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अवैध कॉल सेंटर पर ED की रेड: बंगाल में 16 जगहों पर छापेमारी, करोड़ों की संपत्ति सीज

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में अवैध कॉल सेंटर केस में बड़ी कार्रवाई की है। कोलकाता जोनल ऑफिस ने 16 मार्च 2026 को राज्य के विभिन्न शहरों, कोलकाता, हावड़ा, सिलीगुड़ी और दुर्गापुर, में कुल 16 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। ये छापेमारी टेक्नोसोलिस इन्फॉर्मेटिक्स लिमिटेड, सुराश्री कर, सुभाजीत चक्रवर्ती और उनके सहयोगियों से जुड़ी हैं। तलाशी के दौरान ईडी ने महत्वपूर्ण जब्तियां कीं। इनमें 2.5 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), सोने के सिक्के, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े रिकॉर्ड, आपत्तिजनक दस्तावेज और कई डिजिटल डिवाइस शामिल हैं। इसके अलावा, जांच में कई अचल संपत्तियों की पहचान हुई, जिनमें जमीन, होटल और रिसॉर्ट आदि हैं। इनकी अनुमानित कीमत 20 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। ये संपत्तियां कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।  ईडी ने दो बांग्लादेशी पासपोर्ट और चार लग्जरी वाहन भी जब्त किए, जिनमें एक मर्सिडीज कार शामिल है। सिलीगुड़ी के एक स्थान से 88 विभिन्न ब्रांड की शराब की बोतलें बरामद हुईं, जिन्हें पश्चिम बंगाल आबकारी विभाग को सौंप दिया गया। यह कार्रवाई राज्य में 2026 के विधानसभा चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है, क्योंकि अवैध गतिविधियां राजनीतिक फंडिंग या प्रभाव से जुड़ी हो सकती हैं। यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें आईपीसी 1860 और भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। आरोपी एक बड़े अवैध कॉल सेंटर नेटवर्क चला रहे थे, जिसमें मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को टारगेट किया जाता था। वे फर्जी तरीके से लोगों को ठगते थे, जैसे तकनीकी सहायता या अन्य सेवाओं के नाम पर, और फिर उनके बैंक खातों से पैसे निकालते थे। इस धोखाधड़ी से कमाया गया पैसा गैर-कानूनी चैनलों से भारत लाया जाता था। पीएमएलए के तहत जांच में सामने आया कि टेक्नोसोलिस इन्फॉर्मेटिक्स लिमिटेड और स्वर्गीय दिबांगकर धारा, सुराश्री कर, सुभाजीत चक्रवर्ती सहित अन्य कंपनियों के नाम पर कई बैंक खाते खोले गए थे। इन खातों का इस्तेमाल विदेशी मुद्रा प्राप्त करने और 'अपराध से प्राप्त धन' को लॉन्डर करने के लिए किया जाता था। ये कंपनियां अवैध कॉल सेंटर के संचालन से जुड़ी हुई हैं। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सख्त रुख का हिस्सा है। छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों और डिवाइस की जांच से और अधिक खुलासे होने की संभावना है। आगे की जांच जारी है, जिसमें और गिरफ्तारियां और जब्तियां हो सकती हैं।

अमेरिका का बड़ा कदम: USS त्रिपोली पहुंचा मिडिल ईस्ट, क्या जंग की आहट तेज?

ईरान ईरान युद्ध का आज 21वां दिन है। एक तरफ इजरायली और अमेरिकी सेना ईरान पर मिसाइलें और बंकर बस्टर बम गिरा रहीं हैं, वहीं ईरान भी इजरायल और अमेरिका को कड़ा जवाब दे रहा है। ईरान ने एक दिन पहले ही इजरायल की हाइफा रिफायनरी पर बड़ा हमला किया है और अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को भी मिसाइल से निशाना बनाया है। 20 दिनों की जंग में अब तक अमेरिका के तीन F-35 फाइटर जेट और 6 KC ट्रैंकर नष्ट हो चुके हैं। इस बीच, अमेरिका ने ईरान युद्ध के खात्मे की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट में तीन युद्धपोत भेजे हैं। इनमें उभयचर युद्धपोत ‘USS Tripoli' और USS Boxer भी शामिल है। इस तरह अमेरिका 4000 नए सैनिकों की तैनाती खाड़ी देशों के करीब करने जा रहा है, जो ईरान से जंग लड़ेंगे। अमेरिका जिन युद्धपोतों को मिडिल-ईस्ट में भेज रहा है, वे आधुनिक मिसाइलों से लैस हैं। इनके अलावा उन पर F-35 फाइटर जेट भी तैनात हैं। माना जा रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट के पास बढ़े तनाव को कम करने और उसे ईरानी कब्जे से उसे मुक्त कराने के लिए अमेरिका ने ये कदम बढ़ाया है। सैटेलाइट तस्वीरों में USS Tripoli को दक्षिण चीन सागर से गुजरते हुए देखा गया है। उसके साथ दो एस्कॉर्ट शिप भी देखे गए हैं। इस युद्धपोत के 22-23 मार्च के आस-पास युद्ध क्षेत्र में प्रवेश करने की उम्मीद है। क्या है USS त्रिपोली? यूएसएस त्रिपोली (USS Tripoli – LHA-7) अमेरिका-श्रेणी का दूसरा उभयचर हमलावर जहाज है, जिसे विशेष रूप से हवाई हमलों और मरीन सैनिकों को तैनात करने के लिए विकसित किया गया है। यह करीब 2500 सैनिक ले जाने में सक्षम है। फिलहाल इस पर 2000 नौसैनिक तैनात हैं। USS Tripoli की लंबाई करीब 844 फीट और वजन 45,000–50,000 टन के बीच है। इस पर F-35B लाइटनिंग II जैसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट, MV-22 Osprey (ऑस्प्)रे और विभिन्न प्रकार के अटैक हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं। इसका मुख्य काम समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना और जरूरत पड़ने पर जमीनी हमले के लिए सैनिकों को तैयार रखना है। इसमें लैंडिंग क्राफ़्ट के लिए "वेल डेक" नहीं है। इस डिज़ाइन की वजह से इसमें एक बड़ा हैंगर, ज़्यादा एविएशन फ़्यूल और विमानों के रखरखाव के लिए अधिक जगह मिल पाती है। अपने साथ MEU जवान ले जा रहा USS Tripoli अपने साथ 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट (MEU) के जवानों को ले जा रहा है। यह एक रैपिड-रिस्पॉन्स फ़ोर्स है जिसमें जापान के ओकिनावा में तैनात लगभग 2,200 मरीन और नौसेना के नाविक शामिल हैं। MEU में जमीनी और हवाई, दोनों तरह की लड़ाकू इकाइयाँ शामिल हैं। Fox News की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन USS Tripoli ARG को 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट (MEU) के साथ तैनात कर रहा है, जो उसके अपने स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है। ईरान के लिए सख्त संदेश न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय पश्चिम एशिया में 50,000 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। तीनों युद्धपोत खासकर USS त्रिपोली के आने से इस क्षेत्र में पहले से मौजूद अमेरिकी सेना की बड़ी टुकड़ी और बड़ी हो जाएगी और ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में अमेरिका तेजी से जवाब देने की तैयारी कर रहा है क्योंकि हॉर्मुज़ जैसे अहम तेल मार्ग को सुरक्षित रखना प्राथमिकता है। अमेरिका का हालिया कदम ईरान को सख्त संदेश भी माना जा रहा है। ऐसे में US ने तीन नए युद्धपोतों को भेजकर साफ संकेत दिए हैं कि वह ईरान के खिलाफ हर तरह के ऑप्शन (हवाई, समुद्री और जमीन पर) तैयार रखना चाहता है।  

AI ने ‘बैटमैन’ Val Kilmer को फिर किया जिंदा, मौत के 1 साल बाद नई फिल्म में वापसी!

लॉस एंजिल्स 'बैटमैन फॉरएवर' और 'टॉप गन' जैसी फिल्‍मों के लिए पहचाने जाने वाले दिवंगत एक्‍टर वैल किल्‍मर की बीते साल अप्रैल में मौत हो गई थी। 65 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था। अब जब फैंस यह मानकर चल रहे थे कि वह अपने फेवरेट एक्‍टर को पर्दे पर दोबारा नहीं देख पाएंगे, जनरेटिव AI ने उन्‍हें डिजिटली फिर से जिंदा कर दिया है। जी हां, आर्टिफिश‍ियल इंटेलिजेंस के जरिए हम और आप अपकमिंग फिल्‍म 'As Deep as the Grave' में वैल किल्‍मर को एक्‍ट‍िंग करते हुए देखेंगे। इस फिल्‍म के लिए उन्‍हें साल 2020 में कास्‍ट किया गया था। उन्‍होंने इसके कुछ हिस्‍सों की शूटिंग की थी, जबकि कई सीन शूट नहीं कर पाए थे। अब इस खबर ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। कई फैंस जहां एक्‍टर को दोबारा पर्दे पर देखने के लिए बेताब हैं, वहीं कइयों ने इसे तकनीक का 'घटिया इस्‍तेमाल' बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में वैल किल्‍मर को इस फिल्‍म में कैथोलिक पादरी, फादर फ‍िंटन के रोल कास्ट किया गया था। तब इस फिल्‍म का नाम 'Canyon Of The Dead' था। हालांकि, एक्टर की कैंसर की बीमारी बढ़ गई, जिसकी वजह से वह इस फ‍िल्म के कई सीन शूट नहीं कर पाए। अब, छह साल बाद और वैल की मौत के एक साल बाद, दिवंगत एक्टर इसी फ‍िल्म के साथ स्क्रीन पर वापसी करने जा रहा है। नाम बदलकर अब 'As Deep As The Grave' कर दिया गया है। यह सब जनरेटिव AI की मदद से मुमकिन हो पाया है। फ‍िल्म का पहला लुक भी जारी कर दिया गया है। 'बिगड़ी सेहत के साथ वह शूट नहीं कर पाए' फिल्म के राइटर और डायरेक्टर कोएर्ट वूरहीस कहते हैं, 'वही एकमात्र एक्टर थे, जिन्हें मैं इस रोल के लिए लेना चाहता था। यह रोल पूरी तरह से उन्हीं को ध्यान में रखकर लिखा गया था। इसमें उनकी मूल अमेरिकी विरासत और दक्षिण-पश्चिम से उनके जुड़ाव और प्यार को दिखाया गया है। कुछ दिन पहले मैं एक कॉल शीट देख रहा था, हमने उन्हें शूटिंग के लिए राज़ी कर लिया था। लेकिन वह उस समय सेहत से जुड़ी बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रहे थे और इसलिए वह यह काम नहीं कर पाए।' वैल विल्‍मर और परिवार ने पहले ही दे दी थी AI के इस्‍तेमाल की इजाजत 'वैराइटी' की रिपोर्ट के मुताबिक, जनरेटिव AI की मदद से वैल किल्‍मर को पर्दे पर दिखाने के लिए उनकी और परिवार की इजाजत पहले ही ले ली गई थी। उनका परिवार इस फ‍िल्म का पूरा समर्थन कर रहा है और उन्होंने फ‍िल्म बनाने वालों को वैल की जवानी की तस्वीरें भी दी हैं, ताकि उनका इस्तेमाल किया जा सके। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उनकी फीस के बदले परिवार को मुआवजा भी दिया गया है। डायरेक्‍टर बोले- वैल यही चाहते थे डायरेक्‍टर कोएर्ट ने आगे बताया, 'उनके परिवार वाले बार-बार यही कह रहे थे कि यह फ‍िल्म उनके लिए कितनी अहम है और वैल भी इसका हिस्सा बनना चाहते थे। उन्हें सच में लगता था कि यह एक बहुत ही जरूरी कहानी है, जिसके साथ वह अपना नाम जोड़ना चाहते थे। इसी वजह से मुझे यह कहने का हौसला मिला कि, 'ठीक है, चलो इसे करते हैं।' भले ही कुछ लोग इसे विवादित कह सकते हैं, लेकिन वैल यही चाहते थे।' फैंस बोले- यह सम्‍मान, दूसरे बोले- यह गलत ट्रेंड है दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर ही वैल किल्‍मर के AI अवतार को लेकर दो तरह की बातें हो रही हैं। एक फैन ने लिखा है, 'यकीन नहीं हो रहा है कि हम उन्‍हें पर्दे पर दोबारा देख पाएंगे। यह भावुक करने वाला पल होगा।' एक अन्‍य ने लिखा, 'यह वैल को एक सम्‍मान की तरह है।' हालांकि, कुछ यूजर्स यह भी कह रहे हैं कि यह 'गलत' है। एक ने कहा है, 'मुझे लगता है कि वैल जैसे बेहतरीन एक्‍टर के लिए यह करना, उनकी शानदार जिंदगी का अपमान है।' एक अन्‍य यूजर ने लिखा है, 'यह सिनेमा के लिए गलत ट्रेंड हो सकता है। यह प्रकृति की चाह के साथ ख‍िलवाड़ जैसा है।' As Deep as the Grave फिल्‍म की कहानी As Deep as the Grave की कहानी दक्षिण-पश्चिम के आर्कियोलॉजिस्ट एन और अर्ल मॉरिस के बारे में है। इसमें एरिजोना के Canyon de Chelly में उनके द्वारा की गई खुदाई और Navajo लोगों के इतिहास का पता लगाने की उनकी कोशिशों को दिखाया गया है। इस फ‍िल्म में एबिगेल लॉरी, टॉम फेल्टन, वेस स्टूडी और एबिगेल ब्रेस्लिन भी नजर आएंगे। AI की मदद से तैयार किया गया वैल किल्‍मर का किरदार फ‍िल्म के एक अहम हिस्से में दिखाई देगा। इसके ऑडियो में भी वैल की ही आवाज का इस्तेमाल किया गया है। वैल किल्‍मर कौन थे वैल किल्मर, को 'बैटमैन फॉरएवर' और 'टॉप गन' जैसी फ‍िल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए याद किया जाता है। बीते साल 1 अप्रैल, 2025 को 65 साल की उम्र में निधन हो गया। तब उन्‍हें निमोनिया हुआ था। वैल को 1986 की जबरदस्त हिट फ‍िल्म 'टॉप गन' में टॉम क्रूज के साथ एक राइवल नेवल एविएटर, टॉम 'आइसमैन' कजान्स्की के रोल से शोहरत मिली थी। वैल अपनी मृत्यु तक काम करते रहे। उनकी आखिरी फ‍िल्म 'टॉप गन: मेवरिक' थी, जिसमें वे टॉम क्रूज़ के साथ नजर आए थे। वह 'बैटमैन फॉरएवर' में ब्रूस वेन की भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा उन्होंने ओलिवर स्टोन की फ‍िल्म 'द डोर्स' में जिम मॉरिसन का किरदार निभाया था। साल 2014 में कैंसर, चली गई थी आवाज साल 2014 में वैल को गले के कैंसर का पता चला था। ट्रेकियोटॉमी (गले में छेद करके सांस लेने का रास्ता बनाना) करवाने के बाद उनकी आवाज हमेशा के लिए चली गई थी। वैल की जिंदगी पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री का प्रीमियर 2021 में कान फ‍िल्म फ‍ेस्टिवल में हुआ था। साल 2022 में आई 'टॉप गन: मेवर‍िक' के समय वैल ने अपनी आवाज चले जाने की समस्या का समाधान निकाला था। उनके किरदार 'आइसमैन' को कंप्यूटर पर टाइप करके बात करते हुए दिखाया गया। हालांकि वे कुछ देर के लिए फिल्‍म में बोलते भी हैं। तब AI की … Read more

भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाता पकड़ा गया पाकिस्तान, ईरानी जहाज डूबने पर खुली पोल

नई दिल्ली श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना पर अमेरिका के हमले और फिर इसके डूबने को लेकर पाकिस्तान ने अलग ही प्रोपेगैंडा शुरू कर दिया था। पाकिस्तान आधारित नेटवर्क ने सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ जाल बिछाया और बदनाम करने की कोशिश की। उसका कहना था कि भारत ने ही अमेरिका को ऐसी जानकारी दी थी जिससे उसने ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया। हालांकि जब इस पूरे मामले को खंगाला गया तो सारी बातें सामने आ गईं। पाकिस्तानी आईएसआई और उससे जुड़े लोगों ने ही इस तरह की झूठी जानकारी का अभियान शुरू किया था। 4 मार्च को श्रीलंका के तट पर अमेरिका ने IRIS देना पर हमला कर दिया था। इसके बाद यह शिप डूब गया। अब इसके बाद सोशल मीडिया पर एक नैरेटिव गढ़ा गया कि भारत ने ही अमेरिका को संवेदनशील जानकारियां दीं। बाद में पता लगाया गया तो यही जानकारी मिली कि यह केवल झूठ जानकारी थी और पाकिस्तान के सोशल मीडिया हैंडल से ही इस तरह की बातें की जा रही थीं। OSINT ग्रुप ने पता लगाया कि 4 मार्च को ही @TacticalTribun नाम के अकाउंट से इस तरह की पोस्ट शेयर की गई थी। इसके बाद ऐसे अकाउंट्स से इस बात को आगे बढ़ाया गया जिनमें से 40 फीसदी पाकिस्तानी थे। इसके अलावा ये ऐसे लोग थे जो कि किसी ना किसी तरह पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। 100 अकाउंट से लगभग 500 पोस्ट इस तरह की की गईं। पूरी कोशिश की गई कि इस बात को वायरल करवा दिया जाए। ओपेन सोर्स इंटेलिजेंस असेसमेंट के मुताबिक घटना के तीन से 6 घंटे के अंदर ही इस तरह की जानकारी शेयर करने वाले लोग ऐक्टिव हो गए थे। इसके बाद हैश टैग शुरू किया गया और 80 यूजर इसे फैलाने में लग गए। इसके बाद आईआरआईएस देना की तस्वीरों के साथ पोस्ट शेयरिंग शुरू हो गई। एनालिस्ट्स् ने बताया कि इस अफवाह को फैलाने के लिे पाकिस्तान के लगभग 40 फीसदी अकाउंट, प्रो ईरान 15 फीसदी, प्रो फिलिस्तीन 12 फीसदी और एंटी वार कम्युनिटी के 8 फीसदी अकाउंट के इस्तेमाल किया गया। इसमें से बहुत सारे फर्जी अकाउंट भी थे। इस मामले के जानकार लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर कई एआई वीडियो जारी करके भी झूठ फैलाने की कोशिश की गई। क्या है श्रीलंका का स्टैंड श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने संसद को बताया कि सरकार ने मार्च की शुरुआत में अमेरिका के दो लड़ाकू विमानों को देश के दक्षिण-पूर्व स्थित मत्ताला अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। सरकार ने मार्च की शुरुआत में अमेरिका के दो लड़ाकू विमानों को देश के दक्षिण-पूर्व स्थित मत्ताला अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। चार मार्च को अमेरिका ने द्वीप के दक्षिणी तटीय शहर गाले के निकट ईरान के 'आईआरआईएस देना' पोत को निशाना बनाया, जिसमें 84 नाविकों की मौत हो गई, जबकि 32 को बचा लिया गया। यह पोत भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित नौसैनिक बेड़े की समीक्षा में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। दो दिन बाद ईरान का एक अन्य पोत 'आईआरआईएस बुशहर' 219 नाविकों के साथ कोलंबो बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति चाहता था। श्रीलंका ने उसे कोलंबो तट के बाहर लंगर डालने के बाद पूर्वी बंदरगाह त्रिंकोमाली की ओर जाने को कहा। पोत के 204 नाविकों को फिलहाल कोलंबो के निकट नौसैनिक प्रतिष्ठान में ठहराया गया है।  

सरकार का दावा, देश में घरेलू LPG और कच्चे तेल का है पर्याप्त भंडार

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा की सप्लाई प्रभावित हुई है. जिसके दुनिया में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं. भारत में भी इसका असर दिखने लगा है. हालांकि, सरकार ने आश्वासन दिया है कि देश के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि आज की स्थिति के अनुसार सभी रिफाइनरियां उच्चतम क्षमता पर संचालित हो रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि घरेलू LPG उत्पादन जारी है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, देशभर में किसी भी वितरक (डिस्ट्रीब्यूटर) पर ड्राय-आउट की कोई सूचना नहीं है. प्राकृतिक गैस के संबंध में, सभी उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि जहां संभव हो, वे पीएनजी (PNG) पर शिफ्ट करें. इस संबंध में राज्य सरकारों को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया गया है. पैनिक बुकिंग में कमी आई… सुजाता शर्मा ने कहा कि शीर्ष 15 गैस क्षेत्रों में लगभग 13,700 से अधिक कनेक्शन दिए गए हैं और लगभग 7,500 उपभोक्ता एलपीजी से PNG पर शिफ्ट हुए हैं. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग लगभग 93% है और डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड के माध्यम से की जा रही है. पैनिक बुकिंग में कमी आई है और कल लगभग 55 लाख रीफिल बुकिंग प्राप्त हुईं. उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी सामान्य रूप से जारी है. वाणिज्यिक एलपीजी के लिए लगभग 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आवंटन आदेश जारी किए हैं और पिछले एक सप्ताह में लगभग 11,300 टन वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति की गई है. सभी राज्यों के पास पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है. खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी 22 भारतीय जहाज सुरक्षित वहीं, संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पोत, पत्तन एवं जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि पिछले 24 घंटों में किसी भी समुद्री घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है. खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हमारे सभी 22 जहाज और 611 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, जिनकी निगरानी डीजी शिपिंग द्वारा लगातार की जा रही है. उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में 24×7 हेल्पलाइन, संचार केंद्र और कंट्रोल रूम को लगभग 125 कॉल और 200 से अधिक ईमेल प्राप्त हुए, जिनका समय पर जवाब दिया गया. इसके अलावा, पिछले 24 घंटों में 25 भारतीय नाविकों को सुरक्षित रूप से वापस लाया गया है. सिन्हा ने बताया कि न्यू मंगलौर पोर्ट ने क्रूड (Crude) और LPG से संबंधित कार्गो जहाजों के लिए वेवर (छूट) प्रदान करने हेतु एक सर्कुलर जारी किया है, जो 14 मार्च से 31 मार्च तक मान्य है. इसके अलावा, लगभग 3,500 वर्ग मीटर का अतिरिक्त कवर शेड और 76,000 वर्ग मीटर का ओपन यार्ड अतिरिक्त भंडारण क्षमता के लिए निर्धारित (ईयरमार्क) किया गया है. पश्चिम एशिया संकट पर विदेश मंत्रालय का बयान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान, मलेशिया, फ्रांस, जॉर्डन और कतर के नेताओं से बात की. उन्होंने पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत का पक्ष रखा और बातचीत, तनाव कम करने और शांति पर जोर दिया. उन्होंने ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की, जबकि सभी पक्षों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन और लगातार तालमेल के लिए अपना समर्थन दोहराया. उन्होंने त्योहारों की शुभकामनाएं भी दीं और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में मिले सहयोग की सराहना की. जायसवाल ने कहा कि मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के साथ भी इसी तरह की चर्चाएं हुईं, जिसमें स्थिरता, सामान और ऊर्जा के निर्बाध आवागमन और लगातार तालमेल के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई. ईरान में फंसे 913 भारतीयों को वापस लाया गया उन्होंने कहा कि भारत खाड़ी देशों से लोगों को निकालने के अपने प्रयास जारी रखे हुए है; अब तक आर्मीनिया और अजरबैजान के रास्ते 913 फंसे हुए भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है. विदेश मंत्रालय के कंट्रोल रूम ने कई कॉल संभाले हैं, जो मुख्य रूप से व्यापारिक जहाजों से संबंधित थे. सरकार लगातार सक्रिय है और भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थिति पर नजर रख रही है.

असम में चुनावी बिगुल: सीएम Himanta Biswa Sarma फिर मैदान में, सातवीं बार ठोकी ताल

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। यह उनका सातवां चुनाव है। मुख्यमंत्री सरमा ने जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र भरा है। नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पहला चुनाव हारने के बाद लगातार पांच चुनाव जीते हैं और इस बार भी उन्हें अपने क्षेत्र की जनता का पूरा समर्थन मिलने की उम्मीद है। विपक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम हेमंता सरमा ने कहा कि अगर कांग्रेस उन्हें एक संस्था मानती है, तो यह उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा, "अगर कांग्रेस ने मुझे एक संस्था के स्तर तक पहुंचा दिया है, तो मुझे इससे खुश होना चाहिए, न कि विवाद करना चाहिए।" शुक्रवार की सुबह ही मुख्यमंत्री सरमा ने राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को संरक्षित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है न कि कोई दान। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन्होंने लिखा, "हमारी संस्कृति कोई नारा नहीं है, यह हमारे त्योहारों, हमारी प्रार्थनाओं और हमारे लोगों में जीवित है।" उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को जीवित रखने वाले समुदायों के साथ खड़ा रहना सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक समूहों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। इसके तहत हर रास समिति को 25,000 रुपए की मदद दी जा रही है, जिससे रास उत्सव को बेहतर तरीके से आयोजित किया जा सके। यह उत्सव असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का अहम हिस्सा है। इसके अलावा, राज्य में 8,000 से अधिक पूजा समितियों को 10,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जा रही है ताकि धार्मिक कार्यक्रम सुचारू रूप से आयोजित हो सकें। सरकार ने 620 उदासीन भक्तों के लिए हर महीने 1,500 रुपए की सहायता भी सुनिश्चित की है, जो आध्यात्मिक परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्रीलंका ने अमेरिकी फाइटर जेट को लैंडिंग की इजाजत नहीं दी, राष्ट्रपति ने कहा- हम तटस्थ

कोलंबो  श्रीलंका ने अमेरिका को अपनी जमीन पर जंगी जहाजों को उतारने की अनुमति नहीं दी है. ईरान जंग के दौरान अमेरिका अपने दो युद्धक विमानों को श्रीलंका के दक्षिणपूर्व मट्टाला अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लैंड करना चाहता था. लेकिन राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने अमेरिका को इसकी अनुमति नहीं दी।  शुक्रवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति ने संसद में इस बात की घोषणा की है. संसद में इस फैसले की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने  कहा कि जिबूती से अमेरिका के दो युद्धक विमानों ने 4 और 8 मार्च को श्रीलंका में  लैंड करने की अनुमति मांगी थी. लेकिन अमेरिका के ये दोनों अनुरोध अस्वीकार कर दिए गए।  राष्ट्रपति ने कहा, "कई दबावों के बावजूद हम अपनी तटस्थता बनाए रखना चाहते हैं. हम झुकेंगे नहीं. मध्य-पूर्व का युद्ध चुनौतियां खड़ी करता है, लेकिन तटस्थ बने रहने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे।  वे जिबूती के एक बेस से आठ एंटी-शिप मिसाइलों से लैस दो लड़ाकू विमान मट्टाला इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लाना चाहते थे, और हमने साफ मना कर दिया," श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा।  दिसानायके का यह बयान दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर के साथ उनकी मुलाकात के एक दिन बाद आया है।  एक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति दिसानायके और सर्जियो गोर ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा और बंदरगाहों को सुरक्षित बनाने, आपसी लाभकारी व्यापार और वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने, तथा एक स्वतंत्र, खुला और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के अमेरिकी प्रयासों पर चर्चा की।  4 मार्च को, अमेरिका ने गाले के पास ईरानी फ्रिगेट 'आइरिस डेना' पर टॉरपीडो से हमला कर दिया। गाले इस द्वीप का दक्षिणी तटीय शहर है। इस हमले में 84 नाविक मारे गए, जबकि 32 को बचा लिया गया। यह जहाज़ भारत के विशाखापत्तनम से एक नौसैनिक बेड़े की समीक्षा अभ्यास के बाद अपने वतन लौट रहा था। दो दिन बाद, एक दूसरा ईरानी जहाज़, 'आइरिस बुशेहर', 219 नाविकों के साथ कोलंबो बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति मांगने लगा।  श्रीलंका ने इस जहाज़ को, जो यहाँ बंदरगाह के बाहर लंगर डाले खड़ा था, वहाँ से हटाकर पूर्वी बंदरगाह 'त्रिंकोमाली' भेजने का निर्देश दिया। इन नाविकों में से कुल 204 नाविकों को अब कोलंबो के पास स्थित नौसैनिक सुविधा केंद्र में ठहराया गया है। ईरान शिप को दी थी पनाह 4 मार्च 2026 को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 80 किमी दूर अंतरराष्ट्रीय जल में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर टॉरपीडो हमला किया. इस हमले में जहाज डूब गया. इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए, कई लापता हुए और जहाज पर सवार लगभग 180 लोगों में से 32 घायल बचाए गए।  इस दौरान श्रीलंका ने ईरानी जहाज से मिले डिस्ट्रेस सिग्नल पर तुरंत प्रतिक्रिया दी. श्रीलंकाई नौसेना और वायुसेना ने बड़े पैमाने पर खोज-बचाव अभियान चलाया. वे घटनास्थल पर पहुंचे. इस दौरान श्रीलंका ने 87 शव बरामद किए और 32 घायल ईरानी नौसैनिकों को बचाकर गाले में इलाज करवाया।  इसके अलावा श्रीलंका ने ईरानी सैनिकों के शव को ससम्मान ईरान भेजा. इसके अलावा हमले के एक दिन बाद एक अन्य ईरानी सहायक जहाज IRIS Bushehr ने इंजन खराबी का हवाला देकर श्रीलंका से मदद मांगी. श्रीलंका ने मानवीय आधार पर इसे अनुमति दी।   

स्वास्थ्य क्षेत्र में विस्तार: मान सरकार ने फिर खोला नया मेडिकल संस्थान, डॉ. बलबीर सिंह का ऐलान

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज कपूरथला में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की घोषणा की। यह इस महीने घोषित किया जाने वाला दूसरा ऐसा संस्थान है, इससे पहले होशियारपुर में शहीद ऊधम सिंह स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज का ऐलान किया गया था। श्री गुरु नानक देव जी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के रूप में यह नई सुविधा कपूरथला के मौजूदा जिला अस्पताल परिसर में स्थापित की जाएगी।  आज यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “टेंडरिंग प्रक्रिया सहित सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और कार्यकारी एजेंसियों को काम के आदेश जारी कर दिए गए हैं। निर्माण कार्य 25 मार्च, 2026 से शुरू कर दिया जाएगा और मार्च 2028 तक 24 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।” उन्होंने आगे बताया, “275 करोड़ रुपये की कुल लागत से स्थापित किए जाने वाले इस प्रोजेक्ट में 300 बिस्तरों वाला अस्पताल और एक मेडिकल कॉलेज शामिल होगा, जिसमें हर साल एमबीबीएस की 100 सीटें होंगी। इससे न केवल राज्य की मेडिकल शिक्षा क्षमता बढ़ेगी बल्कि पंजाब के विद्यार्थियों को महंगी मेडिकल पढ़ाई के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।” इस पहल के सकारात्मक प्रभावों के बारे में बताते हुए मंत्री ने कहा, “एक बार शुरू होने के बाद यह संस्थान न सिर्फ 100 एमबीबीएस सीटों की वृद्धि करेगा, बल्कि क्षेत्र के लोगों को अत्याधुनिक सेकेंडरी और टर्शियरी स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रदान करेगा। यह संस्थान रोजगार का एक बड़ा स्रोत बनेगा, जिससे 1000 से अधिक लोगों को सीधे तौर पर लाभ होगा और कई लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।” स्वास्थ्य क्षेत्र में अन्य उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए सुल्तानपुर लोधी के सरकारी अस्पताल को शहरी केंद्र के रूप में अपग्रेड किया जाएगा और बेगोवाल के सरकारी अस्पताल को ग्रामीण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। दोनों को कपूरथला के नए मेडिकल कॉलेज से जोड़ा जाएगा।” लगभग 5 लाख वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में बनने वाले इस प्रोजेक्ट में छह बड़े ऑपरेशन थिएटर, 500 क्षमता वाला ऑडिटोरियम, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएं, एक केंद्रीय प्रयोगशाला, एक ब्लड बैंक और कौशल प्रयोगशालाओं व संग्रहालयों से सुसज्जित आधुनिक शैक्षणिक विभाग शामिल होंगे। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव कुमार राहुल, पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉरपोरेशन के चेयरमैन गुरशरण सिंह छीना और पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक अमित तलवार भी उपस्थित थे।

अमेरिका को निशाना बनाने की बात कितनी हकीकत, कितनी साजिश? समझिए पाकिस्तान का प्लान

इस्लामाबाद हाल ही में अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी के सामने 2026 एनुअल थ्रेट असेसमेंट पेश किया। इसमें उन्होंने रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान के साथ पाकिस्तान को भी उन देशों की सूची में शामिल किया है जो ऐसी मिसाइल डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं जिनकी रेंज अमेरिकी मुख्य भूमि तक पहुंच सकती है। गबार्ड ने स्पष्ट कहा कि 'पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल डेवलपमेंट संभावित रूप से इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल्स (ICBMs) तक जा सकती है, जिनकी रेंज अमेरिका को टारगेट करने लायक होगी।' आतंकवाद को पालने वाले पाकिस्तान के पास वर्तमान में सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली ऑपरेशनल मिसाइल शाहीन-3 है। इसकी रेंज 2,750 किलोमीटर है। यानी यह मिसाइल भारत के प्रमुख शहरों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर तक पहुंच सकती है। शाहीन-3 कोई ICBM नहीं हालांकि, शाहीन-3 कोई अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) नहीं है। किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल को ICBM की श्रेणी में आने के लिए कम से कम 5,500 किलोमीटर की रेंज की आवश्यकता होती है। वहीं, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच की दूरी 11,000 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में अमेरिका का जिक्र क्यों हो रहा है? यही 11000 किलोमीटर की दूरी अब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक गंभीर रिपोर्ट के केंद्र में आ गई है। भले ही गबार्ड ने पाकिस्तानी मिसाइल कार्यक्रम की कोई सटीक समय-सीमा नहीं बताई, लेकिन अन्य अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान को एक कार्यात्मक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल विकसित और तैनात करने में अभी कई साल से लेकर एक दशक तक का समय लग सकता है। पाकिस्तान का लक्ष्य अमेरिका क्यों? खुद को बचाने की नापाक चाल इस्लामाबाद का हमेशा से यही आधिकारिक रुख रहा है कि उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम केवल भारत के खिलाफ बनाए गए हैं। 2025 में भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद, पाकिस्तान ने 'आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड' के गठन की घोषणा की थी जो छोटे देशों की क्षेत्रीय रक्षा और निवारक रणनीतियों के अनुरूप है। जब पाकिस्तान के पास क्षेत्रीय स्तर (भारत) पर हमले रोकने के लिए पर्याप्त हथियार मौजूद हैं, तो उसे ICBM की आवश्यकता क्यों है? विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस तरह की मिसाइल इसलिए भी बना रहा है ताकि उसके परमाणु हथियारों पर अमेरिका के किसी भी प्रकार के 'निवारक हमले' को रोका जा सके। इसके अलावा, पाकिस्तान भविष्य में किसी भी संभावित जंग में अमेरिका को सैन्य रूप से भारत के पक्ष में हस्तक्षेप करने से हतोत्साहित करना चाहता है। सीधे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान खुद को बचाने की नापाक चाल चल रहा है। पाकिस्तान ने उत्तर कोरिया और ईरान की वर्तमान स्थिति से भी सबक लिया है। अमेरिका उत्तर कोरिया को एक बड़ा खतरा मानता है, लेकिन उसके पास परमाणु हथियार होने के कारण सीधे हमले से बचता है। दूसरी ओर, ईरान पर अमेरिकी बमबारी इसलिए हो रही है क्योंकि उसके पास अभी तक एक सक्षम परमाणु प्लेटफॉर्म नहीं है। भड़क गया पाकिस्तान पाकिस्तानी विश्लेषकों ने अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज किया है। अल जजीरा से बात करते हुए परमाणु सुरक्षा विद्वान राबिया अख्तर ने कहा कि अमेरिकी आकलन में एक पुरानी खामी है- वे जमीनी और ठोस विश्लेषण के बजाय 'सबसे खराब स्थिति की अटकलों' को आधार बनाते हैं। इसके बावजूद, अमेरिकी खुफिया विभाग इस बात पर कायम है कि पाकिस्तान की 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक' नीति में अब वैश्विक स्तर पर शक्ति प्रदर्शन का तत्व भी शामिल हो गया है। ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि इस्लामाबाद ने अमेरिका तक पहुंचने वाली ICBM विकसित करने की बात से न तो कभी साफ इनकार किया है और न ही इसकी पुष्टि की है। वर्तमान जमीनी हकीकत आज की तारीख में, पाकिस्तान के पास ऐसी कोई मिसाइल नहीं है जो अंतरमहाद्वीपीय रेंज के करीब भी हो। उनकी सबसे उन्नत MIRV (मल्टीपल वारहेड) सक्षम प्रणाली अबाबील है, जिसकी अनुमानित रेंज केवल 2,200 किमी है। वर्तमान में 2,750 किमी रेंज वाली शाहीन-3 ही उनकी सबसे लंबी दूरी की ऑपरेशनल मिसाइल बनी हुई है।  

इंडिया U-20 विमेंस टीम का बड़ा इम्तिहान, शुभांगी सिंह बोलीं– जीत के लिए पूरी तरह तैयार

नई दिल्ली थाईलैंड में जापान के खिलाफ अपने पहले मैच से सिर्फ दो हफ्ते पहले, इंडियन अंडर20 विमेंस नेशनल टीम लंबे समय से इंतजार की जा रही वापसी के करीब है। अपनी पिछली मौजूदगी के दो दशक बाद, इंडिया एएफसी अंडर20 विमेंस एशियन कप में वापस आ गया है, और 2 अप्रैल को उन्हें इस मुश्किल से बाहर निकालने के लिए कैप्टन शुभांगी सिंह लीड करेंगी। शुभांगी के लिए, क्वालिफिकेशन की अहमियत पहले ही समझ में आ चुकी है। म्यांमार में जश्न, जहां इंडिया ने अपना 20 साल का इंतजार खत्म किया, अब एक तेज, ज्यादा तुरंत फोकस की जगह ले चुका है। उन्होंने कहा, “हम वहां क्वालिफाई करने के माइंडसेट के साथ गए थे, और हमने कर दिखाया।” “जब आपको पहले से ही लगता है कि कुछ होने वाला है, तो यह हैरानी की बात नहीं है।” यह विश्वास अब एक टीम को उस चीज के लिए तैयार कर रहा है जिसे वह मानती हैं कि यह एक कड़ी परीक्षा होगी। ग्रुप सी में भारत का मुकाबला 2 अप्रैल को 18:30 बजे जापान से, 5 अप्रैल को 14:30 बजे ऑस्ट्रेलिया से और 8 अप्रैल को 14:30 बजे चीनी ताइपे से होगा। ग्रुप की टॉप दो टीमें और तीसरे नंबर पर रहने वाली दो सबसे अच्छी टीमें क्वार्टर-फ़ाइनल में पहुंचेंगी। इसके अलावा, क्वार्टर-फ़ाइनल जीतने वाली चार टीमें फीफा अंडर20 महिला वर्ल्ड कप पोलैंड 2026 के लिए क्वालिफ़ाई करेंगी। अभी कोलकाता में ट्रेनिंग कर रही यंग टाइग्रेसेज़ शुक्रवार सुबह (20 मार्च) बैंकॉक, थाईलैंड के लिए रवाना होंगी। शुभांगी ने कहा, “हमारा फ़ोकस आगे के तीन मुश्किल ग्रुप गेम्स पर है। इस स्टेज पर, हमें किसी आसान मैच की उम्मीद नहीं है। हम तैयार हैं और टॉप टीमों के ख़िलाफ़ अच्छा परफ़ॉर्म करना चाहते हैं। एशियन कप से पहले, हम कुछ और तैयारी वाले मैच खेलेंगे, तो इससे भी हमें मदद मिलेगी।” कॉन्टिनेंटल स्टेज के लिए भारत की तैयारी काफ़ी बड़ी और सोच-समझकर की गई है। इस साल की शुरुआत में स्वीडन में एक महीने का तैयारी कैंप, और पिछले साल के आखिर में उज़्बेकिस्तान और कज़ाकिस्तान के खिलाफ़ कई इंटरनेशनल फ्रेंडली मैचों ने एक ऐसी टीम बनाई है जो अब हाई-इंटेंसिटी फुटबॉल से अनजान नहीं है।