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धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को हरी झंडी: छत्तीसगढ़ में नया कानून लागू, राज्यपाल ने किए हस्ताक्षर

रायपुर. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण रोकने बनाए गए नए विधेयक पर आज राज्यपाल रमेन डेका ने हस्ताक्षर किया। अब आज से प्रदेश में नया धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू हो गया है। धर्मांतरण पर नए विधेयक के अनुसार अब सख्त कार्रवाई होगी। धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल के हस्ताक्षर मामले में पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा है कि हम उम्मीद करते हैं कि इस कानून का उपयोग किसी निर्दोष पर नहीं होगा। हम मांग करते हैं कि पिछले साढ़े 3 साल से आरक्षण विधेयक राजभवन में पेंडिंग है, जिसमें OBC और अनुसूचित जाति के लिए कानून बनाए थे, इस पर भी हस्ताक्षर किया जाए, लेकिन राजयपाल ने हस्ताक्षर नहीं किया। बीजेपी जो कानून लाती है उसमें राज्यपाल हस्ताक्षर करते हैं, ये दोहरा मापदंड क्यों? वहीं छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण स्वातंत्र्य कानून पारित होने पर विधायक पुरंदर मिश्रा ने शुभकामाएं दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा का आभार जताते हुए कहा, धर्मांतरण कानून लाए और पारित हो गया। लोगों को भ्रमित करने वाली बात का आज द एंड हो गया। मिश्रा ने कहा, बीजेपी सभी धर्मों का सम्मान करती है, लेकिन कोई प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराएगा तो स्वीकार नहीं किया जाएगा। विधायक पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस पर धर्मांतरण करने का आरोप लगाते हुए कहा, कांग्रेस नहीं चाहती कि भारत विश्वगुरु बने।धर्मांतरण अब रुकेगा। विदेशी ताकत भारत को विश्वगुरु बनने नहीं देना चाहते, वो धर्मांतरण करवाते हैं। कांग्रेस के शासनकाल में 500 चर्च बने। जानिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 में क्या है प्रावधान – छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है. यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है. सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है. विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे, मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी. विधेयक के मुताबिक, महिमामंडन कर, झूठ बोलकर, बल, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना अवैध माना जाएगा और प्रतिबंधित होगा. यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी, और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा. विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा. एक धर्म का व्यक्ति अगर दूसरे धर्म में शादी करता है, तो ऐसे विवाह को सम्पन्न करवाने वाले फादर, प्रीस्ट, मौलवी या ऐसे विवाह को करवाने वाला जिम्मेदार व्यक्ति विवाह की तारीख से आठ दिन पहले घोषणापत्र सक्षम प्राधिकारी के सामने प्रस्तुत करेगा. सक्षम प्राधिकारी ये तय करेगा कि विवाह कहीं धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा है, ऐसा हुआ तो अवैध घोषित किया जा सकेगा. शिक्षा व्यवस्था को ख़त्म कर रही सरकार : PCC चीफ RTE को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, सरकार की नाकामियों की वजह से नर्सरी में बच्चों के एडमिशन का सिस्टम खत्म हुआ। गरीब के बच्चे अब शिक्षा नहीं ले पाएंगे। इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। गरीब बच्चों को नर्सरी से शिक्षा मिलनी चाहिए। यह सरकार शिक्षा व्यवस्था को ख़त्म कर रही है। हम मांग करते हैं कि गरीब बच्चों को नर्सरी से एडमिशन मिलना चाहिए। बीजेपी के गांव चलो अभियान पर PCC चीफ दीपक बैज ने कहा, कांग्रेस ने गांव चलो अभियान की शुरुआत की है, बीजेपी इसी का नकल कर रही है। दो साल में बीजेपी ने सरकार में क्या किया, 1 लाख युवाओं को नौकरी मिली क्या? किसानों का पूरा धान सरकार ने खरीदा क्या? प्रदेश की आम जनता इस समय परेशान है। इन सब मुद्दों से प्रदेश की जनता आक्रोशित हैं।

उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की संस्तुतियों के आधार पर एलओसी, सब्सिडी और संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की संस्तुतियों को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय के तहत राज्य में संचालित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कंफर्ट (LoC) जारी करने, पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराने तथा परियोजनाओं में आवश्यक संशोधन को स्वीकृति दी गई है, जिससे उद्योगों को संचालन में सहूलियत मिलेगी और उनकी वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत होगी। कैबिनेट में कुल 22 प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई।  अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष रखे गए प्रस्तावों में 6 नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, एक इकाई के सब्सिडी क्लेम और एक परियोजना में संशोधित एलओसी को मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि शाहजहांपुर में ओएफसी टेक प्रा लि (₹589 करोड़) एवं हाथरस में एजेआई केन इंडस्ट्रीज (₹1128 करोड़) को एसजीएसटी प्रतिपूर्ति के लिए एलओसी जारी किए जाने की मंजूरी दी गई है। वहीं गोरखपुर स्थित इंडिया ग्लाइकोल्स लि. (₹669 करोड़) और प्रयागराज की विस्कोस इंटरनेशनल प्रा. लि. (₹269 करोड़) तथा गौतमबुद्ध नगर की इंटीग्रेटेड बैटरीज इंडिया प्रा. लि. (₹1146 करोड़) को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करने का निर्णय लिया गया है, जिससे इन इकाइयों की लागत में कमी आएगी और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त मुरादाबाद में त्रिवेणी इंजीनियरिंग को पूंजीगत सब्सिडी वितरण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही गौतमबुद्ध नगर स्थित आवादा इलेक्ट्रो लि. के ₹16,000 करोड़ के प्रोजेक्ट में संशोधन (LoC में बदलाव) प्रस्ताव को भी कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया है, जिससे परियोजना के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को दूर किया जा सकेगा। ग्रीन एनर्जी पर फोकस बैठक में विशेष रूप से सोलर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बड़े निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। इन परियोजनाओं से सोलर उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटेगी और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।  स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत अंतिम बिड दस्तावेज को मंजूरी, 2000 करोड़ का प्रावधान कैबिनेट बैठक में स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत प्रदेश के युवाओं को निःशुल्क टैबलेट वितरण के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने 25 लाख टैबलेट खरीदने हेतु जारी किए जाने वाले अंतिम बिड डॉक्यूमेंट को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹2000 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है और इसका पूरा व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। योजना के तहत प्रदेश के स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण, आईटीआई तथा सेवामित्र पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं को मुफ्त टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने शैक्षिक पाठ्यक्रमों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकें और आगे चलकर रोजगार, स्वरोजगार तथा विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी अवसरों में इसका उपयोग कर सकें। पांच वर्षों तक लागू रहने वाली यह योजना प्रदेश में डिजिटल सशक्तीकरण और रोजगार सृजन की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। विस्थापित परिवारों को मिलेगा भूमिधर अधिकार योगी सरकार ने कैबिनेट बैठक में एक अहम निर्णय लेते हुए जनपद पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित होकर आए हजारों परिवारों को भूमिधर अधिकार प्रदान करने की मंजूरी दी। इसके लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, 2026 के माध्यम से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 में संशोधन किया गया है, जिसके तहत पात्र परिवारों को असंक्रमणीय अधिकार दिए जाएंगे। दशकों से स्वामित्व के अभाव में ये परिवार खेती के लिए बैंक ऋण लेने और सरकारी खरीद केंद्रों पर उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। अब इस निर्णय से उन्हें अपनी जमीन का कानूनी मालिकाना हक मिलेगा, जिससे वे आसानी से ऋण प्राप्त कर सकेंगे और सम्मानजनक तरीके से अपनी फसल बेच पाएंगे। यह कदम न केवल इन परिवारों को कानूनी सुरक्षा देगा, बल्कि उनके आर्थिक सशक्तीकरण और सामाजिक सम्मान को भी सुनिश्चित करेगा। कानपुर देहात में बसाए जाएंगे 99 हिन्दू बंगाली परिवार, लीज रेंट व पट्टा प्रारूप को स्वीकृति पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित हिन्दू बंगाली परिवारों के पुनर्वास से जुड़े प्रस्ताव को भी योगी कैबिनेट ने कार्योत्तर अनुमोदन दे दिया। इसके तहत जनपद मेरठ के मवाना तहसील क्षेत्र से संबंधित 99 परिवारों को कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील के ग्राम भैंसाया और ताजपुर तरसौली में पुनर्वासित किया जाएगा। साथ ही इनके लिए लीज रेंट ₹1 निर्धारित करते हुए पट्टे के प्रारूप को भी स्वीकृति दी गई है। यह निर्णय पूर्व में 2021 में 63 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए निर्धारित प्रावधानों के आधार पर लिया गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों और प्रकरण की तात्कालिकता को देखते हुए पहले ही प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही की जा चुकी थी, जिस पर अब कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। इससे प्रभावित परिवारों को वैध आवासीय अधिकार मिलने के साथ उनके पुनर्वास की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सकेगी। गोरखपुर में बनेगा वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय कैबिनेट बैठक में गोरखपुर में उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। इसके लिए “उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026” के प्रख्यापन को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह विश्वविद्यालय गोरखपुर के कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित विश्वविद्यालय में वानिकी, औद्यानिकी, वन्य जीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री, फल एवं बागवानी सहित कई आधुनिक विषयों में बीएससी, एमएससी, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य वनावरण बढ़ाना, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना, किसानों और छात्रों को आधुनिक प्रशिक्षण देना तथा कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना है। इस फैसले से प्रदेश में हरित विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

जिला और तहसील स्तर पर कामर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित करें

जिला एवं तहसील स्तर पर भी कामर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित करें मंत्रिमण्डल समिति ने की पेट्रोल, डीजल, एलपीजी एवं सीएनजी की आपूर्ति की समीक्षा भोपाल अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम एवं मध्यपूर्व देशों की स्थिति के दृष्टिगत प्रदेश पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा के लिये गठित मंत्रिमण्डल समिति की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। बैठक में समिति के सदस्यों ने जिला एवं तहसील स्तर पर कामर्शियल एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति की समीक्षा की। बैठक में समिति के सदस्यों ने कहा कि किसी भी स्तर की अनियमित्ता एवं कालाबाजारी पाए जाने पर तत्काल कार्यवाही करें। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एलपीजी की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दें। प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। क्रूड ऑयल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण प्रट्रोलियम पदार्थों की लगातार आपूर्ति हो रही हैं। बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, खाद्य, नागरिक आपूति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी, आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा और ऑयल कम्पनी के स्टेट नोडल ऑफिसर अजय श्रीवास्तव उपस्थित थे। शहरों में 25 और गाँवों में 45 दिन में सिलेंडर बुकिंग बैठक में बताया गया कि घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग शहरों में 25 दिन और गाँवों में 45 दिन के अंतराल में की जा रही है। वर्तमान में गैस बुकिंग की संख्या सामान्य है, जिसकी पूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है। जिन घरों तक पाईप लाइन पहुँच गई है, उन घरों में पीएनजी कनेक्शन दिये जा रहे है। पिछले 1 दिन में 225 नवीन पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं। 70 प्रतिशत तक दिए जा रहे है कामर्शियल सिलेण्डर बैठक में ऑयल कम्पनी के स्टेट नोडल ऑफिसर श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में भारत सरकार के निर्देशानुसार 70 प्रतिशत की सीमा के अधीन कामर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराये जा रहे है। शुरूआत में 20 प्रतिशत इनकी आपूर्ति हो रही थी। कालाबाजारी पर कार्यवाही प्रदेश में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जा रही है। अभी तक 3226 स्थानों पर कार्यवाही कर 3872 सिलेंडर जब्त किये गये है और 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई है। पीएनजी कनेक्शन विस्तार पर जोर बैठक में जानकारी दी गई कि सभी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) संस्थाओं को अगले 3 माह में 2 लाख नये पीएनजी कनेक्शन दिये जाने वाले का लक्ष्य दिया गया है। साथ ही सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरुद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। सीजीडी संस्थाओं को पीएनजी के लाभ एवं पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया से संबंधित एफएक्यू तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश नोडल सीजीडी संस्था थिंक गैस को दिये गए हैं। भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर सीजीडी संस्थाओं को पाइप-लाइन अपलोड करने के निर्देश दिये गये। सीजीडी संस्थाएँ जिलेवार एवं लोकेलिटीवाइज कैम्प शेड्यूल कर जिला प्रशासन एवं विभाग को उपलब्ध करायेंगी। शहर के जिन स्थानों में पाइप-लाइन गई है, उसके आस-पास के क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को ऑयल कम्पनी द्वारा अवगत कराया गया है कि वह पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये तत्काल आवेदन करें। इसके बाद पीएनजी कनेक्शन प्राप्त नही करने की स्थिति में आगामी 3 माह में एलपीजी का कनेक्शन बंद किया जा सकता है। जिला आपूर्ति अधिकारियों को एमपीआईडीसी के जिला अधिकारी, जिले में स्थित पॉलीटेक्निक तथा आईटीआई से प्रशिक्षणार्थियों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। सीजीडी संस्था द्वारा इन प्रशिक्षणार्थियों को वर्तमान वेण्डर के साथ क्लब कर मैन पॉवर बढ़ाया जाएगा। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) में प्रदेश में कार्यरत 10 संस्थाओं को पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जहां घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की मांग और शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। पीएनजी पाइप लाइन जिन क्षेत्रों में बिछ चुकी है, वहां आवासीय परिसर, स्कूल, हॉस्टल, कॉलेज, कम्युनिटी किचन और आंगनवाड़ी केंद्रों को आवेदन प्राप्त होने के 5 दिन में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पीएनजी कनेक्शन की प्रगति की निगरानी के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर, एडीएम, जिला आपूर्ति अधिकारी और संबंधित सीजीडी संस्थाओं के अधिकारी समीक्षा करेंगे। केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिये नगरीय प्रशासन एवं विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक निर्माण एवं म.प्र. औद्योगिक विकास निगम द्वारा सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन करने के 24 घंटे में पाइप-लाइन बिछाने की आरओयू अनुमति दिये जाने के आदेश जारी किये गये हैं। विभाग द्वारा 10 से अधिक आरओयू आवेदनों की 24 घंटे के अंदर स्वीकृति जारी की गई है। सीजीडी संस्थाओं को घरेलू एवं व्यावसायिक पीएनजी के आवेदनकर्ताओं को पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये सीजीडी संस्थाओं के कंट्रोल रूम नम्बर इस प्रकार हैं। अवंतिका गैस लिमिटेड – इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर (9424098887), गैल गैस लिमिटेड – देवास, रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788), नवेरिया गैस लिमिटेड – धार (07292-223311), थिंक गैस – भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-5727-107), आईओसीएल – गुना (9425991090), मउगंज, रीवा (9424836488), अशोकनगर (9425119522), मुरैना (7223982333), बीपीसीएल – मैहर, सतना शहडोल (9424738607), सीधी, सिंगरौली (9424341954), गुजरात गैस लि. – रतलाम (7412230292) शामिल है। प्रदेश के इन स्थानों से पाइप-लाइन के आस-पास के घरेलू एवं व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिये आवेदन कर सकते हैं।  

डीबीएफओटी आधार पर शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर और अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ विकसित होंगे बस अड्डे

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस स्टेशनों के विकास के द्वितीय चरण को मंजूरी दे दी गई है। इस चरण में प्रारंभिक रूप से प्रस्तावित 54 बस स्टेशनों में से 6 अनुपयुक्त स्टेशनों को हटाते हुए तथा जनपद चंदौली को शामिल करते हुए कुल 49 बस स्टेशनों को विकसित किया जाएगा। यह परियोजना पीपीपी के डीबीएफओटी (डिजाइन, बिल्ट, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मॉडल पर लागू की जाएगी, जिसमें राज्य सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं आएगा। 8 साल में पूरी करनी होगी परियोजना प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि परियोजना के तहत बस स्टेशनों को अत्याधुनिक स्वरूप दिया जाएगा, जहां यात्रियों को शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर, बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छता एवं अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पात्रता शर्तों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। तकनीकी क्षमता की शर्त को परियोजना लागत के 150% से घटाकर 100% किया गया है, वहीं परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा 5 से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी गई है। नेट वर्थ की अनिवार्यता परियोजना लागत का 25% निर्धारित की गई है तथा कंसोर्टियम में सदस्यों की अधिकतम संख्या 3 से बढ़ाकर 4 कर दी गई है। 12 माह में शुरू करना होगा काम सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने पर परियोजना का काम शुरू करने की समय सीमा भी 6 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दी गई है। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी स्थलों पर 2.5 फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और ग्राउंड कवरेज की निःशुल्क अनुमति देने का प्रस्ताव है। लीज अवधि 35 या 90 वर्ष निर्धारित की गई है और इसके समाप्त होने पर स्वामित्व स्वतः ही उत्तर प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को प्राप्त हो जाएगा। कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि बिडिंग प्रक्रिया के दौरान यदि किसी संशोधन की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया जाएगा।  ₹4000 करोड़ से अधिक निवेश आने का अनुमान परिवहन मंत्री ने बताया कि इस योजना के प्रथम चरण में 23 बस स्टेशनों (लखनऊ, कानपुर, आगरा सहित) को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है और द्वितीय चरण के 49 बस अड्डों के साथ अब कुल 52 जनपद इस योजना से आच्छादित हो जाएंगे, जबकि शेष 23 जनपदों को अगले चरण में शामिल किया जाएगा। परियोजना में ₹4000 करोड़ से अधिक निवेश आने का अनुमान है (पहले चरण में लगभग ₹2500 करोड़), जिसके तहत बस अड्डों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करते हुए वीआईपी लाउंज, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल और ठहरने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कुल क्षेत्रफल का लगभग 55% हिस्सा सार्वजनिक सुविधाओं और 45% व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग होगा।  तीन जनपदों में बस स्टेशन निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी परिवहन मंत्री ने बताया कि कैबिनेट में मंजूर किए गए अन्य प्रस्तावों के तहत सिकंदराराऊ (हाथरस), नरौरा (बुलंदशहर) और तुलसीपुर (बलरामपुर) में नए बस अड्डों के निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी गई है। परियोजना के तहत निर्माण कार्य दो वर्षों में पूरा करने तथा व्यावसायिक गतिविधियों को सात वर्षों में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में प्रतिदिन 15 से 23 लाख यात्री परिवहन सेवाओं का उपयोग करते हैं, जो त्योहारों के दौरान 30 से 35 लाख तक पहुंच जाते हैं, ऐसे में यह योजना यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ ही शहरी भीड़भाड़ कम करने में भी सहायक होगी। नरौरा में बस स्टेशन के साथ डिपो कार्यशाला स्थापित की जाएगी, जबकि तुलसीपुर में देवीपाटन मंदिर के निकट यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक बस स्टेशन का निर्माण होगा। इन बस स्टेशनों को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां दुकानों और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

विवादित पोस्टर से यूपी में बवाल: अखिलेश पर तीखा वार, योगी की तारीफ—राजनीतिक घमासान तेज

 गोंडा उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में चुनावी माहौल के बीच लगाए गए विवादित पोस्टरों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इन पोस्टरों में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आपत्तिजनक तरीके से दर्शाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के कई प्रमुख स्थानों जैसे अंबेडकर चौराहा और एसपी कार्यालय के आसपास ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ नामक संगठन द्वारा ये पोस्टर लगाए गए हैं। फिल्म ‘धुरंधर’ का विलेन ‘रहमान डकैत’ बताया पोस्टरों में अखिलेश यादव को फिल्म ‘धुरंधर’ के विलेन ‘रहमान डकैत’ के रूप में दिखाया गया है। उनकी एडिट की गई तस्वीर लाल टोपी और काले चश्मे के साथ लगाई गई है। इसके नीचे ‘अखिलेश का ल्यारी राज’ लिखा गया है। साथ ही, समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगों से जुड़ी खबरों की कटिंग भी इसमें शामिल की गई है। योगी आदित्यनाथ की कन्या पूजन करते हुए तस्वीर वहीं, पोस्टर के दूसरे हिस्से में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कन्या पूजन करते हुए तस्वीर लगाई गई है, जिसके नीचे ‘धुरंधर सीएम’ लिखा गया है। इसके साथ ही माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के खिलाफ की गई कार्रवाई से संबंधित खबरों को भी दर्शाया गया है। पोस्टर में जनता से सवाल किया गया है, ‘आपको क्या चाहिए?’ इन पोस्टरों के जरिए एक ओर सपा शासन को दंगे, अराजकता और माफिया राज से जोड़ने की कोशिश की गई है, तो दूसरी ओर वर्तमान सरकार को सख्त कानून-व्यवस्था वाली सरकार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कड़ा विरोध जताया विवाद बढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कड़ा विरोध जताया। सपा अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष अफजल खान और पार्टी नेता बृजेश यादव ने मौके पर पहुंचकर पोस्टर हटाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा के बाद पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर जिले में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।  

कोमा में मोजतबा खामेनेई: युद्ध और सीजफायर से बेखबर, लोकेशन के बारे में चौंकाने वाली जानकारी

तेहरान   ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई अचेत हैं और गंभीर हालत में उनका इलाज कराया जा रहा है. पहले भी ये खबरें आई थीं कि वे उसी अमेरिका-इजरायल एयर स्ट्राइक में घायल हुए थे, जिसमें उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी. एक डिप्लोमैटिक मेमो में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के बरे में ये जानकारी दी गई है. यह मेमो अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों पर आधारित है. इसे खाड़ी देशों के सहयोगी देशों के साथ साझा किया गया है।  द टाइम्स की खबर के मुताबिक मोजतबा खामेनी फिलहाल अचेत अवस्था में हैं और गंभीर हालत में उनका इलाज कराया जा रहा है. उनकी लोकेशन के बारे में बताते हुए कहा गया है कि उनका इलाज ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 140 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कोम शहर में चल रहा है. पहले कहा जा रहा था कि उन्हें युद्ध के बीच रूस ले जाया गया है और मॉस्को में उनका इलाज किया जा रहा है. हालांकि बाद में रूस के राजदूत ने बताया था कि वे ईरान के अंदर ही हैं और अब ब्रिटिश अखबार द टाइम् ने भी इसकी पुष्टि की है।  कैसे अमेरिकी हमले से बचे मोजतबा खामेनेई? ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों से इसलिए बच गए, क्योंकि मिसाइलों से उनके घर पर हमला होने से कुछ मिनट पहले ही वह अपने बगीचे में टहलने के लिए बाहर निकल गए थे. जिस अमेरिकी-इजरायली अटैक में उनके पिता अली खामेनेई और अन्य परिवार को मारा गया, उसी में मोजतबा खामेनेई को भी टारगेट किया गया था. हालांकि उसी वक्त बाहर निकलने की वजह से वह मिसाइल अटैक में सेंकेड के अंतर से बाल-बाल बच गए. ‘द टेलीग्राफ’ को मिले एक लीक ऑडियो से पता चलता है कि 28 फरवरी को स्थानीय समयानुसार सुबह 9:32 बजे जब इजरायली ‘ब्लू स्पैरो’ बैलिस्टिक मिसाइलों ने उनके आवास पर हमला किया, उससे कुछ ही पल पहले वह ‘कुछ काम से’ बाहर चले गए थे।  अब शासन करने के काबिल नहीं मोजतबा     मोजतबा खामेनेई को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार दावा किया कि वो या तो अमेरिकी हमलों में मारे जा चुके हैं या फिर बेहद जख्मी हालत में हैं. उन्होंने ये भी कहा कि वो सार्वजनिक तौर पर दिखते नहीं, जिसकी वजह से ये संदेह और गहरा हो जाता है।      मोजतबा खामेनेई को युद्ध की शुरुआत में ही ईरान का सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया गया था लेकिन वे कभी दिखाई नहीं दिए. उनके संदेश में कभी-कभी आते हैं और ज्यादातर मामलों में ईरान की सैन्य इकाई आईआरजीसी ही बयान देती है।      मोजतबा खामेनेई का आखिर संदेश सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज खोलने और सीजफायर के बयान के बाद आया था. इस संदेश में कहा गया था कि ईरान झुकेगा नहीं और सेनाएं अमेरिका पर पलटवार करेंगी।      अब द टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि मोजतबा खामेनेई के संदेश भी उनके नहीं हैं क्योंकि वे अचेत अवस्था में हैं और शासन करने के काबिल नहीं बचे हैं. जिस मेमो का जिक्र अखबार में किया गया है, वो इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की जानकारी पर आधारित है. इसमें ये भी बताया गया है, कि मोजतबा खामेनेई किसी भी फैसले या युद्ध संचालन में शामिल होने की स्थिति में नहीं हैं. ईरान की ओर से अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।   

IAS जयति सिंह ने दी चेतावनी: मेरे नाम पर किसी तरह का लेन-देन न करें, व्हाट्सएप हैक होने की दी जानकारी

 बड़वानी मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की कलेक्टर का WhatsApp अकाउंट कुछ अज्ञात साइबर जालसाजों ने हैक कर लिया और उनके कॉन्टैक्ट्स को पैसे मांगने वाले मैसेज भेजे।  कलेक्टर जयति सिंह ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, "अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना, सभी नागरिकों को सूचित करना चाहती हूं कि मेरा वॉट्सएप अकाउंट से संबंधित फ्रॉड की सूचना प्राप्त हुई है।  यदि मेरे नंबर से किसी भी प्रकार की धनराशि या अन्य संदिग्ध मांग की जाती है, तो कृपया उस पर बिल्कुल भी विश्वास न करें और कोई ट्रांजेक्शन न करें. इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जा रही है. कृपया सतर्क रहें और इस सूचना को अधिक से अधिक साझा करें।  IAS अफसर जयति सिंह ने इस पोस्ट के साथ WhatsApp चैट के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए, जिनमें साइबर अपराधियों की ओर से उनके कॉन्टैक्ट्स को भेजे गए मैसेज दिख रहे थे।  इस हाई-प्रोफाइल हैकिंग के बाद बड़वानी पुलिस तुरंत एक्टिव हो गई है. जिले के एसपी पद्मविलोचन शुक्ला ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि पुलिस कलेक्टर के WhatsApp अकाउंट की हैकिंग की जांच कर रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अकाउंट किस आईपी (IP) एड्रेस से ऑपरेट किया गया और लिंक के जरिए या ओटीपी (OTP) फिशिंग के जरिए इसे हैक किया गया। 

शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के 92 विद्यार्थियों को निःशुल्क चश्मों का वितरण

​बड़वानी  जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से भविष्य की पीढ़ी की आँखों की रोशनी संवारने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुरेखा जमरे, सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना और डी.पी.एम. डॉ. विमलेश चोयल के मार्गदर्शन में उत्कृष्ट विद्यालय बड़वानी में नेत्र स्वास्थ्य शिविर का सफल आयोजन किया गया। ​700 छात्र-छात्राओं का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण ​उप जिला कार्यक्रम प्रबंधक (अंधत्व) अनिल राठौर के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने विद्यालय के लगभग 700 विद्यार्थियों के नेत्रों की सघन जाँच की। इस टीम में नेत्र सहायक दीपक सोनी, रविंद्र टेकाम और जयनारायण कुशवाह शामिल थे। जाँच के दौरान 102 विद्यार्थियों में दृष्टिदोष पाया गया, जिसके बाद उनके चश्मे के नंबरों का सटीक निर्धारण किया गया। ​निःशुल्क चश्मे पाकर खिले विद्यार्थियों के चेहरे ​स्वास्थ्य परीक्षण के अगले चरण में, आज दिनांक 7 अप्रैल 2026 को जिला चिकित्सालय बड़वानी की ओर से दृष्टिदोष वाले 92 विद्यार्थियों को निःशुल्क चश्मे प्रदान किए गए। चश्मा मिलने से न केवल विद्यार्थियों को पढ़ाई में सुगमता होगी, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होगी। ​सहयोग और जागरूकता ​इस पुनीत कार्य में उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य  अनिल मिश्र, खुशबू सेनानी एवं समस्त विद्यालय स्टाफ का विशेष योगदान रहा। ​प्राचार्य की पहल:  अनिल मिश्र द्वारा प्रतिवर्ष विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के शिविर आयोजित कर निःशुल्क चश्मे वितरित करवाए जाते हैं, जो सामुदायिक सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ​विशेष सलाह: कार्यक्रम के दौरान अनिल राठौर और अनिल मिश्र ने बच्चों को परामर्श दिया कि वे अपनी आँखों की नियमित जाँच करवाएं और डिजिटल स्क्रीन का उपयोग सीमित करें। ​"बच्चों की दृष्टि ही उनके उज्ज्वल भविष्य का आधार है। समय पर आँखों की जाँच और सही उपचार से पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकता है।"  

शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय ₹9,000 से बढ़ाकर ₹17,000 किया गया

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा पर मुहर लगाते हुए योगी कैबिनेट ने मंगलवार को शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों शिक्षा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, वर्ष 2017 में ₹10,000 निर्धारित किए गए शिक्षामित्रों के मानदेय को अब बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाकर अब ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय अप्रैल माह से लागू हो जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश सरकार पर कुल 1475.27 करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। यह निर्णय उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र 2026 के प्रथम सत्र में मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में लिया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि बढ़ा हुआ मानदेय वर्ष में 11 माह के लिए देय होगा। 1.43 लाख शिक्षामित्रों को मिलेगा लाभ कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा अभियान के तहत 60:40 अनुपात में प्राप्त होता था। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत केंद्रांश के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा तथा अनुमोदन प्राप्त न होने की स्थिति में बढ़े हुए मानदेय के कारण इन पर आने वाला अतिरिक्त ₹1138.12 करोड़ का व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। वहीं शेष 13,597 शिक्षामित्र, जिनका भुगतान पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, उनके लिए ₹119.65 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार भी प्रदेश सरकार उठाएगी। करीब 25 हजार अनुदेशक होंगे लाभान्वित संदीप सिंह ने बताया कि इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों को भी बड़ी राहत दी गई है। वर्ष 2017 में निर्धारित ₹9,000 मानदेय को बढ़ाकर अब ₹17,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में 24,717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। इस वृद्धि से राज्य सरकार पर ₹217.50 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और मई माह में दिए जाने वाले भुगतान में यह वृद्धि शामिल होगी।

हर शनिवार लगेगा तहसील स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर

बिलासपुर बिलासपुर में आयोजित साप्ताहिक टीएल बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, दीर्घकालिक योजना और जनसुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। निजी स्कूलों में मान्यता प्रमाण पत्र प्रदर्शित करने, साप्ताहिक जनसमस्या निवारण शिविर शुरू करने और जल संरक्षण सहित विभिन्न विकास कार्यों को गति देने पर विशेष जोर दिया गया।       जिला कार्यालय के मंथन सभा कक्ष में आयोजित साप्ताहिक टीएल बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी निजी स्कूलों को अपने परिसर में मान्यता संबंधी प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी स्पष्ट रूप से लिखने को कहा गया कि स्कूल सीबीएसई या छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता प्राप्त है, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को सही जानकारी मिल सके और किसी प्रकार की धोखाधड़ी की आशंका न रहे। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई कर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हर सप्ताह शनिवार को तहसील स्तर पर जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन शिविरों में वे स्वयं उपस्थित रहेंगे। यह अभियान इसी माह से प्रारंभ होकर लगभग दो माह तक संचालित किया जाएगा। अधिकारियों को इसकी समुचित तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।           बैठक में कलेक्टर ने इस वर्ष के बजट में प्रावधानित कार्यों के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव तैयार करते समय स्थल का निरीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए और केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि आगामी 20 से 30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जाएं। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि किसी भी सरकारी योजना के तहत भवन या आवास निर्माण से पहले वहां तक पहुंचने के लिए सड़क सुविधा सुनिश्चित की जाए, अन्यथा निर्माण की उपयोगिता प्रभावित होती है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर ने सरकारी निर्माण एजेंसियों को सूखे तालाबों से मिट्टी एवं मुरूम उठाने के निर्देश दिए, ताकि तालाबों की गहराई बढ़े और जल संचयन में मदद मिले। साथ ही उन्होंने अनियमित रूप से अन्य स्थानों से मिट्टी उत्खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए। ग्रामीण क्षेत्रों में सोखता गड्ढे बनाकर जल रिचार्ज करने, कच्चे नाला बांध बनाकर वर्षा जल को रोकने के उपाय अपनाने पर भी बल दिया गया। इसके अतिरिक्त कलेक्टर ने प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाकर निर्धारित लक्ष्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।