samacharsecretary.com

ज़करबर्ग का AI कदम: ‘Muse Spark’ के साथ गूगल और ओपनएआई को चुनौती

वाशिंगटन फेसबुक की पेरेंटल कंपनी मेटा ने बुधवार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की इंडस्ट्री में बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने नए AI मॉडल को लॉन्च किया है, जिसका नाम म्यूज स्पार्क है. यह कंपनी के न्यू AI डिविजन का बनाया नया प्रोडक्ट है, जिसको लेकर कंपनी ने बीते करीब एक साल में बड़े स्तर पर इनवेस्टमेंट की है।  लॉन्चिंग से पहले इस प्रोजेक्ट को इंटरनल नाम दिया गया था, जो 'एवोकाडो' था. अब म्यूज स्पार्क को मेटा के स्टैंडअलोन AI ऐप पर लॉन्च कर दिया है. अब आने वाले दिनों में इसको को मेटा के ऐप के लिए जारी किया जाएगा, जिसमें वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और मेटा एआई स्मार्ट ग्लास के नाम शामिल हैं।  गूगल और ओपनएआई को देगा टक्कर  वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम में मिलने वाला मेटा एआई कई जगह पिछड़ने लगा था. अब म्यूज स्पार्क की मदद से कंपनी को बड़े फायदे की उम्मीद कर रही है. राइटिंग और रीजनिंग के मामले में म्यूज स्पार्क ने बेहतर रिजल्ट दिया है, जिसकी वजह से यह ओपनएआई, गूगल और एंथ्रोपिक के बेहतरीन मॉडल के लेवल के आसपास पहुंच चुका है।  रिपोर्ट्स में कोडिंग को लेकर बड़ा अंतर दिखाया गया है. मौजूदा समय में एआई रेस में कोडिंग काबिलियत एक जरूरी स्टैंडर्ड बन चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कोडिंग के मामले में म्यूज स्पार्क अपने राइवल्स से थोड़ा पीछे रह गया है।  मार्क जकरबर्ग ने बीते साल बनाई AI टीम मार्क जकरबर्ग AI को लेकर बीते करीब एक साल से बड़ी इनवेस्टमेंट कर रहे हैं और इंडस्ट्री के कई बड़े टैलेंट को उन्होंने अपनी AI टीम में मोटी रकम देकर शामिल किया है. जकरबर्ग ने 29 साल के एलेक्जेंटर वांग को मोटी रकम देकर कंपनी में शामिल कर चुके हैं और उनको चीफ एआई ऑफिसर की पोस्ट दी, साथ ही कंपनी ने लामा-4 मॉडल पर काम करने वाली पुरानी टीम को बदल दिया. नए टीम में ओपनएआई, गूगल और अन्य राइवल्स कंपनियों से नए लोगों को मोटी रकम देकर मेटा में शामिल किया गया।  म्यूज स्पार्क को अभी बंद मॉडल रखा  मेटा ने म्यूज स्पार्क के साथ एक बड़ा बदलाव किया है और इसके कोड को मौजूदा समय में प्राइवेट रखा है. इसको क्लोज्ड मॉडल भी कह सकते हैं. बताते चलें कि मेटा अपने एआई मॉडल्स को ओपेन सोर्स करता था, जिसकी मदद से डेवलपर्स को कोड यूज करने की परमिशन मिलती थी।  मेटा का बड़ा इनवेस्टमेंट  जकरबर्ग ने एआई डेवलपमेंट के लिए बड़े इनवेस्टमेंट की तैयारी करके रखी है. एआई डेवलपमेंट के नए डेटा सेंटर पर 600 अरब डॉलर खर्च करने का प्लान बनाया हुआ है. साल 2026 में मेटा लगभग 135 अरब डॉलर तक खर्च करने का प्लान बनाया है, जो बीते साल की तुलना में लगभग दोगुना है. बीते साल कंपनी ने 72 अरब डॉलर की इनवेस्टमेंट की थी।  म्यूज स्पार्क को लेकर कंपनी ने बड़ा दांव लगाया है और इससे कंपनी अपने राइवल्स से आगे निकलना चाहती है. गूगल, ओपनएआई और एन्थ्रॉपिक जैसे नाम मेटा से काफी आगे निकल चुके थे. म्यूज स्पार्क कंपनी के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, वो तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा। 

शेयर बाजार में गिरावट का तूफान: कल बना था रॉकेट, आज सेंसेक्स 900 अंक गिरा

मुंबई  शेयर बाजार में लंबे समय बाद बीते काबोरारी दिन जोरदार रैली देखने को मिली थी. न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर के शेयर मार्केट गदर मचाते नजर आए थे. सेंसेक्स-निफ्टी ने भी खूब उड़ान भरी और बड़ी बढ़त लेकर बंद हुए थे. लेकिन ये खुशी एक ही दिन की थी और गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत होते ही दोनों इंडेक्स धड़ाम नजर आए।  बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex खराब ओपनिंग के बाद अचानक कुछ ही देर में 900 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty भी रेड जोन में ओपन हुआ. गिरावट के बीच कई Adani Ports से लेकर Infosys तक कई दिग्गज कंपनियों के शेयर टूटकर कारोबार कर रहे थे।  सेंसेक्स-निफ्टी में तेजी थमी बीते कारोबारी दिन बुधवार को बीएसई का सेंसेक्स 77,290 पर खुलने के बाद दिनभर रॉकेट की तरह भागा था और अंक में 2946.32 अंक या 3.95 फीसदी की तेजी लेकर 77,562.90 के लेवल पर क्लोज हुआ था. वहीं गुरुवार को ये 30 शेयरों वाला इंडेक्स सुस्ती में नजर आया और 200 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ ओपन होने के बाद कुछ ही देर में ये 900 अंक से ज्यादा की तगड़ी गिरावट के साथ 76,624 के स्तर पर आ गया। बात एनएसई निफ्टी की करें, तो ये भी बुधवार को तेजी से भागा था और 23,855 पर कारोबार की ओपनिंग करने के बाद अंक में 873.70 अंक या 3.78 फीसदी की उछाल के साथ 23,997.35 के लेवल पर बंद हुआ था. इसका हाल भी सेंसेक्स जैसा ही रहा और ये करीब 90 अंक फिसलकर 23,909 पर खुला, फिर 23,815 तक फिसल गया और इसके बाद इसमें भी गिरावट तेज हो गई. खबर लिखे जाने तक ये इंडेक्स 238 अंक की गिरावट लेकर 23,759 पर कारोबार कर रहा था।  1288 शेयर लाल निशान पर खुले शुरुआती कारोबार के दौरान शेयर बाजार में जहां 1215 कंपनियों के शेयरों ने बढ़त के साथ ग्रीन जोन में ओपनिंग की, तो वहीं दूसरी ओर 1288 कंपनियों के स्टॉक्स का हाल-बेहाल नजर आया और ये अपने पिछले बंद की तुलना में गिरावट के साथ खुले. इसके अलावा 174 कंपनियों के शेयर ऐसे रहे, जिनकी स्थिति में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने को नहीं मिला यानी इनकी ओपनिंग फ्लैट मोड में हुई।  सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों की बात करें, तो बीएसई लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share और Adani Ports Share 2 फीसदी से ज्यादा टूटकर खुले, तो वहीं IndiGo, HDFC Bank के शेयर भी कल की बढ़त गवांकर रेड जोन में ओपन हुए.  इसके अलावा मिडकैप में Hindustan Petroleum, Coforge, Bharat Forge Share भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे. स्मॉलकैर की बात करें, तो Chola Holding Share (4%), PGEL Share (2.50%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे।   गिरावट के पीछे ये बड़ा कारण बात शेयर मार्केट में अचानक आई इस गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो मिडिल ईस्ट टेंशन में फिर से इजाफा नजर आया है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए सीजफायर का ऐलान होने के बाद इसके टूटने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी. इसके चलते एशियाई मार्केट में भी ज्यादातर बाजार लाल निशान पर कारोबार करते दिखे।  निगेटिव ग्लोबल संकेतों के बीच भारत में भी सेंटीमेंट खराब हो गया और सेंसेक्स-निफ्टी भरभराकर टूट गए. क्रूड ऑयल की कीमतों में क्रैश के बाद फिर से मामूली तेजी देखने को मिली है, जिससे दबाव बढ़ा है।   

Assembly Election 2026: 9 बजे तक केरल, असम और पुडुचेरी में मतदान प्रतिशत की ताजा स्थिति

तिरुवनंतपुरम/ बरपेटा देश के तीन राज्यों असम, केरलम और पुडुचेरी में आज विधानसभा चुनाव के लिए सिंगल फेज में वोटिंग चल रही है। कुल 296 सीटों पर मतदान हो रहा है। सुबह 9 बजे तक असम में 17.87%, केरलम में 16.23% और पुडुचेरी में 17.41% मतदान हुआ। पुडुचेरी के सीएम CM रंगास्वामी वोट डालने के लिए पोलिंग बूथ तक मोटरसाइकिल से पहुंचे। यहां आने से पहले उन्होंने मंदिर में पूजा भी की। केरल के सीएम पिनाराई विजयन ने भी सुबह ही मतदान किया। असम के सीएम हिमंता ने गुवाहाटी में मां कामाख्या मंदिर में पूजा की है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने डाला अपना वोट कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने जोरहाट के DCB गर्ल्स हाई स्कूल में बनाए गए एक मतदान केंद्र पर अपना वोट डाला। उन्होंने कहा, "लोगों में उत्साह की एक लहर है। हमें पूरा भरोसा है कि हम असम के आदर्शों और लोकतांत्रिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखते हुए एक 'नया असम' बनाएंगे। असम सीएम ने मां कामाख्या के मंदिर में की पूजा-अर्चना असम के मुख्यमंत्री और जालुकबारी से उम्मीदवार हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा, "आज असम में मतदान का दिन है। मुझे मतदान के दिन मां कामाख्या के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। मैंने मां से प्रार्थना की कि असम समृद्ध हो और राज्य के लोग आगे बढ़ें।" चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, असम में सुबह 9 बजे तक 17.87 प्रतिशत मतदान हुआ है. वहीं, शुरुआती दो घंटों में पुडुचेरी में 17.41 प्रतिशत और केरल में 16.23 प्रतिशत वोट पड़े हैं।  असम में माजुली जिले में सबसे अधिक 20.03 प्रतिशत वोटिंग हुई है, मोरीगांव जिले में 19.96 प्रतिशत, दरांग में 19.74 प्रतिशत, गोलपाड़ा में 19.66 प्रतिशत और जोरहाट में 19.01 प्रतिशत मतदान हुआ है। सुबह 9 बजे तक असम के कामरूप जिले में सबसे कम 15.36 प्रतिशत वोट पड़े हैं।  वहीं, सुबह 9 बजे तक केरल के एर्नाकुलम जिले में सबसे अधिक 17.80 प्रतिशत और कासरगोड जिले में सबसे कम 15.08 प्रतिशत मतदान हुआ है।  बता दें कि केरल में 883 उम्मीदवार मैदान में हैं, यानी प्रति सीट औसतन छह से सात प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां मतदाताओं की संख्या 27 लाख है, जो 30,000 से अधिक मतदान केंद्रों में फैले हुए हैं।  चार क्षेत्रों- पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यानम से मिलकर बने केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कुल 9.50 लाख से ज्यादा वोटर हैं। इनमें से 24,919 वोटर पहली बार वोट डालेंगे। कुल 294 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।  असम विधानसभा चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 59 महिलाएं शामिल हैं। असम में लगभग 25.05 मिलियन पंजीकृत मतदाता हैं जो इन चुनावों में हिस्सा लेने के योग्य हैं। राज्य ने वोटिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए 31,490 मतदान केंद्र बनाए हैं।  126 सदस्यों वाली असम विधानसभा के लिए यह चुनाव बेहद अहम है, जिसमें भाजपा अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस को सरकार में वापसी की उम्मीद है। यह चुनाव 2023 में इस पूर्वोत्तर राज्य में हुए परिसीमन के बाद पहला चुनाव होगा।  केरल की 140 विधानसभा सीटों पर चुनावों में तीन गठबंधनों के बीच मुकाबला है, जिसमें एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए आमने-सामने हैं। केरल का लेफ्ट फ्रंट लगातार पांचवीं बार सत्ता में आने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। हालांकि, इस बार माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ के सामने सत्ता को बरकरार रखने की चुनौती है, क्योंकि कांग्रेस नीत यूडीएफ और भाजपा नीत एनडीए उसे कड़ी टक्कर दे रहे हैं।  पुडुचेरी में 30 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। इस केंद्र शासित प्रदेश में अभी 'ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस' (AINRC) के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में है, जिसकी कमान मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के हाथों में है और जिसे भाजपा का समर्थन प्राप्त है।  केरलम में 70 साल में पहली बार कोई सीएम हैट्रिक के लिए चुनाव लड़ रहा है। असम में बीजेपी हिमंता बिस्व सरमा के सहारे लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का दांव खेल रही है। जबकि पुडुचेरी में कांग्रेस से निकले एन. रंगासामी पांचवी बार सत्ता में काबिज होने की कोशिश कर रहे हैं। असम में 126 सीट पर 41 पार्टियों के 722 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं केरलम में 2.71 करोड़ वोटर 890 उम्मीदवारों में से अपना नेता चुनेंगे। पुडुचेरी में 20 पार्टियां के 294 कैंडिडेट अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। तीनों राज्यों में करीब 10 लाख से ज्यादा वोटर्स पहली बार मतदान करेंगे। असम, केरलम, पुडुचेरी चुनाव से जुड़े अपडेट्स     केरलम तिरुवनंतपुरम में एक्टर मोहनलाल ने वोट किया। केरलम भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने तिरुवनंतपुरम में वोट किया। वे नेमम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।     केरलम के सीएम पिनाराई विजयन ने कन्नूर में आरसी अमला बेसिक अपर प्राइमरी स्कूल में वोट डाला। केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद सुरेश गोपी ने त्रिशूर में मतदान किया।     असम के बरपेटा में सुबह से तेज बारिश के कारण वोटिंग में परेशानी आई। पुडुचेरी में रोबोट ने पोलिंग बूथ पर आने वाले वोटर्स का स्वागत किया। ईसरो के पूर्व वैज्ञानिक मंबी नारायणन ने डाला अपना वोट इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने तिरुवनंतपुरम के ईनचक्कल एलपी स्कूल में अपना वोट डाला। 'इस सरकार को जाना ही होगा', बोले केसी. वेणुगोपाल अपना वोट डालने के बाद कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, "हम 100 सीटों का आंकड़ा पार करने जा रहे हैं। मेरा यही अनुमान है। पिछले दो-तीन दिनों में कई खुलासे सामने आए हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर है। मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ स्पष्ट रूप से सत्ता-विरोधी लहर है और यह दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। केरल की जनता यह तय करेगी कि इस मुख्यमंत्री को जाना होगा और इस सरकार को भी जाना होगा। यूडीएफ इस राज्य के आम लोगों के लिए बेहतरीन गारंटियों का वादा कर रहा है। लोग उन गारंटियों पर भरोसा करेंगे और हमें वोट देंगे।" असम में भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार गुप्ता ने डाला अपना वोट भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार गुप्ता ने गुवाहाटी में अपना वोट डाला और नागरिकों से 'लोकतंत्र के उत्सव' में भाग लेने का आग्रह किया। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने डाला अपना वोट कांग्रेस महासचिव (संगठन) और … Read more

हर विधानसभा में एक खेल परिसर का निर्माण हमारा लक्ष्य : मंत्री सारंग

मंत्री विश्वास सारंग ने ली खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक हर विधानसभा में एक खेल परिसर का निर्माण हमारा लक्ष्य : मंत्री सारंग भोपाल  सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल स्थित मेजर ध्यानचंद हॉल में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभागीय समीक्षा बैठक ली। मंत्री सारंग ने विभागीय योजनाओं, वर्तमान कार्यों की प्रगति तथा आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री सारंग ने निर्देश दिए कि प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा में एक आधुनिक खेल परिसर के निर्माण के लक्ष्य को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण करने की दिशा में विशेष ध्यान दें। इसके लिए पृथक एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने का आधार बनेगा। मंत्री सारंग ने निर्देश दिए कि इस वर्ष समर कैंप को विशेष एवं नवाचारपूर्ण रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में अधिक से अधिक नए बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा उनके अभिभावकों को भी खेल गतिविधियों में शामिल करने की योजना बनाई जाए। इससे समाज में खेल के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा तथा परिवार स्तर पर खेल संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। मंत्री सारंग ने प्रदेश में पूर्व से निर्मित खेल परिसरों के उन्नयन (अपग्रेडेशन) पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि इन परिसरों में युवा केंद्रित गतिविधियों को भी जोड़ा जाए जिससे अधिक से अधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित हो सके और खेल के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास को भी बढ़ावा मिल सके। मंत्री सारंग ने खिलाड़ी प्रशिक्षण कल्याण समिति का पुनरावलोकन कर उसमें आवश्यक संशोधन करते हुए उसे और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समिति की कार्यप्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिससे खिलाड़ियों को अधिकतम लाभ मिल सके और उनके प्रशिक्षण एवं कल्याण से संबंधित आवश्यकताओं की समय पर पूर्ति सुनिश्चित हो सके। बैठक में खेल एवं युवा कल्याण के प्रमुख सचिव मनीष सिंह, उप सचिव अजय श्रीवास्तव, संचालक अंशुमान यादव, संयुक्त संचालक बी.एस. यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने उद्यमियों को स्वावलंबी बनाया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लगभग 58 करोड़ मुद्रा ऋण के माध्यम से 40 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित किए जाने पर हर्ष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को मुद्रा योजना की उपलब्धि के लिए धन्यवाद देते हुए आभार भी माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित इस योजना से प्रदेश और देश के गरीब नागरिकों के सपनों को उड़ान मिली है। देश के करोड़ों उद्यमियों, छोटे व्यापारियों और कारीगरों के आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त करते हुए यह योजना गरीबों के आर्थिक स्वावलंबन की ऋण व्यवस्था बन गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "आत्मनिर्भर भारत" को समर्पित इस अभूतपूर्व यात्रा के लिए प्रधानमंत्री  मोदी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है।  

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे का काला धब्बा, दो शिक्षक निलंबित

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे की कालिख, दो शिक्षक निलंबित मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा, जिसे समाज की आत्मा और भविष्य की नींव माना जाता है, जब उसी के मंदिर में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदारी का साया पड़ जाए, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक चेतावनी बन जाती है। ऐसा ही एक बेहद चिंताजनक और भावुक कर देने वाला मामला जिले के प्राथमिक शाला बाला, विकासखंड मनेंद्रगढ़ (तहसील केल्हारी) से सामने आया, जिसने हर संवेदनशील नागरिक को झकझोर कर रख दिया। यहां पदस्थ प्रधान पाठक पारस राम वर्मा और सहायक शिक्षक मेहीलाल सिंह, जिनके कंधों पर नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी थी, वे अपने कर्तव्यों से भटकते हुए शराब के नशे में स्कूल पहुंचे। यह दृश्य केवल एक नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के मूल्यों पर गहरी चोट जैसा था। मामले की गंभीरता को समझते हुए कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह न केवल हैरान करने वाली थी, बल्कि अत्यंत निराशाजनक भी। दोनों शिक्षक ड्यूटी के समय नशे की हालत में पाए गए। मौके पर ही पंचनामा तैयार कर उनके बयान दर्ज किए गए, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों को सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ में चिकित्सकीय परीक्षण हेतु ले जाया गया, जहां मेडिकल जांच में भी इस कड़वी सच्चाई पर मुहर लग गई। जांच प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय पहुंचते ही प्रशासन हरकत में आया और बिना किसी देरी के कड़ा निर्णय लिया गया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 एवं 23 के उल्लंघन का दोषी मानते हुए, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह कार्रवाई केवल दो व्यक्तियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक सशक्त संदेश है—कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही, गैर-जिम्मेदारी और अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिन हाथों में हमारे बच्चों का भविष्य सौंपा जाता है, वे हाथ कितने जिम्मेदार और सजग होने चाहिए। प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई निश्चित ही व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम है, लेकिन साथ ही यह समाज और शिक्षा विभाग दोनों के लिए आत्ममंथन का भी अवसर है। क्योंकि अंततः, बच्चों का भविष्य केवल किताबों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और आदर्शों से भी निर्मित होता है।

हक की पुकार बनी आंदोलन की चेतावनी: प्लेसमेंट कर्मचारियों का दर्द छलका, 15 अप्रैल तक न्याय नहीं तो हड़ताल तय

हक की पुकार बनी आंदोलन की चेतावनी: प्लेसमेंट कर्मचारियों का दर्द छलका, 15 अप्रैल तक न्याय नहीं तो हड़ताल तय मनेन्द्रगढ़/एमसीबी नगरीय निकायों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे प्लेसमेंट कर्मचारियों की पीड़ा अब शब्दों से आगे बढ़कर आंदोलन की दहलीज पर पहुंच गई है। लंबे समय से लंबित केन्द्रीय वेतनमान की मांग को लेकर कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय प्लेसमेंट कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि 15 अप्रैल 2026 तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। महासंघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सौरभ यादव के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में कर्मचारियों की पीड़ा साफ झलकती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा श्रम सुधार के तहत 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 नए श्रम कोड लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और “समान कार्य के लिए समान वेतन” का अधिकार देना है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में अब तक इन प्रावधानों को लागू करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है, जिससे हजारों कर्मचारियों के मन में गहरी निराशा घर कर गई है। कर्मचारियों का कहना है कि आज के महंगाई भरे दौर में उनका वर्तमान वेतन उनके जीवन की बुनियादी जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम नहीं है। परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा के खर्च हर मोर्चे पर वे संघर्ष कर रहे हैं। सबसे अधिक पीड़ा उन्हें इस बात की है कि समान कार्य करने के बावजूद स्थायी कर्मचारियों और प्लेसमेंट कर्मचारियों के बीच वेतन में भारी असमानता बनी हुई है। महासंघ ने शासन से मांग की है कि नए श्रम कोड के अनुरूप केन्द्रीय दर पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सर्कुलर जारी किया जाए, ताकि वर्षों से उपेक्षित इन कर्मचारियों को राहत मिल सके और उनके साथ हो रहे आर्थिक अन्याय का अंत हो सके। संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समय सीमा तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो पहले चरण में प्रदर्शन और ज्ञापन, दूसरे चरण में कार्य बहिष्कार और अंततः अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाए जाएंगे। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर नगरीय निकायों की दैनिक सेवाओं पर पड़ना तय है। फिलहाल शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कर्मचारियों के तेवर और उनके भीतर पनपता आक्रोश यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गंभीर रूप ले सकता है, जहां सिर्फ मांग नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

क्या ‘ग्लोबल पीस’ की वजह से खाली हैं पाकिस्तान के स्टेडियम, इस्लामाबाद यूनाइटेड के मालिक का चौंकाने वाला दावा

इस्लामाबाद PSL 2026 में खाली स्टेडियम को लेकर विवाद बढ़ गया है. इस्लामाबाद यूनाइटेड के मालिक अली नक़वी ने इसे पाकिस्तान की ग्लोबल पीस की कोशिशों से जोड़ा, जबकि PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी ने फ्यूल संकट को वजह बताया था. दोनों बयानों में विरोधाभास से आलोचना तेज हो गई है और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं. पाकिस्तान सुपर लीग (Pakistan Super League) 2026 में खाली स्टेडियम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. इस्लामाबाद यूनाइटेड (Islamabad United) के मालिक अली नकवी के बयान ने बहस को नया मोड़ दे दिया है, जिसमें उन्होंने दर्शकों की गैरमौजूदगी को पाकिस्तान की 'ग्लोबल पीस' में भूमिका से जोड़ दिया. अली नकवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि रावलपिंडी में मैच न कराना एक रणनीतिक फैसला था, क्योंकि इस दौरान इस्लामाबाद में संवेदनशील युद्धविराम से जुड़ी बातचीत हो रही थी. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स को लेकर पूरी लचीलापन जरूरी था. नकवी ने यह भी जोड़ा कि अगर मनोरंजन और वैश्विक शांति में से चुनना पड़े, तो हर पाकिस्तानी यही फैसला करता. हालांकि, यह बयान पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के आधिकारिक रुख से अलग है. बोर्ड के चेयरमैन मोहस‍िन नकवी ने पहले साफ कहा था कि दर्शकों की एंट्री पर रोक का कारण फ्यूल संकट है. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निर्देश पर लोगों की आवाजाही सीमित की गई थी, जिसके चलते मैच बिना दर्शकों के कराने का फैसला लिया गया.      इन दो अलग-अलग बयानों ने पूरे मामले को विवादास्पद बना दिया है. आलोचकों का कहना है कि एक साधारण प्रशासनिक समस्या जैसे ईंधन की कमी और लॉजिस्टिक्स को ‘ग्लोबल पीस’ जैसे बड़े नैरेटिव से जोड़ना वास्तविकता से दूर लगता है. PSL जैसे बड़े टूर्नामेंट में खाली स्टेडियम पहले ही चिंता का विषय थे, और अब इस पर विरोधाभासी बयान सामने आने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान मनेन्द्रगढ़/एमसीबी राजनीतिक मजबूती का असली आधार केवल पद नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की ऊर्जा होती है – इसी सोच के साथ नगर पंचायत नई लेदरी में कांग्रेस ने संगठन को नई धार देने का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को आयोजित अहम बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि अब हर मंडल और हर बूथ पर मजबूत, जागरूक और सक्रिय टीम तैयार की जाएगी। बैठक में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विष्णु दास ने स्पष्ट कहा कि संगठन निर्माण का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि हर स्तर पर ऐसी टीम खड़ी करना है जो जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों को प्रभावी ढंग से पहुंचा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं होंगे, तब तक संगठन की असली ताकत सामने नहीं आ पाएगी। मंडल अध्यक्ष राजाराम कोल की उपस्थिति में हुई इस बैठक में संगठन की मजबूती को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि आने वाले समय में कांग्रेस को क्षेत्र में और सशक्त बनाने के लिए बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने और नियमित संवाद बनाए रखने की रणनीति तैयार की गई। बैठक में सांसद प्रतिनिधि मकबूल अख्तर, हसदेव मंडल प्रभारी लक्ष्मी दास, मंडल सचिव राम भजन, नेता प्रतिपक्ष विकास दीवान, ब्लॉक उपाध्यक्ष शंभु घोष सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्षद अनामिका, अजय लाल, रानी मैना, शेखर टंडन, अंकित खरे, अमर पाव और अन्य कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस बैठक के माध्यम से कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि अब संगठन को कागजों से निकालकर जमीनी हकीकत में उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। मजबूत रणनीति और सक्रिय टीम के सहारे पार्टी आने वाले समय में क्षेत्र में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उम्मीद की नई किरण: पक्के घर से सम्मानजनक जीवन की शुरुआत

नक्सल क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण, पक्का घर बना सम्मानजनक जीवन का आधार रायपुर बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत धर्मावरम ग्राम से एक सकारात्मक बदलाव की कहानी सामने आई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास की नई तस्वीर बयान करती है। कभी नक्सल प्रभावित यह इलाका अब शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकास की मुख्यधारा से जुड़ता दिखाई दे रहा है। इसी परिवर्तन की मिसाल हैं 60 वर्षीय श्रीमती गुण्डी बुचम्मा, जिन्होंने वर्षों तक कच्चे एवं खपरैल वाले मकान में कठिन परिस्थितियों के बीच जीवन व्यतीत किया। बारिश के मौसम में घर की छत से पानी टपकना, असुरक्षा और असुविधा उनके जीवन का हिस्सा था। किन्तु अब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पक्का मकान प्राप्त हुआ है, जिसने उनके जीवन में एक नया आत्मविश्वास और सुरक्षा प्रदान की है।  यह पक्का मकान उनके लिए केवल एक आवास नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और स्थायित्व का प्रतीक बन गया है। उनके पुत्र जगत बुचम्मा के अनुसार, अब परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और दैनिक जीवन में काफी सुविधा महसूस कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में नक्सल प्रभाव के कारण विकास कार्य बाधित होते थे, लेकिन वर्तमान में प्रशासन की सक्रियता और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने से योजनाओं का क्रियान्वयन तेज हुआ है। शासन की योजनाएं अब दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं, जिससे आमजन का विश्वास भी लगातार बढ़ रहा है। धर्मावरम की यह कहानी केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते बीजापुर की तस्वीर है, जहां अब भय और असुरक्षा की जगह विकास, विश्वास और उम्मीद ने ले ली है। शासन की सतत पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की यह प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ रही है।