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वृंदावन में यमुना नाव हादसा, 5 लोग अब भी लापता

वृंदावन उत्तर प्रदेश के वृंदावन में यमुना नदी में श्रद्धालुओं से भरी नाव पलटने से हुए हादसे में हुए 10 लोगों की मौत के बाद गहरे पानी में फंसी बोट को 5 घंटे के अथक प्रयासों के बाद निकाला जा सका है। हादसे के बाद चारों ओर कोहराम मचा हुआ है तस्वीरों में आप स्वयं देख सकते हैं कि किस प्रकार मध्यरात्रि के बाद तक चले सर्च ऑपरेशन अभियान के दौरान गहरे पानी में फंसी मोटर वोट को बाहर निकाला गया है. वहीं लापता हुए पांच अन्य लोगों की लिए रेस्क्यू अभी भी जारी है .सभी मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कर उनके गतंव्य स्थान पर भेज दिया गया है. 10 मृतकों में एक ही परिवार के सात लोग बताया जा रहा है कि हादसे में मृत 10 लोगों में एक ही परिवार के सात लोग थे. मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रूप दिए जाने की घोषणा की गई है. दलदल में फंसी मिली बोट आगरा रेंज के डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि यमुना में बोट पलटने से हुए हादसे में 10 लोगों की मौत के बाद कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गहरे पानी दलदल में फंसी वोट को बाहर बाहर निकाल किया गया है उनका कहना है पांच मिसिंग लोगों की अभी भी तलाश की जा रही है उनका कहना है कि आज से सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. 5 लोग नदी में अब भी लापता बता दें कि शुक्रवार दोपहर 2:45 बजे के करीब श्री बांके बिहार मंदिर से करीब ढाई किमी की दूरी पर स्थित केशी घाट के पास पर्यटकों से भरी मोटर बोट पोंटून पुल (पीपा पुल) से टकराने के बाद यमुना नदी में पलट गई थी. नाव में 30 से अधिक लोग सवार थे, जो नदी में गिर गए. इनमें से 10 लोगों की डूबकर मौत हो गई, जबकि 22 को बचा लिया गया. अब भी 5 लोग नदी में लापता हैं और उनकी तलाश की जा रही है.  मथुरा के जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि नाव में सवार लोग पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं. कैसे डूबी बोट? स्थानीय गोताखोर गुलाब ने इस हादसे के लिए तेज हवा को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आजतक से बातचीत में बताया है कि,'तेज हवा चल रही थी. यमुना नदी के बीच में नाव अचानक तेज हवा से डगमगाने लगी और उसकी स्पीड भी बढ़ गई. देखते ही देखते नाव पीपा पुल (पांटून पुल) से टकराकर नदी में पलट गई और उसमें सवार सभी लोग गहरे पानी में गिर गए.'

जामा मस्जिद के पास अवैध निर्माण पर कोर्ट का स्टे खत्म, कार्रवाई जल्द

संभल यूपी के संभल में कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध रूप से बनी दुकानों और मकानों को हटाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. प्रशासन की टीम ने बीते दिनों पैमाइश की थी. इसके बाद संभल सिविल कोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई पर स्टे लगा दिया था. उसे अब सिविल कोर्ट ने खारिज कर दिया है. इसी के साथ अब तहसीलदार कोर्ट से अवैध निर्माण को हटाने का अंतिम आदेश जारी होगा, जिसके बाद प्रशासन जल्द कब्जा हटाने की कार्रवाई कर सकता है. दरअसल, संभल की जामा मस्जिद के बराबर में स्थित कब्रिस्तान की भूमि पर कब्जा किए जाने की शिकायत एडवोकेट सुभाष चंद्र त्यागी ने डीएम को पत्र देकर की थी. इसके बाद प्रशासन ने दो दर्जन से अधिक राजस्व कर्मियों की टीम बनाकर 30 दिसंबर 2025 को उस जमीन पर बने मकानों और दुकानों की पैमाइश की थी. इस दौरान कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा होने की बात सामने आई थी. इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने कब्जा करने वालों को नोटिस कर जवाब मांगा था, लेकिन कब्जेदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मगर हाई कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली. हाई कोर्ट ने कब्जा करने वालों को तहसीलदार के सामने अपना पक्ष रखने को कहा था. इसके बाद जनवरी में 18 में से 15 लोगों ने संभल सिविल कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें प्रदेश सरकार की तरफ से डीएम व तहसीलदार, नगर पालिका के अधिकारी, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल बैंक बोर्ड के सीओ को प्रतिवादी बनाया गया था. सिविल कोर्ट में याचिका दायर करने वालों में शामिल 15 लोगों में से चार लोगों ने याचिका वापस ले ली थी. इसके बाद सिविल जज ललित कुमार ने फरवरी में मामले में सुनवाई पूरी होने तक प्रशासनिक कार्रवाई पर स्टे लगा दिया था. मार्च में अलग-अलग तारीख पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 27 मार्च को आदेश रिजर्व कर लिया था. वहीं अब 10 अप्रैल को सिविल कोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई पर लगाए गए स्टे को हटा लिया है. इसी के साथ अब जामा मस्जिद के बराबर में स्थित कब्रिस्तान की भूमि पर बनीं 18 दुकानें और मकानों के अवैध निर्माण को हटाने का रास्ता साफ हो चुका है. एडवोकेट नलिन जैन का कहना है कि सिविल जज ललित कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश रिजर्व कर लिया था . कब्जा करने वालों ने संभल कोर्ट को भ्रमित करते हुए जो स्टे ले लिया था, उसको निरस्त कर दिया गया है. कब्रिस्तान पर अब कोई स्टे नहीं है.

रायपुर जिले के चिंगनार गांव में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन

रायपुर : जिले के दूरस्थ गांव चिंगनार में लगा जनसमस्या निवारण शिविर ग्रामीणों को मिला शासकीय योजनाओं का लाभ सांसद और विधायक हुए शामिल रायपुर माओवाद मुक्त बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में शासन की योजनाओं की पहुंच सुलभ हो रही है और विकास कार्यों को भी गति मिल रही है।  राज्य शासन के निर्देशानुसार कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड अंतर्गत दूरस्थ ग्राम चिंगनार में शासकीय योजनाओं का लाभ ग्रामवासियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में कांकेर सांसद भोजराज नाग और केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम शामिल हुए। सांसद और विधायक ने शासन की विभिन्न योजनाओं अंतर्गत हितग्राहियों को सामग्री का विवरण किया। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना और जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई भी उपस्थित रहे।  ग्रामीणों को मिला शासकीय योजनाओं का लाभ सांसद नाग ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पहले माओवाद के प्रभाव से इस क्षेत्र में सड़क पुल पुलिया और आधारभूत संरचना के कार्य नहीं हो पाता था। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के नेतृत्व में बस्तर अब माओवाद से मुक्त होने के बाद अब इन कार्यों को गति मिलेगी। केंद्र एवं राज्य सरकार महिलाओं किसानों के कल्याण के साथ  ग्रामीणों क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति का विकास जरूरी है।  केशकाल विधायक ने कहा कि पहले इस क्षेत्र में माओवाद का बहुत दहशत हुआ करता था, विकास कार्य नहीं हो पा रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी सोच से अब इससे मुक्ति मिली है। दूरस्थ अंचलों में सड़क पुल पुलिया और बुनियादी सुविधाओं संबंधी कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण किया जाएगा। उन्होंने वन पट्टा धारियों से कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें। उन्होंने युवाओं को बेहतर भविष्य और महिलाओ के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए शासन की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामवासियों से कुल 115 प्राप्त हुए, जिसमें 49 आवेदनों का मौके पर निराकरण किया गया। शिविर के दौरान कुल 81 हितग्राहियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। आयुष्मान कार्ड के 7 तथा आधार कार्ड के 22 प्रकरणों का निराकरण किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोद भराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम के तहत 8 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। इसी प्रकार विभिन्न विभागों द्वारा सामग्री वितरण के अंतर्गत राजस्व विभाग द्वारा 16 हितग्राहियों को बी-1/डिजिटल किसान किताब प्रदान की गई। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 12 जॉब कार्ड तथा 5 आवास स्वीकृत किए गए। श्रम विभाग द्वारा 11 श्रम कार्ड वितरित किए गए। शिक्षा विभाग द्वारा 24 जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए तथा उद्यान विभाग द्वारा 3 हितग्राहियों को बागवानी किट प्रदान की गई। इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष मानकु राम नेताम, झाड़ू राम सलाम एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई, एस डी एम अश्वन पुसाम, जनपद पंचायत सीईओ रूपेंद्र नेताम, तहसीलदार जय नाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

दुष्कर्म मामलों में कड़ा संदेश: नाबालिग पीड़िता होने पर बढ़ेगी दोषी की सजा—HC का बड़ा फैसला

चंडीगढ़. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने बच्चों के साथ दुष्कर्म मामलों में सजा तय करने के लिए एक नया मानक प्रस्तुत किया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित की उम्र जितनी कम होगी, अपराध की सजा उतनी अधिक होनी चाहिए। साथ ही, अपराधियों की संख्या बढ़ने पर सजा और कठोर होगी। मामला लुधियाना में चार साल सात महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या से जुड़ा है। आरोपित 28 वर्षीय सोनू सिंह ने बच्ची को उसके दादा की चाय की दुकान से बहला-फुसलाकर ले जाकर यह जघन्य अपराध किया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। मामला हाई कोर्ट में मौत की सजा की पुष्टि और आरोपित की अपील के रूप में पहुंचा। जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने कहा कि भारत में पोक्सो मामलों में सजा तय करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं, जिससे फैसलों में असंगति आती है। इसी कमी को दूर करने के लिए कोर्ट ने मानक तैयार किया। इसके तहत सजा तय करने का आधार सहमति की कानूनी उम्र को माना जाएगा। जैसे-जैसे पीड़ित की उम्र इस आधार से कम होती जाएगी, सजा बढ़ती जाएगी। यदि अपराध में एक से अधिक आरोपित हों, तो सजा और कठोर होगी। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की उम्र पांच साल से कम थी और आरोपित अकेला था। इस आधार पर दुष्कर्म के लिए 25 साल के कठोर कारावास को कोर्ट ने उचित माना। हत्या के लिए आजीवन कारावास दिया गया, जिसमें कम से कम 50 साल तक बिना किसी रिमिशन के जेल में रहना अनिवार्य होगा। हाई कोर्ट ने सबूतों के आधार पर दोषसिद्धि बरकरार रखी लेकिन यह भी कहा कि हत्या पूर्वनियोजित नहीं थी, बल्कि दुष्कर्म के सुबूत मिटाने के लिए घबराहट में की गई थी। इसी आधार पर इसे “रेयरेस्ट आफ रेयर” की श्रेणी में न रखते हुए मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया।

जोखिम पहचान पर फोकस: मातृ-शिशु मौतों में कमी के लिए स्वास्थ्य सेवाएं होंगी मजबूत

रायपुर. प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति, गुणवत्ता और प्रभावशीलता का समग्र आकलन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में शुक्रवार को सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की एक दिवसीय राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक स्वास्थ्य मंत्री के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं सेवा प्रदायगी की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जोखिम की समय पर पहचान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चिन्हित मामलों को आवश्यकता अनुसार उच्च स्तरीय शासकीय अथवा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में समय रहते रेफर किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि रेफरल प्रक्रिया के दौरान संबंधित चिकित्सक एवं अस्पताल प्रबंधन प्रसूता एवं शिशु के डिस्चार्ज तक सतत संपर्क में रहें तथा सभी आवश्यक उपचार एवं सुविधाएं सुनिश्चित करें। साथ ही, मौसमी बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए अग्रिम तैयारियों को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए। समीक्षा के दौरान सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया। चिकित्सकों को प्रभावी औषधियां लिखने तथा आवश्यक जांच सुविधाएं संस्थागत स्तर पर ही उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े। बैठक का संचालन करते हुए सचिव अमित कटारिया ने मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रत्येक प्रकरण की अनिवार्य रिपोर्टिंग एवं पंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित डेटा विश्लेषण के माध्यम से मृत्यु के कारणों की पहचान कर भविष्य में प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी विशेष बल दिया गया, ताकि हितग्राहियों तक समयबद्ध एवं सरल जानकारी पहुंच सके और योजनाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित हो। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के संचालक संजीव कुमार झा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक रणबीर शर्मा, महामारी नियंत्रण के संचालक डॉ. एस.के. पामभोई सहित सभी संभागों के संयुक्त संचालक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, कुष्ठ एवं टीबी उन्मूलन सहित प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की गई। समापन संबोधन में सचिव कटारिया ने कहा कि प्रदेश को टीबी एवं मलेरिया मुक्त बनाना, मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार लाना तथा प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से सेवा भावना, प्रतिबद्धता एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है।

एम्स भोपाल, शासकीय होम्योपैथी कॉलेज और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के बीच त्रिपक्षीय एमओयू

एम्स भोपाल, शासकीय होम्योपैथी कॉलेज भोपाल और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के बीच हुआ त्रिपक्षीय एमओयू मधुमेह के जटिल उपचार पर होगा संयुक्त शोध भोपाल  विश्व होम्योपैथी दिवस के उपलक्ष्य में विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव और सचिव आयुष वैद्य राजेश कोटेचा की उपस्थिति में होम्योपैथी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण, प्रदेश के आयुष विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि रहा, जिसके अंतर्गत शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के बीच एक त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। आयुष विभाग के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण है, जो प्रदेश में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान के नए द्वार खोलेगा। एमओयू में अब भोपाल के इन प्रतिष्ठित संस्थानों में 'मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट डायबिटीज मेलिटस' के कारण होने वाले 'फुट अल्सर' के मामलों में होम्योपैथी दवाओं के प्रभाव पर विस्तृत शोध किया जाएगा। यह अनुसंधान, भविष्य में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति कीटाणुओं की बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) के वैश्विक संकट को हल करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। भारत में इस विधा के स्वरूप, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को रेखांकित करते हुए विशेषज्ञों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर एम्स भोपाल के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. देवाशीष विश्वास, मुख्य शोधकर्ता डॉ. शाश्वती नेमा, शासकीय होम्योपैथी कॉलेज भोपाल की शोध प्रमुख डॉ. जूही गुप्ता, सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के सचिव डॉ. संजय गुप्ता एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रेनु मित्तल विशेष रूप से उपस्थित थे।  

सरेंडर की डेडलाइन खत्म, बस्तर में 5 माओवादी अब भी फरार—काउंटडाउन जारी

जगदलपुर. बस्तर में माओवादियों का नेटवर्क अब सिमटकर अंतिम दौर में पहुंचता दिख रहा है. लेकिन इसी बीच कुछ गिने-चुने माओवादी अब भी हथियार डालने को तैयार नहीं हैं और सुरक्षा बलों को सीधी चुनौती दे रहे हैं. माओवादी कमांडर पापाराव के जगदलपुर में और PLGA इंचार्ज सोढ़ी केसा के तेलंगाना में आत्मसमर्पण के बाद बस्तर में सक्रिय माओवादियों की संख्या तेजी से घटी है. इसके बावजूद अब भी कुछ कट्टर कैडर अंडरग्राउंड रहकर गतिविधियां जारी रखे हुए हैं. स्थिति को देखते हुए बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने साफ और कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर बॉर्डर में अब गिनती के माओवादी ही बचे हैं. और उनके पास मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी मौका है. आईजी ने दो टूक कहा कि अगर अब भी ये माओवादी सामने नहीं आते हैं, तो सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज होगी. तेलंगाना DGP की माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील वहीं दूसरी ओर तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी ने भी तेलंगाना मूल के माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील दोहराई है. उन्होंने बताया कि साल 2024 में 125 तेलंगाना मूल के लोग माओवादी संगठन से जुड़े थे. लेकिन अब यह संख्या घटकर महज 5 रह गई है. इन बचे हुए माओवादियों में बड़े नाम भी शामिल हैं जिनमें गणपति और कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर में सक्रिय महिला माओवादी रूपी का नाम प्रमुख है जो अब भी अंडरग्राउंड हैं. यानी साफ है बस्तर में माओवाद का ढांचा लगभग ढह चुका है लेकिन आखिरी बचे माओवादी अब भी आत्मसमर्पण और मुठभेड़ के बीच खड़े हैं जहां अगला कदम उनकी किस्मत तय करेगा.

रोजगारोन्मुखी कोर्स डिज़ाइन करें – मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अहम निर्देश

रोजगारोन्मुखी नवीन कोर्स करें डिजाइन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की 47 आईटीटाई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सबसे अधिक नामांकन मध्यप्रदेश में भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में प्रदेश की उपलब्धि अन्य राज्यों से बेहतर है। उन्होंने योजना से अधिक से अधिक युवाओं को लाभान्वित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ऐसे नए उपयोगी कोर्स भी डिजाइन किए जाएं, जो प्रशिक्षण के बाद युवाओं को तत्काल रोजगार दिलवाने में सहायक हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश समत्व भवन में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिये। बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल उपस्थित रहे। बैठक में जाकनारी दी गई कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आईटीआई की ग्रेडिंग जारी की है, इसमें मध्यप्रदेश 5वें स्थान पर है। प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को स्किल कैपिटल बनाने की दिशा में अनेक प्रयत्न किए हैं। देश में युवाओं की जनसंख्या के दृष्टिगत उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों और डेयरी विकास कार्यक्रमों से भी युवाओं को जोड़ने के निर्देश दिए। इसके लिए कौशल विकास और रोजगार विभाग से समन्वय कर समुचित कदम उठाए। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में लगभग 20 हजार से व्यक्तियों के प्रशिक्षण की उपलब्धि को दोगुना किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष-2026 में विभिन्न गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने और रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए समुचित प्रयास करने को कहा। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास में मध्यप्रदेश की उपलब्धियां बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सर्वाधिक 11 हजार 400 प्रशिक्षणार्थियों का नामांकन मध्यप्रदेश में हुआ। साथ ही युवा संगम के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 2 लाख 68 हजार से अधिक आवेदकों को लाभान्वित किया गया। मध्यप्रदेश के एक लाख 32 हजार युवाओं को स्व-रोजगार का लाभ मिला है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल द्वारा इस वर्ष 3 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। इनमें 1500 प्रशिक्षणार्थी लाँग टर्म और इतने ही शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग का लाभ प्राप्त करेंगे। युवाओं को पूर्व में जिन उद्योगों में प्रशिक्षण दिलवाया गया है, उनमें रिलायंस, ट्राइडेंट, जिंदल समूह के जेबीएम आदि शामिल हैं। प्रदेश में 290 शासकीय और 644 प्रायवेट आईटीआई संचालित हैं। शासकीय आईटीआई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई, जिसके फलस्वरूप कुल सीट 52 हजार 248 हो गई हैं। प्रायवेट आईटीआई में कुल 61 हजार 32 सीट हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि परम फाउंडेशन द्वारा धार जिले में सरदारपुर आईटीआई में मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन कोर्स में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। पीएम सेतु के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 20 हब और 81 स्पोक आईटीआई उन्नयन का कार्य हुआ है। इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में मध्यप्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा।  

मेडिकल हब बनने से मध्यप्रदेश में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित किया जायेगा मेडिकल हब बनने से मध्यप्रदेश में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल विशेष रीजनल मेडिकल हब के लिये इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर बेहतर जगह स्टेक-होल्डर कंस्यूलेशन वर्कशॉप फॉर डेवलपमेंट ऑफ इंदौर-उज्जैन हेल्थ एंड वेलनेस टूरिज्म कॉरिडोर कार्यक्रम में टूरिज्म, हेल्थ, होटल इंड्रस्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पाँच विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने की योजना है। प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में विशेष रीजनल मेडिकल हब बनाने की दिशा में कार्य शुरू हो गया है। इस मेडिकल हब के बनने से मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा। रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश विशेषकर इंदौर में विशेष मेडिकल हब बनने की अपार संभावनाएं है। मध्यप्रदेश में विशेष रीजनल मेडिकल हब के लिये इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर बेहतर जगह है। इंदौर में के 100 किलोमीटर की दायरे में देा ज्यार्तिलिंग ओंकारेश्वर और उज्जैन में प्रसिद्ध महांकालेश्वर मंदिर है। बाहर से आने वाले नागरिक उक्त दोनों ही ज्योर्तिलिंगों पर दर्शन के लिये आते है। इस दृष्टि से भी विशेष रीजनल मेडिकल हब इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर पर बनाना उपयुक्त है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इंदौर में एजुकेशन हब है। इंदौर में मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर है। रेलवे और एयर कनेक्टिविटी है। व्यवसायी दृष्टि से भी इंदौर तेजी से बढ़ता हुआ शहर है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि केन्द्र सरकार की आयुष्मान स्वास्थ्य योजना से नागरिकों का नि:शुल्क इलाज हो रहा है। अभी तक करोड़ नागरिकों द्वारा आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का लाभ ले चुके हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित स्टेकहोल्डर कंस्यूलेशन वर्कशॉप फॉर डेवलपमेंट ऑफ इंदौर-उज्जैन हेल्थ एंड वेलनेस टूरिज्म कॉरिडोर में अपना संबोधन दे रहे थे। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एमडी डॉ. सलोनी सिड़ाना, एसीएस हेल्थ अशोक बर्णवाल, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े और आयुक्त आयुष विभाग शोभित जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने का उद्देश्य दुनियाभर से आने वाले मरीजों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं आधुनिक तकनीक और किफायती इलाज मुहैया कराना है। भारत की चिकित्सा क्षमता को दुनिया के सामने लाने में विशेष रीजनल मेडिकल हब की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वर्तमान में भारत मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स और वेलनेस इंडेक्स में अच्छी स्थिति में है और हमें इसे और बेहतर करना है। मध्यप्रदेश में विशेष रीजनल मेडिकल हब बनने से स्वास्थ्य सुविधाएं, देखभाल रिहैबिलिटेशन सेवाएं और आयुष सेवाएं बेहतर होगी। देश में मेडिकल सेवाएं के बेहतर होने से विदेशी मरीज विशेषकर मध्य एशिया, यूरोपी देश और अफ्रीका से इलाज के लिए मध्यप्रदेश में आएंगे, जिससे विदेशी मुद्रा आएगी और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं है। मध्यप्रदेश, देश में तेजी से आगे बढ़ता हुआ राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में लगातार अवार्ड प्राप्त कर रहा है। मध्यप्रदेश में बिजली का उत्पादन भी सरप्लस हो रहा है और मध्यप्रदेश दूसरे राज्यों को भी बिजली दे रहे है। ताप्ती-पार्वती, केन, बेतवा आदि नदियों से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। रिन्यूवेबल एनर्जी के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश आगे बढ़ रहे है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमें एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ आयुर्वेद एवं अन्य भारतीय चिकित्सा को भी बढ़ाने की आवश्यकता है। देहदान और अंगदान के क्षेत्र में जिस तरह का कार्य आज तमिलनाडू, महाराष्ट्र और तेलंगाना प्रदेश में हो रहा है, उस स्तर का कार्य मध्यप्रदेश में भी करने की आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवा का तेजी से विस्तार हुआ है और इसका लाभ मध्यप्रदेश को भी मिला है। टीयर-2 और टीयर-3 सिटी में वेलनेस सेंटर तेजी बढ़ने लगे हैं। आम आदमी की पेइंग केपेसिटी बढ़ी है। शुक्ल ने कहा कि भारत आज जीडीपी में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। शुक्ल ने कहा कि हमारे स्वास्थ्य का खराब होने का एक बड़ा कारण दूषित पेयजल है। बेहतर होगा कि हम खेती किसानी में रासायनिक उर्वरकों की बजाय गौमूत्र-गोबर खाद् का इस्तेमाल करें, इससे हमारी धरती सुधरेगी और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि एक समय था कि जब आर्गन ट्रांसप्लांट के लिये हम मुंबई जाते थे, लेकिन अब यह कार्य इंदौर में हो रहा है। एसीएस हेल्थ बर्णवाल ने कहा कि आज की वर्कशॉप में हेल्थ, होटल, टूरिज्म आदि क्षेत्रों से आये प्रतिनिधियों के अपेक्षा से अधिक सुझाव आये है और अब इस पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। हमें एक कमेटी बनानी होगी जो और आगामी तीन महिनों के भीतर रीजनल मेडिकल हब का फाइनल ड्रॉफ्ट बना सकें। इस कार्य में सभी को सकारात्मक सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है। संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में अपार संभावनाएं है। इस दृष्टि से इंदौर शहर में अच्छा कार्य हो रहा है। इंदौर के ही चोइथराम अस्पताल में सर्जरी का लाइन डेमों बच्चों को दिखाया जाता है। इंदौर में एयर एम्बुलेंस की बेहतर सुविधा है। बुरहानपुर के शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में अच्छा कार्य हो रहा है। वर्कशॉप में अरबिंदों अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. विनोद भंडारी ने मेडिकल इंटीग्रेटेड पर बात की। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डी.के. शर्मा ने मेडिकल टूरिज्म को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जोड़ने की बात की। वर्कशॉप में अंगदान, फार्मेसी इंड्रस्टी, इंटरनल टूरिज्म, स्किल डेवलपमेंट, नी रीप्लेसमेंट, क्वालिटी हेल्थ एजुकेशन, ग्लोबल हेल्थ इंश्यूरेंस आदि विषयों पर भी चर्चा हुई। वर्कशॉप में अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हासानी, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया, डॉ. अशोक यादव सहित अनूप हजेला ने भी अपने विचार रखें। वर्कशॉप में नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला एवं उपस्थित प्रतिनिधियों ने एमवाय परिसर में बनने जा रहे आधुनिक जी-प्लस-8 भवन का थ्रीडी प्रजेंटेशन का अवलोकन किया। बताया गया आधुनिक सुविधाओं से लेस इस शासकीय अस्पताल में 1610 बेड होंगे साथ ही मल्टी लेवल पार्किंग होगा।  

सूरजपुर : जनगणना 2027 – 13 अप्रैल से प्रारंभ होगा प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण

सूरजपुर जनगणना 2027 के प्रथम चरण – मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) – की तैयारी के अंतर्गत जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार जिले में 13 अप्रैल से प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण प्रारंभ किया जायेगा। जारी दिशानिर्देशों के अनुसार यह प्रशिक्षण 25 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना है। तीन दिवसीय बैच प्रशिक्षण:- दो फील्ड ट्रेनर्स की जोड़ी द्वारा 40 से 45 प्रतिभागियों के बैचों में 03 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण से पूर्व सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का पंजीयन सीएमएमएस पोर्टल (census.gov.in) पर किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान एचएलओ निर्देश पुस्तिकाएँ, पीपीटी प्रस्तुतियाँ एवं लघु शिक्षण वीडियो हिन्दी भाषा में उपलब्ध कराए जाएंगे तथा प्रशिक्षण की निगरानी सीएमएमएस डैशबोर्ड के माध्यम से की जाएगी।      कलेक्टर एस. जयवर्धन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को निर्धारित समय-सीमा में सफलतापूर्वक पूर्ण कराया जाने हेतु चार्ज अधिकारियों को दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के दिशा निर्देश दिये।