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कोमालिका बारी का दमदार प्रदर्शन: एशियाई खेलों के चयन पर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में मिला आत्मविश्वास

एशियाई खेलों के चयन पर नजर, तीरंदाज कोमालिका बारी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में दमदार प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त कोमालिका विश्व कैडेट और विश्व जूनियर खिताब जीतने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता  ने बेटी को तीरंदाजी अपनाने के लिए किया प्रेरित कोमालिका का मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से जनजातीय क्षेत्रों से कई प्रतिभाएं आ सकती हैं सामने रायपुर साल 2021 में जब कोमालिका बारी ने अपनी राज्य की साथी दीपिका कुमारी की बराबरी करते हुए विश्व कैडेट और विश्व जूनियर दोनों खिताब जीतने वाली भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज बनने का गौरव हासिल किया, तब जमशेदपुर की इस खिलाड़ी से काफी सारी उम्मीदें जुड़ गई थीं।           हालांकि, जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद सीनियर सर्किट में उनका सफर उतना आसान नहीं रहा। कोमालिका एशियाई खेलों और 2028 ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंट्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी तक वह पूरी तरह अपनी जगह पक्की नहीं कर पाई हैं।            अब 2026 एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में चयन की दौड़ अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, ऐसे में कोमालिका ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। पुणे में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में वह अपनी तकनीक को निखारने के साथ-साथ मानसिक मजबूती और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने पर भी खास ध्यान दे रही हैं।          कोमालिका ने साई मीडिया को कहा कि, “मैं फिलहाल टॉप-16 में हूं और राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हूं। एशियाई खेलों के चयन को लेकर मैं गंभीरता से तैयारी कर रही हूं। साथ ही, मैं ज्यादा से ज्यादा प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अनुभव हासिल करना चाहती हूं, जबकि अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी बनाए रख रही हूं।”             झारखंड की यह प्रतिभाशाली तीरंदाज यहां जारी पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में तीरंदाजी प्रतियोगिता की प्रमुख आकर्षण हैं। कोमालिका ने आगे कहा कि, “मेरा अंतिम लक्ष्य (2028) ओलंपिक है। इस समय मेरा प्रशिक्षण काफी अच्छा चल रहा है और मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं। सबसे ज्यादा ध्यान मानसिक रूप से मजबूत रहने पर है, क्योंकि प्रदर्शन में इसकी बहुत बड़ी भूमिका होती है।” वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहती हैं, “मेरी यात्रा ने मुझे सिखाया है कि उतार- चढ़ाव आते रहेंगे, लेकिन कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर आगे बढ़ा जा सकता है।”  उन्होंने यह भी बताया कि मैच अनुभव हासिल करने के अलावा वह अधिक से अधिक जनजातीय बच्चों को इस खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।               कोमालिका ने 12 साल की उम्र में पहली बार धनुष-बाण उठाया। उन्हें उनकी मां, जो एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, का पूरा समर्थन मिला। उनकी मां ही उन्हें बिरसानगर में स्थानीय तीरंदाजी कोच के पास लेकर गईं, जहां से उनके करियर की शुरुआत हुई। साल 2012 में कोमालिका ने अपने शुरुआती संघर्षों का सामना करना शुरू किया। शुरुआती दिनों में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे अभ्यास के लिए धनुष खरीद सकें, इसलिए उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान बांस से बने अस्थायी धनुष का सहारा लिया।           प्रशिक्षण शुरू करने के चार साल बाद कोमालिका ने जमशेदपुर स्थित टाटा आर्चरी अकादमी में प्रवेश लिया और कोच धर्मेंद्र तिवारी तथा पूर्णिमा महतो के मार्गदर्शन में अभ्यास शुरू किया। लेकिन देश की इस प्रतिष्ठित अकादमी तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें अपने बिरसानगर स्थित घर से रोजाना 18 किलोमीटर साइकिल चलाकर वहां पहुंचना पड़ता था। वह कहती हैं, “जब मैंने तीरंदाजी शुरू की थी, तब मेरे कई सीनियर खिलाड़ी थे जिन्हें मैं रोल मॉडल मानती थी। हमें उन्हें आमतौर पर सिर्फ प्रतियोगिताओं के दौरान देखने का मौका मिलता था और इससे हमें काफी प्रेरणा मिलती थी।” उन्होंने आगे कहा कि , “यही एक बड़ा कारण है कि मैं खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में हिस्सा ले रही हूं। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे खेलते हुए देखें और आगे आकर भाग लेने के लिए प्रेरित हों। अभी भी कई लोग भाग नहीं ले रहे हैं, लेकिन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स एक बहुत अच्छा मंच है, जो प्रेरणा और अवसर दोनों प्रदान करता है।”             24 वर्षीय कोमालिका रायपुर में जारी प्रतियोगिता में व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में हिस्सा ले रही है। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2020 में व्यक्तिगत रजत पदक जीत चुकी कोमालिका इस मंच के महत्व को भली-भांति समझती हैं और मानती हैं कि ट्राइबल गेम्स जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के विकास को नई गति दे सकते हैं। वे कहती हैं कि, “ट्राइबल गेम्स पूरे खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने की क्षमता रखते हैं, खासकर जनजातीय खिलाड़ियों के लिए। खेलो इंडिया द्वारा उठाया गया यह कदम और इन खेलों का आयोजन बेहद प्रभावशाली है। आमतौर पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं एक ही खेल पर केंद्रित होती हैं, लेकिन यहां कई खेल एक साथ आयोजित किए जा रहे हैं, ठीक राष्ट्रीय खेलों की तरह।”

सीएम नायब सिंह सैनी की बड़ी सौगात गुरुग्राम के 50 से अधिक सेक्टरों में बनेंगी 24 मीटर चौड़ी सड़कें

गुरुग्राम गुरुग्राम के 50 से अधिक सेक्टरों में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए सरकार ने 24 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण की बड़ी योजना तैयार की है। इस परियोजना के लिए कुल 1836 एकड़ जमीन की जरूरत है जिसमें से करीब 1158 एकड़ निजी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में बजट में इसकी घोषणा की थी जिसका खर्च बिल्डरों से वसूला जाएगा। मौजूदा वक्त में संकरे रास्तों के कारण करीब 300 सोसाइटियों में रहने वाले एक लाख से अधिक परिवारों को आवाजाही की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 1158 एकड़ जमीन अधिग्रहण की तैयारी अधिकारियों ने बताया कि गुरुग्राम में सेक्टर-58 से 115 तक यानी 57 सेक्टरों में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण के लिए 1158 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस सिलसिले में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के स्थानीय अधिकारियों की तरफ से जल्द जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार कर निदेशक कार्यालय को भेजा जाएगा। 1836 एकड़ जमीन की जरूरत शहरी विकास के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के डीटीपी प्रवीण कुमार को सड़कों के निर्माण के लिए आवश्यक जमीन की जानकारी तैयार करने के निर्देश जारी किए थे। डीटीपी ने ढेसी को सौंपी रिपोर्ट में बताया है कि 1836 एकड़ जमीन चाहिए। इसमें से 574 एकड़ जमीन बिल्डरों से मिल जाएगी। यह जमीन रिहायशी और व्यावसायिक कॉलोनी का लाइसेंस जारी करने में शामिल है। टीडीआर पॉलिसी के तहत मिलेगी जमीन 104 एकड़ जमीन टीडीआर (ट्रांसफरेबल डिवेलपमेंट राइट्स) पॉलिसी के तहत मिल जाएगी। बची 1158 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना होगा। इसमें से अधिकांश जमीन निजी लोगों के नाम पर है। बता दें कि गत दो मार्च को विधानसभा में प्रस्तुत बजट में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा था कि गुरुग्राम-मानेसर विकास योजना में शामिल 24 मीटर सड़कों के निर्माण के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। अधिग्रहण की राशि को बिल्डरों से वसूल किया जाएगा। संकरा रास्ता होने से परेशानी नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने गुरुग्राम-मानेसर विकास योजना में 24 मीटर सड़कों का निर्माण तो प्रस्तावित कर दिया, लेकिन इन सड़कों के निर्माण की दिशा में कदम नहीं उठाया। राजस्व रास्ते पर करीब 650 रिहायशी और व्यवसायिक सोसाइटियां विकसित करने को लेकर लाइसेंस जारी कर दिए। करीब 300 रिहायशी सोसाइटियों में एक लाख से अधिक परिवारों ने रहना शुरू कर दिया है। संकरा रास्ता होने से लोगों को परेशानी हो रही है।

जालंधर समेत पूरे पंजाब में गर्मी से राहत अगले दो दिनों में गिरेगा पारा

  जालंधर। पंजाब में लगातार मौसम बदल रहा है। आने वाले कुछ दिनों तक मौसम ऐसे ही मेहरबान रहने वाला है, जिससे लोगों से गर्मी से बड़ी निजात मिलने वाली है। रुक रुक कर हो रही बारिश के साथ अब 3 अप्रैल तक मौसम ऐसा ही रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 30 मार्च को कई जगह हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 31 मार्च से 3 अप्रैल के बीच कुछ स्थानों पर बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद भी मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। तापमान अगले दो दिनों में 2 से 4 डिग्री तक गिर सकता है। बारिश का असर कई जिलों में देखने में आ सकता है। आने वाले दिनों का पूर्वानुमान आने वाले दिनों में भी पंजाब का मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है। 31 मार्च को कई जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। वहीं 1 अप्रैल को भी राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों को सावधान रहने और खराब मौसम के दौरान जरूरी एहतियात बरतने की सलाह दी है। आपको बता दें कि हालांकि बारिश के कारण अब लोगों को धूप से राहत मिल गई है।  

महावीर जयंती की सरकारी छुट्टी घोषित, पंजाब में शैक्षणिक संस्थान और ऑफिस बंद

चंडीगढ़. पंजाब में मंगलवार को सरकारी छुट्टी रहने वाली है। इसके चलते पूरे राज्य में स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। दरअसल, राज्य सरकार ने मंगलवार, 31 मार्च को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। यह फैसला महावीर जयंती के पावन अवसर को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार 31 मार्च को गजटेड छुट्टी घोषित की गई है। राज्य सरकार ने इस संबंध में आधिकारिक तौर पर ऐलान भी किया है, ताकि आम जनता को सरकारी कामकाज और शैक्षणिक संस्थानों के बंद रहने की जानकारी पहले से मिल सके। भगवान महावीर का जन्म यह दिन जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म लगभग 6वीं सदी ईसा पूर्व में कुंडलपुर (वैशाली) में हुआ था। भगवान महावीर ने दुनिया को “जियो और जीने दो” का सिद्धांत दिया। उनका सबसे बड़ा ऐतिहासिक योगदान अहिंसा के प्रचार में है, जिसका मतलब है किसी भी जीव को मन, वचन या कर्म से कष्ट न पहुंचाना। उन्होंने उस समय के समाज में प्रचलित जात-पात और कर्मकांडों का विरोध किया और सभी जीवों की समानता पर जोर दिया। क्या-क्या रहेगा बंद और किस पर पड़ेगा असर 31 मार्च को पंजाब में सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे। इसका असर शिक्षा और प्रशासन से जुड़े कामों पर साफ तौर पर दिखाई देगा। अगर आपको किसी सरकारी सेवा या संस्थान से जुड़ा काम करना है, तो बेहतर होगा कि उसे इस तारीख से पहले ही पूरा कर लें। इससे किसी भी तरह की देरी या परेशानी से बचा जा सकता है। पहले भी मिली थी छुट्टी, अब फिर एक और मौका मार्च महीने में इससे पहले 26 मार्च को रामनवमी के अवसर पर भी राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था। यानी महीने के अंत तक लोगों को एक से ज्यादा छुट्टियां मिल चुकी हैं। लगातार मिल रही इन छुट्टियों के कारण लोगों को थोड़ा ब्रेक लेने और परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा मौका मिल रहा है।

संपत्ति कर जमा करने का आखिरी मौका, चूक गए तो 17% अधिभार के साथ होगी सख्त कार्रवाई

रायपुर. रायपुर नगर पालिक निगम के राजस्व विभाग द्वारा शहर में लगातार अभियान चलाकर सभी 70 वार्डों के बड़े बकायादारों को चेतावनी दी जा रही है। निगम ने स्पष्ट किया है कि यदि बकाया राशि समय पर जमा नहीं की गई, तो संबंधित बकायादारों पर नियमानुसार कुर्की और सीलबंदी जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। निगम प्रशासन ने अपील की है कि कार्रवाई की परेशानी और तनाव से बचने के लिए संबंधित सभी बड़े बकायादार नगर पालिक निगम रायपुर के राजस्व विभाग को तत्काल अपना सम्पूर्ण बकाया अदा कर दें। सभी सम्पत्तिकरदाता नागरिक अपना देय सम्पत्तिकर तत्काल नगर निगम रायपुर के राजस्व विभाग को अदा करें और अंतिम नियत तिथि दिनांक 31 मार्च 2026 तक करों की अदायगी नहीं किए जाने की स्थिति में नियमानुसार 17 प्रतिशत अधिभार सहित बकाया राजस्व की वसूली की सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिससे मानसिक परेशानी और तनाव से बचा जा सके। नगर पालिक निगम रायपुर के समस्त 10 जोन कार्यालयों के राजस्व विभाग और समस्त सदर काउंटर अंतिम देय तिथि 31 मार्च 2026 तक, महावीर जयंती के शासकीय अवकाश दिवस सहित, आम कार्य दिवस की तरह जनहित में जनसुविधा के लिए राजस्व वसूली के लिए सामान्य कार्यालयीन दिवस की भांति खुले रहेंगे। सभी सम्पत्तिकरदाता नागरिक जोन कार्यालय जाकर अपना देय सम्पत्तिकर तत्काल अदा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त नगर पालिक निगम रायपुर के ‘मोर रायपुर’ ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड करके तथा ऑनलाइन लिंक https://mcraipur.in/ के माध्यम से ऑनलाइन सम्पत्तिकर भुगतान की सुविधा निरंतर उपलब्ध रहेगी। इसके माध्यम से कोई भी सम्पत्तिकरदाता नागरिक अपने सम्पत्तिकर सहित समस्त निगम करों का भुगतान घर बैठे एक क्लिक पर आसानी से नगर पालिक निगम रायपुर के राजस्व विभाग को कर सकता है। रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र के सभी 10 जोनों के समस्त 70 वार्डों के रहवासी सम्पत्तिकरदाता नागरिकों को इस सहज और सरल तरीके से प्राप्त हो रही प्रशासनिक जनसुविधा का अधिकाधिक लाभ ऑनलाइन सम्पत्तिकर भुगतान करके अवश्य उठाना चाहिए।

जियोस्टार ने बांग्लादेशी ब्रॉडकास्टर के साथ आईपीएल एग्रीमेंट किया खत्म

 दिल्ली बांग्लादेश में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2026) के लाइव प्रसारण पर रोक लगा दी गई है. भारत की जियोस्टार (JioStar) ने बांग्लादेश में अपने आईपीएल प्रसारण समझौते को समाप्त कर दिया है, जिससे 2026 सीजन का देश में टेलीकास्ट नामुमकिन हो गया है. ये फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में बांग्लादेश सरकार की ओर से रुख नरम होने के संकेत मिले थे. इस फैसले से बांग्लादेश के क्रिकेट प्रशंसकों को बड़ा झटका लगा है, जहां आईपीएल की जबरदस्त लोकप्रियता है. दरअसल,  बांग्लादेशी अधिकारियों ने आईपीएल प्रसारण पर लगाए गए पुराने प्रतिबंध पर दोबारा विचार करने के संकेत दिए थे. हालांकि, जियोस्टार ने ही अपने कदम वापस खींच लिए. जिसके चलते अब इस सीजन में टूर्नामेंट के स्थानीय प्रसारण की कोई संभावना नहीं बची है.जियोस्टार ने बांग्लादेशी ब्रॉडकास्टर टीस्पोर्ट्स को भेजे गए पत्र में कहा, “समझौता तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है.” टीस्पोर्ट्स ने 2023 से 2027 तक आईपीएल सीजन के प्रसारण अधिकार सब-लाइसेंस पर लिए थे. कंपनी ने आगे कहा कि उसके साझेदार की ओर से “समझौते में तय भुगतान समयसीमा का लगातार पालन न करना और भुगतान में चूक” इस फैसले की मुख्य वजह रही. यह निर्णय महिला प्रीमियर लीग पर भी लागू होगा. बांग्लादेश की आईपीएल डील क्यों टूटी? हाल के महीनों में भारत और बांग्लादेश के बीच, खासकर क्रिकेट को लेकर तनाव बढ़ा है, लेकिन आईपीएल प्रसारण समझौते का टूटना मुख्य रूप से व्यावसायिक कारणों की वजह से माना जा रहा है, न कि राजनीतिक कारणों से. इस पूरे मामले के केंद्र में जियोस्टार और उसके बांग्लादेशी पार्टनर टीस्पोर्ट्स के बीच विवाद रहा. भारतीय ब्रॉडकास्टर ने बार-बार भुगतान में चूक को समझौता समाप्त करने की सबसे बड़ी वजह बताया है. इससे साफ है कि आर्थिक विवाद ने इस साझेदारी को तोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई. इसका मतलब यह भी है कि भले ही बांग्लादेश के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आईपीएल प्रसारण पर लगे पुराने प्रतिबंध की समीक्षा के संकेत दिए हों, लेकिन फिलहाल टूर्नामेंट दिखाने के लिए कोई आधिकारिक पार्टनर मौजूद नहीं है. 18.5 बिलियन डॉलर मूल्य वाले आईपीएल को दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग माना जाता है और बांग्लादेश में इसकी बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग है. ऐसे में स्थानीय प्रसारण नहीं होने से दर्शकों की संख्या और फैन एंगेजमेंट पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है.

OBC आरक्षण मामले में SC का फैसला, 87-13 फार्मूले को चुनौती, 2 मामलों को किया रिकॉल

जबलपुर  सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मामले में एक नया आदेश पारित किया है। दो याचिकाओं को हाई कोर्ट से रिकाल कर लिया है और 52 मामले जो पिछली बार सुप्रीम कोर्ट में ही रह गए थे, ट्रांसफर आर्डर में दर्ज नहीं हुए थे, उनको हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में अंतिम बहस शुरू होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि हाई कोर्ट में ओबीसी आरक्षण के संबंध में विचार अधीन सभी मामलों को मध्य प्रदेश शासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। सभी मामले सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग खंडपीठ के समक्ष पेंडिंग थे। जानकारी के अनुसार कोर्ट ने 87-13 के फार्मूले को चुनौती देने वाले मामले को रिकॉल किया गया है, जिसकी सुनवाई अप्रैल के दूसरे सप्ताह में होगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 54 और याचिकाएं जबलपुर हाईकोर्ट में ट्रांसफर की हैं। ओबीसी आरक्षण से जुड़ी 103 याचिकाओं पर हाईकोर्ट 2 से 15 अप्रैल तक नियमित सुनवाई करेगा। 52 प्रकरण हाईकोर्ट ट्रांसफर किए गए ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से कोर्ट में दलील देने वाले सीनियर अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण के प्रकरणों में 19 फरवरी 26 को पारित आदेश में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए 52 प्रकरणों को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट वापस भेजा है। ट्रांसफर केसो में से दो प्रकरण में अब सुप्रीम कोर्ट ही सुनवाई करेगा। संशोधित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण के बकाया 52 प्रकरणों को जबलपुर हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया गया है। इन प्रकरणों में ओबीसी वर्ग का शासन की ओर से पक्ष रखने के लिए राज्यपाल द्वारा नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर में ओबीसी आरक्षण के विचाराधीन सभी प्रकरणों को मध्य प्रदेश सरकार (महाधिवक्ता) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराए गए थे, जो दो अलग-अलग बंचों में अलग-अलग खंडपीठ के समक्ष पेंडिंग थे। जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे के समक्ष एक दर्जन मामले नियत थे। जिनमें ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेसर ने नियमित सुनवाई के आवेदन दाखिल किए थे। इनमें सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को फाइनल आदेश पारित कर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिए थे और सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति से उक्त समस्त प्रकरणों को विशेष बेंच गठित कर 3 महीने के अंदर निराकृत करने के आदेश पारित किए थे। एसोसिएशन रिव्यू याचिका पर लिया निर्णय ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दीपक कुमार पटेल के नाम से एक रिव्यू याचिका MA/529/26 दाखिल की गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने खुले न्यायालय में 20 मार्च को विस्तृत सुनवाई करते हुए 19 फरवरी को पारित आदेश में संशोधन कर 52 प्रकरण जो मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ट्रांसफर कराए गए थे, उनको भी 20 मार्च के आदेश से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिए हैं, तथा दो विशेष अनुमत याचिकाएं जो पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस की गई थीं उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने आदेश दिनांक 20/3/26 जो वेवसाइड पर 30/03/26 को अपलोड हुआ हैं । उक्त आदेश मे सुप्रीम कोर्ट ने दो एसएलपी जिनमे दीपक कुमार पटेल विरूध मध्य प्रदेश शासन एवं हरिशंकर बरोदिया विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन को अपने समक्ष सुनवाई के लिए वापस रिकॉल कर लिए गए हैं, शेष आदेश दिनांक 19 फरवरी यथावत रहेगा। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से कोर्ट में दलील देने वाले सीनियर अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा उन समस्त मामलों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 2 अप्रैल 2026 को सुनवाई नियत हैं।  

CM यादव बोले: MSME इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र और लाखों परिवारों का स्वावलंबन

एमएसएमई इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र और लाखों परिवारों के स्वावलंबन का हैं आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सरकार प्रदेश के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने उपलब्ध करा रही है सहयोग और मार्गदर्शन देश-दुनिया के सभी निवेशकों के लिए खुले हैं प्रदेश के दरवाजे देश के प्रमुख स्टार्टअप राज्य के रूप में स्थापित हो रहा है मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की एमएसएमई इकाइयों को 169 करोड़ से अधिक की राशि अंतरित स्टार्टअप को अनुदान और उद्यमियों को प्रदान किए भू-आवंटन पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मंत्री काश्यप ने भेंट किया लघु उद्योग निगम के 8 करोड़ रूपए के अंतरिम लाभांश का चैक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, देश के सर्वाधिक सशक्त, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और बेहतर वित्तीय प्रबंधन वाले प्रथम तीन राज्यों में से एक है। राज्य सरकार प्रदेश के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रही है। देश-दुनिया के सभी निवेशकों के लिए प्रदेश के दरवाजे खुले हैं। हम उद्योग मित्र नीतियों और सहयोग की भावना के साथ उनके स्वागत के लिए तत्पर हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश भारतीय अर्थव्यवस्था में उद्योग हो या कृषि हर क्षेत्र में योगदान के लिए निरंतर सक्रिय है। एमएसएमई इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र होने के साथ लाखों परिवारों के स्वावलंबन का आधार भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को समर्थ एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश की थीम पर मुख्यमंत्री निवास में 257 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को उनके खाते में 169.57 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि सिंगल क्लिक से जारी कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टार्टअप को लगभग 28 लाख से अधिक की अनुदान राशि की प्रथम किश्त भी जारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने लघु उद्योग निगम की ओर से 8 करोड़ रूपए के अंतरिम लाभांश का चैक भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैतूल और आगर-मालवा के तीन उद्यमियों को औद्योगिक भूमि के लिए आवंटन-पत्र प्रदान किए और मुख्यमत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत हितलाभ वितरण भी किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का आयोजन महावीर जयंती के शुभ अवसर पर हो रहा है। यह भगवान महावीर के जनकल्याण और शुचिता के सिद्धांतों को साकार करने का भी प्रतीक है। प्रदेश में उद्योग-व्यापार गतिविधि और उद्यमिता प्रोत्साहित करने के लिए व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करते हुए निरंतर नवाचार जारी हैं। राज्य सरकार उद्यमियों को लिए पूंजी, भूमि और व्यवस्थाओं में सरलता कर, उनकी प्रगति की राह को आसान बना रही है। विभाग द्वारा बड़ी राशि का सिंगल क्लिक से सीधे अंतरण व्यवस्था में सुगमता और स्पष्टता का परिचायक है। पूरे देश में मार्च क्लोजिंग का वातावरण है, ऐसे में राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई इकाइयों और उद्यमियों को राशि और सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह प्रदेश में नए संकल्पों के साथ नया वित्तीय वर्ष आरंभ करने का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में ही भारत स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हुए प्रगति पथ पर अग्रसर है। युद्ध के दोनों पक्ष भारत का सहयोग कर रहे हैं, यह प्रधानमंत्री मोदी की कुशल नीतियों से ही संभव है। जहां एक ओर विश्व के कई देशों में पेट्रोल-डीजल, गैस की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, वहीं हमारे देश में प्रधानमंत्री मोदी ने इनके मूल्यों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ने दिया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत समर्थ भी है और सक्षम भी। सभी क्षेत्रों में हो रही है प्रगति : मंत्री काश्यप सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनता के बीच सक्रिय होने के साथ प्रशासनिक दृष्टि से भी निरंतर गतिशील हैं। उनके व्यापक और स्पष्ट दृष्टिकोण के परिणाम स्वरूप प्रदेश उद्योग-व्यापार, कृषि, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने सहित सभी क्षेत्रों में प्रगति कर रहा है। प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विभाग में डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं। जिसके परिणामस्वरूप भूमि आवंटन प्रक्रिया को गति मिली है। प्रदेश के 25 औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कार्य जारी हैं, साथ ही 6 नए औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में 7100 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश, देश के प्रमुख स्टार्टअप राज्य के रूप में स्थापित हो रहा है। कार्यक्रम में एमएसएमई इकाई के संचालक, उद्यमी और बड़ी संख्या में स्टार्ट-अप्स मौजूद रहे।  

Diesel Price Hike: डीजल की कीमत में 81% तक बढ़ोतरी, US-Iran युद्ध का वैश्विक असर, इन देशों में संकट

नई दिल्ली अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत से ही दुनिया सहमी हुई है और हर बीतते दिन के साथ ग्लोबल टेंशन बढ़ती ही जा रही है. मिडिल की ये जंग अब पांचवे हफ्ते में एंट्री ले चुकी है और पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत तमाम देशों में तेल-गैस संकट गहरा गया है. इस दौरान कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अचानक बड़ा इजाफा किया जा चुका है. अगर बात करें, डीजल की तो इसकी कीमतों में 81% तक की बढ़ोतरी सिर्फ युद्ध के दौरान ही देखने को मिली है. आइए जानते हैं कहां-कहां कितना महंगा हुआ डीजल?  वैश्विक ईंधन संकट (Global Fuel Crisis) बढ़ता ही जा रही है. अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध से तेल बाजारों में उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है. क्रूड की कीमत में सोमवार को एक बार फिर अचानक बढ़ा उछाल आया है और Brent Crude Price 116 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. लगातार क्रूड प्राइस में जारी तेजी का असर कई देशों में देखने को मिला और Petrol के दाम बढ़ने के साथ ही डीजल की कीमतों में तो 81% तक की वृद्धि हुई है।  क्रूड आसमान पर, पेट्रोल-डीजल पर मार अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर पहली बार बीते 28 फरवरी को स्ट्राइक की थी, जिसके जबाव में ईरान ने भी जोरदार मिसाइट अटैक किए और युद्ध बढ़ता चला गया, जो अब तक जारी है. इस जंग में होर्मुज बंद होने, तेल के टैंकरों पर अटैक ने कच्चे तेल की कीमतों में तेज इजाफा कर दिया और Crude Oil Price आसमान पर पहुंच गई. दरअसल, पेट्रोल और डीजल (Petrol-Diesel) कच्चे तेल से परिष्कृत होते हैं, ऐसे में क्रूड महंगा होने के चलते कई देशों में पेट्रोल और डीजल की लागत में भारी वृद्धि हुई है और इनके प्राइस बढ़ा दिए गए।  एनर्जी सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते तेल बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और इससे दुनियाभर की अर्थव्यस्थाएं प्रभावित नजर आ रही हैं. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में वृद्धि हो रही है. इससे महंगाई का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है. Pakistan, फिलिपींस, नाइजीरिया जैसे देशों में तो बुरा हाल है।  एशियाई देशों में डीजल इतना महंगा IBC Group के सीईओ और फाउंडर मारियो नौफल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर आंकड़े शेयर करते हुए US-Iran संघर्ष की शुरुआत के बाद एशियाई देशों में डीजल की कीमतों में इजाफे की तस्वीर साफ की है. डीजल की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी फिलीपींस में दिखी, जहां ये युद्ध के बाद से 81.6% महंगा हुआ है. इसके बाद मलेशिया का स्थान रहा और यहां Diesel Price में 57.9% की वृद्धि हुई, जबकि वियतनाम में डीजल 45.9% महंगा हो चुका है।  अन्य एशियाई देशों में भी डीजल की कीमतों में तगड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इनमें सिंगापुर में डीजल प्राइस 44%, चीन में 25.4%, साउथ कोरिया में 15.1% और जापान में 14% इजाफा शामिल है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि एनर्जी आयात पर निर्भर एशियाई देशों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं।  कुछ विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में भी ईरान युद्ध से गहराए इस Fuel Crisis का बुरा असर देखने को मिल रहा है. नाइजीरिया में डीजल की कीमतों में 78.3% की भारी वृद्धि हुई, जो वैश्विक स्तर पर सबसे तेज इजाफे में एक है. इसके अलावा श्रीलंका में डीज का दाम 37.2% बढ़ चुका है. पहले से ही संकट के दौर से गुजर रहीं इन इकोनॉमी पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।  US-कनाडा में भी दिखा असर  न सिर्फ एशियाई देश, बल्कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका भी मिडिल ईस्ट युद्द के चलते दबाव महसूस कर रहे हैं. कई पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में डीजल की कीमतों में काफी तेजी आई है. अमेरिका में डीजल की कीमतों (US Diesel Price Hike) में 41.2% की बढ़ोतरी हो चुकी है, तो वहीं कनाडा में कीमत 36.9% उछली है. जर्मनी में डीजल की कीमत में 30.9%, फ्रांस में 27.8%, यूके में 18% और इटली में 14.9% का इजाफा हुआ है. यूक्रेन में भी हाल-बेहाल है और यहां डीजल 33.9% महंगा हुआ है। 

विशेष खिलाड़ियों को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग राजीव गांधी स्टेडियम बनेगा नया स्पोर्ट्स हब

गुरुग्राम गुरुग्राम के दौलताबाद स्थित राजीव गांधी स्टेडियम अब विशेष (स्पेशल) खिलाड़ियों के लिए एक नए खेल हब के रूप में उभरने जा रहा है। करीब 15 लाख रुपये की लागत से यहां जिले का पहला ‘स्पेशल’ पावरलिफ्टिंग सेंटर तैयार होगा, जिसे नेशनल सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना है। इस सेंटर में इंडोर ट्रेनिंग की आधुनिक सुविधाएं, एडवांस इक्विपमेंट और प्रोफेशनल माहौल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे खिलाड़ियों को उच्च स्तर की तैयारी का अवसर मिलेगा। स्पेशल खिलाड़ियों को बड़ा गिफ्ट, मिलेगी बेहतर ट्रेनिंग खास बात यह है कि इस पहल से गुरुग्राम के साथ-साथ हरियाणा और अन्य राज्यों के स्पेशल खिलाड़ियों को भी एक ही जगह बेहतर ट्रेनिंग और एक्सपोजर मिल सकेगा। अभी तक खिलाड़ियों को ऐसी सुविधाओं के लिए बाहर जाना पड़ता था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर की तैयारी का प्लेटफॉर्म मिलेगा, जो उनके प्रदर्शन और भविष्य दोनों को नई दिशा देगा। स्पेशल खिलाड़ियों को मिलेगा पहचान बनाने का मौका यह सेंटर न केवल खेल प्रदर्शन को बेहतर बनाएगा, बल्कि स्पेशल खिलाड़ियों में आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देगा, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें। स्पेशल ओलंपिक हरियाणा के एरिया इंचार्ज वीरेंद्र कुमार ने कहा कि यह स्पेशल खिलाड़ियों के लिए बड़ी शुरुआत है। जिले में धीरे इस तरह के सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों को बेहतर प्लेटफॉर्म मिल सके। पूरी तरह इंडोर होगा यह सेंटर उन्होंने बताया कि यह सेंटर खिलाड़ियों के सपनों को नई दिशा देगा और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा। इस सेंटर को पूरी तरह इंडोर बनाया जाएगा ताकि खिलाड़ी हर मौसम में अभ्यास कर सकें। आरामदायक तरीके से ले सकेंगे ट्रेनिंग इस ‘स्पेशल’ पावरलिफ्टिंग सेंटर में बेंच प्रेस टेबल, स्क्वाट रैक, डेडलिफ्ट प्लेटफॉर्म, मल्टी जिम, स्ट्रेंथ मशीन, एडवांस वेट प्लेट्स और प्रोफेशनल बारबेल लगाए जाएंगे। सभी उपकरण स्पेशल खिलाड़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किए जाएंगे, जिससे वे सुरक्षित और आरामदायक तरीके से ट्रेनिंग ले सकें। राष्ट्रीय स्तर की तैयारी के लिए बेहतर मंच मिलेगा यह सेंटर केवल एक ट्रेनिंग जगह नहीं होगी, बल्कि नेशनल लेवल की तैयारी का प्लेटफॉर्म बनेगा। यहां समय-समय पर बड़े ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए जाएंगे, जिनमें अलग-अलग राज्यों के खिलाड़ी भी हिस्सा लेंगे। इससे खिलाड़ियों को प्रतियोगी माहौल मिलेगा और वे अपनी क्षमता को बेहतर तरीके से निखार सकेंगे।   गुरुग्राम जिले का पहला 'स्पेशल' सेंटर यह गुरुग्राम जिले का पहला ऐसा स्पेशल सेंटर होगा जो विशेष रूप से स्पेशल खिलाड़ियों के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले स्पेशल बच्चे नियमित रूप से प्रैक्टिस कर सकेंगे। इसके साथ ही विशेष सत्रों के माध्यम से उन्हें खेल के साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित किया जाएगा।