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गॉफ की शानदार जीत, बेनकिक बाहर; अब सेमीफाइनल में मुचोवा से होगा मुकाबला

मियामी कोको गॉफ ने पहली बार मियामी ओपन के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। गॉफ ने क्वार्टर फाइनल में बेलिंडा बेनकिक को हराया। दो घंटे 15 मिनट तक 3 सेट में चले इस मुकाबले को गॉफ ने 6-3, 1-6, 6-3 से जीता। गॉफ ने मुकाबले की शुरुआत जबरदस्त अंदाज में की, और आक्रामक तरीके से शुरू में ही मैच में नियंत्रण स्थापित कर लिया। उन्होंने शुरुआती स्टेज में सर्व तोड़ी और पहले सेट में अपने सभी आठ नेट पॉइंट जीत लिए। मजबूत सर्व और सटीक शॉट-मेकिंग के दम पर, उन्होंने पहला सेट 51 मिनट में आराम से जीत लिया। हालांकि, बेनकिक ने दूसरे सेट में जोरदार जवाब दिया। स्विस खिलाड़ी ने अपनी गलतियां कम की और रैलियों को ज्यादा असरदार तरीके से नियंत्रित किया। बेनकिक ने दूसरा सेट 30 मिनट से भी कम समय में जीतकर मैच में वापसी की। आखिरी सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला रहा। गॉफ को सर्व करते समय एक अहम पल का सामना करना पड़ा। उन्होंने मुकाबले में बने रहने के लिए एक ब्रेक पॉइंट को रोका। थोड़ी सी चूक और छूटे हुए मौकों पर साफ दिख रही निराशा के बावजूद, उन्होंने इस पल को एक टर्निंग पॉइंट के तौर पर इस्तेमाल किया। गॉफ ने ब्रेक लेकर 3-3 से बराबरी कर ली और फिर से नियंत्रण बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने अहम मौकों का फायदा उठाया, मजबूत सर्व दिए और चालाकी से शॉट चुने, जिसमें एक अहम ड्रॉप शॉट भी शामिल था। उन्होंने मैच में सर्व करते हुए अपना धैर्य बनाए रखा और वापसी पूरी की। इस जीत से गॉफ अपने करियर में पहली बार मियामी सेमीफाइनल में पहुंची हैं। उनका सामना कैरोलिना मुचोवा से होगा। अमेरिकी खिलाड़ी का चेक खिलाड़ी के खिलाफ हेड-टू-हेड रिकॉर्ड शानदार है। गॉफ ने मुचोवा के खिलाफ पिछले सभी 5 मैच जीते हैं। दूसरे क्वार्टरफाइनल में, मुचोवा ने सीधे सेटों में जीत के साथ अपना शानदार फॉर्म जारी रखा। चेक खिलाड़ी ने अपनी विरोधी खिलाड़ी को 7-5, 7-6(5) से हराया, और एक घंटे, 47 मिनट के मुकाबले में दूसरे सेट में एक सेट पॉइंट बचाया। इस नतीजे से मुचोवा का 2026 सीजन का मजबूत रिकॉर्ड 18-3 हो गया है।  

हैरान कर देने वाली घटना! आम तोड़ने पर गार्ड ने 12 साल के बच्चे को पीट-पीटकर किया अधमरा

बलौदाबाजार एक आम तोड़ने की मामूली-सी बात ने ऐसी दर्दनाक तस्वीर सामने ला दी, जिसने इंसानियत को झकझोर दिया है। 12 वर्षीय दिनेश्वर साहू, जो बचपन की सहज शरारत में निजी सीमेंट कंपनी परिसर से आम तोड़ रहा था, उसे इस कदर सजा दी गई कि वह गंभीर रूप से घायल हो गया। शनिवार शाम करीब साढ़े पांच बजे की घटना में निजी सीमेंट कंपनी रवान के एक सुरक्षा गार्ड ने बच्चे को पकड़कर बेरहमी से जमीन पर पटक-पटक कर पीटा। मासूम का शरीर इस बर्बरता को सह नहीं सका—हड्डियों और अंदरूनी अंगों को गंभीर चोटें आईं, शरीर पर खून के निशान और खरोंच साफ नजर आए। घटना के बाद बच्चा करीब 24 घंटे तक बेहोश रहा, जिसकी हालत बेहद नाजुक बनी रही। फिलहाल उसका इलाज जिला अस्पताल में जारी है। परिजनों के अनुसार, घटना के बाद मामला और भी भयावह हो गया जब कुछ लोगों ने उन्हें रिपोर्ट दर्ज न कराने के लिए डराया-धमकाया। गाली-गलौज और “बुरा अंजाम भुगतने” की चेतावनी देकर दबाव बनाया गया। लेकिन समाज और ग्रामीणों के साथ आने के बाद परिवार ने हिम्मत जुटाई और थाने में शिकायत दर्ज कराई। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया है। जिला साहू संघ के पदाधिकारी अस्पताल पहुंचे और बच्चे का हाल जाना। संघ के अध्यक्ष सुनील साहू ने इसे “अमानवीय और शर्मनाक” बताते हुए कहा कि एक मासूम के साथ ऐसी क्रूरता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आरोपी गार्ड समेत दबाव बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की और चेतावनी दी कि न्याय नहीं मिला तो आंदोलन किया जाएगा। संरक्षक रेवाराम साहू ने भी सवाल उठाया—“आम तोड़ना क्या इतना बड़ा अपराध है कि बच्चे को मौत के मुंह में धकेल दिया जाए?” उन्होंने इसे गुंडागर्दी करार देते हुए कठोर कार्रवाई की जरूरत बताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कसडोल विधायक संदीप साहू और जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमित्रा घृतलहरे भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित से मुलाकात कर पुलिस अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले भी कंपनी से जुड़े लोगों द्वारा एक अन्य बच्चे के साथ मारपीट हुई थी, जिसकी बाद में मौत हो गई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं सुरक्षा और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। फिलहाल पुलिस ने एक गार्ड को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य आरोपियों की जांच जारी है। लेकिन सवाल अब भी वही है—क्या एक आम की कीमत एक मासूम की जान से ज्यादा हो सकती है?  

जुबीन गर्ग केस में आया फैसला: कोर्ट ने कहा—यह दुर्घटना थी, नहीं मिली साजिश के सबूत

सिंगापुर सिंगापुर की अदालत ने सिंगर जुबीन गर्ग की मौत को दुर्घटनावश डूबने का मामला करार दिया है। कोर्ट ने किसी भी साजिश से इनकार किया है। बुधवार को एक स्टेट कोरोनर ने सिंगापुर पुलिस कोस्ट गार्ड (पीसीजी) की इस जांच को सही ठहराया कि सिंगर ज़ुबीन गर्ग की मौत में कोई साजिश नहीं थी। उन्होंने फैसला सुनाया कि पिछले साल सितंबर में इस शहर-राज्य के एक द्वीप के पास हुई उनकी मौत एक 'हादसे में डूबने' का मामला था। पीसीजी की इस जांच पर गर्ग की पत्नी द्वारा जताई गई चिंता का सीधा जवाब देते हुए, स्टेट कोरोनर एडम नखोदा ने कहा कि पीसीजी ने इस मामले में एक व्यापक और पूरी तरह से जांच की थी। नखोदा ने पाया कि गर्ग की मौत महज एक दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद हादसे में डूबने के कारण हुई थी और किसी ने भी उन्हें जबरदस्ती, दबाव डालकर या धक्का देकर पानी में नहीं डाला था। चैनल न्यूज एशिया ने नखोदा के हवाले से बताया कि इस बात का भी कोई सबूत नहीं मिला कि उन्हें बचाने वाले तैराकों ने जान-बूझकर उनका चेहरा पानी के नीचे दबाए रखा था। नखोदा ने बताया कि 52 वर्षीय गर्ग नशे में थे, और संभवतः इसी वजह से उनके फैसले लेने की क्षमता प्रभावित हुई। इसमें पहली बार तैरते समय उनका अपनी लाइफ जैकेट उतार देना, और दूसरी बार तैरते समय यॉट के कैप्टन और अन्य यात्रियों के बार-बार कहने के बावजूद उसे पहनने से पूरी तरह इनकार कर देना शामिल है। जुबीन गर्ग 19 सितंबर, 2025 को लाजरस आइलैंड के पास पानी में डूब गए थे। यह उस दिन से ठीक एक दिन पहले की बात है, जब उन्हें 'नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल' में प्रस्तुति देनी थी। जुबीन सिंगापुर और भारत के बीच राजनयिक संबंधों के 60 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक उत्सव में शामिल होने के लिए सिंगापुर आए थे। गायक की मृत्यु की खबर मिलते ही इस उत्सव को रद्द कर दिया गया। जुबीन ने पी हुई थी शराब कोरोनर ने पाया कि गर्ग ने यॉट ट्रिप के लिए सहमति दी थी और इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि उन्हें इसके लिए मजबूर किया गया था। लगभग 20 लोगों के एक ग्रुप ने, जिस यॉट पर वे सवार थे, उसे लाजरस आइलैंड और सेंट जॉन आइलैंड के बीच रोका और शराब पीने, तैरने और कयाकिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया। चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, गवाहों ने गर्ग को शराब पीते हुए देखा, उनमें से एक ने बताया कि उन्होंने कुछ कप लिकर, जिन और व्हिस्की के साथ-साथ गिनीज स्टाउट (बीयर) के भी कुछ घूंट पिए थे। गर्ग पहली बार लाइफ जैकेट पहनकर तैरने गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने उसे उतार दिया और जब वे दूसरी बार लाजरस आइलैंड की ओर तैरने गए, तो उन्होंने दूसरी जैकेट लेने से मना कर दिया। सिंगापुर की अदालत ने सिंगर जुबीन गर्ग की मौत को दुर्घटनावश डूबने का मामला करार दिया है। कोर्ट ने किसी भी साजिश से इनकार किया है। बुधवार को एक स्टेट कोरोनर ने सिंगापुर पुलिस कोस्ट गार्ड (पीसीजी) की इस जांच को सही ठहराया कि सिंगर ज़ुबीन गर्ग की मौत में कोई साजिश नहीं थी। उन्होंने फैसला सुनाया कि पिछले साल सितंबर में इस शहर-राज्य के एक द्वीप के पास हुई उनकी मौत एक 'हादसे में डूबने' का मामला था। पीसीजी की इस जांच पर गर्ग की पत्नी द्वारा जताई गई चिंता का सीधा जवाब देते हुए, स्टेट कोरोनर एडम नखोदा ने कहा कि पीसीजी ने इस मामले में एक व्यापक और पूरी तरह से जांच की थी। नखोदा ने पाया कि गर्ग की मौत महज एक दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद हादसे में डूबने के कारण हुई थी और किसी ने भी उन्हें जबरदस्ती, दबाव डालकर या धक्का देकर पानी में नहीं डाला था। चैनल न्यूज एशिया ने नखोदा के हवाले से बताया कि इस बात का भी कोई सबूत नहीं मिला कि उन्हें बचाने वाले तैराकों ने जान-बूझकर उनका चेहरा पानी के नीचे दबाए रखा था। नखोदा ने बताया कि 52 वर्षीय गर्ग नशे में थे, और संभवतः इसी वजह से उनके फैसले लेने की क्षमता प्रभावित हुई। इसमें पहली बार तैरते समय उनका अपनी लाइफ जैकेट उतार देना, और दूसरी बार तैरते समय यॉट के कैप्टन और अन्य यात्रियों के बार-बार कहने के बावजूद उसे पहनने से पूरी तरह इनकार कर देना शामिल है। जुबीन गर्ग 19 सितंबर, 2025 को लाजरस आइलैंड के पास पानी में डूब गए थे। यह उस दिन से ठीक एक दिन पहले की बात है, जब उन्हें 'नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल' में प्रस्तुति देनी थी। जुबीन सिंगापुर और भारत के बीच राजनयिक संबंधों के 60 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक उत्सव में शामिल होने के लिए सिंगापुर आए थे। गायक की मृत्यु की खबर मिलते ही इस उत्सव को रद्द कर दिया गया।  

बड़ी मेडिकल सफलता: अब लक्षणों से पहले ही पकड़ में आएगा अल्जाइमर

अल्जाइमर ऐसा मानसिक बीमारी है, जो धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने की क्षमता और दैनिक कार्यों को कम कर देती है। यह 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को प्रभावित करता है, जिसमें मस्तिष्क में प्रोटीन के असामान्य जमाव (प्लाक और टेंगल्स) के कारण कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। लक्षण दिखने से पहले चल सकता है बीमारी का पता अल्जाइमर रोग के शुरुआती निदान के लिए रक्त प्लाज्मा में विशिष्ट प्रोटीनों के संरचनात्मक और मात्रात्मक परिवर्तन महत्वपूर्ण संकेत है। इनमें शामिल हैं- पूरक 4ए और फाइब्रिनोजेन वाइ का बढ़ना, जबकि एपोलिपोप्रोटीन ए-1, ए- 2-एचएस-ग्लाइकोप्रोटीन और अफामिन में कमी होना, जो मस्तिष्क में सूजन और न्यूरोडीजेनेरेशन को दर्शाते हैं। ये बदलाव लक्षणों के प्रकट होने से वर्षों पहले न्यूरोनल क्षति और सूजन का संकेत दे सकते हैं। नए प्रकार के ब्लड सैंपल जो अमीनो एसिड के मात्रा के बजाय उनके मोड़ने का विश्लेषण करता है, अरंभिक संकेतों का पता लगाने में सक्षम हो सकता है। 500 से अधिक व्यक्तियों के रक्त प्लाज्मा नमूनों के विश्लेषण से पता चला है कि तीन प्रोटीनों में संरचनात्मक भिन्नताएं, एक जो इम्यून सिग्नलिंग में शामिल है, दूसरा प्रोटीन मोड़ने में और तीसरा जो रक्त प्रवाह में वसा का परिवहन करता है, अल्जाइमर स्थिति से मजबूत रूप से जुड़ी हुई हैं, जैसा कि नेचर एजिंग पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों में बताया गया है। अल्जाइमर का पता लगाने का सटीक तरीका शोधकर्ताओं, जिनमें अमेरिका के द स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के विज्ञानी भी शामिल हैं, ने कहा कि प्लाज्मा प्रोटीनों की संरचनात्मक भिन्नताएं संज्ञानात्मक रूप से सामान्य व्यक्तियों और अल्जाइमर तथा हल्के संज्ञानात्मक हानि वाले व्यक्तियों के बीच सटीक अंतर करने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि यह विधि अंततः प्रारंभिक निदान और उपचार की दे सकती है। अल्जाइमर रोग का वर्तमान में निदान अमाइलाइड पट्टियों और टाऊ टंगल्स को मापकर किया जाता है, जो मस्तिष्क में अमाइलाइड और टाऊ प्रोटीनों के संचय के कारण बनते हैं, रक्त या रीढ़ की तरलता में। हालांकि, शोधकर्ताओं ने कहा कि न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थिति को प्रोटियोस्टैसिस की व्यापक विफलता शामिल होने की आशंका बढ़ती जा रही है, जो प्रोटीनों को सही तरीके से मोड़ने और क्षतिग्रस्त प्रोटीनों को हटाने के लिए जिम्मेदार प्रणाली है। प्रोटीन संरचना में बदलावों के कारण कई न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग   यह प्रणाली उम्र बढ़ने के साथ कम प्रभावी होती जाती है, जिसके कारण प्रोटीनों के निर्माण या पुनर्गठन के दौरान गलत तरीके से मोड़ने की संभावना बढ़ जाती है। द स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर व वरिष्ठ लेखक जाच येट्स ने कहा कि कई न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग प्रोटीन संरचना में परिवर्तनों द्वारा संचालित होते हैं। सवाल यह था कि क्या विशिष्ट प्रोटीनों में संरचनात्मक परिवर्तन हैं, जो भविष्यवाणी के मार्कर के रूप में उपयोगी हो सकते हैं? शोधकर्ताओं ने प्रस्तावित किया कि यदि मस्तिष्क में प्रोटियोस्टैसिस बाधित होती है, तो रक्त में प्रवाहित प्रोटीनों में समान संरचनात्मक परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं। प्रतिभागियों के प्लाज्मा नमूनों को तीन समूहों में विभाजित किया गया संज्ञानात्मक रूप से वयस्क, हल्के संज्ञानात्मक हानि वाले व्यक्ति और अल्जाइमर से निदान किए गए रोगी । तीन प्रोटीनों के संरचनात्मक परिवर्तन रोग के साथ संबंध विश्लेषण ने यह निर्धारित किया कि तीन-आयामी अमीनो एसिड श्रृंखला में कुछ विशिष्ट क्षेत्रों की कितनी मात्रा उजागर या दबी हुई थी, जो उनकी संरचना में परिवर्तनों को दर्शाती है। मशीन लर्निंग, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक रूप है का उपयोग रोग के चरण से जुड़े पैटर्न की पहचान के लिए किया गया। जैसे-जैसे अल्जाइमर रोग बढ़ा, विशिष्ट रक्त प्रोटीनों की संरचना कम "खुली" होती गई, जिसमें तीन प्रोटीनों के संरचनात्मक परिवर्तन रोग के साथ सबसे मजबूत संबंध दिखाते हैं।  

मां की सेहत बनी चिंता, राहुल गांधी ने कैंसिल किया केरल दौरा

नई दिल्ली कांग्रेस की सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी की तबीयत स्थिर है। उन्हें मंगलवार की रात को ही सर गंगाराम अस्पताल में एडमिट कराया गया था। फिलहाल उनकी तबीयत स्थिर है और डॉक्टरों की निगरानी में वह स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। बुधवार को सर गंगाराम अस्पताल की ओर से उनकी सेहत के बारे में मेडिकल बुलेटिन जारी किया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उन्हें मंगलवार की रात को 10:22 बजे अस्पताल में एडमिट कराया गया था। गंगाराम अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अजय स्वरूप ने बताया कि उनकी हालत स्थिर है और डॉक्टर उनकी सेहत की गहन निगरानी कर रहे हैं। उन्हें पेट और यूरिनरी इंफेक्शन की शिकायत कही जा रही थी। फिलहाल डॉक्टर इसी की जांच कर रहे हैं। उन्हें इलाज के तौर पर एंटीबायोटिक्स दी जा रही हैं ताकि वे जल्दी ही इंफेक्शन से उबर जाएं। सूत्रों का कहना है कि शायद मौसम में बदलाव के चलते सोनिया गांधी की सेहत खराब हुई है। इसी के चलते उन्हें निगरानी में रखा जा रहा है। अब तक उनकी सेहत को लेकर कोई चिंता वाली बात नहीं दिखी है। वह स्थिर हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं। इस बीच रायबरेली के सांसद और उनके बेटे राहुल गांधी मां की सेहत को देखते हुए दिल्ली में ही रुके हैं। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को आज केरल में एक चुनावी दौरे पर जाना था। लेकिन उन्होंने केरल का दौरा रद्द कर दिया। उनके स्थान पर पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ही कोझिकोड रवाना हुए हैं। बीते साल जून में भी सोनिया गांधी को पेट से जुड़ी समस्या हो गई थी और उन्हें अस्पताल में एडमिट कराना पड़ा था। उन्हें अस्पताल के गैस्ट्रो डिपार्टमेंट में निगरानी में रखा गया था। उससे कुछ दिन पहले ही उन्हें हिमाचल प्रदेश के शिमला में स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया गया था। गौरतलब है कि सोनिया गांधी ने 2024 का आम चुनाव सेहत का हवाला देते हुए ही नहीं लड़ा था। वह फिलहाल राज्यसभा की सांसद हैं। इससे पहले वह रायबरेली से सांसद रहा करती थीं। अब इस परंपरागत सीट से उनके बेटे राहुल गांधी सांसद हैं। वहीं बेटी प्रियंका गांधी केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं। बीते कई सालों से सोनिया गांधी की राजनीतिक सक्रियता पहले जैसी नहीं देखी जा रही। इसकी वजह उनकी खराब सेहत ही बताई जाती है। गौरतलब है कि INDIA अलायंस की बैठकों में भी अब सोनिया गांधी कम ही नजर आती हैं।  

वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर अक्षरधाम! 26 मार्च को अनोखी ‘वन-लेग’ प्रतिमा का भव्य उद्घाटन

दिल्ली दिल्ली का स्वामि‍नारायण अक्षरधाम 26 मार्च को एक ऐसे ऐतिहासिक पल का गवाह बनने जा रहा है, जो विश्व रिकॉर्ड के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना का नया केंद्र बनेगा। वैश्विक आध्यात्मिक संस्था BAPS के वर्तमान प्रमुख महंतस्वामी महाराज के सान्निध्य में भगवान स्वामिनारायण (तपोमूर्ति श्रीनीलकंठवर्णी) की 108 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। विश्व की पहली 'एक चरण' पर टिकी 108 फीट की प्रतिमा पंचधातु (मुख्य रूप से कांस्य) से निर्मित यह प्रतिमा कला और इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी प्रतिमा 'एक पैर' पर खड़ी है, जो भगवान नीलकंठवर्णी की कठिन तपस्या का प्रतीक है।  ऊंचाई: 108 फीट (8 फीट ऊंचे बेस पर स्थापित)। निर्माण: अक्षरधाम के शिल्पी संतों और करीब 50 कुशल कारीगरों ने एक वर्ष के कड़े पुरुषार्थ से इसे तैयार किया है। महत्व: यह प्रतिमा मुक्तिनाथ (नेपाल) में भगवान द्वारा की गई चार महीने की उस कठोर तपस्या को जीवंत करती है, जो उन्होंने लोक-कल्याण के लिए की थी। महंतस्वामी महाराज का दिल्ली आगमन और उत्सव की धूम ब्रह्मस्वरूप महंतस्वामी महाराज 19 मार्च को दिल्ली पधारे, जिसके बाद से ही अक्षरधाम में उत्सव का माहौल है। 21 मार्च: भव्य स्वागत सभा का आयोजन किया गया। 22 मार्च: पंचकुला और कुरुक्षेत्र के नवनिर्मित मंदिरों की मूर्ति प्रतिष्ठा के साथ संतों-भक्तों ने 'फूलों की होली' का आनंद लिया। 23 मार्च: आगामी सितंबर में पेरिस (फ्रांस) में स्थापित होने वाली प्रतिमा का विशेष पूजन किया गया। नीलकंठवर्णी: 11 वर्ष की आयु में 12,000 KM की पदयात्रा भगवान स्वामिनारायण ने मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में गृह त्याग कर 'नीलकंठवर्णी' के रूप में संपूर्ण भारत की यात्रा की थी। हिमालय से रामेश्वरम और जगन्नाथ पुरी से द्वारका तक, उन्होंने 7 वर्षों में 12,000 किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्रा कर तप, त्याग और करुणा का संदेश फैलाया। यह तपोमूर्ति उन्हीं वैश्विक मूल्यों (मैत्री, सुहृद्भाव और मानव सेवा) को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। विश्व शांति महायज्ञ और लोकार्पण का समय महोत्सव का शुभारंभ 25 मार्च की सुबह ‘श्रीनीलकंठवर्णी विश्व शांति महायज्ञ’ के साथ हुआ। इस वैदिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए अमेरिका, यूके, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया भर से 300 से अधिक संत दिल्ली पहुंचे हैं। महंतस्वामी महाराज ने आकाश में श्वेत कबूतर उड़ाकर विश्व शांति और युद्धों की समाप्ति की प्रार्थना की।  

पंजाब शिक्षा विभाग में क्लर्क भर्ती पर सवाल, 63 में से सिर्फ दो पास, फेल अभ्यर्थियों को लास्ट चांस

होशियारपुर (पंजाब) फरवरी 2026 में भाषा विभाग पंजाब द्वारा आयोजित इस परीक्षा में कुल 63 उम्मीदवार शामिल थे। इनमें से केवल दो ही उम्मीदवार पंजाबी और अंग्रेजी दोनों टाइपिंग टेस्ट पास कर सके, जिससे उनकी नौकरी पक्की होने की राह आसान हुई है। पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने अनुकंपा आधार पर नियुक्त क्लर्कों के लिए आयोजित टाइपिंग टेस्ट का परिणाम घोषित कर दिया है। जो परिणाम आया है वह बेहद ही निराशाजनक और हैरान कर देने वाला है। नतीजों ने कर्मचारियों के प्रदर्शन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फरवरी 2026 में भाषा विभाग पंजाब द्वारा आयोजित इस परीक्षा में कुल 63 उम्मीदवार शामिल थे। इनमें से केवल दो ही उम्मीदवार पंजाबी और अंग्रेजी दोनों टाइपिंग टेस्ट पास कर सके, जिससे उनकी नौकरी पक्की होने की राह आसान हुई है। एक उम्मीदवार ने आंशिक सफलता हासिल करते हुए अंग्रेजी टाइपिंग टेस्ट पास किया, लेकिन पंजाबी (रावी फॉन्ट) में असफल रहा। परिणामों का सबसे चिंताजनक पहलू बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का अनुपस्थित रहना रहा। 63 में से 40 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए। विभागीय सूत्रों के अनुसार, बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद इस तरह की अनुपस्थिति प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित कर रही है। बाकी 20 उम्मीदवार परीक्षा में असफल रहे, जिनमें से अधिकांश पंजाबी टाइपिंग (रावी फॉन्ट) में निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर सके। विभाग ने असफल या अनुपस्थित रहे उम्मीदवारों को एक अंतिम अवसर देते हुए जून 2026 में पुनः टाइपिंग टेस्ट आयोजित करने की घोषणा की है। इच्छुक उम्मीदवारों को 15 अप्रैल 2026 तक अपने नाम संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के माध्यम से भेजने होंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगली परीक्षा के लिए आवेदन केवल रावी फॉन्ट में ही स्वीकार किए जाएंगे, जिससे निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके। फरवरी 2026 टाइपिंग टेस्ट का संक्षिप्त विवरण कुल उम्मीदवार: 63 अनुपस्थित: 40 असफल: 20 पूर्ण रूप से पास: 2 आंशिक रूप से पास: 1

सुप्रीम कोर्ट में हैरान करने वाला मामला: CJI के नाम पर फोन, जस्टिस सूर्यकांत सख्त

नई दिल्ली   सुप्रीम कोर्ट में रोजाना विभिन्न मामलों की सुनवाई होती है। बुधवार को सीजेआई सूर्यकांत ने एक शख्स को तगड़ी फटकार लगाई। सीजेआई ने एक आदेश पारित किया था, जिसके बाद शख्स ने उनके (सीजेआई) के भाई को फोन लगाकर पूछा कि यह आदेश कैसे पारित कर दिया। इस पर सीजेआई भड़क गए और शख्स के वकील से सुप्रीम कोर्ट में कड़े सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि क्या अब वह मुझ पर हुक्म चलाएगा। लाइव लॉ के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत ने फोन कॉल करने वाले शख्स के वकील से कहा, ''आपके मुवक्किल के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही क्यों नहीं होनी चाहिए? उसने मेरे भाई को फोन करने की हिम्मत कैसे की और यह पूछा कि सीजेआई ने यह आदेश कैसे पारित किया? क्या वह मुझे हुक्म चलाएगा? आप इसकी पुष्टि करें, और फिर एक वकील के तौर पर, सबसे पहले आपको इस मामले से हट जाना चाहिए।'' सीजेआई सूर्यकांत ने चेतावनी देते हुए कहा कि भले ही वह भारत से बाहर कहीं भी छिप जाए, मुझे पता है कि ऐसे लोगों से कैसे निपटना है। दोबारा कभी ऐसी हिम्मत मत करना। मैं पिछले 23 सालों से ऐसे तत्वों से निपटता आ रहा हूं। दरअसल, सीजेआई सूर्यकांत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें अपर कास्ट की जनरल कैटेगरी से धर्म बदलकर बौद्ध बनने के बाद एक पीजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए बौद्ध प्रमाण पत्र के तहत मिलने वाले लाभों की मांग की गई थी। इस पर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के लिए दिशा निर्देश तय करने के लिए कहा था। इसी मामले में सीजेआई ने तब भी कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने तब इसे नए तरीके का फ्रॉड बताया था। यह याचिका निखिल कुमार पुनिया और एकता पुनिया ने दायर की थी। सीजेआई सूर्यकांत ने तब कहा था, "वाह! अब, यह एक नए तरह का धोखा है। हमसे और कुछ मत कहलवाइए।'' इस याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए, शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा था और यह स्पष्ट करने को कहा कि वह 'सामान्य श्रेणी' के उन उम्मीदवारों को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र कैसे जारी कर रही है, जो पहले परीक्षाओं में 'गैर-अल्पसंख्यक' आवेदकों के तौर पर शामिल हुए थे। बता दें कि सीजेआई सूर्यकांत इससे पहले भी कई मामलों में कड़ी फटकार लगा चुके हैं। एनसीईआरटी किताब विवाद में सोशल मीडिया पर की गई कुछ गैर जिम्मेदाराना कमेंट्स पर उन्होंने पिछले दिनों सख्ती दिखाई थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ऐसी वेबसाइट्स और लोगों की पहचान करके बताए, जिन्होंने ऐसे टिप्पणियों को पब्लिश किया। उन्होंने ऐसी टिप्पणी करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा था कि कुछ लोग भले ही देश के बाहर कहीं भी छिपे हुए हों, मैं उन्हें छोड़ने वाला नहीं हूं।  

कामदा एकादशी 2026: क्या है इसका मतलब और इस बार क्यों बढ़ गया इसका महत्व?

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, और साल 2026 में 29 मार्च को पड़ने वाली कामदा एकादशी बेहद फलदायी मानी जा रही है. पंचांग के अनुसार यह व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और भगवान की पूजा करने से जीवन के बड़े से बड़े पाप भी समाप्त हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. क्या है कामदा एकादशी का अर्थ? कामदा शब्द का अर्थ है , कामनाओं को पूर्ण करने वाली. यानी यह व्रत ऐसा माना जाता है जो श्रद्धा और नियम से करने पर व्यक्ति की हर इच्छा को पूरा करता है. धर्मग्रंथों के अनुसार, यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी गई है जो जीवन में किसी प्रकार के कष्ट, दोष या पाप से मुक्ति चाहते हैं. क्यों खास है 2026 की कामदा एकादशी? इस साल की कामदा एकादशी कई कारणों से खास मानी जा रही है. यह चैत्र मास में पड़ रही है, जो हिंदू नववर्ष की शुरुआत का समय होता है. नवरात्रि के आसपास आने के कारण इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भी बढ़ जाती है. इस दिन किए गए व्रत, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक माना जाता है. ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत के लिए शुभ संकेत देता है. पौराणिक कथा और मान्यता पौराणिक कथा के अनुसार, एक गंधर्व ललित और उसकी पत्नी ललिता से जुड़ी यह कथा काफी प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि ललित को एक गलती के कारण राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा. तब उसकी पत्नी ने ऋषियों के कहने पर कामदा एकादशी का व्रत रखा. इस व्रत के प्रभाव से ललित को राक्षस योनि से मुक्ति मिली और वह पुनः अपने दिव्य स्वरूप में लौट आया. इस कथा से यह पता चलता है कि यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति देता है, बल्कि जीवन के बड़े संकटों को भी दूर करता है. कामदा एकादशी व्रत का महत्व मान्यता है कि इस व्रत को रखने से अनजाने में हुए पाप भी नष्ट हो जाते हैं. यहां तक कि ब्रह्महत्या जैसे महापाप से भी मुक्ति मिलती है. यह व्रत पिशाच दोष, राक्षस योनि या नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है. धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस व्रत से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है. जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यह व्रत करता है, उसकी सभी सभी मनोकामना पूरी होती हैं.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया जन-मन सभागार का भूमि पूजन मुख्यमंत्री निवास परिसर में बनेगा विशाल ऑडिटोरियम

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने जन्म दिवस पर मुख्यमंत्री निवास परिसर में निर्मित होने वाले जन-मन सभागार और चिंतन भवन का भूमि पूजन किया। मुख्यमंत्री निवास परिसर में विद्यमान डोम के स्थान पर विशाल ऑडिटोरियम कानिर्माण होना है। इसका क्षेत्रफल 2226.70 वर्गमीटर होगा। इसमें दो हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था के साथ ही वीआईपी लाउंज होगा। अन्नप्रसादम के नाम से बनने वाले भोजन क्षेत्र में लगभग दो हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था प्रस्तावित है। जन-मन सभागार में साउंड सिस्टम, एलईडी स्क्रीन्स, ध्वनि इन्सुलेशन के लिए एकोस्टिक पैनल की विशेष व्यवस्था होगी। इसके साथ ही समत्व भवन में प्रथम तल पर गेस्ट हाऊस-चिंतन का निर्माण किया जाएगा। चिंतन के रूप में विकसित हो रहे गेस्ट हाऊस में दो कक्ष, डाइनिंग रूम, वीआईपी लाउंज आदि होंगे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव  सुखबीर सिंह तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।