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राजस्थान बोर्ड 12वीं परिणाम: बेटियों की शानदार सफलता, दीपिका ने 99.8% और नव्या मीणा ने 99.6% अंक प्राप्त किए

जयपुर   राजस्थान बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2026 की घोषणा कर दी गई है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) 12वीं आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स का रिजल्ट Link आज 31 मार्च को सुबह 10 बजे एक्टिव कर दिया गया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने ऑनलाइन माध्यम से रिजल्ट जारी किया है। इस दौरान बोर्ड के प्रशासक शक्ति सिंह राठौड़ और सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ भी बोर्ड कार्यालय से कार्यक्रम में शामिल रहे। रिजल्ट जारी हो गया है और Rajasthan Board 12th Result 2025 Direct Link ऑफिशियल वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर एक्टिव है। छात्र सबसे पहले रोल नंबर से यहीं अपना रिजल्ट देख सकेंगे। यहां राजस्थान बोर्ड बारहवीं परिणाम 2026 से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट्स देखते रहें। इस साल राजस्थान बोर्ड 12वीं की परीक्षा में कुल 9 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से 96.23 छात्र सफल घोषित किए गए हैं. पिछले साल की तरह इस बार भी [लड़कियों/लड़कों] का प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने सफलता का परचम लहराया. बोर्ड मुख्यालय से प्रशासक शक्ति सिंह राठौड़ और सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी नतीजों की पुष्टि की है।  तीनों स्ट्रीम का पास प्रतिशत (Stream-wise Data) विज्ञान (Science): 97.52 प्रतिशत वाणिज्य (Commerce): 93.64 प्रतिशत कला (Arts): 97.54 प्रतिशत साइंस में लड़कियों ने मारी बाजी राजस्थान बोर्ड 12वीं साइंस रिजल्ट में लड़कों से ज्यादा लड़कियां फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं.  साइंस में कुल 287068 स्टूडेंट ने रजिस्ट्रेशन किया था. इसमें से 285299 स्टूडेंट परीक्षा में बैठे थे. साइंस का परीक्षा परिणाम 97.52 प्रतिशत रहा. 97.02 प्रतिशत छात्र और 98.34 छात्राएं पास हुई हैं. 178051 में से 146644 छात्र और 107248 में से 98836 छात्राएं फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं।  कॉमर्स में लड़कों का दिखा जलवा राजस्थान 12वीं बोर्ड  कॉमर्स में लड़कों का रिजल्ट बेहतर रहा. कॉमर्स में कुल 30798 स्टूडेंट रजिस्टर्ड थे, जिसमें से 30580 स्टूडेंट परीक्षा हिस्सा लिया था. कॉमर्स का परिणाम 93.64 प्रतिशत रहा.  छात्रों के पास होने का प्रतिशत 94.04 और छात्राओं का पास होने का प्रतिशत 92.82 रहा. 20666 छात्रों में से 13976 लड़के और 9914 लड़कियों में से 8096 लड़कियां फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं।  आर्ट्स में लड़कियों ने मारी बाजी राजस्थान बोर्ड 12वीं आर्ट्स में बेटियां आगे रहीं. आट्‌र्स में कुल 591023 स्टूडेंट रजिस्टर्ड हैं, जिसमें से 583201 स्टूडेंट परीक्षा में शामिल हुए। परिणाम 97.54 प्रतिशत रहा. लड़कों के पास होने का प्रतिशत 96.68 और लड़कियों के पास होने का प्रतिशत 98.29 रहा।  कैसे चेक करें अपना रिजल्ट: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाएं. होमपेज पर 'Main Examination Results 2026' के लिंक पर क्लिक करें. अब अपनी स्ट्रीम (Science/Arts/Commerce) का चुनाव करें. अपना रोल नंबर दर्ज करें और 'सबमिट' बटन दबाएं. आपका रिजल्ट स्क्रीन पर होगा, इसे भविष्य के लिए डाउनलोड कर लें. रिजल्ट का डायरेक्ट लिंक: rajeduboard.rajasthan.gov.in, rajresults.nic.in राजस्थान बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित करने के साथ ही उन छात्रों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जो अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं. यदि किसी विद्यार्थी को लगता है कि उसे उसकी मेहनत के अनुरूप अंक नहीं मिले हैं, तो वह 'स्क्रूटनी' या कॉपियों की 'री-चेकिंग' के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकता है. इसके लिए बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रति विषय शुल्क जमा करना होगा. स्क्रूटनी की प्रक्रिया परिणाम जारी होने के 15 दिनों के भीतर पूरी करनी अनिवार्य होती है, जिसके बाद संशोधित अंकतालिका जारी की जाती है।  वहीं, जो छात्र एक या दो विषयों में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने में असफल रहे हैं, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ऐसे विद्यार्थियों के लिए सप्लीमेंट्री (पूरक) परीक्षा का आयोजन करेगा. बोर्ड सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार, सप्लीमेंट्री परीक्षाओं का विस्तृत शेड्यूल और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी अगले 48 घंटों में आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध करा दी जाएगी. इससे छात्रों को अपना कीमती साल बचाने का एक और अवसर मिलेगा। 

मुख्यमंत्री साय की त्वरित कार्रवाई: दिव्यांग चंदूलाल को मिली मदद

संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया।इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।” यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल को पार, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

मुंबई  ब्रेंट क्रूड की कीमत आज 30 मार्च 2026 को 116.4 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. ये पिछले सेशन से 3.41% बढ़ गई है. WTI क्रूड भी 103.1 डॉलर पर पहुंच गया है. इस महीने ब्रेंट में 59% की तेज उछाल आया है, जो 1990 के गल्फ वॉर के बाद सबसे तेज मंथली उछाल है. ईरान युद्ध में हूती विद्रोहियों के शामिल होने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरे और अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व में सैनिक बढ़ाने से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है।  भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर बड़ा खतरा बन गया है. ब्रेंट क्रूड विश्व का सबसे मेन ऑयल बेंचमार्क है, जिसकी कीमत पर दुनिया भर के तेल के दाम निर्भर करते हैं।  क्यों ब्रेंट क्रूड के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल अहम लेवल है? जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल पार करता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘मिडफ्लाइट टर्बुलेंस’ जैसा होता है. सामान्य व्यापार ठप पड़ जाता है और लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो बड़ा नुकसान हो सकता है. इस बार स्थिति पहले से अलग है. मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय ब्रेंट 117.2 डॉलर था और डॉलर 76.24 रुपये पर था, तो एक बैरल तेल की कीमत भारतीय रुपए में 8,935 रुपये थी. मार्च 2026 में ब्रेंट 118.4 डॉलर पर था लेकिन डॉलर 93.35 रुपये पर पहुंच गया, जिससे एक बैरल तेल 11,052 रुपये का हो गया, यानी 23.6% महंगा. तेल डॉलर में खरीदा जाता है, इसलिए रुपए की कमजोरी भारत को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. भारत अपनी जरूरत का 85% तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए यह कीमत सीधे इंपोर्ट बिल बढ़ाती है. 100 डॉलर तेल दुनियाभर में महंगाई को कैसे प्रभावित करता है? जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर पार करता है तो दुनिया भर में महंगाई बढ़ जाती है. तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और खेती की लागत बढ़ जाती है. इससे हर चीज का दाम ऊपर जाता है – खाना, सफर और सामान. कई देशों में मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) 4-5% या उससे ज्यादा पहुंच सकती है।  भारत में भी यही असर पड़ता है. अगर तेल की औसत कीमत 100 डॉलर पर बनी रही तो GDP ग्रोथ 6% से नीचे आ सकती है और महंगाई बढ़ सकती है. सरकार को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करनी पड़ सकती है, जिससे राजकोषीय घाटा बढ़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि 100 डॉलर तेल भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को 1.9-2.2% तक बढ़ा सकता है. लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो फैक्टरियां प्रभावित होंगी, रोजगार पर असर पड़ेगा और आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा।  ब्रेंट क्रूड की कीमत भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों को कैसे प्रभावित कर सकती है? भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रूड की कीमत, डॉलर की दर, रिफाइनरी मार्जिन और सरकार की ड्यूटी पर निर्भर करती हैं. 100 डॉलर से ऊपर क्रूड होने पर रिफाइनरी को कच्चा तेल महंगा पड़ता है, जिसका असर अंत में पेट्रोल पंप पर पड़ता है।  पिछले सालों में सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखीं, जिससे जब क्रूड सस्ता था तो फायदा हुआ, लेकिन अब महंगा होने पर नुकसान हो रहा है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें क्रूड बढ़ने के अनुपात में नहीं बढ़ी हैं, लेकिन पूर्ण रूप से महंगाई से बचना मुश्किल है. अगर क्रूड 100 डॉलर के ऊपर टिका रहा तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं या सरकार को ड्यूटी काटनी पड़ सकती है, जिससे राजस्व कम होगा. भारत सरकार के पास 60 दिनों का तेल स्टॉक है, इसलिए तुरंत कमी नहीं होगी. लेकिन लंबे समय तक युद्ध चला तो आयात बिल 20-25 बिलियन डॉलर अतिरिक्त बढ़ सकता है. इससे रुपया और कमजोर हो सकता है और महंगाई बढ़ेगी।  इस बार 100 डॉलर तेल पहले से ज्यादा दर्द दे रहा है क्योंकि रुपया कमजोर है और तेल डॉलर में महंगा पड़ रहा है. आम लोगों को पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों पर असर दिखेगा. सरकार को सतर्क रहना होगा. ड्यूटी में बदलाव, स्टॉक मैनेजमेंट और ऑप्शन ऊर्जा पर जोर देकर इस चुनौती से निपटना होगा. अगर युद्ध जल्दी थमा तो राहत मिल सकती है, वरना अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। 

Realme 16: भारत का पहला सेल्फी मिरर स्मार्टफोन 2 अप्रैल को होगा लॉन्च

 नई दिल्ली Realme भारत में नया स्मार्टफोन लॉन्च करने जा रहा है, जिसका नाम रियलमी 16 5G होगा. कंपनी ने ऑफिशियल पोर्टल पर इस हैंडसेट की जानकारी दी है और बताया है कि यह भारत में 2 अप्रैल को लॉन्च होगा।  रियलमी 16 5G को लेकर कंपनी का दावा है कि यह भारत का पहला सेल्फी मिरर फोन है. इसमें बैक पैनल पर कैमरा सेंसर के पास एक रिफ्लेक्टिव मिरर है. ऐसे में यूजर्स बैक कैमरा सेटअप की मदद से भी सेल्फी ले सकेंगे।  रियलमी इंडिया के ऑफिशियल पोर्टल पर अपकमिंग हैंडसेट को लेकर कुछ डिटेल्स को शेयर किया गया है. इसमें कैमरा, डिजाइन, डिस्प्ले और आईपी रेटिंग की जानकारी शेयर की है।  Realme 16 का डिस्प्ले  Realme 16 में 6.57 Inch का डिस्प्ले दिया गया है और इसका वजन 183 ग्राम वजनी है. इसकी थिकनेस 8.1 एमएम की है. कंपनी इस हैंडसेट को दो कलर वेरिएंट में लेकर आ रही है, जिसका नाम एयर व्हाइट और एयर ब्लैक कलर है।  Realme 16 की बैटरी और फास्ट चार्जर  Realme 16 में 7000mAh की बैटरी दी जाएगी, जिसके साथ 60W का फास्ट चार्जर मिलता है. ऑफिशियल वेबसाइट पर लिस्टेड डिटेल्स में बताया है कि 3 साल के लिए एंड्रॉयड ओएस अपडेट और 4 साल के लिए एंड्रॉयड सिक्योरिटी अपडेट है।  रियलमी इंडिया का पोस्ट  Realme 16 का कैमरा सेटअप  Realme 16 में हॉरिजोन्टली कैमरा एलाइनमेंट दिया गया गया है, जो काफी कुछ गूगल पिक्सल 10 सीरीज के जैसा लगता है. रियलमी के इस हैंडसेट में 50MP का मेन कैमरा सेंसर दिया गया है. इसमें एक सर्कुलर LED Flash लाइट दी गई है. हालांकि अन्य कैमरा सेंसर क जानकारी शेयर नहीं की गई है और सेल्फी के लिए भी 50MP का फ्रंट कैमरा मिलेगा।  क्या है सेल्फी मिरर फीचर? बैक पैनल पर ही कैमरा के पास एक रिफ्लेक्टिव सर्कुलर सरफेस दिया गया है, जिसको कंपनी ने सेल्फी मिरर का नाम दिया है. इसकी मदद से यूजर्स रियर कैमरे से हाई क्वालिटी सेल्फी क्लिक कर सकेगा। 

लिव-इन कपल्स को मिलेगा मैरिड का दर्जा, जनगणना के नए नियम में चौंकाने वाली घोषणा

नई दिल्ली आज के बदलते समाज में रिश्तों की परिभाषाएं तेजी से बदल रही हैं. जो रिश्ते कभी सामाजिक स्वीकृति के लिए तरसते थे, अब वे सरकारी दस्तावेजों में भी अपनी जगह बनाने लगे हैं. जनगणना 2027 से जुड़ा एक नया FAQ इसी बदलाव की झलक देता है. अगर कोई लिव-इन कपल खुद को ‘स्थिर संबंध’ में मानता है, तो उसे ‘मैरिड’ यानी विवाहित के रूप में गिना जाएगा. यह फैसला सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि समाज की बदलती सोच का संकेत भी है. हालांकि इस पर बहस भी तेज हो गई है कि क्या बिना शादी के ऐसे रिश्तों को शादी के बराबर मान लेना सही है या इससे पारंपरिक मूल्यों पर असर पड़ेगा।  रिपोर्ट के अनुसार दूसरी तरफ यह कदम उन लोगों के लिए राहत की तरह देखा जा रहा है जो लंबे समय से लिव-इन में रह रहे हैं लेकिन सामाजिक या कानूनी मान्यता के अभाव में कई सुविधाओं से वंचित रहते थे. सरकार का यह रुख दर्शाता है कि वह अब लोगों की निजी पसंद और जीवनशैली को ज्यादा सम्मान देने की दिशा में बढ़ रही है. लेकिन सवाल यह भी उठता है कि ‘स्थिर रिश्ता’ की परिभाषा क्या होगी और इसका दुरुपयोग कैसे रोका जाएगा. यही वजह है कि यह फैसला चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।  जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार की ओर से बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया है. अधिकारियों के मुताबिक पहले भी अगर साथ रह रहे अविवाहित कपल्स खुद को मैरिड बताते थे, तो उनकी जानकारी उसी आधार पर दर्ज की जाती थी. जनगणना के हाउस लिस्टिंग फेज में घर में रहने वाले शादीशुदा कपल की संख्या से जुड़ा सवाल भी शामिल है. यह स्टेज कुल 45 दिनों तक चलेगा. इसमें पहले 15 दिन सेल्फ एन्यूमरेशन और उसके बाद 30 दिन एन्यूमरेटर के जरिए जानकारी जुटाई जाएगी. सेल्फ एन्यूमरेशन की शुरुआत 1 अप्रैल से दिल्ली के NDMC इलाके से होगी, जहां कोई भी जिम्मेदार वयस्क OTP के जरिए लॉग इन कर अपने घर के सभी सदस्यों की जानकारी भर सकता है।  क्या है नया नियम, क्यों मचा है विवाद, कैसे होगा असर?     जनगणना 2027 के लिए तैयार किए गए सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई कपल खुद को एक स्थिर संबंध में मानता है, तो उसे विवाहित के रूप में गिना जाएगा. खास बात यह है कि इसके लिए किसी तरह का कानूनी दस्तावेज या प्रमाण देना जरूरी नहीं होगा. जो भी जानकारी दी जाएगी, उसे व्यक्ति के ‘ज्ञान और विश्वास’ के आधार पर दर्ज किया जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी और लोग खुद ही अपने परिवार का डेटा पोर्टल पर भर सकेंगे।      इस नई व्यवस्था में 45 दिनों का हाउसलिस्टिंग फेज रखा गया है. इसमें पहले 15 दिन सेल्फ-एन्यूमरेशन के होंगे और बाकी 30 दिन एन्यूमरेटर द्वारा सत्यापन के लिए होंगे. यह सुविधा 15 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगी और इसमें घर की लोकेशन को जियो-टैग करना भी जरूरी होगा. इससे डेटा अधिक सटीक और व्यवस्थित तरीके से एकत्र किया जा सकेगा।  क्या लिव-इन कपल को अब पूरी तरह शादीशुदा माना जाएगा? नहीं, यह मान्यता केवल जनगणना के डेटा संग्रह के लिए है. इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें कानूनी तौर पर पति-पत्नी का दर्जा मिल जाएगा. यह सिर्फ आंकड़ों को सही तरीके से दर्ज करने की एक प्रक्रिया है ताकि वास्तविक सामाजिक संरचना को बेहतर तरीके से समझा जा सके।  ’स्थिर संबंध’ की पहचान कैसे होगी? इसका कोई सख्त कानूनी पैमाना तय नहीं किया गया है. अगर कपल खुद को स्थिर और लंबे समय के रिश्ते में मानता है, तो उसे उसी आधार पर दर्ज किया जाएगा. यह पूरी तरह व्यक्ति की घोषणा पर आधारित है, जिससे कुछ लोग इसे लचीला तो कुछ लोग इसे अस्पष्ट मान रहे हैं।  क्या इस फैसले का सामाजिक असर पड़ेगा? संभावना है कि इसका असर पड़ेगा. इससे लिव-इन रिश्तों को सामाजिक स्वीकृति मिल सकती है और ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोग ज्यादा खुलकर सामने आ सकते हैं. वहीं, पारंपरिक सोच रखने वाले लोग इसे परिवार व्यवस्था के लिए चुनौती के रूप में भी देख सकते हैं।  जनगणना में डिजिटल बदलाव और नई प्रक्रिया इस बार जनगणना पूरी तरह तकनीक पर आधारित होगी. लोग घर बैठे पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी भर सकेंगे. OTP वेरिफिकेशन, जियो-टैगिंग और डिजिटल फॉर्म जैसी सुविधाएं इसे आसान बनाएंगी. हालांकि, गलत जानकारी या लोकेशन डालने पर डेटा में गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 

अमेरिका ने ईरान पर छोड़ी 29,750 करोड़ की टॉमहॉक मिसाइल, ये क्यों है खास?

न्यूयॉर्क अमेरिकी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले चार हफ्तों में 850 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दाग दी हैं. यह किसी एक अभियान में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. यह जानकारी अमेरिका की प्रसिद्ध थिंक टैंक सीएसआईएस (Center for Strategic and International Studies) की नई रिपोर्ट में दी गई है।  हर टॉमहॉक मिसाइल की कीमत करीब 3.6 मिलियन डॉलर (लगभग 35 करोड़ रुपये) है. इस हिसाब से इन 850 मिसाइलों की कुल कीमत लगभग 30,000 करोड़ की आंकी जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मिसाइलें मुख्य रूप से दो गाइडेड मिसाइल पनडुब्बियों और डिस्ट्रॉयर जहाजों से छोड़ी गईं. इन जहाजों में वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम (VLS) लगे हैं. इस अभियान में क्षेत्र में उपलब्ध लॉन्चरों का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल किया जा चुका है. महत्वपूर्ण बात यह है कि समुद्र में इन लॉन्चरों को फिर से लोड नहीं किया जा सकता. जहाजों को मिसाइलें खत्म होने पर बंदरगाह वापस जाना पड़ता है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टॉक फिर से भरने में समय लगेगा।  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने एपिक फ्यूरी 2026 में सिर्फ पहले 4 हफ्तों में 850 टॉमहॉक दागी हैं. यह इतिहास का रिकॉर्ड है. इस से पहले किसी भी एक अभियान में इतनी मिसाइलें नहीं दागी गई हैं. 2003 के पूरे इराक युद्ध (Iraqi Freedom) में अमेरिका ने 802 मिसाइलें दागी थीं. बाकी पुराने अभियान की बात करें तो 1991 के डेजर्ट स्टॉर्म में 288 मिसाइल दागी गईं थीं।  ऐसा क्या खास है इस मिसाइल में? टॉमहॉक अमेरिका की एक मध्यम दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल है. यह जमीन, जहाज और पनडुब्बी से छोड़ी जाती है और दुश्मन के अंदर गहराई तक हमला करने की ताकत रखती है. 1972 में अमेरिकी नौसेना ने इसका विकास शुरू किया था. यह कम ऊंचाई पर उड़ती है, जिससे रडार इसे आसानी से नहीं पकड़ पाता. शुरू में इसमें न्यूक्लियर और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार लगाए जा सकते थे, लेकिन अब न्यूक्लियर विकल्प खत्म कर दिया गया है. इसे TLAM, TASM, BGM-109G Gryphon जैसे कई नामों से भी जाना जाता है. यह 1983 से सेवा में है।  टॉमहॉक के वेरिएंट ब्लॉक 1: TLAM-N (न्यूक्लियर), TASM (एंटी-शिप) और ग्राउंड लॉन्च Gryphon ब्लॉक 2: TLAM-C (सख्त टारगेट) और TLAM-D (नरम टारगेट) थे ब्लॉक 3: GPS और बेहतर इंजन जोड़े गए, जिससे ईंधन कम लगता है और ज्यादा ताकत मिलती है ब्लॉक 4: सबसे आधुनिक है – इसमें उड़ते समय नया लक्ष्य बदला जा सकता है टॉमहॉक की खूबियां रेंज 1,250 से 2,500 किलोमीटर तक (ब्लॉक IV में 1,600 किमी). स्पीड सबसोनिक (लगभग 800 किमी/घंटा). ऊंचाई समुद्र की सतह से चिपककर या 450 मीटर तक. वजन 1,315 किलोग्राम (लॉन्च वजन), लंबाई 5.55 से 6.25 मीटर. इसमें 454 किलोग्राम का पारंपरिक या पहले न्यूक्लियर वारहेड लगता है. गाइडेंस सिस्टम में इनर्शियल, TERCOM, GPS और टू-वे डेटालिंक है. सटीकता 10 मीटर से भी कम।  यह मिसाइल 140 से ज्यादा अमेरिकी नौसेना के जहाजों (टिकॉन्डेरोगा क्रूजर, आर्ले बर्क डिस्ट्रॉयर) और पनडुब्बियों (Ohio क्लास SSGN और SSN) से छोड़ी जा सकती है. ब्रिटेन की Royal Navy की Astute, Swiftsure और Trafalgar पनडुब्बियों पर भी लगी है. पहले ग्राउंड लॉन्च वर्जन Gryphon भी था, लेकिन 1991 में INF संधि के तहत नष्ट कर दिया गया. मुख्य ऑपरेटर अमेरिका और ब्रिटेन हैं. यह Mark 41 वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम से लॉन्च होती है।  मिसाइल का इतिहास टॉमहॉक का पहला इस्तेमाल 1991 के गल्फ वॉर में हुआ, जहां 300 से ज्यादा दागी गईं. 2003 के इराक युद्ध में 800 से ज्यादा. 2018 में सीरिया में 59 मिसाइलें दागी गईं. अफगानिस्तान, सोमालिया, लिबिया और सीरिया में भी इस्तेमाल हुई. 2016 में 245 मिसाइलों को एंटी-शिप बनाने के लिए 434 मिलियन डॉलर का बजट दिया गया. अमेरिका की आर्मी अब इसे ग्राउंड लॉन्चर पर भी लगा रही है. यह मिसाइल बहुत महंगी लेकिन बेहद सटीक और सुरक्षित हमला करने वाली है, जो आधुनिक युद्ध में अमेरिका की सबसे अहम हथियारों में से एक है। 

Apple की योजना: इस साल लॉन्च होंगे 11 प्रोडक्ट, iPhone 18 Pro सहित कई नामी डिवाइस

नई दिल्ली  अमेरिकी कंपनी ऐपल ने साल 2026 के लिए बड़ी तैयारी करके रखी है. कंपनी इस साल 11 डिवाइस को लॉन्च करने जा रही है, जिसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स से मिली है. इसमें iPhone 18 Pro, iPad 12 समेत कई नाम शामिल हैं।  साल 2026 के खत्म होने से पहले कंपनी टोटल 11 प्रोडक्ट को अनवील करेगी, जिसमें न्यू आईफोन, आईपैड, मैक और ऐपल वॉच का नाम शामिल हैं. हालांकि ऐपल की तरफ से सभी प्रोडक्ट की लॉन्चिंग को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं दी गई है।   आ रहे हैं iPhone 18 Pro और 18 प्रो मैक्स Apple हर साल सितंबर में अपनी फ्लैगशिप सीरीज को अनवील करता है, जिसमें बीते साल iPhone 17 Pro को लॉन्च किया था. अब इस साल कंपनी iPhone 18 Pro सीरीज को लेकर आ रही है. पुराने ट्रेंड को फॉलो करते हुए कंपनी इस साल भी सितंबर में ही लॉन्च करेगी।   लीक्स और मीडिया रिपोर्ट्स में दावे किए जा चुके हैं कि इस साल लॉन्च होने वाले iPhone 18 Pro सीरीज में कई अपडेट दिखाई देंगे. साथ ही कुछ फीचर्स तो पहली बार देखने को मिलेंगे।   iPhone 18 Pro सीरीज में बेहतर कैमरा सेंसर नजर आएंगे. साथ ही न्यू चिपसेट और पुराने वर्जन की तुलना में छोटा डाइनैमिक आइलैंड अनवील किया जाएगा।  ऐपल वॉच, आईपैड और मैक आदि होंगे लॉन्च  ऐपल आईफोन 18 प्रो सीरीज के अलावा अन्य डिवाइसों को भी अनवील किया जाएगा. इसमें ऐपल वॉच, आईपैड और मैक के नाम शामिल हैं।  कंपनी इस साल iPad की न्यू लाइनअप को अनवील करेगी. iPad 12 के साथ फास्ट चिपसेट का यूज किया जाएगा, जिससे ऐपल इंटेलीजेंस का सपोर्ट मिलेगा. iPad Mini के अंदर OLED डिस्प्ले के साथ अपग्रेड किया जा सकेगा।  Mac को लेकर भी रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं. इस साल के अंत तक मैंक स्टूडियो, मैक मिनी और आईमैक को लॉन्च किया जाएगा. इनमें नेक्स्ट जनरेशन M5 चिपसेट का यूज किया गया है. मैकबुक प्रो को एक OLED डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया जाएगा। 

PAN कार्ड नियम में बदलाव 1 अप्रैल से: नाम mismatch पर हो सकता है PAN कार्ड बंद, जानें क्या करें

भोपाल पैन कार्ड और आधार कार्ड आज के समय में बेहद जरूरी दस्तावेज बन चुके हैं। बैंकिंग से लेकर टैक्स फाइलिंग और सरकारी योजनाओं तक, हर जगह इनकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर इन दोनों दस्तावेजों की डिटेल्स में कोई गड़बड़ी या mismatch है, तो आपको भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, 1 अप्रैल से उन लोगों पर कार्रवाई हो सकती है जिनके पैन कार्ड और आधार कार्ड में नाम एक जैसा नहीं है या स्पेलिंग में अंतर है। ऐसी स्थिति में संबंधित पैन कार्ड निष्क्रिय (inactive) हो सकता है, जिससे कई वित्तीय कार्य प्रभावित होंगे। क्या हो सकते हैं नुकसान? इनकम टैक्स रिफंड मिलने में दिक्कत, TDS अधिक कट सकता है,बैंकिंग और KYC प्रक्रियाएं प्रभावित, वित्तीय लेन-देन में परेशानी..इसलिए यदि आपके आधार और पैन में नाम अलग-अलग दर्ज है, तो इसे जल्द से जल्द ठीक कर लेना जरूरी है। कैसे करें आधार कार्ड में नाम अपडेट? सबसे पहले अपने मोबाइल में आधार से संबंधित ऐप या आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करें, लॉगिन करने के लिए आधार नंबर और OTP दर्ज करें “Update Aadhaar Online” विकल्प पर क्लिक करें ,नाम अपडेट का विकल्प चुनें ,जरूरी दस्तावेज अपलोड करें ,निर्धारित शुल्क का भुगतान करके सबमिट करें.. इसके बाद आप स्टेटस चेक करके देख सकते हैं कि आपका अपडेट पूरा हुआ या नहीं। पैन कार्ड में नाम कैसे बदलें? NSDL या UTIITSL की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं “Changes/Correction in PAN” विकल्प चुनें पैन नंबर, नाम, जन्मतिथि और ईमेल जैसी जानकारी भरें सबमिट करने पर एक टोकन नंबर जनरेट होगा। आवश्यक बदलाव चुनकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करें,शुल्क का भुगतान कर फॉर्म सबमिट करें.. अंत में acknowledgement स्लिप डाउनलोड कर लें। अगर आपके पैन और आधार कार्ड की जानकारी एक जैसी नहीं है, तो इसे तुरंत अपडेट करना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी आपको भविष्य में होने वाली बड़ी परेशानियों से बचा सकती है। एलपीजी के रेट से लेकर इनकम टैक्स के नियमों तक आइए जानते हैं कि 1 अप्रैल से क्या कुछ बदल जाएगा? 1-न्यू इनकम टैक्स लॉ इनकम टैक्स एक्ट 2025 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगा। यह इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। नए एक्ट में ‘एसेसमेंट ईयर’, ‘प्रीवियस ईयर’ जैसे कंफ्यूज करने वाले शब्दों को टैक्स ईयर ही कहा जाएगा। 2-टैक्स में मिलेगी अधिक छूट न्यू टैक्स रिजीम की वजह से 12 लाख रुपये तक की आय पर अब कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। सेक्शन 87 A में किए गए बढ़ाए गए छूट की सीमा की वजह से टैक्सपेयर्स को न्यू टैक्स रिजीम में यह फायदा होगा। 3- टीडीएस फॉर्म में बदलाव 1 अप्रैल 2026 से फॉर्म 16 और फॉर्म 16 A की जगह फॉर्म 130 और फॉर्म 131 ले लेगा। इस बदलाव के पीछे की वजह से टैक्सपेयर्स को अधिक सुविधा देना है। 4- पैन कार्ड का नियम हुआ कठिन 1 अप्रैल से पैन कार्ड बनवाना इतना आसान नहीं रह जाएगा। अभी तक पैन कार्ड के लिए सिर्फ आधार कार्ड ही जरूरी होता है। लेकिन 1 अप्रैल से बर्थ सर्टिफिकेट के लिए 10वीं की मार्कशीट और पासपोर्ट जैसे डॉक्यूमेंट भी जरूरी हो जाएंगे। 5- LPG की कीमतों पर फैसला 1 अप्रैल को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव देखने को मिल सकता है। ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से एलपीजी की सप्लाई बाधित हुई है। अब देखना है कि मार्च की तरह अप्रैल में भी कीमतों में कोई इजाफा होगा या नहीं। 6- CNG, PNG, ATF प्राइस अप्रैल के पहले दिन सीएनजी, पीएनजी और एटीएफ की कीमतों में भी बदलाव किया जा सकता है। अगर कोई चेंज होता है तो इसका सीधा असर आपकी-हमारी जेब पर पड़ेगा। 7- ATM से निकासी के नियम एचडीएफसी बैंक 1 अप्रैल से यूपीआई एटीएम से निकासी की लिमिट में बदलाव करने जा रहा है। अगर आप महीने में 5 ट्रांजैक्शन से अधिक करेंगे तब की स्थिति में हर एक ट्रांजैक्शन पर आपको 23 रुपये का भुगतान करना होगा। बंधन बैंक ने मेट्रो शहरों में फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन की लिमिट को 5 से घटाकर 3 कर दिया है। अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर बैंक आपसे 23 रुपये लेगा। अगर कम बैलेंस की वजह से ट्रांजैक्शन पूरा नहीं होता है तब की स्थिति में आपसे बैंक 25 रुपये वसूलेगा। 8-विथड्रॉल लिमिट को बैंक ने घटाया पंजाब नेशनल बैंक ने कुछ सिलेक्टेड डेबिट कार्ड की विथड्रॉल लिमिट को 75000 रुपये से घटाकर 50,000 रुपये कर दिया है। यह नियम में 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगा। 9- टिकट कैसिंल रिफंड के नियमों में बदलाव अगर आप किसी ट्रेन के प्रस्थान से 8 घंटे के अंदर टिकट कैंसिल करते हैं तब की स्थिति में आपको कोई रिफंड नहीं मिलेगा। पहले यह टाइमलाइन 4 घंटे की थी। 10- क्या है रेलवे का नया रिफंड स्ट्रक्चर 1-ट्रेन के प्रस्थान होने से 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर 50 प्रतिशत रिफंड दिया जाएगा। 2- अगर कोई टिकट 24 घंटे से 72 घंटे में टिकट कैंसिल होता है तब की स्थिति में 25 प्रतिशत कटौती होगी। 3- ट्रेन के प्रस्थान होने से 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर अधिकतम पैसा रिफंड हो जाएगा। ध्यान रखें इस स्थिति में भी पूरा पैसा रिफंड नहीं होगा।

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: शादीशुदा और बालिग महिला की सहमति से संबंध को रेप नहीं माना जाएगा

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक बड़े फैसले के चर्चे हो रहे हैं। दरअसल कोर्ट ने एक बालिग और शादीशुदा महिला की सहमति से बने शारीरिक संबंधों पर अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सहमति से बने शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया कि किसी बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज करके बड़ा फैसला दिया । ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ पीड़िता की अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी से बनाए शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। इस फैसले को काफी अहम और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिला बेमेतरा से जुड़ा है ये मामला आपको बता दें कि यह मामला बेमेतरा जिले से जुड़ा है, जहां पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की मंजूरी मांगी थी लेकिन हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट के निर्णय को ही सही माना और याचिका खारिज कर दी। आखिर क्या था पूरा मामला मामला कृषि महाविद्यालय में मजदूरी करने वाली महिला से जुड़ा है,वहीं पर आरोपी भी काम करता था। इसी दौरान आरोपी  ने उससे बात करना शुरू किया और शादी करने का वादा किया। आरोपी उसे अपने  घर ले गया और दुष्कर्म किया। लेकिन महिला पहले से ही तीन माह के गर्भ से थी। लोक लाज से किसी को  ये बात नहीं बताई लेकिन पति के पूछने पर सारी वारदात बताई और फिर थाने में रिपोर्ट लिखाई। ट्रायल कोर्ट ने गवाहों एवं मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपित को बरी कर दिया गया जिस पर पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। लेकिन सुनवाई में पता चला कि महिला ने  सहमति से शारीरिक संबंध बनाया था। इसी पर  कोर्ट ने कहा कि एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध में दुष्कर्म का मामला नहीं बनता है। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास: चालू वित्तीय वर्ष में 6 लाख से अधिक ग्रामीण आवास हुए पूर्ण

छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास: चालू वित्तीय वर्ष में  6 लाख से अधिक ग्रामीण आवास पूर्ण चालू वित्तीय वर्ष में देश में सर्वाधिक आवास निर्माण प्रदेश में योजना आरंभ से एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास निर्माण आवास से बदली तस्वीर: 9 हजार से ज्यादा महिलाएं बनीं “लखपति दीदी” तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही का मॉडल बना छत्तीसगढ़ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण आवास निर्माण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए हैं। यह इस वर्ष देश में सर्वाधिक आवास निर्माण का आंकड़ा है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री जनमन योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के सशक्त एवं समन्वित क्रियान्वयन से यह उपलब्धि संभव हो पाई है। इससे प्रदेश आवास निर्माण के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरा है। “सबको आवास” के लक्ष्य को तेजी से साकार करने के लिए वर्तमान सरकार के प्रथम कैबिनेट निर्णय में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे। वर्तमान में , सर्वे सूची में शामिल सभी पात्र हितग्राहियों को कवर कर लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित न रहे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 5.87 लाख, प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 13 हजार तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 10 हजार से अधिक आवास पूर्ण किए गए हैं। योजनाओं के प्रभावी समन्वय से 6 लाख से अधिक आवासों का लक्ष्य पार किया गया है। यह उपलब्धि वर्ष 2016 में योजना प्रारंभ होने के बाद *प्रदेश में किसी एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास पूर्ण होने का रिकॉर्ड है, *जो तेज क्रियान्वयन और प्रभावी मॉनिटरिंग को दर्शाता है। आवास निर्माण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई गति आई है। “डीलर दीदी” मॉडल के तहत 9 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूह सदस्य आवास निर्माण की सामग्री आपूर्ति कर  “लखपति दीदी” बनकर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। इसके साथ ही हजारों महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका के अवसर प्राप्त हुए हैं। साथ ही, 6 हजार से अधिक राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें 1200 से अधिक “रानी मिस्त्री” शामिल हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक आजीविका के अवसर प्रदान किए गए हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए टोल-फ्री नंबर 18002331290 संचालित है। पिछले 10 महीनों में इस पर 1500 से अधिक शिकायतें एवं सुझाव प्राप्त हुए, जिनका त्वरित निराकरण किया गया है। हर माह की 7 तारीख को सभी ग्राम पंचायतों में “आवास दिवस” के माध्यम से जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।इसके साथ-साथ ग्राम पंचायत स्तर पर क्यू आर कोड आधारित सूचना प्रणाली से जानकारी सहज उपलब्ध हो रही है । छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन , समावेशी विकास एवं पारदर्शिता की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में स्थापित हो रहा है।