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जापानी इंसेफेलाइटिस निगेटिव, पुणे लैब रिपोर्ट का इंतजार जारी

सलूंबर सलूंबर जिले में 8 दिन के भीतर 8 बच्चों की मौत की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है. घाटा और झल्लारा में कुछ दिनों के भीतर बच्चों की मौत का रहस्य बरकरार है. फिलहाल, इस बारे में वजह का खुलासा नहीं हुआ है. खास बात यह है कि कुछ मरीजों के सैंपल पुणे स्थित नेशनल वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट में भी भेजे गए थे. उसके बाद वायरस के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल पाएगी. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में अब तक जो बात सामने आई, उसके तथ्यों का विश्लेषण करते हुए NDTV ने विशेषज्ञ चिकित्सक और स्थानीय डॉक्टरों से बातचीत की. इस दौरान कुछ संभावनाओं की बात सामने आई, जो मौत की वजह हो सकती है. इस रिपोर्ट में बात इन्हीं संभावनाओं पर… हॉस्पिटल की जांच रिपोर्ट में ये बातें आई सामने इसमें जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis) और चांदीपुरा वायरस (Chandipura virus) की आशंका जताई जा रही थी. स्वास्थ्य विभाग द्वारा 20 बच्चों के सैंपल की जांच कराई गई थी. उदयपुर स्थित एमबी हॉस्पिटल के अधीक्षक आरएल सुमन ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस की रिपोर्ट निगेटिव आई है. जबकि अन्य वायरस का पता लगाने के लिए सैंपल पुणे भेजे गए थे. फिलहाल यह रिपोर्ट स्वास्थ्य घाटा गांव और आसपास के इलाकों में 1 से 5 अप्रैल के बीच बच्चों की मौत हुई थी. इन बच्चों में बुखार, दौरे और इंसेफेलाइटिस जैसे लक्षण दिखे थे. डॉ. आरएल सुमन के मुताबिक, "झल्लारा गांव के 3 बच्चे हॉस्पिटल में रेफर हुए थे, उनमें से एक को मलेरिया था, उपचार करने के बाद दो दिन पहले डिस्चार्ज दे दिया था. इनके अलावा बाकी की रिपोर्ट में कोई गंभीर बात सामने नहीं आई थी." रैपिड रिस्पॉन्स टीम को क्या लक्षण मिले?     शाम या रात में हल्की उल्टी और दस्त शुरू होते थे.     उसके बाद अचानक शरीर में अकड़न (stiffness) आती थी.     बच्चा बेहोश हो जाता था और फिर होश नहीं आता था.     मौत 24 से 48 घंटे के अंदर हो जाती थी.     ज्यादातर मामलों में बुखार की हिस्ट्री नहीं मिली. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) डॉ. लाखन पोसवाल (एक्सपर्ट) से खास बातचीत में स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग में मिले लक्षणों से जुड़े सवाल-जवाब किए. उन्होंने कहा कि बीमारी का स्पष्ट बता पाना संभव नहीं है. लेकिन, आदिवासी अंचल में मलेरिया, ब्रुसेलोसिस और वायरल एन्सेफलाइटिस (दिमागी बुखार/वायरल इनफेक्शन) का प्रकोप हमेशा से रहा है. स्पष्ट तौर पर इसकी पहचान के लिए पुणे लैब की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा. उन्होंने बताया कि बीमार होने के बाद जिस तरह से कम ही समय में बच्चों की मौत हुई, उससे ब्रुसेलोसिस की संभावना काफी कम है. क्योंकि यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करती है. इससे इतनी तेजी (24-48 घंटे) में मौत होना काफी मुश्किल है. इसलिए इसकी संभावना कम मानी जा रही है.     डॉ. पोसवाल के मुताबिक, "पहली संभावना है कि मलेरिया (खासकर सेरेब्रल मलेरिया) का दिमाग पर सीधा असर हुआ हो. इलाके में पहले से प्रचलित बीमारियों को देखते हुए मलेरिया सबसे ज्यादा संभावित लगता है. दूसरी संभावना है कि वायरल एन्सेफलाइटिस (दिमागी बुखार/वायरल इनफेक्शन) की वजह से मौत हुई हो." साथ ही ध्यान देने वाली बात यह है कि मलेरिया में कई बार एंटीजन टेस्ट किट निगेटिव आ सकता है, भले ही संक्रमण हो (फॉल्स नेगेटिव). इसलिए नेगेटिव रिपोर्ट आने के बावजूद मलेरिया को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. जनजाति क्षेत्र में चुनौतियां भी कम नहीं लेकिन, इस तरह मौतों का मामला जनजाति अंचल में कोई नई बात नहीं है. बीते कुछ सालों का पैटर्न एक जैसा ही है, जनजाति क्षेत्र में ऐसी बीमारी का मामला सामने आता है और फिर वो एक नए वायरस की बात का खुलासा होता है. जुलाई 2024 में उदयपुर में चांदीपुरा वायरस (CHPV) के मामलों ने चिंता बढ़ा दी थी. खास तौर पर गुजरात की सीमा से लगे आदिवासी क्षेत्रों (खेरवाड़ा, नयागांव) में 15 साल से कम उम्र के बच्चों में इसके लक्षण देखे गए. यह वायरस बुखार, उल्टी और मतिभ्रम (altered sensorium) का कारण बनता है. हालांकि, उस दौरान मृत बच्चे सहित 3 बच्चों के पुणे भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई थी. साक्षरता की कमी, स्वास्थ्य देखभाल और पोषण के बारे में सीमित जानकारी और खराब आहार जैसी तमाम वजह भी इस क्षेत्र में बड़ी चुनौतियां हैं. यही वजह है कि कई ग्रामीण बीमारी को मानने से इनकार कर रहे हैं. जांच के लिए पहुंची चिकित्सा टीमों को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा.  

भाजपा प्रदेश कार्यालय में गूंजा ‘नारी शक्ति वंदन’ का संदेश: नरेंद्र मोदी के संबोधन को महिला कार्यकर्ताओं ने उत्साह से सुना

भोपाल. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सोमवार को नई दिल्ली में ‘नारी शक्ति वंदन‘ अधिनियम को नई दिल्ली में दिए गए संबोधन को देश भर सहित मध्यप्रदेश के पार्टी कार्यकर्ता एवं महिला कार्यकर्ताओं द्वारा श्रवण किया गया। प्रधानमंत्री के संबोधन को भाजपा प्रदेश कार्यालय में महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे के नेतृत्व में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों, जिला पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियां एवं हजारों की संख्या में महिला कार्यकर्ताओं व मातृशक्ति ने सुना। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष व ‘नारी शक्ति वंदन‘ अधिनियम की प्रदेश टोली की सह संयोजक अश्विनी परांजपे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश भर की नारी शक्ति को संबोधित करते हुए महिलाओं की भागीदारी को सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए अधिनियम के महत्व पर प्रकाश डाला है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी दिखाई। अभियान के तहत महिलाओं ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दर्ज कराया। साथ ही 9667173333 पर मिस्ड कॉल देकर भी अधिनियम के पक्ष में समर्थन व्यक्त किया। इस पहल से महिलाओं में जागरूकता और उत्साह का माहौल देखने को मिला। महिला सशक्तिकरण के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन कार्यक्रम का समापन महिला सशक्तिकरण के संकल्प के साथ हुआ, जिसमें नारी शक्ति ने समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का संचालन महिला मोर्चा की प्रदेश में महामंत्री मोना सुस्तानी ने किया। आभार महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष वंदना जाचक ने माना। इस अवसर पर भाजपा की प्रदेश मंत्री अर्चना सिंह, विधायक मंजू दादू, पूर्व विधायक साधना स्थापक, महिला मोर्चा महामंत्री ज्योति सिंह राजपूत, कार्यालय मंत्री भावना सिंह, सह कार्यालय मंत्री विमला तिवारी, प्रदेश मीडिया प्रभारी हर्षा सिंह ठाकुर, आईटी प्रभारी सुधा सुखियानी, प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी स्मृति जैन, सह सोशल मीडिया प्रभारी सारिका उपाध्याय, नीति एवं शोध सह प्रभारी इंदु चौधरी सहित हजारों की संख्या में महिला कार्यकर्ता व मातृशक्ति उपस्थित रहीं।

स्पोर्ट्स में हरियाणा की नई रणनीति: टैलेंट हंट के जरिए ओलंपिक तक पहुंचाने की तैयारी – गौरव गौतम

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार द्वारा खिलाड़ियों के लिए अच्छी योजनाएं निर्धारित करने का लक्ष्य निर्धारित होगा जिसको लेकर लगातार खेल विभाग के अधिकारियों को मंत्री गौरव गौतम की तरफ से दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। देश और प्रदेश में खेलों के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए सरकार और खेल संस्थाएं अब युवा खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। नई योजनाओं के तहत स्कूल और जिला स्तर से ही प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है। भारत में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहलें शुरू की गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को शुरुआती स्तर से ही सही प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना है। ‘टैलेंट सर्च प्रोग्राम’ के जरिए गांव और छोटे शहरों से उभरते खिलाड़ियों को चिन्हित किया जा रहा है। खेल मंत्रालय द्वारा संचालित योजनाओं में खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग, आधुनिक सुविधाएं और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में खेल को अनिवार्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक युवा इसमें भाग ले सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही दिशा में निवेश और मार्गदर्शन जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ओलंपिक 2036 को ध्यान में रखते हुए अभी से युवा खिलाड़ियों की तैयारी शुरू कर दी गई है। युवा खिलाड़ियों पर बढ़ता फोकस न केवल देश के खेल भविष्य को मजबूत करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को फिट और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करेगा।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा, मुख्यमंत्री ने महिलाओं की भूमिका को बताया अहम

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के लोकसभा में पारित होने से पहले प्रदेश की महिलाओं से सीधा संवाद किया. मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में उद्योग, शिक्षा, पुलिस, सामाजिक संगठनों और लघु उद्योग से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह अधिनियम एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय है. इससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण मिलेगा. इससे नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और वे देश के विकास में और अधिक सशक्त भूमिका निभा सकेंगी. "कुछ लोगों को डर हो सकता है कि…" मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि कुछ लोगों को यह डर हो सकता है कि यदि महिलाएं राजनीति में आगे आ गईं तो क्या होगा. लेकिन महिलाएं प्रशासन और व्यवस्था को और बेहतर तरीके से चला सकती हैं. जब वे घर का संचालन कुशलता से कर सकती हैं, तो राष्ट्र का संचालन भी उतनी ही क्षमता से कर सकती हैं. योजनाओं से महिला सशक्तिकरण को मिली मजबूती मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं को केंद्र और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उज्ज्वला योजना, जन-धन योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं का जिक्र किया. राज्य सरकार की ओर से लाडो प्रोत्साहन योजना, मा वाउचर योजना, मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना और दुग्ध उत्पादक संबल योजना जैसी पहलों से महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है.      लखपति दीदी योजना पर कही ये खास बात मुख्यमंत्री ने ‘लखपति दीदी' योजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान में 16 लाख से अधिक महिलाएं लखपति बन चुकी हैं. उन्होंने बताया कि बैंक अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि इन महिलाओं का कोई भी खाता एनपीए नहीं है, यानी उन्होंने समय पर ऋण का भुगतान किया है. यह दर्शाता है कि महिलाएं देश की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं. महिलाओं की बढ़ती भूमिका मुख्यमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं खेल, रक्षा, विज्ञान, शिक्षा, उद्यम और कला समेत हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि आज जिस हेलीकॉप्टर से वे यात्रा करते हैं, उसकी पायलट भी एक महिला है. जब वह महिला पायलट हेलीकॉप्टर उड़ाती है तो उन्हें गर्व, सुकून और विश्वास का अनुभव होता है.

हाईकोर्ट की सख्ती: निजी कंपनी पर 3 लाख का जुर्माना, याचिका खारिज

 चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक निजी निर्माण कंपनी पर तीन लाख का जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब केवल सरकारी अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि निराधार और फालतू याचिकाएं दायर करने वाले निजी पक्षकारों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए। यह आदेश जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की पीठ ने एम/एस वी के कंस्ट्रक्शन द्वारा दायर अवमानना याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। कंपनी ने आरोप लगाया था कि रोहतक-बावल राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का कार्य पूरा करने के बावजूद उसके बिलों का भुगतान नहीं किया गया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की जाए।हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यह याचिका उसी मामले में दूसरी अवमानना याचिका है। इससे पहले 2023 के आदेश के अनुपालन न होने पर एक अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिसे मई 2025 में यह कहते हुए निपटा दिया गया था कि संबंधित प्राधिकरण ने याचिकाकर्ता की शिकायत पर निर्णय ले लिया है।अदालत ने कहा कि इसके बावजूद दोबारा अवमानना याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का “स्पष्ट दुरुपयोग” है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस प्रकार की याचिकाएं न केवल अदालत के बहुमूल्य समय की बर्बादी करती हैं, बल्कि सरकारी अधिकारियों को अनावश्यक रूप से परेशान भी करती हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अवमानना क्षेत्राधिकार का प्रयोग अत्यंत सावधानी और विवेक के साथ किया जाना चाहिए और केवल उन्हीं मामलों में किया जाना चाहिए, जहां आदेश की जानबूझकर अवहेलना स्पष्ट रूप से सिद्ध हो। इसे व्यक्तिगत द्वेष निकालने या अधिकारियों को परेशान करने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सामान्यत जब अधिकारी कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करते, तो उन पर जुर्माना लगाया जाता है और यह राशि उनके वेतन से वसूली जाती है। लेकिन वर्तमान मामला इसका उल्टा उदाहरण है, जहां अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन किया, फिर भी उन्हें निशाना बनाया गया। कोर्ट ने कहा कि बार-बार निराधार याचिकाएं दाखिल करने से न केवल न्यायिक संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि वास्तविक मामलों की सुनवाई भी प्रभावित होती है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त संदेश देना जरूरी है। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए याचिकाकर्ता पर तीन लाख का जुर्माना लगाया जाता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके।

वैशाख अमावस्या 2026: तिथि, महत्व और धार्मिक मान्यताएँ

वैशाख अमावस्या यानी मेष संक्रांति बहुत खास मानी जाती है। इसमें जो अमावस्या आती है, उसे खास माना जाता है। एक-एक तिथि में किया हुआ पुण्य कोटि-कोटि गुना अधिक होता है। उनमें भी जो वैशाखकी अमावास्या तिथि है, वह मनुष्यों को मोक्ष देनेवाली है, देवताओं और पितरों को वह बहुत प्रिय है। यह तिथि शीघ्र ही मोक्ष देने वाली है। जो उस दिन पितरोंके उद्देश्य से श्राद्ध करते और जलसे भरा हुआ घडा एवं पिण्ड देते हैं, उन्हें अक्षय फलकी प्राप्ति होती है। मेष राशि में सूर्य के स्थित रहते हुए वैशाख मास में प्रातःकाल स्नान करके देवताओं, ऋषियों और पितरों का तर्पण करना चाहिए, इस तरह श्राद्ध करके उसके द्वारा पितरों को मुक्ति मिलती है। कब है वैशाख अमावस्या 2026 तारीख और दिन इस साल वैशाख अमावस्या 16 अप्रैल 2026 को सुबह 8.11 बजे शुरु होगी और अगले दिन 17 अप्रैल को शाम 5:21 बजे तक रहेगी, इसलिए उदयातिथि में अमावस्या 17 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन स्नान और दान का बहुत अधिक महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन पितरों का तर्पण और स्ना दान करने से लाभ मिलता है। स्नान के बाद जला से भरा कलश पितरों के लिए दान करें। इससे पितर खुश होते हैं और उनकी कृपा मिलती है। इस दिन क्या करें और क्या नहीं इस दिन पितरों का तर्पण किया जाता है। इस अमावस्या पर उन लोगों को भोजन देना चाहिए, जिन्हें खाने और कपड़ों की जरूरत है। सुबह काले तिल के साथ जल सूर्य को अर्पित करना चाहिए। पीपल के पेड़ के पास दिया जलाना चाहिए। अमावस्या का दिन पितरों को याद करने का दिन है, इसलिए इस दिन ऐसा कोई काम नहीं करना है, जो शुभ हो। इस दिन कोई बड़ी खरीददारी करने से भी बचना चाहिए। पितरों के लिए दान और तर्पण ही इस दिन क्या जाता है। क्यों खास है यह तिथि आपको बता दें कि अमावस्या तिथि में स्नान, दान, तपस्या, होम, देवपूजा, पुण्यकर्म सब कुछ तत्काल मुक्ति देनेवाला है। जो रोगी, दरिद्र लोगों को श्रीहरि की पूजा करनी चाहिए। वैशाख मास मन से सेवन करने योग्य है; क्योंकि वह समय उत्तम गुणों से युक्त है। दरिद्र, धनाढ्य, पंगु, अन्धा, नपुंसक, विधवा, साधारण स्त्री, पुरुष, बालक, युवा, वृद्ध तथा रोगसे पीडित मनुष्य ही क्यों न हो, वैशाख मासका धर्म सबके लिए अत्यन्त सुखसाध्य है।  

67 करोड़ बकाया वसूली के लिए बिजली विभाग का बड़ा एक्शन प्लान

करनाल एक लाख रुपये से अधिक राशि के डिफाल्टरों को बिजली निगमों ने निशाने पर ले लिया है। करोड़ों रुपये की अपनी रिकवरी करने के लिए बिजली निगम पहली बार सख्ती बरतते हुए डिफाल्टर उपभोक्ताओं की संपत्ति नीलाम की प्रक्रिया अपनाएगा। सबसे पहले एसडीओ संबंधित उपभोक्ता को तीन नोटिस देगा और इसके बाद कार्यकारी अभियंता एक नोटिस देगा। इसके बाद भी उपभोक्ता द्वारा बिल अदा नहीं किया तो निगम बैंक की तर्ज पर तहसीलदार के माध्यम से संबंधित की प्रॉपर्टी नीलाम करेगा। गौर हो कि हरियाणा में निगमों का 8247 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें उत्तर हरियाणा का 3573 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम का 4674 करोड़ रुपये शामिल है। करनाल जिले की बात करें तो ऐसे 2710 डिफाल्टर हैं जिन पर करीब 67 करोड़ रुपये का बकाया है। इनमें सबसे अधिक 1178 डिफाल्टर सब अर्बन और मेरठ रोड क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर हैं। इसलिए ऐसे डिफाल्टरों से बकाया वसूलने के लिए निगम ने सख्ती से पेश आने का फैसला लिया है। सबसे पहले एसडीओ अपने स्तर पर तीन बार और एक्सईएन अपने स्तर पर एक बार नोटिस जारी करेंगे। इसके बावजूद भुगतान न करने पर मामला तहसीलदार के पास भेजा जाएगा, जहां से अंतिम नोटिस जारी होगा। यदि डिफाल्टर फिर भी भुगतान नहीं करते हैं तो लैंड रिकवरी एक्ट के तहत उनकी जमीन, वाहन, मशीनें और यहां तक कि गहनों की भी नीलामी की जा सकती है। बिजली अधिकारियों के अनुसार, एक लाख रुपये से अधिक राशि वाले डिफाल्टरों पर ही यह विशेष जांच की जाएगी। डिफाल्टर नहीं खरीद बेच सकेगा प्रॉपर्टी जिले में ऐसे जितने भी बिजली बिल डिफाल्टर हैं, जिन्होंने सालों से लाख से करोड़ों रुपये का अपना बिल जमा नहीं करवाया है। जब तक वह ऐसा नहीं करते हैं तो भविष्य में वह अपनी प्रॉपर्टी खरीद व बेच नहीं सकेंगे। इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निगम 26 डिफाल्टरों के केस भेज चुका: एसई बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता नसीब सिंह ने बताया कि निगम ने ऐसे 26 डिफाल्टरों के केस जिनके ऊपर दो करोड़ 27 लाख का बिजली बिल पेंडिंग है, उनको तहसीलदार के पास भेज दिया है। आगे भी ऐसे लोगों की लिस्ट बनाकर तहसीलदार को भेजे जाएंगे। दो हजार से अधिक ऐसे डिफाल्टर हैं, जिनके ऊपर करोड़ों में बिल पेंडिंग हैं। लैंड रिकवरी एक्ट के तहत जमीन कुर्क की जा सकती है। सालों से है बिल बकाया जिले के सभी सब डिवीजनों में हजारों की संख्या में बिजली बिल न भरने के कारण डिफाल्टर घोषित किए हुए हैं जिनकी बिल की राशि बड़ी है और जिन्होंने सालों से बिजली का बिल नहीं जमा करवाया है। ऐसी स्थिति में कईयों के कनेक्शन काट दिए गए हैं। लेकिन बावजूद इसके कुछ उपभोक्ताओं को छोड़कर अभी भी डिफाल्टर बकाया बिल नहीं जमा करवा रहे हैं।  

चाणक्य नीति: सफलता के लिए कौए से सीखें ये 5 महत्वपूर्ण गुण

चाणक्य नीति प्राचीन भारतीय आचार्य चाणक्य द्वारा लिखी गई एक महत्वपूर्ण नीति-ग्रंथ है, जिसमें जीवन को सही दिशा देने वाली व्यावहारिक बातें बताई गई हैं. चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य भी कहा जाता है, मौर्य साम्राज्य के महान गुरु और रणनीतिकार थे. दरअसल, चाणक्य नीति एक ऐसी पुस्तक है, जिसमें इंसान को बताया गया है कि उसे जीवन में कैसे व्यवहार करना चाहिए, कैसे सही-गलत की पहचान करनी चाहिए और कैसे सफलता हासिल करनी चाहिए. आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में यह भी बताया है कि इंसान अगर प्रकृति से सीख ले, तो जीवन आसान हो सकता है. उन्होंने कुछ पक्षियों और जानवरों के ऐसे गुणों का जिक्र किया है, जिन्हें अपनाकर व्यक्ति अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकता है. इन जीवों की आदतें हमें मेहनत, सतर्कता और समझदारी सिखाती हैं. अगर कोई इंसान इन गुणों को अपने जीवन में उतार ले, तो वह सफलता की राह पर आगे बढ़ सकता है और अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकता है. तो आइए आचार्य चाणक्य के अनुसार जानते हैं कि कौए से व्यक्ति को कौन कौन से गुण सीखने चाहिए. गूढ़ मैथुनकारित्वं काले काले च संग्रहम्। अप्रमत्तवचनमविश्वासं पंच शिक्षेच्च वायसात्॥ आचार्य चाणक्य कौए के जरिए यह सीख देने की कोशिश कर रहे हैं कि कौए में ऐसे पांच गुण होते हैं जिन्हें अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है. ये गुण हैं- अपनी निजी बातों को गोपनीय रखना, समय-समय पर चीजें इकट्ठी करना, हमेशा सतर्क रहना, बिना सोचे-समझे किसी पर भरोसा न करना और जरूरत पड़ने पर अपने साथियों को साथ जोड़ना. कौए से सीखें ये विशेष गुण आचार्य चाणक्य कहते हैं कि इसका मतलब यह है कि इंसान को भी कुछ काम कौए की तरह समझदारी से करने चाहिए. 1. निजी बातें छिपाकर रखना जैसे कौआ अपनी निजी बातों को छिपाकर रखता है, वैसे ही व्यक्ति को भी अपनी पर्सनल बातों को हर किसी के सामने नहीं रखना चाहिए. 2. चीजें जमा करना इसके अलावा, कौआ छोटी-छोटी चीजें जमा करता रहता है ताकि जरूरत पड़ने पर काम आए. उसी तरह व्यक्ति को भी पैसे, संसाधन और अनुभव का संग्रह करना चाहिए, ताकि कठिन समय में दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े. 3. हमेशा सतर्क रहना कौआ हर समय चौकन्ना रहता है और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखता है. यह हमें सिखाता है कि जीवन में लापरवाही नहीं करनी चाहिए, बल्कि हर स्थिति को समझकर आगे बढ़ना चाहिए. 4. जरूरत पड़ने पर साथियों को जोड़ना जब कौए को खतरा महसूस होता है, तो वह आवाज देकर अपने साथियों को बुला लेता है. इसी तरह इंसान को भी मुश्किल समय में अकेले संघर्ष करने के बजाय भरोसेमंद लोगों का साथ लेना चाहिए. 5. बिना सोचे-समझे भरोसा न करना कौआ किसी पर तुरंत विश्वास नहीं करता, बल्कि पहले परखता है. यही सीख इंसान के लिए भी जरूरी है कि हर किसी पर आंख बंद करके भरोसा करने से धोखा मिल सकता है, इसलिए पहले समझें, फिर विश्वास करें.  

सोलर दीदी योजना से महिला सशक्तीकरण को मिल रही नई दिशा

सोलर दीदी योजना से महिला सशक्तीकरण को मिल रही नई दिशा सौर तकनीक की ट्रेनिंग लेकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं गांवों में सौर बिजली संबंधी समस्याओं का मिल रहा जल्द समाधान रोजगार और आय के नए अवसरों से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में “सोलर दीदी” योजना ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण का मजबूत आधार बनकर उभर रही है। इस पहल के माध्यम से गांवों की महिलाओं को सौर ऊर्जा से जुड़ी तकनीकी ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अब महिलाएं सिर्फ घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं रहकर ऊर्जा क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहीं हैं और गांवों में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। योजना के तहत महिलाओं को सोलर लैंप, सोलर पैनल, चार्जिंग यूनिट और अन्य सौर उपकरणों की स्थापना, संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें तकनीकी खराबियों को ठीक करने और उपकरणों की बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है। परिणामस्वरूप, जहां पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कमी एक बड़ी चुनौती थी, वहीं अब “सोलर दीदी” गांव-गांव में ऊर्जा का भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरीं हैं। इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के रूप में देखने को मिल रहा है। सोलर उत्पादों की बिक्री और सेवाओं के माध्यम से महिलाएं नियमित आय अर्जित कर रहीं हैं। कई महिलाएं अपने परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं हैं और आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी अलग पहचान बना रहीं हैं। सोलर दीदियां न केवल तकनीकी कार्य कर रहीं हैं, बल्कि वे जागरूकता अभियान का भी अहम हिस्सा हैं। वे ग्रामीणों को सौर ऊर्जा के फायदे समझाकर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे ऊर्जा की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से यह योजना लगातार विस्तार पा रही है। आने वाले समय में अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने की योजना है, ताकि हर गांव ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। “सोलर दीदी” पहल न केवल गांवों में रोशनी फैला रही है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाकर सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई दिशा भी दे रही है।

पंजाब में बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट: ‘रोशन पंजाब योजना’ से गांव होंगे रोशन, सुरक्षा व्यवस्था सख्त

जालंधर. पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलने और वहां सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक विशाल परियोजना की घोषणा की है। प्रदेश के लगभग 13 हजार गांवों को रोशन करने के लिए तीन लाख सौर स्ट्रीट लाइटें लगाने की कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। ‘मुख्यमंत्री रोशन पंजाब योजना’ के तहत गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थलों को आधुनिक सौर ऊर्जा प्रणाली से लैस किया जाएगा, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में व्यापक सुधार की उम्मीद है। 550 करोड़ का बजट और कार्यान्वयन की रणनीति जालंधर में आयोजित एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस पूरे मिशन पर अनुमानित 550 करोड़ रुपये की लागत आएगी। विभाग ने इसकी निविदा प्रक्रिया को शीघ्र अति शीघ्र आरंभ करने के निर्देश दिए हैं। योजना का मुख्य केंद्र बिंदु गांवों के वे सार्वजनिक स्थान और घनी आबादी वाले मोहल्ले हैं, जहां वर्तमान में प्रकाश व्यवस्था का अभाव है। सुरक्षा और आर्थिक प्रगति पर विशेष ध्यान अंधेरा दूर होने से न केवल गांवों का स्वरूप बदलेगा, बल्कि इससे स्थानीय निवासियों की कार्यक्षमता और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी। सौर लाइटों के लगने से रात के समय होने वाली आपराधिक वारदातों में कमी आएगी और विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सरकार ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए एक सख्त समय सीमा तय की है, जिसके तहत जून से कार्य शुरू होकर अक्टूबर तक संपन्न किया जाएगा। पूरी व्यवस्था के प्रबंधन के लिए चंडीगढ़ में एक उच्च स्तरीय नियंत्रण केंद्र बनाया जा रहा है और नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा। रखरखाव की जिम्मेदारी और वित्तीय ढांचा परियोजना की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। जिस कंपनी को लाइटें लगाने का अनुबंध मिलेगा, वही अगले सात वर्षों तक इनके परिचालन और मरम्मत के लिए उत्तरदायी होगी। यदि कोई लाइट खराब होती है, तो उसे 72 घंटे के भीतर ठीक करना अनिवार्य होगा, अन्यथा कंपनी पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस योजना के कुल व्यय का 70 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत का योगदान ग्राम पंचायतें करेंगी। इसके साथ ही गांवों में पहले से मौजूद बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को भी इस अभियान के तहत पुनर्जीवित किया जाएगा।