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पेट्रोल-डीजल व गैस का पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

पेट्रोल-डीजल व गैस का पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मनेन्द्रगढ़/एमसीबी प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की पर्याप्त उपलब्धता होने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और अनावश्यक भंडारण न करने की अपील की है। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य में ईंधन व गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए किसी भी तरह की घबराहट की आवश्यकता नहीं है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साफ कहा कि जमाखोरी या कालाबाजारी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। राज्यभर में 335 जगह छापेमारी की गई, जिसमें 3 हजार 841 गैस सिलेंडर जब्त किए गए और 97 एफआईआर दर्ज की गईं। साथ ही पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों की नियमित जांच के भी आदेश दिए गए हैं। सप्लाई पूरी तरह सामान्य अधिकारियों और तेल कंपनियों ने साफ किया है कि गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। गैस सिलेंडर की बुकिंग भी पहले की तरह ही चल रही है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह की भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें और सही जानकारी के लिए ऑफिशियल सोर्स का ही सहारा लें। जिला प्रशासन द्वारा पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों की नियमित निगरानी की जा रही है। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने बताया कि अवैध भंडारण पर कार्रवाई जारी है और शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। प्रशासन ने उपभोक्ताओं से निर्धारित अंतराल पर ही गैस बुकिंग करने तथा आवश्यकतानुसार ही उपयोग करने की अपील की है, ताकि सभी को समय पर सुविधा मिल सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रथम चरण का भव्य शुभारंभ

विकसित उत्तर प्रदेश की 'उड़ान' का प्रतीक है नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रथम चरण का भव्य शुभारंभ कार्गो टर्मिनल का लोकार्पण और 40 एकड़ में बनने वाली एमआरओ सुविधा का भी किया शिलान्यास पीएम ने कहा, पश्चिमी यूपी के किसानों, उद्योगों और युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर जेवर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रथम चरण का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल का लोकार्पण करने के साथ ही 40 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली अत्याधुनिक एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) सुविधा का शिलान्यास भी किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह एयरपोर्ट केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि “विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश” अभियान का नया अध्याय है। यह एयरपोर्ट उत्तर भारत के लिए लॉजिस्टिक गेटवे बनकर निवेश, व्यापार और निर्यात को नई गति देगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास को मिलेगा बड़ा बूस्ट प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एयरपोर्ट आगरा, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर सहित पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए विकास का नया द्वार खोलेगा। इससे किसानों, छोटे और लघु उद्योगों तथा युवाओं को व्यापक अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने विशेष रूप से स्थानीय किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी जमीन के योगदान से ही यह परियोजना साकार हो पाई है, जिससे अब कृषि उत्पाद वैश्विक बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। मल्टी मोडल कनेक्टिविटी और कार्गो हब से बढ़ेगा निर्यात प्रधानमंत्री ने बताया कि जेवर एयरपोर्ट मल्टी मोडल कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां सड़क, रेल और हवाई परिवहन का निर्बाध एकीकरण होगा। एयरपोर्ट का कार्गो हब प्रारंभिक चरण में 2.5 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता के साथ कार्य करेगा, जिसे भविष्य में 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने की योजना है। इससे उत्तर प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी। एमआरओ सुविधा से आत्मनिर्भर बनेगा एविएशन सेक्टर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में अब तक 85% विमान एमआरओ सेवाओं के लिए विदेश भेजे जाते थे, जिससे भारी खर्च होता था। जेवर में बनने वाली एमआरओ सुविधा देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करेगी। यूपी बना एविएशन हब प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एयरपोर्ट नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है और अब यह देश के सर्वाधिक एयरपोर्ट वाले राज्यों में शामिल हो गया है। जेवर एयरपोर्ट डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का उदाहरण है। वर्ष 2003 में इस परियोजना को मंजूरी मिली थी, लेकिन वर्षों तक यह फाइलों में अटकी रही। केंद्र और राज्य में समन्वय बनने के बाद ही इस परियोजना ने गति पकड़ी और आज यह धरातल पर उतर सकी है। हर दो मिनट में एक विमान के उड़ान भरने की क्षमता पीएम मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज सबसे अधिक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों वाले राज्यों में शामिल हो गया है। जिस उत्तर प्रदेश ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना और सांसद बनाया, आज उसी प्रदेश की पहचान एक भव्य एयरपोर्ट के साथ जुड़ गई है। यहां से न केवल दुनिया के विभिन्न हिस्सों के लिए विमान उड़ान भरेंगे, बल्कि यह विकसित उत्तर प्रदेश की नई उड़ान का प्रतीक भी बनेगा। जेवर एयरपोर्ट पूरे उत्तर भारत को दुनिया से जोड़ने का कार्य करेगा। यह एक अत्याधुनिक एयरपोर्ट होगा, जहां हर दो मिनट में एक विमान के उड़ान भरने की क्षमता विकसित की जा रही है। जनता से कराया अनोखा उद्घाटन अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक अनोखी पहल करते हुए उपस्थित लोगों से मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाकर एयरपोर्ट का उद्घाटन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट आपकी अमानत है, आपका भविष्य है, आपका पुरुषार्थ है, इसलिए इसका उद्घाटन भी आपके हाथों से होना चाहिए। इस पर पूरा परिसर “भारत माता की जय” के नारों और रोशनी से जगमगा उठा, जो इस ऐतिहासिक क्षण का प्रतीक बना।

मध्यप्रदेश में 23 सालों में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में 15,345 करोड़ का घाटा, हुआ दावा

भोपाल  मध्यप्रदेश में पिछले 23 सालों में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) के रूप में 15,345 करोड़ रुपए का नुकसान होने का दावा सामने आया है। आरोप है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की सरकारों ने केंद्र सरकार की तारीख के अनुसार महंगाई भत्ता नहीं दिया, जिससे लाखों कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस मुद्दे में पूर्व मुख्यमंत्रियों दिग्विजय सिंह, कमल नाथ, उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामला सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। पेंशनर्स और परिवार पेंशनधारकों को भी समय पर महंगाई राहत (DR) नहीं मिल रही। वर्तमान में मोहन यादव सरकार पर भी आरोप है कि पेंशनर्स को जनवरी 2026 से राहत दी गई, जबकि यह जुलाई 2025 से मिलनी चाहिए थी। पांचवें-छठवें वेतनमान में सबसे ज्यादा नुकसान बताया गया है कि पांचवें और छठवें वेतनमान के दौरान करीब 11,970 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता समय पर नहीं दिया गया। हालांकि भत्ता बाद में दिया गया, लेकिन केंद्र की तय तारीख से देरी के कारण कर्मचारियों को एरियर का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। सातवें वेतनमान में 27 महीने का DA रोका सातवें वेतनमान में जुलाई 2019 से सितंबर 2021 तक 27 महीने का 5% महंगाई भत्ता नहीं दिया गया। इस अवधि में राज्य में पहले कमल नाथ की सरकार थी, बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा सरकार आई, लेकिन भत्ता जारी नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों को करीब 3,375 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। दिग्विजय सरकार में 2 साल DA पूरी तरह बंद जनवरी 2002 से दिसंबर 2003 तक, जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे, उस दौरान करीब 24 महीने तक महंगाई भत्ता नहीं दिया गया। इससे कर्मचारियों को लगभग 1,260 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। भाजपा सरकार में भी देरी से मिला लाभ दिसंबर 2003 के बाद उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में DA दिया गया, लेकिन केंद्र की दर और तारीख से नहीं। इससे छठवें वेतनमान में करीब 10,710 करोड़ रुपए का नुकसान बताया गया है। कर्मचारी संगठन का आरोप मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी के मुताबिक, “कांग्रेस और भाजपा—दोनों ही सरकारों ने केंद्र के बराबर समय पर DA नहीं दिया। इसका सीधा असर कर्मचारियों की जेब पर पड़ा है और लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।”

ईरान जंग को लेकर एक्सपर्ट की चेतावनी, कच्चा तेल $200 बैरल तक पहुंच सकता है

 नई दिल्‍ली ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई ने पूरी दुनिया को महंगाई के खतरे में डाल दिया है. हर देश महंगाई के खतरे से बचने के लिए छोटे-मोटे कदम उठा रहा है, लेकिन सवाल है कि ये कब तक चलेगा? अगर वॉर ज्‍यादा दिनों तक चलता है तो दुनिया में महंगाई बढ़ना और ग्‍लोबल इकोनॉमी में संकट में आ सकती है. साथ ही तेल के दाम में रिकॉर्ड उछाल आ सकती है, जिससे हर छोटी बड़ी चीजें के दाम में बड़ी बढ़ोतरी हो जाएगी।  ब्रोकरेज फर्म Macquarie ने  भी इसी चीज को लेकर चेतावनी दी है. उनका कहना है कि अगर ईरान से जुड़ा मौजूदा संघर्ष जून तक खिंचता है और स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहता है तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ सकती हैं और इसकी 40% संभावना है।  फर्म ने कहा कि दूसरी तिमाही तक जारी रहने वाला संघर्ष तेल की वास्तविक कीमतों को ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर पहुंचा सकता है. हालांकि, ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने 60 फीसदी की ज्‍यादा आशावादी संभावना जताई है, जिसके तहत इस महीने के अंत तक संघर्ष में कमी आ सकती है।  यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ब्रेंट क्रूड की कीमतों में सालों में सबसे मजबूत मंथली उछाल देखी गई है, जिसका मुख्‍य कारण अमेर‍िका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव हैं. ईरान द्वारा स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर देने से आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुई है और एक गहरे एनर्जी संकट की आशंका बढ़ गई है।  तेल क्षेत्रों में संकट बढ़ी  एक महीने से चल रहे इस वॉर ने प्रमुख तेल उत्‍पादक क्षेत्रों में हलचल तेज कर दी है. एशिया को तेल की आपूर्ति करने वाले एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍से को कंट्रोल करने वाले स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के कंट्रोल ने एनर्जी मार्केट में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है. ब्रोकरेज ने अपनी नोट में कहा कि अगर यह रास्‍ता लंबे समय तक बंद रहता है तो कीमतों में इतनी तेजी होनी चाहिए कि ग्‍लोबल तेल डिमांड में भारी गिरावट आ आ जाए. हालांकि यह रास्‍ता खुलने का संकेत मिला है।  ब्रेंट के दाम फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार  27 मार्च को दो चीनी जहाजों को होर्मुज से गुजरने से रोके जाने के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे यह संकेत मिला कि ईरान इस खास समुद्री मार्ग से आने-जाने पर प्रतिबंध लगाना जारी रखे हुए है. मई डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 2.82% बढ़कर 111.06 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट फ्यूचर 2.68% बढ़कर 97.01 डॉलर हो गया।  समुद्री यातायात पर नज़र रखने वाली कंपनी मरीनट्रैफिक के अनुसार, चाइना ओशन शिपिंग कंपनी के मालिकाना हक वाले जहाजों को वापस भेज दिया गया. वॉर शुरू होने के बाद से किसी बड़े कंटेनर वाहक द्वारा इस मार्ग को पार करने का यह पहला प्रयास था. क्षमता के हिसाब से COSCO दुनिया की चौथी सबसे बड़ी शिपिंग लाइन है।  ट्रंप का बड़ा ऐलान  वहीं डोनाल्‍ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज फिर से खोलने के लिए 10 दिन का समय देने का फैसला किया है. साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा है कि वे 10 दिनों तक ईरान के एनर्जी इंफ्रा पर हमला नहीं करेंगे. सोशल मीडिया पोस्‍ट में ट्रंप ने कहा कि ईरान से बातचीत अभी अच्‍छी चल रही है. इस कदम के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह 6 अप्रैल तक ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोक देंगे। 

भारत के लिए होर्मुज की जरूरत नहीं! अर्जेंटीना के बाद अब एक और मित्र भेजेगा LNG-LPG के जहाज

मुंबई   ईरान युद्ध के लंबा खिंचने की पूरी आशंका है. अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान पर अटैक किया था, तब दावा किया गया था कि यह जंग कुछ ही हफ्तों में समाप्‍त हो जाएगी. हालांकि, ऐसा हुआ नहीं. ईरान की ओर से अभी तक ऐसा पलटवार किया गया है, जिसकी आशंका अमेरिका-इजरायल को तो छोड़िए पूरी दुनिया को नहीं थी. इसका व्‍यापक असर देखने को मिल रहा है. खासकर एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज स्‍ट्रेट के बाधित होने से पेट्रोल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुई है. ऐसे में तमाम देश अब होर्मुज स्‍ट्रेट के साथ ही तेल और गैस से संपन्‍न खाड़ी के देशों का विकल्‍प तलाशने लगे हैं. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटिना भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सामने आया है. अब नई दिल्‍ली ने अपने दशकों पुराने परंपरागत मित्र देश रूस से LNG और LPG सप्‍लाई को लेकर बातचीत की है. रिपोर्ट की मानें तो भारत और रूस LNG की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार हैं. ऐसे में तमाम संकट के बावजूद भारत के घरों में चूल्‍हे जलते रहेंगे, फिर होर्मुज जलडमरूमध्‍य लंबे समय के लिए बाधित ही क्‍यों न रहे।  रूस की न्‍यूज एजेंसी TASS ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि नई दिल्‍ली और मॉस्‍को LNG की सप्‍लाई बढ़ाने को तैयार हैं. रिपोर्ट की मानें तो ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारत और रूस के बीच LNG और LPG की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर बातचीत तेज हो गई है. रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, दोनों देशों ने LNG की सप्लाई बढ़ाने की तत्परता जताई है. साथ ही भारत को LPG की आपूर्ति की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है. तेल और गैस क्षेत्र के एक सूत्र ने बताया कि भारत और रूस के बीच हुई हालिया चर्चाओं में ऊर्जा सहयोग को विस्तार देने पर सहमति बनी है. सूत्र के मुताबिक, दोनों पक्षों ने LNG की आपूर्ति बढ़ाने की इच्छा जताई है और भारत में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाली LPG की सप्लाई पर भी चर्चा की है. भारत में घरेलू ईंधन के रूप में LPG की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में रूस एक अहम आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकता है।  ऑप्‍शन की तलाश विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में है. ऐसे में रूस के साथ बढ़ता ऊर्जा सहयोग भारत की रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप माना जा रहा है. हाल के महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध और मजबूत हुए हैं. सूत्र ने यह भी संकेत दिया कि इस दिशा में आगे की बातचीत में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी. उन्‍होंने बताया कि व्यापार जगत की भागीदारी के साथ वार्ता जारी रहने की उम्मीद है. इससे दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं. गौरतलब है कि भारत पहले ही अर्जेंटीना समेत अन्य देशों से LNG आयात के विकल्प तलाश रहा है. ऐसे में रूस के साथ यह संभावित समझौता भारत के ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की रणनीति को और मजबूती देगा. आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।  संकट में सामने आया अर्जेंटिना पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत में उत्पन्न LPG की कथित कमी के बीच करीब 20,000 किलोमीटर दूर स्थित दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना ने भारत की मदद के लिए हाथ बढ़ाया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है, क्योंकि देश के लगभग 60 प्रतिशत LPG आयात इसी मार्ग से होते हैं. समुद्री यातायात बाधित होने के चलते भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में तेजी से कदम उठाने पड़े हैं. इसी के तहत अर्जेंटीना एक अहम साझेदार के रूप में उभरा है. भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मैरियानो ऑगस्‍टीन कॉसिनो (Mariano Agustin Cousino) ने कहा कि उनका देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है. उन्होंने बताया कि अर्जेंटीना के पास पर्याप्त गैस भंडार हैं और दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां इसे और गति दे सकती हैं।  खूब बढ़ी LPG की सप्‍लाई साल 2026 की पहली तिमाही में ही अर्जेंटीना ने भारत को 50,000 टन LPG निर्यात किया, जो पूरे 2025 में भेजे गए 22,000 टन से दोगुने से भी अधिक है. इनमें से लगभग 39,000 टन आपूर्ति अर्जेंटीना के बहिया ब्लांका पोर्ट से भारत पहुंच चुकी थी, जबकि 5 मार्च को अतिरिक्त 11,000 टन भेजा गया. गौरतलब है कि 2024 से पहले अर्जेंटीना ने भारत को LPG की आपूर्ति नहीं की थी, लेकिन पिछले दो वर्षों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत का अर्जेंटीना जैसे दूरस्थ देशों के साथ सहयोग बढ़ाना उसकी व्यावहारिक और दूरदर्शी ऊर्जा नीति को दर्शाता है. यह साझेदारी न केवल मौजूदा संकट का समाधान है, बल्कि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत रणनीतिक संबंध की नींव भी रखती है। 

मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में ऐतिहासिक जवारा जुलूस निकाला गया

मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में ऐतिहासिक जवारा जुलूस निकाला गया  उमरिया उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत मां बिरासिनी धाम बिलासपुर में हजारों की संख्या में भव्य जवारा जुलूस निकाला गया।जिसने पूरे गांव को आस्था और भक्ति के रंग में रंग दिया।यह आयोजन इस वर्ष ऐतिहासिक रूप में देखने को मिला।जहां श्रद्धा का जन सैलाब उमर पड़ा। जुलूस में शामिल हजारों जवारे ने सड़कों पर हरियाली की मानव चादर बिछा दी।गांव की गलियां जयकारों से गूंज उठी।और हर ओर भक्ति का अद्भुत माहौल नजर आया।दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने इस भव्य दिव्य दृष्टि को देखने के लिए भारी संख्या में सहभागिता की। जवारा जुलूस मां बिरासिनी मंदिर से महामाया चौराहा बिलासपुर बस स्टैंड से होते हुए गांव की गलियों से होते हुए बखरी पहुंची।वही जगह-जगह पर नगर वासियों एवं भक्तों के द्वारा ठंडा पानी सरवत वितरण किया गया।अपने सिर पर जवारों को धारण किए बच्चे महिलाएं और युवा नंगे पांव पूरे गांव में घूमते नजर आए। जो आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों तक मां की उपासना एवं कन्या पूजन के पश्चात आज मां के दरबार में यह ऐतिहासिक जवारा जुलूस निकाला गया। मंदिर में लगभग 2200 जवारे कलश 151 अखंड ज्योत तेल की और 51 घी की दीपक से पूरा मंदिर परिसर जगमगाया हुआ था। जिससे पूरे गांव को भक्ति में बना दिया नंगे पैर चल रहे हैं श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए ग्रामवासी अपने घरों के सामने पानी डालते हुए नजर आए। जिससे जुलूस में शामिल लोगों को ठंडक मिल सके।मां काली के नेतृत्व में निकाली गई अनेक भाव इस जुलूस का मुख्य आकर्षण रही।झांकियां की भव्यता और धार्मिक भावनाओं ने श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। जुलूस के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। महिलाओं और बुजुर्गों सहित हर वर्ग के लोग ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।और आस्था का अद्भुत परिचय दिया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रही। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया था। जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।    

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ का पीएम को पत्र, अखाड़ों की परंपरा समाप्त करने की मांग

उज्जैन सनातन हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए आद्य शंकराचार्य ने ढाई हजार साल पहले अखाड़ों की स्थापना की थी। तब से लेकर आज तक तेरह अखाड़े अस्तित्व में है, जिन्हें धर्म की सेना कहा जाता है। हालांकि साधु संत अब धर्म से विलग होकर पद,प्रतिष्ठा व ऐश्वर्य की अंधी दौड़ में लग गए हैं। वैसे भी देश व धर्म की रक्षा के लिए भारतीय सेनाएं हैं, ऐसे में अखाड़ों की परंपरा को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं.महेश पुजारी ने यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में कही है। आगे लिखा हमारे सनातन धर्म में ऋषि, मुनि परंपरा रही है ना कि अखाड़ों की परंपरा। शंकराचार्य ने जब अखाड़ों की स्थापना की थी उस समय देश की परिस्थितयां अलग थी। वर्तमान में देश, धर्म एवं सनातन की रक्षा के लिए भारतीय सेना है ही। पद के लिए हो रही लड़ाई वर्तमान में अखाड़े जप, तप, अनुष्ठान की बजाय व्यवसायिक केंद्र बन चुके हैं और साधु समाज ऐश्वर्य की ज़िंदगी व्यतीत कर पद और प्रतिष्ठा के लिए लड़ रहा है। आए दिन साधु संतों के बीच विवाद के मामले सार्वजनिक हो रहे हैं। यदि साधु समाज आपस में पद, प्रतिष्ठा,संपत्ति के लिए लड़ेंगे तो सनातन धर्म की रक्षा कौन करेगा। साधु संतों ने धर्म मार्ग छोड़ दिया यह देखकर आम हिन्दू धर्मावलंबी व्यथित है, इसलिए अब अखाड़ों की परंपरा को समाप्त कर देना चाहिए।  

टॉक्सिक में यश के साथ कियारा की जोड़ी, डायरेक्टर ने बताया क्यों किया गया चुनाव

मुंबई  बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी इन दिनों टॉक ऑफ द टाउन बन चुकी हैं. हाल ही में एक इवेंट के दौरान उनका नया लुक वायरल हुआ है. कियारा अपनी बेटी सरायाह मल्होत्रा की मां बनने के बाद, एक बार फिर छा गई हैं. एक्ट्रेस जल्द 'टॉक्सिक' से भी बड़े पर्दे पर नजर आने वाली हैं, जिसमें वो 'केजीएफ' वाले यश संग रोमांस करेंगी।  कियारा ने पहली बार एक कन्नड़ फिल्म में काम किया है, जो इंग्लिश में भी साथ शूट हुई है. ये एक पैन-इंडिया फिल्म है जो देशभर में अलग-अलग भाषाओं में रिलीज होगी. कियारा को भी इस फिल्म से काफी फायदा मिलने वाला है. हाल ही में 'टॉक्सिक' की डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने अपनी फिल्म में एक्ट्रेस को कास्ट करने पर बात की।  कियारा में क्या है खासियत? गीतू मोहनदास ने गलाटा प्लस को बताया कि कियारा उनकी फिल्म के लिए पहली और आखिरी पसंद थीं. उन्हें एक्ट्रेस की स्क्रीन प्रेजेंस काफी लुभाती है. कियारा बड़े पर्दे पर उन्हें एक इंसान का एहसास दिलाती हैं. गीतू का कहना है, 'कियारा ने जो किरदार निभाया है नादिया, वो एक साथ नाजुक और बहुत ताकतवर दोनों का एहसास लेकर चलती है. इसलिए शुरू से ही वो मेरी पहली और आखिरी पसंद थीं. उनकी जो स्क्रीन प्रेजेंस है, वो मुझे बहुत इंसानी और सच्ची लगती है. कभी-कभी सिनेमा लॉजिक से नहीं, बल्कि बस एक फीलिंग से शुरू होता है. और कियारा को कास्ट करना ठीक वैसी ही फीलिंग थी।  गीतू ने आगे कियारा के डेडिकेशन को भी सराहा. उनका कहना है कि एक्ट्रेस अपने किरदार में काफी पहले ढल जाती थीं, जो तारीफ के काबिल बात है. डायरेक्टर ने कहा, 'उनकी मेहनत सिर्फ दिखावा नहीं होती थी. वो शांत, डिसिप्लिन और दिल से सच्ची हैं. वो सिर्फ डायरेक्शन को नहीं सुनती थीं, बल्कि किरदार के इमोशन्स को बनाने में खुद भी साथ देती थीं. कैमरा शुरू होने से बहुत पहले ही वो उस किरदार के साथ अपने मन में रह चुकी होती हैं. लेकिन जो चीज उन्हें सबसे अलग बनाती है, वो है उनकी सीखने की चाह. उसकी वजह से फिल्म बनाना एक तरफा डायरेक्शन नहीं, बल्कि दोनों तरफ की बातचीत जैसा हो जाता है।  फिल्म 'टॉक्सिक' में कियारा के अलावा हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, नयनतारा और रुक्मिणी वसंत जैसी एक्ट्रेसेज भी शामिल हैं. ये फिल्म 4 जून 2026 को वर्ल्डवाइड थिएटर्स में रिलीज होने वाली है। 

श्रीधाम एक्सप्रेस को एलएचबी रैक से मिलेगा नया रिवamp, स्पीड बढ़ने के साथ यात्रियों को मिलेगी और सुविधा

जबलपुर  जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन के बीच संचालित होने वाली श्रीधाम एक्सप्रेस की यात्रा जल्द ही और आरामदायक बनेगी। ट्रेन को 30 मई से लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) रैक से दौड़ाने का निर्णय किया गया है। एलएचबी कोच पारंपरिक (आईसीएफ) कोचों की तुलना में अधिक सुविधाजनक एवं सुरक्षित होते हैं। ये वजन में भी हल्के होते हैं। उच्च गति पर संचालन की क्षमता होती है। एलएचबी कोच की नई संरचना और स्वरूप यात्रियों को अधिक सुखद और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करते हैं। नए रेक से ट्रेन की गति औसतन 20 किलोमीटर प्रतिघंटा तक बढ़ेगी। चाल में वृद्धि की संभावना को ध्यान में रखकर ट्रेन को दिल्ली पहुंचाने की भी मंशा है। दिल्ली पहुंचाने में लेती है सबसे ज्यादा समय जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन के बीच एक साप्ताहिक और चार ट्रेन प्रतिदिन संचालित होती हैं। इनमें दिल्ली पहुंचाने में सबसे ज्यादा समय (लगभग 18.30 घंटा) श्रीधाम एक्सप्रेस लेती है। यह ट्रेन इटारसी-भोपाल-बीना के रास्ते संचालित होने के कारण कटनी-सागर-बीना मार्ग के अपेक्षाकृत लगभग 130 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करती है। जबलपुर से दिल्ली के बीच सीधे चलने वाली अन्य ट्रेनों के अपेक्षाकृत यात्रा में औसतन साढ़े पांच से साढ़े छह घंटे का अतिरिक्त समय लगाती है। जिसके चलते ट्रेन दोपहर में दिल्ली पहुंचती है। सुपरफास्ट धीमी चाल यात्रियों को परेशान करती है। अब 22 कोच होंगे, स्लीपर के दो कोच घटेंगे श्रीधाम एक्सप्रेस (12192/91) का संचालन पश्चिम मध्य रेल करता है। वर्तमान में ट्रेन का 24 कोच का आइसीएफ रैक है। इसे एलएचबी रैक से परिवर्तित करने के साथ ही ट्रेन का कोच कांबिनेशन बदल जाएगा। थर्ड एसी के एक कोच की एसी इकोनामी कोच लेगा। दो स्लीपर कोच भी कम होंगे। 22 कोच के एलएचबी रेक में एक वातानुकूलित प्रथम श्रेणी, दो वातानुकूलित द्वितीय, पांच वातानुकूलित तृतीय, एक वातानुकूलित तृतीय इकोनॉमी, सात स्लीपर, चार सामान्य श्रेणी के कोच, एक एसएलआरडी एवं एक जनरेटर कार रहेंगे।

1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम, डिजिटल पेमेंट के लिए करना होगा यह काम

मुंबई  मॉल या स्थानीय दुकान पर बहुत से लोग पेमेंट करने के लिए डिजिटल ट्रांजैक्शन या UPI का सहारा लेते हैं. अब डिजिटल ट्रांजैक्शन को लेकर एक नियम बदलने जा रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आदेश के बाद बैंकों को टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) लागू करना होगा. सितंबर 2025 में जारी किए गए आदेश में 1 अप्रैल 2026 डेडलाइन लगी रखी है।  1 अप्रैल 2026 के बाद से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए सिर्फ एक वन टाइम पासवर्ड (OTP) पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा. सभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए कम से कम दो अलग और इंडिपेंडेंट वेरिफिकेशन फैक्टर से वेरिफाई करना होगा. क्रेडिट कार्ड में पहले से टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन पहले से लागू है. ये जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली है।  ये होंगे ऑथेंटिकेशन के तरीके      पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (PIN)     बायोमेट्रिक जैसे फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन     बैंकिंग ऐप के अंदर जनरेट होने वाले वर्चुअल टोकन     SMS आधारित OTP  इन्हें उदाहरण के रूप में समझें तो पेमेंट के लिए दो काम करने पड़ेंगे.     OTP + PIN (स्टैटिक)     बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन + डिवाइस बाइंडिंग     टोकन आधारित ऑथेंटिकेशन + पासवर्ड जैसे किसी दुकान से सामान खरीदा और पेमेंट के लिए उसको अपना डेबिट कार्ड दिया. इसके बाद जैसे ही सेल्स पर्सन पॉइंट ऑफ सेल (POS) से स्वाइप करेगा, उसके बाद यूजर्स को पिन एंटर करने के साथ अब OTP भी देना होगा. अब ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को दो तरह से ऑथेंटिकेट करना होगा।  अब 1 अप्रैल के बाद से हर एक ट्रांजैक्शन के लिए कम से कम दो तरीकों से ऑथेंटिकेट करना होगा. ऐसे में साइबर साइबर ठगों पर लगाम लगेगी और अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन पर लगाम लगेगी।  साइबर ठगों पर लगाम लगाने की कोशिश  साइबर ठगी के ऐसे बहुत से केस हैं, जहां विक्टिम के पर्सनल मोबाइल पर आने वाले बैंक ओटीपी को साइबर ठगों ने चालाकी से हासिल कर लिया. फिर उनके बैंक खाते को खाली कर डाला. फिशिंग स्कैम, सिम स्कैम और बहुत से स्कैम हाल के दिनों में बढ़े हैं।  इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर भी लागू होगा नियम RBI के दिशा-निर्देश में यह  साफ किया गया है कि 1 अक्टूबर 2026 तक इंटरनेशनल कार्ड-नॉट-प्रेजेंट ट्रांजैक्शन पर भी इसी तरह के ऑथेंटिकेशन नियम लागू किए जाएंगे।