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शाजापुर कलेक्टर को HC की तीसरी फटकार, नाजिर की वेतनवृद्धि रोकने पर स्टे, 15 दिन में हलफनामा जमा करने का आदेश

शाजापुर शाजापुर। कलेक्टर के आदेश पर एक बार फिर हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है. हाईकोर्ट जज ने कलेक्टर रिजु बाफना के खिलाफ टिप्पणी करते हुए कहा- शाजापुर कलेक्टर को कुछ पता नहीं, नियमों को जानती नहीं और कुछ भी पास कर देती है. कुछ ही दिनों में कलेक्टर को यह तीसरी फटकार हाईकोर्ट से लगी है. इसके पहले भी हाईकोर्ट कलेक्टर के आदेशों पर तल्ख टिप्पणी कर चुका है. इस बार कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी जयंत बघेरवाल की दो वेतन वृद्धि से जुड़ा मामला है. कलेक्टर कार्यालय में वाहन स्टैंड को लेकर कलेक्टर शाजापुर ने वाहन स्टैंड ठेकेदार के विरुद्ध एफआईआर के आदेश दिए थे. ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उसने कर्मचारी जयंत बघेरवाल पर आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए।  व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दरअसल कलेक्टर ने बिना जांच के ही 27-28 फरवरी 2025 को दो आदेश जारी किए, पहले आदेश में बघेरवाल की दो वेतन वृद्धि रोकने और दूसरे आदेश में उन्हें एसडीएम कार्यालय गुलाना अटैच किया गया. वेतन वृद्धि रोकने के आदेश पर पहले बघेरवाल ने कमिश्नर उज्जैन के यहां अपील की. कमिश्नर ने भी कलेक्टर के आदेश को यथावत रखा, उसके बाद बघेरवाल ने हाईकोर्ट की शरण ली. इन्दौर हाईकोर्ट ने 25 मार्च को स्टे आदेश जारी करते हुए कलेक्टर शाजापुर से 15 दिन में व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया है।  कलेक्टर को कानून पता नहीं है हलफनामे में कलेक्टर शाजापुर को स्पष्ट करना है किन नियमों के तहत बिना जांच के दो वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किए हैं. स्टे आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट लिखा है कलेक्टर ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लघंन किया है. बिना किसी विभागीय जांच के दो वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी कर दिए. हाईकोर्ट ने कलेक्टर को फटकार लगाते हुए कहा शाजापुर कलेक्टर कुछ भी आर्डर पास कर देती है, आबकारी अधिकारी के मामले में भी ऐसा ही किया था। कलेक्टर को कानून पता नहीं है।  तीन मामले पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी विगत दिनों सबसे पहले हाईकोर्ट ने हाट मैदान स्थित भूमि को लेकर याचिकाकर्ता महेश गुप्ता की याचिका पर कलेक्टर शाजापुर के खिलाफ टिप्पणी की थी. दूसरा मामला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के निलंबन का था, जिसमें भी हाईकोर्ट ने निलंबन को गलत ठहराते हुए उन्हें फिर से बहाल किया. तीसरा मामला कर्मचारी जयंत बघेरवाल का है।  

विवेक अग्निहोत्री की नई फिल्म: ऑपरेशन सिंदूर की रियल स्टोरी होगी पर्दे पर

मुंबई  फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री की आने वाली फिल्म को लेकर नई जानकारी सामने आई है. खबरों के मुताबिक, वो ऑपरेशन सिंदूर पर फिल्म बना रहे हैं, जो अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई पर आधारित है. बताया जा रहा है कि यह फिल्म लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ‘टाइनी’ ढिल्लों की किताब 'Operation Sindoor: The Untold Story of India’s Deep Strikes Inside Pakistan' से इंस्पायर्ड है।  पहलगाम आतंकी हमलों की कार्रवाई का सच विवेक कहते हैं कि ये कहानी जरूरी भी है और वक्त की मांग भी. हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में उन्होंने कहा- मैं हमेशा ऐसी कहानियां बताने में यकीन रखता हूं जो थोड़ी असहज हों, लेकिन जरूरी हों. मेरी कोशिश है कि इस कहानी को पूरी सच्चाई के साथ दिखाया जाए, जिसमें बहादुरी, प्रोफेशनलिज्म और स्ट्रैटेजी सब नजर आए, और साथ ही ये एक रोमांचक फिल्म भी बने।  इस प्रोजेक्ट को विवेक की कंपनी आई एम बुद्धा प्रोडक्शन और भूषण कुमार की टी-सीरीज मिलकर बना रही है. फिल्म में 6 मई से 10 मई 2025 के बीच हुए पूरे ऑपरेशन को विस्तार से दिखाया जाएगा।  विवेक ने आगे बताया- हमने आर्म्ड फोर्सेस की अलग-अलग यूनिट्स के साथ मिलकर ग्राउंड लेवल पर रिसर्च की है, ताकि सिर्फ ये नहीं समझ सकें कि क्या हुआ, बल्कि ये भी कि कैसे और क्यों हुआ. असल कहानी काफी ज्यादा जटिल और सटीक है, जितनी आम लोगों को पता है उससे कहीं ज्यादा।  टी-सीरीज से मिलाया हाथ वहीं भूषण कुमार का कहना है कि ये फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं है. उन्होंने कहा- कुछ कहानियां आप नहीं चुनते, वो आपको चुनती हैं. ऑपरेशन सिंदूर भी ऐसी ही कहानी है. जब देश ऐसे बड़े घटनाक्रम से गुजरता है, तो उसे सच्चाई के साथ दर्ज करना जरूरी हो जाता है।  फिलहाल फिल्म की कास्ट और रिलीज डेट को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।  विवेक की पिछली बड़ी फिल्म द बंगाल फाइल्स उनकी इन्वेस्टिगेटिव ट्रिलॉजी का आखिरी हिस्सा थी. इससे पहले वो द ताशकंद फाइल्स और द कश्मीर फाइल्स बना चुके हैं।   

मेरठ में धुरंधर-2 की स्क्रीनिंग: 600 दारोगा देखेंगे फिल्म, सरकारी गाड़ियों में पहुंचेंगे मल्टीप्लेक्स

 मेरठ यूपी में मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे 2023 बैच के 600 दारोगाओं के साथ गुरुवार को आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर-2' देखने सिनेमा हॉल पहुंचेंगे. पुलिस लाइन से सभी दारोगा सरकारी वाहनों में सवार होकर दिल्ली रोड स्थित शॉप्रिक्स मॉल के वेव सिनेमा जाएंगे, जहां उनके लिए दो हॉल पहले से बुक कराए गए हैं।  एसएसपी के साथ एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे. 19 मार्च 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म को दिखाने का मुख्य उद्देश्य नए दारोगाओं का उत्साहवर्धन करना और उन्हें फिल्म में दिखाए गए यूपी पुलिस के विशेष कनेक्शन से रूबरू कराना है।  फिल्म में यूपी पुलिस और माफिया का गहरा कनेक्शन आदित्य धर द्वारा निर्देशित 'धुरंधर-2' का उत्तर प्रदेश से बहुत गहरा जुड़ाव दिखाया गया है. इस फिल्म में यूपी के पूर्व डीजीपी का किरदार शामिल है, साथ ही प्रयागराज के माफिया अतीक अहमद जैसा दिखने वाला एक चरित्र भी पर्दे पर उतारा गया है।  एसएसपी अविनाश पांडे का मानना है कि यूपी के इस खास कनेक्शन और पुलिसिंग की बारीकियों की जानकारी इन युवा दारोगाओं को होनी चाहिए. इसी मकसद से 2023 बैच के इन पुलिसकर्मियों के लिए खास स्क्रीनिंग का इंतजाम किया गया है।  सरकारी वाहनों से मॉल पहुंचेंगे खाकी वर्दीधारी इस आयोजन के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं. सभी 600 दारोगा पुलिस लाइन से एक साथ सरकारी गाड़ियों के काफिले में मल्टीप्लेक्स के लिए रवाना होंगे. जिले के कप्तान और एसपी सिटी खुद उनके साथ बैठकर फिल्म का आनंद लेंगे. विभाग का मानना है कि ड्यूटी के तनाव के बीच इस तरह के आयोजनों से टीम वर्क की भावना बढ़ती है और नए अधिकारियों को क्षेत्र की चुनौतियों को समझने का एक अलग नजरिया भी मिलता है। 

नौ सालों में यूपी में तीन गुना बढ़ी महिला श्रम शक्ति: सीएम योगी

एमएमएमयूटी में गर्ल्स हॉस्टल का भूमि पूजन व शिलान्यास किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौ सालों में यूपी में तीन गुना बढ़ी महिला श्रम शक्ति: सीएम योगी 2017 के पहले महिलाओं की सुरक्षा बड़ी चुनौती थी: सीएम योगी बिना भय महिला का कामकाजी होना समाज में सुरक्षा का मानक: सीएम योगी पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के सीएसआर फंड से होगा हॉस्टल का निर्माण, 13.67 करोड़ रुपये आएगी लागत एमएमएमयूटी में साइबर फोरेंसिक रिसर्च लैब का भी उद्घाटन किया सीएम ने, प्रदान किए रिसर्च एक्सीलेंस पुरस्कार गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि 2017 के बाद बेटियों की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए सरकार की तरफ से किए गए प्रयासों से बीते नौ सालों में महिला श्रम शक्ति तीन गुना बढ़ी है। वुमेन वर्क फोर्स का आंकड़ा 12 से बढ़कर 36 प्रतिशत को पार कर चुका है। वर्ष 2017 से पहले महिला सुरक्षा जहां एक बड़ी चुनौती थी, वहीं अब बिना भय के महिलाओं का तेजी से कामकाजी होना समाज में सुरक्षा का एक मानक बना है। सीएम योगी बुधवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में 144 बेडेड गर्ल्स हॉस्टल के भूमिपूजन एवं शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह गर्ल्स हॉस्टल, पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा सीएसआर फंड से बनवाया जाएगा। इसके निर्माण पर 13.67 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मुख्यमंत्री ने एमएमएमयूटी में 4.67 करोड़ रुपये की लागत से बनी साइबर फोरेंसिक रिसर्च लैब का उद्घाटन भी किया और रिसर्च एक्सीलेंस पुरस्कार प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एक पुस्तिका का अनावरण भी किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटी सुरक्षित हो, उसका सम्मान हो और वह स्वावलंबन के पथ पर अग्रसर होकर नए भारत के निर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन प्रभावी ढंग से कर सके, इस दृष्टि से उसी प्रकार की सुविधाएं देना आज की आवश्यकता है। इसे ही ध्यान में रखकर प्रदेश सरकार हर बड़े महानगर में कामकाजी महिलाओं के लिए श्रमजीवी महिला छात्रावास का निर्माण कर रही है। किसी भी समाज में सुरक्षा का मानक यही है कि महिलाएं बिना भय घर से बाहर निकल सकें। 2017 के बाद सरकार की तरफ से इस दिशा में किए गए प्रयासों के परिणाम सबके सामने हैं।  पहले पढ़ने के लिए यूपी से बाहर भेज देते थे बेटियों को मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में महिला सुरक्षा चुनौती थी। मध्य व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत सारे परिवार ऐसे थे, जिन्होंने बेटियों को पढ़ने के लिए यूपी के बाहर कहीं छात्रावास में या फिर कहीं रिश्तेदारों के यहां भेज दिया था। आज यूपी के हर जनपद में बेटी बिना डर के पढ़ने जाती है, अन्य शहरों में कार्य करने जाती है। नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में कामकाजी महिलाओं की संख्या 12 फीसदी से कम थी,  वह आज बढ़कर 36 फीसदी से ज्यादा हो गई है। बेटा-बेटी में भेदभाव बंद होने पर कई गुना बढ़ेगी विकास की रफ्तार सीएम योगी ने कहा कि सदन में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए संसद से पास नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा है कि 2029 के चुनाव में यह लागू हो जाए। जब समाज में महिला-पुरुष का भेद समाप्त होता है तो सुखद अनुभूति होती है। अभिभावक जब बेटी-बेटे में भेद करना बंद करेंगे तभी विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ पाएगी और तभी स्टेबिलिटी (स्थायित्व) आएगी। यूपी में ग्रेड-1 की अब 12 फोरेंसिक साइंस लैब, छह निर्माणाधीन वर्तमान दौर में फोरेंसिक साइंस लैब की आवश्यकता को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले यूपी पुलिस के पास ग्रेड-1 की सिर्फ 02 फोरेंसिक साइंस लैब थीं। आज यूपी में ग्रेड-1 की 12 फोरेंसिक साइंस लैब हैं, जबकि छह निर्माणाधीन हैं। लखनऊ में पुलिस के लिए विश्वस्तरीय फोरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित हो चुका है। यहां फोरेंसिक साइंस के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए पाठ्यक्रमों की शुरुआत भी हो चुकी है। तीन नए कानून लागू होने के बाद सात वर्ष से ऊपर की सजा के लिए किसी भी आपराधिक मामले में फोरेंसिक साक्ष्य को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए सरकार ने सभी 75 जनपदों में दो-दो मोबाइल फोरेंसिक लैब उपलब्ध कराई हैं। अपराधी को सजा करवाने में फोरेंसिक साक्ष्य सहयोग करता है। अपराधी सजा पाता है तो पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिलता है। 2017 में थे दो साइबर थाने, आज सभी जनपदों में मुख्यमंत्री कहा कि 2017 में प्रदेश में सिर्फ दो साइबर थाने थे। आज 75 जनपदों में साइबर थाने हैं। प्रदेश के 1681 थानों में साइबर हेल्प डेस्क भी है। साइबर थानों ने अपराधियों से सैकड़ों करोड रुपये बचाने में सफलता प्राप्त की है। साइबर क्राइम से बचने, डीप फेक के मामलों को नियंत्रित करने, डॉक्यूमेंट को सुरक्षा प्रदान करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।  अधिक आबादी यूपी की डेमोग्राफिक डिविडेंड और पूंजी मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत की सबसे बड़ी आबादी का राज्य है। वर्ष 2017 के पहले यह राज्य पहचान का मोहताज था। लोग हमें शक की निगाहों से देखते थे। तब हमने कहा, हमारी जो आबादी है यह भारत का सबसे अच्छा डेमोग्राफिक डिविडेंड है, यह हमारी पूंजी है। यह भारत का स्किल्ड वर्कफोर्स है। मानव संसाधन की इस पूंजी को आगे बढ़ाने का दायित्व सरकार ने लिया और अलग-अलग क्षेत्रों में इसे विकसित करने का कार्य किया।  युवाओं को ‘मार्केट-इंडस्ट्री रेडी’ वर्कफोर्स में बदलने का किया काम मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रदेश के युवाओं को टेक्नोलॉजी से जोड़कर उन्हें मार्केट व इंडस्ट्री रेडी वर्कफोर्स में बदलने का काम किया है। लोग कहते हैं कि यह कैसे हुआ, हमारा जवाब है कि यह तो मौजूद था, बस पहले की सरकारों में इच्छाशक्ति का अभाव था। यहां का युवा प्रतिभाशाली था, लेकिन उसको प्लेटफार्म नहीं मिलता था। जाति के नाम पर बांटने वाले लोग कहां इस ताकत को समझते। नकारात्मकता जिनके मन में हो, समाज के प्रति जिनके मन में नफरत का भाव हो, वह कहां उस ताकत को समझेंगे। यूपी भारत का कंज्यूमर स्टेट ही नहीं, बल्कि भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड भी है। हमें युवाओं को स्किल्ड करना है, इनोवेशन के साथ जोड़ना है, टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ना है। मार्केट … Read more

समीक्षा बैठक में खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहब कंगाले ने की अहम चर्चा

खाद्य विभाग की सचिव  रीना बाबा साहब कंगाले ने ली समीक्षा बैठक कमर्शियल एलपीजी वितरण के लिए प्राथमिकता श्रेणियां तय, दैनिक समीक्षा से व्यवस्था होगी मजबूत गैस आपूर्ति – प्राथमिकता के आधार पर होगा वितरण रायपुर  प्रदेश में गैस की उपलब्धता एवं वितरण प्रणाली के संबंध में ऑयल कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहब कंगाले ने समीक्षा बैठक ली। बैठक में एलपीजी की उपलब्धता, वितरण प्रणाली एवं उपभोक्ता संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में निर्णय लिया गया कि कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ता संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों को विगत माह की कुल खपत के अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही एलपीजी प्रदाय किया जाएगा। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में 25 दिवस तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिवस के भीतर एलपीजी रिफिल की ऑनलाइन बुकिंग सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को समय पर गैस मिल सके। जिला प्रशासन को सभी एलपीजी वितरकों के कार्यालय एवं गोदामों में पुलिस एवं होमगार्ड के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे भीड़भाड़ एवं अव्यवस्था की स्थिति न बने। साथ ही वितरकों को अपने दूरभाष नंबर सक्रिय रखने एवं उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश भी दिए गए हैं। उपलब्ध स्टॉक को ध्यान में रखते हुए विभिन्न संस्थानों के लिए प्राथमिकता श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इनमें शैक्षणिक संस्थान एवं चिकित्सालय, सैन्य एवं अर्द्धसैन्य कैंप, जेल, होटल, समाज कल्याण विभाग के संस्थान, रेलवे एवं एयरपोर्ट कैंटीन, शासकीय कार्यालय, गेस्ट हाउस, पशु आहार उत्पादक इकाइयां तथा रेस्टोरेंट शामिल हैं। बैठक में यह भी तय किया गया कि कमर्शियल एलपीजी स्टॉक की उपलब्धता एवं वितरण की दैनिक समीक्षा ऑयल कंपनियों द्वारा की जाएगी तथा इसकी जानकारी प्रतिदिन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर पर खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम, छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के सदस्य सचिव राजीव कुमार जायसवाल, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के मंडल एलजी प्रमुख श्रीपाद बक्षी, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के प्रादेशिक प्रबंधक दिलीप मीणा, हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉरपोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक मंगेश डोंगरे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

नव निर्माण के 9 वर्ष: यूपी बनेगा हरित प्रदेश, 277 करोड़ से ज्यादा पौधरोपण

नव निर्माण के 9 वर्ष: 277 करोड़ से अधिक पौधरोपण वाला ‘हरित प्रदेश’ बनेगा यूपी  2026 के वर्षाकाल में फिर नया इतिहास रचेगा उत्तर प्रदेश इस वर्ष भी लक्ष्य (35 करोड़) से ज्यादा पौधरोपण की संभावना, पिछले वर्ष हुआ था 37.21 करोड़ पौधरोपण अभी से तैयारी में जुटी योगी सरकार, गांवों में लग रहीं ग्रीन चौपाल, सीएम योगी के नेतृत्व में 9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण अपने जन्मदिन (5 जून, पर्यावरण दिवस) पर प्रदेशवासियों को पौधरोपण का बड़ा तोहफा देते हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   लखनऊ  उत्तर प्रदेश 2026 में फिर नया इतिहास रचेगा। राज्य को ‘हरित प्रदेश’ बनाने वाले योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 9 वर्ष में 242.13 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए, जबकि इसके पहले 2008 से 2016 तक (9 वर्ष में) महज 65.27 करोड़ पौधरोपण ही किया जा सका। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वन विभाग इस वर्षाकाल (2026) में भी 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाएगा। इस तरह उत्तर प्रदेश 2026 तक 277 करोड़ से अधिक पौधरोपण करने वाला प्रदेश बन जाएगा। हरीतिमा वृद्धि के प्रयासों से उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा है। 2025 में एक दिन (9 जुलाई) में 37.21 करोड़ पौधे लगाने वाले उत्तर प्रदेश ने 2026 पौधरोपण महाभियान को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।  हाल में वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित 'वृहद पौधरोपण कार्यक्रम' में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधे रोपे थे। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने इसका प्रमाणपत्र भी सौंपा था।  जन्मदिन पर प्रदेशवासियों को पौधरोपण का तोहफा देते हैं सीएम योगी   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन 5 जून को है। इसी दिन पर्यावरण दिवस भी मनाया जाता है। मुख्यमंत्री अपने जन्मदिन की शुरुआत पौधरोपण से करते हैं। इसके बाद वर्षाकाल में करोड़ों पौधरोपण करने के साथ ही योगी आदित्यनाथ इसे जनांदोलन बनाते हैं। 2017 में सत्ता संभालने के बाद से 5 जून को पर्यावरण दिवस हो या वर्षाकाल में पौधरोपण महाभियान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इसकी कमान संभाली। पौधरोपण महाभियान के पहले वह खुद सफल आयोजन के लिए मीटिंग और मॉनीटरिंग करते हैं। इसके बाद प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पहुंचकर पौधे भी लगाते हैं। स्कूली बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों, कर्मचारियों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों समेत समाज के हर तबके को इस महाभियान से जोड़ने का बीड़ा उठाते हैं। योगी सरकार के प्रयास से 9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। इससे यूपी के वनाच्छादन में भी वृद्धि हुई। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2023 के मुताबिक उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा है। योगी सरकार ने 1 से 7 जुलाई 2025 के बीच जन्मे 18,348 बच्चों को ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट दिया है। बच्चों के अभिभावकों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे प्रदान कर यह संकल्प दिलाया गया कि जैसे बच्चे का पालन करें, वैसे ही पौधे का भी संरक्षण कर उसे पेड़ बनने में योगदान दें। पीएम मोदी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में सराहनीय कार्य के लिए उत्तर प्रदेश की पीठ भी थपथपाई है।  चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को किया ध्वस्त  यूपी ने विश्व के पर्यावरण मानचित्र पर 01 मार्च को नया इतिहास दर्ज किया। वाराणसी के सुजाबाद डोमरी में आयोजित 'वृहद पौधरोपण कार्यक्रम' में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण कर चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए गए इस आधुनिक ‘शहरी वन’ ने आज विश्व पटल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। इसके पहले 10 मार्च 2018 को 1,53,981 पौधों का रोपण कर चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था।  योगी सरकार-2026 में भी लगाएगी 35 करोड़ से ज्यादा पौधे  योगी सरकार वर्षाकाल-2026 में भी पौधरोपण की तैयारी में जुट गई है। वन व पर्यावरण विभाग की ओर से 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य प्रस्तावित है। सरकार की ठोस तैयारी व जन-सहभागिता से यह लक्ष्य से अधिक होने की पूरी संभावना है। पौधशालाओं, विभागों, जनपदों को आगामी दिनों में तैयारी को लेकर निर्देश दिए गए हैं। 52 करोड़ से अधिक पौधे विभिन्न पौधशालाओं में रोपण के लिए तैयार स्थिति में होंगे। हाल में प्रस्तुत बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। पौधशाला प्रबंधन योजना के लिए 220 करोड़ रुपये तथा राज्य प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित है।  गांवों में पर्यावरण संरक्षण जागरूकता के लिए ‘ग्रीन चौपाल’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2030 तक प्रदेश के हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक लाने का निर्देश दिया है। यह लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब पौधरोपण को जनांदोलन का स्वरूप दिया जा सके। सीएम के विजन को केंद्र में रखते हुए वन विभाग ने गांवों में ग्रीन चौपालों का गठन करने का निर्णय किया और इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण में आमजन की भागीदारी भी सुनिश्चित की। विभिन्न विभागों के सहयोग से प्रत्येक ग्रामसभा स्तर पर अब तक 18000 से अधिक गांवों में चौपालों का गठन/आयोजन किया जा चुका है। ग्रीन चौपालें ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में हो रही हैं। इसमें सरकार के सभी वर्गों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से इसकी बैठक की जा रही है।

भारत ने किया बड़ा कदम: ईरान से चीन के लिए जा रहा LPG जहाज खरीदा, रुपये में पेमेंट

मुंबई  अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण साल 2019 से थमा भारत-ईरान ऊर्जा व्यापार एक बार फिर शुरू होता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा तेल और गैस की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए दी गई 30 दिनों की विशेष छूट के बाद ईरान से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर चला एक टैंकर भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला है। शिपिंग डेटा (LSEG) के अनुसार, 'ऑरोरा' नामक प्रतिबंधित पोत ईरानी एलपीजी ले जा रहा है। आज इसके मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। दिलचस्प बात यह है कि यह कार्गो मूल रूप से चीन के लिए रवाना हुआ था, लेकिन बदलती परिस्थितियों के बीच इसे भारत की ओर मोड़ दिया गया। रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, यह खेप एक ट्रेडर के माध्यम से खरीदी गई है और इसका भुगतान भारतीय रुपयों में किया जाएगा। 3 कंपनियों के बीच वितरण भारत वर्तमान में दशकों के सबसे गंभीर गैस आपूर्ति संकट से जूझ रहा है। एलपीजी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक होने के नाते भारत अपनी 60% मांग आयात से पूरी करता है। इस खेप को देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के बीच वितरित किया जाएगा। घरेलू रसोई गैस की जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने उद्योगों को होने वाली गैस आपूर्ति में पहले ही कटौती कर दी है। एक ओर जहां सूत्रों ने खरीद की पुष्टि की है, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्तर पर अभी भी सावधानी बरती जा रही है। केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ईरान से किसी भी लोडेड कार्गो की हमें जानकारी नहीं मिली है।" होर्मुज में फंसे जहाजों की निकासी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। सरकार वहां फंसे अपने जहाजों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस और जग वसंत जैसे चार टैंकरों को सफलतापूर्वक सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। फारस की खाड़ी में फंसे खाली जहाजों पर भी एलपीजी लोड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि देश में आपूर्ति सुचारू बनी रहे।

योगी सरकार के वन स्टॉप सेंटर से महिलाओं को मिल रहा बड़ा सहारा, 2025-26 में 55,134 मामलों में सहायता

योगी सरकार में वन स्टॉप सेंटर बने महिलाओं के लिए सबसे बड़ा सहारा, वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 55,134 प्रकरणों में मदद पुलिस से लेकर खुद पीड़िता तक पहुंच, हर स्तर पर सक्रिय दिखा सिस्टम लखनऊ  उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर योगी सरकार का वन स्टॉप सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 55,134 प्रकरणों में महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है, जो इस व्यवस्था की व्यापक पहुंच और प्रभाव को दिखाता है। यह उन हजारों महिलाओं की कहानी है जिन्हें संकट की घड़ी में तुरंत सहारा मिला है। इसके अंतर्गत 26,450 मामले पुलिस के माध्यम से आए, जबकि 7,551 महिलाएं खुद सहायता के लिए आगे आईं यानी सिस्टम तक पहुंच और उस पर भरोसा दोनों तेजी से बढ़ा है। हर चैनल से जुड़ा सिस्टम, हर पीड़िता तक पहुंच वन स्टॉप सेंटर अब एकीकृत व्यवस्था के रूप में काम कर रहे हैं। महिला हेल्पलाइन से 8,506, बाल कल्याण समिति से 6,433 और अन्य माध्यमों से 5,560 मामले सामने आए। इसके अलावा विभिन्न विभागों के जरिए भी महिलाओं को सहायता मिली। यह दिखाता है कि अब व्यवस्था अलग-अलग हिस्सों में बंटी नहीं है, बल्कि एक प्लेटफॉर्म पर आकर पीड़ित महिला को हर जरूरी मदद उपलब्ध करा रही है। हर तरह की समस्या का एक ही समाधान केंद्र इन प्रकरणों में सबसे अधिक 34,565 मामले सिविल विवादों से जुड़े हैं, जबकि 14,268 मामले घरेलू हिंसा के हैं। इसके अलावा यौन हिंसा, जेंडर आधारित हिंसा और साइबर अपराध से जुड़े मामले भी हैं। साफ है कि वन स्टॉप सेंटर अब केवल एक सेवा नहीं, बल्कि महिलाओं से जुड़ी हर समस्या के समाधान का केंद्र बन चुके हैं। हर उम्र की महिलाओं तक पहुंचता सुरक्षा तंत्र इन केंद्रों की पहुंच हर आयु वर्ग तक है। 18 से 30 वर्ष की 26,565 महिलाएं, 31 से 45 वर्ष की 7,888 महिलाएं इन सेवाओं से लाभान्वित हुई हैं। इसके अलावा आयु वर्ग की महिलाओं को भी सहायता पहुंचाई गई है। यह बताता है कि यह व्यवस्था समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच बना रही है और जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल रही है। जमीनी स्तर पर सक्रिय, भरोसे का मजबूत आधार प्रदेश में इस समय 96 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं और अगले महीने अप्रैल में 25 और नए वन स्टॉप सेंटक संचालित हो जाएंगे। इनके माध्यम से लगातार सेवाएं दी जा रही हैं। सीमित स्टाफ के बावजूद बड़ी संख्या में मामलों में सहायता यह दर्शाती है कि सिस्टम जमीन पर काम कर रहा है। कुल मिलाकर, वन स्टॉप सेंटर अब महिला सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुके हैं। योगी सरकार ने यह साबित किया है कि सुरक्षा का मतलब सिर्फ नीतियां बनाना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है और यही इस मॉडल की असली ताकत है।

शोर कम, काम ज्यादा: योगी सरकार की योजना से कनेक्टिविटी का नया मॉडल

हर गांव तक बस, हर गांव तक सुविधा: 12 हजार से ज्यादा गांवों की बदलेगी तस्वीर शोर कम, काम ज्यादा: योगी सरकार की योजना से कनेक्टिविटी का नया मॉडल सिर्फ सड़क नहीं, सेवाओं की भी पहुंच : ग्रामीण परिवहन से खुलेगा अवसरों का रास्ता लखनऊ उत्तर प्रदेश में ग्रामीण परिवहन विकास को नई दिशा देने के लिए योगी सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना, 2026 के तहत लगभग 12,200 ऐसे गांवों में बस सेवा शुरू की जाएगी, जहां अब तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं थी। यह पहल सिर्फ बस चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर गांव तक वास्तविक संपर्क सुनिश्चित करने की है। साफ संदेश है, जहां बस जाएगी, वहां संपर्क मार्ग भी होगा और वहीं से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच का रास्ता खुलेगा। ग्रामीण परिवहन पर खर्च 2011-12 में घरेलू बजट के 4.2% से बढ़कर 2022-23 में लगभग 7.5% हो गया है। यही वह अंतर है जो योगी सरकार को अन्य सरकारों से अलग करता है। शोर कम, काम ज्यादा और अंतिम व्यक्ति तक सुविधा पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतिबद्ध हैं।  अंतिम छोर तक बस सेवा पहुंचाने की ठोस रणनीति प्रदेश में बीते वर्षों में सड़कों का व्यापक जाल बिछा, लेकिन 12 हजार से ज्यादा गांव अब भी सुविधाओं से कटे हुए थे। योगी सरकार ने इस अंतर को पहचानते हुए कनेक्टिविटी की परिभाषा को बदला है। अब केवल सड़क बनाना लक्ष्य नहीं, बल्कि उस सड़क पर नियमित परिवहन सुनिश्चित करना है। यह योजना 59,163 ग्राम सभाओं को जोड़ने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। खास बात यह है कि करीब 5,000 ऐसे गांव, जहां बड़ी बसें नहीं पहुंच सकतीं, वहां 28 सीटों तक की छोटी बसें चलाई जाएंगी। यानी दुर्गम इलाकों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का स्पष्ट रोडमैप तैयार है। बसों की सेवा प्रत्येक ग्राम पंचायत में दिन में कम से कम दो बार सुनिश्चित की जाएगी, जिससे लोगों को नियमित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा मिल सके। यह सेवा सुबह 10 बजे से शुरू होगी और बस को रात में 8 बजे तक गांव लौटाना होगा। बसों को परमिट प्रारंभिक रूप से 10 वर्षों के लिए प्रदान किए जाएंगे, आगे इसे बढ़ाया भी जा सकता है।  रोजगार और भागीदारी का नया मॉडल इस योजना में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन पर भी विशेष जोर है। बसों के चालक और सहायक स्टाफ की भर्ती आसपास के गांवों से की जाएगी, जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा। साथ ही निजी ऑपरेटरों को भी जोड़ा गया है, जिन्हें परमिट और करों में छूट देकर भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह मॉडल न केवल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति देगा। निगरानी, विश्वसनीयता और रोजमर्रा की राहत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में समितियां बनाई जाएंगी, जो संचालन, किराया निर्धारण और निगरानी का काम देखेंगी। बसों को रात तक गांवों में लौटना अनिवार्य होगा, जिससे सेवा की निरंतरता बनी रहे। यह पहल उन लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए राहत लेकर आएगी, जो अब तक महंगे और अनियमित साधनों पर निर्भर थे। परिवहन खर्च में कमी आएगी और लगभग 1.5 करोड़ छात्रों को विद्यालयों तक पहुंचने में आसानी होगी, जिससे ड्रॉपआउट दर पर भी असर पड़ेगा। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना यह स्पष्ट करती है कि विकास का असली पैमाना वही है, जो अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। योगी सरकार कनेक्टिविटी को सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि सुविधा, अवसर और सम्मानजनक जीवन से जोड़ते हुए एक नया मानक स्थापित कर रही है।

योगी सरकार की सख्त मॉनिटरिंग से क्रियान्वयन में आई तेजी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा नया बल

स्वदेशी गो-संवर्धन योजना में तेज प्रगति पर फोकस, सभी जिलों में बढ़ी रफ्तार योगी सरकार की सख्त मॉनिटरिंग से क्रियान्वयन में आई तेजी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा नया बल गो-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत कर किसानों-पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल लखनऊ  योगी सरकार की मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना अब प्रदेश में तेज प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रही है, जहां इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। सरकार द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिक से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे जिलों में कार्य की रफ्तार बढ़ी है और योजनाएं तेजी से धरातल पर उतर रही हैं।    प्रदेश के विभिन्न जनपदों में योजना के तहत लाभार्थियों को जोड़ने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। इसके चलते पशुपालकों और किसानों की भागीदारी में वृद्धि हुई है और गो-आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। योजना का उद्देश्य केवल पशुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना भी है।    योगी सरकार द्वारा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि योजना के प्रत्येक चरण (चयन, स्वीकृति, अनुदान और क्रियान्वयन) को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरा किया जाए। इसी क्रम में जिलों की नियमित समीक्षा की जा रही है और जमीनी स्तर पर आ रही चुनौतियों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर समन्वय को मजबूत करते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजना का लाभ किसी भी पात्र लाभार्थी से वंचित न रह जाए।     पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि  इस योजना के माध्यम से गो-आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है, जिससे दुग्ध उत्पादन, जैविक खेती और संबंधित गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है। इससे न केवल किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार भी हो रहा है। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।    योगी सरकार लगातार इस दिशा में प्रयासरत है कि योजनाओं का लाभ सीधे आमजन तक पहुंचे और उनका जीवन स्तर बेहतर हो। तेज प्रगति, प्रभावी क्रियान्वयन और सुदृढ़ मॉनिटरिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना को प्रदेश के ग्रामीण विकास और आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। यह पहल न केवल पशुपालन क्षेत्र को नई गति दे रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश को समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।