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पंजाब में नई औद्योगिक नीति में रोजगार कंपनियों को सब्सिडी

चंडीगढ़. पंजाब कैबिनेट ने बुधवार को राज्य की नई औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दे दी, जिसमें सबसे बड़ा बदलाव रोजगार सृजन से जुड़े प्रोत्साहनों को आसान बनाना है। राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति में रोजगार मुहैया करवाने वाली कंपनियों को सब्सिडी के रूप में प्रति कर्मचारी पैसा दिया जाएगा। पुरुषों के मामले में यह तीन हजार और महिलाओं को रोजगार देने में यह चार हजार रुपए दिए जाएंगे। अनुसूचित जाति/जनजाति और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए 4000 रुपये प्रति माह तय की गई है। आईटी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए यह सहायता 5000 रुपये और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों के लिए 7500 रुपये प्रति माह तक होगी। रोजगार , नई औद्योगिक नीति में मुख्य फोकस के रूप में रखा गया है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सरकार ने अब तक बड़ी इंडस्ट्री में निवेश करने पर जो सब्सिडी दी जा रही थी उसे कम करके मध्यम दर्जे की इंडस्ट्री पर लाया गया है। यानी अब उद्योगों को रोजगार सब्सिडी के लिए पात्र होने हेतु 250 करोड़ रुपये निवेश और 1000 कर्मचारियों की शर्त पूरी नहीं करनी होगी। नई नीति में इस सीमा को घटाकर 25 करोड़ रुपये निवेश और 50 कर्मचारियों तक कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। निवेश आकर्षित करने की कोशिश मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूर इस नीति को पंजाब में निवेश आकर्षित करने और उद्योगों को प्रतिस्पर्धी माहौल देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि नई नीति के माध्यम से पंजाब को फिर से औद्योगिक निवेश के प्रमुख केंद्रों में शामिल किया जाए। यह पालिसी उस समय आई जब अगले हफ्ते सरकार मोहाली में औद्योगिक समिट करने जा रही है जहां बड़े उद्योगों को पंजाब में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह नीति उद्योग जगत के व्यापक परामर्श के बाद तैयार की गई है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए 24 सेक्टर कमेटियों का गठन किया गया था। इन समितियों ने उद्योगों से जुड़े मुद्दों और आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा के बाद सरकार को 601 सिफारिशें सौंपीं, जिनमें से लगभग 77 प्रतिशत को नीति में शामिल किया गया। 20 अलग-अलग प्रकार के इंसेंटिव उपलब्ध होंगे नई औद्योगिक नीति का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि निवेशकों को अपने प्रोजेक्ट के अनुसार प्रोत्साहन चुनने की सुविधा मिले। इसके तहत उद्योगों को लगभग 20 अलग-अलग प्रकार के इंसेंटिव उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें एसजीएसटी रीइंबर्समेंट, रोजगार सृजन सब्सिडी, बिजली ड्यूटी में छूट और स्टांप ड्यूटी में छूट प्रमुख हैं। इसके अलावा राज्य सरकार ने पहली बार उद्योगों के लिए कैपिटल सब्सिडी का प्राविधान भी किया है, जिससे नए उद्योगों को शुरुआती निवेश में राहत मिल सकेगी। इंसेंटिव की अवधि को बढ़ाया गया सरकार ने औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए इंसेंटिव की अवधि भी बढ़ा दी है। पहले उद्योगों को मिलने वाले प्रोत्साहन 7 से 10 वर्ष तक सीमित थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 10 से 15 वर्ष कर दिया गया है। इससे निवेशकों को लंबे समय तक लाभ मिल सकेगा। नई नीति में कुछ क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इनमें फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, स्पोर्ट्स गुड्स, ऑटो और ऑटो कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी-आईटीईएस, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डिफेंस और एयरोस्पेस जैसे सेक्टर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निवेश करने वाली इकाइयों को 25 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। बॉर्डर एरिया के लिए विशेष पैकेज इसके साथ ही सीमावर्ती जिलों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की गई है। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का जैसे जिलों में स्थापित होने वाले उद्योगों को भी 25 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भी नीति में कई प्रावधान किए गए हैं। शुरुआती स्टार्टअप के लिए सीड ग्रांट को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा स्टार्टअप के विस्तार के लिए 10 लाख रुपये की दूसरी किस्त का प्राविधान भी किया गया है। मोहाली में इनोवेशन हब स्थापित करने की योजना राज्य सरकार मोहाली में इनोवेशन और स्टार्टअप हब स्थापित करने की योजना बना रही है, जिसे उत्तर भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति में पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया गया है। उद्योगों को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम स्थापित करने के लिए 10 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी और पराली आधारित बॉयलर अपनाने के लिए 7.5 करोड़ रुपये तक की सहायता देने का प्रावधान किया गया है। उद्योगों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। आईटी और डेटा सेंटर को औद्योगिक दरों पर बिजली देने के साथ ही ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए 5 रुपये प्रति यूनिट टैरिफ तय किया गया है। 45 कार्य दिवसों के भीतर अनुमतियां देने का लक्ष्य सरकार का कहना है कि इन सुधारों से उद्योगों के लिए लागत कम होगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा उद्योग लगाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए फास्ट ट्रैक पोर्टल के जरिए समयबद्ध मंजूरी की व्यवस्था भी की गई है, जिसके तहत 45 कार्य दिवसों के भीतर अनुमतियां देने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार का अनुमान है कि नई औद्योगिक नीति के लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में पंजाब में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार ने 2026 तक लगभग 75,000 करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश का लक्ष्य तय किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नीति का प्रभावी क्रियान्वयन होता है और बिजली, भूमि व लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों का समाधान किया जाता है तो पंजाब में औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है।

ईरानी जहाज विवाद पर विदेश मंत्री जयशंकर की दो टूक, कहा— भारत का फैसला सही था

नई दिल्ली.  भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना संवाद 2026 में मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच ईरानी नौसैनिक पोत को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति देने के फैसले का बचाव किया है। जयशंकर ने ईरानी जहाजों से जुड़ी घटनाओं को लेकर कहा कि भारत ने यह कदम कानूनी जटिलताओं से ऊपर उठकर विशुद्ध रूप से मानवीय आधार पर उठाया है। दरअसल, भारत की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब 4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिससे हिंद महासागर में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से मिला संदेश विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि एक जहाज, जो संभवतः उस समय हमारी सीमा के सबसे करीब था, हमारे बंदरगाह में आना चाहता था। उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ समस्याएं आ रही हैं। 1 मार्च को हमने उन्हें अंदर आने की अनुमति दे दी, लेकिन उन्हें आने में कुछ दिन लग गए और फिर वे कोच्चि में रुके। उनमें कई युवा कैडेट थे। जब जहाज रवाना हुए थे और जब वे यहां पहुंचे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी। वे अपने बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे, और फिर वे किसी तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए।" ईरानी जहाजों को लेकर टिप्पणी बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की ये टिप्पणियां तीन ईरानी नौसैनिक जहाजों के संदर्भ में आई हैं, जिनमें मार्च के पहले सप्ताह में ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के केंद्र में आ गए थे। ये जहाज- आईरिस डेना, आईरिस लवन और आईरिस बुशहर- हिंद महासागर में परिचालन कर रहे थे और फरवरी में विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और मिलान 2026 अभ्यासों में भाग ले चुके थे। मैनें जो किया वो सही… विदेश मंत्री जयशंकर इस बात पर जोर दिया कि भारत का दृष्टिकोण मानवीय विचारों से प्रेरित है। जयशंकर ने कहा, "श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी, उन्होंने वही फैसला लिया जो उन्होंने लिया और दुर्भाग्य से उनमें से एक की जान नहीं बच पाई… हमने कानूनी मुद्दों से परे मानवता के नजरिए से इस स्थिति का सामना किया और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया।" बताते चले के कि बीते 4 मार्च को, श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर गाले के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की पनडुब्बी से दागे गए एक टॉरपीडो से ईरानी फ्रिगेट आईआरआईआईएस डेना को निशाना बनाया गया था। इस हमले के कारण जहाज डूब गया। श्रीलंकाई अधिकारियों ने 87 शव बरामद किए, जबकि 32 नाविकों को जीवित बचा लिया गया और उन्हें चिकित्सा उपचार के लिए गाले ले जाया गया।

योगी सरकार की पहल से प्रतिभाशाली युवाओं को मिल रहा सफलता के लिए मजबूत आधार

समाज कल्याण विभाग की आवासीय कोचिंग और मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम का असर, निःशुल्क मार्गदर्शन से युवाओं ने हासिल की सफलता भागीदारी भवन की आवासीय कोचिंग से 2 और मॉक इंटरव्यू से जुड़े 4 अभ्यर्थियों ने पाई कामयाबी लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के मेधावी युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में चलाई जा रही मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना एक बार फिर अपने प्रभावशाली परिणामों के साथ सामने आई है। समाज कल्याण विभाग द्वारा गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में संचालित आवासीय कोचिंग और मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम से जुड़े 6 अभ्यर्थियों का चयन सिविल सेवा परीक्षा (यूपीएससी-2025) में हुआ है। योगी सरकार की इस पहल के माध्यम से प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता के लिए मजबूत आधार मिल रहा है। इससे न केवल युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं में उत्तर प्रदेश की भागीदारी भी लगातार मजबूत हो रही है। चयनितों को दी मंत्री असीम अरुण ने बधाई इन सभी चयनित अभ्यर्थियों को समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं को भी सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। अभ्यर्थियों का शानदार प्रदर्शन समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह के अनुसार, भागीदारी भवन में संचालित आवासीय कोचिंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विमल कुमार को 107वीं और विपिन देव यादव को 316वीं रैंक प्राप्त हुई है। वहीं, भागीदारी भवन आवासीय कोचिंग एवं अभ्युदय योजना के अंतर्गत आयोजित मॉक इंटरव्यू में शामिल मानसी को 444वीं, महेश जायसवाल को 590वीं, अदिति सिंह को 859वीं और तनीषा सिंह को 930वीं रैंक हासिल हुई है। विषय विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन समाज कल्याण विभाग द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भागीदारी भवन में आवासीय कोचिंग का संचालन किया जा रहा है। यहां सिविल सेवा मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विषय विशेषज्ञों के साथ-साथ वरिष्ठ आईएएस और पीसीएस अधिकारी अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इन अभ्यर्थियों को आवासीय कोचिंग के दौरान निशुल्क आवास, भोजन, पुस्तकालय, अध्ययन सामग्री और ऑनलाइन-ऑफलाइन कक्षाओं की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।

वर्ल्ड कप में जिंक्स तोड़ने का प्लान! टीम इंडिया ने बदला 2023 वाला होटल-ड्रेसिंग रूम, अहमदाबाद में नया टोटका

अहमदाबाद.  आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के खिताबी मुकाबले से पहले भारतीय टीम मैनेजमेंट ने एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक बदलाव किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2023 वनडे वर्ल्ड कप फाइनल की कड़वी यादों को पीछे छोड़ने के लिए टीम इंडिया ने इस बार अहमदाबाद में अपना होटल बदल दिया है। इतना ही नहीं, नरेंद्र मोदी स्टेडियम के ड्रेसिंग रूम को लेकर भी ‘टोटका’ अपनाया गया है। इस बार भारतीय खिलाड़ी उस ड्रेसिंग रूम का उपयोग करेंगे जो आमतौर पर विपक्षी टीम के लिए होता था, जबकि ‘होम’ ड्रेसिंग रूम न्यूजीलैंड को दिया गया है। टीम का मानना है कि इन बदलावों से पिछले साल वाली ‘नकारात्मकता’ या ‘जिंक्स’ को तोड़ने में मदद मिलेगी। टीम इंडिया की रणनीति में इस बार तकनीकी कौशल के साथ-साथ आध्यात्मिक पहलुओं का भी समावेश दिख रहा है। हाल ही में मुंबई में अभ्यास सत्र के दौरान टीम ने चंद्र ग्रहण के कारण अपनी प्रैक्टिस 45 मिनट देरी से शुरू की थी। प्रशंसकों और विशेषज्ञों का मानना है कि रोहित शर्मा की अगुवाई वाली यह टीम किसी भी शुभ-अशुभ संकेत को नजरअंदाज नहीं करना चाहती। अहमदाबाद के इस विशाल मैदान पर भारत का रिकॉर्ड काफी मजबूत है, जहाँ टीम ने अब तक खेले 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में से 7 में जीत हासिल की है। 70 प्रतिशत के इस शानदार जीत रिकॉर्ड के साथ भारतीय टीम मैदान पर उतरने को बेताब है। नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच और माहौल भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल है, लेकिन 2023 की हार का साया अभी भी फैंस के जहन में है। टीम इंडिया ने अपनी तैयारी को इतना पुख्ता किया है कि ड्रेसिंग रूम से लेकर होटल तक सब कुछ नया रखा गया है ताकि खिलाड़ी नए जोश के साथ मैदान पर उतरें। संजू सैमसन और ईशान किशन की शानदार फॉर्म के साथ, भारत इस बार कीवी टीम को मात देकर अपनी चौथी आईसीसी ट्रॉफी उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। रविवार को होने वाले इस महामुकाबले पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, जहाँ टीम इंडिया इतिहास रचने से अब बस एक कदम दूर है।

पंजाब में नए सत्र के अप्रैल से ही खुलेंगे स्कूल

लुधियाना. शिक्षा विभाग को निजी स्कूलों की मनमानियों के खिलाफ लिखित आदेश जारी करने पड़ गए। मामला कुछ निजी स्कूलों द्वारा अप्रैल की बजाय मार्च में ही नया सैशन शुरू करने को लेकर जुड़ा है। सी.बी.एस.ई. ने भी जहां स्कूलों को पत्र जारी करने की तैयारी कर ली थी, वहीं जिला शिक्षा विभाग ने सरकार की हिदायतों का हवाला देते हुए सभी निजी स्कूलों चाहे किसी भी बोर्ड से संबंधित हो, को आदेश जारी कर दिया है कि विद्यार्थियों के लिए कक्षाएं 1 अप्रैल से ही शुरू की जाएं. कोई भी स्कूल मार्च में किसी भी क्लास के विद्यार्थियों को नए सैशन की क्लासों के लिए नहीं बुलाएगा। बता दें कि कई स्कूलों ने 1 अप्रैल से पहले ही सैशन ख़त्म करते हुए नए सैशन की क्लासेज अभी से शुरू कर दी थीं। इस बारे डी.ई.ओ. डिम्पल मदान ने बाकायदा पत्र भी जारी कर दिया है। अब देखना है कि निजी स्कूल डी.ई.ओ. की बात को कितनी गंभीरता से लेते हैं और डी.ई.ओ. अपने आदेश लागू करवाने के लिए क्या कदम उठाएंगी? यही नहीं डी.ई.ओ. की ओर से जारी पत्र में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों और अभिभावकों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। आदेश में निजी स्कूल प्रबंधकों द्वारा किताबों और वर्दी के नाम पर की जा रही मनमानी पर नकेल कसने की तैयारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा की आड़ में पब्लिशर्स के साथ मिलकर किए जा रहे 'कमीशन के खेल' को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने जिले के सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा-वार किताबों और वर्दी की पूरी सूची अपनी आधिकारिक वैबसाइट के होम पेज पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। स्कूलों को इस आदेश के पालन के लिए केवल 3 दिन का समय दिया गया है। इस सूची में किताबों का शीर्षक (टाइटल), लेखक और प्रकाशक का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए, ताकि अभिभावक अपनी पसंद और बजट के अनुसार खुले बाजार से सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र रहें। विभाग ने चेतावनी दी है कि इन आदेशों का अक्षरश: पालन सुनिश्चित कर दफ्तर को सूचित किया जाए। गैर-जरूरी किताबों का बोझ और अभिभावकों का शोषण विभिन्न स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के अध्यापकों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि निजी स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों पर ऐसी अनेक किताबों का बोझ डाल दिया जाता है, जिनका मुख्य पाठ्यक्रम (सिलेबस) से कोई सीधा संबंध नहीं होता। उदाहरण के तौर पर कई स्कूलों में छठी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस, फाइनैंशियल लिटरेसी, मार्कीटिंग, जनरल नॉलेज और मोरल साइंस जैसी महंगी किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं। ये किताबें न केवल विद्यार्थियों के बैग का बोझ बढ़ा रही हैं, बल्कि अभिभावकों की जेब पर भी भारी पड़ रही हैं। अभिभावकों का आरोप है कि जब तक सभी बच्चे किताबें नहीं खरीद लेते, तब तक स्कूलों में इन्हें लाने का दबाव बनाया जाता है लेकिन एक बार बिक्री पूरी होने के बाद पूरे साल इन किताबों से कोई ठोस पढ़ाई नहीं करवाई जाती। वर्दी की मोनोपॉली होगी ख़त्म किताबों के साथ-साथ वर्दी बेचने के मामले में भी स्कूलों और चुनिंदा वैंडर्स की मिलीभगत सामने आती रही है। कई स्कूल हर साल वर्दी के रंग, डिजाइन या लोगो में मामूली बदलाव कर देते हैं जिससे अभिभावक पुरानी वर्दी का उपयोग नहीं कर पाते और उन्हें नए सैट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा स्कूलों द्वारा कुछ खास दुकानों को ही अधिकृत किया जाता है जहां वर्दी और अन्य सहायक सामग्री बाजार दर से कहीं अधिक कीमतों पर बेची जाती है। विभाग के नए आदेशों का उद्देश्य इस प्रकार की व्यापारिक एकाधिकार (मोनोपॉली) को समाप्त करना है। स्कूलों के अंदर काऊंटर लगाकर किताबें बेचने पर विशेष नजर विभागीय आदेशों के बावजूद कई स्कूल परिसरों के अंदर ही निजी काऊंटर लगाकर ऊंचे दामों पर किताबें और वर्दी बेची जा रही हैं। पिछले वर्ष भी इस संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई थीं, परंतु समय की कमी के कारण ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। इस बार शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों पर अपनी पैनी नजर रखी हुई है जो नियमों का उल्लंघन कर स्कूल के भीतर व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हैं। “अभिभावकों की ओर से किताबों और वर्दी को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं जिसका संज्ञान लेते हुए यह आदेश जारी किए गए हैं। स्कूलों को तीन दिनों के भीतर अपनी वैबसाइट पर किताबों का पूरा विवरण सार्वजनिक करना होगा। किसी भी स्कूल को अभिभावकों पर किसी खास दुकान से सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई स्कूल इन आदेशों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”

मध्यप्रदेश में मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, 5 डिब्बे पटरी से उतरे; बिलासपुर-कटनी रूट पर ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित

बिलासपुर. बिलासपुर से कोयला लेकर बड़ोदरा जा रही एक मालगाड़ी बिलासपुर बीना मार्ग पर कटनी मुड़वारा स्टेशन से पहले बेपटरी हो गई। जिससे रूट का रेल आवागमन प्रभावित हुआ है। ट्रैक को सुधारने और पटरी से उतरे डिब्बों को वापस पटरी पर लाने का कार्य जारी है। मौके पर डीआरएम सहित वरिष्ठ अधिकारी और कई स्थानों की राहत टीम मौजूद हैं। बिलासुपर से बड़ोदरा जा रही थी मालगाड़ी जानकारी के अनुसार, बिलासपुर से एक मालगाड़ी कोयला लोड करके बड़ोदरा जा रही थी। लगभग 11 बजे जैसे ही वह एनकेजे से कटनी मुड़वारा की ओर बढी बाबा घाट के पास बने केबिन के पास अचानक से धमाके के साथ मालगाड़ी के एक के बाद एक पांच डिब्बे पटरी से उतर गए और कोयला ट्रैक पर बिखर गया। किसी तरह से चालक ने गाड़ी रोकी और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचना दी गई। मालगाड़ी के लिए बेपटरी होने की सूचना मिलते ही अफरा-तफरी मच गई और एनकेजे, कटनी सहित जबलपुर और सतना से टीम में मौके पर बुलाई गई है। खाली किया जा रहा कोयला वहीं, जबलपुर डीआरएम कमल तलरेजा सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और डिब्बों को काटकर अलग करते हुए पटरी पर बिखरे कोयले को अलग करने का कार्य किया जा रहा है। वहीं डिब्बों में भरे कोयले को भी मजदूर और मशीनों की मदद से खाली कराया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द रेलवे ट्रैक का सुधार करते हुए यातायात को बहाल किया जा सके। ट्रेनें प्रभावित वही, बिलासपुर बीना रेलखंड के बंद होने से मुड़वारा से बिलासपुर शहडोल की ओर जाने वाली यात्री ट्रेनें और मालगाड़ी प्रभावित हैं। जिनको अलग-अलग स्टेशनों पर रोका गया है।  

कैंसर, दृष्टिबाधा और असफलताएं भी नहीं रोक पाईं कदम, संजय दहरिया ने तीसरे प्रयास में क्रैक की UPSC

नई दिल्ली. जुनून, लगन और हार न मानने की जिद। इन सबका जीता जागता उदाहरण हैं संजय दहरिया। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के संजय दहरिया ने छह साल तक कैंसर से जूझने और तीन नौकरियां छोड़ने के बाद अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की है। बेलटुकरी के एक किसान के 38 साल के इस पुत्र ने अपने परिवार और गांव के लोगों को अपार गर्व और खुशी दी है। दहरिया की शैक्षणिक यात्रा एक स्थानीय सरकारी स्कूल से शुरू हुई। कक्षा 5 में जवाहर नवोदय विद्यालय, माना (रायपुर) में चयन होने के बाद इसमें एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। दहरिया के लिए सिविल सेवाओं तक का सफर पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों ही दृष्टि से चुनौतियों से भरा था। पश्चिम बंगाल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 2009 से 2011 तक काम करने के बाद उन्होंने उच्च लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इस्तीफा दे दिया। हालांकि, 2012 में उन्हें लार ग्रंथियों के कैंसर का पता चला, जिसके कारण छह साल तक उनका कठिन इलाज चला। दृष्टिबाधित होने के बावजूद दहरिया ने हार नहीं मानी और सिविल सेवाओं में अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखा। उन्होंने रायपुर के एक बैंक और महासमुंद डाकघर में काम करते हुए अपने करियर को आगे बढ़ाया। उन्होंने 2022 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में भाग लेना शुरू किया और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर 2025 में तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। दहरिया ने अपनी सफलता का श्रेय बीमारी के दौरान अपने परिवार और मार्गदर्शकों के अटूट समर्थन को दिया। उन्होंने कहा कि मैं सिविल सेवाओं के माध्यम से देश की सेवा करने की आशा रखता हूं। चाहे मुझे आईएएस कैडर मिले या कोई अन्य सेवा, लोक सेवा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता दृढ़ रहेगी। महासमुंद के कलेक्टर विनय कुमार लांगेह और जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने दहरिया को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि की सराहना की, जो साहस और दृढ़ता का एक उदाहरण है।

पैतृक गांव में कप्तान शुभमन गिल ने दादा-दादी के साथ बिताया समय

फाजिल्का. भारतीय वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल ने अपने पैतृक गांव जैमलवाला पहुंचने की तस्वीरों को अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर सांझा किया है। मिली जानकारी के अनुसार वह बीते दिन अपने दादा-दादी के पास गए थे। सबसे पहले उन्होंने अपने दादा-दादी के साथ समय बिताया और परिवार के साथ कई भावुक पल साझा किए। परिवार के बुजुर्गों के साथ मुलाकात के बाद उन्होंने सीधे गांव के खेल मैदान का रुख किया, जहां क्रिकेट सीख रहे नन्हे खिलाड़ी बेसब्री से उनका इंतजार कर रहे थे। मैदान में पहुंचते ही शुभमन गिल ने बच्चों के साथ पूरी सहजता से बातचीत शुरू की। उन्होंने खिलाड़ियों की प्रैक्टिस को ध्यान से देखा और उनके खेल में आ रही कमियों की ओर इशारा करते हुए तुरंत सुधार के सुझाव दिए। इस दौरान उनके साथ उनके दादा दीदार सिंह भी मौजूद रहे, जिन्होंने बच्चों को शुभमन के शुरुआती संघर्ष और मेहनत के किस्से भी सुनाए। नन्हें युवाओं को दिए बैटिंग टिप्स क्रिकेट के प्रति बच्चों का उत्साह देखकर शुभमन गिल भी काफी खुश नजर आए। उन्होंने खिलाड़ियों को बैटिंग तकनीक, संतुलन, फुटवर्क और शॉट चयन के बारे में विस्तार से समझाया। किसी खिलाड़ी को उन्होंने फ्रंट-फुट मूवमेंट सही करने की सलाह दी, तो किसी को बैट का फेस सही समय पर खोलने और सीधा खेलने के बारे में बताया। सिर्फ सलाह देने तक ही सीमित न रहते हुए शुभमन खुद भी नेट पर उतर गए और बल्लेबाजी करके बच्चों को सही तकनीक का उदाहरण दिया। जब गेंदबाजों ने तेज गेंदबाजी की तो उन्होंने उसी गति के अनुसार सही शॉट चयन दिखाया, जिससे युवा खिलाड़ियों को सीखने का अच्छा अवसर मिला। युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए दी खेल सामग्री इस दौरान शुभमन गिल ने गांव के खिलाड़ियों को क्रिकेट किट, ग्लव्स और अन्य जरूरी खेल सामग्री भी उपलब्ध करवाई। इससे बच्चों में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिला। कई खिलाड़ियों ने कहा कि टीम इंडिया के कप्तान से सीधे सीखना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। शुभमन गिल के पिता लखविंदर सिंह ने बताया कि बचपन से ही शुभमन का क्रिकेट के प्रति समर्पण अलग था। वह घंटों मैदान में अकेले अभ्यास करते रहते थे। गांव के खुले मैदानों में की गई वही मेहनत आगे चलकर उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने की मजबूत नींव बनी। गांव के बच्चों को संबोधित करते हुए शुभमन गिल ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास ही खिलाड़ी को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि अगर वे ईमानदारी से मेहनत करते रहें तो कोई भी सपना दूर नहीं रहता।

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का समर्थन करेगी TMC

नई दिल्ली. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अब ममता बनर्जी की टीएमसी भी सहमत हो गई है। सूत्रों की मानें तो टीएमसी इस अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष का साथ देने को तैयार है। इससे पहले पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का साथ देने से इनकार कर दिया था। सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया गया लोकसभा ने ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने से संबंधित प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी सदस्यों के एक नोटिस को सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया है। पीठासीन सभापति द्वारा बुलाए जाने पर सदन के 50 सदस्यों को खड़ा होना होगा और फिर नोटिस स्वीकृत माना जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होगा। यदि 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता है। प्रस्ताव होगा पराजित? आगामी सोमवार के लिए तय एजेंडा पेपर के अनुसार, यह प्रस्ताव ही दिन के कामकाज के रूप में सूचीबद्ध एकमात्र विषय है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को इस मुद्दे पर विचार के समय सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। सदन में संख्या बल सरकार के पक्ष में काफी अधिक है, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रस्ताव पराजित हो जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने हाल ही में "पीटीआई-भाषा" को बताया था कि यह प्रस्ताव 9 मार्च को सदन के समक्ष आएगा । नोटिस तीन कांग्रेस सदस्यों मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि द्वारा पेश किया जाएगा। प्रस्तावित प्रस्ताव में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं देने और "विपक्ष की महिला सांसदों के खिलाफ अनुचित आरोप लगाने" के लिए अध्यक्ष के आचरण पर सवाल उठाया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि लोक महत्व के मुद्दे उठाने पर आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ की गई "अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियों" पर उन्हें नहीं टोका गया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि विपक्ष को लगता है कि बिरला अब सदन के सभी पक्षों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक निष्पक्षता नहीं बरत रहे हैं। उनके पक्षपातपूर्ण रवैये से सदस्यों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है और ऐसी व्यवस्थाएं दी जा रही हैं जो इन अधिकारों को कमजोर करते हैं। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि बिरला "सभी विवादास्पद मामलों में खुले तौर पर सत्तारूढ़ दल का पक्ष लेते हैं" और यह सब सदन के सुचारु संचालन तथा जनता की चिंताओं और शिकायतों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए गंभीर खतरा है। इसलिए उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। संविधान के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष नोटिस पर विचार किए जाने के दौरान सदन में उपस्थित रह सकते हैं। वह प्रस्ताव पर अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं, लेकिन जब इस विषय पर चर्चा होगी तब वे कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। इस दौरान सदन में उनके बैठने को लेकर हालांकि नियम स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन वे संभवतः सत्तापक्ष की प्रमुख पंक्तियों में बैठ सकते हैं।

इस्लामिक नाटो बनाकर ईरान पर हमला करने अचानक सऊदी पहुंचे मुनीर

तेहरान. मध्य पूर्व में लगातार बदल रहे हालात के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान से मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में सऊदी अरब की अरामको तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ है। इसके अलावा, अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के मारे जाने के बाद तेहरान ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में कड़ी जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका पैदा हो गई है। सऊदी रक्षा मंत्री ने 'एक्स' पर असीम मुनीर के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए इस बैठक की जानकारी दी। उन्होंने लिखा- पाकिस्तान के सेना प्रमुख और रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। हमने किंगडम पर ईरानी हमलों और हमारे 'संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते' के ढांचे के भीतर उन्हें रोकने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की। हमने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करती हैं और उम्मीद जताई कि ईरानी पक्ष समझदारी दिखाएगा और किसी भी गलत कदम से बचेगा। रणनीतिक महत्व और 'इस्लामिक नाटो' की सुगबुगाहट इस बैठक को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ महीने पहले तुर्की ने परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ मिलकर त्रिकोणीय 'इस्लामिक नाटो' जैसा रक्षा गठबंधन बनाने की कोशिश की थी। इसका उद्देश्य अशांत मध्य पूर्व और उसके बाहर सुरक्षा समीकरणों को फिर से आकार देना है। पाकिस्तान का समर्थन हाल ही में जब सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी पर ईरानी हमले हुए, तो पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रियाद और अन्य खाड़ी देशों के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त की थी। ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया केवल 'मौखिक निंदा' तक सीमित रहेगी? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने '2025 रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए हैं। जिसके तहत 'एक देश पर हमला मतलब दोनों देशों पर हमला' माना जाएगा। नाटो के 'अनुच्छेद 5' जैसा क्लॉज इस समझौते में नाटो के 'आर्टिकल 5' के समान एक प्रावधान है, जिसमें कहा गया है कि किसी एक सदस्य के खिलाफ आक्रामकता को सभी पर हमला माना जाएगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के हवाले से सूत्रों ने बताया है कि इस रक्षा व्यवस्था में तुर्की को शामिल करने पर बातचीत अंतिम चरण में है। यह संभावित विस्तार दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बढ़ते साझा रणनीतिक हितों को दर्शाता है। सैन्य हस्तक्षेप या कूटनीति: क्या करेगा पाकिस्तान? भले ही इस समझौते में एक पर हमला, सब पर हमला जैसी बात कही गई हो, लेकिन इसके मुख्य प्रावधान पारंपरिक सैन्य सहयोग जैसे- संयुक्त सैन्य अभ्यास, खुफिया जानकारी साझा करना और ड्रोन तकनीक पर ही केंद्रित हैं; इसमें कोई परमाणु प्रतिबद्धता शामिल नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत में पूर्ण एकजुटता तो दिखाई है, लेकिन सैन्य तैनाती के बजाय शांति प्रयासों का समर्थन किया है।जानकारों का मानना है कि अपनी सेना भेजने से पाकिस्तान एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में फंस सकता है, जिससे उसकी पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और आतंरिक सुरक्षा स्थिति और बिगड़ जाएगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस्लामाबाद अपनी सेना भेजने के बजाय सऊदी अरब का समर्थन केवल कूटनीति, रसद और अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति देने तक ही सीमित रखेगा।