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42 हजार कर्मचारी सड़कों पर, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से भड़काने का शक

नोएडा  उत्तर प्रदेश के नोएडा फेज दो स्थित कंपनी के दफ्तर से शुरू हुआ कर्मचारियों का आंदोलन सोमवार को उग्र रूप ले लिया। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई कंपनियों में कर्मचारियों को बाहर निकाल कर इकाई को बंद कराया गया। इसके बाद सड़कों पर उतर कर कर्मचारी प्रदर्शन करते दिखे। शहर के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। अब इसके पीछे किसी प्रकार की साजिश का अंदेशा जताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि कर्मचारियों को भड़का कर उग्र आंदोलन कराया गया। मामले की जांच के लिए एसटीएफ को लगाया गया है। एसटीएफ हिंसक और उग्र आंदोलन को भड़काए जाने की जांच करेगी। नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन को लेकर लखनऊ तक हलचल दिखी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रमिकों की समस्याओं के समाधान और जांच के लिए औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमिटी गठित की है। कमिटी की अनुशंसा के आधार पर न्यूनतम वेतनमान में अंतरिम वृद्धि का आदेश जारी किया गया है। तीनों प्रकार के श्रमिकों के वेतन में लगभग 21 फीसदी की वृद्धि की घोषणा की गई है। वहीं, पुलिस और प्रशाासन घटना की जांच और एक्शन में जुट गई है। नोएडा पुलिस का एक्शन तेज नोएडा पुलिस का मामले में एक्शन तेज हो गया है। नोएडा में मजदूरों के विरोध पर पुलिस कमिश्नर, गौतमबुद्धनगर लक्ष्मी सिंह का बड़ा बयान आया है। सीपी ने कहा कि कल हमारी ओर से अलग-अलग स्थानों पर हुई घटनाओं को लेकर 7 एफआईआर दर्ज की गई है। उपद्रव के मामले में 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनको उकसाने की दिशा में जो लोग चिह्नित किए गए थे, उनकी भी गिरफ्तारियां की गई हैं। सीपी ने कहा कि आने वाले दिनों में भी कुछ गिरफ्तारियां की जाएगी। सीपी ने जताया संदेह पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को कहा कि सोमवार को नोएडा में 83 स्थानों पर 42 हजार से अधिक कर्मचारी सड़कों पर उतरे थे। दो स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पुलिस ने न्यूनतम बल प्रयोग करते हुए श्रमिकों के प्रदर्शन को काबू में लाया गया। सीपी ने कहा कि अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को समझा-बुझाकर वापस भेजा गया। सीपी ने कहा कि जो श्रमिक हैं, ऐसा पता चला है कि कोई एक ग्रुप है जो उन्हें पीछे से उकसा रहा है। पीछे से बहुत व्यवस्थित तरीके से चीजों को आगे बढ़ा रहा है। सीपी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ऐसे बहुत से फर्जी ट्विटर और अन्य अकाउंट बनाए गए हैं। इसके माध्यम से लगातार श्रमिकों को उकसाने, हिंसा, फैक्टरियों में आगजनी करने, पुलिस से भिड़ने के लिए उकसाया जाता रहा है। कल 2 अकाउंट के बारे में पता लगा था। पिछले 2 दिनों में श्रमिकों के 2 वाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जिसमें QR कोड स्कैन करके ग्रुप में जोड़ा रहा है। पुलिस करेगी फंडिंग की जांच पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि पूरे मामले की जांच के क्रम में सामने आया है कि पीछे से कोई संगठित गिरोह कर्मचारियों को भड़का रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को भीड़ में से चुनकर गिरफ्तार किया गया है। आगे भी इस प्रकार के लोगों की गिरफ्तारियां सुनिश्चित की जाएगी। इनकी फंडिंग की भी जांच की जाएगी। अगर जांच में आता है कि देश या प्रदेश के बाहर से इन लोगों को फंडिंग की गई है तो इस दिशा में भी काम किया जाएगा। मंगलवार को भी प्रदर्शन नोएडा के फेज 2 इलाके में एक कंपनी के कर्मचारियों ने कंपनी के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारी वेतन वृद्धि सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद रही। इस दौरान श्रमिकों की ओर से किसी प्रकार की हिंसक गतिविधि की खबर अब तक नहीं है।  

UP में वोटर लिस्ट में बड़ा झटका: 2 करोड़ से ज्यादा नाम कटे, कई दिग्गजों की सीट पर खतरा!

लखनऊ उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रोसेस के बाद 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से कम हुए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर शहर में सबसे कम 33,094 वोट कटे हैं, जो प्रदेश के उन टॉप 5 शहरी क्षेत्रों में शामिल है, जहां सबसे कम गिरावट दर्ज की गई. इसके उलट डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की लखनऊ कैंट विधानसभा सीट उन टॉप 5 क्षेत्रों में है, जहां सबसे ज्यादा 1.47 लाख वोट कम हुए हैं. यह आंकड़े मुख्यमंत्री द्वारा कार्यकर्ताओं को दी गई उस चेतावनी के बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने बूथ स्तर पर मेहनत न करने पर भयावह परिणाम भुगतने की आशंका जताई थी. पूरे सूबे में औसतन हर सीट पर 13.24 फीसदी मतदाता कम हुए हैं. विश्लेषण दिखाता है कि भारतीय जनता पार्टी की तुलना में समाजवादी पार्टी की सीटों पर वोट कम कटे हैं. बीजेपी की शहरी सीटों पर औसतन 18.11 फीसदी वोट घटे, जबकि एसपी की शहरी सीटों पर यह आंकड़ा 16.36 फीसदी रहा. दिग्गज नेताओं की सीटों पर भारी फेरबदल नेताओं की जीत के मार्जिन और कटे हुए वोटों का अंतर काफी डराने वाला है. लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से राजेश्वर सिंह 56 हजार वोटों से जीते थे, लेकिन वहां 1.42 लाख मतदाता कम हो गए. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना 82 हजार से जीते थे और 90 हजार वोट कट गए. कुंडा में राजा भैया की सीट पर 55 हजार वोट कम हुए, जबकि उनकी जीत का मार्जिन केवल 30 हजार था. इसी तरह रायबरेली में अदिति सिंह की सीट पर 56 हजार वोट कम हुए हैं. एसआईआर के आंकड़ों में एसपी की 102 सीटों पर वोट कटने का दायरा 26 हजार से 1.07 लाख तक रहा, जबकि बीजेपी की 257 सीटों पर यह 26 हजार से 3.16 लाख तक पहुंच गया. मुस्लिम बहुल अमरोहा शहर (एसपी सीट) में सबसे कम 26,233 वोट कटे, वहीं बीजेपी की साहिबाबाद सीट पर सबसे ज्यादा 3,16,484 वोट घट गए. ग्रामीण इलाकों में दोनों दलों के बीच का अंतर सिर्फ एक फीसदी के करीब है. सहयोगी दलों की स्थिति और योगी का मॉडल राजनीतिक दलों के लिहाज से देखें तो अपना दल की सीटों पर 27 हजार से 72 हजार, सुभासपा की सीटों पर 28 हजार से 50 हजार और निषाद पार्टी की सीटों पर 30 हजार से 59 हजार वोट कम हुए हैं. आरएलडी की सीटों पर भी 27 हजार से 48 हजार वोटों की कमी आई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड़कर कोई बड़ा नेता अपना क्षेत्र पूरी तरह नहीं बचा पाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सेवारत शिक्षकों की TET अनिवार्यता याचिका, कहा- ‘याचिका में कोई आधार नहीं’

प्रयागराज  उत्तर प्रदेश के सरकारी जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को बरकरार रखते हुए जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।     0.1 कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "याचिका में दम नहीं"     0.2 ​क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया नियम?     0.3 ​पूर्व में भी खारिज हो चुकी है अपील     0.4 ​शिक्षकों के सामने अब क्या है रास्ता? कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "याचिका में दम नहीं" ​10 अप्रैल 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता पूर्व में दिए गए फैसलों को ही चुनौती दे रहे थे, जिसमें कोई नया कानूनी आधार नहीं पाया गया। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तय मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। ​क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया नियम? ​1 सितंबर 2025 को अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले में आए ऐतिहासिक फैसले के आलोक में अब निम्नलिखित नियम लागू होंगे:     ​दो साल की समय सीमा: जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें आगामी 2 वर्षों के भीतर TET परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।     ​अनिवार्य सेवानिवृत्ति: यदि ये शिक्षक निर्धारित समय सीमा में परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें VRS (अनिवार्य सेवानिवृत्ति) लेनी होगी।     ​सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को राहत: जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट में 5 वर्ष से कम का समय बचा है, उन्हें परीक्षा से छूट दी गई है। वे अपनी सेवानिवृत्ति तक पद पर बने रह सकते हैं।     ​पदोन्नति पर रोक: बिना TET पास किए किसी भी शिक्षक को प्रमोशन (पदोन्नति) का लाभ नहीं दिया जाएगा। ​पूर्व में भी खारिज हो चुकी है अपील ​यह पहली बार नहीं है जब शिक्षकों ने इस नियम के विरुद्ध कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले 17 नवंबर 2025 को यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटीए) की याचिका को भी न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की खंडपीठ ने खारिज कर दिया था। कोर्ट का स्पष्ट मानना है कि RTE एक्ट (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत योग्यता के मानक सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। ​शिक्षकों के सामने अब क्या है रास्ता? ​इस फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश के हजारों पुराने शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने और पदोन्नति पाने के लिए TET की तैयारी शुरू करनी होगी। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के लिए यह फैसला एक बड़े कानूनी अवरोध के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब शीर्ष अदालत ने कानूनी विकल्पों के द्वार लगभग बंद कर दिए हैं।     ​"शिक्षा के अधिकार के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना अनिवार्य है, और TET उसी गुणवत्ता का एक पैमाना है।" — सुप्रीम कोर्ट का सारांश  

CM मान का बड़ा ऐलान: पंजाब की महिलाओं को ₹1500 मासिक, जालंधर से आज रजिस्ट्रेशन की शुरुआत

चंडीगढ़. पंजाब सरकार आज मंगलवार से अपनी प्रस्तावित 'मावां धियां सत्कार योजना' के लिए महिला लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन शुरू करेगा, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री भगवंत मान जालंधर से करेंगे। इसके 1 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है। इस दिन से जनरल श्रेणी की महिलाओं को सीधे 1,000 और अनुसूचित जाति श्रेणी की महिलाओं 1,500 रुपये का मानदेय मिलना शुरू हो जाएगा। आप के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू में 15 अप्रैल से नौ विधानसभा क्षेत्रों जैसे आदमपुर, मलोट, श्री आनंदपुर साहिब, दिड़बा, सुनाम, मोगा, कोटकपूरा, बटाला और पटियाला ग्रामीण में पायलट आधार पर चलाई जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि 15 मई से इस प्रक्रिया का विस्तार बाकी 108 विधानसभा क्षेत्रों में भी कर दिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन के समय आवेदकों को पंजाब आधार कार्ड, वोटर पहचान पत्र और बैंक पासबुक जमा करना होगा। इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल पात्रता की जांच करने और लाभार्थियों के खातों में सीधे लाभ ट्रांसफर करने में मदद के लिए किया जाएगा। यह योजना आम आदमी पार्टी (AAP) के 2022 के विधानसभा चुनावों के उस वादे को पूरा करने की दिशा में एक कदम है, जिसमें महिलाओं को वित्तीय सहायता देने की बात कही गई थी। हालांकि, पार्टी ने उस समय 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने अब संकेत दिया है कि योजना के लागू होने के साथ-साथ इसके अंतिम स्वरूप, जिसमें लाभार्थी के लिए पात्रता के मानदंड और 1,000 से 1,500 रुपये की सीमा के भीतर मिलने वाली सटीक राशि शामिल है को भी अधिसूचित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए पिछले कई महीनों से तैयारियां चल रही हैं, जिसमें लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार करना और बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे इस रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य पूरे राज्य में योजना को लागू करने से पहले छोटे पैमाने पर इसके सिस्टम की जांच करना है। महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजना शुरू करने वाला पंजाब अकेला राज्य नहीं है। पड़ोसी राज्यों—हरियाणा और हिमाचल प्रदेश—ने भी ऐसी योजनाओं की घोषणा की है। दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने भी हाल के वर्षों में इसी तरह के कार्यक्रम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू कल्याण और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इसके साथ ही, इस योजना से राज्य के खजाने पर सालाना 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बोझ पड़ने की संभावना है। राज्यों में पंजाब का GSDP के मुकाबले कर्ज़ का अनुपात सबसे ज़्यादा है, और नीति-निर्धारक हलकों में बार-बार होने वाले कल्याणकारी भुगतानों के लिए उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालाँकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने से इसका बेहतर क्रियान्वयन हो पाएगा। इस तरह इकट्ठा किया गया डेटाबेस लाभार्थियों की अंतिम संख्या तय करने में मदद करेगा।

RTI Update: 3485 में से 1883 आवेदन मंजूर, बाकी पर गिरी रिजेक्शन की गाज

दुर्ग. दुर्ग जिले के 528 निजी विद्यालयों के प्रारंभिक कक्षाओं में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत भर्ती के लिए 3485 ऑनलाइन आवेदन मिले थे। इनमें से 900 यानी करीब 26% आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए हैं। केवल 1883 आवेदन ही स्वीकृत किए गए हैं। इन्हीं आवेदनों पर लॉटरी 15 अप्रैल को निकाली जाएगी। वैसे कुल सीटों की संख्या 1427 बताई गई है। वैसे इस बार आरटीई के तहत प्रवेश के लिए निर्धारित सीटों की संख्या में भारी कटौती की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब एक तिहाई सीटों की कटौती हुई है। इस वर्ष केजी-1, केजी – 2 तथा नर्सरी का कांसेप्ट खत्म कर दिया गया है। इस वजह से निजी स्कूलों में आरटीई के तहत केवल पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा रहा है, जिसके लिए प्रथम चरण में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित थी। पिछले वर्ष आरटीई की 4267 सीट थी। यानी इस बार 2840 सीटों की कटौती की गई है। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) अंतर्गत वर्ष 2026 27 के लिए प्रदेश में संचालित निजी विद्यालयों में आरटीई पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन /भर्ती की कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में अधिनियम के प्रावधान अंतर्गत नोडल अधिकारी की जानकारी, क्षेत्र का निर्धारण, मान्यता संबंधी कार्यवाही पूर्ण करना, आरक्षित सीटों का निर्धारण, प्रवेश एवं सूचना हेतु आवेदन प्राप्त करना, आवेदन पत्रों की समीक्षा तथा प्रचार प्रसार आवंटन प्रक्रिया एवं शुल्क की प्रतिपूर्ति व प्रक्रिया हेतु समय सारणी से अवगत कराया  है। प्रथम चरण में आवेदन के बाद लॉटरी एवं आबंटन 17 अप्रैल तक होगा। जानकारी के मुताबिक 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे से लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर में लॉटरी निकाली जाएगी। इसमें सहायक संचालक, 5 पालक, निजी विद्यालय संगठन से जुड़े 2 पदाधिकारी, 2 पालक संघ के प्रतिनिधि तथा 2 मीडिया प्रभारी को भी बुलाया गया है। स्कूल दाखिला 1 मई से 30 मई तक, 2025- 26 की शुल्क प्रतिपूर्ति का सत्यापन कार्य 25 मई से 25 जून तक किया जाएगा। द्वितीय चरण का शेड्यूल न्यू स्कूल रजिस्ट्रेशन 8 से 20 जून तक । नोडल प्राचार्य, डीईओ द्वारा सत्यापन, (सीट प्रकटीकरण) 8 जून से 25 जून तक छात्र पंजीयन 1 जुलाई से 11 जुलाई तक। नोडल वेरीफिकेशन 1 जुलाई से 15 जुलाई तक । लॉटरी एवं आबंटन 27 से 31 जुलाई तक, 3 अगस्त से 17 अगस्त तक स्कूल दाखिला किया जाएगा।

जयपुर केस पर बवाल: IMA के ऐलान से पूरे प्रदेश में ठप स्वास्थ्य सेवाएं

जयपुर राजस्थान में  आज (14 अप्रैल) से 24 घंटे तक पूरी तरह से प्राइवेट अस्पताल बंद रहेंगे. इस दौरान प्रदेशभर के प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप रहेंगी. जयपुर के एक डॉक्टर की गिरफ्तारी के खिलाफ राज्य के प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों ने 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है. प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों के इस ऐलान से राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी असर पड़ने वाला है और इस हड़ताल से मरीजों का भी भारी दिक्कत होगी. 24 घंटे का हड़ताल का ऐलान दरअसल, जयपुर में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के निदेशक डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी हुई थी. उन्हें हाल ही में चिकित्सीय लापरवाही के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था. अब पुलिस की इसी कार्रवाई के विरोध में 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' (IMA) ने मंगलवार से प्रदेशभर के निजी अस्पतालों में 24 घंटे की संपूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया. जानकारी के अनुसार, 14 अप्रैल सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह तक ओपीडी और आईपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहेंगी. डॉक्टरों का आरोप है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा लापरवाही का सबूत न मिलने के बावजूद सरकार ने मामूली अनियमितताओं के आधार पर यह दमनकारी कदम उठाया है. इस गतिरोध से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट मंडरा रहा है. IMA राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि पहले गठित एक मेडिकल बोर्ड ने मामले में चिकित्सीय लापरवाही का कोई सबूत नहीं पाया था. डॉक्टर सोनदेव बंसल की क्यों हुई गिरफ्तारी डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने डॉक्टर सोनदेव बंसल से जुड़े केस के बारे में बताया कि अक्टूबर 2025 में जितेन्द्र कुमार शर्मा ने मानसरोवर थाने में रिपोर्ट दी कि उनकी मां शशि शर्मा को 01 सितंबर 2025 को निविक हॉस्पिटल में न्यूरो के इलाज के लिए भर्ती कराया था. अस्पताल ने उनकी माता का इलाज शुरू कर दिया और उनसे इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूल कर लिये गये, जिनका आज तक कोई हिसाब किताब बिल रशीद नहीं दी. जितेंद्र ने रिपोर्ट में कहा कि उनकी मां का इलाज कुछ समय तक RGHS से भी किया गया और उनसे लाखों रुपये नकद भी लिए गए. इस दौरान अस्पताल प्रशासन आश्वासन देता रहा कि उनकी मां का इलाज अच्छा चल रहा है. हालांकि, कुछ दिनों बाद जितेंद्र की मां की मौत हो गई. जब जितेंद्र ने अपनी मां के इलाज के दस्तावेज और इलाज की रशीद व बिल मांगे तो अस्पताल ने देने से इनकार कर दिया. वही फ़र्जी फर्जी रिकार्ड तैयार किया गया. पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि अस्पताल प्रबंधक ने आरजीएचएस कार्यालय में जितेंद्र की मां को इलाज के लिए बार-बार डिस्चार्ज दिखाकर दोबारा भर्ती किया दिखाया. परिवादी की बिना सहमति से एक ही सहमति पत्र (consent form) पर कांट-छांट कर अलग-अलग डेट डालकर आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड किया गया. आरजीएचएस ऑफिस ने अस्पताल के खिलाफ जांच में अनियमितता के आरोप प्रमाणित माने है और एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार भी दस्तावेजों में कांटछांट करना प्रमाणित पाया जाने पर संचालक डॉ. सोनदेव बंसल को गिरफ्तार किया गया.

सोशल मीडिया पर फैली अफवाह पर सरकार का एक्शन: जानिए क्या है मजदूरों का असली न्यूनतम वेतन

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही उस खबर को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि राज्य में मजदूरों का न्यूनतम वेतन ₹20 हजार प्रति माह कर दिया गया है. सरकार ने इसे साफ तौर पर भ्रामक और झूठी जानकारी बताया है और लोगों से अपील की है कि वो सिर्फ आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें. शासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि ₹20 हजार न्यूनतम वेतन तय करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है. सरकार ने कहा कि इस तरह की खबरें पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है. इस तरह की अफवाहों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे आम जनता और श्रमिक दोनों प्रभावित होते हैं. हालांकि, सरकार ने यह जरूर बताया कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और श्रमिकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन में अंतरिम वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है. इस अंतरिम वृद्धि का उद्देश्य मजदूरों को तत्काल राहत देना है, ताकि उनकी आय में कुछ सुधार हो सके. सरकार ने कहा, केवल आधिकारिक सूचना पर करें भरोसा राज्य में वर्तमान न्यूनतम वेतन दरों का भी विवरण साझा किया गया है. अधिसूचित दरों के अनुसार, अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन ₹11,313.65 तय किया गया है, जबकि दैनिक वेतन ₹435.14 है. इसी तरह अर्धकुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन ₹12,446 और दैनिक वेतन ₹478.69 निर्धारित किया गया है. वहीं कुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन ₹13,940.37 और दैनिक वेतन ₹536.16 रखा गया है. सरकार ने कहा कि यह दरें हाल ही में अधिसूचित की गई हैं और इन्हीं के आधार पर वर्तमान में भुगतान किया जाना चाहिए. नियोक्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दरों का सख्ती से पालन करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता न करें. इसके साथ ही, सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अगले माह वेज बोर्ड के गठन की घोषणा की है. यह वेज बोर्ड श्रमिकों के वेतन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगा और अपनी सिफारिशें सरकार को देगा. इन सिफारिशों के आधार पर भविष्य में न्यूनतम वेतन की नई दरें तय की जाएंगी. अगले महीने बनेगा वेज बोर्ड, नई दरों पर होगी सिफारिश सरकार का मानना है कि वेज बोर्ड के माध्यम से एक संतुलित और व्यावहारिक वेतन संरचना तैयार की जा सकेगी, जिससे श्रमिकों और उद्योग दोनों के हितों का ध्यान रखा जा सके. इससे वेतन निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और सभी पक्षों को न्याय मिलेगा. राष्ट्रीय स्तर पर भी न्यूनतम वेतन को लेकर काम जारी है. केंद्र सरकार नई श्रम संहिताओं के तहत पूरे देश के लिए एक समान न्यूनतम आधार रेखा यानी फ्लोर वेज तय करने की प्रक्रिया में है. इसका उद्देश्य यह है कि देश के हर हिस्से में श्रमिकों को एक न्यूनतम स्तर का वेतन सुनिश्चित किया जा सके. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर नियोक्ताओं से अपील की है कि वे श्रमिकों के हितों का ध्यान रखें और उन्हें नियमानुसार वेतन दें. उन्होंने कहा कि श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और बोनस जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कार्यस्थलों पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सभी नियोक्ता यह सुनिश्चित करें कि महिला कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले. इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने अराजक और बाहरी तत्वों द्वारा की जा रही गैर-कानूनी गतिविधियों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. सरकार ने साफ किया है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सरकार ने एक बार फिर दोहराया कि वह औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. श्रमिकों की भलाई और उद्योगों की प्रगति, दोनों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम किया जा रहा है. नियोक्ताओं को निर्देश, नियमों के अनुसार दें वेतन और सुविधाएं अंत में, सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरों से सावधान रहें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें. इससे न केवल भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है, बल्कि सही जानकारी भी सभी तक पहुंचाई जा सकती है.

Census Update: मकानों से शुरू होगी जनगणना, दूसरे चरण में होगी व्यक्तियों की गणना

दुर्ग. जिले में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा हैं। करीब 15 साल बाद होने वाली इस जनगणना को इस बार पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है, जिससे प्रक्रिया को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए दो चरणों में संपन्न किया जाएगा। जिला जनगणना अधिकारी एवं कलेक्टर अभिजीत सिंह ने प्रशिक्षण के दो चरणों में होने वाली प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक मकान सूचीकरण का होगा, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में परिवार और व्यक्तियों की गणना के लिए आयोजित किया जाएगा। इस बड़े अभियान के लिए जिले में 3,850 प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं, जिनके मार्गदर्शन के लिए 79 फील्ड ट्रेनर तैनात हैं। प्रत्येक प्रगणक को लगभग 700 से 800 लोगों या 250 से 300 परिवारों की गणना का जिम्मा सौंपा गया है। 11 अप्रैल से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुका है, जिसमें 1109 प्रशिक्षकों को अलग-अलग बैच में तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण नगर निगम दुर्ग, रिसाली, भिलाई जोन-4, जामुल और दुर्ग, धमधा, पाटन व अहिवारा तहसीलों में आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान में शिक्षा, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, ट्राइबल और महिला-बाल विकास विभाग के कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम है। इस बार डेटा संग्रह मोबाइल एप के माध्यम से होगा, जिसमें प्रगणकों को डेटा एंट्री, मैप सत्यापन और सिंकिंग की प्रक्रिया सिखाई जा रही है। नागरिकों को 16 से 30 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा भी मिलेगी। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

सुकमा में 308 करोड़ के विकास कार्यों का तोहफा, नक्सलमुक्त बस्तर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बड़ी सौगात

रायपुर : नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई गूंज : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुकमा को दी 308 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई गूंज रायपुर नक्सलवाद के प्रभाव से उबरकर नए विश्वास और विकास की राह पर अग्रसर बस्तर क्षेत्र में आज एक महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुकमा जिले को 308 करोड़ रुपए से अधिक के 228 विकास कार्यों की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने 159 कार्यों का शिलान्यास और 69 कार्यों का लोकार्पण करते हुए क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति प्रदान की। मिनी स्टेडियम सुकमा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों से नक्सलवाद के कारण पिछड़े रहे क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बस्तर में शांति स्थापित हुई है और अब यहां विकास की गंगा बह रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुकमा को दी 308 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिन गांवों में कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां आज स्कूलों की घंटियां गूंज रही हैं और लोग लोकतंत्र पर भरोसा जताते हुए मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 3 हजार से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं और उन्हें पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से नई जिंदगी की शुरुआत के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्वस्थ बस्तर की दिशा में बड़ा कदम कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया और “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को घर-घर तक सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की। इस अभियान के तहत 7 जिलों में 1100 टीमें घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच करेंगी। कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री साय ने मिनी स्टेडियम में लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया और आम नागरिकों एवं हितग्राहियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने मौके पर ही विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता सामग्री और प्रमाण पत्र वितरित कर शासन की संवेदनशीलता का परिचय दिया। स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री ने 7 टीबी मुक्त पंचायतों को प्रमाण पत्र प्रदान किए और जानकारी ली कि जिले में अब तक 28 पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं। उन्होंने 3 टीबी मरीजों से संवाद कर उन्हें फूड बास्केट वितरित किया। मोतियाबिंद ऑपरेशन कराए मरीजों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से चश्मा पहनाकर उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना की। साथ ही दवा और आई ड्रॉप भी वितरित किए गए। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए मूर्तोंडा, पेंटा और कांकेरलंका उपस्वास्थ्य केंद्रों को एनक्वास सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। समाज कल्याण विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री साय ने आईईडी ब्लास्ट में पैर गंवा चुके 5 हितग्राहियों को कृत्रिम पैर प्रदान किए। इसके अलावा 4 व्हीलचेयर और 3 ट्राइसिकल भी वितरित किए गए तथा 6 दिव्यांगजनों को पहचान पत्र देकर उन्हें योजनाओं से जोड़ने की पहल की गई। एनआरएलएम स्टॉल में स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें “लखपति दीदी से करोड़पति दीदी” बनने के लिए प्रेरित किया और सरकार की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। आवास, अधिकार और आजीविका—हर क्षेत्र में सशक्तिकरण मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के स्टॉल में हितग्राहियों से बातचीत कर निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से 15 वनाधिकार पत्र वितरित किए गए, जिससे आदिवासी परिवारों को उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई। वन विभाग के स्टॉल में तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हितग्राहियों को सहायता प्रदान की गई। सहकारी समिति तोंगपाल को 4.27 लाख रुपए का सांकेतिक चेक दिया गया तथा एक हितग्राही को संग्रहण कार्ड वितरित किया गया। इसके साथ ही पुनर्वासित स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 2 ई-रिक्शा प्रदान कर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया गया और एक हितग्राही को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया। नियद नेल्लानार 2.0 और 8 बड़ी घोषणाएं मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि नियद नेल्लानार योजना के तहत अब तक 500 से अधिक गांवों में 17 विभागों की 45 योजनाओं के माध्यम से विकास कार्य किए गए हैं। इस योजना के अगले चरण ‘नियद नेल्लानार 2.0’ में अब 10 जिलों को शामिल किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए 8 महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं, जिनमें सड़क निर्माण, पुलिया निर्माण, बस स्टैंड, सामुदायिक भवन और मंदिर जीर्णोद्धार जैसे कार्य शामिल हैं। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, सांसद महेश कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

सैलरी बढ़ोतरी की मांग पर कर्मचारी अड़े, फैक्ट्रियों में काम रुकने से पुलिस पर पत्थरबाजी

 नोएडा     नोएडा में मंगलवार को भी प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों  के साथ झड़प भी हो गई. जिसके बाद पुलिस ने हल्का बल भी प्रयोग किया. सोमवार को जहां उग्र प्रदर्शन और तोड़फोड़ के बाद यूपी सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी कर दी है. बावजूद इसके प्राइवेट कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं. उनकी मांग है कि 11 हजार में दम नहीं है, न्यूनतम मजदूरी 20 हजार से कम नहीं होनी चाहिए. क्योंकि 20 हजार रुपये से कम में खुद का और परिवार का पेट पालना मुश्किल है।  नोएडा फेस 2 में कर्मचारियों के प्रोटेस्ट का एक वीडियो भी सामने आया है. जिसमें वे नारे लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि 11 हजार में दम नहीं और 20 हजार से कम नहीं. आपको बता दें कि भारी विरोध कर्मचारी उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरी दरों में बढ़ोतरी करने का आदेश दिया था. नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. अलग-अलग श्रेणियां में अधिकतम करीब 3000 तक इजाफा हुआ है. यह तात्कालिक फैसला है, आगे व्यापक समीक्षा के बाद वेज बोर्ड के माध्यम से स्थाई समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।  फैक्ट्रियों में काम करने नहीं पहुंचे मजदूर प्राइवेट कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के कारण वर्तमान वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है. उनका दावा है कि अन्य औद्योगिक इकाइयों में समान कार्य के लिए अधिक सैलरी दी जा रही है. जिससे वे खुद को असमान स्थिति में महसूस कर रहे हैं. वहीं, कुछ श्रमिक संगठनों ने भी कर्मचारियों के समर्थन में आवाज उठाई है और उचित वेतन निर्धारण की मांग की है।  हालांकि फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि अचानक इतनी बड़ी वेतन वृद्धि संभव नहीं है, क्योंकि इससे उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ेगा. प्रबंधन ने संकेत दिया है कि वे कर्मचारियों से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी निर्णय के लिए समय की आवश्यकता होगी।   'बाहरी' लोगों ने भड़काई हिंसा गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सोमवार रात पत्रकारों को बताया कि बाहरी जिलों से आए एक ग्रुप ने पड़ोसी जिलों की सीमाओं पर हंगामा किया. उन्होंने कहा, 'मजदूरों के शांतिपूर्वक चले जाने के बाद, बाहर से आए इस समूह ने लोगों को उकसाया और हिंसा भड़काने की कोशिश की.' पुलिस ने इनमें से कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया है और बाकी की पहचान की जा रही है।  आहूजा फैक्ट्री के कर्मचारियों की मांगें नोएडा में आहूजा फैक्ट्री के कर्मचारी फैक्ट्री के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं. कई मजदूर नई बढ़ोतरी पर सहमत नहीं है. कुछ मजदूर चाहते हैं सरकार के नए रेट कंपनी के मेन गेट पर नोटिस के रूप में लगाए जाए. मजदूरों का कहना है कि कंपनियों में कुशल और अकुशल कारीगरों का एक समान भत्ता हो. उनका आरोप है कि नौ महीनों में ही नौकरी टर्मिनेट करके दोबारा जॉइन कराई जाति है ताकि भत्ता ना बढ़ाना पड़े. अप्रेंटिस के दौरान 90 रुपए प्रति घंटे का भत्ता दिया जाता है लेकिन साल भर बाद घटकर 50 रुपए हो जाता है. मजदूरों की चिंता है अगर सरकारी भत्ता बढ़ाकर लागू किया गया तो कंपनियां कई मजदूरों को नौकरी से भी निकालेंगी।   नोएडा-सेक्टर 80 में पत्थरबाजी नोएडा के सेक्टर 80 में भी मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है. कुछ मजदूरों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की है. पुलिस हालात को काबू करने की कोशिश कर रही है।  हिंसक प्रदर्शन मामले में 7 पर FIR सोमवार को हुए जोरदार प्रदर्शन को लेकर पुलिस का दावा है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन बंद करने के बाद कुछ 'बाहरी' लोगों ने अशांति फैलाने की कोशिश की. इस मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक 7 एफआईआर दर्ज की हैं और कई लोगों को हिरासत में भी लिया है।  प्रदर्शन के चलते उत्पादन हुआ ठग इस विवाद के कारण कई फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप हो गया है, जिससे आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है. स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की पहल शुरू कर दी है. हालांकि अभी भी यह विवाद सुलझा नहीं है।  वहीं नोएडा में सोमवार को हुए हिंसा के मामले में अब तक 350 को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार लोगों को जेल भी भेज दिया गया है. वहीं प्रदर्शन में शामिल कई को हिरासत में लेकर भी पूछताछ की जा रही है. वबाल करने वाले अन्य की सीसीटीवी से पहचान की जा रही है।  फैक्ट्री के बाहर टूटे पड़े हैं वाहन नोएडा सेक्टर 63 में आगजनी के निशान अभी भी मौजूद हैं. सड़क के किनारे जली हुई कारें और फैक्टरियों के शीशे टूटे हुए पड़े हैं. एक पुलिसकर्मी ने बताया कि करीब 1 बजे लोग आए, बाहर सीसीटीवी तोड़ा फिर कूद के अंदर चले गए. 400 से 500 की भीड़ थी. सभी लोग अंदर दरवाजा बंद कर लिए और तोड़फोड़ करने लगे।