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मोनालिसा की शादी पर बड़वानी सांसद का बड़ा बयान, लव जिहाद के आरोप और उच्चस्तरीय जांच की मांग

बड़वानी   मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की रहने वाली मोनालिसा द्वारा फरमान खान से विवाह करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस विवाह को लेकर 'लव जिहाद' के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसके बाद क्षेत्र की राजनीति भी गरमा गई है. बड़वानी में आयोजित विक्रमोत्सव 2026 के एक कार्यक्रम के दौरान सांसद गजेंद्र पटेल ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सांसद बोले- मोनालिसा की शादी सुनियोजित साजिश बड़वानी सांसद ने कहा, '' प्रथम दृष्टया यह सामान्य विवाह नहीं प्रतीत होता, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित साजिश की आशंका है.'' उन्होंने दावा किया कि युवती को कथित रूप से फिल्म शूटिंग के नाम पर केरल ले जाया गया, जहां उससे विवाह कराया गया. सांसद ने यह भी कहा कि इस मामले में अलग-अलग राज्यों की कड़ियां जुड़ी हुई हैं. लड़का उत्तर प्रदेश का, लड़की मध्य प्रदेश की और विवाह केरल में हुआ. ऐसे में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है. उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रकरण में संगठित स्तर पर कार्य किया गया हो सकता है, जिसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है. माता-पिता भी पहुंचे थाने, प्रताड़ना के आरोप इधर, मोनालिसा के परिजनों ने भी इस विवाह को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. परिवार का कहना है कि यह संबंध सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुआ, बल्कि युवती को बहला-फुसलाकर या दबाव में निर्णय लेने के लिए मजबूर किया गया. परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें भी प्रताड़ित किया गया और मामले को दबाने का प्रयास हुआ है. बीते मंगलवार को मोनालिसा के माता-पिता फिल्ममेकर सनोज मिश्रा के साथ मंडलेश्वर पहुंचे, जहां उन्होंने डीएसपी श्वेता शुक्ला को लिखित शिकायत की है.शिकायत में उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. सांसद ने सीएम मोहन यादव से की मुलाकात सांसद गजेंद्र पटेल ने इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने कहा, '' यदि समय रहते सच्चाई सामने नहीं आई तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है.'' वहीं, सांसद ने मीडिया के माध्यम से मोनालिसा से अपने परिवार के बारे में सोचने की अपील करते हुए कहा कि इस मामले में सच्चाई सामने आने पर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं. फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें शासन-प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं.

यात्री सुविधा: अहमदाबाद-कोलकाता और सूरत-भागलपुर एक्सप्रेस में थर्ड एसी कोच की बढ़ोतरी

भोपाल  गर्मियों में बढ़ती यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पश्चिम मध्य रेलवे ने दो प्रमुख ट्रेनों में थर्ड एसी कोच बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। रेलवे प्रशासन के अनुसार गाड़ी संख्या 19413/14 अहमदाबाद-कोलकाता-अहमदाबाद एक्सप्रेस में 27 मई से अहमदाबाद से चलने वाली तथा 30 मई से कोलकाता से चलने वाली ट्रेनों में थर्ड एसी कोच की संख्या 5 से बढ़ाकर 6 कर दी जाएगी। थर्ड एसी कोच 6 से बढ़ाकर 7 किए जाएंगे इसी तरह गाड़ी संख्या 22947/48 सूरत-भागलपुर-सूरत एक्सप्रेस में 23 मई से सूरत से तथा 25 मई से भागलपुर से चलने वाली ट्रेनों में थर्ड एसी कोच 6 से बढ़ाकर 7 किए जाएंगे। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले ट्रेनों के कोच संयोजन, समय और ठहराव की जानकारी रेलवे की अधिकृत सूचना प्रणाली से जरूर प्राप्त कर लें। अहमदाबाद-कोलकाता और सूरत-भागलपुर एक्सप्रेस के लिए नए नियम रेलवे के अनुसार, गाड़ी संख्या 19413/14 अहमदाबाद-कोलकाता-अहमदाबाद एक्सप्रेस में 27 मई को अहमदाबाद से और 30 मई को कोलकाता से चलने वाली ट्रेन में अब 5 की जगह 6 थर्ड एसी कोच लगाए जाएंगे। इसी तरह, गाड़ी संख्या 22947/48 सूरत-भागलपुर-सूरत एक्सप्रेस में 23 मई को सूरत से और 25 मई को भागलपुर से चलने वाली ट्रेन में 6 के स्थान पर 7 थर्ड एसी कोच जोड़े जाएंगे। रेलवे की यात्रियों से अपील रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ट्रेनों के कोच संयोजन, समय और ठहराव की जानकारी रेलवे की आधिकारिक सूचना प्रणाली से अवश्य प्राप्त कर लें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।

हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र समाप्त, 54 घंटे से ज्यादा चली विचारपूर्ण चर्चा

चंडीगढ़  15वीं हरियाणा विधान सभा का दूसरा बजट सत्र सार्थक चर्चा के साथ संपन्न हो गया। 20 फरवरी को शुरू हुए इस सत्र में 18 मार्च तक कुल 13 बैठकें हुईं, जिनमें लगभग 54 घंटे 24 मिनट सकारात्मक और सार्थक चर्चा हुई। इस दौरान अनेक विषयों पर सदन का माहौल गर्म भी हुआ, जिसे विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने अपनी कुशलता से संभाला और कार्य उत्पादकता की मिसाल पेश की। सत्र संपन्न होने के अगले दिन वीरवार को मीडिया में जारी एक बयान में विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने बताया कि बजट सत्र 20 फरवरी को राज्यपाल प्रो. असीम घोष द्वारा प्रस्तुत किए गए अभिभाषण से शुरू हुआ था। इस अभिभाषण पर सदन में 23, 24, 25, 26 और 27 फरवरी को कुल 7 घंटे 58 मिनट व्यापक चर्चा करवाई गई।  इस चर्चा में मुख्यमंत्री समेत भाजपा के 19 सदस्य 217 मिनट, कांग्रेस के 14 सदस्य 229 मिनट, इनेलो के 2 सदस्य 24 मिनट तथा 2 निर्दलीय विधायकों ने 8 मिनट अपनी बात रखी। 2 मार्च को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट प्रस्तुत किया। सदन में 5, 6, 9 और 17 मार्च को 10 घंटे 3 मिनट इस पर चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री सहित भाजपा के 15, कांग्रेस के 7 तथा 3 निर्दलीय विधायकों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री के जवाब सहित भाजपा को 407 मिनट, कांग्रेस को 167 मिनट तथा निर्दलीय विधायकों को 29 मिनट का समय मिला। सत्र के दौरान 6 दिन शून्यकाल रहे। इस दौरान 5 घंटे 3 मिनट चली कार्यवाही में भाजपा के 23 विधायक 129 मिनट बोले, कांग्रेस के 24 विधायक 139 मिनट बोले, इनेलो के 2 विधायक 23 मिनट तथा निर्दलीय 3 विधायकों को 12 मिनट का समय मिला। इनेलो के एक विधायक को दो बार बोलने का मौका मिला। इस प्रकार कुल 52 विधायकों ने शून्यकाल में हिस्सा लिया। बजट सत्र के दौरान 11 दिन प्रश्नकाल हुए। इसके लिए 220 तारांकित प्रश्न शामिल किए गए थे, इनमें से 168 के जवाब हाउस में दिए गए। विधान सभा सचिवालय को 57 सदस्यों से 390 तारांकित प्रश्नों के लिए नोटिस प्राप्त हुए थे, इनमें से 258 एडमिट हुए। इनमें भाजपा के 23, कांग्रेस के 29, इनेलो के 2 तथा 3 निर्दलीय विधायकों ने प्रश्नों के लिए नोटिस भेजे। इस दौरान एक रिकॉर्ड यह बना कि लगातार 3 दिन और कुल 4 दिन निर्धारित सभी सवालों के जवाब सदन में दिए गए। इसी प्रकार 28 विधायकों की ओर से 183 अतारांकित प्रश्नों के नोटिस प्राप्त हुए। अतारांकित प्रश्न लगाने वालों में भाजपा के 10, कांग्रेस के 15 इनेलो के 2 तथा एक निर्दलीय विधायक शामिल रहा। इनमें से 145 अतारांकित प्रश्न स्वीकृत हुए। सभी 145 प्रश्नों के जवाब विधायकों को भेजे गए। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के लिए 32 नोटिस प्राप्त हुए थे, इनमें से 5 स्वीकृत हुए। इसी प्रकार कार्य स्थगन प्रस्ताव के लिए 4 नोटिस प्राप्त हुए, जिनमें से एक स्वीकृत किया गया। सत्र के लिए 8 विधेयकों के प्रारूप मिले थे। ये सभी चर्चा उपरांत पारित कर दिए गए। सत्र के दौरान 2 सरकारी संकल्प भी पारित किए गए। इनमें आवासन बोर्ड को भंग कर इसका एचएसवीपी में विलय करने तथा सफाई कर्मचारी नियोजन एवं शुष्क शौचालय निर्माण अधिनियम, 1993 के निरसन शामिल हैं। इसके अलावा नियम 84 के अधीन ‘विकसित भारत जी-राम’ योजना के प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। नियम 66 व 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा भी चर्चा हुई। यह स्थगन प्रस्ताव हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग और हरियाणा लोक सेवा आयोग की हाल ही में आयोजित भर्ती के बारे में था। नियम 171 के तहत एक गैर सरकारी प्रस्ताव पर भी पारित किया गया। इसके तहत सदन ने राज्य सरकार से केन्द्र सरकार को यह सूचित करने के लिए सिफारिश की कि जी.एस.टी. के अतंर्गत टैक्स स्लैब में संशोधन सराहनीय तथा प्रशंसनीय है। इस बीच अध्यक्ष ने कुछ मुख्य रूलिंग्स भी दी, जिनमें राज्य सभा चुनाव संबंधी भी प्रमुख रही। सत्र के दौरान बजट का अध्ययन करने के लिए गठित 8 स्थायी समितियों समेत अनेक कमेटियों की वार्षिक रिपोर्ट्स भी पेश हुईं। इनमें एक प्रिविलेज कमेटी की फाइनल रिपोर्ट भी शामिल है। सत्र के बीच होली पर्व आया। इस अवसर विधान परिसर में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। सत्र के अंतिम दिन गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा प्राकृतिक खेती पर विशेष व्याख्यान दिया गया। उनके मार्गदर्शन से सदन को विशेष जानकारी मिली। इस सत्र के दौरान अलग-अलग दीर्घाओं में 2139 दर्शकों ने सदन की कार्यवाही देखी। 

स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती: किशनगंज में मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन का प्रस्ताव भेजा गया

किशनगंज. किशनगंज में स्वीकृत मेडिकल कॉलेज का निर्माण ठाकुरगंज के कृषि मैदान के समीप हो सकता है। जमीन का चयन कर जिला से इसका प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि, फिलहाल इसकी स्वीकृति की सूचना जिला प्रशासन को नहीं मिली है। जानकारी के अनुसार बिहार सरकार के मंत्रीपरिषद में किशनगंज में मेडिकल कॉलेज बनाने की स्वीकृति प्रदान की थी। जिस आलोक में बीएसएएसआईसीएस के प्रबंध निदेशक ने डीएम को पत्र भेजकर राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल के निर्माण के लिए जमीन का चयन कर प्रस्ताव मांगा था। इसमें कहा गया था कि वर्तमान में 13 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। सरकार से 20 जिलो में नये मेडिकल कॉलेज के निर्माण की स्वीकृति प्राप्त है। इसको लेकर जमीन उपलब्ध कराने के दिशा में पहल हो रही है। 11 मार्च को पहुंचे थे सीएम नीतीश कुमार उल्लेखनीय है कि 11 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ठाकुरगंज पहुंचे थे। मुख्यमंत्री के पहुंचने पर ठाकुरगंज के लोगों में मेडिकल कॉलेज के नींव डालने की उम्मीद थी। लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी। सभा के दौरान मेडिकल कॉलेज ठाकुरगंज में बनने को लेकर नारेबाजी भी की गई। स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने अपने संबोधन में कई मांगों के साथ मेडिकल कॉलेज ठाकुरगंज में खोलने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि मेडिकल कॉलेज खुलने से कई प्रखंडों के लोगों को फायदा होगा। हालांकि अपने संबोधन के क्रम में गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने ठाकुरगंज में मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कही थी। बावजूद, लोग शिलान्यास नहीं होने से निराश थे। लोगों को मिलेगा फायदा भाजपा के जिला प्रवक्ता कौशल किशोर यादव ने बताया कि ठाकुरगंज में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से कई प्रखंड के साथ ही पड़ोसी राज्य बंगाल के लोगों को भी काफी लाभ होगा। जिस जमीन का चयन किया गया है वह एनएच के समीप स्थित है। जिससे आपातकालीन स्थिति में लोगों को काफी फायदा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यहां जल्द मेडिकल कॉलेज निर्माण कराने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि मेडिकल कॉलेज अपने इलाके में खोलने के लिए विधायक सरवर आलम, तौसीफ आलम ने भी पत्राचार किया था। जमीन का चयन कर प्रस्ताव भेजा – मेडिकल कालेज के लिए ठाकुरगंज में जमीन का चयन कर प्रस्ताव भेजा गया है। अन्य दूसरी जगह उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो रही है। हालांकि चयनित जमीन की स्वीकृति विभाग द्वारा दी गई है या नहीं इसकी सूचना अबतक नहीं आई है। – विशाल राज, डीएम

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी सौगात: ईद के मौके पर पंजाब में खुलेगा नया मेडिकल कॉलेज

चंडीगढ़. मलेरकोटला में मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए जमीन खरीद ली गई है। आज उसकी सारी कागजी कार्रवाई शुरू हो जाएगी।कल ईद के मुबारक मौके पर मलेरकोटला को नया मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए जमीन के कागजात सौंप दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्वास्थ्य से संबंधित सरकार की करगुजारियों को मीडिया के सामने रखते हुए ये जानकारी सांझा की है। सीएम ने बताया कि लहरागागा में जैन मेडिकल समुदाय की ओर से मेडिकल कॉलेज बनाया जा रहा है जबकि संगरूर में बनने वाले मेडिकल कॉलेज की भी सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई हैं इन पर जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि पंजाब का पहला पंजाब इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर भी शुरू किया जा चुका है जो मोहाली में सफलतापूर्वक चल रहा है। कैंसर की रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदम सीएम मान कहा कि सरकार ने पहले से ही आठ केंद्रों पर सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध करवाई हुई थी और अब पेट स्कैन की सुविधा भी उपलब्ध करवा दी गई है । यही नहीं 200 ऐसे लैब के साथ भी समझौता किया हुआ है जो सीटी स्कैन करवाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैंसर पर नकेल कसने के लिए पहले से ही स्क्रीनिंग करने का काम स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 1 सितंबर से लेकर 9 मार्च तक 9294 ब्रेस्ट से संबंधित स्क्रीनिंग की गई जिसमें से आठ मामले संभावित कैंसर की नजर आए हैं जिनका इलाज शुरू किया जा चुका है। मेडिकल कॉलेजों में दिल के रोगों का इलाज इसी तरह दिल के रोगों के लिए भी 29000 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और पंजाब के पटियाला ,अमृतसर और फरीदकोट स्थित मेडिकल कॉलेज में दिल के रोगों संबंधी इलाज और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा चुकी है। जबकि पहले यह सिर्फ सीएमसी और सेक्टर 32 के मेडिकल कॉलेज में ही सुविधा उपलब्ध थी। हार्ट अटैक होने पर मरीजों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंच कर उसे बचाना ही सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

बोर्ड मूल्यांकन जारी: अवकाश में भी कॉपियां जांचेंगे शिक्षक, स्कूलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

राजनांदगांव. संस्कारधानी राजनांदगांव जिला मुख्यालय स्थित स्टेट हायर सेकेंडरी स्कूल में पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 10वीं और 12वीं बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन कराया जा रहा है. बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन अवकाश के दिनों में भी कराया जाएगा जिसके लिए दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं. चार दिनों से बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सुनिश्चित कराया जा रहा है. स्कूल समन्वयक की माने तो अब तक 24000 से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूर्ण कर लिया गया है आज भी 300 शिक्षकों 8000 से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूर्ण किया है. जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल सहित मूल्यांकन प्रभारी के देखरेख में मूल्यांकन कार्य का नियमित रूप से कराया जा रहा है. समन्वयक केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रत्येक शिक्षक प्रतिदिन 40 कॉपियां जांच रहे है. प्रथम चरण में मूल्यांकन के लिए 61,000 से अधिक उत्तर पुस्तिकाएं पहुंची हैं. स्टेट हायर सेकेंडरी स्कूल में मूल्यांकन कार्य कराए जाने के कारण आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. 100 मीटर के दायरे में लोगों का प्रवेश भी पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है. प्रवेश द्वार से लेकर भीतरी क्षेत्र में मूल्यांकन कार्य में जुटे लोगों को ही की अनुमति दी जा रही है. प्रतिदिन एक से डेढ़ हजार कॉपियों का मूल्यांकन सुनिश्चित कराया जा रहा है. चार दिन के भीतर शिक्षकों ने अब तक 24000 से अधिक कॉपियों का मूल्यांकन पूर्ण कर लिया है.

शांति, विश्वास और विकास-बस्तर हेरिटेज मैराथन एक मज़बूत संदेश

हिंसा की राह छोड़, उम्मीदों की दौड़, बस्तर नई पहचान की ओर शांति, विश्वास और विकास-बस्तर हेरिटेज मैराथन एक मज़बूत संदेश बस्तर की वादियों में गूँजेगी बदलाव की नई आहट, बस्तर हेरिटेज मैराथन को लेकर पुनर्वासित जनों में अभूतपूर्व उत्साह खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार की घोषणा  रायपुर बस्तर में आपका स्वागत है, जहाँ विरासत जीवंत है और प्रकृति साँस लेती है। बस्तर हेरिटेज मैराथन में प्राचीन वन, जीवंत आदिवासी संस्कृति और मनमोहक परिदृश्य समाहित हैं। धावक साल के पेड़ों से घिरे सुरम्य मार्गों और प्राचीन गाँवों से गुजरेंगे, और हर कदम पर बस्तर की सुंदरता का अनुभव करेंगे। छत्तीसगढ़ के बस्तर में रोमांच और प्रकृति के बीच एक खास आयोजन होने जा रहा है। 22 मार्च 2026 को बस्तर हेरिटेज मैराथन  2026 का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के धावक हिस्सा ले सकेंगे। इस मैराथन की शुरुआत जगदलपुर के लाल बाग मैदान से होगी और फिनिश लाइन एशिया के नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात पर होगी। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि की घोषणा की गई है।           बस्तर की शांत वादियों में इस बार केवल प्रकृति का संगीत नहीं, बल्कि बदलाव और विकास के संकल्प की एक अभूतपूर्व गूँज सुनाई देने वाली है।  इस मैराथन की सबसे गौरवशाली और मानवीय तस्वीर उन आत्म-समर्पित माओवादियों के रूप में उभर कर सामने आ रही है, जो कभी दुर्गम जंगलों के अंधेरों में भटकते थे, लेकिन अब समाज की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा बनकर इस खेल महाकुंभ में अपनी शारीरिक शक्ति और जीवटता का परिचय देने को बेताब हैं। हिंसा का मार्ग त्याग कर शांति की राह चुनने वाले इन युवाओं का यह उत्साह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बस्तर अब पुराने संघर्षों के साये से बाहर निकलकर खेल, साहस और शौर्य के वैश्विक मंच पर अपनी एक नई और सकारात्मक पहचान गढ़ रहा है।              इस मैराथन में 42 कि.मी., 21 कि.मी., 10 कि.मी. और 5 कि.मी. जैसी अलग-अलग कैटेगरी रखी गई हैं, ताकि हर स्तर के रनर्स इसमें भाग ले सकें। प्रतियोगिता में 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी रखी गई है और बस्तर संभाग के धावकों के लिए अलग से पुरस्कार की व्यवस्था की गई है। यह आयोजन बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती, संस्कृति और खेल भावना को एक साथ जोड़ने का खास मौका बनने जा रहा है।          बस्तर की फिजाओं में अब हिंसा के बारूद की नहीं, बल्कि उम्मीदों और सपनों की उड़ान की खुशबू तैर रही है। कभी जिन हाथों में बंदूकें हुआ करती थीं और जो पैर घने जंगलों की खाक छानते थे, वे अब बस्तर मैराथन के ट्रैक पर अपनी किस्मत आजमाने और एक नई पहचान बनाने को पूरी तरह तैयार हैं। दंतेवाड़ा के लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान और पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) जैसे प्रभावी पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से दर्जनों पूर्व नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने का ऐतिहासिक फैसला किया है। शासन की कल्याणकारी पुनर्वास नीति के तहत ये युवा अब अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग कर रहे हैं और जंगल की संकरी पगडंडियों पर छिपने के बजाय मैराथन की फिनिशिंग लाइन को छूने का लक्ष्य लेकर कड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं।             स्थानीय खेल मैदानों में आयोजित अभ्यास सत्रों के दौरान इन युवाओं का जोश देखते ही बनता है, जहाँ पसीने से तर-बतर चेहरे और दृढ़ संकल्प वाली आँखें बस्तर के बदलते स्वरूप की गवाही दे रही हैं। प्रशिक्षकों का मानना है कि इन युवाओं में अदम्य साहस और बेमिसाल स्टेमिना है, जिसे अब आधुनिक रनिंग तकनीकों के माध्यम से तराशा जा रहा है ताकि वे न केवल दौड़ें, बल्कि जीत का परचम भी लहरा सकें। इस बदलाव का मानवीय पक्ष तब और उभर कर आता है जब शिविर की महिला प्रतिभागी भावुक होकर बताती हैं कि डर के साये से निकलकर अब उन्हें समाज में सम्मान और सुरक्षा मिल रही है। यह अनूठी पहल केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जंगल की हिंसा और भटकाव को पीछे छोड़कर एथलेटिक्स में करियर बनाने का एक सुनहरा अवसर है। अनुभवी कोचों द्वारा दी जा रही प्रोफेशनल ट्रेनिंग इन युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ बना रही है, जिससे वे स्थानीय समुदाय के साथ जुड़कर एक नई पहचान तलाश रहे हैं।           अंततः यह प्रयास बस्तर में शांति, विश्वास और प्रगति का एक सशक्त संदेश दे रहा है, जहाँ पूरा दंतेवाड़ा इन युवाओं के हौसले को सलाम करते हुए मैराथन के ट्रैक पर उनकी ऐतिहासिक जीत की राह देख रहा है। इस मैराथन के माध्यम से ये पूर्व माओवादी न केवल अपनी दमखम का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश भी देंगे कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो बस्तर का हर हाथ राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सहभागी बन सकता है। ऐतिहासिक लालबाग मैदान की मिट्टी से शुरू होकर विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के कल-कल करते तटों पर समाप्त होने वाली यह 42 किलोमीटर की श्फुल मैराथनश् इन समर्पित युवाओं की भागीदारी को विशेष रूप से रेखांकित करेगी।         आयोजन को पूरी तरह समावेशी बनाने के उद्देश्य से इसमें 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर की दौड़ और 5 किलोमीटर की श्फन रनश् जैसी श्रेणियां भी रखी गई हैं, जहाँ बस्तर के स्थानीय धावकों और मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन ने 25 लाख रुपये की विशाल इनामी राशि की घोषणा की है, जिसमें बस्तर कैटेगरी के विशेष प्रावधानों ने स्थानीय समुदायों के साथ-साथ इन युवाओं के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया है। विशेषकर 10 किलोमीटर की श्रेणी में जूनियर और ओपन वर्ग के अलग-अलग प्रावधानों ने पहली बार दौड़ने वाले युवाओं और फिटनेस प्रेमियों के बीच जबरदस्त आकर्षण पैदा किया है। स्थानीय सहभागिता को अधिकतम करने के लिए बस्तर जिले के सभी धावकों हेतु पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, ताकि कोई भी प्रतिभा आर्थिक तंगी के कारण इस ऐतिहासिक अवसर से वंचित न रह जाए।         … Read more

मध्यप्रदेश में राज्य वित्त आयोग का गठन, जयभान सिंह पवैया नियुक्त हुए अध्यक्ष

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। जिन नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद थी, अब उन्हें निगम-मंडल और आयोगों में एडजस्ट किया जा सकता है। भाजपा नेतृत्व जल्द ही राजनीतिक नियुक्तियों की बड़ी सूची जारी कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, 2023 विधानसभा चुनाव में जीतने के बाद भी कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों को कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई थी। ऐसे नेताओं को अब निगम-मंडल अध्यक्ष बनाकर संतुलन साधने की रणनीति बनाई जा रही है। मध्य प्रदेश में मंडल आयोग में नियुक्तियों की शुरुआत हो गई है। मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग  राज्य वित्त आयोग के गठन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। आयोग में जयभान सिंह पवैया को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि केके. सिंह सदस्य और वीरेंद्र कुमार सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। अन्य सदस्यों की नियुक्ति अलग से की जाएगी। भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत तथा मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के अनुसार राज्यपाल द्वारा नए राज्य वित्त आयोग का गठन किया गया है।  इन कामों पर देगा अपनी सिफारिश आयोग के अध्यक्ष और सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तिथि से 31 अक्टूबर 2026 तक कार्य करेंगे। आयोग का मुख्य कार्य पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति का पुनर्विलोकन करना होगा। आयोग राज्य के करों, शुल्कों, पथकरों और फीस से प्राप्त आय के राज्य एवं स्थानीय निकायों के बीच वितरण के सिद्धांत तय करेगा। साथ ही पंचायतों और नगरीय निकायों को मिलने वाले अनुदानों, वित्तीय सुधार उपायों और संसाधनों के न्यायसंगत बंटवारे पर सुझाव देगा। मंत्रिमंडल के दावेदारों को मिलेगा नया मौका भाजपा संगठन उन नेताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी में है, जो मंत्री पद के प्रबल दावेदार थे लेकिन कैबिनेट में शामिल नहीं हो पाए। इनमें कुछ कांग्रेस से आए विधायक भी शामिल बताए जा रहे हैं। चर्चा में शामिल प्रमुख नामों में गोपाल भार्गव, मालिनी, लक्ष्मण सिंह गौड़, बृजेंद्र सिंह यादव, अजय विश्नोई और अर्चना चिटनीस जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। दिल्ली तक पहुंचा मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पूरे मामले पर दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा की है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah  से मुलाकात कर क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को लेकर रणनीति पर विचार किया है।  2028 चुनाव की तैयारी भाजपा का फोकस अब 2028 के विधानसभा चुनाव पर है। पार्टी पुराने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। सूत्रों का कहना है कि यह नियुक्तियां पार्टी के भीतर असंतोष को कम करने और नेताओं को “एडजस्ट” करने के लिए की जा रही हैं। कई महत्वपूर्ण आयोगों में खाली पद राज्य में कई अहम आयोग लंबे समय से नेतृत्व विहीन हैं— महिला आयोग अनुसूचित जाति आयोग अनुसूचित जनजाति आयोग पिछड़ा वर्ग आयोग अल्पसंख्यक आयोग इन सभी में अध्यक्ष और कई पद खाली हैं, जिससे लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कब आएगी सूची? पार्टी सूत्रों के अनुसार, चैत्र नवरात्र के बाद कभी भी निगम-मंडल और आयोगों की नियुक्तियों की सूची जारी हो सकती है। इन मुद्दों पर भी देगा अपनी सिफारिशें  आयोग स्थानीय निकायों की वित्तीय मजबूती के लिए कई अहम बिंदुओं पर अनुशंसाएं देगा, जिनमें भूमि कर एवं राजस्व के बंटवारे के प्रावधान, पेट्रोलियम उत्पादों से मिलने वाले कर का हिस्सा, पंचायतों व नगरीय निकायों की ऋण सीमा और पुनर्भुगतान व्यवस्था, स्थानीय निकायों के व्यय और आय के संतुलन के उपाय, जन-सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के सुझाव और पर्यावरण संरक्षण और योजनाओं के प्रभावी संचालन के उपाय शामिल हैं। आयोग 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच वर्ष की अवधि के लिए अपनी सिफारिशें राज्यपाल को प्रस्तुत करेगा। 

भगवंत मान सरकार की पहल, मेडिकल शिक्षा में विस्तार और दूसरे संस्थान की घोषणा: डॉ. बलबीर सिंह

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज कपूरथला में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की घोषणा की। यह इस महीने घोषित किया जाने वाला दूसरा ऐसा संस्थान है, इससे पहले होशियारपुर में शहीद ऊधम सिंह स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज का ऐलान किया गया था। श्री गुरु नानक देव जी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के रूप में यह नई सुविधा कपूरथला के मौजूदा जिला अस्पताल परिसर में स्थापित की जाएगी। आज यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “टेंडरिंग प्रक्रिया सहित सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और कार्यकारी एजेंसियों को काम के आदेश जारी कर दिए गए हैं। निर्माण कार्य 25 मार्च, 2026 से शुरू कर दिया जाएगा और मार्च 2028 तक 24 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।” उन्होंने आगे बताया, “275 करोड़ रुपये की कुल लागत से स्थापित किए जाने वाले इस प्रोजेक्ट में 300 बिस्तरों वाला अस्पताल और एक मेडिकल कॉलेज शामिल होगा, जिसमें हर साल एमबीबीएस की 100 सीटें होंगी। इससे न केवल राज्य की मेडिकल शिक्षा क्षमता बढ़ेगी बल्कि पंजाब के विद्यार्थियों को महंगी मेडिकल पढ़ाई के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।” इस पहल के सकारात्मक प्रभावों के बारे में बताते हुए मंत्री ने कहा, “एक बार शुरू होने के बाद यह संस्थान न सिर्फ 100 एमबीबीएस सीटों की वृद्धि करेगा, बल्कि क्षेत्र के लोगों को अत्याधुनिक सेकेंडरी और टर्शियरी स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रदान करेगा। यह संस्थान रोजगार का एक बड़ा स्रोत बनेगा, जिससे 1000 से अधिक लोगों को सीधे तौर पर लाभ होगा और कई लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।” स्वास्थ्य क्षेत्र में अन्य उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए सुल्तानपुर लोधी के सरकारी अस्पताल को शहरी केंद्र के रूप में अपग्रेड किया जाएगा और बेगोवाल के सरकारी अस्पताल को ग्रामीण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। दोनों को कपूरथला के नए मेडिकल कॉलेज से जोड़ा जाएगा।” लगभग 5 लाख वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में बनने वाले इस प्रोजेक्ट में छह बड़े ऑपरेशन थिएटर, 500 क्षमता वाला ऑडिटोरियम, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएं, एक केंद्रीय प्रयोगशाला, एक ब्लड बैंक और कौशल प्रयोगशालाओं व संग्रहालयों से सुसज्जित आधुनिक शैक्षणिक विभाग शामिल होंगे। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव कुमार राहुल, पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉरपोरेशन के चेयरमैन गुरशरण सिंह छीना और पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक अमित तलवार भी उपस्थित थे।

धामी सरकार में कैबिनेट विस्तार, 5 विधायकों को मिला मंत्री पद

देहरादून   उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार के कैबिनेट का आज विस्तार हुआ। कैबिनेट विस्तार में 5 मंत्रियों को राज्यपाल गुरमीत सिंह ने शपथ दिलाई। कैबिनेट में मंत्री की शपथ लेने वाले विधायकों में मदन कौशिक प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, भरत सिंह चौधरी और खजान दास शामिल रहे। इन विधायकों के शपथ के साथ ही पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट में अब मुख्यमंत्री समेत 12 सदस्य हो गए हैं। अभी कैसा है धामी कैबिनेट का स्वरूप उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट में अब मुख्यमंत्री समेत12 सदस्य हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज 5 नए मंत्रियों को शपथ दिलाने के बाद कैबिनेट सदस्यों की संख्या 7 से अब 12 हो गई। इन पांच विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ  1    मदन कौशिक 2. खजान दास 3. राम सिंह कैडा 4. प्रदीप बत्रा 5. भरत चौध ये रहे धामी सरकार के नए सिपाही खजान दास (अनुसूचित जाति): देहरादून जिले की राजपुर सीट से लगातार दो बार चुनाव जीतने वाले खजान दास भुवन खंडूरी सरकार में शिक्षा राज्यमंत्री रह चुके हैं. साल 2007 में टिहरी जिले से जीते थे चुनाव. संगठन के पदों पर भी रह चुके हैं खजान दास. फिलहाल बीजेपी के प्रवक्ता भी हैं खजानदास. प्रदीप बत्रा (पंजाबी समाज): हरिद्वार जिले में रुड़की विधानसभा से तीन बार के विधायक प्रदीप बत्रा पंजाबी समाज से आते हैं. हरीश रावत सरकार के दौरान जिन कांग्रेसी विधायकों ने बगावत करके बीजेपी का दामन थामा था, उसमें बत्रा भी शामिल रहे हैं. बीजेपी संगठन में बत्रा की अच्छी पकड़ मानी जाती है. मदन कौशिक (ब्राह्मण): हरिद्वार से पांच बार के विधायक मदन कौशिक, बीजेपी का बड़ा ब्राह्मण चेहरा हैं। पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे, कौशिक बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सदस्य हैं. कौशिक 2002 में पहली बार हरिद्वार से विधायक चुने गए थे. तब से लगातार हरिद्वार से विधायक हैं कौशिक. राम सिंह कैड़ा (ठाकुर): नैनीताल जिले की भीमताल सीट से दो बार के विधायक राम सिंह कैड़ा पहली बार बीजेपी के टिकट पर विधायक बने हैं। 2017 में कैड़ा, निर्दलीय के तौर पर भीमताल से जीते थे. छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले राम सिंह कैड़ा लंबे समय तक कांग्रेस से भी जुड़े रहे. भरत चौधरी (ठाकुर): रुद्रप्रयाग जिले की रुद्रप्रयाग विधानसभा से दो बार के बीजेपी विधायक भरत चौहान राजनीति में चार दशक से हैं. इनको मंत्री बनकर बीजेपी ने क्षेत्रीय संतुलन साधने का मैसेज दिया है. भरत चौधरी ने संस्कृत भाषा में शपथ लिया.