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ईरान पर बढ़ता तनाव: आखिर क्यों खामोश या खिलाफ हैं पड़ोसी मुस्लिम देश?

वाशिंगटन अमेरिका के हमले के बाद भड़का ईरान अपने ही पड़ोसी खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है। इसपर खाड़ी देशों ने अमेरिका से कहा है कि उसका अभियान इतना तेज होना चाहिए कि ईरान कमजोर हो जाए। हालांकि इस युद्ध में सीधे तौर पर कोई भी देश शामिल नहीं होना चाहता। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी देशों को डर है कि ईरान उनके तेल के ठिकानों, पोर्ट्स और समुद्री रास्तों को निशाना बना सकता है। ऐसे में उनके पास अमेरिका की ओर देखने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है।   अमेरिका चाहता है, खाड़ी देश भी युद्ध में कूदें अमेरिका चाहता है कि इस युद्ध में खाड़ी देश भी कूद पड़ें और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का खुलकर विरोध करें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर बाकी देशों का आह्वान किया है। वह चाहते हैं कि ईरान समझ जाए कि उसके ही क्षेत्र में उसके खिलाफ सारे देश खड़े हैं। सऊदी में गल्फ रिसर्टे सेंटर के चेयरमैन अब्दुलअजीज सेगर ने कहा कि सारे खाड़ी देश सोचते हैं कि ईरान ने सारी सीमाएं लांघदी हैं। उन्होंने कहा, शुरू में हमने ईरान का पक्ष लिया और अमेरिका के युद्ध का विरोध किया। हालांकि इसके बाद जब हवाई हमले हम पर भी होने लगे तो ईरान दुश्मन हो गया। ईरान से बढ़े हुए तनाव के बीच भी खाड़ी देश युद्ध में सीधे हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं। ईरान ने यूएई समेत कई देशों के एयरपोर्ट्स को भी निशाना बनाया है। बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और ओमान में एयरपोर्टस पर धमाके हुए हैं। इसके अलावा ईरान के खतरनाक कदमों की वजह से समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। युद्ध को 16 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं। ईरान लगातार खाड़ी देशों में अमेरिका के ठिकानों और आम नागरिको को निशाना बना रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके हमलो की वजह से ईरान की सेना की कमर टूट गई है। वहीं जब होर्मुज के मुद्दे पर अमेरिका के साथ कोई नहीं आया तो वह अपने मित्र देशों पर ही नाराज हो गए। ट्रंप ने कहा, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने जिस गठबंधन का प्रस्ताव रखा है, उसके प्रति सहयोगियों में "उत्साह" की कमी है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से ही दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के पाँचवें हिस्से की जहाज़ों से जरिये आपूर्ति की जाती है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस हफ़्ते किसी समाधान की संभावना कम है। उन्होंने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह ज़रूरी था। गौरतलब है कि ईरान ने 28 फ़रवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाज़ों को निशाना बनाने की धमकी दी थी जिसके बाद फ़ारस की खाड़ी से होने वाली जहाज़ों की आवाजाही काफ़ी हद तक कम हो गई है। ट्रंप ने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए कहा " ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा इस संघर्ष में नाटो को शामिल करने में दिखाई गई हिचकिचाहट से मैं "खुश नहीं हैं" और "बहुत हैरान हूँ। मैं ब्रिटेन के रवैये से खुश नहीं था। मुझे लगता है कि शायद वे इसमें शामिल होंगे, लेकिन उन्हें पूरे उत्साह के साथ शामिल होना चाहिए।"  

प्रदेश में एलपीजी आपूर्ति सुचारु:कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था लागू

रायपुर  खाद्य सचिव मती रीना बाबा साहेब कंगाले के दिशानिर्देश पर छत्तीसगढ़ में निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ कमर्शियल गैस कनेक्शन वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के लिए संतुलित और प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था केंद्रीय पेट्रोलियम एवं नैसर्गिक गैस मंत्रालय के अधीन लागू करने का निर्णय लिया गया है। खाद्य सचिव मती रीना कंगाले ने कहा कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रहे और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार एवं ऑयल कंपनियों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कमर्शियल उपभोक्ताओं को विगत माहों की खपत के आधार पर अधिकतम 20 प्रतिशत की सीमा के अंदर एलपीजी प्रदाय करने पर सहमति बनी है। कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों एवं चिकित्सालयों के साथ-साथ सैन्य एवं अर्द्धसैन्य कैंप, जेल, हॉस्टल, समाज कल्याण संस्थान, रेलवे एवं एयरपोर्ट कैंटीन को पूर्ण प्राथमिकता देते हुए 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वहीं शासकीय कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं उनके गेस्ट हाउस और कैंटीन के लिए 50 प्रतिशत, पशु आहार उत्पादक संयंत्र एवं बीज उत्पादक इकाई  तथा रेस्टोरेंट एवं होटल के लिए 20 प्रतिशत आपूर्ति निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि कमर्शियल एलपीजी के वितरण की दैनिक समीक्षा ऑयल कंपनियों द्वारा की जाएगी तथा इसकी जानकारी प्रतिदिन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं प्रभावी बनी रहे।  खाद्य सचिव मती रीना बाबासाहेब कंगाले ने कहा कि आम नागरिकों को निर्बाध एलपीजी आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े, साथ ही सभी वर्गों तक संतुलित रूप से गैस की उपलब्धता बनी रहे।  

राज्यसभा चुनाव में बगावत पड़ी भारी: कांग्रेस के तीन नेताओं पर गिरी गाज, विधायकी खतरे में

ओडिशा ओडिशा में क्रॉस वोटिंग के चलते राज्यसभा चुनाव में हारने वाली कांग्रेस ने अब बागी विधायकों पर ऐक्शन लेना शुरू कर दिया है। पार्टी ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के लिए वोट डालने वाले तीन विधायकों को निलंबित कर दिया है। ये विधायक हैं सनाखेमुंडी रमेश चंद्र जेना, मोहाना के दसरथी गोमांगो और कटक से विधायक सोफिया फिरदौस। इन लोगों ने सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी की हिदायत के बाद भी दिलीप रे के समर्थन में वोट दिया था। इन लोगों के निलंबन की जानकारी देते हुए ओडिशा कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'कांग्रेस को धोखा देने वालों ने देश के साथ विश्वासघात किया है।' ओडिशा कांग्रेस के मीडिया सेल के प्रभारी अरबिंद दास ने कहा कि यह निर्णय पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने के बाद लिया गया है। इन लोगों ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के हितों के खिलाफ काम किया। वह भी तब जबकि सभी विधायकों को पहले से ही हिदायत दी गई थी। उन्होंने कहा कि अब इन लोगों की विधानसभा की सदस्यता ही खत्म कराई जाएगी। इसके लिए हम स्पीकर को जल्दी ही नोटिस देने वाले हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि इन लोगों से ऐसी उम्मीद नहीं थी। इन विधायकों ने पार्टी के साथ गद्दारी की है। हम तय करेंगे कि कैसे संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत इन लोगों को विधानसभा से बाहर कराया जाए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस ऐक्शन की हाईकमान ने भी सराहना की है। लीडरशिप मानती है कि इन लोगों के खिलाफ ऐक्शन लिया जाना जरूरी था। इन कांग्रेस विधायकों के अलावा मुख्य विपक्षी दल बीजेडी के भी 8 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। इसी के चलते विपक्ष के साझा उम्मीदवार दत्तेश्वर होता की हार हो गई। होता को बीजेडी ने उतारा था, लेकिन कांग्रेस ने भी उनके समर्थन का ऐलान किया था। माना जा रहा है कि कांग्रेस ऐसा ही ऐक्शन बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में भी ले सकती है। बिहार में भी विपक्षी कैंडिडेट को हार मिली है, जबकि वह एक उम्मीदवार जिताने की स्थिति में आसानी से था। हरियाणा में किसी तरह जीत पाई कांग्रेस, 9 वोट थे ज्यादा हरियाणा में किसी तरह कांग्रेस के कैंडिडेट कर्मवीर सिंह बौद्ध को जीत मिल गई। फिर भी भाजपा की रणनीति के आगे पार्टी हांफती नजर आई। यहां भी 5 विधायकों ने पार्टी से अलग रुख अपनाया और क्रॉस वोटिंग कर दी। इसके अलावा 4 वोट अवैध करार दिए गए। इस तरह 37 सीटों वाली कांग्रेस के कैंडिडेट को महज 28 वोट ही मिले। ऐसी स्थिति में कांग्रेस यह पड़ताल करने में जुटी है कि आखिर हरियाणा और बिहार में किन नेताओं ने उसके ही कैंडिडेट को वोट नहीं दिया।

वायदों से लेकर विकास तक—AAP ने 4 साल में निभाई हर गारंटी : मुख्यमंत्री

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सरकार ने ‘काम की राजनीति’ के रास्ते लोगों को दी गई सभी गारंटियां पूरी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि लोगों ने कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा को ठुकराकर हम पर उम्मीदें लगाई थी और हमने लोगों का भरोसा नहीं टूटने दिया। मुख्यमंत्री ने मुख्य उपलब्धियों का जिक्र किया, जिनमें मुफ्त बिजली, किसानों के लिए दिन में बिजली, 78 प्रतिशत खेतों को नहरी पानी, 65,000 सरकारी नौकरियां और 5.5 लाख रोजगार के नए मौके, आम आदमी क्लिनिकों के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और 10 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’, 1.55 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड निवेश और सड़क सुरक्षा फोर्स के साथ सरकार के इरादे स्पष्ट हैं कि पंजाब के पुनर्निर्माण पर ध्यान दिया जा रहा है। विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जहां कांग्रेस, अकाली और भाजपा सत्ता की चिंता कर रहे हैं, वहीं 'आप' सरकार पंजाब को बचाने के लिए फिक्रमंद है और राज्य में फूट डालो राजनीति को सफल नहीं होने देगी। 'आप' सरकार के चार साल पूरे होने पर पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "पंजाब सरकार ने चार सालों में सभी वादे पूरे करके राजनीति में नई परंपरा कायम की है, जबकि पारंपरिक पार्टियां पांच सालों में भी ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं।" उन्होंने आगे कहा, “साल 2022 में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के पैतृक गांव में पदभार संभालने के बाद, पंजाब सरकार ने कई लोक-हितैषी फैसले लिए।” पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “मेरे साथ, लाखों पंजाबियों ने राज्य की पुरानी शान बहाल करने की शपथ ली थी।” ‘आप’ सरकार के चार साल पूरे, अब पंजाब को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य अपनी सरकार की उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले चार सालों में, पंजाब सरकार ने लोगों की भलाई के लिए अथक मेहनत और समर्पण भावना से प्रयास किए हैं और उनके साथ किए वादे पूरे कर दिए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “आने वाला साल पंजाब को विकास और खुशहाली के एक नए शिखर पर ले जाने के लिए समर्पित होगा।” शिक्षा क्रांति ने पंजाब के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल दी शिक्षा क्षेत्र में बदलाव का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भारत सरकार के सर्वेक्षण के अनुसार पंजाब के सरकारी स्कूल अब पढ़ाई में देश में पहले स्थान पर हैं।” उन्होंने आगे कहा, “सरकारी स्कूलों में अब कोई भी बच्चा फर्श पर नहीं बैठता क्योंकि एक लाख से अधिक डेस्क दिए गए हैं ताकि हर विद्यार्थी सम्मान से पढ़ सके।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्रांति के तहत 9,000 से अधिक स्मार्ट क्लासरूम और 5,000 कंप्यूटर लैब खोले गए हैं, जिससे पूरे पंजाब के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा मिल रही है।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार ठेके पर रखे शिक्षकों को नियमित नौकरियां दी गई हैं और सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के लिए 15,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की गई है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल और शिक्षक फिनलैंड, सिंगापुर और आई.आई.एम. अहमदाबाद में विश्व स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिससे पंजाब में बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा मिल रही है।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब के युवाओं को नौकरी ढूंढने वाले नहीं बल्कि नौकरियां पैदा करने वाले बनने के लिए तैयार किया जा रहा है और हर साल लगभग 1.5 लाख कॉलेज विद्यार्थी उद्यमिता और कौशल सीख रहे हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “सरकारी स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों से मुकाबला कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, "सिर्फ साल 2026 में सरकारी स्कूलों के 305 विद्यार्थियों ने जे.ई.ई. मेन्स और 845 ने नीट पास की।" मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना और आम आदमी क्लीनिकों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत पंजाब के हर परिवार को बड़े प्राइवेट अस्पतालों में 10 लाख रुपए तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज मिलेगा।” उन्होंने आगे कहा, “यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “जब पिछली सरकारों ने 75 सालों में पंजाब में सिर्फ 400 क्लीनिक बनाए थे, वहीं पंजाब सरकार ने पिछले चार सालों में 881 आम आदमी क्लीनिक खोले हैं।” उन्होंने आगे कहा, “इन क्लीनिकों की ओ.पी.डी. में इलाज के लिए आने वालों की संख्या पांच करोड़ से अधिक हो गई है।” बिजली क्षेत्र के सुधारों से घरों को राहत मिली मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के 90 प्रतिशत घरों को अब जीरो बिजली बिल आता है, जिससे परिवारों को बड़ी राहत मिली है।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार बिजली की दरें घटाई गई हैं, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट 1.5 रुपए, वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए 79 पैसे और उद्योगों के लिए 74 पैसे की कटौती की गई है।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार ने 540 मेगावाट क्षमता वाला जी.वी.के. प्राइवेट पावर प्लांट खरीदा है, जिससे बिजली उत्पादन की लागत कम करने में मदद मिली है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पी.एस.पी.सी.एल., जो पहले घाटे में चल रहा था, अब लगातार तीन साल से मुनाफे में है और भारत सरकार से सबसे ऊंचा ए+ रेटिंग प्राप्त किया है।” उन्होंने यह भी कहा, “पछवाड़ा कोयला खदान से सस्ता कोयला खरीदकर सरकारी खजाने में 1,000 करोड़ रुपए की बचत की गई है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “‘रोशन पंजाब’ पहल के तहत बिजली ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने तथा 24×7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 5,000 करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है।” रोजगार क्रांति और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर रोजगार सृजन पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने राज्य में रोजगार क्रांति शुरू की है।” उन्होंने आगे कहा, “पिछले चार सालों में युवाओं को सिफारिश या रिश्वत के बिना … Read more

सदन में तकरार: भाषणबाजी पर नाराज हुए ओम बिरला, मंत्री को लगाई फटकार

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल में सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से छोटे जवाब देने का अपना आग्रह दोहराते हुए मंगलवार को कहा कि क्या मंत्री 'संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते।' प्रश्नकाल में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य जीएम हरीश बालयोगी के पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। इस दौरान बिरला ने उन्हें टोकते हुए कहा, 'आप भाषण क्यों दे रहे हैं। आप तो जवाब दो।' इसके बाद जब वर्मा दूसरे पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे तो अध्यक्ष ने कहा, 'आप लोग संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते। मैंने कितनी बार सदन में यह आग्रह किया है। हर बार विस्तृत जवाब देते हो आप। जितना (सदस्य) पूछें आप उतना जवाब दे दो।' इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होने के दौरान भी बिरला ने सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से उनके संक्षिप्त जवाब देने का अपना आग्रह दोहराया। उन्होंने कहा, 'मेरा प्रयास है कि प्रश्नकाल में सूचीबद्ध सभी 20 पूरक प्रश्न आ जाएं।' उन्होंने दोपहर 12 बजे प्रश्नकाल समाप्त होने से पहले एक सदस्य को आज का अंतिम पूरक प्रश्न पूछने का निर्देश देते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा, 'समय कम है, मत्रीजी को लंबा जवाब देना है।' विपक्ष के आठ लोकसभा सदस्यों का निलंबन रद्द लोकसभा ने मंगलवार को उन आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन रद्द कर दिया जिन्हें संसद के बजट सत्र के पहले चरण में सदन की अवमानना के मामले में निलंबित किया गया था। बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी थी। सदन में कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश ने आसन से निलंबन रद्द करने का अनुरोध किया और विपक्षी सदस्यों के आचरण पर खेद भी जताया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने निलंबन खत्म करने का प्रस्ताव सदन में रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। क्यों हुआ था निलंबन बजट सत्र के पहले चरण के दौरान तीन फरवरी को आसन की ओर कागज फेंकने के बाद, सदन की अवमानना के मामले में विपक्ष के आठ सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एस. वेंकटेशन शामिल हैं। निलंबन के बाद से ये सांसद कार्यवाही वाले दिन संसद के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे।  

गैस बुकिंग पर नया नियम! e-KYC को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय की साफ गाइडलाइन सामने

नई दिल्ली मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और देश के कुछ हिस्सों में गैस संकट की खबरों के बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण सभी के लिए हर बार अनिवार्य नहीं है। किसे करानी होगी e-KYC और किसे नहीं? मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, केवाईसी की आवश्यकता केवल विशिष्ट स्थितियों में ही होगी…      सामान्य उपभोक्ता: यदि आप उज्ज्वला योजना के तहत नहीं आते हैं और अपनी केवाईसी प्रक्रिया पहले ही पूरी कर चुके हैं, तो आपको इसे दोबारा कराने की कोई जरूरत नहीं है।      अधूरे दस्तावेज वाले ग्राहक: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण केवल उन ग्राहकों के लिए अनिवार्य है, जिनकी केवाईसी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।      उज्ज्वला योजना (PMUY) लाभार्थी: इस योजना के 10.51 करोड़ लाभार्थियों को अपनी सब्सिडी जारी रखने के लिए साल में एक बार केवाईसी अपडेट कराना होगा। 15 मार्च के आदेश पर स्पष्टीकरण गौरतलब है कि 15 मार्च को मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की बात कही थी, जिससे आम जनता में भ्रम फैल गया था। मंगलवार को मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उस आदेश का उद्देश्य केवल उन उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करना था जिन्होंने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है।  

सीएम योगी का ऐलान: यूपी में टीचर्स, वकील और पत्रकारों को मिलेंगे फ्लैट

 लखनऊ सीएम योगी ने प्रदेश में शिक्षकों, वकीलों और पत्रकारों के लिए भी आवासीय योजनाएं विकसित करने की बात कही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ किया है कि जिन लोगों के पास अपनी जमीन नहीं है, उनके लिए बहुमंजिला मकान  तैयार किए जाएंगे. सीएम योगी ने कहा कि माफियाओं ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा था, जिन्हें अब मुक्त कराकर उपयोग में लाया जा रहा है. जहां ऐसी जमीन शेष है, उसे भी खाली कराया जाएगा और मकान बनवाकर शिक्षकों, वकीलों और पत्रकारों को दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने  कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बड़ी मात्रा में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे थे. इन जमीनों को अब मुक्त कराया गया है और उनका उपयोग आम लोगों के हित में किया जा रहा है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी ऐसी जमीनें अब भी कब्जे में हैं, उन्हें प्राथमिकता से खाली कराया जाए. इन जमीनों पर हाईराइज मकान विकसित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके. मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर माफिया की जब्त की गई संपत्तियों का इस्तेमाल भी इसी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। अब सिर्फ गरीब ही नहीं, हर वर्ग पर फोकस अधिकारियों का कहना है कि अब तक आवास योजनाएं मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए केंद्रित थीं, लेकिन इस बार सरकार ने दायरा बढ़ाने की बात कही है. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी 2.0) के तहत 90 हजार लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 900 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई. यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई, जिससे वे अपने घर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकें. सरकार का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके। जो हक छीना, अब वही लौटेगा मुख्यमंत्री ने सख्त शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक गरीबों का हक छीना और जमीनों पर कब्जा किया, अब समय आ गया है कि वही संसाधन समाज के हित में वापस आएं. उनका कहना था कि यह केवल योजना नहीं, बल्कि एक तरह से सामाजिक न्याय की प्रक्रिया है, जिसमें छिने हुए अधिकार वापस दिलाने का प्रयास किया जा रहा है. सरकार के अनुसार, प्रदेश में अब तक करीब 62 लाख परिवारों को विभिन्न योजनाओं के तहत आवास उपलब्ध कराया जा चुका है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना घर हो. यह केवल एक भौतिक जरूरत नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा विषय भी है. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय को दिया। 25 करोड़ जनता ही परिवार  मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले योजनाएं होने के बावजूद उनका लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता था. अब सरकार 25 करोड़ प्रदेशवासी ही परिवार हैं” की सोच के साथ काम कर रही है. इसी कारण बिना भेदभाव हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. उनका कहना था कि जब शासन का नजरिया व्यापक होता है, तभी योजनाओं का असर जमीन पर दिखता है। बीमारू से ग्रोथ इंजन तक का दावा मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बदलती छवि का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू राज्य’ की छवि से निकलकर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उन्होंने इसे विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे में सुधार और जनकल्याणकारी नीतियों का परिणाम बताया. सरकार का कहना है कि अब केवल घर देना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उसके साथ सभी जरूरी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं. लाभार्थियों को शौचालय, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ अन्य योजनाओं का भी लाभ दिया जा रहा है. जैसे कि उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल हैं।

ICC लगाएगी बैन, बांग्लादेश क्रिकेट में नया बखेड़ा, सरकार को दी गई चेतावनी

 नई दिल्ली  बांग्लादेश क्रिकेट में इस वक्त बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि बोर्ड के मामलों में हस्तक्षेप से इंटरनेशनल लेवल पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दरअसल, खेल मंत्रालय ने पिछले साल हुए BCB चुनाव में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है. इस कमेटी को 11 मार्च से 15 कार्यदिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. जांच में 'अनियमितता, हेरफेर और सत्ता के दुरुपयोग' जैसे आरोपों की पड़ताल की जाएगी। क्रिकइंफो की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक- BCB ने अपने बयान में साफ किया कि इस मामले को लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल (ICC) के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा हो चुकी है. बोर्ड का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए क्रिकेट बोर्ड में सरकारी दखल ICC के नियमों के खिलाफ माना जाता है, जिससे बांग्लादेश पर बैन का खतरा भी पैदा हो सकता है. इससे पहले जिम्बाब्वे और श्रीलंका जैसे देशों पर इसी वजह से कार्रवाई हो चुकी है. ध्यान रहे ICC ने पहले भी सरकारी दखल के लिए जिम्बाब्वे और श्रीलंका समेत कई क्रिकेट बोर्ड को सस्पेंड किया था। सरकार से सीधे बातचीत की मांग BCB ने कहा कि वह शिकायत करने से पहले नेशनल स्पोर्ट्स काउंसिल से सीधे बात करना चाहता है, ताकि गजट के 'इरादे और असर' को समझा जा सके. साथ ही बोर्ड ने जांच कमेटी को पूरी तरह खत्म करने की मांग भी रखी है, ताकि क्रिकेट की स्थिरता बनी रहे। तमीम इकबाल के आरोप से भड़का विवाद पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने BCB अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम पर चुनाव प्रक्रिया में दखल देने का आरोप लगाया. तमीम का दावा था कि चुनाव से पहले अमीनुल ने खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर कुछ जिलों के काउंसलर बदलने को कहा. इसके अलावा नामांकन की तारीख दो बार बढ़ाने का भी आरोप लगाया गया. हालांकि, अमीनुल इस्लाम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। चुनाव के बाद भी नहीं थमा बवाल 1 अक्टूबर को तमीम इकबाल ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी. 6 अक्टूबर को चुनाव हुए, लेकिन इसके बाद भी विवाद थमा नहीं. ढाका क्लब अधिकारियों और कई अन्य समूहों ने चुनाव में 'इंजीनियरिंग' का आरोप लगाया. नतीजों के कुछ घंटों के भीतर ही खेल मंत्रालय को अपने एक निदेशक उम्मीदवार को वापस लेना पड़ा. उनके राजनीतिक संबंध सोशल मीडिया पर सामने आ गए। ढाका लीग का बहिष्कार BCB चुनाव के बाद हालात और बिगड़ गए. ढाका के कई क्लब (कैटेगरी-2) ने मौजूदा बोर्ड को 'गैरकानूनी' करार दिया और 2025-26 सीजन की ढाका लीग का बहिष्कार कर दिया।

अब डिजिटल होंगे प्राचीन ग्रंथ: पंजाब संस्कृति मंत्रालय ने लॉन्च किया ‘ज्ञान भारतम् मिशन’

चंडीगढ़. प्राचीन हस्तलिखित धरोहर यानी पांडुलिपि। इनके माध्यम से हमें अपनी संस्कृति के बारे में पता चलता है और इतिहास से जुड़ी तमाम जानकारी मिलती है। एक तरह से यह हमारी सभ्यता का अहम हिस्सा है। जो लोग इनके महत्व समझते हैं वे न केवल इसे संजो कर रखा है बल्कि दूसरों को भी इसके बारे में जागरूक कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से ज्ञान भारतम् मिशन शुरू किया गया है। ताकि इसके महत्व के बारे में बताया जाए। आने वाली पीढ़ी को इसके बारे में जानकारी दी जाए, विरासत को संभाल कर रखा जाए। साथ ही डिजिटाइज भी किया जाए। इसके तहत अलग-अलग चरण में काम होंगे। इस मिशन को चंडीगढ़ के सेक्टर-10 गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी की ओर से काम शुरू हो गया है। इसमें म्यूजियम की ओर से आम लोगों से लेकर संस्थानों, पुस्तकालयों से जोड़ा जाएगा। इस दौरान कई गतिविधियां भी होंगी। आइए जानते हैं किस तरह से विरासत, इतिहास और संस्कृति के संरक्षण की इस मिशन को लेकर काम किया जाएगा और लोग किस तरह से सहयोग कर सकते हैं। बात विरासत की है तो महत्वपूर्ण है म्यूजियम की डिप्टी क्यूरेटर सीमा गेरा ने बताया गया कि इस मिशन के तहत देशभर में काम हो रहा है। शहर में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है। यह मिशन सभी के लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि बात विरासत की है। इसको बचाने और आने वाली पीढ़ियों को पहुंचाने की है। इसलिए जरूरी है कि सभी इस मिशन में अपने स्तर पर योगदान दें। तीन महीने तक पहले चरण के तहत सर्वे म्यूजियम की क्यूरेटोरियल असिस्टेंट मेघा कुलकर्णी ने बताया कि इस मिशन के लिए चंडीगढ़ के लिए नोडल एजेंसी गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी है। हमारी ओर से काम करना शुरू कर दिया गया है। सबसे पहले इंटरनेट मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। जल्द ही वालंटियर्स को भी जोड़ा जाएगा। ताकि वह भी पहले चरण के तहत सर्वे करने में मदद करें। संस्थानों को भी सहयोग करने के लिए कहा गया है। हाल में कुछ मंदिरों में होकर आएं। इंस्टीट्यूट, म्यूजियम, लाइब्रेरी के अलावा आम लोगों के पास अगर मैनुस्क्रिप्ट है वह हम तक पहुंच सकते हैं या फिर किसी तरह की कोई परेशानी है तो हमारी टीम उन तक पहुंच जाएगी और सर्वे करने में मदद करेगी। सर्वे के लिए एक सरकार की ओर से एप तैयार की गई है। इसमें अपनी सुविधा के हिसाब से किसी भी भाषा का चयन करके जानकारी दे सकते हैं। यह मिशन इसलिए भी जरूरी है – मैनुस्क्रिप्ट हमारी धरोहर है, जो हमारे कल्चर का प्रतिनिधित्व करती है। कई इंस्टीट्यूट, म्यूजियम, लाइब्रेरी और लोगों के पास मैनुस्क्रिप्ट है। ऐसे में जरूरत है कि इन सभी को संभाल कर रखा जाए, कंजर्व किया जाए। ऐसा होगा तभी आने वाली पीढ़ी तक पहुंचा सकते हैं। इस तरह से होगा काम सर्वे: पहला चरण सर्वे है। इसमें एप के माध्यम से जानकारी देनी है। इसमे अपनी जानकारी देनी है और यह भी बताना है कितने और किस तरह के मैनुस्क्रिप्ट है। कर्जवैशन: पहला चरण जब खत्म हो जाएगा तो देखा जाएगा कि अगर मैनुस्क्रिप्ट खराब है या नहीं। अगर हालत खराब होगी तो उसको कर्जव किया जाएगा। डिजिटाइजेशन : जितने भी मैनुस्क्रिप्ट होंगे उन्हें डिजिटाइज किया जाएगा। साथ ही डाक्यूमेंटेशन भी होगा। इस में मैनुस्क्रिप्ट की टाइटल से लेकर यह जानकारी होगी कि किस विषय पर है, कब का है, हैंड रिटन है, पेट किया हुआ है या साथ में इलस्ट्रेशन है। ट्रांसलेशन इसके बाद मैनुस्क्रिप्ट को ट्रांसलेट भी किया जाएगा। ताकि युवा पीढी को पता चले कि किस मेक्या लिखा गया है। स्सिर्च-आउटरिच: यह सब होंने याद कई सेमिनार, वर्कशाप आयोजित किए जाएंगे। इस में बताया जाएगा कि क्या-क्या रिकार्ड मे है। जो रिसर्च करना चाहता है उनके लिए भी यह अहम हिस्सा है।

बोधघाट का भविष्य: नक्सल खत्म होते ही जंगल आधारित अर्थव्यवस्था में आ सकता है बड़ा बदलाव

जगदलपुर बस्तर के जंगलों में इन दिनों महुआ की खुशबू फैली हुई है। सुबह होते ही आदिवासी महिलाएं और बच्चे टोकरी लेकर पेड़ों के नीचे गिरे फूल बीनने निकल पड़ते हैं। यही महुआ कई परिवारों के लिए नकदी का बड़ा सहारा है। कुछ महीनों बाद बारिश आएगी और खेतों में धान, कोदो व कोसरा बोया जाएगा। फसल कटते ही खेत फिर खाली हो जाएंगे और ग्रामीणों के हाथ भी। यही कारण है कि प्रकृति से संपन्न होने के बावजूद बस्तर का बड़ा हिस्सा आज भी आर्थिक रूप से कमजोर बना हुआ है। दरअसल यहां की खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। बरसात खत्म होते ही खेत सूख जाते हैं और सिंचाई के अभाव में खेती रुक जाती है। ऐसे में ग्रामीणों की आय का बड़ा हिस्सा महुआ, तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज पर टिका रहता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की यही कमजोरी लंबे समय तक इस इलाके में माओवादी प्रभाव के फैलने की एक बड़ी वजह बनी। ऐसे में दक्षिण बस्तर की जीवनरेखा कही जाने वाली इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट परियोजना को इस स्थिति को बदलने वाली योजना के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह परियोजना जमीन पर उतरती है तो बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे जिलों में करीब सात लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिल सकती है। इससे खेती की तस्वीर बदलने के साथ-साथ उस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिल सकती है, जिसने कभी माओवादी आंदोलन को यहां जमीन दी थी। 60 साल बाद भी अधूरी इंद्रावती की सिंचाई योजनाएं     इंद्रावती नदी पर सिंचाई परियोजनाओं की परिकल्पना वर्ष 1960 में पं. जवाहरलाल नेहरु के दौर में की गई थी।     जनवरी 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने बहुउद्देशीय बोधघाट परियोजना की आधारशिला रखी थी।     इसके लिए केंद्र सरकार ने विश्व बैंक से करीब 300 करोड़ रुपये का ऋण भी लिया था।     करीब तीन वर्ष तक काम चलने के बाद वन एवं पर्यावरण संबंधी आपत्तियों और प्रभावित लोगों के विरोध के चलते 1986 में परियोजना पूरी तरह रोक दी गई।     दरअसल 1974 में बस्तर में 233 किमी बहने वाली इंद्रावती नदी पर बोधघाट सहित नौ सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हुई थीं।     1975 में नदी जल बंटवारे को लेकर ओडिशा से सहमति भी मिल गई थी, लेकिन आज तक एक भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी।     नतीजतन दक्षिण-मध्य बस्तर में केवल लगभग 12 प्रतिशत कृषि भूमि तक ही सिंचाई पहुंच पाई है, जिसके कारण किसान रबी की फसल मुश्किल से ले पाते हैं। बोधघाट पर राजनीति हावी, इसलिए रफ्तार सुस्त राज्य सरकार ने बोधघाट परियोजना को नए स्वरूप में आगे बढ़ाने की पहल की है और केंद्र से भी स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन डूबान क्षेत्र में आने वाले 52 जनजातीय गांवों के पुनर्वास और विस्थापन की चुनौती के कारण परियोजना की रफ्तार सुस्त है। यहीं कारण है कि एक ऐसी परियोजना जो पूरे बस्तर का भविष्य बदल सकती है, राजनीतिक दलों के नेता खुलकर पहल करने से बचते दिख रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि यदि विरोध हुआ तो उनकी राजनीतिक जमीन खिसक सकती है। प्रस्ताव के अनुसार बोधघाट को बहुउद्देशीय डैम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सिंचाई के साथ बिजली उत्पादन भी संभव होगा। साथ ही इसे नदी जोड़ो योजना से जोड़कर इंद्रावती के जल से बस्तर के बड़े हिस्से तक सिंचाई पहुंचाने की योजना है। इसके अलावा देउरगांव, मटनार और जगदलपुर की महादेव बैराज परियोजनाओं को भी इस बार राज्य बजट में शामिल किया गया है। यदि ये योजनाएं साकार होती हैं, तो बस्तर के हजारों गांवों की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। बोधघाट बनता तो कमजोर पड़ती माओवाद की जड़ें बस्तर में सिंचाई संकट के समाधान के लिए 1960 के दशक में इंद्रावती नदी की जल क्षमता के उपयोग हेतु बोधघाट परियोजना की अवधारणा बनाई गई थी। यदि यह योजना समय पर पूरी हो जाती, तो दक्षिण बस्तर की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव था। सिंचाई के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ते और गांवों में आर्थिक स्थिरता आती। 1980 के दशक में जब माओवादी संगठन दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय हुए, तब उन्होंने इस परियोजना का विरोध शुरू कर दिया। उन्हें आशंका थी कि बड़े विकास कार्यों से क्षेत्र में उनकी पकड़ कमजोर हो जाएगी। विकास के अभाव और कमजोर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का लाभ उठाकर माओवादियों ने अगले चार दशकों तक इस इलाके में अपनी जड़ें मजबूत कर लीं। इधर पड़ोसियों ने बदली तस्वीर     बस्तर की तुलना यदि पड़ोसी राज्य तेलंगाना और ओडिशा से की जाए तो अंतर साफ दिखाई देता है। बस्तर की सीमा से सटे राज्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा जलप्रबंधन और सिंचाई योजनाओं के मामले में 10 गुना आगे है।     इन राज्यों में बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाओं, जल प्रबंधन और तालाबों के पुनर्जीवन से खेती की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है।     कई क्षेत्रों में किसान साल में दो से तीन फसल ले रहे हैं।     आंध्रप्रदेश में पोलावरम, तेलंगाना में समक्का सागर परियोजना व गोदावरी-कृष्णा-कावेरी लिंक परियोजना, ओडिशा में खातीगुड़ा, कोलाब व तेलांगिरी डैम जैसी जल प्रबंधन योजनाओं के कारण कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।     इसके विपरीत बस्तर में खेती आज भी मानसून पर निर्भर है। सिचांई परियोजना बदल सकती है जंगल का गणित बस्तर की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां नदियां और वर्षा तो भरपूर हैं, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। दशकों पहले तैयार विकास योजनाओं में बताया गया था कि पूरे बस्तर में केवल एक प्रतिशत क्षेत्र में ही सिंचाई उपलब्ध थी। चार दशक बाद भी यह आंकड़ा मुश्किल से 1.5 से 2 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर देश के करीब 44 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। सिंचाई की कमी के कारण बस्तर के अधिकांश किसान साल में केवल एक ही फसल ले पाते हैं। पानी की नियमित उपलब्धता हो तो किसान दो या तीन फसल उगा सकते हैं, जिससे उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है। बस्तर में लगभग छह से सात लाख किसान परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे … Read more