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उज्जयिनी आस्था से बढ़कर, अब उत्कर्ष की दिशा में आगे बढ़ेगा उज्जैन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जयिनी आस्था से आगे अब बनेगी उत्कर्ष की नगरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेडिसिटी से बनेगी नई पहचान उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पुराकाल से धर्म और संस्कृति की राजधानी रही उज्जयिनी अब विकास के नए आयाम गढ़ रही है। उज्जयिनी अब केवल श्रद्धा और आध्यात्म का ही केंद्र नही, उत्कर्ष, आधुनिकता और समग्र विकास की नगरी बनने की ओर अग्रसर है। हम उज्जैन को स्वास्थ्य उपचार, अधोसंरचना विकास और सांस्कृतिक वैभव के संगम के रूप में विकसित करने के लिए संकल्पित प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को कालिदास अकादमी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने उज्जैन जिले में आयोजित नि:शुल्क जांच एवं उपचार शिविर के समापन समारोह में सहभागिता कर उज्जैन के समग्र विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं बताईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन में प्रस्तावित मेडिसिटी परियोजना शहर की पहचान को नई दिशा देगी। अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त यह मेडिसिटी न केवल उज्जैन बल्कि पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनेगी। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए सभी प्रकार के विकास कार्यों को तेज़ी से पूरा किया जा रहा है। उज्जैन की सभी दिशाओं में जरूरत के अनुसार 8 लेन, 6 लेन और 4 लेन सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। पेयजल, स्वच्छता, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और सुव्यवस्थित अनुभव मिल सके। उज्जैन में हुए नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस प्रकार के नवाचार समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। सरकार जनकल्याण के ऐसे प्रयासों को निरंतर बढ़ावा देगी। हम इसे व्यापक स्तर पर लागू करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि उज्जयिनी अब विकास, स्वास्थ्य, आध्यात्म और आधुनिकता का उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हृदय जांच अभियान के लिए जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद हार्ट अटैक की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इन पीड़ितों में 15 से लेकर 30 साल की आयु के लोग अधिक हैं। सबसे अधिक मौतें हार्ट अटैक से हो रही है, यह आंकड़े अत्यंत कष्टकारी एवं सचेत करने वाले हैं। इस चुनौती का समाधान खोजने के लिए इंदौर, उज्जैन और आसपास के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल एक साथ आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान में लगीं उज्जैन जिले की करीब 5000 आशा कार्यकर्ताओं को 2-2 हजार की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की और बहनों का आभार मानकर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज जन्म दिवस के अवसर पर पहले किसान और अब आम नागरिकों की स्वास्थ्य की चिंता करते हुए सेवा की संकल्प की पूर्ति की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले हृदय की बीमारी होने पर अधिकांश मरीज इलाज के लिए गुजरात जाते थे। लेकिन अब आयुष्मान भारत योजना शुरू होने के बाद उन्हें सही समय पर मध्यप्रदेश में ही उचित इलाज मिल रहा है। हृदय की बीमारियों के संदर्भ में उज्जैन में हुआ यह अभिनव प्रयास बेहद सफल रहा है। आज एक संकल्प की सिद्ध हुई है। उज्जैन जिले की धरती से एक अनोखा मॉडल बना है। अब इसे उज्जैन संभाग के शेष 6 जिलों में भी लागू किया जाएगा। उसके बाद यह अभियान प्रदेश स्तर पर क्रियान्वित होगा। आज हम सभी को यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हृदय संबंधी जांच एवं बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को प्रेरित करें। अगर किसी के साथ आर्थिक तंगी है तो राज्य सरकार मदद के लिए पूरी तरह से साथ खड़ी है। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने भी अपने विचार व्‍यक्‍त किए और मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव को जन्‍म दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में बताया गया कि विगत 02 माह में 104 विभिन्‍न स्‍थानों पर जांच शिविर लगाए गए। इनमें 26 हजार विभिन्‍न प्रकार की जांचें की गईं और 48 लोगों की सफलता पूर्वक बाईपास सर्जरी की गई। कार्यक्रम में संजय अग्रवाल, राजेश धाकड़, रवि सोलंकी, प्रदीप उपाध्याय,राय सिंह सेंधव, सत्यनारायण खोईवाल, पूर्व मंत्री पारस जैन, रूप पमनानी,राजेन्द्र भारती, सम्राट विक्रमादित्य विश्विद्यालय कुलगुरु अर्पण भारद्वाज उपस्थित रहे।  

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक – केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया

छत्तीसगढ़ में जनजातीय शक्ति का खेल महाकुंभ: देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक – केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया खेल प्रतिभाओं को नया आसमान देने सरकार प्रतिबद्ध — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर, बस्तर और सरगुजा बने राष्ट्रीय खेल संगम के केंद्र देशभर से 9 खेल विधाओं में 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 2500 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा रायपुर  छत्तीसगढ़ की धरती  एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय आयोजन की आधिकारिक घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस गरिमामयी अवसर पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह खेल महाकुंभ 25 मार्च से 3 अप्रैल तक रायपुर के साथ-साथ बस्तर और सरगुजा में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर के 30 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 2500 खिलाड़ी 9 खेल विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। कार्यक्रम में हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की और ओलंपिक पदक विजेता सुसाइखोम मीराबाई चानू की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गौरव प्रदान किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य का विषय है कि प्रभु श्रीराम के ननिहाल में देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया का छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर ओलंपिक में 4 लाख तथा सरगुजा ओलंपिक में साढ़े तीन लाख लोगों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि जनजातीय समाज में खेलों के प्रति गहरी रुचि है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि आत्मसमर्पित नक्सली भी ‘नुआबाट’ (नई राह) के माध्यम से मुख्यधारा में लौटकर इन आयोजनों में सहभागी बने—जो परिवर्तन और विश्वास का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार में खेलों को लेकर उत्साह और प्रयास दोनों दोगुने हैं। राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत खेल अधोसंरचना निर्माण और प्रतिभाओं के चिन्हांकन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि रायपुर और बिलासपुर में खेलो इंडिया के तहत रेजिडेंशियल अकादमियां संचालित हैं, जबकि जशपुर, रायगढ़ और रायपुर में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ओलंपिक में चयनित खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए, स्वर्ण पदक विजेताओं को 3 करोड़, रजत पदक विजेताओं को 2 करोड़ और कांस्य पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि निर्धारित की है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में स्थित देश के दूसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का नामकरण जनजातीय नायक शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर किया गया है, जो राज्य के गौरव और प्रेरणा के प्रतीक हैं। जनजातीय संस्कृति, इतिहास और गौरव से जुड़ा आयोजन मुख्यमंत्री ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल प्रभु श्रीराम का ननिहाल है, बल्कि यह जनजातीय शौर्य और बलिदान की भूमि भी है। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह, गेंद सिंह और गुण्डाधुर जैसे नायकों का उल्लेख करते हुए बताया कि नवा रायपुर में उनके सम्मान में म्यूजियम बनाया गया है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। उन्होंने खिलाड़ियों से इस म्यूजियम का अवलोकन करने का आग्रह भी किया। केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक है और आने वाले वर्षों में भी यह श्रृंखला जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि एक संतुलित जीवन शैली है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘फिट इंडिया’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों ने खेलों को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि देश की 65 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी में अपार क्षमता है और अब खेल प्रतिभाएं केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों से भी उभर रही हैं।  उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान राम के ननिहाल में इस आयोजन का शुभारंभ होना अत्यंत शुभ संयोग है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज ने सदैव देश को वीरता और परिश्रम की प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलों को नई दिशा मिल रही है और ‘ट्राइबल गेम्स’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि यह आयोजन ऐतिहासिक है और देशभर से आए खिलाड़ियों के स्वागत के लिए पूरा छत्तीसगढ़ उत्साहित है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जनजातीय प्रतिभाओं को विश्व मंच तक ले जाने का सशक्त माध्यम बनेगा और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लाभ प्रदेश के खिलाड़ियों को मिलेगा। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, इंद्र कुमार साव, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, मुख्य सचिव विकासशील सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण,  बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

शराब दुकानों के ठेके का 8वां चरण शुरू, अब एकल दुकान के लिए भी आवेदन कर सकते हैं: प्रदेश में नया बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत शराब दुकानों का आवंटन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत सात चरणों के ई-टेंडर एवं ई-टेंडर-कम-ऑक्शन पूरे होने के बाद शेष बची कम्पोजिट मदिरा दुकानों के लिए आठवें चरण में टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मदिरा दुकान के ठेका निष्पादन के आठवें चरण में दुकानों के समूह के साथ-साथ एकल दुकान के लिए भी ऑफर प्रस्तुत किए जा सकेंगे। ई-टेंडर के आठवें चरण के लिए निर्धारित कार्यक्रम में संशोधन किया गया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के अनुसार, ई-टेंडर के आठवें चरण के लिए ऑनलाइन टेंडर फॉर्म डाउनलोड और सबमिट करने की तिथि 25 मार्च 2026 दोपहर 4 बजे से 27 मार्च दोपहर 12 बजे तक निर्धारित की गई है। आठवें चरण के ई-टेंडर खोलने की जानें डेट आठवें चरण के ई-टेंडर प्रपत्र खोलने की तिथि 27 मार्च रहेगी, जिसमें दोपहर 12 बजे से प्रपत्र खोले जाएंगे। ई-टेंडर-कम-ऑक्शन के तहत ऑक्शन का समय 27 मार्च को दोपहर 4:30 बजे से 5:30 बजे तक निर्धारित है। ई-टेंडर खोलने का समय 27 मार्च को दोपहर 4 बजे से रहेगा। हालांकि, यदि संबंधित समूह का ऑक्शन जारी रहता है तो प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी। ई-टेंडर खोलने की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही जिला समिति द्वारा ई-टेंडर के माध्यम से निराकरण किया जाएगा। आठवें चरण में ऑफसेट प्राइस रिजर्व प्राइस के केवल 15 प्रतिशत नीचे तक ही स्वीकार्य होगा। आबकारी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सातवें चरण में जो समूह बनाए गए हैं, उन्हें आठवें चरण में यथावत रखा जाएगा। हालांकि, यदि राजस्व बढ़ने की संभावना रहती है तो इसमें बदलाव किया जा सकता है और समूहों का पुनर्गठन भी किया जा सकता है।

जल गंगा संवर्धन अभियान – 2026: जनभागीदारी से पुनर्जीवित हो रहे प्राचीन जल स्रोत

जल गंगा संवर्धन अभियान – 2026: जनभागीदारी से पुनर्जीवित हो रहे प्राचीन जल स्रोत सागर संभाग में फलीभूत हो रहा जल गंगा संवर्धन अभियान तालाबों, नदियों और बावड़ियों के संरक्षण का संकल्प बन रहा जन-आंदोलन भोपाल  सागर संभाग में जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' धरातल पर फलीभूत होने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सागर संभाग के सभी जिलों में प्राचीन तालाबों, नदियों, पोखरों और बावड़ियों को पुनर्जीवित करने के लिए चलाए गए पिछले वर्षों के अभियान के सुखद और अपेक्षित परिणाम सामने आए हैं। इसी कड़ी में इस वर्ष भी 19 मार्च, 2026 से संभाग के प्रत्येक जिले में इस अभियान का उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया है। जनभागीदारी की अनूठी मिसाल जल गंगा संवर्धन अभियान की सबसे बड़ी विशेषता 'जनभागीदारी' रही है। सागर संभाग के हजारों नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों ने कंधे से कंधा मिलाकर इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग दे रहे हैं। श्रमदान के माध्यम से प्राचीन जल स्रोतों की गाद निकालने, साफ-सफाई करने और उनके मूल स्वरूप को लौटाने का कार्य निरंतर जारी है। इस अभियान के तहत सागर जिले में नगर पालिका खुरई के तालाब घाट की सफाई के साथ इस वर्ष का आगाज हुआ। संभागीय मुख्यालय पर ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील के चकराघाट पर जल पूजन और सफाई कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं खुरई की अम्मावाड़ी झील को भी स्वच्छ किया गया। छतरपुर जिले में तालाबों का कायाकल्प और ''जल महोत्सव'' आयोजित छतरपुर जिले में विधायक श्रीमती ललिता यादव और जिला प्रशासन के नेतृत्व में सांतरी तलैया से स्वच्छता कार्य शुरू किया गया। जनपद नौगांव की ग्राम पंचायत विकौरा और लवकुशनगर के छठी बम्होरी में तालाबों का कायाकल्प किया जा रहा है। इसी प्रकार निवाड़ी जिले के ग्राम काछीपुरा में विधायक अनिल जैन के नेतृत्व में 'जल महोत्सव 2026' के तहत भव्य जल रैली निकाली गई और ग्रामीणों को जल शपथ दिलाई गई। पन्ना और टीकमगढ़ जिले में नवांकुर संस्थाओं की पहल पन्ना और टीकमगढ़ जिलों में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के माध्यम से नवांकुर संस्थाओं ने कमान संभाली है। पन्ना के ग्राम बड़ागांव स्थित मिढ़ासन नदी के उद्गम स्थल 'महरा धाम' की सफाई की गई, तो वहीं टीकमगढ़ के गंगासागर तालाब और अचर्रा में गाद निकालने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। दमोह जिले में जनभागीदारी से मजबूत हुआ ''जल गंगा संवर्धन अभियान'' दमोह जिले में भी जल गंगा संवर्धन अभियान को विकास कार्यों से जोड़ा गया है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री लखन पटेल ने ग्राम रजवांस में तालाब की साफ-सफाई में श्रमदान किया। इस अवसर पर क्षेत्र के विकास के लिए सामुदायिक भवनों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया गया। साथ ही जल निगम की परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को जल सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' केवल जल स्रोतों की सफाई का जरिया नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महा-संकल्प है। सागर संभाग के हर जिले से आ रही सकारात्मक खबरें इस बात का प्रमाण हैं कि जब समाज और सरकार मिलकर प्रयास करते हैं, तो प्रकृति का संरक्षण सहज और प्रभावी हो जाता है।  

मेहनत और योजना का संयोजन, कविता दुबे ने बनाया सफल व्यवसाय

मेहनत और योजना का साथ, कविता दुबे ने खड़ा किया सफल व्यवसाय भोपाल  कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली कविता दुबे ने आज अपनी मेहनत और हौसले से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। मध्यप्रदेश शासन की मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना ने उनके सपनों को पंख दिए और आज वही सपना उनके सफल व्यवसाय के रूप में साकार हो रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कविता दुबे कुछ अलग करना चाहती थीं। इसी दौरान उन्हें उद्योग विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना की जानकारी मिली। योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन ने उनके मन में छिपे आत्मविश्वास को जगाया और उन्होंने अपने छोटे से सपने को साकार करने की ठान ली। वर्ष 2023 में कविता ने “नारायणी लेडीज कलेक्शन” नाम से अपनी दुकान की शुरुआत की। शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन उनके इरादे बड़े थे। आज उनकी दुकान पर महिलाओं के लिए लहंगे, सूट, साड़ियाँ, कुर्तियाँ, ब्लाउज और आर्टिफिशियल बेंटेक्स ज्वेलरी जैसी कई वस्तुएँ उपलब्ध हैं। ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वे इन वस्तुओं को बिक्री के साथ-साथ किराये पर भी उपलब्ध कराती हैं। लगन और निरंतर मेहनत का परिणाम है कि आज कविता को अपने व्यवसाय से हर महीने लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक की आय हो रही है। यह आय न केवल उनके परिवार के लिए सहारा बनी है, बल्कि उन्हें समाज में एक नई पहचान भी दिला रही है। कविता का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना का सहयोग न मिला होता तो शायद उनके सपने अधूरे रह जाते। अब उनका सपना है कि अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाकर वे अन्य लोगों को भी रोजगार का अवसर दें। कविता दुबे की यह कहानी बताती है कि जब सपनों के साथ मेहनत और सरकारी योजनाओं का साथ मिलता है, तो एक साधारण शुरुआत भी सफलता की बड़ी कहानी बन जाती है। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना आज प्रदेश के युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार, आत्मसम्मान और नई पहचान का मजबूत माध्यम बन रही है।  

बिहार में बिजली बिल में बदलाव: दिन में सस्ती और शाम को महंगी बिजली, स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए नया सिस्टम

पटना  बिहार विद्युत विनियामक आयोग (बीईआरसी) ने बिजली कंपनियों की याचिका स्वीकार कर ली है. अब 1 अप्रैल 2026 से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे 87 लाख से अधिक घरेलू. व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को टाइम ऑफ डे (टीओडी) टैरिफ लागू होगा. इसका मतलब है कि बिजली खपत का समय तय करेगा बिल कितना आएगा. इसके तहत अब दिन में सस्ती और रात में महंगी बिजली मिलेगी. जानकारी के अनुसार, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली इस्तेमाल करने पर उपभोक्ताओं को सिर्फ 80 प्रतिशत राशि चुकानी होगी. यानी 100 रुपये की खपत पर 80 रुपये ही. शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक पीक आवर में खपत पर 120 प्रतिशत दर लगेगी. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आयोग ने इसे 110 प्रतिशत रखा है. जबकि रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक पूरी तरह सामान्य दर लागू रहेगी. कृषि कनेक्शन को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।  क्या है टाइम ऑफ डे टैरिफ? टाइम ऑफ डे टैरिफ का मतलब है कि दिन के अलग-अलग समय पर बिजली की दर अलग-अलग होगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिजली उपयोग का समय बदलने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि पीक आवर में लोड कम किया जा सके. पहले यह व्यवस्था सिर्फ औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक सीमित थी, लेकिन अब इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है।  तीन टाइम स्लैब में बंटी बिजली दरें जानकारी के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत दिन को तीन हिस्सों में बांटा गया है.     सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक: इस दौरान बिजली सबसे सस्ती रहेगी और उपभोक्ताओं को सामान्य दर का करीब 80% ही देना होगा.     शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक: यह पीक आवर होगा, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं को लगभग 10% अधिक और गैर-घरेलू को 20% तक ज्यादा शुल्क देना पड़ेगा।      रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक: इस दौरान सामान्य दर पर ही बिजली मिलेगी. किन उपभोक्ताओं पर लागू होगा नियम? यह नया नियम मुख्य रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले उपभोक्ताओं पर लागू होगा. इसके अलावा जिन उपभोक्ताओं का लोड 10 किलोवाट से अधिक है, उन पर भी यह व्यवस्था लागू की जा सकती है. कृषि उपभोक्ताओं को फिलहाल इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।  क्यों लिया गया यह फैसला? ऊर्जा विभाग और आयोग का मानना है कि दिन के समय खासकर सोलर ऊर्जा की उपलब्धता ज्यादा होती है, जिससे बिजली उत्पादन सस्ता पड़ता है. इसलिए दिन में दर कम रखी गई है. वहीं शाम के समय मांग बढ़ने के कारण दरें बढ़ाई गई हैं, ताकि उपभोक्ता अपनी खपत को संतुलित करें।  कितने उपभोक्ताओं पर असर? बिहार में करीब 2 करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं और इनमें बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इस फैसले का असर लाखों उपभोक्ताओं पर सीधे तौर पर पड़ेगा, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां स्मार्ट मीटर तेजी से लगाए जा रहे हैं।  क्या होगा आम लोगों पर असर? इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को अपने बिजली उपयोग का समय बदलना होगा. अगर लोग दिन में ज्यादा बिजली इस्तेमाल करेंगे तो उनका बिल कम आएगा, जबकि शाम के समय ज्यादा उपयोग करने पर बिल बढ़ सकता है. यानी अब बिजली बचाने के साथ-साथ समय प्रबंधन भी जरूरी हो जाएगा।  पूरी कवायद का क्या होगा असर? बिहार में बिजली बिल की यह नई व्यवस्था उपभोक्ताओं की आदतों को बदलने वाली है. सरकार और आयोग का लक्ष्य बिजली की मांग को संतुलित करना और सस्ती ऊर्जा का बेहतर उपयोग करना है. हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव शुरुआत में चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही उपयोग से बिजली बिल में बचत भी संभव है। 

सुक्खू सरकार का कर्ज बढ़ा, 3 साल में 41173 करोड़ लिया, 2026-27 के लिए क्या है लोन का नया लक्ष्य?

शिमला  हिमाचल प्रदेश में गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही सुक्खू सरकार ने तीन साल में अब तक 41,173 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, जबकि 32,004 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया भी है. यह जानकारी संशोधित बजट अनुमान में दी गई है।  2026-27 के बजट में 11,965 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का प्रस्ताव है. हिमाचल सरकार पर बढ़ता कर्ज और ब्याज का बोझ, साथ ही राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से सीमित कर आधार के बीच राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है।  संक्षिप्त बजट के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में सरकार की कुल कर्ज देनदारी 1,03,994 करोड़ रुपये रही, जो 2026-27 में बढ़कर 1,12,319 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. सरकार पर कुल कर्ज 2022-23 में 76,681 करोड़ रुपये, 2023-24 में 85,295 करोड़ रुपये और 2024-25 में 93,625 करोड़ रुपये रहा, जो लगातार बढ़ता जा रहा है।  जानकारी के अनुसार, 2024-25 में ब्याज भुगतान 6,260.93 करोड़ रुपये और 2025-26 में 6,693 करोड़ रुपये रहा, जो 2026-27 में 7,271 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन ढांचे में भी ब्याज भुगतान में बढ़ोतरी का रुझान दिखाया गया है. इसे 2027-28 में 8,115 करोड़ रुपये और 2028-29 में 8,865 करोड़ रुपये आंका गया है. वहीं सब्सिडी को 2025-26 के 3,205 करोड़ रुपये से घटाकर 2026-27 में 858.98 करोड़ रुपये, 2027-28 में 910.52 करोड़ रुपये और 2028-29 में 965.15 करोड़ रुपये करने का अनुमान है।  स्थिति चिंताजनक बताई गई है क्योंकि वेतन, पेंशन, कर्ज भुगतान, ब्याज भुगतान और अन्य मदों पर सरकार का खर्च बजट का लगभग 80 प्रतिशत है. वहीं पूंजीगत कार्यों और अन्य गतिविधियों के लिए सिर्फ 20 प्रतिशत राशि ही बचती है।  कम बजट किया पेश गौर रहे कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार कम आकार का बजट पेश किया गया. इस बार करीब चार हजार करोड़ रुपये का कम बजट पेश किया गया है. पिछली बार बजट का आकार 58 हजार करोड़ रुपये थे. गौर रहे कि भाजपा सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में करीब 30 हजार करोड़ रुपये कर्ज लिया था. 2012 से 2025 तक हिमाचल प्रदेश का कर्ज 48 हजार करोड़ से एक लाख करोड़ पार कर गया है।  केंद्र ने रैवन्यू डेफेसिट ग्रांट बंद की केंद्र सरकार की तरफ से हिमाचल प्रदेश समेत 17 राज्यों की रैवेन्यू डेफेसिट ग्रांट बंद कर दी गई है. इससे हिमाचल प्रदेश को 35 हजार से 40 हजार करोड़ का नुकसान पांच साल में होगा. वित्त आयोग की सिफारिश पर हर साल  हिमाचल प्रदेश को 3500 करोड़ की आर्थिक सहायता दी जाती थी, जो कि अब बंद कर दी गई है. ऐसे मे अब प्रदेश में आम आदमी पर इसकी मार पड़ रही है.क्योंकि सरकार ने अब पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर सेस लगाने का विधेयक भी विधानसभा में पारित किया है. साथ ही हिमाचल में एंट्री टैक्स में भी ढाई गुना इजाफा किया गया है। 

एमपी में पानी की स्थिति में 128 प्रतिशत की वृद्धि, देश में पहले स्थान पर, अमृत सरोवरों के मामले में भी नेतृत्व

भोपाल   मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विगत वर्षों में अभियान के दो चरणों में प्रदेश में 6 हजार 393 अमृत सरोवरों में पहले चरण में 5 हजार 839 अमृत सरोवर बनाए गए हैं। वहीं दूसरे चरण में 554 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। इस प्रकार अभियान के क्र‍ियान्‍वयन में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हैं। मध्यप्रदेश मिशन अमृत सरोवर के तहत देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पहले स्‍थान पर है। इसकी जानकारी आईआईटी दिल्ली और ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से संचालित भू प्रहरी परियोजना की रिपोर्ट से आई है। अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में 128 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मध्‍यप्रदेश देश में प्रथम स्‍थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य तालाबों के औसत सतह क्षेत्र में वृद्धि के मामले में देश में प्रथम स्थान पर है। पिछले दो वर्षों में प्रदेश में अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में 128.714 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 11.27 प्रतिशत से कहीं अधिक है। AI, सैटेलाइट और LiDAR तकनीक से किया आकलन भारत सरकार ने मध्यप्रदेश में बने अमृत सरोवरों की आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट, SONAR और LiDAR के माध्यम से न केवल तालाबों के औसतन सतह क्षेत्र बल्कि जल की कुल मात्रा (वॉल्यूम) का भी आकलन किया गया। इसमें सामने आया कि मानसून के दौरान जल संचयन क्षमता में सुधार हुआ है और सूखा-प्रवण एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भी गर्मियों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। सतह क्षेत्र में वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव भूजल पुनर्भरण पर भी पड़ा है, जिससे आसपास के कुओं और ट्यूबवेल का जल स्तर बढ़ा है। साथ ही, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों की आजीविका में सुधार हो रहा है। सिपरी सॉफ्टवेयर से किया चयन मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्‍त अवि प्रसाद ने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्रदेश में अमृत सरोवरों के निर्माण के लिए स्थानों का चयन वैज्ञानिक पद्धति से किया गया है। इसके लिए सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया। इसके माध्यम से भूविज्ञान, कंटूर, जल निकासी नेटवर्क, मिट्टी के प्रकार और भूमि का उपयोग जैसे विभिन्न डेटा लेयर्स का एकीकृत विश्लेषण किया गया। इस प्रक्रिया के जरिए ऐसे उपयुक्त स्थानों का चयन किया गया, जहां जल संरक्षण और संचयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। यह पहल प्रदेश में जल प्रबंधन को वैज्ञानिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इंदौर नगर निगम का सख्त कदम: व्यावसायिक इमारतों को नोटिस, बेसमेंट में बाजार हटाने का फरमान

इंदौर इंदौर नगर निगम द्वारा शहर की व्यावसायिक इमारतों के तलघर में चल रही व्यापारिक गतिविधियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा गया है। निगम प्रशासन ने शहर की ऐसी 35 प्रमुख बिल्डिंगों को चिन्हित किया है, जहां बेसमेंट का उपयोग पार्किंग के स्थान पर दुकानों या अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए किया जा रहा था। इन सभी भवन स्वामियों को औपचारिक नोटिस जारी कर सख्त हिदायत दी गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर नियमों का पालन सुनिश्चित करें।  दस दिनों के भीतर पार्किंग व्यवस्था बहाल करने के निर्देश नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा द्वारा जारी किए गए इन नोटिसों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भवन संचालकों को 10 दिन का समय दिया जा रहा है। इस अवधि के भीतर उन्हें तलघर में किए गए अवैध व्यावसायिक निर्माण को हटाना होगा और वहां पार्किंग की व्यवस्था को फिर से सुचारू करना होगा। निगम के अधिकारियों ने साफ किया है कि यदि इस समय सीमा के बाद भी भवनों में पार्किंग की जगह व्यापारिक गतिविधियां संचालित पाई गईं, तो निगम की टीम स्वयं वहां पहुंचकर निर्माण कार्य को ध्वस्त करने की सीधी कार्रवाई करेगी। हर साल चलने वाले अभियान की सार्थकता पर सवाल उल्लेखनीय है कि इंदौर नगर निगम द्वारा बेसमेंट की जांच और नोटिस देने की यह प्रक्रिया हर एक या दो साल में दोहराई जाती है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, हर बार भवन अधिकारियों और भवन निरीक्षकों द्वारा जोनल स्तर पर इमारतों की सघन जांच की जाती है और नोटिस भी बांटे जाते हैं। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और जानकारों का कहना है कि इन अभियानों का परिणाम अक्सर सिफर ही रहता है। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है, जिससे पार्किंग की समस्या जस की तस बनी रहती है। जोनल कार्यालयों में सक्रिय हुए भवन अधिकारी और निरीक्षक वर्तमान में नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा के निर्देशों के बाद सभी जोनल कार्यालयों में तैनात भवन अधिकारी और भवन निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों की इमारतों का सर्वे कर रहे हैं। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन इमारतों ने भवन अनुज्ञा के समय पार्किंग के लिए जगह मंजूर करवाई थी लेकिन बाद में वहां व्यावसायिक निर्माण कर लिया। निगम का कहना है कि इस बार लापरवाही बरतने वाले भवन स्वामियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और पार्किंग नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। 

इंदौर संभाग में जल गंगा संवर्धन अभियान को मिल रहा जनआंदोलन का समर्थन

इंदौर संभाग में जल गंगा संवर्धन अभियान को मिल रहा जनआंदोलन का रूप अभियान के अंतर्गत आयोजित की जा रही हैं विभिन्न गतिविधियां इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेशभर में संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” के अंतर्गत इंदौर संभाग में जल संरक्षण एवं संवर्धन को जनआंदोलन का रूप मिल रहा है। इंदौर संभाग में अभियान के तहत विभिन्न नवाचारपूर्ण गतिविधियों, जनभागीदारी कार्यक्रमों तथा जागरूकता प्रयासों के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन की दिशा में प्रभावी पहल की जा रही है। बड़वानी में प्राचीन बावड़ी में श्रमदान कर की गई साफ-सफाई कलेक्‍टर बड़वानी श्रीमती जयति सिंह ने बताया है कि देशव्यापी ''जल गंगा संवर्धन अभियान'' के अंतर्गत बड़वानी जिले के जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसी कड़ी में नगर पालिका परिषद बड़वानी द्वारा मोटी माता स्थित प्राचीन बावड़ी की साफ-सफाई के लिए विशेष श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। नगर पालिका के कर्मचारियों, स्वच्छता मित्रों, विधिक सेवा प्राधिकरण और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर प्राचीन बावड़ी परिसर में व्यापक श्रमदान कर बावड़ी से गंदगी, कचरा और गाद को बाहर निकाला गया, जिससे पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर जलस्तर में सुधार लाया जा सके। झाबुआ में 65 ग्राम पंचायतों में जनसहयोग से 330 ट्राली मिट्टी तालाबों से निकाली गई कलेक्‍टर झाबुआ श्रीमती नेहा मीणा ने बताया है कि जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों द्वारा श्रमदान कर तालाब में गाद निकासी के कार्य से की गई। जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया। अभियान अंतर्गत जिले की 65 ग्राम पंचायतों में जनसहयोग से जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य प्रारंभ किए गए हैं। अब तक लगभग 330 ट्राली मिट्टी तालाबों से निकालकर किसानों द्वारा अपने खेतों में उपयोग की जा चुकी है, जिससे एक ओर जल स्रोतों की गहराई बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर भूमि की उर्वरता में भी वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही जल गंगा संवर्धन अभियान 2025 के अंतर्गत अपूर्ण कार्यों को भी गति प्रदान की गई हैं। कुक्षी और धरमपुरी में नदी पूजन एवं स्वच्छता गतिविधियों का आयोजन धार जिले में भी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की गतिविधियां निरंतर जारी हैं। इसी क्रम में जन अभियान परिषद द्वारा विकासखंड कुक्षी और धरमपुरी में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जागरूकता का प्रसार किया गया। कुक्षी के ग्राम भत्यारी में नर्मदा की सहायक नदी ओझर पर निर्मित बांध पर "नव शक्ति से नव भक्ति" कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपस्थित जनसमूह ने जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता और उनके संवर्धन का संकल्प लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को जल की महत्ता और उसके संचयन के प्रति संवेदनशील बनाना रहा। इसी तरह विकासखंड धरमपुरी की ग्राम पंचायत डहीवर में नवांकुर सखियों द्वारा पीपल के वृक्ष का पूजन किया गया। इस अवसर पर ग्रामीणों को वृक्षों के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। "जल शक्ति से नव भक्ति" के संदेश के साथ ही प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को सुदृढ़ करने का आह्वान किया गया। कावेरी नदी तट पर किया गया श्रमदान ''जल गंगा संवर्धन अभियान'' के तहत खण्डवा जिले के ग्राम अटूटखास में कावेरी नदी के तट “जल चौपाल” आयोजित की गई। कार्यक्रम में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत अटूटखास के ग्रामीणों ने कावेरी नदी के घाटों की सफाई के लिए श्रमदान किया। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने आपसी चर्चा कर जल स्रोतों की साफ-सफाई और सोख्ता गड्ढों के निर्माण के सम्बंध में सहमति व्यक्त की, ताकि वर्षा का जल व्यर्थ न बहे, बल्कि वर्षा का जल भूजल स्तर वृद्धि में सहायक सिद्ध हो। “बुरहानपुर में जल है तो कल है” के संदेश के साथ ली गयी सामूहिक शपथ बुरहानपुर जिले में अभियान के अंतर्गत जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन एवं वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के साथ-साथ जनसहभागिता के माध्यम से इसे जनआंदोलन का रूप देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नगर पालिका परिषद नेपानगर के वार्ड क्रमांक 11 एवं 22 में विभिन्न कार्य किये जा रहे हैं। वार्ड क्रमांक 22 बीड़ रैयत स्थित अतिप्राचीन धार्मिक स्थल सीतानहानी मंदिर परिसर में साफ-सफाई एवं श्रमदान किया गया। साथ ही उपस्थितजनों को जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता एवं भू-जल पुनर्भरण के प्रति जागरूक करते हुए “जल है तो कल है” के संदेश के साथ सामूहिक शपथ दिलाई गई। अभियान के तहत किए जा रहे इन प्रयासों से न केवल जल स्रोतों का संरक्षण सुनिश्चित होगा, बल्कि नागरिकों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।