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चीतों का नया बसेरा बनेगा बुंदेलखंड अब बुंदेलखंड की धरती पर चीते भरेंगे फर्राटे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को सागर जिले के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिज़र्व (नौरादेही) में संरक्षित प्रजाति के कछुओं को जल में विमुक्त कर जैव विविधता संरक्षण का नव संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने चीतों के पुनर्वास के लिए बनने वाले विशेष बाड़े (बोमा) का भूमि-पूजन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और जल स्रोतों को समृद्ध बनाकर वन्य प्राणियों एवं जलीय जीवों के संरक्षण के लिए सतत् प्रयास कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से साफ पानी वाली नदियों में कछुओं की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर देते हुए कहा कि इससे हमारे पारिस्थितिकीय संतुलन को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नौरादेही टाइगर रिजर्व को भविष्य में एक और बड़ी पहचान मिलने जा रही है। आने वाले समय में यह क्षेत्र मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा सुरक्षित आवास बनेगा। इससे मध्यप्रदेश के वन्य-जीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही हमारी जैविक सम्पदा और भी समृद्ध होगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में हमारी सरकार यह महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्म दिवस पर चीता पुनर्वास के लिए सॉफ्ट रिलीज बोमा (बाड़े) का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जलीय जीवों की समृद्धि के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दिखाते हुए यहां चंबल नदी और भोपाल से लाए गए 14 कछुए भी मुक्त विचरण के लिये बामनेर नदी में छोड़े। यह मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा नेशनल टाइगर रिजर्व है। जिसकी सीमाएं सतपुड़ा, कान्हा और पेंच राष्ट्रीय उद्यान से मिलती हैं। नौरादेही टाइगर रिजर्व में कई प्रकार के वन्यजीवों की प्रजातियों के लिए अनुकूल वातावरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। जंगल की सुंदरता हमारे वन्य जीवों से होती है। राज्य सरकार जीवोदया के संकल्प से कार्य कर रही है। जलचर, थलचर और नभचर सभी प्राणियों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बीते समय घड़ियाल और 25 कछुए कूनो-पालपुर में छोड़े थे और 5 गिद्धों को भी मुक्तावास में छोड़ा था। यह सभी प्रकार के जीवों के संरक्षण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। प्रदेश में वन्य-जीव पर्यटन के विकास एवं विस्तार से ग्रामीण आबादी को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। टाइगर रिजर्व से मानवों को वन्यजीवों के साथ जीने और सहअस्तित्व की भावना का सहज प्रकटीकरण होता है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की बामनेर नदी में विमुक्त किए 14 कछुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को अपने 61वें जन्म-दिवस पर सागर जिले की रहली तहसील स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में वन्य-जीव संरक्षण की दिशा में एक नई पहल की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली बामनेर नदी में 14 कछुओं को उनके प्राकृतिक आवास में विमुक्त (रिलीज) किया। ये कछुए 2 विशिष्ट प्रजातियों के हैं। टेरा प्रिंस प्रजाति के 06 कछुए और सुंदरी प्रजाति के 08 कछुए। विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्रजातियाँ नदी की स्वच्छता बनाए रखने और जलीय जैव-विविधता के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रकृति और वन्य-जीवों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रकृति और वन्य-जीवों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। कछुओं का विमुक्तिकरण और चीता पुनर्वास की दिशा में बढ़ते कदम मध्यप्रदेश को वन्य-जीव पर्यटन और संरक्षण के वैश्विक मानचित्र पर और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करेंगे। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र में कछुओं की महत्ता पर जोर देते हुए जल संरचनाओं के संरक्षण का आह्वान किया। बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का विस्तार 2,339 वर्ग किमी में है। यह प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जो सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों तक फैला है। इसे लैंड ऑफ वुल्व्स (भेड़ियों की धरती) भी कहा जाता है। वर्तमान में यहाँ करीब 32 बाघ मौजूद हैं। टाइगर रिजर्व में चीतों के अनुकूल भूमि उपलब्ध है। इस प्रकार की भूमि दक्षिण अफ्रीका में पायी जाती है। शीघ्र ही कूनो अभयारण्य से चीतों को लाकर यहाँ बसाया जायेगा। अभयारण्य में चिड़ियों की 240 प्रजातियाँ पायी जाती हैं, जो आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं। टाइगर रिजर्व में विभिन्न प्रजाति के पशु-पक्षी हैं, जिसमें टाइगर, पैंथर, भेड़िया, भालू, सियार, लकड़बग्घा, लोमड़ी, सुअर, नीलगाय, जंगली सुअर, चौसिंगा, काला हिरण, चिंकारा, कछुआ और मगरमच्छ आदि शामिल हैं। इसके विकास के साथ वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन के साथ रोजगार की अपार संभावनाएँ हैं। जन्मदिन पर बच्चियों को खिलाई काजू कतली, प्रदान किए ड्राइविंग लायसेंस मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जन्म दिवस पर रहली में अभूतपूर्व स्वागत और अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्मदिन पर सभी बच्चियों को अपने हाथों से काजू कतली खिलाई और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने वहां मौजूद 8 बच्चियों को ड्राइविंग लाइसेंस सर्टिफिकेट भी प्रदान किये। डॉ. यादव ने कहा कि सरकार बेटियों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कृषक  हरदास के खेत में खाट पर बैठकर किया भोजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कृषक  हरदास रैकवार के खेत पर पहुंचने पर कृषक परिवार ने कलश रखकर, चंदन रोली का तिलक लगाते हुए पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण परिवेश में आम के वृक्ष की छांव में खाट पर बैठकर भोजन किया। भोजन के पूर्व उन्होंने गौ माता को गुड-चारा भी खिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुन्देली भोजन की तारीफ की और कढ़ी, बिर्रा की रोटी, समां के चावल की खीर, खीचला-पापड़ आदि व्यंजनों का स्वाद चखा। इस अवसर पर उन्होंने किसान से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से मिल रहे लाभ की जानकारी भी ली। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री  दिलीप अहिरवार, रहली विधायक एवं पूर्व मंत्री  गोपाल भार्गव, देवरी विधायक  बृज बिहारी पटेरिया, नरयावली विधायक  प्रदीप लारिया, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  देवेंद्र सिंह,  श्याम तिवारी, मती रानी कुशवाहा, प्रधान सचिव, वन विभाग, मध्यप्रदेश  संदीप यादव, वन बल प्रमुख  शुभरंजन सिंह सेन, संभागायुक्त  अनिल सुचारी, पुलिस महानिरीक्षक मती हिमानी खन्ना, पुलिस उप महानिरीक्षक  सचिंद्रनाथ चौहान, कलेक्टर  संदीप जी आर, पुलिस अधीक्षक  विकास शाहवाल, मुख्य वन संरक्षक  दीपू दमन सिंह भदौरिया, डीएफओ  रजनीश सिंह एवं  वरुण यादव सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।  

रहस्य से भरा बिहार का यह मेला, यूपी-बंगाल-नेपाल से खिंचे चले आते हैं श्रद्धालु

गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में शारदीय नवरात्र के अवसर पर एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जो आधुनिक युग में भी प्राचीन मान्यताओं और गहरे अंधविश्वास की याद दिलाता है। जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित लक्षवार गांव का लक्षवार धाम इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसे स्थानीय लोग प्रेतबाधा से मुक्ति का धाम मानते हैं, जहां नवरात्र के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। कई राज्यों तक फैला है प्रभाव लक्षवार धाम की प्रसिद्धि केवल बिहार तक सीमित नहीं है। यहां उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में लगभग एक महीने तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहां की मिट्टी के स्पर्श मात्र से शरीर के भीतर मौजूद बुरी आत्माएं भाग जाती हैं। इसके अतिरिक्त यहां ललका बाबा द्वारा दी जाने वाली भभूत का भी विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्र में दिखते हैं विचलित करने वाले दृश्य शारदीय नवरात्र के मौके पर मंदिर परिसर में कई विचलित करने वाले दृश्य देखने को मिलते हैं। कहीं महिलाएं जोर-जोर से सिर हिलाती नजर आती हैं, तो कहीं पुरुष जमीन पर लोटकर अजीबोगरीब हरकतें करते दिखते हैं। अंधविश्वास का आलम यह है कि यहां आने वाले लोग इन गतिविधियों को इंसानी रूप में मौजूद भूत-प्रेत मानते हैं। पीड़ा से मुक्ति पाने की चाह में लोग मर्यादा और लोक-लाज की परवाह किए बिना घंटों तक इन क्रियाओं में लीन रहते हैं। शक्तिपीठ से शिवधाम तक का सफर मंदिर के पुजारी के अनुसार, इस परंपरा की जड़ें दशकों पुरानी हैं। वर्ष 1972 में माता के आदेश पर लक्षवार शक्तिपीठ से पिंड का कुछ अंश लाकर कुचायकोट के जलालपुर बाजार में शिवधाम की स्थापना की गई थी। इसके बाद से ही यहां तांत्रिकों द्वारा भूत-प्रेत भगाने और मानसिक रोगों के उपचार का दावा करने का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज एक विशाल मेले का रूप ले चुका है। जहां एक ओर श्रद्धालु इसे दैवीय चमत्कार मानते हैं, वहीं चिकित्सा जगत इसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या और सामाजिक धारणा के रूप में देखता है।

फर्जी MBBS डिग्री बनाकर करोड़ों की ठगी: दिल्ली से ‘लेडी फ्रॉड’ गिरफ्तार

रायपुर फर्जी मेडिकल डिग्री और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर दो करोड़ 34 लाख रुपये की ठगी की आरोपित साक्षी सिंह (28), निवासी जानकीपुरम, लखनऊ व वर्तमान पता राजनगर-2, पालम, नई दिल्ली को गिरफ्तार किया गया है। जांच में राजफाश हुआ है कि आरोपित गिरोह के लिए फर्जी एमबीबीएस और बीएएमएस डिग्री तैयार कर उपलब्ध कराती थी। पुलिस के मुताबिक, प्रार्थी संजय निराला ने 17 फरवरी 2026 को सिविल लाइन थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर और राकेश रात्रे सहित अन्य लोगों ने पोस्ट ऑफिस में नौकरी लगवाने और मेडिकल डिग्री दिलाने का झांसा देकर उससे और उसके रिश्तेदारों से कुल 2.34 करोड़ रुपये ठग लिए, लेकिन न नौकरी मिली और न ही कोई वैध प्रमाणपत्र। पुणे की यूनिवर्सिटी के नाम पर बनती थी डिग्रियां पुलिस ने पहले चार आरोपितों को गिरफ्तार कर पूछताछ की। इसी दौरान मिले सुराग और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर साक्षी सिंह की भूमिका सामने आई। पुलिस टीम को उसके दिल्ली में छिपे होने की सूचना मिली, जिसके बाद विशेष टीम भेजकर उसे हिरासत में लिया गया। पूछताछ में साक्षी सिंह ने स्वीकार किया कि वह एक अन्य सहयोगी के साथ मिलकर पुणे स्थित डीवाई पाटिल विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी एमबीबीएस और बीएएमएस डिग्री तैयार करती थी। इन डिग्रियों का उपयोग गिरोह लोगों को झांसा देने और मोटी रकम वसूलने में करता था। मोबाइल डेटा से बड़े नेटवर्क का राजफाश संभव पुलिस ने आरोपित के कब्जे से तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनमें कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना है। मोबाइल डेटा की जांच से गिरोह के अन्य सदस्यों, लेन-देन और नेटवर्क का और बड़ा राजफाश हो सकता है। फिलहाल पुलिस ने आरोपित को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। आशंका है कि इस गिरोह ने अन्य राज्यों में भी इसी तरह की ठगी को अंजाम दिया है, जिसे लेकर जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।  

मांगलिक भवनों का निर्माण गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में करें पूर्ण : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ में लगभग 11 करोड़ रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्यों की सतत निगरानी की जाएं और गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाएं। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि शासकीय राशि को अपनी राशि समझकर कार्य करें और सभी मांगलिक भवन निर्धारित समय सीमा में पूर्ण किए जाएं। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि 42 मांगलिक भवनों के अतिरिक्त 60 और भवन स्वीकृत किए गए हैं, जिनका निर्माण लगभग 15 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मल्हारगढ़ एवं पिपलिया मंडी में फ्लाई-ओवर निर्माण कार्य भी शीघ्र प्रारंभ होंगे। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने बताया कि दिसंबर 2026 तक गांधी सागर परियोजना का पानी हर खेत तक पहुंचाने का लक्ष्य है, जिससे सिंचाई सुविधा में विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि नारायणगढ़ एवं बूढ़ा में सांदीपनी विद्यालय तथा मल्हारगढ़ में बालिकाओं के लिए छात्रावास का निर्माण भी कराया जाएगा। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत टीबी मरीजों को फॅूड बास्केट वितरित किए तथा दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण प्रदान किए। साथ ही उपस्थित लोगों को नशा मुक्ति की शपथ भी दिलाई। इस अवसर पर ग्राम ढिकन्या में 37 लाख 50 हजार रुपए की लागत से निर्मित पंचायत भवन का लोकार्पण किया गया, उन्होंने 10 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से बनने वाले 42 मांगलिक भवनों का भूमि-पूजन भी किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती दुर्गा विजय पाटीदार, जिला योजना समिति के सदस्य  राजेश दीक्षित सहित जन-प्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित 

कहीं ब्यूटी क्रीम न पहुंचा दे किडनी को नुकसान, डिब्बे पर लिखी बातों को न करें नजरअंदाज

इन दिनों सोशल मीडिया पर हर जगह तरह-तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स की भरमार है। हर जगह ऐसे विज्ञापनों की भरमार है, जो रातों-रात गोरा बनाने या झुर्रियां गायब करने का दावा करते हैं। हालांकि, असल में सच्चाई कुछ और ही है। दरअसल, इन चमकते विज्ञापनों का सच इन प्रोडक्ट्स के डिब्बे के पीछे छोटे अक्षरों में लिखी सामग्री (Ingredients) में छिपी होती है। आइए एलेंटिस हेल्थकेयर, नई दिल्ली में डर्मेटोलॉजिस्ट और एस्थेटिक फिजिशियन चांदनी जैन गुप्ता (एमबीबीएस और एमडी) से समझते हैं क्यों जरूरी है ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीदते समय लेबल पढ़ना जरूरी है और इस दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए:- क्यों जरूरी है लेबल चेक करना? हम अपनी त्वचा पर जो भी लगाते हैं, स्किन उसे धीरे-धीरे अब्जॉर्ब कर लेती है, जिससे यह हमारे शरीर के अंदर तक जाता है। सस्ते या बिना ब्रांड वाले स्किन ब्राइटनिंग प्रोडक्ट्स में मर्करी यानी पारा का काफी इस्तेमाल किया जाता है। इससे भले ही स्किन का रंग हल्का हो जाता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में मर्करी शरीर के लिए जहर के समान है। इतना ही नहीं लंबे समय तक इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल स्किन को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ किडनी डैमेज, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और याददाश्त कमजोर होने जैसी गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकता है। साथ ही इसमें इस्तेमाल होने वाली खुशबू और प्रीजर्वेटिव्स जलन और एलर्जी का कारण बनते हैं। कैसे चुनें सही प्रोडक्ट?     ऑयली स्किन: इस स्किन टाइप के लोगों के लिए सैलिसिलिक एसिड वाले प्रोडक्ट्स अच्छे होते हैं, जिसके इसकी मात्रा 0.5% से 2% के बीच हो। बिना ब्रांड वाले प्रोडक्ट्स में इसकी मात्रा ज्यादा हो सकती है।     ड्राई स्किन: अगर आपकी त्वचा रूखी है, तो सेरामाइड्स वाले मॉइस्चराइजर आपके लिए सबसे अच्छे होते हैं। किसी भी अच्छी क्रीम में इसकी 2% तक की मात्रा स्किन को रिपेयर करने के लिए बेहतरीन मानी जाती है।     सेंसिटिव स्किन: इस तरह के लोगों को हमेशा ऐसे प्रोडक्ट्स लेना चाहिए, जिसपर साफ लिखा हो 'Fragrance-Free' या 'No Fragrance' (बिना खुशबू वाला)। क्या 'हर्बल' या 'नेचुरल' सुरक्षित होने की गारंटी है? अक्सर यह माना जाता है कि 'हर्बल' या 'नेचुरल' प्रोडक्ट्स स्किन के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन ऐसा हमेशा हो, यह जरूरी नहीं। एक्सपर्ट्स की मानें, तो कुछ लोगों को पूरी तरह से प्राकृतिक चीजों से भी गंभीर एलर्जी हो सकती है।  

शिक्षा संस्थान डाइट में 1.86 करोड़ की लागत से ऑडिटोरियम निर्माण का किया भूमिपूजन

भोपाल उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा कि डाइट के विद्यार्थी प्रदेश की पहचान बनें और जिला, प्रदेश तथा देश का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि संस्थान में ऑडिटोरियम की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसके निर्माण से शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने मंदसौर के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में 1 करोड़ 86 लाख 27 हजार रुपए की लागत से बनने वाले सर्व सुविधायुक्त ऑडिटोरियम निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि मंदसौर का डाइट संस्थान प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है ऑडिटोरियम से इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। उन्होंने विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान भी किया। उन्होंने निर्देश दिए कि ऑडिटोरियम निर्माण में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। आवश्यकता हो तो संशोधित प्राक्कलन (रिवाइज एस्टीमेट) प्रस्तुत किया जाए, जिससे बेहतर गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण हो सके। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने राज्य स्तरीय ओलंपियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर मंदसौर विधायक  विपिन एवं जिला योजना समिति सदस्य  राजेश दीक्षित सहित जनप्रतिनधि, अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्म दिवस पर दिव्यांग बच्चों को दुलारा बच्चों को दिये उपहार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने जन्म दिवस पर दिव्यांग बच्चों को मुख्यमंत्री निवास आमंत्रित कर स्नेहपूर्वक दूलार किया।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव के जन्म दिवस पर विभिन्न संस्थाओं से दिव्यांग बच्चों को आमंत्रित किया गया था। आशा निकेतन बधिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भोपाल, आरुषि संस्था भोपाल, शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भोपाल एवं उमंग गौरवदीप वेलफेयर सोसाइटी, भोपाल के बच्चे मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। इनमें दृष्टि बाधित, श्रवण बाधित, बौद्धिक दिव्यांग और अति बाधित बच्चे शामिल थे। बच्चों ने अपनी विशिष्ट शैली में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिवादन किया। इस अवसर पर दृष्टि बाधित बालिका फाल्गुनी पुरोहित ने मधुर गीत सुनाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जन्म दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों को वाद्य यंत्र पियानो, आर्ट बॉक्स और मिठाईयां भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय मती सोनाली वायंगणकर ने शिव पुराण भेंट किया। इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष  हेमंत खंडेलवाल, कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राघवेन्द्र शर्मा तथा दिव्यांग कल्याण के क्षेत्र में कार्य रही संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

पुलिसकर्मी पर हमला पेट्रोल पंप पर बेकाबू भीड़: तेल के लिए मचा बवाल, पुलिसकर्मी पर फेंका टैंक का ढक्कन

बड़वानी कथित अफवाहों के चलते जिलेभर के पेट्रोल पंपों पर बुधवार को सुबह से शाम तक पेट्रोल-डीजल के लिए लोगों की कतारें लगी रही। बाइक व चार पहिया वाहनों में पेट्रोल डलवाने के लिए लोग मशक्कत करते हुए दिखाई दिए। कुछ लोग प्लास्टिक की बाटल, बड़े जार व ड्रम लेकर पेट्रोल लेने पहुंचे। आरक्षक पर हमला और हाथापाई जुलवानिया में स्थित एक पेट्रोल पंप पर तैनात आरक्षक द्वारा कतार की व्यवस्था को दुरुस्त करने के दौरान एक युवक ने उस पर बाइक के पेट्रोल टैंक का ढक्कन फेंककर मुंह पर मार दिया। वहीं आरक्षक के साथ हाथापाई भी की गई। ढक्कन से आरक्षक चोटिल हो गया। होंठ व मुंह पर चोट लगी। वहीं गले पर नाखूनों के निशान उभर आए। सीसीटीवी में कैद हुई घटना सीसीटीवी में कैद हुई घटना, आरक्षक हुआ घायल, पेट्रोल पंपों पर लगी भीड़, बाटल व कैन में भरकर ले गए पेट्रोल।  

Tatkal में बवाल: 3 मिनट में वेटिंग 300 पार, 10 मिनट में नो टिकट—जानें कौन-सी ट्रेनें फुल

 नई दिल्ली एक मिनट के भीतर एसी थर्ड क्लास की 165 सीटें फुल, 3 मिनट में 300 वेटिंग और 10 मिनट में स्लीपर और थर्ड के साथ ही सेकेंड और फर्स्ट क्लास एसी में भी REGRET। बिहार जाने वाली कुछ ट्रेनों में इन दिनों ऐसी ही मारामारी है। वैसे तो आमतौर पर पूर्वी भारत की अधिकतर ट्रेनों में टिकटों की किल्लत सालभर बनी रहती है, लेकिन पर्व-त्योहारों और गर्मी की छुट्टियों में स्थिति विकराल हो जाती है। नई दिल्ली से दरभंगा जाने वाली ट्रेन दो प्रमुख ट्रेनों बिहार संपर्क क्रांति और स्वतंत्रता सेनानी में टिकट बुकिंग यात्रियों के लिए इन दिनों एक बड़ी चुनौती है। यात्रा की तिथि से ठीक 60 दिन पहले जब टिकट की बिक्री शुरू होती है तो टिकट खिड़कियों और लैपटॉप-मोबाइल से टिकट बुकिंग के लिए हजारों लोग इंतजार में होते हैं, लेकिन कंफर्म तो छोड़िए वेटिंग टिकट भी मिल जाए तो लोग खुद को खुशनसीब समझ रहे हैं। ऐसे ही एक यूजर ने बुधवार को जब बिहार संपर्क क्रांति ट्रेन में 24 मई की टिकट बुक करनी चाही तो जिस अनुभव से गुजरे वह हैरान करने वाला है। उन्होंने बताया, ‘मैंने ठीक 8 बजे टिकट आईआरसीटी की वेबसाइट को लॉग इन किया। तीन यात्रियों का ब्योरा भरते हुए 2 मिनट के भीतर यूपीआई से 4584.95 रुपये पेमेंट भी कर दिया। कुछ समय तक प्रोसेस के बाद 8.03 मिनट पर जब टिकट सामने आया तो वेटिंग संख्या देखकर मैं हैरान रह गया। वेटिंग थी- 291, 292 और 293। 10 मिनट बाद जब स्वतंत्रता सेनानी की स्थिति देखने के लिए दोबारा लॉग इन किया तो दोनों ही ट्रेनों में सभी सीटें फुल हो चुकी थीं। सिर्फ स्वतंत्रता सेनानी में एसी फर्स्ट क्लास में वेटिंग टिकट उपलब्ध था।’ ट्रेन में वेटिंग भी नहीं। टिकट का इंतजाम नहीं, कैंसिलेशन चार्ज का झटका यात्री ने कहा कि वह अगले दिन फिर बुकिंग की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा, ‘संभव है कि आप फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट करके केबीसी में हॉट सीट पा जाएं लेकिन इन ट्रेनों में टिकट के लिए सुपरसोनिक स्पीड और किस्मत दोनों का साथ चाहिए। दुखद यह है कि 300 वेटिंग का कंफर्म होना संभव नहीं है और कैंसिल करने चार्ज कटता है। फुल रिफंड के लिए आपको दो महीने का इंतजार करना होगा। हर तरह से यात्री ही परेशान होता है।’ दिल्ली-पटना की ट्रेनों का क्या हाल दिल्ली से पटना जाने वाली अधिकतर ट्रेनों में भी सीटें फुल हो चुकी हैं। गनीमत है कि पटना के लिए ट्रेनों में वेटिंग टिकट उपलब्ध है। लेकिन 60 दिन पहले ही वेटिंग इतनी लंबी हो चुकी है कि कंफर्म होना मुश्किल है। दिल्ली से पटना जाने वाले यात्रियों के लिए डिमांड में रहने वाली ट्रेन संपूर्ण क्रांति में स्लीपर में खबर लिखे जाने तक 123 वेटिंग है। एसी-3 इकॉनमी में REGRET हो चुका है। एसी-3 में 75, एसी-2 में 20 और एसी-1 में एक वेटिंग है। विक्रमशिला में स्लीपर और एसी-3 इकॉनमी में वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं। एसी-3 में 95 और एसी-2 में 33 वेटिंग है। पटना राजधानी में एसी थर्ड में आरएसी की कुछ सीटें हैं तो सेकेंड एसी में कुछ ही सीटें खाली हैं।

पेट्रोल-डीजल की कमी की खबरों पर सरकार का जवाब, यूपी में सब कुछ सामान्य, गाइडलाइन जारी

लखनऊ गैस और ईंधन की किल्लतों के बीच उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर सरकार ने स्पष्ट संदेश जारी किया है। कहा, प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सामान्य और पर्याप्त है। उपभोक्ताओं से अनावश्यक बुकिंग और अफवाह से बचने की अपील की है, ताकि सप्लाई सिस्टम सुचारू बना रहे। पेट्रोल की किल्लत की अफवाह के बीच आई एडवाइजरी पेट्रोल खत्म होने की अफवाह के बीच बुधवार को लोगों में टंकी फुल कराने की होड़ दिखी जिसके बाद इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की ओर से पेट्रोल डीजल की कमी न होने की एडवाइजरी जारी की गई। आईओसी की तरफ से बताया गया कि प्रदेश में पेट्रोल डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। वहीं, हुसैनगंज में पेट्रोल खत्म होने से तीन घंटे पेट्रोल पंप बंद रहा जो टैंकर आने के बाद चालू हो गया। इंडियन ऑयल के राज्य प्रमुख व राज्य स्तरीय समन्वयक (तेल उद्योग) संजय भंडारी की ओर से जारी एडवाइजरी में बताया गया कि प्रदेश में 13,166 पेट्रोल पंप चल रहे हैं। इन पेट्रोल पंपों पर अगले पांच दिनों का पेट्रोल एवं डीजल स्टॉक मौजूद है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तीनों कंपनियों लगभग 16-17 दिन का अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है। इस तरह जिले भर में 20-22 दिनों का पेट्रोल व डीजल स्टॉक मौजूद है जो कि सामान्य संचालन स्तर से अधिक है। इसलिए बिना किसी अफवाह में आए उपभोक्ता जरूरत के मुताबिक ही पेट्रोल डीजल की खरीद करें। सप्लाई चेन में कोई बाधा नहीं है। 25 दिन बाद ही सिलिंडर बुकिंग की अपील संजय भंडारी ने बताया कि प्रदेश में कुल 4,143 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स कार्यरत हैं जो करीब 4.85 करोड़ उपभोक्ताओं को समय पर गैस आपूर्ति कर रहे हैं। 36 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट के जरिये यह व्यवस्था की जा रही है। तीनों ऑयल कंपनियों के पास अगले चार दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। यह निर्धारित ऑप्टिमम स्तर के अनुरूप है। इसके अलावा प्रदेश में 10 से 11 लाख बुकिंग हो रही हैं जिसके मुकाबले 7 लाख सिलिंडरों की डिलीवरी की जाती है। यह व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है। सिलिंडर मिलने के 25 दिन बाद ही बुकिंग कराएं।