samacharsecretary.com

US-South Korea सैन्य अभ्यास पर उत्तर कोरिया की चेतावनी, किम जोंग-उन की बहन ने कहा—परिणाम होंगे खतरनाक

 उत्तर कोरिया कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। उत्तर कोरिया के सनकी किंग किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को चुनौती देने वाला कोई भी कदम “भयानक परिणाम” ला सकता है। यह बयान उस समय आया जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने सोमवार से 11 दिन तक चलने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास Freedom Shield की शुरुआत की है।  इस अभ्यास में हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं और इसका उद्देश्य बदलते युद्ध परिदृश्यों के बीच दोनों देशों की संयुक्त सैन्य क्षमता का परीक्षण करना है।किम यो जोंग ने बिना सीधे ईरान का नाम लिए कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं और वैश्विक सुरक्षा ढांचा तेजी से कमजोर हो रहा है, अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया बाहरी खतरों के खिलाफ अपनी सैन्य शक्ति और युद्ध निरोधक क्षमता को लगातार मजबूत करता रहेगा। किम यो जोंग ने उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि देश अपने दुश्मनों को बार-बार अपनी “घातक युद्ध निरोधक क्षमता” का एहसास कराता रहेगा। प्योंगयांग लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संभावित हमले की तैयारी बताता रहा है और अक्सर इन्हें अपने हथियार परीक्षणों को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल करता है। हालांकि अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि यह अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य केवल संभावित खतरों के खिलाफ संयुक्त तैयारी को मजबूत करना है। aइसी अभ्यास के साथ Warrior Shield नामक फील्ड-ट्रेनिंग कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की भी आलोचना की थी और इसे “फर्जी शांति के बहाने किया गया अवैध आक्रामक कृत्य” बताया था। विश्लेषकों के अनुसार उत्तर कोरिया और ईरान उन कुछ देशों में शामिल हैं जिन्होंने यूक्रेन पर रूसी हमले का समर्थन किया है और दोनों पर रूस को सैन्य उपकरण देने के आरोप भी लगते रहे हैं।

राजस्थान में सर्दियों के पीक टूरिस्ट सीजन में दौड़ेंगी ‘डबल डेकर’ बसें

जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के तीन बड़े शहरों की सार्वजनिक परिवहन में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। दरअसल, सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (JCTSL) ने 50 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। खास बात यह है कि केंद्र की 'पीएम ई-बस सेवा' से इतर, इन डबल डेकर बसों का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। किन शहरों को कितनी बसें मिलेंगी? योजना के अनुसार, कुल 50 बसों में से सर्वाधिक बसें इस तरह से अलग-अलग शहरों के हिस्से में आएंगी: जयपुर: 30 डबल डेकर बसें (शहर के प्रमुख मार्गों और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिए)। जोधपुर: 10 डबल डेकर बसें (पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए)। उदयपुर: 10 डबल डेकर बसें (झीलों की नगरी के खूबसूरत रास्तों के अनुकूल)। JCTSL के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह के अनुसार, विभाग का लक्ष्य है कि दीपावली (2026) के आसपास इन बसों की पहली खेप मिल जाए ताकि दिसंबर की सर्दियों वाले पीक टूरिस्ट सीजन से पहले इन्हें सड़कों पर उतारा जा सके। पर्यटन और कनेक्टिविटी पर फोकस इन डबल डेकर बसों का मुख्य उद्देश्य केवल परिवहन नहीं, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देना भी है। अधिकारियों के मुताबिक, इन बसों के रूट इस तरह तय किए जाएंगे कि वे: शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों (जैसे आमेर किला, मेहरानगढ़, सिटी पैलेस) को जोड़ें। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और मुख्य बस स्टैंडों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करें। यात्रियों को शहर का 'पैनोरमिक व्यू' (Panoramic View) प्रदान करें, जो विशेषकर विदेशी और घरेलू सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। रूट चयन की चुनौतियां, होगा सर्वे जयपुर के कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (CMP) के तहत 25 बस कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। हालांकि, डबल डेकर बसें चलाने से पहले प्रशासन पुराने फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज (RoB), अंडरपास और हाइट बैरियर की जांच कर रहा है। बस की ऊंचाई को देखते हुए उन रूट्स को प्राथमिकता दी जाएगी जहाँ मार्ग में बाधाएं कम हों। पर्यावरण के अनुकूल 'ग्रीन ट्रांसपोर्ट' ये बसें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होंगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य होगा। राजस्थान सरकार का यह कदम 'नेट जीरो' लक्ष्य की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे शहरों में शोर और वायु प्रदूषण कम होगा, जिससे निवासियों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।

छत्तीसगढ़ में पांच वर्षों में लापता 400 से अधिक बच्चों का कोई सुराग नहीं

रायपुर. छत्तीसगढ़ में बच्चों के लापता होने के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। पांच वर्षों के दौरान प्रदेश से 400 से अधिक बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि बच्चों के गायब होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर है। चिंताजनक बात यह है कि पांच वर्ष से प्रदेश लगातार देश के टाप-10 राज्यों की सूची में बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार इस सूची में पश्चिम बंगाल पहले और मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है। इन जिलों में दर्ज की गई ज्यादा घटनाएं वहीं छत्तीसगढ़ में कुछ जिले ऐसे हैं जहां से बच्चों के गायब होने की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गई हैं। प्रदेश में जांजगीर-चांपा जिला बच्चों के लापता होने के मामलों में सबसे आगे है। इसके बाद रायपुर, बिलासपुर, सक्ती, दुर्ग और बलौदाबाजार जिले का नाम सामने आया है। इन जिलों में पुलिस और प्रशासन बच्चों की तलाश के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। 669 बच्चों को खोजकर परिवारों तक पहुंचाया ऑपरेशन मुस्कान के तहत अब तक प्रदेशभर से 559 बच्चों को परिवारों तक पहुंचाया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा जांजगीर-चांपा जिले के बच्चे शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में औद्योगिक गतिविधियां और शहरीकरण बढ़ रहा है। यहां बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार आते-जाते रहते हैं। कई बार उनके बच्चे भटक जाते हैं और दूसरे शहरों तक पहुंच जाते हैं। हालांकि बच्चों के गायब होने के पीछे एक बड़ा कारण मानव तस्करी भी माना जा रहा है। क्या कहना है पुलिस का? पुलिस का कहना है कि कुछ संगठित गिरोह बच्चों को बड़े शहरों में ज्यादा पैसों का लालच देकर या अन्य प्रलोभन देकर अपने साथ ले जाते हैं। बाद में उन्हें दूसरे शहरों में मजदूरी या छोटे-मोटे कामों में लगा दिया जाता है।

सीएम नीतीश की समृद्धि यात्रा में सम्राट चौधरी बोले- ‘बिहार में चुन-चुनकर रोजगार देना है’

सुपौल. ‘बिहार में चुन-चुनकर रोजगार देना है. नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में सबकुछ करना है.’ यह बात सीएम नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कही. सीएम नीतीश सुपौल जिले में पहुंचे, जहां कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. यहां मंच से लोगों को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा, जो लोग पलायन करते हैं, उनको पलायन नहीं करने देना है. इसके साथ ही सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर कहा, मैं एनडीए की तरफ से आश्वस्त करना चाहता हूं कि नीतीश कुमार जी कहीं नहीं जा रहे हैं. नीतीश कुमार जी हमारे बीच में हम लोगों को मार्गदर्शन देंगे और बिहार फिर से श्रेष्ठ बनने का काम करेगा. बिहार पूरी तरह से सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करता रहेगा. इस तरह से सम्राट चौधरी ने बिहार में ही हर बिहारी को रोजगार देने की बात कही. बिहार में लाई जाएगी इंसेंटिव पॉलिसी बिहार में उद्योग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके जरिए ही लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध हो सकेगा. सोमवार को सम्राट चौधरी ने बिहार में इंसेंटिव पॉलिसी लाने की बात कही थी. उन्होंने कहा था, इंसेंटिव पॉलिसी 2026 के माध्यम से राज्य में उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा. जो लोग मजदूरी करने के लिए बाहर जाते हैं, उन्हें पांच साल के अंदर चिह्नित कर बिहार में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा. यह सरकार की प्राथमिकता है. बिहार में गन्ना उद्योग को दिया बढ़ावा सम्राट चौधरी ने गन्ना उद्योग को बढ़ावा देने पर जोर दिया. सम्राट चौधरी ने कृषि वैज्ञानिकों और गन्ना किसानों से अपील की कि नई तकनीक के साथ पुरानी पद्धति की ओर लौटना है. तभी हम अच्छी खेती कर पायेंगे. खेती की पुरानी पद्धति में कैसे लौटे, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए. सरकार बंद मिलों को चालू कराने के साथ ही नई चीनी मिलें लगाने की दिशा में कार्य कर रही है. आज बिहार में 10 चीनी मिलें चालू हैं.

MP में साइबर पुलिस ने 33 जिलों में एक ही चेहरे पर सक्रिय 36 हजार सिम पकडे

इंदौर/भोपाल. मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिमकार्ड जारी करने के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। साइबर पुलिस ने एक ही फोटो का इस्तेमाल कर अलग-अलग पहचान पत्रों के सहारे सिम एक्टिवेट कराने वाले गिरोह के खिलाफ ‘ऑपरेशन फेस’ शुरू किया है। दूरसंचार विभाग से मिले डेटा के विश्लेषण में सामने आया है कि प्रदेश के 33 जिलों में 135 ऐसे चेहरे हैं, जिनके नाम और फोटो के आधार पर 36,668 सिमकार्ड सक्रिय किए गए हैं। पुलिस अब इन मामलों की गहन जांच कर आरोपी पीओएस एजेंटों और गिरोह से जुड़े लोगों की धरपकड़ की तैयारी कर रही है। 33 जिलों में फैला फर्जीवाड़े का नेटवर्क     साइबर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार यह घोटाला केवल राजधानी भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई जिलों में संगठित रूप से चल रहा था। जांच में पता चला है कि 33 जिलों में ऐसे 135 चेहरे चिन्हित किए गए हैं, जिनके आधार पर कम से कम 50 या उससे अधिक सिमकार्ड जारी किए गए हैं।     इन सभी मामलों में एक ही व्यक्ति की फोटो का उपयोग कर अलग-अलग पहचान पत्रों के जरिए बड़ी संख्या में सिमकार्ड सक्रिय किए गए। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रदेश में एक बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय था। गुना, सतना और मुरैना में सबसे ज्यादा मामले     दूरसंचार विभाग से प्राप्त डेटा के अनुसार सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा गुना जिले में सामने आया है। यहां एक ही फोटो के आधार पर 3,760 सिमकार्ड सक्रिय पाए गए हैं।     इसी तरह सतना जिले में 2,870 और मुरैना में 2,714 सिमकार्ड एक ही तस्वीर के आधार पर जारी किए गए हैं। इसके अलावा बैतूल, भोपाल और इंदौर जैसे बड़े जिलों में भी इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। नियमों को दरकिनार कर जारी किए सिम नियमों के अनुसार किसी भी व्यक्ति के नाम और पहचान पत्र के आधार पर अधिकतम नौ सिमकार्ड ही जारी किए जा सकते हैं। लेकिन पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) एजेंटों ने इस नियम की अनदेखी करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार कर बड़ी संख्या में सिमकार्ड एक्टिवेट कर दिए। इसके लिए पहचान पत्रों और फोटो में हेरफेर कर नई पहचान तैयार की गई, जिससे एक ही व्यक्ति के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कई बार किया जा सका। पांच सप्ताह तक चलेगा अभियान     साइबर पुलिस ने इस फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ ‘ऑपरेशन फेस’ शुरू किया है। यह विशेष अभियान पांच सप्ताह तक चलाया जाएगा। इस दौरान पुलिस संदिग्ध सिमकार्ड और उनसे जुड़े लोगों की पहचान कर कार्रवाई करेगी।     साइबर पुलिस मुख्यालय के आईजी शियास मजीद के अनुसार जांच को तेज कर ऐसे पीओएस एजेंटों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन कर बड़ी संख्या में सिमकार्ड जारी किए। दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     पुलिस का मानना है कि इन फर्जी सिमकार्ड का इस्तेमाल साइबर अपराध, धोखाधड़ी और अन्य अवैध गतिविधियों में किया जा सकता है, इसलिए इस पूरे नेटवर्क को खत्म करना बेहद जरूरी है।

सुपौल में सीएम नीतीश बोले- ‘लालू-राबड़ी शासनकाल में शाम के बाद बाहर नहीं निकलते थे लोग’

सुपौल. मंगलवार से सीएम नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा की शुरुआत हुई. सुपौल जिले में लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अगले 5 साल के विजन को बताया. सीएम नीतीश ने कहा कि 2025 से 2030 के लिए काम शुरू हो गया है. अगले 5 सालों में उद्योग को बढ़ावा, 1 करोड़ युवाओं को रोजगार और महिलाओं को 2-2 लाख रुपए भी दिए जायेंगे. 7 प्वाइंट में बताया पूरा विजन दोगुना रोजगार, दोगुनी आय- प्रति व्यक्ति औसत आय को दोगुना किया जाएगा. महिलाओं को दो-दो लाख रुपए और 1 करोड़ युवाओं को नौकरी दिया जाएगा.     समृद्ध उद्योग, सशक्त बिहार- अगले 5 सालों में उद्योग लगाने पर पूरा जोर दिया जाएगा. सभी जिलों में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की जा रही है. पुरानी बंद चीनी मिलों को चालू किया जाएगा.     कृषि में प्रगति, प्रदेश की समृद्धि- इसके लिए पहले से ही काम किया गया है. इसमें और तेजी लाने के लिए अब नए बिहार विपणन प्रोत्साहक निगम की स्थापना की गई है. मखाना के उत्पादन को और बढ़ावा दिया जा रहा है. डेयरी और मछली पालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है.     उन्नत शिक्षा, उज्जवल भविष्य- राज्य में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर प्रखंड में आदर्श विद्यालय और डिग्री कॉलेज खोले जा रहे हैं. एक नए एजुकेशन सिटी का निर्माण कराया जा रहा है.     सुलभ स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन- स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के लिए जिला और प्रखंड के अस्पतालों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र बनाया जा रहा है. राज्य में प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों की स्थापना के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा. सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति लाई जाएगी.     मजबूत आधार, आधुनिक विस्तार- आधारभूत संरचनाओं को बेहतर किया जाएगा. शहरों का विकास किया जाएगा. 5 नए एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा. ग्रामीण सड़कों को टू लेन बनाया जाएगा. इच्छुक लोगों के घर की छतों पर सोलर पैनल लगाए जायेंगे. टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा.     सबका सम्मान और जीवन आसान- आधुनिक तकनीक और अच्छे प्रशासन के माध्यम से राज्य के लोगों के जीवन को आसान बनाया जाएगा. लालू-राबड़ी शासनकाल पर भी बोले लोगों को संबोधित करते हुए लालू-राबड़ी शासनकाल पर सीएम नीतीश कुमार ने कहा, 2005 के पहले की जो सरकार बनी थी, लोग शाम के बाद घर से बाहर नहीं निकलते थे. शाम से ही घर में बंद हो जाते थे. पहले समाज में कितना विवाद होता था और हिंदू मुसलमान का झगड़ा भी होता था. पढ़ाई का भी हाल बुरा था. बहुत कम बच्चे ही पढ़ पाते थे. पहले इलाज का भी इंतजाम नहीं था और सड़कें भी बहुत कम थी. हम लोगों ने बिहार में सारा काम किया. बिहार में किसी प्रकार के डर-भय का वातावरण नहीं है.

मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ीं कीमतें: प्लास्टिक ग्रेन्यूल 150 रुपये किलो, पंजाब के पैकेजिंग कारोबार पर मार

लुधियाना/जालंधर खाड़ी देशों से प्लास्टिक दानों की सप्लाई धीमी होने से कीमतें बढ़ी हैं। शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क ले रही हैं और लंबा रूट अपना रही हैं, जिससे लागत बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने पंजाब के प्लास्टिक उद्योग का गणित बिगाड़ दिया है। पॉलीप्रोपाइलीन (पीपी) बीते तीन महीने में 100 से 150 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। प्लास्टिक दानों की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस उछाल से उत्पादन लागत बढ़ने पर उद्यमी नए ऑर्डर लेने से कतरा रहे हैं। समुद्री आपूर्ति शृंखला पर युद्ध के असर से पेट्रोकेमिकल उत्पाद महंगे हुए हैं। लुधियाना में पीपी के दाम 50 प्रतिशत बढ़े हैं, जबकि जालंधर में पैकेजिंग उत्पादों (बोतलें, डिब्बे) की कीमतों में 20 प्रतिशत तक उछाल आया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में तनाव से शिपिंग मार्ग प्रभावित हैं। जालंधर के कारोबारी रवि कपूर ने बताया कि खाड़ी देशों से प्लास्टिक दानों की सप्लाई धीमी होने से कीमतें बढ़ी हैं। शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क ले रही हैं और लंबा रूट अपना रही हैं, जिससे लागत बढ़ रही है। प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. मनकर गर्ग के अनुसार, लंबी अवधि के अनुबंध पुरानी दरों पर पूरे करना घाटे का सौदा बन गया है। मौजूदा ऊंचे दामों पर भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही और कई इकाइयों के पास कुछ दिनों का ही स्टॉक बचा है। पंजाब भर में पाइप, पैकेजिंग सामग्री और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली हजारों एमएसएमई इकाइयां दबाव में हैं। विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध जारी रहने पर पेट्रोकेमिकल उत्पादों के दामों में 20 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी हो सकती है। उद्योग जगत ने सरकार से एमएसएमई को सस्ते कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, अन्यथा उत्पादन और रोजगार संकट गहरा सकता है। पैकेजिंग उद्योग पर बढ़ा संकट पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से खाड़ी क्षेत्र के शिपिंग मार्ग प्रभावित हुए हैं। कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की आपूर्ति बाधित होने से नैफ्था और प्लास्टिक दाने महंगे हुए हैं। बोतलें, डिब्बे और कंटेनर की कीमतों में उछाल आया है। माल की आवाजाही धीमी होने और अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क से छोटे उद्यमियों के लिए पुराने ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो गया है।  

छत्तीसगढ़ में तीन सालों में हुई 9 बाघ और 38 हाथियों की मौत

रायपुर. छत्तीसगढ़ में बीते तीन सालों में 9 बाघ और 38 हाथियों की मृत्यु हुई है. इनके अलावा 562 वन्यजीवों की अस्वाभाविक मृत्यु हुई है. यह जानकारी वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश द्वारा बाघ और अन्य जानवरों की मौत की मांगी गई जानकारी पर दी. छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के दौरान सातवें दिन की कार्यवाही के दौरान वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश द्वारा मांगी गई जानकारी पर प्रदेश में बाघ, हाथी और अन्य वन्य जीवों की मौत को लेकर पूछे गए सवाल के यह जानकारी दी. मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि बीते तीन सालों में छत्तीसगढ़ में 38 हाथियों की मौत हुई है. वर्ष 2023 में बलरामपुर में एक और धरमजयगढ़ में एक-एक हाथी की मौत हुई. वर्ष 2024 में 18 हाथी की मौत हुई, इनमें से रायगढ़ में चार, कोरबा में एक, बलरामपुर में तीन और उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक, सूरजपुर में तीन, धमतरी में एक, बिलासपुर में एक, धरमजयगढ़ में तीन, सरगुजा एलीफेंट रिजर्व में एक हाथी की मौत हुई है. वर्ष 2025 में 16 हाथियों की मौत हुई, इनमें से रायगढ़ वन मंडल में 7, धरमजयगढ़ में 4, कोरबा में 2, बलरामपुर में एक, सूरजपुर में एक, कटघोरा में एक हाथी की मौत हुई है. वहीं वर्ष 2026 में अब तक दो हाथियों की मौत हुई है, इनमें से एक उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक और रायगढ़ वन मंडल में एक हाथी की मौत हुई है. बीते दो सालों में छत्तीसगढ़ में 9 बाघों की मौत हुई है, इनमें से वर्ष 2024 में सारंगढ़-बिलाईगढ़ वन मंडल और कोरिया में एक-एक बाघ, वर्ष 2025 में अचानकमार टाइगर रिजर्व में एक, नंदनवन वन सफारी में दो, अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व में दो, सूरजपुर में एक बाघ मिलाकर कुल 6 बाघों की मौत हुई थी. वर्ष 2026 में अचानकमार टाइगर रिजर्व में एक बाघ की मौत हुई है.

MP सरकार फिर लेगी 5800 करोड़ का कर्ज

भोपाल. वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लिया जाएगा। होली के पहले सरकार ने 6,300 करोड़़ रुपये का कर्ज लिया था। इस प्रकार देखा जाए तो प्रदेश के ऊपर 5,66,000 करोड़ रुपए के करीब कर्ज हो जाएगा। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 मार्च यानी मंगलवार को तीन किस्तों में 1,900, 1,700 और 2,200 करोड़ रुपए का कर्ज लिया जाएगा। यह राशि विकास परियोजना और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ली जा रही है। इसका उपयोग पूंजीगत कार्यों यानी अधोसंरचना विकास के कामों में ही किया जाएगा। इसके पहले 6300 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। नए कर्ज को मिला लिया जाए तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल मिलाकर कर्ज की राशि 85,000 करोड़ रुपये हो जाएगी। जीतू पटवारी ने लगाया प्रदेश को कर्ज में डुबोने का आरोप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर प्रदेश को कर्ज में डुबोने के आरोप लगाए हैं। वहीं, सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि जो कर्ज लिया जा रहा है वह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रविधान के अनुसार है।

दुबई एयरपोर्ट पर खतरे की घंटी: ईरान के हमले के बीच सायरन से दहशत

दुबई पश्चिम एशिया में तनाव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसकी लपटें अब दुबई तक पहुंच गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दुबई के आसमान में मिसाइलें और एयरपोर्ट से धुआं उठता देखा गया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने न केवल खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और पर्यटन के प्रमुख केंद्र दुबई में भी डर का माहौल पैदा कर दिया है। दुबई एयरपोर्ट पर हमले का असर ईरान की जवाबी कार्रवाई के दौरान दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) को निशाना बनाया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट के कॉनकोर्स एरिया में मिसाइल या ड्रोन के गिरने से मामूली क्षति हुई है। घटना के तुरंत बाद वहां धुआं उठते देखा गया, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, दुबई मीडिया ऑफिस ने स्पष्ट किया है कि स्थिति को तुरंत काबू में कर लिया गया। इस हमले में चार लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।  बुर्ज अल अरब के पास दुर्घटना दुबई के आसमान में सक्रिय डिफेंस सिस्टम ने एक संदिग्ध ड्रोन को समय रहते इंटरसेप्ट कर लिया। हालांकि, नष्ट किए गए ड्रोन का जलता हुआ मलबा विश्व प्रसिद्ध 'बुर्ज अल अरब' होटल की बाहरी दीवार पर जा गिरा। इससे होटल के एक हिस्से में हल्की आग लग गई, जिसे दमकल विभाग ने तुरंत बुझा दिया। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में मलबे का गिरना सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा गया है। सुरक्षा एजेंसियां और हाई अलर्ट इस हमले के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं। पूरे शहर और संवेदनशील ठिकानों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट संचालन को जल्द से जल्द सामान्य करने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका ज्यादा असर न पड़े। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। फिलहाल, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।