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पंजाब में हेल्थ सेक्टर पर फोकस: CM भगवंत मान बोले- हर परिवार को मिलेगा 10 लाख तक मुफ्त इलाज

धूरी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने धूरी में 50 बिस्तरों की क्षमता वाले सब-डिविजनल अस्पताल और 30 बिस्तरों की क्षमता वाले माता-शिशु स्वास्थ्य ब्लॉक को लोगों को समर्पित किया। यह परियोजना पंजाब की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने और संगरूर जिले में स्वास्थ्य ढांचे को बड़ा बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर साबित होगी। सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह परियोजना बुनियादी ढांचे को मजबूत कर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और डॉक्टरों व स्टाफ की उपलब्धता को बेहतर बनाकर सुलभ एवं मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था लागू करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे न केवल धूरी शहर बल्कि आसपास के लगभग 70 गांवों के लोगों को भी लाभ मिलेगा, जिससे हजारों लोगों को घर के नजदीक आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।” उन्होंने आगे कहा, “21.65 करोड़ रुपये की लागत से बना यह कॉम्प्लेक्स लगभग 73,000 वर्ग फुट में फैला अत्याधुनिक भवन है, जो इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा। इसमें ओपीडी, इनडोर इलाज, इमरजेंसी सेवाएं, जांच सुविधाएं और विशेष सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे सेकेंडरी स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी।” स्वास्थ्य सेवाओं के दोहरे ढांचे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “50 बिस्तरों वाला सब-डिविजनल अस्पताल व्यापक सेकेंडरी स्वास्थ्य सेवाएं देगा, जबकि 30 बिस्तरों वाला माता-शिशु स्वास्थ्य ब्लॉक गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों की देखभाल को और मजबूत करेगा।” मुख्यमंत्री ने बताया, “यह अस्पताल वर्ष 1978 में 30 बिस्तरों के साथ स्थापित हुआ था, बाद में इसे 50 बिस्तरों तक अपग्रेड किया गया और अब इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस 80 बिस्तरों वाला अस्पताल बना दिया गया है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए हमारी सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।” बुनियादी सुविधाओं के बारे में उन्होंने कहा, “अस्पताल में 13 ओपीडी कमरे, इमरजेंसी ब्लॉक, दो रजिस्ट्रेशन काउंटर और बड़ी व छोटी सर्जरी के लिए 7 ऑपरेशन थिएटर हैं। इसके अलावा तीन लैबोरेट्री, ईसीजी, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।” उन्होंने आगे कहा, “अस्पताल में 12 निजी कमरे, 6 जनरल वार्ड, एक पूर्ण रूप से कार्यशील दवा भंडार, एसएमओ कार्यालय, 11 नर्स स्टेशन और 2 लिफ्टें हैं, जो मरीजों की बेहतर देखभाल और कार्यकुशलता को सुनिश्चित करती हैं।” मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा, “अस्पताल में सर्जिकल सेवाओं के साथ घुटना प्रत्यारोपण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। विशेषज्ञ डॉक्टर, विशेषकर कान-नाक-गला (ईएनटी) के क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करेंगे।” माता-शिशु स्वास्थ्य पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “यह समर्पित केंद्र अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों की निगरानी में सामान्य और सिजेरियन डिलीवरी की सुविधाएं प्रदान करेगा, जिससे माताओं और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित होगी।” उन्होंने आगे कहा, “माताओं और बच्चों के लिए आवश्यक इलाज और जांच मुफ्त उपलब्ध करवाई जाएंगी, ताकि कोई भी परिवार आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित न रहे। अस्पताल के तहत चल रही ईएसआई डिस्पेंसरी के जरिए श्रमिकों को भी स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहेंगी।” व्यापक स्वास्थ्य सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार ने 1500 से अधिक डॉक्टरों की भर्ती की है, जिनमें 600 से ज्यादा विशेषज्ञ और 900 से अधिक जनरल डॉक्टर शामिल हैं। इसके अलावा आम आदमी क्लीनिकों में 800 से अधिक डॉक्टर तैनात किए गए हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं बेहतर हुई हैं।” उन्होंने कहा, “हमने सेकेंडरी स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया है और आम आदमी क्लीनिकों के नेटवर्क का विस्तार किया है। 300 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद के जरिए मुफ्त दवाइयों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।” वित्तीय सुरक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर दिया जा रहा है, ताकि लोगों को बिना आर्थिक बोझ के बेहतर इलाज मिल सके।” अंत में उन्होंने कहा, “इस परियोजना से धूरी के 58,000 से अधिक निवासियों और आसपास के हजारों लोगों को लाभ होगा। हम पंजाब के हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

तारीखों के ऐलान के साथ बढ़ी राजनीतिक हलचल, शुभेंदु अधिकारी के वफादार का TMC में प्रवेश

कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है, जहां शुभेंदु अधिकारी के पूर्व वफादार माने जाने वाले नेता ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली। यह नेता पबित्र कर हैं, जो पूर्व में नंदीग्राम-2 ब्लॉक के बोयाल-1 ग्राम पंचायत के प्रधान थे। उन्होंने बीजेपी छोड़कर टीएमसी की सदस्यता ग्रहण की और यह घटना पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में हुई। TMC ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पबित्र बीजेपी की जन-विरोधी नीतियों से असंतुष्ट होकर वापस लौटे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं और टीएमसी जल्द ही अपनी उम्मीदवारों की सूची घोषित करने वाली है। राजनीतिक हलकों में इस घटना को काफी महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि नंदीग्राम सीट पहले से ही विवादास्पद और चर्चित बनी हुई है। पबित्र कर का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। नवंबर 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। BJP में शामिल होने के बाद उन्होंने बोयाल-1 क्षेत्र में पार्टी की संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। 2021 के विधानसभा चुनाव में उनकी मेहनत का असर दिखा, जब बीजेपी को इस इलाके में बढ़त मिली। उसी चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को महज 1,900 से थोड़े अधिक वोटों के अंतर से नंदीग्राम सीट पर हराया था, जिसने पूरे राज्य की सियासत को हिला दिया था। पबित्र को सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी के रूप में जाना जाता था, इसलिए उनकी टीएमसी में वापसी को एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है। यह कदम बीजेपी के लिए नंदीग्राम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में झटका साबित हो सकता है। TMC का झंडा लहराने वाली तस्वीर अभिषेक बनर्जी के हाथों से टीएमसी का झंडा थामते हुए पबित्र कर की तस्वीरें वायरल हो गई हैं। यह घटना उम्मीदवारों की सूची घोषणा से महज कुछ घंटे पहले हुई, जिसने राजनीतिक गलियारों में जोरदार अटकलों को जन्म दिया है। कई विश्लेषकों और नेताओं का मानना है कि टीएमसी पबित्र कर को नंदीग्राम से सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में उतार सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह चुनावी मुकाबला और भी रोमांचक हो जाएगा, क्योंकि दोनों नेताओं के बीच पहले से व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है। नंदीग्राम 2021 में ममता बनर्जी की हार का प्रतीक बन चुका है और टीएमसी इसे वापस जीतकर अपनी ताकत दिखाना चाहती है। इस संभावित टक्कर से स्थानीय स्तर पर मतदाताओं की राय भी प्रभावित हो सकती है। यह घटनाक्रम बंगाल की सियासत में बदलते समीकरणों को दर्शाता है। जहां एक तरफ बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है, वहीं टीएमसी पुराने नेताओं को वापस लाकर व नए चेहरों को मौका देकर अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करना चाहती है। पबित्र कर की वापसी न केवल नंदीग्राम बल्कि पूर्व मेदिनीपुर जिले के अन्य हिस्सों में भी टीएमसी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में जब TMC की उम्मीदवार सूची जारी होगी तो इस अटकल का जवाब मिल जाएगा। फिलहाल यह कदम बंगाल की राजनीति में नया तड़का जोड़ने वाला साबित हो रहा है और सभी की निगाहें नंदीग्राम पर टिकी हुई हैं।  

कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने का संकल्प, Shivraj Singh Chouhan ने किसानों की आय बढ़ाने पर दिया जोर

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय और सुरक्षा बढ़ाने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए सरकार कई कदम उठा रही है, जैसे तंबाकू जैसी हानिकारक फसलों की जगह लाभदायक फसलों को बढ़ावा देना, एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद, फसल बीमा योजना में सुधार और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करना। संसद के निचले सदन में सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार ने किसानों से तंबाकू की खेती छोड़ने की अपील की है और इसके बदले कई फायदे वाली फसलों की पहचान की है। इनमें हाइब्रिड मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, आलू, चिया, फीड बीन्स, लोबिया, रागी, अरहर, गन्ना, सोयाबीन, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें शामिल हैं, ताकि किसानों की नकद आय सुरक्षित बनी रहे।  मंत्री ने कहा कि देश के ज्यादातर किसानों के पास छोटी जमीन होती है, इसलिए केवल एक ही फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा होता है। इसको देखते हुए सरकार ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग (मिश्रित खेती) के कई मॉडल तैयार किए हैं, जिनका अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन भी किया जा रहा है। इन मॉडलों के तहत किसान अनाज (गेहूं और धान), सब्जियां, फल, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन और एग्रो-फॉरेस्ट्री जैसी गतिविधियों को एक साथ अपना सकते हैं। इससे उन्हें पूरे साल स्थिर और ज्यादा आय मिल सकती है। चौहान ने आगे बताया कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाया गया है और इस सीजन में एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दालों जैसे तूर, मसूर और उड़द के लिए भी व्यवस्था की है, जिसमें किसान रजिस्ट्रेशन के बाद अपनी पूरी उपज बेच सकते हैं और सरकार उसे खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे दाल उत्पादक किसानों को बड़ा सहारा मिला है। फसल बीमा योजना को लेकर उन्होंने कहा कि पहले किसानों को मुआवजा पाने में कई महीने लग जाते थे, लेकिन अब नियमों में बदलाव कर दिया गया है, जिससे अगर किसी एक किसान की फसल भी खराब होती है तो उसे मुआवजा मिलना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगर 21 दिनों के भीतर बीमा राशि किसान के खाते में नहीं आती है, तो बीमा कंपनी और राज्य सरकार को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इससे किसानों को देरी का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है और फसल बीमा या अन्य योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि कृषि रक्षक पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्राप्त शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है और जहां भी अनियमितता पाई जाती है, वहां दोषियों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में राजस्थान सहित कई राज्यों में फसल बीमा के तहत हजारों करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजे गए हैं, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिला है।

वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में भी खुले रहेंगे पंजीयन कार्यालय अवकाश के दिनों पर भी मिलेगी पंजीयन की सुविधा

रायपुर, राज्य के आम नागरिकों को पंजीयन संबंधी कार्यों में किसी प्रकार की असुविधा न हो और वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों में पंजीयन कार्यों का सुचारू एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके, इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य के सभी पंजीयन (स्टाम्प दस्तावेज) कार्यालय चयनित अवकाश दिवसों में भी संचालित (खुले) किए जाएंगे। जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी पंजीयन कार्यालय 22 मार्च, 28 मार्च, 29 मार्च तथा 31 मार्च 2026 को भी सामान्य कार्यदिवसों की तरह खुले रहेंगे। इन तिथियों में दस्तावेजों के पंजीयन सहित अन्य सभी संबंधित सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगी।        शासन के इस निर्णय का उद्देश्य नागरिकों को अतिरिक्त सुविधा प्रदान करना है, ताकि वे अपने लंबित पंजीयन कार्यों को समय पर पूरा कर सकें। विशेष रूप से वित्तीय वर्ष की समाप्ति के मद्देनज़र इन दिनों में पंजीयन कार्यों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस विशेष सुविधा का अधिकतम लाभ उठाते हुए निर्धारित तिथियों में अपने पंजीयन संबंधी कार्यों का निष्पादन कराएं, जिससे अनावश्यक भीड़ और अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सके।

गैस संकट मामले में केंद्र का कोर्ट को जवाब, क्या मिली राहत?

नई दिल्ली एलपीजी संकट को लेकर केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को जवाब दिया है। सरकार ने इस जवाब में कहा है कि एलपीजी संकट से उबरने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। ताकि ईरान-इजरायल युद्ध के चलते भारत में एलपीजी की सप्लाई प्रभावित न होने पाए। सरकार के दूसरे वरिष्ठतम कानून अधिकारी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अनिल एस किलोर और राज डी वाकोड़े की बेंच को बताया कि बातचीत जारी है और सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिन कदमों को उठाया जा रहा है, उन्हें जानबूझकर नहीं बताया जा रहा है। साथ ही सरकार पर भरोसा बनाए रखने की भी अपील की। अपनी तरफ से पूरी कोशिश इसलिए, उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वह एलपीजी डीलरों द्वारा दायर याचिका को बंद कर दे। डीलरों ने दावा किया था कि ईरान-इजरायल युद्ध के चलते घरेलू आपूर्ति की तुलना में निर्यात को प्राथमिकता दी जा रही है। एसजी मेहता ने कहाकि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत चल रही है। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। सरकार पर भरोसा करते हुए अदालत इसे बंद करने पर विचार कर सकती है। अदालत ने सरकार की प्रस्तुतियों पर विचार किया और याचिका को बंद कर दिया। यह याचिका एलपीजी डीलरों द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि घरेलू आपूर्ति की तुलना में निर्यात को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि एलपीजी की गंभीर कमी है। डीलरों ने कहाकि महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में आपूर्ति मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण प्रभावित हुई। सरकार को दी थी नोटिस इससे पहले 12 मार्च को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय और एक निजी कंपनी को नोटिस जारी किया था। छह रसोई गैस वितरकों द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि नागपुर स्थित कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड ने केन्द्र सरकार के घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के निर्देशों के बावजूद घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं बढ़ाई है। अधिवक्ता श्याम देवानी और साहिल देवानी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया था कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान से रसोई गैस उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है। इस स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस के उत्पादन और आपूर्ति को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए थे। याचिका में क्या था याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि कंपनी से निर्यात रोककर घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई बार अनुरोध किए गए, लेकिन कंपनी ने इसे नजरअंदाज कर दिया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार कंपनी ने जवाब दिया कि वह अपनी निर्यात नीति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति जारी रखने के लिए बाध्य है और घरेलू बाजार को प्राथमिकता नहीं दे सकती। जस्टिस अनिल एस किलोरे और न्यायमूर्ति राज डी वाकोड़े की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय और कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड को नोटिस जारी किए और मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की थी।  

योगी सरकार का बेहतरीन मॉडल, टैक्स से सीधे जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य तय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में एक स्पष्ट और व्यावहारिक बदलाव किया है। अब टैक्स को केवल राजस्व इकट्ठा करने का माध्यम नहीं माना जा रहा, बल्कि उसे सीधे किसी खास उद्देश्य से जोड़कर खर्च किया जा रहा है। सरल शब्दों में समझें तो कौन सा पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ, यह अब स्पष्ट दिख रहा है। यह मॉडल इसलिए खास है क्योंकि आम नागरिक अब आसानी से समझ सकता है कि उसका दिया हुआ टैक्स किस काम में लग रहा है। इस पूरी नीति का सीधा मतलब है कि टैक्स अब सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि विकास का साधन बन चुका है। उत्तर प्रदेश ने दिखाया है कि अगर योजना स्पष्ट हो, तो हर रुपये का सही उपयोग करके समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति तीनों को एक साथ मजबूत किया जा सकता है। गो कल्याण सेस: छोटा टैक्स, बड़ा असर राज्य सरकार ने आबकारी से जुड़े राजस्व पर 0.5% का गो कल्याण सेस लगाया है। यह टैक्स शराब की बिक्री से जुड़ा है। आम उपभोक्ता पर इसका बहुत कम असर पड़ता है, लेकिन पूरे राज्य से यह मिलकर सैकड़ों करोड़ रुपये जुटाता है। इस पैसे को सीधे आवारा गोवंश की देखभाल में खर्च किया जाता है। प्रदेश में बने गोवंश आश्रय स्थल में हजारों पशुओं को रहने, खाने और इलाज की सुविधा मिल रही है। दरअसल, कृषि में मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण किसानों की पशुओं पर निर्भरता कम हुई है, जिससे आवारा पशुओं की समस्या बढ़ी। अब इस सेस के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान तैयार किया गया है। हर सेक्टर का पैसा उसी सेक्टर में लग रहा उत्तर प्रदेश ने एक और स्पष्ट नीति अपनाई है और वो ये कि जिस सेक्टर से राजस्व आता है, उसी सेक्टर के विकास में उसका उपयोग किया जाता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझें: 1. रियल एस्टेट: धार्मिक और पर्यटन विकास संपत्ति की खरीद-फरोख्त से मिलने वाली स्टाम्प ड्यूटी का उपयोग काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट में किया जा रहा है। इससे पर्यटन बढ़ रहा है, रोजगार मिल रहा है और विरासत सुरक्षित हो रही है। 2. खनन: सिंचाई और पानी की व्यवस्था खनन से मिलने वाला पैसा गांवों में सिंचाई और जल प्रबंधन सुधारने में लगाया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। 3. एक्सप्रेसवे: गांवों तक सड़क कनेक्टिविटी पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से मिलने वाला टोल छोटी सड़कों (फीडर रोड) के निर्माण में खर्च हो रहा है, जिससे दूर-दराज के गांव भी मुख्य सड़कों से जुड़ रहे हैं। 4. मंडी शुल्क: किसानों की सुरक्षा मंडी से मिलने वाली फीस का उपयोग फसल सुरक्षा और किसान योजनाओं में किया जा रहा है। अब टैक्स का उपयोग साफ दिख रहा इस नई नीति की सबसे बड़ी ताकत है, स्पष्टता। अब लोगों को साफ दिखता है कि शराब की बिक्री से मिला पैसा गो कल्याण में लग रहा है। टोल टैक्स का पैसा सड़क और कनेक्टिविटी में, प्रॉपर्टी टैक्स का पैसा धार्मिक और पर्यटन विकास में निवेश हो रहा है। इससे सरकार पर भरोसा बढ़ता है, क्योंकि टैक्स अब “कहां गया” का सवाल नहीं, बल्कि “यहीं लगा” का जवाब देता है। तेजी से विकास की मजबूत तैयारी उत्तर प्रदेश का लक्ष्य है 2029-30 तक $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए सरकार लगातार सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई और खेती, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्री, पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है। राज्य के बजट में पूंजीगत खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे रोजगार, व्यापार और कनेक्टिविटी तीनों में तेजी आ रही है। दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक स्पष्ट रास्ता दिखाता है। मतलब साफ है कि जो राज्य जिस क्षेत्र में मजबूत है, वह उसी से मिलने वाले टैक्स को उसी क्षेत्र के विकास में लगा सकता है। जैसे, जहां पर्यटन ज्यादा है, वहां पर्यटन से मिलने वाले टैक्स को पर्यटन सुविधाएं बेहतर करने में खर्च किया जा सकता है। औद्योगिक राज्यों में उद्योगों से जुड़े शुल्क को पर्यावरण सुधार पर लगाया जा सकता है। वहीं कृषि प्रधान राज्यों में मंडी से मिलने वाली फीस को खेती और किसानों को मजबूत बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो, हर राज्य अपनी जरूरत और स्थिति के अनुसार टैक्स को विकास से जोड़कर ज्यादा प्रभावी परिणाम हासिल कर सकता है।

अपर मुख्य सचिव ने की पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम के मद्देनजर अधिकारियों को प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। इसी तारतम्य में अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरूण शमी ने मंत्रालय मे खाद्य विभाग के अधिकारियों तथा ऑइल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ पेट्रोल, डीजल, पीएनजी, सीएनजी तथा घरेलू गैस की आपूर्ति के संबंध में समीक्षा की गई। एसीएस शमी द्वारा सिलेन्डर की वितरण व्यवस्था सुचारू बनाए रखने तथा घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये हैं। ऑइल कंपनियो के प्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि पूर्व में जहां 84% उपभोक्ता ऑनलाइन बुकिंग करवा रहे थे वह संख्या बढकर 90% हो गयी है। कंपनियों ने मोबाइल ऐप, एसएमएस, व्हाट्सएप तथा आईवीआरएस कॉल द्वारा गैस बुकिंग की सुविधा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता बुकिंग के लिए इन डिजिटल माध्यम का प्रयोग करें तथा अनावश्यक रूप से एजेंसी पर जाने से बचे | घरेलू एलपीजी के उत्पादन में 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है तथा निरंतर आपूर्ति जारी है। शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों को आवश्यकता की 100 प्रतिशत गैस की आपूर्ति की जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए विशेष छूट के निर्देश भी जारी किये है। बैठक में गैस एजेंसियों के संचालन, सिलेंडर वितरण की समयबद्धता और उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों की स्थिति की भी समीक्षा की जा रही है। समस्त जिला कलेक्टर को निर्देश दिए गए है कि सूचना तंत्र मजबूत कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करें। यदि कहीं वितरण व्यवस्था में अनियमितता या विलंब की शिकायत मिलती है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराई जाए। प्रदेश में एलपीजी की कालाबाजारी तथा जमाखोरी के विरुद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश मे 1341 स्थानों पर कार्यवाही कर 1827 सिलेंडर जब्त किये गए। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी तथा घरेलू एलपीजी गैस की उपलब्धता के सम्बन्ध में ऑयल कंपनियों से समन्वय के लिए राज्य स्तर पर 6 सदस्यीय समिति भी गठित की गयी है, जो प्रदेश में कामर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी करेगी। औ‌द्योगिक एवं वाणिज्यिक संस्थाओ से आग्रह है कि वे उपलब्धता अनुसार पीएनजी के कनेक्शन लें। पीएनजी की आपूर्ति लगातार बनी हुई है और आगे भी जारी रहेगी। पेट्रोल, डीजल घरेलू पीएनजी तथा सीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है और इनकी आपूर्ति भी निरंतर एवं बिना कटौती के जारी रहेगी। ऑयल कंपनी के स्टेट नोडल ऑफिसर श्री अजय श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में गैस सिलेण्डर का पर्याप्त स्टॉक है तथा प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट एवं वितरकों के गोदाम में पर्याप्त सिलेण्डर उपलब्ध हैं। घरेलू उपभोक्ताओं से अपील की गयी है कि विगत अंतिम रिफिल के 25 दिन बाद पुनः बुकिंग करायें। प्रशासन द्वारा वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह भी दी गयी है। जिन कामो में गैस ज्यादा खर्च होती है उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। प्रदेश में घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति जारी है, उपभोक्ता अनावश्यक रूप से अफवाहों से भ्रमित न हों। देश की रिफायनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही हैं तथा पश्चिम एशिया के अतिरिक्त अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सिलेण्डर बुकिंग संबंधित शिकायत / सुझाव के लिये इन टोल फ्री नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है : भारत गैस हेल्पलाइन नंबर 1800-22-4344 (टोल फ्री) इंडेन गैस कस्टमर केयर नंबर 1800-2333-555 (टोल फ्री) एचपी गैस कस्टमर केयर नंबर 1800-2333-555 (टोल फ्री)  

सीएम ने की स्वस्थ-समृद्ध उत्तर प्रदेश की कामना

लखनऊ/मीरजापुर  गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए। मां की आरती उतारी और सुखी, स्वस्थ व समृद्ध उत्तर प्रदेश की कामना की। मुख्यमंत्री ने मां को लाल चुनरी अर्पित कर श्रद्धा निवेदित की और मंदिर की परिक्रमा भी की। मुख्यमंत्री ने चैत्र नवरात्रि की तैयारियों का जायजा लिया, प्रशासन को चैत्र नवरात्रि व रामनवमी में आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने और मंदिर प्रांगण के साथ ही आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।  इसके बाद मुख्यमंत्री ने विंध्यवासिनी कॉरिडोर का अवलोकन और स्टालों का निरीक्षण किया। उन्होंने श्रद्धालुओं का अभिवादन भी किया। इस दौरान मुख्यमंत्री को बच्चे भी दिखाई दिए। उन्होंने बच्चों के पास पहुंचकर उनसे संवाद किया, उनका हालचाल पूछा और पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बच्चों को मोबाइल का प्रयोग कम से कम करने की सीख दी और उन्हें चॉकलेट भी दी।  इस दौरान कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल, विधायक रत्नाकर मिश्र, विधान परिषद सदस्य विनीत सिंह समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि आदि मौजूद रहे।

फिल्मी अंदाज में वारदात: मिर्ची झोंककर 1 करोड़ कैश लूट ले गए बदमाश

तेलंगाना तेलंगाना के हैदराबाद में एक बड़ी लूट की घटना ने पुलिस को हिलाकर रख दिया है। 16 मार्च की रात करीब 9:40 बजे कुकटपल्ली इलाके में पिलर नंबर 837 के पास दो एसी मैकेनिक्स स्कूटी पर जा रहे थे। मोहम्मद खुसरू और मोहम्मद अजीमुद्दीन बहादुरपुरा निवासी हैं, वे गोल्ड ड्रॉप कार्टन बॉक्स में 1 करोड़ रुपये नकद लेकर जा रहे थे। अचानक चार अज्ञात व्यक्ति बाइकों पर आए और उन पर मिर्च पाउडर फेंक दिया। मिर्च पाउडर से उनकी आंखें जलने लगीं और वे असहाय हो गए। हमलावरों ने तुरंत कार्टन बॉक्स छीन लिया और अपनी बाइकों पर तेजी से भाग निकले। यह घटना इतनी तेज हुई कि आसपास के लोग भी कुछ समझ नहीं पाए। पीड़ितों ने तुरंत कुकटपल्ली पुलिस को सूचना दी। दोनों मैकेनिक्स एसी रिपेयर का काम करते हैं और शायद यह राशि किसी बड़े काम या व्यापार से जुड़ी हुई थी। लुटेरों ने बहुत चालाकी से हमला किया, क्योंकि मिर्च पाउडर फेंकने से पीड़ितों की दृष्टि क्षणभर के लिए चली गई और वे विरोध नहीं कर पाए। यह तरीका अपराधियों की ओर से अक्सर इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि यह सस्ता, आसान और प्रभावी हथियार है। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज व गवाहों के बयानों को इकट्ठा करना शुरू किया। लूट की राशि इतनी बड़ी होने से यह मामला संवेदनशील हो गया है। जांच में जुटी पुलिस तेलंगाना पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और चार अलग-अलग जांच टीमें गठित की हैं। ये टीमें मैनहंट अभियान चला रही हैं ताकि जल्द से जल्द चारों लुटेरों को पकड़ा जा सके। पुलिस ने आसपास के इलाकों में सघन तलाशी अभियान शुरू किया है और बाइक की नंबर प्लेट या चेहरों की पहचान के लिए प्रयासरत है। हालांकि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस का दावा है कि वे जल्द ही सुराग हासिल कर लेंगे। यह घटना शहर में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है, खासकर जब बड़ी रकम लेकर लोग यात्रा करते हैं।

पुलिस भर्ती होगी और पारदर्शी: DGP कैलाश मकवाणा ने अफसरों संग की अहम समीक्षा

भोपाल प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुई पुलिस भर्ती प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा तथा आगामी भर्ती प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने उप पुलिस महानिरीक्षकों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की। पुलिस महानिदेशकने बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी भर्ती प्रक्रियाओं में भी पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता रहे तथा प्रत्येक स्तर पर निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की विस्तार से समीक्षा करते हुए फील्ड स्तर पर सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों (ग्राउंड रियलिटी) तथा व्यावहारिक समस्याओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले अभ्यर्थियों की समस्याओं, परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों एवं उनकी सुविधाओं को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई।साथ ही भर्ती प्रक्रिया को और अधिक सुगम, पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के लिए भविष्य में अपनाए जाने वाले सुधारात्मक उपायों पर भी सार्थक चर्चा की गई। समीक्षा के दौरान अवगत कराया गया कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर सुदृढ़ व्यवस्थाएँ लागू की गईं। अभ्यर्थियों की पहचान एवं प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने हेतु फिंगरप्रिंट आधारित पहचान सत्यापन, फेस रिकग्निशन सिस्टम,आईरिसएवं मेडिकल परीक्षण तथा दस्तावेजों का सघन सत्यापन किया गया। इसके अतिरिक्त पूरी भर्ती प्रक्रिया के दौरान सॉफ्टवेयर आधारित डेटा प्रबंधन एवं ऑनलाइन अपलोड प्रणाली का उपयोग किया गया, जिससे अभ्यर्थियों के दस्तावेजों एवं परिणामों का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही किसी भी तकनीकी बाधा की स्थिति से निपटने के लिए तकनीकी एवं मैन्युअल दोनों प्रकार की रिकॉर्ड प्रणाली को समानांतर रूप से संचालित किया गया। भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षाएँ, जिनमें दौड़, शॉर्ट पुटएवं लॉन्ग जंप शामिल हैं, निर्धारित मानकों के अनुरूप संपन्न कराई गईं तथा पूरी प्रक्रिया की सतत निगरानी सुनिश्चित की गई। अभ्यर्थियों के परिणामों का संकलन भी समयबद्ध रूप से कर पारदर्शिता बनाए रखी गई। समीक्षा के दौरान यह भी अवगत कराया गया कि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित कुछ प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं, जिनमें विभाग द्वारा आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत किए जा चुके हैं। बैठक के दौरान भर्ती प्रक्रिया के सफल एवं उत्कृष्ट संचालन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया। समीक्षा बैठक में उप पुलिस महानिरीक्षक देहात भोपाल राजेश चंदेल,उप पुलिस महानिरीक्षक रेंज, बालाघाट विनीत जैन,उप पुलिस महानिरीक्षक रेंज, मुरैना सुनील जैन,उप पुलिस महानिरीक्षक रेंज, रतलाम निमिष अग्रवाल,उप पुलिस महानिरीक्षक रेंज, रीवा हेमन्त चौहान,उप पुलिस महानिरीक्षक रेंज, ग्वालियर अमित सांघी,उप पुलिस महानिरीक्षक, रेल भोपाल पंकजवास्तवतथा पीएसओटू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर उपस्थित थे।