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सीजफायर पर सवाल: अफगानिस्तान बोला– पाकिस्तान ने डूरंड लाइन पर खोली आग

काबुल पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद के मद्देनजर 18 से 23 मार्च अस्थायी युद्ध विराम पर सहमति जताई है, लेकिन अफगानिस्तान का आरोप है कि पाकिस्तान की सेना युद्ध विराम के बावजूद गोलाबारी कर रही है। अफगानिस्तान के सशस्त्र बलों के प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने पाकिस्तान की सेना पर डूरंड लाइन पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना के किए हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। यह जानकारी अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के बयान में दी गई। फितरत ने कहा कि युद्धविराम के बावजूद पाकिस्तान की लगातार हो रही गोलाबारी यह दिखाती है कि इस्लामाबाद इस समझौते को लेकर गंभीर नहीं है और वह धोखा दे रहा है। उन्होंने कहा कि हालात और न बिगड़ें, इसलिए अफगानिस्तान ने अब तक कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है और वह युद्धविराम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसे हमले दोबारा हुए तो युद्धविराम का कोई मतलब नहीं रह जाएगा और तालिबान पाकिस्तान की कार्रवाई का निर्णायक जवाब देगा। बुधवार को अफगानिस्तान ने कहा था कि वह ईद के मौके पर अपनी ‘रद अल-जुल्म’ रक्षात्मक कार्रवाई को रोक देगा। यह फैसला सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसे मध्यस्थ देशों के अनुरोध पर किया गया था। पाकिस्तान ने भी ईद के लिए सैन्य कार्रवाई में अस्थायी विराम देने की घोषणा की थी। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा था कि यह फैसला क्षेत्रीय मध्यस्थों के आग्रह पर लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में 70 से अधिक तोप के गोले दागे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, कुनार के सूचना और संस्कृति विभाग के प्रमुख जिया-उर-रहमान स्पिन घर ने बताया कि नरई जिले के बारिकोट, डोकलाम और त्सोंगलई समेत कई इलाकों में 35 गोले दागे गए। इसके अलावा मनोगई जिले के कुछ हिस्सों में 37 गोले गिरने की खबर है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है, जबकि अधिकारी हालात पर नजर बनाए हुए हैं। 16 मार्च को पाकिस्तानी हवाई हमले में काबुल के ओमिद नशामुक्ति केंद्र/अस्पताल को निशाना बनाया गया। जब अफगानिस्तान ने आम नागरिकों पर हमले को लेकर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरा तो पाकिस्तान ने कहा कि उसने किसी नागरिक ठिकाने को नहीं, बल्कि सैन्य ढांचे और “आतंकी इन्फ्रास्ट्रक्चर” को निशाना बनाया था। पिछले मंगलवार को अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने काबुल पर पाकिस्तानी हवाई हमलों की निंदा की थी और इसे मानवीय तथा इस्लामी सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन बताया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तानी हमले में 408 से अधिक लोग मारे गए और 260 से ज्यादा घायल हुए, जिनमें अधिकांश नशामुक्ति केंद्र में इलाज करा रहे मरीज थे। काबुल में राजनयिकों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुत्ताकी ने कहा था कि पाकिस्तानी हवाई हमले में समाज के सबसे कमजोर वर्गों में से एक यानी नशे की लत का इलाज करा रहे लोगों को निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी से अब तक अफगानिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में नागरिक इलाकों पर बार-बार हमले हुए हैं, जिससे कूटनीतिक समाधान पर भरोसा कम हुआ है। मुत्ताकी ने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो अफगान बल रक्षात्मक जवाब देता रहेगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा जरूर करेगा।

रिलीज के साथ ‘धुरंधर 2’ ने मचाया तहलका, पाकिस्तान में चोरी-छिपे देखी जा रही फिल्म

मुंबई धुरंधर पार्ट वन की तरह इसका दूसर पार्ट द रिवेंज पाकिस्तान में बैन है। मूवी को लेकर पड़ोसी देश में इतना जबरदस्त क्रेज है कि वहां इसका पाइरेटेड वर्जन धड़ाधड़ देखा जा रहा है। पाकिस्तान से एक जर्नलिस्ट ने ट्विटर (X) पर क्लिप शेयर की है। इसमें दिखा रहे हैं कि वह लाहौर में टीवी पर धुरंधर 2 देख रहे हैं। इस पोस्ट पर भारत और पाकिस्तान के लोगों के मजेदार कमेंट्स दिख रहे हैं। रिलीज होते ही पाइरेसी शुरू धुरंधर का पहला पार्ट पाकिस्तानी दर्शकों ने काफी पसंद किया था। उस वक्त कई पोस्ट और वीडियोज वायरल थे जिसमें लोग रणवीर सिंह और आदित्य धर की फिल्म धुरंधर की तारीफ करते दिखे थे। इसके बाद पाकिस्तान की गलियों में धुरंधर की पाइरेटेड सीडीज भी बिकती दिखी थीं। अब पार्ट 2 आते ही इसका पाइरेटेड वर्जन पाकिस्तान पहुंच गया और वहां की जनता इस भारतीय फिल्म के मजे ले रही है। लोगों ने लिए मजे खालिद महमूद खालिद नाम के ट्विटर हैंडल से क्लिप शेयर की गई है जिसमें धुरंधर द रिवेंज की शुरुआत का एक सीन दिख रहा है। खालिद ने ट्वीट किया है, लाहौर में धुरंधर 2 देख रहा हूं। इस पर कई सारे कमेंट्स हैं। एक यूजर ने मजे लेने की कोशिश की है। लिखा है, टीवी स्क्रीन में थोड़ा क्रैक है लगता है T20 वर्ल्डकप मैच देख लिया। एक ने लिखा है, ब्रह्मोस की तरह धुरंधर भी उनके लिए फ्री है। एक ने लिखा है, खुलेआम पाइरेसी। इंडियन सिनेमा से प्यार एक और कमेंट है, लाहौर में बैठकर पाकिस्तान की ही बर्बादी देख रहा है। पाकिस्तान की तरफ से कमेंट है, हां देख रहे हैं क्योंकि हमें मनोरंजन की जरूरत है और दुनिया में भारत के कॉन्टेंट से ज्यादा हंसने लायक और क्या है। एक ने लिखा है कि धुरंधर की पाइरेसी वहां इतनी जल्दी पहुंच गई, पॉलिटिकल टेंशन के बावजूद ये इंडियन सिनेमा के लिए प्यार को दिखाता है। पाकिस्तान के मार्केट में खूब बिकी सीडीज पाकिस्तान में धुरंधर के पहले पार्ट की सीडी 50 रुपये में बिक रही थी। न्यूजीलैंड के एक यूट्यूबर ने क्लिप शेयर की थी जिसमें सीडी मार्केट दिखाया था। वहां दुकानदार से दाम भी पूछे थे। धुरंधर का भारत में क्रेज धुरंधर 2 आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी और लीड रोल में रणवीर सिंह, सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल और राकेश बेदी हैं। धुरंधर द रिवेंज नाम से फिल्म रिलीज हुई है जिसकी टैगलाइन है हौसला ईधन बदला। मूवी को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है और पहले दिन इसकी भारत में कमाई 145 करोड़ नेट पहुंच चुकी है।

शरजील इमाम को मिली जमानत, 6 साल बाद रिहाई, जानिए किन शर्तों पर मिली ‘आजादी’

नई दिल्ली दिल्ली दंगों का आरोपी शरजील इमाम करीब 6 साल बाद जेल से बाहर निकला है। इमाम को दिल्ली की एक अदालत ने 10 दिनों की अंतरिम जमानत दी है। शुक्रवार को जब उसने तिहाड़ के गेट से बाहर कदम रखा तो 'छोटी आजादी' की बड़ी खुशी उसके चेहरे पर नजर आई। वह मीडिया के कैमरों के सामने मुस्कुराता हुआ और विक्ट्री साइन बनाता नजर आया। दिल्ली की एक अदालत ने 9 मार्च को 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी शरजील इमाम को पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए कई शर्तों के साथ 10 दिन की अंतरिम जमानत दी थी। इमाम को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों या परिवार के सदस्यों के अलावा किसी से भी नहीं मिलने और याचिका में उल्लिखित स्थानों के अलावा किसी अन्य स्थान पर नहीं जाने के लिए कहा गया है। इसके अलावा उसे सोशल मीडिया का उपयोग करने से भी प्रतिबंधित किया गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत में इमाम ने अपने भाई के विवाह समारोह में शामिल होने और ईद के त्योहार के दौरान परिवार के साथ समय बिताने के लिए छह सप्ताह की राहत मांगी थी। 25 मार्च को इमाम के भाई की शादी होनी है। अदालत ने इमाम को 50,000 रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने का भी निर्देश दिया। विक्ट्री साइन से दिखाई अपनी खुशी औपचारिकताओं को पूरी करने के बाद शुक्रवार को शरजील इमाम तिहाड़ से बाहर आया। रिमझिम बारिश के बीच उसे परिवार के कुछ लोग लेने पहुंचे थे। शरजील इमाम ने मीडिया की ओर से पूछे गए किसी सवाल का जवाब नहीं दिया और बचते हुए कार में जा बैठा। हालांकि, कार में बैठने के बाद वह काफी मुस्कुराता हुआ नजर आया। इसके अलावा एक बार विक्ट्री साइन बनाकर भी उसने अपनी खुशी जाहिर की। इन शर्तों का करना होगा पालन इमाम को मामले से जुड़े किसी भी गवाह या व्यक्ति से किसी भी तरह का संपर्क नहीं कर सकता है। शरजील इमाम को मामले के जांच अधिकारी को मोबाइल नंबर भी देने को कहा गया है। शरजील को 30 मार्च की शाम को जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। 6 सप्ताह के लिए चाहता था राहत इमाम ने शादी में शामिल होने के लिए 15 मार्च से 26 अप्रैल तक छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगी थी; हालांकि, अदालत ने केवल 10 दिनों की अवधि की जमानत मंजूर की। इमाम उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों से संबंधित मामले में आरोपी है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। इमाम पर क्या आरोप पुलिस के अनुसार, उसने कथित तौर पर जेएनयू के मुस्लिम छात्रों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और संचालित किया, जो लामबंदी और विरोध स्थलों की पहचान के लिए एक समन्वय तंत्र के रूप में कार्य करता था। पुलिस ने इमाम पर जंगपुरा में आयोजित उन गुप्त बैठकों में भाग लेने का आरोप लगाया है, जहां चक्का जाम और विरोध प्रदर्शनों को और तेज़ करने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। पुलिस के अनुसार, इमाम की भूमिका केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि उसने अलीगढ़ और अन्य स्थानों की यात्रा करके एक जनसंचालक और विचारक के रूप में भी काम किया। पुलिस ने इमाम पर शाहीन बाग विरोध स्थल के निर्माण और उसे कायम रखने में निर्णायक भूमिका निभाने का भी आरोप लगाया, जो एक प्रमुख सड़क पर चौबीसों घंटे चलने वाले लंबे विरोध प्रदर्शन में बदल गया। पुलिस ने आरोप लगाया कि इमाम की भूमिका आधारभूत और प्रारंभिक थी, और एक बार योजना शुरू हो जाने के बाद साजिश के लिए हिंसा स्थल पर शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य नहीं होती।

‘CM दे रहे हैं धमकी’—महिला की SC में याचिका, जज बोले- आप भी तो नेता हैं

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायत करने वाली महिला को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय ने महिला से कहा है कि अपनी लड़ाई कोर्ट में न लड़ें। साथ ही कहा है कि इस केस को उच्च न्यायालय में लेकर जाएं। महिला की तरफ से मांग की जा रही थी कि उन्हें सुरक्षा दी जाए। उन्होंने आरोप लगाए थे वह कर्नाटक से बाहर रहने के लिए मजबूर हैं। महिला ने क्या कहा बार एंड बेंच के अनुसार, महिला की तरफ से कोर्ट पहुंचे वकील ने कहा, 'मुझे धमकियां मिल रहीं हैं। मैं कर्नाटक में प्रवेश नहीं कर पा रहीं हूं। मेरी सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। मैं दिल्ली में रहने के लिए मजबूर हूं। मुझे बार-बार धमकियां मिल रहीं हैं।' उन्होंने कहा कि वह कर्नाटक में अपने ही घर में रहना चाहती हैं, लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहीं हैं। उन्होंने संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश के आरोप लगाए हैं। वकील ने कहा, 'मैं वापस जाना चाहती हूं और अपने आवास में रहना चाहती हूं। मैंने शिकायतें दर्ज कराईं हैं, अपने पक्ष में कोर्ट के आदेश भी हासिल किए हैं, लेकिन इसके बाद भी धमकियां दी जा रहीं हैं। मेरे घर पर पत्थरबाजी हुई, गुंडे आए थे और तोड़फोड़ करके गए हैं। वो मेरी संपत्ति को हथियाना चाहते हैं।' क्या बोला कोर्ट कोर्ट ने कहा, 'कर्नाटक के मुख्यमंत्री आपके पीछे लोगों को दिल्ली भेज रहे हैं?' कोर्ट ने कहा, 'आप भी राजनेता हैं। आप अपनी लड़ाइयां कोर्ट में न लड़ें।' इसपर वकील ने जवाब दिया, 'मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं।' सुप्रीम कोर्ट ने महिला को हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है। वकील ने मांग की, 'कम से कम मेरी सुरक्षा की जाए।' इसपर कोर्ट ने अगले केस को सुनवाई के लिए बुलाया। फिल्म कहानी 2 पर भी हुई सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म 'कहानी 2' को लेकर फिल्मकार सुजॉय घोष के खिलाफ कथित कॉपीराइट उल्लंघन के एक मामले में झारखंड की एक अदालत के समक्ष लंबित कार्यवाही को शुक्रवार को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने घोष की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें झारखंड उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने घोष के खिलाफ लंबित कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था। पीठ ने घोष की याचिका स्वीकार करते हुए कहा, 'मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा सात जून, 2018 को पारित समन आदेश और उच्च न्यायालय द्वारा 22 अप्रैल, 2025 को पारित आदेश को रद्द किया जाता है तथा निरस्त किया जाता है।'  

24 घंटे, 500 मिलियन व्यूज! Spider-Man: Brand New Day Trailer में छिपा है ये बड़ा राज

लॉस एंजिल्स मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स के फैंस फूले नहीं समा रहे हैं। वजह है Spider-Man: Brand New Day का ट्रेलर। बुधवार को मार्वल स्‍टूडियो और सोनी पिक्‍चर्स ने 2021 में रिलीज हुई 'स्‍पाइडर-मैन: नो वे होम' के मोस्‍ट अवेटेड सीक्‍वल का 2 मिनट 32 सेकेंड का ट्रेलर रिलीज किया। चौंकाने वाली खबर ये है कि इस ट्रेलर को 24 घंटों में अलग-अलग वर्जन और अलग-अलग प्‍लेटफॉर्म पर 500 म‍िल‍ियन से अध‍िक व्‍यूज मिल चुके हैं! टॉम हॉलैंड जहां इस फिल्‍म में पीटर पार्कर के रूप में वापसी कर रहे हैं, वहीं उनका साथ देने के लिए इस बार कोई दोस्त नहीं है, क्योंकि पीटर को एहसास हो चुका है कि स्‍पाइडर-मैन के तौर पर दुनिया को बचाने की जिम्मेदारी उसे अब खुद ही उठानी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस ट्रेलर ने व्‍यूज के मामले में नया इतिहास रच दिया है। इससे पहले कि हम 'स्‍पाइडर-मैन: ब्रांड न्‍यू डे' के ट्रेलर और कहानी की बात करें, बता दें इसने 'Grand Theft Auto VI' के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, GTA के ट्रेलर ने 24 घंटे में 475 म‍िल‍ियन व्‍यूज बटोरकर एक बेंचमार्क बनाया था, जो अब 'स्‍पाइड-मैन 4' के नाम है। इस ट्रेलर को सोनी पिक्‍चर्स ने अलग-अलग देशों में अलग-अलग भाषाओं में रिलीज किया है। यदि सिर्फ प्रोडक्‍शन हाउस के इंडिया चैनल की बात करें तो वहां अंग्रेजी ट्रेलर को 10 मिलियन, हिंदी वर्जन के ट्रेलर को 3.4 म‍िल‍ियन, तमिल वर्जन को 1.3 म‍िल‍ियन, तेलुगू को 1 म‍िल‍ियन, मयालमम और 97 हजार और कन्‍नड़ को 20 हजार से अध‍िक व्‍यूज मिल चुके हैं। हालांकि, Sony पिक्‍चर्स की ओर से 500 म‍िल‍ियन व्‍यूज के इस आंकड़े की पुष्‍ट‍ि होना अभी बाकी है। दुनिया भूल चुकी है पीटर पार्कर की असली पहचान बहरहाल, ट्रेलर की शुरुआत पीटर पार्कर (टॉम हॉलैंड) से होती है, जहां वह सोच रहा है कि दुनिया में हर किसी से अपनी असली पहचान भुला देने के उसके फैसले के क्या नतीजे होंगे। इसका मतलब है कि उसकी गर्लफ्रेंड, MJ (जेंडया), और सबसे अच्छे दोस्त नेड (जैकब बैटलॉन) को अब कोई अंदाजा नहीं है कि वह कौन है। वह आंटी मेय (मारिसा टोमेई) की मौत का भी शोक मना रहा है। हालांकि, जब एक सुबह वह जागता है और देखता है कि उसकी शक्तियां कम हो रही हैं, तो वह डॉ. बैनर (मार्क रुफ्फालो) से मदद मांगता है ताकि वह समझ सके कि वह इस मुश्किल से कैसे निपट सकता है। डॉ. ब्रूस बैनर ने पीटर को दी नसीहत डॉ. बैनर उसे समझाते हैं कि अगर DNA में बदलाव हो रहा है, तो यह बहुत ज्यादा खतरनाक होगा। लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि यह बात Spider-Man को चुनौतियों का सामना करने से रोक पाएगी, क्योंकि वह एक बार फिर दुनिया को बचाने के लिए निकल पड़ता है। 'पनिशर' जॉन बर्नथल की एंट्री ढाई मिनट के इस ट्रेलर की सबसे खास बातों में से एक है MCU में The Punisher की एंट्री, जिसका किरदार Jon Bernthal ने निभाया है। उन्होंने ही 'नेटफ्ल‍िक्‍स' के शो 'पनिशर' और 'डेयरडेविल' में भी इस किरदार को अमर बना दिया था। फैंस बोले- अब तक की सबसे बेहतरीन स्‍पाइडर-मैन मूवी जहां तक फैंस की बात है, तो वह ट्रेलर देखकर निहाल हो रहे हैं। एक फैन ने कमेंट किया है, 'इस बार अंदाज बिल्कुल अलग है। मुझे स्‍पाइडर-मैन को एक नए और एकदम असली रूप में देखने की उम्मीद है।' एक अन्‍य यूजर ने लिखा है, 'यह अब तक की सबसे बेहतरीन Spider-Man फ‍िल्म होने वाली है।' 'स्‍पाइडर-मैन: नो वे होम' के आख‍िर में क्‍या हुआ था पिछली फिल्‍म Spider-Man: No Way Home के आखिर में डॉक्‍टर स्‍ट्रेंज के जादू के बाद, दुनिया यह भूल चुकी है कि पीटर पार्कर नाम का कोई इंसान भी है। चार साल बाद, पीटर एक सुपरहीरो Spider-Man के तौर पर चुपके से न्‍यूयॉर्क की रक्षा करता है। कई तरह के अपराधों की जांच करते हुए उसे एक बड़े रहस्य का पता चलता है, जहां उसे अपने बीते हुए कल के कर्मों के नतीजों का सामना करना पड़ता है।'

काल का संकेत या संयोग? मनोज को पहले ही हो गया था आभास, थोड़ी देर बाद 8 जले जिंदा

इंदौर इंदौर में हुए खौफनाक अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया, जहां मनोज पुगलिया समेत 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद मनोज का आखिरी वॉट्सऐप स्टेटस तेजी से वायरल हो रहा है। 7 परिजनों के साथ अग्निकांड का शिकार हुए मनोज पुगलिया को क्या कुछ घंटे पहले ही काल की क्रूरता का अहसास हो गया था? इंदौर के भीषण हादसे के बाद मनोज पुगलिया के वॉट्सऐप स्टेटस को देखकर लोग ऐसी ही चर्चा कर रहे हैं। मौत से कुछ घंटे पहले मनोज ने वक्त की ताकत का जिक्र किया था, जिसकी पहली लाइन थी कि ‘वह सबकुछ छीन सकता है।’ आगे उन्होंने कहा था कि यह सबकुछ छीन सकता है पर पहचान नहीं। इंदौर के बृजेश्वरी (एनएक्स) में हुए खौफनाक अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया, जहां मनोज पुगलिया समेत 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद मनोज का आखिरी वॉट्सऐप स्टेटस तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने वक्त की इस ताकत का जिक्र करते हुए लिखा था, 'वक्त सबकुछ छीन सकता है, मगर हुनर और मेहनत से मिली पहचान नहीं छीन सकता।' इन शब्दों को देखकर जहां मनोज के परिजन और रिश्तेदार भावुक हो जाते हैं तो उन्हें उनके लिए यह हौसला भी बन गया है, जिसे परिवार ने सहेजकर रख लिया है। और क्या लिखा था एक दिन पहले दोपहर 1.04 बजे मनोज ने दो स्टेट्स लगाए थे। एक में लिखा था, 'वक्त सब कुछ छीन सकता है, मगर हुनर और मेहनत से मिली पहचान कभी नहीं छीन सकता है। एक अन्य स्टेट्स में उन्होंने लिखा था, ‘कभी फुरसत में अपनी कमियों पर भी गौर करना चाहिए। दूसरों को आईना दिखाने की आदत अपने आप छूट जाएगी।’ मनोज पुगलिया का वॉट्सऐप स्टेटस मौत की इस भयावह रात का मंजर किसी डरावने सपने से कम नहीं था। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके का मुआयना किया, जहां पूरा घर जलकर खाक हो चुका था। नीचे किचन, डायनिंग हॉल और बेडरूम था, जिसमें गैस गीजर, फ्रिज, एसी और भारी फर्नीचर मौजूद था- जो आग को और भी भड़काने का कारण बने। उस रात क्या-क्या हुआ रिश्तेदारों के मुताबिक, मनोज अपनी पत्नी सुनीता, साले विजय और सुमन के साथ नीचे ही सो रहे थे। हादसे की शुरुआत एक जोरदार धमाके जैसी आवाज से हुई- जैसे बाइक का टायर फटा हो। मनोज सबसे पहले जागे, लेकिन जैसे ही दरवाजा खोला, आग की विकराल लपटें भीतर घुस पड़ीं। हालात बिगड़ते देख उन्होंने सुनीता को बालकनी की ओर धकेला। बेटे सौरभ, सौमिल और हर्षित किसी तरह जाली तोड़कर बाहर निकलने में कामयाब हुए, लेकिन हर कोई इतना खुशकिस्मत नहीं था। बचने को खूब छटपटाए थे मासूमों की चीखें उस रात गूंजती रहीं। रुचिका के बच्चे 11 साल की राशि और 8 साल का तनय, अपने नाना-नानी को बचाने के लिए नीचे दौड़े, लेकिन खुद ही आग के शिकंजे में फंस गए। सिमरन ने भी बाहर निकलने की कोशिश की, पर वह आग की भेंट चढ़ गई। बाद में उसका जला हुआ शव मिला। निकल नहीं पाए पापा और बाकी लोग बचे हुए सौरभ की जुबानी उस रात की दहशत रोंगटे खड़े कर देती है, 'मैं मां और भाइयों को लेकर बाहर आ गया, लेकिन पापा और बाकी लोग अंदर ही फंस गए। मैंने बार-बार चिल्लाकर कहा- पापा, सिमरन, कार्तिक बाहर आ जाओ… लेकिन धुएं ने सबको निगल लिया।' इस हादसे ने एक पूरे परिवार को खत्म कर दिया। कई तरह की अटकलें इधर, हादसे के बाद अफवाहों का बाजार भी गर्म हो गया। गैस टंकियों, इलेक्ट्रिक लॉक और अन्य कारणों को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। परिवार ने साफ किया कि घर में इलेक्ट्रिक लॉक नहीं था और कई दावे बेबुनियाद हैं। गीजर, एसी और फ्रिज जैसे उपकरण फटने से आग और भयानक हो गई।

जल विवाद ने पकड़ा तूल: पंजाब के CM मान ने राजस्थान से मांगे 1.44 करोड़, 66 साल के पानी का मुद्दा गरमाया

चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को राजस्थान से पिछले 66 वर्षों के पानी के उपयोग के लिए लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि मांगी और भुगतान न करने पर पानी रोकने की चेतावनी दी थी। सीएम भगवंत मान के इस बयान के बाद राजस्थान ने पलटवार किया है। राजस्थान जल संसाधन विभाग के अनुसार, पंजाब जिस समझौते का हवाला दे रहा है, उसका वर्तमान परिदृश्य में कोई कानूनी आधार नहीं है। यह समझौता वर्ष 1920 में बहावलपुर रियासत ( अब पाकिस्तान में) और ब्रिटिश सरकार के बीच हुआ था न कि वर्तमान राजस्थान एवं पंजाब के बीच। आजादी के बाद परिस्थितियां पूरी तरह से बदल गई हैं। रियासतों का विलय होने के बाद नए राज्यों का गठन हो गया। इसके बाद वर्ष 1955, 1958 व 1988 में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे से जुड़े नए समझौते हो गए। इन समझौतों में किसी तरह के भुगतान का प्रविधान नहीं है। राजस्थान और पंजाब के बीच जल बंटवारे का विवाद पहले से ही न्यायाधिकरण में लंबित है। अगले कुछ दिन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस संबंध में केंद्र सरकार के समक्ष राज्य का पक्ष रखेंगे।

Meta के मेटावर्स पर ₹6.5 लाख करोड़ का नुकसान, पाकिस्तान का साल भर का बजट इससे कम है

 नई दिल्ली Meta ने अपने मेटावर्स प्लेटफॉर्म Horizon Worlds को लेकर बड़ा फैसला लिया है. कंपनी अब इसे बंद करने जा रही है. साथ ही वीआर एक्सपीरियंस पर नए इन्वेस्टमेंट और डेवलपमेंट को भी लिमिट किया जा रहा है।  यह फैसला सिर्फ एक प्रोडक्ट बंद करने का नहीं है, बल्कि यह इस बात का इशारा है कि Meta धीरे-धीरे अपने उसी मेटावर्स विजन से पीछे हट रही है, जिसे कभी मार्क जकबरबर्ग इंटरनेट का फ्यूचर बताया गया था।  मेटावर्स को फ्यूचर बता कर जकरबर्ग ने Facebook को Meta कर दिया साल 2021 में फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग ने दुनिया को बताया था कि सोशल मीडिया का दौर खत्म होने वाला है और अगला मेटावर्स अगला बड़़ा प्लेटफॉर्म होगा. मेटावर्स यानी एक वर्चुअल दुनिया ।  हाइप इतनी बनी की मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक का नाम बदलकर Meta कर दिया गया. यह टेक इंडस्ट्री में एक बड़ा मोड़ था. पहली बार किसी बड़ी कंपनी ने खुले तौर पर कहा कि वह इंटरनेट के अगले रूप को खुद बनाएगी ।  उस समय यह सिर्फ एक कंपनी का फैसला नहीं था, बल्कि पूरी इंडस्ट्री के लिए एक सिग्नल था. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, ऐपल, सबने इस दिशा में काम तेज कर दिया. वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी और डिजिटल दुनिया को लेकर एक नई दौड़ शुरू हो गई।  पांच साल बाद अब तस्वीर बिल्कुल अलग है Meta धीरे-धीरे अपने उसी मेटावर्स विजन से पीछे हटती दिख रही है. Horizon Worlds, जिसे कंपनी ने अपने वर्चुअल सोशल प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया था, वह उम्मीद के मुताबिक नहीं चला. अब कंपनी वर्चुअल रिएलिटी पर फोकस कम कर रही है और मोबाइल और AI पर ज्यादा ध्यान दे रही है।  यह सिर्फ एक प्रोडक्ट का फेल होना नहीं है. यह उस पूरे आइडिया की कमजोरी दिखाता है, जिसे इंटरनेट का भविष्य बताया गया थ।  80 अरब डॉलर का दांव, लेकिन यूजर नहीं आए Meta ने अपने Reality Labs डिवीजन के जरिए मेटावर्स पर 80 से 85 अरब डॉलर तक खर्च कर दिए. इसमें वीआर हेडसेट्स, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, चिप डिजाइन, डेटा सेंटर, और डेवलपर टूल्स तक सब शामिल था।  इतना बड़ा निवेश करने के बाद भी कंपनी उस स्तर का यूजर एडॉप्शन नहीं ला पाई, जो इस पूरे मॉडल को टिकाऊ बना सके।  Horizon Worlds पर एक्टिव यूजर्स की संख्या लाखों में ही सीमित रही. कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि ज्यादातर यूजर्स प्लेटफॉर्म पर कुछ ही समय के लिए आते थे और फिर वापस नहीं लौटते थे. यानी यूजर रिटेंशन में फेल हो गए।  टेक इंडस्ट्री में किसी भी प्लेटफॉर्म की सफलता सिर्फ यूजर्स से नहीं, बल्कि उनके बार-बार लौटने से तय होती है. मेटावर्स इस कसौटी पर कमजोर साबित हुआ।  टेक्नोलॉजी तैयार नहीं थी, या यूजर तैयार नहीं थे? मेटावर्स की असफलता को समझने के लिए यह सवाल जरूरी है. पहली नजर में लगता है कि समस्या टेक्नोलॉजी की थी. वीआर (VR) हेडसेट अभी भी महंगे हैं, भारी हैं, और लंबे समय तक पहनना आसान नहीं है. बैटरी लाइफ लिमिटेड है, और हाई क्वालिटी ग्राफिक्स के लिए ज्यादा कंप्यूटिंग पावर चाहिए।  लेकिन असली समस्या इससे भी गहरी है. यूजर्स को जरूरत ही महसूस नहीं हुई. लोग अपने फोन और लैपटॉप पर पहले से ही सोशल मीडिया, गेमिंग और वीडियो कॉल कर रहे हैं. मेटावर्स ने इन्हीं चीजों को एक नए फॉर्म में पेश किया, लेकिन ऐसा कुछ नया नहीं दिया जो लोगों को मजबूर करे कि वे अपनी आदतें बदलें यही वजह है कि मेटावर्स एक ऐसी टेक्नोलॉजी बन गया, जो मौजूद तो थी, लेकिन जरूरी नहीं थी. मेटावर्स कोनॉमी का सपना भी नहीं चला Meta का प्लान था कि मेटावर्स के अंदर एक पूरी डिजिटल इकोनॉमी बनेगी. लोग वर्चुअल जमीन खरीदेंगे, डिजिटल सामान लेंगे, और क्रिएटर्स पैसे कमाएंगे।  लेकिन यह मॉडल भी जमीन पर नहीं उतर पाया. यूजर्स के पास ऐसा कोई ऐसी वजह नहीं थी कि वे वर्चुअल चीजों पर पैसा खर्च करें।  जहां गेमिंग में लोग पैसे खर्च करते हैं, वहां भी एक स्ट्रॉन्ग गेम प्ले और कम्युनिटी होती है. मेटावर्स में वह दोनों चीजें कमजोर थीं. क्रिएटर्स के लिए भी कमाई का रास्ता साफ नहीं था, जिससे पूरा इकोसिस्टम धीमा पड़ गया।  फेसबुक से Meta बनना: एक बड़ा जोखिम जब फेसबुक ने अपना नाम बदलकर Meta किया, तब उसने अपने फ्यूचर को एक ही डायरेक्शन  में बांध दिया. यह एक साहसी बोल्ड मूव था, लेकिन रिस्की भी था।  कंपनी ने अपने मेन बिजनेस, जैसे विज्ञापन और सोशल प्लेटफॉर्म, से ध्यान हटाकर एक लंबे समय वाले विजन पर ज्यादा खर्च करना शुरू किया. इससे इन्वेस्टर्स का भरोसा डगमगाया और कंपनी को कई बार अपनी स्ट्रैटिजी भी बदलनी पड़ी।  बाद में Meta को लागत कम करनी पड़ी, कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी और नए फोकस की तलाश करनी पड़ी।  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने  पूरा खेल बदल दिया 2022 के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने टेक इंडस्ट्री का फोकस पूरी तरह बदल दिया. जहां मेटावर्स को भविष्य माना जा रहा था, वहीं एआई ने तुरंत असर दिखाया. कंटेंट बनाना, ऑटोमेशन, कोडिंग, कस्टमर सर्विस और हर जगह एआई का इस्तेमाल बढ़ गया।  कंपनियों को यहां तुरंत फायदा दिखा, जबकि मेटावर्स में फायदा दूर का सपना था. Meta ने भी यह बदलाव समझा और अब वह तेजी से एआई पर काम कर रहा है. इससे साफ है कि कंपनी ने अपनी प्रायॉरिटी बदल दी है।  क्या मेटावर्स को खत्म समझा जाए?  मेटावर्स पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन उसका बड़ा सपना फिलहाल रुक गया है. अब जो दिशा दिख रही है, वह ज्यादा प्रैक्टिकल है। पूरी वर्चुअल दुनिया बनाने के बजाय, अब कंपनियां असली दुनिया में डिजिटल चीजें जोड़ने पर काम कर रही हैं. ऑगमेंटेड रियलिटी, एआई और मोबाइल बेस्ड एक्सपीरिएंस इस डायेरक्शन में आगे बढ़ रहे हैं।  गेमिंग, ट्रेनिंग और कुछ खास इंडस्ट्री में मेटावर्स का इस्तेमाल जारी रहेगा, लेकिन यह आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा अभी नहीं बन पाया है।  Meta ने क्या खोया, क्या पाया? Meta ने इस पूरे एक्सपेरिमेंट में बहुत बड़ा पैसा खोया, समय खोया और कुछ हद तक भरोसा भी खोया. लेकिन इसके साथ ही कंपनी ने बहुत कुछ सीखा भी. वीआर और एआर टेक्नोलॉजी में उसकी पकड़ मजबूत हुई है. उसने नए प्लेटफॉर्म, नए चिप्स और नई तकनीकों पर … Read more

ईरान जंग पर भागवत का बयान, स्वार्थी हितों के कारण हुआ युद्ध, भारत ही करेगा इसे खत्म

नागपुर   ईरान-अमेरिका जंग पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया को शांति का संदेश दिया है. नागपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि युद्ध केवल स्वार्थी हितों का परिणाम है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बगैर मोहन भागवत ने नसीहत दी कि दुनिया को संघर्ष की नहीं, बल्कि सद्भाव की जरूरत है. उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि युद्ध केवल भारत ही खत्म कर सकता है।  महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने आज यानी शुक्रवार को कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही प्राप्त की जा सकती है. कई देश कह रहे हैं कि केलल भारत ही चल रहे युद्ध को खत्म कर सकता है. दुनिया के चिंतकों के ध्यान में बार-बार देशों से आवाज़ उठ रही है कि चल रहे युद्ध को खत्म भारत ही कर सकता है क्योंकि विकासशील भारत की प्रवृत्ति का ज्ञान है।  मोहन भागवत ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया 2,000 वर्षों से संघर्षों के समाधान के लिए विभिन्न विचारों के साथ प्रयोग करती रही है लेकिन उसे खास सफलता नहीं मिली. उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और श्रेष्ठता एवं हीनता के विचार अब भी मौजूद हैं।  आरएसएस प्रमुख भागवत ने नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद इस सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि सभी जुड़े हुए हैं और एक हैं.’ उन्होंने संघर्ष से सौहार्द और सहयोग की ओर बढ़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है।  आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही हासिल की जा सकती है. मोहन भागवत ने आचरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी दिखना चाहिए।  उन्होंने कहा कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है और इसमें अक्सर व्यक्तिगत कठिनाई भी झेलनी पड़ती हैं. भागवत ने कहा कि भारत मानवता में विश्वास करता है जबकि अन्य देश अस्तित्व के लिए संघर्ष और ताकतवर के टिके रहने के सिद्धांत को मानते हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सौहार्द की जरूरत है। 

बिहार राजनीति में हलचल: क्या रामनवमी पर BJP घोषित करेगी अपना CM चेहरा?

  पटना भारतीय जनता पार्टी अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्यादा समय देने के विचार में नहीं है। बिहार में इतिहास रचने के लिए वह खरमास के खत्म होने का इंतजार करे, यह भी शायद संभव नहीं हो। और, मौका है रामनवमी का तो तैयारी उसी हिसाब से हो रही है। जी हां, संभव है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाने वाली पार्टी इस बार रामनवमी पर बिहार में पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री की शपथ करा ले। इसके लिए अंदर तैयारी है और बाहर माहौल बनाया जाने लगा है। खास बात यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चौंकाने वाले नाम-काम से अलग भाजपा अपनी राह खुद तैयार कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्लानिंग कभी भी सामने आ सकती है। रोज चौंका रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा ने राज्यसभा जाने के लिए राजी कराया है, यह राज्य का बच्चा-बच्चा जानता है। लेकिन, अब यह भी लोग समझ रहे हैं कि मुख्यमंत्री भाजपा को संशय में डाल रहे हैं। इधर उन्होंने राज्यसभा का नामांकन किया और उधर समृद्धि यात्रा पर निकल गए। राज्यसभा चुनाव के दिन पटना में रहे, लेकिन वोटिंग के दौरान विधानसभा का रुख भी नहीं किया। और तो और, अगले दिन फिर समृद्धि यात्रा पर बिहार के लोगों से मिलने निकल गए। अलग-अलग जिले घूम रहे हैं। इस दौरान वह यह तो बता रहे हैं कि आगे की जिम्मेदारी कौन संभालेगा, लेकिन यह नहीं कह रहे हैं कि वह बिहार छोड़ने जा रहे हैं। अब तक कई कंधों पर हाथ रख चुके नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, यह उन्होंने कभी नहीं कहा। निशांत के राजनीति में आने पर भी उन्होंने एक बार भी कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ नीतीश समर्थक निशांत के लिए डिप्टी सीएम की कुर्सी पर अड़े हैं। हालांकि, नीतीश कुमार लगातार अलग-अलग संकेत देकर भाजपा को ही संशय में डाल रहे। समृद्धि यात्रा में उन्होंने सबसे ज्यादा भाजपाई डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रख आगे की जिम्मेदारी संभालने की बात कही, जबकि भाजपा के अंदर से संघ-विद्यार्थी परिषद् बैकग्राउंड वाले किसी नेता को आगे करने की चर्चा निकल रही है। नीतीश ने सम्राट चौधरी को पसंद बताया है। लेकिन, वह इसके साथ ही बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी व लेसी सिंह के अलावा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के कंधे पर भी इसी अंदाज में हाथ रख चुके हैं। भाजपा की प्लानिंग अब आएगी सामने चैत्र नवरात्र शुरू हो चुका है। पहले बात चल रही थी कि 15 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास के बीच नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण नहीं होगा। लेकिन, अब भाजपा की तैयारी नवरात्र में ही अपने पहले मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने की है। बिहार भाजपा में नेताओं की चर्चा के दौरान अब भी रोज कई मुख्यमंत्री बन रहे हैं और हट रहे हैं, हालांकि नवरात्र का पहला दिन निकलते-निकलते यह कहा जा रहा है कि भाजपा के रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम चर्चा कर ली है। इसपर सर्व-सहमति की तैयारी की जा रही है। कहा जा रहा है कि रामनवमी या उसके अगले दिन नई सरकार का शपथ ग्रहण करा लिया जाएगा। नवरात्र के लिए राजनीतिक माहौल बनाया खरमास बाद नई सरकार की चर्चा चल रही थी। कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार राज्यसभा के नए कार्यकाल के लिए अप्रैल में मौजूदा सांसदों का समय पूरा होने तक यहीं जमे रहेंगे। लेकिन, अब नवरात्र शुरू होते ही माहौल बदला है। भाजपा प्रदेश मुख्यालय के नेताओं की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास यह जानकारी पहुंचा दी गई है कि उन्हें 30 मार्च के पहले ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करनी है। वह 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, इसलिए 14 दिन ही उनके पास निर्णय के लिए बचते हैं। नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता 30 मार्च के पहले ले लेंगे तो उसके बाद उन्हें नई सरकार के शपथ ग्रहण तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखने का विकल्प हो सकता है या नहीं- इसपर भी चर्चा चल रही है। हालांकि इन चर्चाओं के बीच रामनवमी पर शपथ ग्रहण की चर्चा भाजपा में पटना से लेकर दिल्ली तक है।