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कूनो में बोत्सवाना के चीते हुए फिट, 6 का क्वारंटाइन समाप्त, बड़े बाड़ों में पहली छलांग

 श्योपुर मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों में से 6 चीतों का क्वारंटाइन समय पूरा होगया. जिसके बाद उन्हें बड़े बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया है. कूनो प्रबंधन ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि एक महीने बाद सभी चीते फिट है और कूनो के नए माहौल में रच बस रहे है।  पिछले दिनों 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से कुल 9 चीते कूनो पहुंचे थे, जिनमें 6 मादा और तीन नर शामिल थे. नियम के मुताबिक, इन सभी को अलग रखा गया था. अब सेहत की जांच और अफसरों की मंजूरी के बाद,चार मादा और दो नर चीतों को बड़े बाड़ों में छोड़ दिया गया है।  वन विभाग के अफसरों के मुताबिक बचे हुए तीन चीतों को भी बहुत जल्द बड़े बाड़ों में शिफ्ट कर दिया जाएगा. इसकी तैयारी चल रही है और यह काम भी जल्द ही पूरा हो जाएगा।  अधिकारियों के अनुसार,बोत्सवाना से आए सभी नौ चीते एकदम फिट हैं और उन्हें कूनो का वातावरण रास आ रहा है. भारत से बरसों पहले गायब हो चुके चीतों को वापस लाने की दिशा में इस प्रोजेक्ट को बहुत अहम माना जा रहा है।  चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने 'आजतक' को फोन कॉल पर बताया कि इन सभी की सेहत और रहने-सहने के ढंग पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है, ताकि आगे चलकर इन्हें सुरक्षित तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जा सके।  यहां बता दें कि वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में कुल 50 चीते हो गए हैं, जिनमें से 12 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं।  अलग-अलग क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया था बता दें कि बीते 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से विशेष विमान फिर सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए कूनो पहुंचे थे। नौ चीतों के इस जत्थे में 6 मादा और 3 नर शामिल थे। बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत इन्हें अलग-अलग क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया था। विशेषज्ञों की निगरानी के बाद अब 4 मादा और 2 नर चीतों को बड़े शिकार वाले बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया है। अधिकारियों ने दी हरी झंडी वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाकी बचे 3 चीते भी पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें भी अगले कुछ दिनों में बड़े बाड़ों में भेज दिया जाएगा। कूनो प्रबंधन के अनुसार सभी चीते कूनो के वातावरण में बहुत तेजी से ढल रहे हैं। उनकी सेहत और व्यवहार पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। चीता प्रोजेक्ट के तहत वर्तमान में स्थिति     देश में वर्तमान में चीतों की कुल संख्या 53     कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 50     गांधी सागर पार्क में चीतों की संख्या 3     कूनों के खुले जंगल में चीते 12     एनक्लोजर में मौजूद चीतों की संख्या 38 कूनो में चीतों का 'अर्धशतक', देश में कुल 53 चीते कूनों की धरती पर इन चीतों की शिफ्टिंग के बाद नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या अब 50 पहुंच गई है। वहीं गांधी सागर नेशनल पार्क में 3 चीतों को मिलाकर देश में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है।  चीतों का तीसरा घर, ढाई महीने बाद होगी शिफ्टिंग देश के महत्वकांक्षी चीता पुनर्स्थापन प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) को चीतों का तीसरा घर बनाया जाएगा। यहां ग्राउंड पर तेजी से काम चल रहा है। बुंदेलखंड की धरती पर जल्द ही प्रदेश के सबसे बड़े वन्य प्राणियों के घर में चीते दौड़ लगाते नजर आएंगे। करीब 2339 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जहां अब चीता, तेंदुआ और बाघ एक साथ नजर आने की तैयारी है। मोहली रेंज में बनाया जा रहा एनक्लोजर बोमा चीता प्रोजेक्ट व वन विभाग अधिकारियों के अनुसार संभव है, बोत्सवाना से कूनो लाए गए 9 चीतों में से 4 चीतों को नौरादेही शिफ्ट किया जाएगा। इनमें 1 नर और 3 मादा शामिल हो सकते हैं। आगामी मई-जून तक शिफ्टिंग का टारगेट रखा है। नौरादेही में चीतों के लिए सबसे उपयुक्त मोहली रेंज को चुना गया है। यहां घास के विशाल मैदान, छायादार पेड़ और पर्याप्त संख्या में शाकाहारी वन्यजीव मौजूद हैं, जो चीतों के लिए आदर्श परिस्थितियां तैयार करते हैं। इसके अलावा सिंगपुर और झापन रेंज भी चयनित की गई हैं।

मीरी पीरी विवाद पर SGPC अध्यक्ष हरजिंद्र सिंह धामी का अहम दौरा, शाहाबाद में लिया जा सकता है बड़ा निर्णय

कुरुक्षेत्र  शाहाबाद के मीरी पीरी मेडिकल संस्थान में 20 मार्च को हुए विवाद के चलते आज एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंद्र सिंह धामी पहुंचे हैं, जहां वे सैंकड़ों की संख्या में पहुंची संगत के साथ बैठक की जा रही है। बैठक में बड़ा फैसला भी लिया जा सकता है, जिस पर संगत के साथ प्रशासन की भी नजरें टिकी हुई है।  20 मार्च को संस्थान में उस समय बड़ा विवाद हो गया था जब अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे कर्मचारियों से मिलने हरियाणा कमेटी के नामित सदस्य बलजीत सिंह दादूवाल समर्थकों व अन्य पदाधिकारियों के साथ पहुंच गए थे। यहां संस्थान को संभाले जाने को लेकर दादूवाल पक्ष व एसजीपीसी पक्ष आमने-सामने आ गया था तो जमकर हंगामा भी हुआ था, जिसके चलते पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा था। हरियाणा कमेटी उपाध्यक्ष ने इस विवाद के बीच अपने साथ मारपीट किए जाने, पकड़ी उछालने के आरोप भी लगाए थे तो वहीं उन्होंने दादूवाल के साथ मिलकर एसपी को शिकायत भी दी थी। वहीं दूसरे पक्ष ने भी शिकायत दी थी, जिसमें दादूवाल व उनके समर्थकों पर संस्थान पर कब्जे के प्रयास तक के भी आरोप लगाए थे। दादूवाल पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने एसजपीसी पक्ष के सीनियर मीत प्रधान सरदार रघुजीत सिंह विर्क, बलदेव सिंह कैमपुरिया सहित 20 लोगों पर केस दर्ज कर लिया था, जिसके बाद विवाद और भी गहरा गया। जहां अब एसजीपीसी दादूवाल पक्ष पर कार्रवाई की मांग कर रही है वहीं इसी के चलते ही एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंद्र सिंह धामी भी पहुंचे हैं। उनका कहना है कि वे प्रशासन को अपना मांग पत्र सौंपेंगे और प्रशासन मौके पर नहीं पहुंचा तो एसपी कार्यालय का भी घेराव किया जा सकता है। उधर तीन दिन पहले दादूवाल भी हरियाणा कमेटी मुख्यालय पर अपने समर्थकों के साथ बैठक कर धामी से भी बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने का ऐलान कर चुके हैं।  

IAS अंशुल का अलग अंदाज: पूर्णिया DM ने किसानों के साथ खेत में काटी फसल, लोगों ने कहा—पहली बार देखा

पूर्णिया पूर्व (पूर्णिया) जिले में कृषि गतिविधियों की निगरानी और उत्पादन के सटीक आकलन को लेकर मंगलवार को पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार स्वयं खेत में उतरकर गेहूं की फसल की कटाई करते नजर आए। पूर्णिया पूर्व प्रखंड क्षेत्र के रजीगंज पंचायत अंतर्गत रानीपतरा के लोखड़ा गांव में आयोजित गेहूं क्रॉप कटिंग कार्यक्रम में उन्होंने विधिवत उद्घाटन करते हुए किसानों के साथ मिलकर फसल काटी। इस दौरान जिला कृषि पदाधिकारी हरिहर प्रसाद चौरसिया, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी अजित कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी अशोक पंजियार, नोडल कृषि समन्वयक श्याम कुमार, किसान सलाहकार संजीव कुमार, संजीव कुमार सिंह, पौरस कुमार सिंह, रविंद्र कुमार गुप्ता सहित कई अधिकारी एवं कृषि कर्मी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक तरीके से क्रॉप कटिंग की प्रक्रिया अपनाई गई। किसान सलाहकार संजीव कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि 10 गुण 5 मीटर के प्लॉट में गेहूं की कटाई की गई, जिसमें कुल 12.5 किलोग्राम उत्पादन प्राप्त हुआ। इस आधार पर गणना करने पर प्रति हेक्टेयर लगभग 25 क्विंटल गेहूं उत्पादन का आकलन किया गया। यह उत्पादन क्षेत्र के किसानों के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है। डीएम ने किसानों से की बातचीत डीएम अंशुल कुमार ने मौके पर मौजूद किसानों से बातचीत कर खेती के आधुनिक तरीकों, बीज की गुणवत्ता और उर्वरक उपयोग के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक पद्धति अपनाने, समय पर बुआई करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की सलाह दी, ताकि उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो सके। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाएं और उन्हें तकनीकी सहायता समय पर उपलब्ध कराएं। क्रॉप कटिंग कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी ने बीरपुर चौक पर लगे मखाना की खेती का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां मौजूद किसानों से मखाना उत्पादन की प्रक्रिया, लागत और लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। किसानों ने बताया कि मखाना की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल है, जिससे उनकी आय में अच्छी बढ़ोतरी हो रही है। डीएम ने मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह क्षेत्र के लिए आय का बेहतर स्रोत बन सकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मखाना किसानों को हर संभव सहायता प्रदान की जाए, ताकि इस फसल का विस्तार हो सके। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की सक्रियता और किसानों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि जिले में कृषि विकास को लेकर सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। डीएम का सादगी भरा अंदाज और जमीनी जुड़ाव ग्रामीणों के दिलों को छू गया। हैरान रह गए किसान-मजदूर मंगलवार को रजीगंज पंचायत के रानीपतरा मौजा स्थित लोखड़ा गांव में गेहूं की क्रॉप कटिंग के दौरान एक अनोखा और यादगार दृश्य देखने को मिला। खेत में कार्यरत मजदूर उस समय हैरान रह गए, जब एक साधारण व्यक्ति की तरह उनके बीच शामिल होकर पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार गेहूं काटने लगे। शुरुआत में महिला मजदूर-मीरा देवी, रीना देवी, तेतरी देवी, अमीना खातून और कजली देवी-उन्हें पहचान नहीं सकीं, लेकिन जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि उनके साथ काम करने वाला व्यक्ति जिले का डीएम है, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मजदूरों ने बताया कि उन्होंने पहली बार किसी डीएम को इतने करीब से देखा और वह भी उनके साथ खेत में काम करते हुए। डीएम का यह सादगी भरा अंदाज और जमीनी जुड़ाव ग्रामीणों के दिलों को छू गया तथा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। वहीं किसान गयासुद्दीन ने भी कहा कि आप जिलाधिकारी मेरे खेत पर आए और मुझसे जानकारी ली, ये मेरे लिए काफी गर्व की बात है।  

ट्राइबल टैलेंट का दम: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से उभरी नई सितारों की फौज, कोमालिका से अंजलि तक छाए खिलाड़ी

रायपुर छत्तीसगढ़ में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 ने देशभर के जनजातीय समुदायों के खिलाड़ियों को एक साझा मंच पर एकत्रित किया, जहाँ अलग-अलग स्तर के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कुछ के लिए यह बहु-खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का पहला अनुभव था, तो कुछ के लिए यह उनके उभरते हुए करियर का अगला महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इस उद्घाटन संस्करण में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया, जिसमें लगभग 3800 खिलाड़ियों ने नौ खेल विधाओं में प्रतिस्पर्धा की। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर थे, जबकि पारंपरिक खेलों जैसे मल्लखंभ और कबड्डी को प्रदर्शन खेलों के रूप में शामिल किया गया। भारत जहां 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और 2036 ओलंपिक की संभावित मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है, ऐसे में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने विविध जनजातीय पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने और विभिन्न खेलों में भारत की बेंच स्ट्रेंथ को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया। ये खेल छत्तीसगढ़ के तीन शहरों—रायपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर—में आयोजित किए गए। यहाँ कुछ ऐसे खिलाड़ियों की झलक प्रस्तुत है जो पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव छोड़ रहे हैं, और कुछ ऐसे भी जिन्होंने भविष्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन की संभावना दिखाई है। मणिकांता एल (तैराक) खेलों के सबसे सफल खिलाड़ी के रूप में उभरे मणिकांता एल ने तैराकी प्रतियोगिता में आठ स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर कर्नाटक को समग्र चैंपियन बनने की मजबूत नींव दी। 21 वर्षीय मणिकांता पहले भी खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीत चुके हैं और आगामी एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसी तैयारी के तहत उन्होंने कई स्पर्धाओं में भाग लिया। 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक विशेषज्ञ मणिकांता ने अधिकांश रेस में अपना दबदबा कायम रखा। उनका मानना है कि यहां का प्रदर्शन उन्हें एशियाई खेलों के क्वालिफिकेशन के लिए और अधिक फोकस के साथ तैयारी करने का आत्मविश्वास देगा। अंजलि मुंडा (तैराक) ओडिशा के जाजपुर जिले की 15 वर्षीय अंजलि मुंडा तैराकी प्रतियोगिता की सबसे चमकदार उभरती सितारों में से एक रहीं। उन्होंने 200 मीटर फ्रीस्टाइल, 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले, 100 मीटर बैकस्ट्रोक, 50 मीटर बैकस्ट्रोक और 4×100 मेडले में कुल पांच स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि अपने से कहीं अधिक उम्र के खिलाड़ियों को पछाड़ने की क्षमता भी दिखाई। कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की छात्रा अंजलि अपने पहले खेलो इंडिया गेम्स में हिस्सा ले रही थीं, लेकिन प्रतियोगिता के बड़े मंच के बावजूद वह बिल्कुल भी दबाव में नहीं दिखीं। उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने की पूरी क्षमता नजर आती है। कोमालिका बारी (तीरंदाज) दीपिका कुमारी के बाद विश्व कैडेट और विश्व यूथ चैंपियन बनने वाली दूसरी भारतीय कोमालिका बारी 2026 एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की प्रबल दावेदारों में से एक हैं। वह पुणे में चयन ट्रायल की तैयारी कर रही थीं और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में प्रतिस्पर्धा के स्तर को देखते हुए उन्हें लगा कि यहां भाग लेना उनके लिए मूल्यवान मैच प्रैक्टिस साबित होगा। और उनका यह निर्णय सही साबित हुआ। हालांकि वह व्यक्तिगत और मिक्स्ड टीम रिकर्व में स्वर्ण पदक जीतकर लौटीं, लेकिन झारखंड की इस तीरंदाज को हर मुकाबले में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। महिला टीम स्पर्धा में उन्हें फाइनल में नागालैंड से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। किरण पिस्दा (फुटबॉल) छत्तीसगढ़ महिला फुटबॉल टीम की कप्तान किरण पिस्दा ने सामने से नेतृत्व किया और सेमीफाइनल में पेनल्टी शूटआउट के दौरान गोलकीपर के रूप में दस्ताने पहनकर अपनी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। किरण न सिर्फ अपनी टीम की सबसे ज्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी रहीं, बल्कि उन्होंने युवा टीम का शानदार नेतृत्व करते हुए यह भी दिखाया कि बेहतरीन नेतृत्व कैसे किसी टीम को बदल सकता है। किरण पहले ही सैफ प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और क्रोएशियाई लीग में भी खेल चुकी हैं। 24 वर्षीय यह खिलाड़ी अब भारतीय राष्ट्रीय टीम में नियमित स्थान बनाने की उम्मीद कर रही हैं, क्योंकि वह किसी भी पोजीशन पर खेलने में सक्षम हैं। बाबूलाल हेम्ब्रम (वेटलिफ्टर) झारखंड के 19 वर्षीय बाबूलाल हेम्ब्रम 2024 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले अपने राज्य के पहले वेटलिफ्टर बने थे। वह अपने राज्य के पहले ऐसे अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर भी हैं जिन्होंने IWF वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप और एशियन यूथ चैंपियनशिप में पदक जीता है। रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव के रहने वाले बाबूलाल अब जूनियर से सीनियर सर्किट में कदम रख रहे हैं और साई पटियाला के नेशनल कैंप में प्रशिक्षण ले रहे हैं। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में जीता गया रजत पदक उन्हें अब सीनियर खिलाड़ियों को चुनौती देने का आत्मविश्वास देता है। शिव कुमार सोरेन (स्प्रिंटर) झारखंड के धावक शिव कुमार सोरेन ने 100 मीटर और 200 मीटर दोनों स्पर्धाओं में आसानी से स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने 100 मीटर में 10.58 सेकंड और 200 मीटर में 21.51 सेकंड का समय दर्ज किया। बोकारो के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रशिक्षु शिव का मजबूत शारीरिक गठन है और उनमें भविष्य में और तेज दौड़ने की क्षमता दिखाई देती है। झिल्ली दलाबेहरा (ओडिशा) ओडिशा की सबसे सफल वेटलिफ्टरों में से एक झिल्ली दलाबेहरा ने 2020 एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 45 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक और 2021 कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था। भारतीय रेलवे की कर्मचारी झिल्ली ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 53 किलोग्राम वर्ग में भाग लिया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भार्गवी भगोरा (तीरंदाज) गुजरात की 21 वर्षीय भार्गवी भगोरा ने रायपुर में रिकर्व व्यक्तिगत फाइनल में कोमालिका बारी से हार का सामना किया, लेकिन जिस तरह उन्होंने अधिक अनुभवी प्रतिद्वंद्वी को अंत तक कड़ी टक्कर दी, उससे उन्हें जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम के चयन ट्रायल से पहले काफी आत्मविश्वास मिलेगा। अरावली जिले से आने वाली भार्गवी खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के विभिन्न संस्करणों में तीन पदक जीत चुकी हैं और वर्तमान में भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा समर्थित नडियाद हाई परफॉर्मेंस … Read more

पंचायत चुनावों में उपायुक्तों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण पर कोर्ट ने लगाई रोक

शिमला  हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए पंचायत चुनावों में उपायुक्तों को 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की दी गई शक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस प्रावधान को प्रथम दृष्टया असंवैधानिक मानते हुए स्पष्ट किया कि इसके तहत तैयार किसी भी आरक्षण सूची को लागू नहीं किया जाएगा। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण सूची 7 अप्रैल सायं 5 बजे तक हर हाल में अंतिम रूप देकर लागू करें। विस्तृत आदेश का इंतजार है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता नंद लाल ने सरकार के इस निर्णय को मनमाना और संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि 30 मार्च को किए गए संशोधन के तहत उपायुक्तों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने की शक्ति दी गई, जो आर्टिकलट 243डी का उल्लंघन है। अदालत के आदेशों के बाद कुल्लू, शिमला, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जिलों में जारी की गई वे सभी आरक्षण सूचियां, जिनमें यह 5 प्रतिशत आरक्षण शामिल है, अब दोबारा तैयार करनी पड़ सकती हैं। राज्य में 3,600 से अधिक पंचायतों और 73 शहरी निकायों में 31 मई से पहले चुनाव कराए जाने हैं। शहरी निकायों की आरक्षण सूचियां पहले ही जारी हो चुकी हैं, जबकि कई जिलों में पंचायत चुनावों की सूचियां अभी लंबित हैं। पंचायती राज मंत्री अनुरुद्ध सिंह ने कहा कि सरकार अदालत के आदेशों का पूरी तरह पालन करेगी और निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सरकार के लिए शर्मनाक बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर पंचायत चुनावों को असंवैधानिक तरीके से प्रभावित करने का आरोप लगाया। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है, जिसके बाद नए चुनाव आवश्यक हो गए हैं। सरकार ने 30 मार्च 2026 को नियमों में संशोधन कर उपायुक्तों को 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का अधिकार दिया था, जिसे अदालत में चुनौती दी गई। इससे पहले मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था, जहां चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी गई थी। अब हाईकोर्ट के 7 अप्रैल तक आरक्षण सूची अंतिम करने के आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

सागरताल में कूदा पूरा परिवार: ग्वालियर में एक की मौत, दो की हालत गंभीर

ग्वालियर शहर के सागरताल क्षेत्र में मंगलवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने सामूहिक रूप से तालाब में छलांग लगा दी। इस आत्मघाती कदम में परिवार के एक सदस्य की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य को गंभीर अवस्था में बाहर निकाला गया है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने रेस्क्यू कर घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया। पड़ोसियों से प्रताड़ना की आशंका, मौके पर मिले नोट प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आत्महत्या का प्रयास करने वालों में दो भाई और एक बहन शामिल हैं। घायलों की पहचान इदरीश खान और यास्मीन के रूप में हुई है, जबकि मृत सदस्य की शिनाख्त के प्रयास अभी जारी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि घटनास्थल पर पुलिस को 500-500 के नोट बिखरे हुए मिले हैं, जिन्हें पुलिस ने जांच के लिए जब्त कर लिया है। जांच में जुटी पुलिस घटना के कारणों को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन चर्चा है कि यह परिवार अपने पड़ोसियों से काफी परेशान था। शुरुआती बातचीत में पीड़ितों का व्यवहार सामान्य नहीं लग रहा है, जिससे उनके मानसिक रूप से बीमार होने की आशंका भी जताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे पीड़ितों से बातचीत कर रहे हैं ताकि छलांग लगाने के पीछे की असल वजह सामने आ सके। अस्पताल में चल रहा इलाज घायल इदरीश और यास्मीन का इलाज ग्वालियर के अस्पताल में जारी है। पुलिस ने घटनास्थल की घेराबंदी कर साक्ष्य जुटाए हैं। स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है कि क्या उन्होंने कूदने से पहले परिवार को किसी तनाव में देखा था। अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पीड़ितों के बयानों के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।  

प्रशासनिक बदलाव: बिहार में 17 अफसर बने DTO, परिवहन विभाग में नई पोस्टिंग

पटना. बिहार परिवहन विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 17 अधिकारियों को पदोन्नति का तोहफा दिया है। लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करते हुए अपर जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO) और मोटरयान निरीक्षक (MVI) को जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) के पद पर प्रोन्नत किया गया है। अधिसूचना जारी, विभाग में बढ़ी हलचल मंगलवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। आदेश जारी होते ही विभाग में हलचल तेज हो गई और प्रमोट हुए अधिकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। कौन-कौन हुए प्रमोट, जानें आंकड़े प्रमोशन पाने वाले 17 अधिकारियों में 12 अपर जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO) और 5 मोटरयान निरीक्षक (MVI) शामिल हैं। सभी को अब जिला परिवहन पदाधिकारी के समकक्ष जिम्मेदारी दी गई है, जिससे उनकी भूमिका और अधिकार दोनों बढ़ गए हैं। प्रशासनिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती सरकार के इस फैसले से जिला स्तर पर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और मजबूत होने की उम्मीद है। नए DTO बनने से विभागीय कामकाज में तेजी आएगी और लोगों को सेवाएं बेहतर तरीके से मिल सकेंगी। लंबित मामलों के निपटारे में आएगी तेजी जानकारों का मानना है कि अधिकारियों की संख्या बढ़ने से लाइसेंस, वाहन रजिस्ट्रेशन और अन्य लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। इससे आम लोगों को भी राहत मिलने की संभावना है। सरकार का संदेश: काम के आधार पर मिलेगा हक इस प्रमोशन के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अधिकारियों की मेहनत और अनुभव का सम्मान किया जाएगा। साथ ही, विभागीय ढांचे को मजबूत कर बेहतर सेवा देने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।

युद्ध की आंच पहुंची पाकिस्तान तक: हालात बिगड़े, आज रात से लॉकडाउन लागू—शहबाज शरीफ का फैसला

कराची  मध्य पूर्व में जारी तनाव और बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच पाकिस्तान सरकार ने देशभर में ऊर्जा बचत के लिए बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि सिंध प्रांत को छोड़कर पूरे देश में बाजार और शॉपिंग मॉल रात 8 बजे तक बंद कर दिए जाएंगे। पाकिस्तान में बढ़ते ऊर्जा संकट और वैश्विक हालात के चलते सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। आने वाले दिनों में इन फैसलों का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे सकता है। नए नियम 7 अप्रैल से लागू कर दिए गए हैं प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह फैसला ऊर्जा खपत को कम करने और ईंधन संकट से निपटने के उद्देश्य से लिया गया है। यह नए नियम 7 अप्रैल से लागू कर दिए गए हैं। सरकार ने राहत देते हुए मेडिकल स्टोर और दवा दुकानों को इन समय-सीमाओं से बाहर रखा है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों। सिंध को फिलहाल छूट,अन्य राज्यों में सख्ती सरकार के फैसले के तहत पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा (KP), बलूचिस्तान, इस्लामाबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान में सभी बाजार और मॉल रात 8 बजे तक बंद होंगे। हालांकि, सिंध में बाजारों के समय को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और इस पर व्यापारिक संगठनों से चर्चा जारी है। रेस्टोरेंट और शादी समारोहों पर भी असर नए नियमों के तहत रेस्टोरेंट, बेकरी, तंदूर और खाद्य पदार्थों की दुकानें रात 10 बजे तक ही खुली रह सकेंगी। इसके अलावा, मैरिज हॉल, मार्की और अन्य कमर्शियल शादी स्थलों को भी रात 10 बजे तक बंद करना अनिवार्य होगा। सरकार ने निजी घरों में भी रात 10 बजे के बाद शादी समारोह आयोजित करने पर रोक लगा दी है। ईरान संकट और तेल आपूर्ति पर असर सरकार के अनुसार, यह कदम मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण उठाया गया है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित हुई। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 25% हिस्सा संभालता है, और इसकी बाधा से ईंधन की कीमतों में तेज़ उछाल देखा गया है। मुजफ्फराबाद और गिलगित में राहत सरकार ने गिलगित और मुजफ्फराबाद में नागरिकों को राहत देते हुए एक महीने तक इंटरसिटी पब्लिक ट्रांसपोर्ट मुफ्त करने की घोषणा की है। इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।इस बीच, सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने कराची में व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों से बैठक की। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में सभी को जिम्मेदारी निभानी होगी और सरकार ऐसे कदम उठाएगी जिससे आम जनता, खासकर गरीब वर्ग पर कम से कम बोझ पड़े। व्यापारिक संगठनों द्वारा दिए गए सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।  

प्रशासन का कड़ा फैसला: फिरोजपुर में उत्खनन पर समय सीमा, दवा दुकानों में कैमरे लगाना जरूरी

फिरोजपुर. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट डॉ. अमनदीप कौर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 और 152 के तहत अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिले में विभिन्न प्रतिबंध लागू किए हैं। ये आदेश जारी होने की तारीख से अगले 2 महीनों तक प्रभावी रहेंगे। बोरवेल खोदने या उसकी गहराई बढ़ाने पर रोक जारी आदेशों के अनुसार अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए शाम 5 बजे से सुबह 7 बजे तक छोटे खनिजों के खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा, शेड्यूल-एच, एच-1 और एक्स श्रेणी की दवाइयां बेचने वाली सभी फार्मेसी और केमिस्ट दुकानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। बोरवेल और ट्यूबवेल को लेकर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। बिना अनुमति बोरवेल खोदने या उसकी गहराई बढ़ाने पर रोक लगा दी गई है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई  आदेश के मुताबिक, बोरवेल खोदने से कम से कम 15 दिन पहले जिला प्रशासन, बीडीपीओ, ग्राम पंचायत/नगर परिषद, जन स्वास्थ्य विभाग और ग्राउंड वाटर विभाग को सूचित करना अनिवार्य होगा। साथ ही ड्रिलिंग एजेंसी का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और जमीन मालिक की पूरी जानकारी मौके पर उपलब्ध होनी चाहिए। सुरक्षा के मद्देनजर बोरवेल के चारों ओर कांटेदार तार लगाना, स्टील प्लेट से ढक्कन बंद करना और कंक्रीट प्लेटफॉर्म बनाना भी अनिवार्य किया गया है। कार्य पूरा होने के बाद खाली जगह को मिट्टी से भरकर जमीन को पहले जैसा करना होगा। किसी भी हालत में बोरवेल या कुएं को खुला छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियम उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा विश्वविद्यालय, 491 करोड़ रुपये से अधिक आएगी लागत

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में गोरखपुर में बनने वाले ‘उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय’ को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने इसके लिए “उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026” के प्रख्यापन को स्वीकृति प्रदान की है। 491 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यह विश्वविद्यालय कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। योगी सरकार वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय के लिए इस वर्ष प्रस्तुत प्रदेश के बजट में भी 50 करोड़ रुपये पास कर चुकी है।  गोरखपुर के इस पांचवें विश्वविद्यालय में वानिकी, औद्यानिकी, वन्य जीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री, फल एवं बागवानी सहित कई आधुनिक विषयों में बीएससी, एमएससी, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य वनावरण बढ़ाना, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना, किसानों और छात्रों को आधुनिक प्रशिक्षण देना तथा कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना है। इस फैसले से प्रदेश में हरित विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए योगी सरकार और गोरखपुर के नाम एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हो जाएगी। इसके पहले सरकार ने दुनिया के पहले राजगिद्ध (जटायु) संरक्षण केंद्र की स्थापना गोरखपुर में ही की है। 6 सितंबर 2024 को कैम्पियरगंज में दुनिया के पहले राजगिद्ध जटायु (रेड हेडेड वल्चर) संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के उद्घाटन अवसर पर सीएम योगी ने जटायु संरक्षण केंद्र के समीप ही वानिकी विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी। अब इसे कैबिनेट की भी मंजूरी मिल गई है। यह उत्तर भारत का पहला और पूरे देश का दूसरा वानिकी विश्वविद्यालय होगा। इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए गोरखपुर वन प्रभाग ने जटायु संरक्षण केंद्र के समीप ही 50 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर प्रक्रियात्मक तैयारी तेज कर दी है।  गोरखपुर के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) विकास यादव का कहना है कि वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय में वानिकी के अलावा कृषि वानिकी, सामाजिक वानिकी और औद्यानिक के भी डिग्री और डिप्लोमा कोर्स संचालित कराने की योजना है ताकि बड़ी संख्या में युवाओं के सामने नौकरी और रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब शिलान्यास की तैयारी और तेज की जाएगी।