नवरात्र में बेटियों को बड़ी संख्या में नियुक्ति पत्र मिलना सकारात्मक संकेत: मुख्यमंत्री -लोकभवन में नव चयनित 1,228 नर्सिंग अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किया संबोधित 1097 महिला और 131 पुरूष नर्सिंग अधिकारियों को मिला नियुक्ति पत्र – सीएम ने नव चयनित नर्सिंग अधिकारियों को वितरित किए नियुक्ति पत्र, बोले- नए मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग व पैरामेडिकल सीटों में हुआ भारी इजाफा – सुपर स्पेशलिटी संस्थानों ने बढ़ाई प्रदेश की पहचान, नर्सिंग के साथ भाषा कौशल से मिलेगा वैश्विक अवसर लखनऊ आज नर्सिंग प्रोफेशनल्स की मांग केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में है। जापान और जर्मनी यात्रा के दौरान भी नर्सिंग प्रोफेशनल्स की डिमांड की गई। वहां भारत के नर्सिंग प्रोफेशनल्स के बारे में लोगों के मन में आदर का भाव है। यह सौभाग्य हमारे नर्सिंग प्रोफेशनल्स को प्राप्त है। ऐसे में नर्सिंग कोर्स के साथ एक लैंग्वेज में डिप्लोमा कर अपना भविष्य को और बेहतर बना सकते हैं। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोकभवन के सभागार में आयोजित निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया से चयनित 1,228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कही। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नव चयनित नर्सिंग ऑफिसर्स को नियुक्ति पत्र वितरित किया। इससे पहले नव चयनित नर्सिंग ऑफिसर्स ने मुख्यमंत्री के सामने अपने विचार साझा किए और उन्हें धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में 1097 महिलाओं और 131 पुरूष नर्सिंग अधिकारियों को मिला नियुक्ति पत्र पहले की सरकारों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल थीं कोई सुध लेने वाला नहीं था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कभी पूर्वी उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति के लिए जाना जाता था। हालात इतने खराब थे कि हजारों लोगों की मौतें होती थीं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। इंसेफेलाइटिस और डेंगू जैसी बीमारियां हर साल बड़ी संख्या में लोगों की जान ले लेतीं थीं। इसके अलावा अन्य कई संक्रामक रोगों से भी लगातार मौतें होती रहतीं थीं, जिससे यह क्षेत्र स्वास्थ्य संकट का केंद्र बना हुआ था। इन चुनौतियों के बीच प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए गए। वर्षों से बंद पड़े एएनएम और जेएनएम प्रशिक्षण संस्थानों को फिर से शुरू किया गया। प्रदेश में 35 ऐसे एएनएम प्रशिक्षण केंद्र, जो पूर्व में बंद हो चुके थे, उन्हें पुनः संचालित किया गया है। इसके साथ ही 31 नए नर्सिंग कॉलेजों का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में केवल मेडिकल कॉलेज ही नहीं, बल्कि नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों की भी समान रूप से अहम भूमिका होती है। यदि डॉक्टर स्वास्थ्य प्रणाली का नेतृत्व करता है, तो नर्सिंग स्टाफ उसकी रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता है। इसी सोच के साथ प्रदेश में नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दिए जाने का परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। जहां पहले प्रदेश राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे था, वहीं अब उत्तर प्रदेश इन मानकों पर राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंच रहा है। 976 सीएचसी पर टेलीमेडिसिन और टेली-कंसल्टेशन की सुविधा शुरू मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में भी प्रदेश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के तहत प्रदेश में लगभग 9.25 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। इसके अलावा डिजिटल हेल्थ आईडी (आभा आईडी) के रूप में 14 करोड़ 28 लाख से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जो नागरिकों को एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर रहे हैं। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर टेलीमेडिसिन और टेली-कंसल्टेशन की सुविधा शुरू की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में रियल टाइम डिजीज ट्रैकिंग की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे बीमारियों की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिल रही है। प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां स्वास्थ्य क्षेत्र में अव्यवस्था और बाहरी हस्तक्षेप की शिकायतें रहती थीं, वहीं अब “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत हर जिले में मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। मेडिकल शिक्षा को एकरूपता देने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के माध्यम से सभी मेडिकल कॉलेजों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। अब सहारनपुर, आजमगढ़, चंदौली और बिजनौर जैसे विभिन्न जिलों के मेडिकल कॉलेज एक समान पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली के तहत संचालित हो रहे हैं। 22 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के साथ नर्सिंग शिक्षा को आगे बढ़ाया जा रहा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के अंदर मेडिकल कॉलेजेस की संख्या बढ़ी है। गोरखपुर और रायबरेली में एम्स अच्छे ढंग से संचालित हो चुका है। पीपीपी मोड पर भी हमने कुछ मेडिकल कॉलेज संचालित किए हैं, जो सफलतापूर्वक आगे बढ़े हैं। महाराजगंज, संभल और शामली जैसे जिलों में यह मॉडल अब “पब्लिक ट्रस्ट पार्टनरशिप” के रूप में विकसित हो रहा है, जहां सरकार के प्रति बढ़े विश्वास के चलते आम जनता भी स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए आगे आ रही है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सीटों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है। नर्सिंग में 7000 सीटें और पैरामेडिकल में 2000 सीटों की वृद्धि की गई है। एमबीबीएस (यूजी) सीटें, जो पहले 5390 थीं, अब बढ़कर 12700 हो गई हैं। वहीं, पीजी सीटों की संख्या 1221 से बढ़कर 5056 तक पहुंच गई है। यह वृद्धि प्रदेश में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। प्रदेश के 18 मेडिकल कॉलेजों में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई संचालित हो रही है, जबकि 22 नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के साथ इन संस्थानों में भी नर्सिंग शिक्षा को आगे बढ़ाया जा रहा है। उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं के विकास में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। संस्थान में डायबिटीज और किडनी रोगियों के लिए एडवांस्ड डायबिटीज सेंटर स्थापित किया गया है, जहां एक ही छत के नीचे दोनों बीमारियों का … Read more