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विधायक संजय पाठक पर 443 करोड़ वसूली का दबाव, कलेक्टर का जारी हुआ अंतिम नोटिस

जबलपुर   मध्य प्रदेश की विजयराघवगढ़ विधानसभा से भाजपा विधायक संजय पाठक की मश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। 443 करोड़ रुपए की राशि जमा करने में लेट लतीफी की वजह से विधायक संजय पाठक और उनके परिवार से जुड़ी फर्मों को पहले नोटिस जारी किया गया था। लेकिन, इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही राशि जमा नहीं की गई। अब जबलपुर कलेक्टर न्यायालय ने इस मामले में इन फर्मों को आखिरी मौका के साथ समय समाप्ति नोटिस जारी किया है। यदि इस नोटिस का जवाब नहीं दिया गया तो इसके बाद सख्त कार्रवाई (जुर्माना, संपत्ति कुर्की आदि) हो सकती है।  मामला क्या है? संजय पाठक और उनके परिवार से जुड़ी फर्मों पर आरोप है कि उन्होंने तय सीमा से काफी अधिक आयरन ओर (लौह अयस्क) का खनन किया। जांच में सामने आया कि करीब 84.57 लाख टन अतिरिक्त खनन हुआ। इसके बदले सरकार को 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार रुपए रुपये की राशि वसूलनी है। तीन फर्मों को जारी किया गया नोटिस     निर्मला मिनरल्स (परिवार से जुड़ी)     आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन (परिवार से जुड़ी)     पेसिफिक एक्सपोर्टर्स (संचालक: सुमित अग्रवाल)  ये सभी फर्म मध्य प्रदेश के सिहोरा क्षेत्र में खनन कार्य कर रही थीं अभी क्या स्थिति है? पहले नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। न ही राशि जमा की गई। अब जबलपुर कलेक्टर न्यायालय ने अंतिम मौका (Time Expiry Notice) दिया है नियम क्या कहते हैं? नियमों के मुताबिक, खनन के लिए पर्यावरण और सरकारी अनुमति जरूरी होती है। तय सीमा से ज्यादा खनन करना गैरकानूनी है। ऐसी स्थिति में सरकार अतिरिक्त खनन की कीमत के साथ जुर्माना वसूलती है। जांच कैसे हुई? मामला पहले स्थानीय स्तर पर नहीं पकड़ा गया । शिकायत के बाद राज्य स्तरीय समिति ने जांच की गई जिसके बाद 2004 से 2017 तक के रिकॉर्ड (उत्पादन, अनुमति, पर्यावरण क्लीयरेंस) की जांच हुई । इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता और अतिरिक्त खनन पाया गया । आगे क्या हो सकता है? अगर फर्में पैसा जमा नहीं करतीं हैं तो संपत्ति जब्त हो सकती है  या कानूनी कार्रवाई और केस मजबूत हो सकता है  और अगर जवाब देती हैं तो कोर्ट में अंतिम फैसला होगा।

अब कूलरों में भी मिलेगी स्टार रेटिंग, ‘AC’ की तरह कम होगा बिजली बिल

भोपाल  गर्मी आते ही कूलर, एसी की डिमांड अचानक से बढ़ गई है। कूलिंग इंडस्ट्री ग्राहकों की सोच में आए परिवर्तन से एक बार फिर सेलिंग में जुटी हुई है। इस बार कूलर थोड़े अलग देखने को मिल रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि मार्केट में पहली बार स्टार रेटिंग कूलर बाजार में आए हैं। इनकी खासियत है बिजली की खपत कम करना। इससे कस्टमर सस्ता ही नहीं बल्कि स्टार रेटिंग पावर सेविंग ले सुविधा के साथ बिजली बचाने वाले उपकरण यथा सोलर ऑप्शन वाले फ्रीज, सोलर खरीद रहा है। इससे बिजली बिल में भी कमी आएगी। कारोबारी के अनुसार इस साल कूलिंग प्रोडक्ट्स की डिमांड में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। ग्राहक अब ज्यादा पावर सेविंग प्रोडक्ट्स चुन रहे हैं। देशभर में बढ़ती गर्मी और 2026 में संभावित हीटवेव के चलते एसी, एयर कूलर, फ्रीज और फैन की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। एसी, फ्रीज और आइसक्रीम पार्लर इक्विपमेंट की सेल 8 से 10 फीसदी तक बढ़ी हुई है। सोलर इक्विपमेंट की डिमांड ज्यादा सोलर इक्विपमेंट खासकर सोलर इन्वर्टर की डिमांड में खासा इजाफा हुआ है। कारोबारी बताते हैं कि गर्मी और बिजली बचत के कारण लोग अब ज्यादा एनर्जी-एफिशिएंट और सोलर बेस्ड प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं। वैसे भी सरकार ने 1 जनवरी 2026 से कई प्रोडक्ट्स पर स्टार रेटिंग अनिवार्य कर दी है। उन्होंने बताया कि कई उपभोक्ता अब घरों में सोलर इन्वर्टर और सोलर पावर सिस्टम लगवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि बिजली कटौती के समय भी निर्बाध बिजली मिल सके और लंबे समय में बिजली खर्च में भी बचत हो सके। कीमत की मार नए नियमों के कारण एसी 7 से 10 प्रतिशत एवं फ्रीज 3 से 5 फीसदी महंगा बिक रहा है। तेजी की वजह कॉपर और कच्चे माल की कीमतें बढऩा है। सीलिंग में सबसे ज्यादा डिजाइन है। दो दर्जन से अधिक वैरायटी है। कूलर में स्टार रेटिंग पहली बार पानी से संचालित कूलर में भी स्टार रेटिंग व सेविंग मॉडल आ रहे हैं। कारोबारी बताते हैं कि स्टार रेटिंग होने से कूलर जहां बिजली की खपत कम करेगा वहीं यह सेफ्टी के लिहाज से बेहतर हैं। प्लास्टिक कोटिंग वाले इस कूलर की कीमत सामान्य मिलने वाले कूलर से अधिक है। फिलहाल इसे ग्राहकों की मांग पर बुलवा रहे हैं। इसमें इन्वर्टर और लोपॉवर कंजप्शन प्रोडक्ट्स की मांग उम्मीद से अधिक है। गौर करें ये बातें मार्केट में पहली बार स्टार रेटिंग कूलर सेफ्टी के लिहाज से बेहतर होगा ये कूलर कम होगी बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है मांग

2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां, जालंधर में बनेगा कैंप, MP चन्नी और CM मान का चुनावी क़िला

जालंधर जालंधर से सांसद एवं पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने जालंधर के खजूरला गांव में अपना घर बना लिया है। चन्नी ने बताया कि घर में पाठ रखा है।को पाठ के भोग के साथ गृह प्रवेश होगा। चन्नी ने कहा कि चुनाव के वक्त उन्होंने जालंधर के लोगों से वादा किया था कि वह यहीं पर रहेंगे। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी जालंधर के गांव खजूरला का चुनाव किया गया है। ये गांव रोड कनेक्टेड होने के साथ कैंटोनमेंट के पास है। हाईवे से कनेक्ट भी है। जालंधर विधानसभा चुनाव का कैंप बनना शुरू हो गया है। इससे पहले सीएम भगवंत मान ने भी ओल्ड बारादरी में अपना घर लिया है। भाजपा के बड़े नेताओं के पहले से ही जालंधर में घर हैं। चन्नी ने कहा कि लोगों के साथ किया अपना एक और वादा पूरा कर दिया है। चुनाव के दौरान उन्होंने वादा किया था कि वह सिर्फ वोट लेने नहीं आए, बल्कि जालंधर के पक्के निवासी बनकर यहां के लोगों की सेवा करेंगे। इसी वादे को निभाते हुए उन्होंने जालंधर में अपना नया घर तैयार कर लिया है। जहां अब वह पक्के तौर पर रहेंगे। 5 कनाल में बनाए घर-आफिस में आज पाठ का भोग अपने इस नए घर के बारे में जानकारी देते हुए चन्नी ने बताया कि यह एक बहुत ही साधारण पर सुविधाजनक घर है। इसमें निचली मंजिल पर एक बड़ा ऑफिस बनाया गया है ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को मिलने में कोई दिक्कत न आए। ऊपरी मंजिल पर उनका बेडरूम है। उन्होंने कहा कि पहले वह किराए के फ्लैट में रह रहे थे, जहां आम लोगों का आना-जाना थोड़ा मुश्किल था, पर अब जीटी रोड के नजदीक इस घर में कोई भी आसानी से पहुंच सकता है। पूरे हलके के लोगों को पहुंचना आसान होगा सांसद चन्नी के मुताबिक यह जगह कुदरती तौर पर ऐसी मिल गई है जो जालंधर शहर के साथ-साथ नकोदर, फिल्लौर और गोराया जैसे इलाकों के लोगों के लिए भी बहुत नजदीक पड़ती है। उन्होंने कहा कि जालंधर के लोगों ने उन्हें बहुत मान बख्शा (सम्मान दिया) है, इसलिए वह अब अपना ज्यादातर समय यहां ही बिताएंगे। संसद के सेशन के दिनों को छोड़कर वह बाकी सारा समय जालंधर में ही मौजूद रहेंगे। चन्नी बोले- अब यह घर ही बाहरी कहने वालों को जवाब देगा नए घर में प्रवेश करने के मौके पर उन्होंने धार्मिक मर्यादा का पूरा ख्याल रखा है। उन्होंने बताया कि घर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश करवाया गया है और पाठ के भोग डाले जाएंगे। इस मौके कीर्तन का प्रवाह भी चलेगा। उनकी पत्नी भी जालंधर पहुंच चुकी है और जल्द ही बच्चे भी उनके साथ यहां रहने के लिए आ जाएंगे। विरोधियों द्वारा बाहरी कहे जाने के सवाल पर चन्नी ने मुस्कुराते हुए कहा कि अब यह घर ही उन सबको जवाब देगा।  

किसान की फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए हरियाणा सरकार प्रतिबद्ध: अमित अग्रवाल का बयान

चंडीगढ़  हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल ने जिला उपायुक्त (डीसी) आयुष सिन्हा के साथ फरीदाबाद जिले की मोहना अनाज मंडी का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंडी से जुड़ी समस्याओं को लेकर किसान, आढ़ती व अन्य संबंधित हितधारकों से चर्चा कर फीडबैक लिया। निरीक्षण दौरे में किसानों की मांग पर प्रतिबद्धता जताते हुए मौके पर ही समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के स्पष्ट निर्देश दिए है कि किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदा जाएगा और साथ ही गेहूं की खरीद के बाद भुगतान किसानों के खातों में सीधे स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने किसानों के आश्वस्त करते हुए कहा कि "मेरी फसल मेरा ब्यौरा" पोर्टल के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है, जिससे किसान स्वयं अपनी फसल का पंजीकरण और ट्रैकिंग कर सकते हैं। पंजीकरण से किसी कारण वंचित किसानों को पुनः पंजीकरण की सुविधा जल्द उपलब्ध करवाई जाएगी।  बीते दस वर्षों से लगातार किसान हित में अग्रणी भूमिका निभा रही हरियाणा सरकार   अमित अग्रवाल ने किसानों को पिछले 10 वर्षों में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में की गई उपलब्धियां की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की नीतियों ने 'अन्नदाता' को 'उद्यमी' बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पड़ोसी राज्यों की तुलना में प्रदेश के किसानों को अधिक लाभ दिए जा रहे है। सरकार का एकमात्र उद्देश्य जनहित है। उन्होंने कहा कि किसान व कृषि कार्यों से जुड़े हितधारकों की समस्या व सुझाव पर सरकार का पूरा फोकस है। उन्होंने हितधारकों को आश्वस्त किया कि बीते वर्ष में आई किसी भी समस्या का इस बार दोहराव नहीं होगा। अधिकारी अपने स्तर पर फसल खरीद, उठान व भंडारण के अलावा मंडी में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने बताया कि मंडी में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कांटे, किसान सुविधा केंद्र तथा अटल किसान कैंटीन जैसी व्यवस्थाएं शुरू की गई हैं। अटल किसान कैंटीन में मात्र 10 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे किसानों और मजदूरों के लिए राहत कार्य किए जा रहे हैं। किसान व आढ़ती वर्ग ने सरकार की फसल खरीद प्रक्रिया से संतुष्टि जताई। 

विक्रमोत्सव 2026 में एमपी टूरिज्म पवेलियन होगा मुख्य आकर्षण, पर्यटन स्थलों की होगी विस्तार से जानकारी

उज्जैन विक्रमोत्सव 2026 के तहत मध्य प्रदेश के उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल के बीच वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है, जिसका भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में होगा। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से बी.एल.डब्ल्यू. मैदान आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे। आयोजन में हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा। वहीं इस दौरान मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत के साथ पर्यटन स्थलों के आकर्षक रूप में प्रदर्शित करता एमपी टूरिज्म पवेलियन आकार्षण का केंद्र होगा। सीएम की परिकल्पना से तैयार हुआ 'सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य' मुख्यमंत्री डॉ. यादव की परिकल्पना से तैयार पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित द्वारा रचित और राजेश कुशवाहा द्वारा निर्मित और संजीव मालवी के भाव निर्देशन में प्रस्तुत महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य भारत की सांस्कृतिक चेतना को जगाने वाला अनुभव है। इसमें 200 से ज्यादा कलाकार हाथी, घोड़े, रथ, पालकियां भव्य युद्ध लाइट शो, आतिशबाजी नृत्य और बाबा महाकाल की भस्म आरती की दिव्या झलकियां शामिल है। महान सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से राजतिलक तक की गाथा, विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महा काव्य कथा इस महानाट्य में जीवंत होती है। प्रदेश की विविधता और वैभव से परिचित कराएगा आयोजन सचिव, मुख्‍यमंत्री और पर्यटन डॉ. इलैयराजा टी. ने कहा कि, विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत वाराणसी में आयोजित यह महानाट्य केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, न्यायप्रियता और गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। इस विशेष अवसर पर एमपी टूरिज्म पवेलियन इस दिशा में एक आकर्षक केंद्र बनेगा, जो आगंतुकों को प्रदेश की विविधता और वैभव से परिचित कराएगा। एमपी टूरिज्म पवेलियन बनेगा आकार्षण का केंद्र 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में एमपी टूरिज्म पवेलियन में प्रदेश की पारंपरिक कला और अद्भुत कारीगरी देखने को मिलेगी। खजूर की पत्तियों से बनी टेराकोटा कलाकृतियां भी लोगों का ध्यान आकर्षित करेगी। बुंदेली, गोंड और भील पेंटिंग्स में जनजातीय संस्कृति की झलक भी दिखेगी। एमपी के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल्स मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल्स भी लगेंगे। फूट कोर्ट में इंदौर के प्रसिद्ध पोहा–जलेबी, मक्के के कीस, मालवा की कचौरी, डिंडौरी के उड़ल दाल व कोदो भात और कुटकी के गुड वाली खीर–जलेबी, बघेलखंडी निमोना और पुड़ी, बेड़ई पुड़ी और हींग वाले आलू जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ बुंदेलखंडी स्ननाटा छाछ, लेमन पुदिना, आम पना, सब्जा शिकंजी, गुलाब मलाई लस्सी, मावा बाटी जैसे शीतपेयों और मिष्ठान का नागरिक आनंद ले सकेंगे।  

12वें चरण की शराब दुकान नीलामी कल, आबकारी विभाग को मिलेगा पांच हजार करोड़ का राजस्व, टेंडर आज 2 बजे खुलेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत 1 अप्रैल से शराब के नए ठेके भले ही शुरू हो गए हों, लेकिन अब भी 650 समूह और दुकानें नीलामी से बाहर हैं। हालांकि इनमें से कई दुकानों को होल्ड पर रखा गया है, जिन्होंने आरपी से 20 प्रतिशत से ज्यादा पर आॅफर दिए हैं। कई बची हुई दुकानों के लिए बुधवार को 11वें राउंड की नीलामी आयोजित की गई। आबकारी विभाग के अनुसार, 11वें राउंड में 21 शराब दुकानें 130.97 करोड़ रुपए में बिकीं, जबकि इनका कुल रिजर्व प्राइस (आरपी) 150.60 करोड़ रुपए था। यानी इस राउंड में नीलामी आरपी से कम दर पर हुई। वहीं 10वें और 11वें राउंड में आरपी से 20 प्रतिशत से अधिक कम दर पर आए ऑफर को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। इनके बारे में सरकार एक-दो दिनों  में निर्णय लेगी। जिन दुकानों की नीलामी नहीं हो सकी, वहां फिलहाल आबकारी अमले द्वारा अस्थाई रूप से शराब की बिक्री की जा रही है, ताकि राजस्व प्रभावित न हो। विभाग के सामने अब भी सालाना लक्ष्य पूरा करने की चुनौती है, जिसके लिए करीब 5,080 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाना बाकी है। प्रदेश में कुल 3,553 शराब दुकानें हैं, जिनमें से अब तक 11 राउंड 1200 समूहों और दुकानों की नीलामी पूरी हो चुकी है। बची हुई दुकानों के लिए अब 12वें राउंड की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 3 अप्रैल दोपहर 2 बजे तक ई-टेंडर भरे जाएंगे और इसके तुरंत बाद टेंडर खोले जाएंगे।  बीओक्यू की शर्त फिर लागू, 30  फीसदी कम पर दे सकते हैं ऑफर 12वें राउंड में इस बार केवल ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यानी नीलामी (आॅक्शन) नहीं होगी। साथ ही बीओक्यू की शर्त को फिर से लागू कर दिया गया है। अब ठेकेदारों को आरपी से 30 प्रतिशत कम तक आॅफर देने की अनुमति होगी। इससे पहले के राउंड में यह सीमा हटा दी गई थी, जिसके चलते कई जगह 50 प्रतिशत तक कम आॅफर आए थे। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-टेंडर में ऑफसेट प्राइस आरक्षित मूल्य से अधिकतम 30% कम तक ही मान्य होगा। यानी 70% से कम का कोई भी ऑफर स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे न्यूनतम बोली की सीमा तय की गई है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 10वें और 11वें चरण में प्राप्त ऐसे प्रस्ताव, जो आरक्षित मूल्य के 80% या उससे अधिक हैं, उन्हें स्वीकृति प्रक्रिया में शामिल किया जाए। वहीं 80% से कम के उच्चतम ऑफर्स को फिलहाल होल्ड पर रखा जाएगा। ऐसे आवेदकों को दोबारा ईएमडी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। समूह और इकाई स्तर पर होगी नीलामी इस चरण में शराब दुकानों की नीलामी समूह के साथ-साथ समूह में शामिल प्रत्येक दुकान के लिए अलग-अलग भी की जाएगी। राजस्व संतुलन बनाए रखने के लिए जिला समितियां सीमित संख्या में समूहों का पुनर्गठन करेंगी, जिसे आबकारी आयुक्त की मंजूरी जरूरी होगी। जिन जिलों का आरक्षित मूल्य 200 करोड़ रुपए से अधिक है, वहां किसी भी समूह का मूल्य जिले के कुल आरक्षित मूल्य के 20% से ज्यादा नहीं रखा जाएगा। ई-टेंडर का शेड्यूल ऑनलाइन टेंडर फॉर्म डाउनलोड और ऑफर जमा करने की प्रक्रिया आज सुबह 11 बजे से शुरू हुई है, जो 3 अप्रैल को दोपहर 2 बजे तक चलेगी। टेंडर खोलने की प्रक्रिया 3 अप्रैल को दोपहर 2:05 बजे से शुरू होगी। अब तक 1200 समूहों की नीलामी 29 मार्च तक 1200 समूहों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जिससे लगभग 15,409.94 करोड़ रुपए का राजस्व तय हुआ है। यह आरक्षित मूल्य से 3.61% अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में इसमें 24.34% की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य स्तर पर 19,952.89 करोड़ रुपए के लक्ष्य में से अब तक 77.23% नीलामी हो चुकी है, जबकि करीब 5,080.35 करोड़ रुपए का कार्य अभी शेष है। विभाग को उम्मीद है कि लगातार ई-टेंडर प्रक्रिया के जरिए राजस्व में स्थिर बढ़ोतरी बनी रहेगी। अब तक की नीलामी का आंकड़ा –  वर्ष 2026-27 लक्ष्य: 19,952 करोड़ रुपए – कुल नीलामी: 1200 समूह – रिजर्व प्राइस: 14,872.54 करोड़ रुपए – प्राप्त राजस्व: 15,409.94 करोड़ रुपए – आरपी से वृद्धि: 3.61 प्रतिशत – पिछले वर्ष से वृद्धि: 24.34 प्रतिशत – अभी बाकी राजस्व: 5,080 करोड़ रुपए

भाजपा का बड़ा कदम, मध्य प्रदेश के 18 जिलों में नए जिला कार्यालय बनाएगी, एक साल में होंगे तैयार

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी प्रदेश के 18 जिलों में नए और आधुनिक जिला कार्यालय बनाने जा रही है। इन सभी कार्यालयों का निर्माण एक साल के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। भाजपा के स्थापना दिवस 6 अप्रैल को सभी 18 जिलों में एक साथ इन कार्यालयों का भूमिपूजन किया जाएगा। पार्टी इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी में है। पार्टी प्रत्येक जिला कार्यालय के निर्माण पर करीब डेढ़ करोड़ से ढाई करोड़ रुपए तक खर्च करेगी। इन भवनों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि संगठनात्मक कामकाज बेहतर तरीके से हो सके।  8 से 12 हजार वर्गफीट में बनेंगे भवन इन नए कार्यालयों का निर्माण 8 हजार से 12 हजार वर्गफीट क्षेत्र में किया जाएगा। छोटे जिलों में थोड़े छोटे और बड़े जिलों में बड़े भवन बनाए जाएंगे। सभी सुविधाओं से होंगे लैस हर जिला कार्यालय में मीटिंग हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम, डिजिटल सुविधा, कंप्यूटर कक्ष और कार्यकर्ताओं के बैठने की व्यवस्था होगी। कुछ जगहों पर छोटे गेस्ट रूम भी बनाए जाएंगे। पार्टी ने तय किया है कि सभी कार्यालयों का निर्माण एक साल के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, ताकि 2027 तक इनका उपयोग शुरू हो सके। इन जिलों में बनेंगे कार्यालय इन नए कार्यालयों का निर्माण प्रदेश के कई जिलों में किया जाएगा, जिनमें प्रमुख रूप से सीधी, शहडोल, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पन्ना, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, उमरिया, अनूपपुर, डिंडोरी, बालाघाट, सिंगरौली और आगर-मालवा शामिल हैं। 

पेट के मोटापे की समस्या: भारत में 10 में से 6 महिलाएं शिकार, कमर के साइज से जानें खतरा

भोपाल  भारत में 30 से 49 साल की हर दस में पांच-छह महिलाओं को पेट की चर्बी की समस्या है. पुरुषों से कहीं ज्यादा महिलाएं इससे जूझ रही हैं. डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण. BMI से बेहतर कमर नापना जरूरी, क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. भारत में मोटापे की परिभाषा बदल रही है क्योंकि एक्सपर्ट अब सिर्फ वेट मशीन पर दिखने वाले वजन से ही लोगों को ओवरवेट या मोटापे का शिकार नहीं मान रहे हैं, बल्कि वे अब कमर के बढ़ते साइज से भी मोटापे का पता लगा रहा हैं।  डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं 'एब्डोमिनल ओबेसिटी' यानी पेट के मोटापे का ज्यादा शिकार हो रही हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि 30 से 49 साल की उम्र वाली 10 में से करीब 6 महिलाएं इस समस्या से घिरी हुई हैं।  एक्सपर्ट्स इसे एक मेटाबॉलिक इमरजेंसी मान रहे हैं।  क्या कहती है रिसर्च? आमतौर पर हम मोटापे को बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से नापते हैं, लेकिन यह स्टडी बताती है कि BMI शरीर की असल स्थिति छुपा सकता है क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. कई बार वजन सामान्य होने के बावजूद पेट पर जमी चर्बी अंदरूनी अंगों के लिए खतरनाक होती है इसलिए कमर की माप मापना सही रहेगा।  स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण है।  स्टडी बताती है कि भारत में महिलाओं में एब्डॉमिनल ऑबेसिटी पुरुषों से ज्यादा है. NFHS-5 (2019-21) डेटा से पता चलता है कि भारत में 40% महिलाएं और 12% पुरुष पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं. महिलाओं के लिए 80 सेमी और पुरुषों के लिए 94 सेमी से अधिक कमर का घेरा इस खतरे की श्रेणी में आता है. यह समस्या अब गांवों और मिडिल क्लास तक फैल चुकी है।  फोर्टिस C-DOC के चेयरमैन डॉ. अनूप मिश्रा कहते हैं, 'कमर नापना आसान है. हर डॉक्टर को मेजरमेंट टेप रखना चाहिए. यह डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कैंसर का संकेत देता है. BMI एशियंस के लिए सटीक नहीं इसलिए वेस्ट सर्कम्फरेंस (कमर का घेरा) पर फोकस करें. यह ट्रेंड टीनएजर्स में भी दिख रहा, जो बचपन की कुपोषण के बाद फास्ट लाइफस्टाइल से प्रभावित हैं।  कारण और जोखिम रिसर्च के मुताबिक, उम्र बढ़ना, शहरों में रहना, अधिक कमाई और नॉन-वेज खाना महिलाओं में पेट की चर्बी बढ़ा रहा. लीवर-पैंक्रियास के आसपास फैट मेटाबॉलिक रिस्क बढ़ाता है. स्टडी चेतावनी देती है इससे टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी और यहां तक कि ब्रेस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।  खासकर मिड एज की लड़कियों में यह ट्रेंड अधिक देखा जा रहा है जो कम उम्र में खराब न्यूट्रिशन और फिर अचानक बदली हुई लाइफस्टाइल का नतीजा है।  कैसे रोक सकते हैं इस समस्या को एक्सपर्ट्स कहते हैं, टेप से कमर नापें और रूटीन चेकअप कराएं. हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज से इस समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. अब जनरल ऑबेसिटी नहीं बल्कि एब्डॉमिनल पर भी ध्यान देने की जरूरत है. ये समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रही है इसलिए शहरी महिलाओं को खास ध्यान देने की जरूरत है. एक्सपर्ट्स अब सलाह दे रहे है कि वजन चेक करने के साथ-साथ अपनी कमर का घेरा नापना भी उतना ही जरूरी हो गया है। 

Rupee vs Dollar: RBI का बड़ा फैसला, रुपये में आई 12 साल की सबसे बड़ी तेजी

नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को लेकर कुछ कड़े फैसले लिए हैं, जिस कारण रुपये में गिरावट सिर्फ थमी ही नहीं, बल्कि बड़ी उछाल आई है. RBI द्वारा करेंसी में अस्थिरता को कम करने के लिए अतिरिक्‍त उपाय पेश करने के लिए एक दिन बाद यह तेजी आई है।  2 अप्रैल को डॉलर की तुलना में रुपये में 12 सालों से ज्‍यादा समय में सबसे अधिक तेजी देखी गई है, जबकि बैंक अपने ऑफशोर लॉन्ग डॉलर पोजीशन को कम करना जारी रखे हुए थे. करेंसी मार्केट खुलने के बाद करेंसी ट्रेड फिर से शुरू होने पर रुपया डॉलर के मुकाबले 1.8 प्रतिशत तक बढ़कर 93.17 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद सबसे ज्‍यादा है।  क्‍यों आई इतनी बड़ी तेजी?  1 अप्रैल को, RBI ने फॉरेक्‍स मार्केट के नियम को कड़ा किया है. आरबीआई ने बैंकों को रेजिडेंस और नॉन-रेजिडेंस कस्‍टमर्स को रुपये के नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड (एक तरह का फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट) जारी करने से रोक दिया. नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड एक तरह का कॉन्‍ट्रैक्‍ट है, जो  फ्यूचर में रुपया का स्‍तर क्‍या होगा? उस आधार पर खरीदारी करने की अनुमति देता है. एक तरह से आप इसे करेंसी में डेरिवेटिव ट्रेडिंग भी कह सकते हैं. बस इसी कॉन्‍ट्रैक्‍ट को जारी करने से आरबीआई ने रोक लगा दी है. आरबीआई ने यह भी कहा कि कंपनियां रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट को दोबारा बुक नहीं कर सकतीं।  रुपये में गिरावट के कई कारण  सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली रही है. मार्च महीने में ही विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने 1.11 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग कर डाली थी. इसके साथ ही जंग के शुरू होने से दुन‍िया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है. साथ ही होमुर्ज के रास्‍ते के बंद होने की वजह से कच्‍चे तेल के दाम में लगातार तेजी रही है, जिस कारण रुपये में लगातार गिरावट रही है।  वहीं रुपये पर बैंकों के शुद्ध खुले पदों के जोखिम को सीमित करने के लिए आरबीआई द्वारा कदम उठाए जाने के बावजूद, 30 मार्च को करेंसी में 95 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया. हालांकि, ट्रंप के ईरान वॉर को लेकर दिए गए संबोधन के बाद कच्‍चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।   कच्‍चे तेल के भाव में उछाल  ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान जंग को लेकर अपने लक्ष्‍यों को लगभग हासिल कर ही लिया है. 2 से 3 हफ्तों के दौरान हम एक बड़ा कदम उठाएंगे. हालांकि उन्‍होंने जंग को समाप्‍त करने की कोई समयसीमा नहीं बताई, जिस कारण कच्‍चे तेल के भाव में तगड़ी उछाल देखने को मिली और यह 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया।