठक की। इसके बाद इस बात की अटकलें लगने लगी कि बिहार के कुछ जिलों और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों के मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी चल रही है। इन अटकलों को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने और हवा दे दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) बंगाल को बांटने की कोशिश कर रही है। इन अटकलों पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। पीआईबी फैक्ट चेक ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। इसे महज एक अफवाह करार दिया। आपको बता दें कि अटकलों में दावा किया जा रहा है कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया) और पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों (मालदा, उत्तर दिनाजपुर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर) को जोड़कर एक नया प्रशासनिक केंद्र बनाया जाएगा। पीआईबी का कहना है कि भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यह पूरी तरह से एक अफवाह है। गृह मंत्रालय (MHA) या किसी भी आधिकारिक संस्था ने इस तरह की किसी योजना की पुष्टि नहीं की है। सरकार ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे ऐसी अपुष्ट और संवेदनशील खबरों को साझा न करें जो क्षेत्रीय भावनाओं या राजनीतिक तनाव को भड़का सकती हैं। अफवाह क्यों फैली? यह अफवाह तब और तेज हो गई जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमांचल और उत्तर बंगाल का दौरा किया। गृह मंत्री ने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ सुरक्षा व्यवस्था, घुसपैठ और ड्रग तस्करी रोकने के लिए बैठकें की थीं। वहीं, भारतीय सेना ने हाल ही में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए किशनगंज (बिहार) और पश्चिम बंगाल में नई चौकियां स्थापित की हैं। विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय मीडिया आउटलेट्स ने इन सुरक्षा कदमों को नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी के रूप में प्रचारित किया, जिसका सरकार ने अब खंडन कर दिया है। आपको बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित भूमि की एक संकीर्ण पट्टी (20-22 किमी चौड़ी) है जो मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है। यह रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है। सरकार यहां एक अंडरग्राउंड रेलवे प्रोजेक्ट (40 किमी) बनाने की योजना जरूर बना रही है ताकि युद्ध या आपदा के समय पूर्वोत्तर से संपर्क न टूटे, लेकिन इसके लिए किसी भौगोलिक या प्रशासनिक बदलाव का कोई इरादा नहीं है।

अमृतसर में पुलिस कॉन्स्टेबल की पीट-पीटकर हत्या

अमृतसर. अमृतसर के राजासांसी क्षेत्र के गांव जगदेव कलां में पंजाब पुलिस कॉन्स्टेबल की पीट पीट कर हत्या कर दी गई। रिश्तेदारों ने घर पर हमला कर लोहे की रॉड और डंडों से कांस्टेबल से मारपीट की। गंभीर रूप से घायल कॉन्स्टेबल को परिजन इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। मृतक की पहचान गांव जगदेव कलां निवासी जगजीत सिंह के रूप में हुई है। वह गुरदासपुर में एक डीएसपी के सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात थे। मृतक की भतीजी जतिंदर कौर ने बताया कि गांव निवासी बलराज सिंह उनका रिश्तेदार है और उसके साथ कुछ समय से विवाद चल रहा है। बलराज सिंह, उसका भाई, बेटा चन्नप्रीत सिंह, पत्नी कोमल, सुखराज सिंह, मनजीत सिंह, गज्जन सिंह और गुरलाल सिंह सहित 8-10 लोग दो गाड़ियों में सवार होकर उनके घर आ पहुंचे। आरोप है कि सभी ने मिलकर जगजीत सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला कर दिया। मारपीट के दौरान जगजीत सिंह के सिर पर लोहे की रॉड लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। परिजन घायल जगजीत सिंह को अमृतसर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। घटना से इलाके में सनसनी इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। वारदात के बाद से आरोपी फरार हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक यह मामला पारिवारिक रंजिश का है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें बना दी हैं और उनकी धरपकड़ के लिए रेड की जा रही है।

ट्रंप की हत्या की पाकिस्तान में ट्रेनिंग और ईरान से पैसा लेने वाला आतंकी आसिफ दोषी करार

तेहरान. ईरानी जासूसों द्वारा भर्ती किए गए 48 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के आरोप में दोषी ठहराया गया है। ब्रुकलिन की एक जूरी ने दो घंटे से भी कम समय तक विचार-विमर्श करने के बाद उसे 'मर्डर-फॉर-हायर' (पैसे देकर हत्या करवाना) और आतंकवाद के आरोपों में दोषी पाया। जूरी ने मर्चेंट के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि ईरान द्वारा उसके परिवार को 'धमकी' दिए जाने के कारण उसे मजबूरी में इस साजिश का हिस्सा बनना पड़ा था। बेतुकी योजना: जून 2024 में एफबीआई के खुफिया कैमरों ने क्वींस के फ्लोरल पार्क मोटर लॉज में मर्चेंट को अपने एक साथी (जो वास्तव में एफबीआई का मुखबिर था) के साथ रिपब्लिकन रैली में ट्रंप को मारने की योजना बनाते हुए कैद किया था। कागज और वेप से समझाया प्लान: मर्चेंट ने एक नोटबुक के पन्ने पर आयताकार बॉक्स बनाकर भीड़ और स्टेज को दर्शाया। फिर उसने एक तीर के निशान के ऊपर क्रीमसिकल रंग का वेप रखते हुए कहा- यह टारगेट है। यह कैसे मरेगा? एडवांस पेमेंट और गिरफ्तारी: पूर्व बैंकर रह चुके मर्चेंट ने भाड़े के हत्यारे (हिटमैन) बने दो अंडरकवर एफबीआई एजेंटों को 5000-5000 डॉलर का एडवांस भी दिया था। उसे अगस्त 2024 में अमेरिका से भागने की कोशिश करते समय गिरफ्तार कर लिया गया था। आसिफ मर्चेंट को पाकिस्तान में ट्रेनिंग मिली थी अदालत के दस्तावेजों और ट्रायल के दौरान दी गई गवाही के अनुसार, आसिफ मर्चेंट ने 2022 के अंत या 2023 की शुरुआत में पाकिस्तान में रहकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए काम करना शुरू किया था। इसी अवधि में उसे 'ट्रेडक्राफ्ट' (जासूसी और खुफिया काम करने के तरीके) का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, जिसमें काउंटर-सर्विलांस (निगरानी या खुफिया एजेंसियों से बचने की तकनीक) की ट्रेनिंग मुख्य रूप से शामिल थी। मर्चेंट ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि उसे इस बात की पूरी जानकारी थी कि IRGC एक घोषित आतंकी संगठन है। इस ट्रेनिंग को पूरा करने के बाद, 2023 में उसे ऐसे संभावित IRGC रंगरूटों की तलाश करने के लिए अमेरिका भेजा गया था, जो वहां रहकर संगठन के लिए काम कर सकें। इसके अलावा, इस पूरी अवधि के दौरान मर्चेंट अपने IRGC हैंडलर से मिलने और निर्देश प्राप्त करने के लिए बार-बार ईरान की यात्रा भी करता रहा था। मकसद और अदालत में दलीलें मर्चेंट ने अदालत में गवाही दी कि अप्रैल 2024 में उसके ईरानी हैंडलर ने उसे अमेरिका भेजा था। उसके हैंडलर ने स्पष्ट रूप से किसी एक का नाम नहीं लिया था, बल्कि तीन संभावित लक्ष्य बताए थे- डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन और निक्की हेली। इस काम के लिए उसे दस लाख डॉलर तक मिलने की उम्मीद थी। बचाव पक्ष का दावा: मर्चेंट के वकील एवी मोस्कोविट्ज ने इस साजिश को हास्यास्पद बताया और कहा कि मर्चेंट को लगा कि ईरान में उसका परिवार खतरे में है, इसलिए उसने केवल इस योजना का हिस्सा होने का नाटक किया। अदालत में 'नदीम अली' के नाम से गवाही देने वाले मुखबिर की टिप पर एफबीआई ने यह पूरा जाल बिछाया था। सरकारी वकीलों का पलटवार: एफबीआई एजेंट ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के बाद मर्चेंट ने किसी धमकी का जिक्र नहीं किया था। इसके बजाय, उसने पैसे और 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए शीर्ष ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ट्रंप की हत्या की बात स्वीकार की थी। यह मुकदमा एक ऐसे समय में संपन्न हुआ है जब मध्य पूर्व में भारी तनाव है। अमेरिका और इजरायली सेनाओं के एक अभूतपूर्व सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और दर्जनों अन्य शीर्ष ईरानी अधिकारी मारे गए हैं, जिससे युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है। इस मामले में दोषी पाए जाने के बाद, अब सजा सुनाए जाने पर आसिफ मर्चेंट को अधिकतम उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

केशव प्रसाद मौर्य के हेलिकॉप्टर चॉपर में धुआं भरने पर इमरजेंसी लैंडिंग

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हेलिकॉप्टर की शनिवार को लखनऊ एयरपोर्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। वह हेलिकॉप्टर से ला मार्टस् से कौशांबी जा रहे थे, तभी तकनीकी खराबी के कारण हेलिकॉप्टर के केबिन में धुआं भरने लगा। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत लखनऊ एयरपोर्ट पर आपात लैंडिंग कराई। लैंडिंग के बाद सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य शनिवार को एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए।जानकारी के अनुसार, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत लखनऊ से कौशांबी के लिए रवाना हुए थे। हेलिकॉप्टर ने जैसे ही ला मार्टिनियर ग्राउंड से उड़ान भरी, तभी पायलट को तकनीकी खराबी का अहसास हुआ। उपमुख्यमंत्री के कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर के भीतर अचानक धुआं भरने लगा, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। लखनऊ एयरपोर्ट पर कराई गई हेलिकॉप्टर की लैंडिंग पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया और हेलिकॉप्टर को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया। एयरपोर्ट पर पुख्ता इंतजामों के बीच हेलीकॉप्टर की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। वही, चॉपर में सवार सभी यात्री सही सलामत हैं। इस घटना के बाद तकनीकी विशेषज्ञों की टीम हेलीकॉप्टर की जांच में जुट गई है।

ईरान के हफ्ते भर के संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

तेहरान. ईरान और अमेरिका-इजरायल के युद्ध को आज एक सप्ताह पूरा हो रहा है। एक सप्ताह में ही इस युद्ध का असर पूरी दुनिया में पड़ा है। एक तरफ यूरोप से लेकर एशिया तक की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं तो दूसरी ओर खाड़ी देशों में हमले भी खूब हुए हैं जिनमें जान और माल दोनों का नुकसान हुआ है। खाड़ी देशों में फंसे पर्यटक अब भी संकट का सामना कर रहे हैं। ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए थे जिनमें ईरान के सर्वोच्चा नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। संघर्ष बढ़ता ही जा रहा इस सैन्य हमले के बाद ईरान ने मुख्य रूप से इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन तथा सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए। पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों की ओर से हमलों और जवाबी हमलों के बीच यह संघर्ष काफी बढ़ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल युद्ध के सातवें दिन शुक्रवार को भी इजरायल के लड़ाकू विमान मंडराते रहे। समंदर में हजारों तेल के जहाज फंसे हुए हैं। इनमें 36 जहाज भारत के भी हैं। ऐसे में तेल की आपूर्ति में बड़ी बाधा उत्पन्न हुई है। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी कि यह युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने पर तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। शुक्रवार को अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत दो वर्षों में पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। तेहरान में तेज हो गए हमले ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार तड़के कई विस्फोट हुए, जिनसे आसमान में काले धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं। इस बीच अमेरिका ने चेतावनी दी कि जल्द ही बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान शुरू किया जा सकता है, जिसे अधिकारी सप्ताह भर से जारी संघर्ष का अब तक का सबसे तीव्र हमला बता रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप सख्त क्षेत्र में लड़ाई खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इज़राइल को 15.1 करोड़ डॉलर के नए हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के ''बिना शर्त आत्मसमर्पण'' करने तक उससे कोई बातचीत नहीं होगी। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि देश अपनी रक्षा के लिए ''हर जरूरी कदम'' उठाएगा। एक वीडियो फुटेज में पश्चिमी तेहरान के ऊपर विस्फोटों से धुएं के गुबार दिखाई दिए, जबकि इजराइल ने कहा कि उसने व्यापक हमलों का नया दौर शुरू किया है। इजराइली सेना ने कहा कि वह ईरान से दागी गई नयी मिसाइलों को रोकने की कोशिश कर रही है। ईरान के हमलों के बाद बहरीन में शनिवार सुबह सायरन बजे। सऊदी अरब ने कहा कि उसने अपने विशाल शायबह तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे ड्रोन नष्ट कर दिए और प्रिंस सुल्तान एयर बेस की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया। इस बीच अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के अनुसार, रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी है जिससे वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात कर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर संवेदना जताई। ईरान में 1200 से ज्यादा मौतें इस संघर्ष में अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 200 से अधिक और इजराइल में करीब 12 लोग मारे गए हैं। छह अमेरिकी सैनिक भी इस संघर्ष में जान गंवा चुके हैं। ईरान के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ''कुछ देशों'' ने मध्यस्थता के प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन उन्होंने इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया।