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बांस का पौधा लगाने की सही दिशा क्या है? गलत दिशा में लगाया तो फायदे की जगह बढ़ सकती हैं समस्याएं

आजकल हम अपने घरों और ऑफिसों को सुंदर बनाने के लिए तरह-तरह के शो-प्लांट्स लगाते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आपके ड्रॉइंग रूम के कोने में रखा वह प्यारा सा बांस का पौधा केवल हरियाली नहीं, बल्कि आपकी तरक्की और सुख-शांति का एक शक्तिशाली स्रोत हो सकता है? वास्तु शास्त्र में इसे नकारात्मक ऊर्जा को सोखने और घर में खुशहाली लाने वाला एक जादुई फिल्टर माना जाता है। क्या होनी चाहिए सही दिशा? वास्तु के अनुसार, बांस के पौधे को रखने की सबसे उत्तम दिशा पूर्व (East) मानी गई है। यह दिशा नई शुरुआत और परिवार में प्रेम का प्रतिनिधित्व करती है। अगर आप अपने करियर या व्यापार में ग्रोथ चाहते हैं, तो इसे उत्तर दिशा (North) में रखना बेहद लाभकारी होता है। वहीं, आर्थिक तंगी दूर करने के लिए दक्षिण-पूर्व दिशामें बांस का पौधा लगाना आपके जीवन में धन के प्रवाह को बढ़ा सकता है। रिश्तों में मिठास और शांति अगर घर में छोटी-छोटी बातों पर तनाव रहता है, तो बांस का पौधा आपके लिए वरदान साबित हो सकता है। इसे घर के लिविंग रूम या ड्रॉइंग रूम में रखने से परिवार के सदस्यों के बीच सौहार्द और प्रेम बना रहता है। इसकी मौजूदगी मात्र से वातावरण शांत और संतुलित महसूस होने लगता है। भूलकर भी यहां न रखें इस पौधे को लेकर वास्तु शास्त्र कुछ सख्त चेतावनी भी देता है। बांस के पौधे को कभी भी बाथरूम या टॉयलेट के पास नहीं रखना चाहिए। साथ ही, इसे रसोईघर (Kitchen) में रखने से भी परहेज करना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि यहां इसका शुभ प्रभाव खत्म हो जाता है। यह पौधा हमेशा साफ-सुथरी जगह पर होना चाहिए। धूल-मिट्टी या गंदगी वाले स्थान पर रखने से इसके परिणाम नकारात्मक भी हो सकते हैं। सौभाग्य के लिए देखभाल जरूरी बांस के पौधे की जड़ों को बांधने के लिए लाल रंग के धागे या रिबन का उपयोग करना इसके सौभाग्य को और बढ़ा देता है। इसके अलावा, इसके पानी को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए ताकि पौधा ताजा बना रहे। फेंगशुई के अनुसार, यह पौधा जितना स्वस्थ रहेगा, आपकी किस्मत का सितारा उतना ही चमकता रहेगा।  

अफीम की अवैध खेती पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कड़ा रुख

रायपुर  प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती का मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।  मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती न हो रही हो। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 15 दिवस के भीतर प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट और उनके जिले में अफीम की खेती नहीं किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया है।

गैस सिलेंडर बुकिंग में बड़ी दिक्कत, कॉल्स की बाढ़ से Indane का सिस्टम हुआ क्रैश

नई दिल्ली दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्ध और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से गैस सिलेंडर की कमी हो रही है। इसी वजह से अचानक गैस बुकिंग की कॉल्स में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। मनीकंट्रोल के मुताबिक, गैस बुकिंग के लिए आने वाली कॉल्स सामान्य दिनों की तुलना में 8 से 10 गुना तक बढ़ गईं, जिससे Indane का बुकिंग सिस्टम कुछ समय के लिए क्रैश हो गया। इसका असर यह हुआ कि कई यूजर्स फोन, ऐप या वेबसाइट के जरिए सिलेंडर बुक नहीं कर पाए और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ शहरों में तो लोग सीधे गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंच गए, जिससे वहां लंबी लाइनें भी लग गईं। वहीं रिसर्चर्स का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और गैस सप्लाई को लेकर बनी चिंता के कारण लोगों ने एक साथ सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया, जिससे सिस्टम पर अचानक ज्यादा दबाव पड़ गया। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर LPG बुकिंग सिस्टम क्यों क्रैश हुआ और इसका यूजर्स पर क्या असर पड़ सकता है। इसी वजह से कई जगह लोगों को IVRS नंबर या मिस्ड कॉल के जरिए सिलेंडर बुक करने में दिक्कत हुई। कुछ जगहों पर तो लोग सीधे गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंच गए, जिससे वहां लंबी लाइनें लग गईं। 8–10 गुना बढ़ी कॉल्स से सिस्टम पर पड़ा दबाव मनीकंट्रोल के अनुसार Indane के IVRS और मिस्ड कॉल नंबर पर बुकिंग के लिए अचानक कॉल्स की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई। सामान्य दिनों के मुकाबले कॉल्स लगभग 8 से 10 गुना ज्यादा आ गईं। कंपनी ने अपने डीलरों को भेजे एक message में बताया कि इतनी ज्यादा कॉल्स आने की वजह से पूरा सिस्टम भारी दबाव में आ गया और कई बार ग्राहकों को कनेक्ट होने में दिक्कत होने लगी। लोगों की हुई परेशानी सिस्टम में आई टेक्निकल दिक्कत की वजह से कई शहरों में लोग गैस सिलेंडर बुक नहीं कर पाए। कुछ जगहों पर मोबाइल ऐप और वेबसाइट भी ठीक से काम नहीं कर रही थीं। ऐसे में कई लोग सीधे गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंच गए, जिससे वहां लंबी लाइनें लग गईं और काफी भीड़ देखने को मिली। कई ग्राहकों ने शिकायत की कि उन्होंने कई बार कॉल करने की कोशिश की लेकिन बुकिंग नहीं हो सकी। सरकार ने बदला गैस बुकिंग का नियम सरकार ने घरेलू LPG सिलेंडर की बुकिंग को लेकर एक नया नियम भी लागू किया है। अब एक सिलेंडर बुक करने के बाद दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा। पहले यह समय 21 दिन था। सरकार का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया है ताकि लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक न करें और सभी यूजर्स को गैस मिल सके।  

आंगनबाड़ी केंद्रों में एक लाख 33 हजार से अधिक स्टेडियोमीटर का होगा वितरण

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बच्चों के स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार पोषण अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष ध्यान दे रही है । प्रदेश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के लिए 1 लाख 33 हजार से अधिक आधुनिक उपकरण स्टेडियोमीटर जल्द उपलब्ध कराए जाएंगे। इन उपकरणों की मदद से बच्चों की लंबाई की सटीक जानकारी प्राप्त हो रही है, जिससे उनके पोषण स्तर का सही आकलन करने में मदद मिलती है।  ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक उपकरण प्रदेश सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों पर ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए कई आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। वर्ष 2021 और 2022 में एक लाख 88 हजार से अधिक स्टेडियोमीटर उपकरणों की आपूर्ति की गई थी। स्टेडियोमीटर के माध्यम से 2 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों की ऊंचाई का सटीक आकलन किया जाता है। इस उपकरण की मदद से बच्चों के विकास की नियमित निगरानी संभव हो रही है और कुपोषण की पहचान समय रहते की जा रही है। सरकार का मानना है कि बचपन में स्वास्थ्य और पोषण की सही देखभाल ही एक मजबूत समाज की नींव रखती है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के लाखों बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए आंगनबाड़ी व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। तकनीक के सहारे कुपोषण पर प्रहार योगी सरकार ने कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई में तकनीक को महत्वपूर्ण हथियार बनाया है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के विकास की निगरानी के लिए आधुनिक ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग किया जा रहा है। इन उपकरणों के संचालन के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी और बाल विकास परियोजना अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इसके बाद उनके माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और मुख्य सेविकाओं को भी प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य का आकलन वैज्ञानिक तरीके से किया जा सके। इससे न केवल बच्चों की वृद्धि की सटीक जानकारी मिल रही है बल्कि समय रहते पोषण संबंधी आवश्यक कदम उठाने में भी मदद मिल रही है।

मल्टी-रोल लड़ाकू विमान से एयर चीफ मार्शल की सोलो उड़ान, भारतीय वायु सेना की शक्ति का संदेश

नई दिल्ली आज भारत की वायु सेना का सीमावर्ती क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन करने के लिए देखने को मिला। भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल एपी सिंह ने आज मिग-29 यूपीजी मल्टी-रोल लड़ाकू विमान को अकेले उड़ाया। एपी सिंह ने एक प्रमुख सीमावर्ती बेस से उड़ान भरी। विमान के लैंड करने का वीडियो भी सामने आया है।   अपनी यात्रा के बाद, एयर चीफ़ ने बेस पर भारतीय वायु सेना के  पूर्व सैनिकों से भी बातचीत की। इस दौरे में भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल तैयारी, लड़ाकू क्षमताओं और फ़ॉरवर्ड बेस पर मिशन की तैयारी पर ज़ोर दिया गया। मिकोयान MiG-29 सोवियत यूनियन का बनाया हुआ एक द्वी-इंजन लड़ाकू विमान है। भारतीय वायु सेना चार दशकों से इस्तमाल हो रहे अपने MiG-29 फ़्लीट को अपग्रेड करने का फ़ैसला किया था। सोवियत में बना यह विमान 1970 के दशक में बनाया गया था और 1980 के दशक में वायु सेना में शामिल किया गया था। इसे असल में अमेरिकन F-16 लड़ाकू विमान का मुकाबला करने के लिए बनाया गया था। MiG-29 के कई वेरिएंट हैं, जिनमें से कुछ का इस्तेमाल भारतीय नौसेना भी करती है। मिकोयान MiG-29 (अपग्रेड) चौथी जेनरेशन का सर्वश्रेष्ठता लड़ाकू विमान है। इस विमान को नई एवियोनिक्स, रडार और हवा ही हवा में रिफ्यूलिंग क्षमता के साथ अपग्रेड किया गया है। यह विमान जानलेवा है और हवा ही हवा, हवा से जमीन और सटीक गोला-बारूद दागने में सक्षम है।

यूपी को इको टूरिज्म हब बनाने की दिशा में उल्लेखनीय पहल, फिरोजाबाद और गाजीपुर में इको टूरिज्म गतिविधियों का होगा विकास

लखनऊ  यूपी इको-टूरिज्म विकास बोर्ड सीएम योगी की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश को इको-टूरिज्म का हब बनाने की दिशा में कई उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। इस दिशा में बोर्ड कम लोकप्रिय इको पर्यटन केंद्रों में भी अत्याधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास कर रहा है। इससे इन क्षेत्रों में एक ओर इको टूरिज्म की गतिविधियों की बढ़ोतरी होगी, साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के अतिरिक्त स्रोत भी मिलेंगे। इस क्रम में फिरोजाबाद का रपड़ी इको पर्यटन केंद्र और गाजीपुर में स्थित कामाख्या वन पार्क में पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, जो प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को नया अनुभव प्रदान करेगा। फिरोजाबाद के रपड़ी इको पार्क में कराए जा रहे हैं फेज-2 के विकास कार्य यूपी इको-टूरिज्म विकास बोर्ड फिरोजाबाद में स्थित रपड़ी इको पार्क में 5 करोड़ रुपये की लागत से फेज-2 के विकास कार्य करा रहा है। परियोजना के तहत पार्क में प्रवेश द्वार, इंटरप्रिटेशन सेंटर और टिकट काउंटर विकसित किया जा रहा है। पर्यटकों को रोमांचक और यादगार अनुभव देने के लिए वॉल क्लाइम्बिंग, वुडन डेक और सेल्फी प्वाइंट का विकास किया जा रहा है। साथ ही पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण के बीच भ्रमण का आनंद लेने के लिए नेचर ट्रेल का विकास किया जाएगा। वहीं पर्यटकों को अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पार्किंग, पेयजल और टॉयलेट ब्लॉक के साथ साइनेज भी लगाए जा रहे हैं। पर्यटकों के ठहरने और विश्राम के लिए गजेबो या गोल हट तथा स्विस टेंट की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। गाजीपुर के कामाख्या वन पार्क में बन रहा है बटरफ्लाई गार्डन, लैंडस्केप और चिल्ड्रेन पार्क गाजीपुर के कामाख्या वन पार्क में इको-टूरिज्म की सुविधाओं के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसके तहत प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करने के लिए यहां विशेष रूप से बटरफ्लाई गार्डन विकसित किया जा रहा है, जहां विभिन्न प्रजातियों की तितलियों को देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा लैंडस्केप पार्क, वाटर फाउंटेन, गजेबो या गोल हट के साथ बच्चों के लिए चिल्ड्रेन पार्क भी बनाया जाएगा। साथ ही कामाख्या वन पार्क में आकर्षक प्रवेश प्लाजा और इंटरप्रिटेशन सेंटर का भी निर्माण किया जाएगा, जो पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ वन पार्क की विशेषताओं से भी परिचित करवाएगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए पेयजल, पोल लाइट, बेंच और डस्टबिन भी लगाए जाएंगे। इन परियोजनाओं के विकास से फिरोजाबाद और गाजीपुर के वन पार्कों को नई पहचान मिलेगी, साथ ही प्रदेश में इको-टूरिज्म के विकास की यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ेगा।

रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2018 में स्थापित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से प्रदेश को रक्षा उत्पादन के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) द्वारा विकसित किए जा रहे इस कॉरिडोर के छह रणनीतिक नोड्स (कानपुर, झांसी, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट) में तेजी से औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रहीं हैं। नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, डिफेंस कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में अब तक ₹35,526 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत 2,040 हेक्टेयर भूमि में से 977.54 हेक्टेयर भूमि उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है। वर्तमान में रक्षा और संबद्ध विनिर्माण गतिविधियों के लिए 62 कंपनियों को भूमि आवंटित की गई है, जबकि लगभग 11 कंपनियों के लिए लीज डीड की प्रक्रिया प्रगति पर है। रक्षा उद्योग के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार डिफेंस कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में निवेश प्रस्तावों की बात करें तो कानपुर में ₹12,803 करोड़, झांसी में ₹11,738 करोड़, लखनऊ में ₹4,850 करोड़, अलीगढ़ में ₹4,490 करोड़, चित्रकूट में ₹880 करोड़ और आगरा में ₹607 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेशों से प्रदेश में रक्षा उद्योग के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार हो रहा है। नौ प्रमुख विनिर्माण इकाइयों ने शुरू किया उत्पादन कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में अब तक नौ प्रमुख विनिर्माण इकाइयों ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जो भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इनमें अदानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड द्वारा कानपुर में लगभग ₹1,500 करोड़ की लागत से स्थापित गोला-बारूद निर्माण संयंत्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो इस कॉरिडोर का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। अलीगढ़ नोड में अमिटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने लगभग ₹330 करोड़ के निवेश से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सैटेलाइट तकनीक से जुड़े उपकरणों का उत्पादन शुरू किया है। वहीं वेरीविन डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड और नित्या क्रिएशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने छोटे हथियारों और प्रिसिशन आर्म्स कंपोनेंट्स का निर्माण प्रारंभ कर दिया है। लखनऊ नोड बना रक्षा विनिर्माण का नया केंद्र लखनऊ नोड तेजी से रक्षा विनिर्माण का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां एरोलॉय टेक्नोलॉजीज ने लगभग ₹320 करोड़ के निवेश से टाइटेनियम कास्टिंग का उत्पादन शुरू किया है, जबकि ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने लगभग ₹300 करोड़ की लागत से ब्रह्मोस एनजी मिसाइल सिस्टम के निर्माण की दिशा में उत्पादन प्रारंभ किया है। इसके अलावा संकल्प सेफ्टी सॉल्यूशंस द्वारा रक्षा सुरक्षा उपकरणों और परिधानों का निर्माण भी शुरू किया गया है। वहीं, कानपुर नोड में ए.आर. पॉलिमर्स और आधुनिक मेटेरियल्स एंड साइंसेज जैसी कंपनियों ने क्रमशः बैलिस्टिक मेटेरियल्स और डिफेंस टेक्सटाइल्स का उत्पादन शुरू कर औद्योगिक गतिविधियों को नई गति दी है। आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में बढ़ रहा उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2018 में घोषित यह डिफेंस कॉरिडोर प्रदेश में प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और उद्योग अनुकूल नीतियों के माध्यम से तेजी से निवेश आकर्षित कर रहा है। योगी सरकार के प्रयासों से यह परियोजना केवल रक्षा विनिर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्योगों को भी वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने का काम कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आने वाले वर्षों में प्रदेश में रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और निर्यात उन्मुख औद्योगिक वृद्धि का प्रमुख केंद्र बन सकता है, जिससे उत्तर प्रदेश देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अमेरिका ने माना—ईरान में नहीं चला दांव, खामेनेई परिवार की पकड़ बरकरार

वाशिंगटन अमेरिका और इजरायल बीते 13 दिनों से ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं। शुरुआती दिनों ही ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे, लेकिन अब भी देश की जनता का भरोसा अपने नेतृत्व पर कायम है। यह बात तो खुद अमेरिकी एजेंसियों ने भी स्वीकार की है। अमेरिकी इंटेलिजेंस सूत्रों का कहना है कि ईरान की सरकार गिरने का फिलहाल कोई संकेत नहीं है। इसकी वजह यह है कि अब भी जनता पर उसकी पकड़ बनी हुई है। तीन अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने कहा कि ईरान की जनता पर लीडरशिप की पकड़ कायम है। इसका अर्थ यह है कि अयातुल्लाह खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को जनता ने स्वीकार कर लिया है। सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बीते कुछ दिनों में यह जानकारी निकाली है। दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके अलावा गैस की भी किल्लत हो रही है। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए अमेरिका का कहना है कि हम जल्दी ही जंग खत्म कर सकते हैं। लेकिन यह ईरान के नेतृत्व का शायद जज्बा है या फिर उसे मिल रहा जनता का समर्थन है कि उसका कहना है कि जंग भले ही अमेरिका ने शुरू की थी, लेकिन इसे अब खत्म हम ही करेंगे। यह बात दिलचस्प है कि ईरान के शीर्ष नेता मारे गए हैं। फिर भी उसकी नई लीडरशिप को जनता ने ना सिर्फ स्वीकार किया है बल्कि उसके साथ खड़ी है। ईरानी लीडरशिप को मिली ताकत से कैसे अमेरिका को झटका यह अहम इसलिए भी है क्योंकि अमेरिका को उम्मीद थी कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान की जनता सड़कों पर होगी। फिर लोकतंत्र बहाली के नाम पर वह दखल दे सकेगा और अपने किसी करीबी को कमान सौंपा देगा। निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को ऐसी उम्मीदें भी थीं, लेकिन जनता ने खामेनेई के बेटे को ही लीडर मान लिया है। ऐसे हालात तब हैं, जबकि अमेरिका लगातार हमले कर रहा है और मुजतबा खुद भी खतरे में हैं। जंग के पहले ही दिन मारे गए थे अयातुल्लाह खामेनेई, अब तक नहीं निकला जनाजा बता दें कि जंग के पहले ही दिन अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे। उनका तब से अब तक जनाजा नहीं निकाला गया है। माना जा रहा है कि इस नमाज-ए-जनाजा में करोड़ों की भीड़ जुटेगी। इसी के कारण ईरानी लीडरशिप उन्हें अभी दफनाने से बच रहा है। यदि ऐसा कोई आयोजन हुआ तो अमेरिका और इजरायल एक बार फिर से बड़ी तबाही कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि सीजफायर के हालात बनने पर ही शायद अब खामेनेई का अंतिम संस्कार किया जाएगा।  

मुख्यमंत्री ने “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” का किया शुभारंभ

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।   मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए। उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी। इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक  पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

रांची में LPG की कमी नहीं, लोगों से पैनिक न होने की अपील

रांची  झारखंड की राजधानी रांची में घरेलू गैस को लेकर मची हाहाकार के बाद उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि जिले में घेरलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति है, लोगों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। भजन्त्री ने बैठक आईओसीएल, बीपीसीएल, एवं एचपीसीएल के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। गैस कंपनियों की ओर से ये भी कहा गया कि लोग पैनिक होकर बुकिंग न करें। ज्यादा संख्या में बुकिंग रिक्वेस्ट आने से गैस कंपनियों के सॉफ्टवेयर पर असर पड़ा है, जिसके अपग्रेडेशन का कार्य जारी है, कुछ ही दिनों में सामान्य रुप से बुकिंग हो सकेगी, लोगों को एजेंसियों के ऑफिस आने की आवश्यकता नहीं है। भारत सरकार के दिशा निर्देशानुसार गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि एक बुकिंग के बाद 25 दिनों बाद ही दूसरी बुकिंग हो पायेगी। आपातकालीन स्थिति में उपभोक्ता 2 और 5 लीटर के सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं। प्रतिनिधियों ने बताया कि एचपीसीएल और बीपीसीएल के 5 लीटर के सिलेंडर बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध, आधार कार्ड लेकर उपभोक्ता गैस प्राप्त कर सकते हैं। बैठक में गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि उपभोक्ता आइवीआर, मिस्ड कॉल फैसिलिटी, ऐप और वेब बेस्ड बुकिंग करें, उन्हें एजेंसी में आने की जरुरत नहीं है। बुकिंग में हो रही देरी सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन के कारण है जो जल्द ही दूर हो जायेगा। भजन्त्री ने गैस की बढ़ती मांग के बीच सभी गैस कंपनियों और एजेंसियों को प्रॉपर प्लानिंग और कम्यूनिकेशन के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देश में आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू है, सभी उपभोक्ताओं तक घरेलू गैस सामान्य तरीके से पहुंचाना सुनिश्चित करें, किसी भी तरह की कालाबाजारी पर कड़ी कारर्वाई की जायेगी। बैठक में भजन्त्री द्वारा अस्पतालों, आंगनवाड़ी केन्द्रों, ओल्ड ऐज होम, अनाथालय, कल्याण विभाग द्वारा संचालित हॉस्टल, मध्याह्न भोजन, संप्रेषण गृह, जेल, सीएपीएफ आदि में गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उपायुक्त भजन्त्री द्वारा इसके लिए डिस्ट्रिक लेवल मॉनिटरिंग कमिटि बनाने का निर्देश दिया गया। कमेटि में अनुमण्डल पदाधिकारी सदर एवं बुण्डू, माकेर्िंटग ऑफिसर, ओएमसी एवं गैस एजेंसी के नोडल, हॉस्पिटल के नोडल एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी होंगे। इसके साथ ही उपायुक्त द्वारा अबुआ साथी (9430328080) पर गैस आपूर्ति से संबंधित आनेवाली शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिये। मौजूदा वैश्विक स्थिति को देखते हुए भजन्त्री द्वारा सभी से टीम इंडिया, टीम झारखंड और टीम रांची बनकर काम करने की बात कही है। उन्होंने रांचीवासियों से गैस एजेंसियों के दिये गये निर्देशों का पालन करने की बात कही ताकि लंबे समय तक रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।