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मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भोपाल में डा. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती महोत्सव की शुरुआत की

भोपाल   डा बाबासहाब आंबेडकर जयंती मैदान तुलसी नगर, भोपाल में 12 अप्रैल से 14 अप्रैल 2026 तक 03 दिवसीय डा. बाबासहाब आंबेडकर जयंती उत्सव समारोह का प्रारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा मोहन यादव के हाथों हुआ। कार्यक्रम को विधायक श्री भगवानदास सबनानी, आरपीआई (आंबेडकर) के राष्ट्रीय महासचिव डा मोहनलाल पाटील, दि बुध्दिस सोसाइटी आफ इंडिया के श्री बी टी गजभीये , समता सैनिक दल के श्री उदभान चवरे तथा जयंती समारोह समिति के अध्यक्ष श्री रामु गजभिये ने संबोधित किया तथा संचालन वामन जंजाले जी ने किया। मंच पर धम्मरतन सोमकुवर, बाबुराव ढोने, चिंतामन पगारे, गौतम पाटील, विजय कुमार, दिलिप मस्के, दिलिप बागडे, दिलिप कडबे उपस्थित थे। जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए डा मोहन यादव जी ने कहा कि डा आंबेडकर ने विश्व में देश का मान बढ़ाया। हम बाबासाहेब के सपनों को साकार कर सभी को न्याय दिला रहे है। सांस्कृतिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के स्थापित गायक देवानंद जगताप एवं गायीका स्वरा तामगाडगे ने डा बाबासहाब आंबेडकर की जीवनी पर गीतों की प्रस्तुति दी।  कार्यक्रम में बढी संख्या मे भोपाल के आंबेडकर अनुयायियों उपस्थिति थे।

55 की उम्र में 138 डिग्रियां और 11 वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: राजस्थान के ‘महा पढ़ाकू’ दशरथ सिंह का असाधारण सफर

झुंझुनू  आज के दौर में जब एक ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करने में अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं, किताबें देख कर सिर घूमने लगता है और साल दर साल एक ही विषय पढ़ते-पढ़ते लोग ऊब जाते हैं, वहीं राजस्थान की वीर धरा से एक व्यक्ति ने डिग्रियों की झड़ी लगा दी है. हम बात कर रहे हैं पूर्व सैनिक दशरथ सिंह की, जिन्होंने अपनी मेहनत से कॉलेज और यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड बुक ही बदल डाले. जहां, लोग एक डिग्री के लिए रातों-रात जागते हैं, वहां इस जांबाज ने 55 साल की उम्र में 138 डिग्रियां अपने नाम कर ली हैं. उच्च शिक्षा क्षेत्र में उन्होंने 11 वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं. इसलिए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड में उनका नाम शामिल हो चुका है।  देश सेवा में सबसे आगे रहने वाले राजस्थान के वीर सपूत वैसे तो आए दिन नए कीर्तिमान हासिल करते हैं. दुश्मनों से लोहा लेने की बात हो या खेती की बात हमेशा नए टेक्नोलॉजी का विकास करते रहते हैं. लेकिन झुंझुनू जिले के नवागढ़ तहसील के खीरोड़ गांव के रहने वाले एक किसान परिवार के दशरथ सिंह ने 55 साल की उम्र में 138 डिग्रियां हासिल की है. साल 1988 में उन्होंने भारतीय सेवा ज्वाइन की और 16 साल तक पंजाब जम्मू कश्मीर सहित कई राज्यों में देश की सेवा के लिए तैनात रहे।  सेना में रहते हुए जारी रखी पढ़ाई  सेना में रहते हुए भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और हर साल मिलने वाले 2 महीने की छुट्टी का उपयोग करते हुए परीक्षा दी और पढ़ाई की. साल 2004 में प्रोसेशन से रिटायर हो गए. इसके बाद उन्होंने पूरा ध्यान अपनी शिक्षा पर लगाया लगातार वो अपनी पढ़ाई करते रहे. उन्होंने बीकॉम, एलएलबी, एलएलएम, बीजेएमसी, B.Ed सहित कई डिग्री हासिल की हैं।  52 सर्टिफिकेट, 13 डिप्लोमा…  दशरथ सिंह का दावा है कि वो अभी तक तीन पीएचडी, 7 विषय में ग्रेजुएशन डिग्री और 46 पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री, 23 डिप्लोमा, 7 मिलिट्री स्टडीज डिग्री और 52 सर्टिफिकेट ले चुके हैं. सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पर फोकस रखा. उन्होंने बताया कि उन्होंने इग्नू, जैन विश्वविद्यालय भारतीय संस्थान और अन्य विश्वविद्यालय से अपनी डिग्रियां की हैं. एक किसान परिवार में उनका जन्म हुआ. परिवार के आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. फिर भी उन्होंने किसी तरह से सरकारी स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई की. पढ़ाई करने में उनको दिक्कत आ रही थी लेकिन उसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी पढ़ाई जारी रखी. उन्होंने बताया की वो सेना के सब शक्ति कमान में लीगल एडवाइजर के रूप में भी काम कर चुके हैं. साथ ही अब सेनारत और रिटायर्ड सैनिकों के न्यायालय से जुड़े मामलों को संभालते हैं। 

25 लाख पौधों से शहर को बनाएंगे हरा-भरा, सिंहस्थ की तैयारी में 2 साल में पूरा होगा लक्ष्य

उज्जैन  शहर में नगर निगम को इस साल 10 लाख और अगले वर्ष 15 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया है। इस तरह दो वर्षों में सिंहस्थ से पहले 25 लाख पौधारोपण कर शहर की हरियाली बढ़ाने की तैयारी है। इस अभियान के लिए नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग संयुक्त रूप से बजट उपलब्ध कराएंगे। निगम के पास सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ काटने के एवज में मिले 2 करोड़ रुपए है। इसके अलावा शासन स्तर से भी अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराया जाएगा। पौधारोपण के लिए शहर में खाली और अनुपयोगी जमीनों देख रहे हैं। नगर निगम द्वारा विभिन्न स्थानों का सर्वे कर सूची तैयार की जा रही है। जून से मानसून के साथ ही पौधारोपण अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस बार निगम केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी देखरेख और संरक्षण पर भी विशेष फोकस रहेगा। पौधारोपण का कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराया जाएगा, जिसे पौधे लगाने के बाद दो वर्षों तक उनकी सुरक्षा, सिंचाई और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। अभी विवि परिसर, तरणताल सहित 10 जगह चयनित की नगर निगम अपर आयुक्त संदीप शिवा के अनुसार प्रारंभिक चरण में विक्रम विश्वविद्यालय परिसर, तरणताल क्षेत्र, एमआर-5 रोड, चकोर पार्क सहित करीब 10 प्रमुख स्थलों का चयन किया है। इसके अलावा शहर के लगभग 400 उद्यानों में उपलब्ध खाली भूमि का उपयोग भी किया जाएगा। हर जोन में करीब 20 स्थानों को चिह्नित किया जाएगा, जिनमें सड़क किनारे, चौराहे और निगम की अन्य खाली जमीनें शामिल होंगी।

गोरस मोबाइल ऐप से पशुपालकों को मिलेगी जानकारी, बढ़ेगा दूध उत्पादन, पशुपालकों की आय में होगा इजाफा

भोपाल.  प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही पशुपालकों एवं किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुओं को संतुलित आहार प्रबंधन की आसानी से जानकारी मिल सके, इसके लिए मुख्यपमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विभाग द्वारा लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक ‘गोरस मोबाइल ऐप’ विकसित किया है। यह ऐप पशुपालकों को वैज्ञानिक आधार पर पशुओं के आहार प्रबंधन की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके उपयोग से पशुओं का स्वास्थ्य तो बेहतर होगा ही, साथ में दूध उत्पादन में वृद्धि भी होगी। इससे पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इसलिए तैयार कराया गया ऐप मध्यप्रदेश में 2 करोड़ से अधिक गाय एवं भैंसों का पालन किया जा रहा है, लेकिन अधिकांश पशुपालक अभी भी पारंपरिक तरीके से पशुओं को आहार देते हैं। वैज्ञानिक पद्धति से पोषण न मिलने के कारण पशुओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है, जिससे 20 से 30 प्रतिशत तक कम दूध उत्पादन, गर्भधारण में कठिनाई और बार-बार हीट जैसी समस्याएं सामने आती हैं। पशुपालकों की इन सभी समस्यामओं के समाधान के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक नवाचार किया है। ‘गोरस मोबाइल ऐप’ विकसित किया है। अब ऐप से पशुपालक जैसे ही अपने पशु से संबंधित जानकारी नस्ल, वजन, दुग्ध उत्पादन, गर्भावस्था की स्थिति, दुग्ध उत्पादन का महीना, पशुआहार दर्ज करेंगे, इसके आधार पर ऐप संतुलित आहार की मात्रा और प्रकार की जानकारी देगा। साथ ही यह भी बताएगा कि आहार में सुधार करने पर पशुपालक को एक ब्यांत में कितना आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके अलावा, एप वर्तमान में दिए जा रहे आहार से संभावित नुकसान की जानकारी भी देगा। अवर्णित गाय एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार के सुझाव भी प्रदान करेगा। विभाग की यह पहल प्रदेश में वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्व। पूर्ण कदम मानी जा रही है। जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर होगा उपलब्ध होगा पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विकसित किया गया एप जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा, जो पूरी तरह से नि:शुल्क होगा। पशुपालक इसे अपने मोबाइल पर आसानी से डाउलनोड कर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। ऐप की खासियत: यह पूरी तरह से हिंदी मोबाइल ऐप है। गाय, भैंस के लिए संतुलित आहार के बारे में सुझाव देगा। चुने हुए चारे संयोजन से अधिकतम दूध, न्यूनतम लागत। इंटरनेट के बिना भी पूरी तरह कार्यशील। 28 से अधिक स्थानीय चारों की विस्तृत जानकारी मौसम (गर्मी) और गर्भावस्था के अनुसार स्वचालित समायोजन गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा, भदावरी एवं संकर नस्लों के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन पशुपालकों को संभावित आर्थिक लाभ के बारे में मिलेगी जानकारी। अवर्णित गाय एवं भैंसों के लिए नस्ल सुधार की सलाह। पशुपालक ऐसे करें डाउनलोड गोरस मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने के लिए पशुपालकों को सबसे पहले मोबाइल प्ले स्टोर पर जाना होगा। गोरस ऐप सर्च करें। डाउनलोड करने के बाद ऐप को इस्टॉल करने की अनुमति देगी। इसके बाद इस्टॉल पर क्लिक करें। फिर गूगल सिक्योरिटी को अनुमति दी। इसके बाद ऐप खोले। विभाग द्वारा कराया गया है तैयार प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विभाग श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों, पशुपालकों को मोबाइल पर ही पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी मिल जाए। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को आहार मिले, इसके लिए विभाग द्वारा गोरस मोबाइल ऐप तैयार कराया गया है। यह ऐप पूरी तरह से सरल हिंदी भाषा में विकसित किया है। जल्द ही पशुपालकों को गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा।  

मध्य प्रदेश राज्य वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष से की मुलाकात

भोपाल अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डल्लू कुमार सोनी के द्वारा .मध्य प्रदेश राज्य वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष जनाब सन्वर पटेल जी का स्वागत किया।और उनसे समिति के संदर्भ में चर्चा की इस दौरान जिला अध्यक्ष इरशाद अहमद,एवं जिला सोसल मीडिया प्रभारी मो,शरीफ कुरैशी भी स्वागत एवं चर्चा के दौरान उपस्थित है। 

Tata Motors ने लॉन्च किया Prima E.55S इलेक्ट्रिक ट्रक, डिलीवरी हुई शुरू

मुंबई   Tata Motors की कमर्शियल व्हीकल विंग ने BillionE Mobility को अपने Tata Prima E.55S इलेक्ट्रिक प्राइम मूवर की डिलीवरी शुरू कर दी है. इसके साथ ही कंपनी ने 250 अतिरिक्त यूनिट्स के लिए एक नया ऑर्डर भी हासिल किया है. यह विकास भारत में इलेक्ट्रिक हेवी-ड्यूटी कमर्शियल व्हीकल्स के लिए एक कदम आगे है, जो खासकर लंबी दूरी के माल परिचालन में अहम है।  कंपनी ने ट्रकों के शुरुआती बैच को गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली NCR और हरियाणा सहित प्रमुख लॉजिस्टिक कॉरिडोर में डिलीवर करने की योजना बनाई है. इन वाहनों का इस्तेमाल स्टील और सीमेंट जैसे औद्योगिक सामानों के परिवहन के लिए किया जाएगा, जो मुख्य माल ढुलाई सेगमेंट में इलेक्ट्रिकफिकेशन की ओर एक बदलाव का प्रतीक है।  डिलीवरी के साथ-साथ, BillionE Mobility ने अगले 6 से 18 महीनों में अपने इलेक्ट्रिक ट्रक फ्लीट को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की योजना की रूपरेखा भी तैयार कर ली है, जिसमें 1,500 हेवी-ड्यूटी वाहनों की कुल तैनाती का लक्ष्य रखा गया है. इसके अतिरिक्त 250-यूनिट ऑर्डर इस व्यापक विस्तार का हिस्सा है।  नए Tata Prima E.55S का बैटरी पैक और रेंज Tata Prima E.55S इलेक्ट्रिक ट्रक कंपनी के i-MoEV इलेक्ट्रिक वाहन आर्किटेक्चर पर आधारित है और इसमें एक इंटीग्रेटेड ई-एक्सल सेटअप मिलता है. इस ट्रक में 450 kWh का बैटरी पैक इस्तेमाल किया गया है, जिसके बारे में कंपनी का कहना है कि यह अपने सेगमेंट में सबसे बड़ा बैटरी पैक है, जो एक बार चार्ज करने पर 350 किमी तक की रेंज प्रदान करता है।  ट्रक में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग भी मिलती है, और डुअल-गन फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी मिलता है. ट्रक मिलने वाले हार्डवेयर की बात करें तो इसमें इलेक्ट्रिक प्राइम मूवर 3-स्पीड ऑटो-शिफ्ट ट्रांसमिशन, सेफ्टी और ड्राइवर असिस्टेंट सिस्टम जैसे फीचर्स मिलते हैं।  नए Tata Prima E.55S के फीचर्स इसके अलावा, इस ट्रक में वैकल्पिक ADAS कार्यक्षमता के साथ ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम, लेन डिपार्चर वार्निंग, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, क्रूज़ कंट्रोल और एक इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकिंग सिस्टम जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. यह मॉडल अपटाइम, परिचालन दक्षता और स्वामित्व की कुल लागत पर ध्यान देने के साथ लंबी दूरी की लॉजिस्टिक्स की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है।  Tata Motors सेवा बुनियादी ढांचे और फ्लीट मैनेजमेंट समाधान सहित अपने व्यापक ईवी पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से इन तैनाती का समर्थन कर रहा है. Tata Prima E.55S का रोलआउट और BillionE Mobility का अतिरिक्त ऑर्डर भारी कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में हरित समाधानों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है, खासकर जब बेड़े संचालक अंतर-शहर संचालन के लिए पारंपरिक डीजल-संचालित ट्रकों के विकल्प तलाश रहे हैं। 

जबलपुर में एडवांस धनुष तोप का सफल ट्रायल, अब पोकरण में होगा परीक्षण

जबलपुर देशभर में सेना के लिए तोप निर्माण में अग्रणी जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने एक और कमाल कर दिखाया है। जीसीएफ ने भारतीय सेना की सहायता के लिए धनुष तोप का एडवांस वर्जन बना दिया है। इसमें अनेक मॉडर्न फीचर्स जोड़े हैं। यह नाटो मानक के अनुसार हैं। 40 से 42 किमी तक गोला दागने वाली 155 एमएम 52 कैलिबर की माउंटेड व टो गन की सेना ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) मांगी है। जीसीएफ अधिकारी बताते हैं कि एडवांस धनुष तोप ट्रायल में सफल रही है। यह भारतीय सेना के सैन्य अभियानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। हाल ही में सीपीइ इटारसी में माउंटेड गन के प्रोटोटाइप की स्ट्रक्चरल फायरिंग की। इसके अंतर्गत 20 से अधिक गोले दागे गए थे। खास बात यह है कि सभी गोले निशाने पर लगे। सैन्य अधिकारियों के अनुसार अब टो गन के प्रोटोटाइप का परीक्षण राजस्थान के पोकरण में किया जाएगा। प्रोटोटाइप के परीक्षण की तैयारियों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। देश की पहली तोप, सटीक लक्ष्य साधने फायर कंट्रोल सिस्टम एडवांस कर वजन कम करने गति बढ़ाने के लिए 6 बाइ 6 वाहन पर माउंट किया गया गन कैरिज फैक्ट्री ने 2016 में माउंटेड 155 एमएम 52 कैलीबर तोप का प्रोटोटाइप तैयार किया था। उस समय यह देश की पहली माउंटेड तोप थी। अब जो तोप तैयार की है, उसकी तकनीक में बहुत अंतर है। इस नई तोप में ऑटोमैटिक एमुनेशन हैंडलिंग जोड़ा है। सटीक लक्ष्य साधने फायर कंट्रोल सिस्टम एडवांस कर वजन कम करने गति बढ़ाने के लिए 6 बाइ 6 वाहन पर माउंट किया गया है। एडवांस धनुष तोप में ऑटोमैटिक एम्युनिशन हैंडलिंग है। जबलपुर में बनी माउंटेड गन को स्वदेशी 6 बाइ 6 के ट्रक पर माउंट किया है। इससे भारतीय सेना और मजबूत होगी। माउंटेड गन की प्रमुख खासियत एडवांस फायर कंट्रोल सिस्टम ऑटोमैटिक एम्युनिशन हैंडलिंग नाटो मानक पर बेस्ड प्रोटोटाइप 6 बाइ 6 ट्रक पर माउंटेड सिस्टम एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम 40 से 42 किमी मारक क्षमता स्वदेशी ट्रक पर माउंटेड

नर्मदा संरक्षण के लिये जरूरी है सरकार एवं समाज में समन्वय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नर्मदा नदी जीवनदायिनी नदियों में से एक है। नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए शासन एवं समाज के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि माँ नर्मदा के उद्गम स्थल के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये प्रभावी प्रयास किए जाएँ तथा नदी तटों पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही सतत रूप से की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अमरकंटक की अखंडता बनाए रखने के लिए अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधियों द्वारा जन जागृति बढ़ाई जाए, इससे उद्गम स्थल का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज अमरकंटक में नर्मदा समग्र मिशन की बैठक में अधिकारियों के निर्देशित कर रहे थे। बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, अध्यक्ष नर्मदे हर सेवा न्यास एवं मध्यप्रदेश कोल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) रामलाल रौतेल, पूर्व जनपद अध्यक्ष पुष्पराजगढ़ हीरा सिंह श्याम सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक क्षेत्र में वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि स्थानीय प्रजाति के पौधे, वन औषधि पौधों का प्राथमिकता के साथ रोपण किया जाए। वन विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि अमरकंटक क्षेत्र में प्राकृतिक वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। अमरकंटक के प्राकृतिक स्वरूप को निखारने के लिए स्थानीय प्रजाति साल, महुआ, ऑवला, चार, हर्रा, गुलबकावली आदि स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण कर उन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भूमिगत जल स्तर में वृद्धि हो तथा स्थानीय वन प्राकृतिक रूप से संरक्षित रह सकें। यह भी बताया गया कि वन विभाग की रोपणी में 2.50 लाख से अधिक पौधे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक में नए निर्माण कार्यों पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमरकंटक क्षेत्र में अनियंत्रित कंक्रीट निर्माण को प्रतिबंधित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक तथा नर्मदा उद्गम स्थल पर अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध समय-समय पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश कलेक्टर को दिए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा नदी में प्रदूषण, अपशिष्ट जल निकासी एवं जल प्रबंधन व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस पर अधिकारियों ने बताया कि अमरकंटक में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा चुका है तथा यह सुनिश्चित करने के लिये सतत प्रयास किए जा रहे हैं कि प्रदूषित जल नर्मदा नदी में न मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अमरकंटक एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन नगरी है, जहाँ अनेक आध्यात्मिक एवं पौराणिक मंदिर स्थित हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी व्यक्तियों द्वारा भी बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जिन्हें नीति-नियमों के अनुरूप व्यवस्थित किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमरकंटक क्षेत्र में प्लास्टिक एवं शराब के उपयोग पर कठोर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमरकंटक में “नो मूवमेंट” एवं “नो कंस्ट्रक्शन” जोन निर्धारित किया जाए, जिससे क्षेत्र की पवित्रता, पर्यावरणीय संतुलन एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अमरकंटक में सीमेंट एवं कंक्रीट का निर्माण ना हो इसका अधिकारी विशेष ध्यान रखे जाने के निर्देश पर कलेक्टर हर्षल पंचोली ने अवगत कराया कि अमरकंटक क्षेत्र का ड्रोन सर्वे पूर्व में कराया जा चुका है। इसमें यदि कोई अवैध निर्माण कार्य पाया जाता है, तो उस पर प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि अमरकंटक विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, नगर परिषद तथा अमरकंटक मंदिर के विकास के लिये कमिश्नर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति के माध्यम से समय-समय पर अमरकंटक के विकास एवं संवर्धन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं एवं बिंदुओं पर चर्चा की जाती है। बैठक में ट्रैकिंग रूट, अग्नि सुरक्षा की मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन, वन उत्पादों के प्रबंधन, जैव विविधता के संरक्षण एवं संवर्धन, वन्यजीवों के मूवमेंट एवं उनकी स्थिति सहित अमरकंटक के मंदिरों, तालाबों एवं घाटों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गए। समीक्षा बैठक में जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष पद्मसे सम्मानित मोहन नागर ने नर्मदा समग्र मिशन के तहत समाज के सहयोग से संचालित की जाने वाली नर्मदा नदी के घाटों की साफ-सफाई तथा सहायक नदियों एवं घाटों में जन सहभागिता से किए जाने वाले श्रमदान कार्यों की जानकारी दी। अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन एवं आवास संजय दुबे ने अमरकंटक में विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं आगामी योजनाओं की जानकारी दी। अपर मुख्य सचिव योजना आर्थिकी एवं सांख्यिकी संजय शुक्ला द्वारा नर्मदा नदी के समग्र विकास के लिए बनाई गई कार्य योजना एवं उपलब्धियों से अवगत कराया। मुख्य सचिव वन संदीप यादव ने वन विभाग द्वारा जैव विविधिता, यूकेलिप्टस के प्लांटेशन को हटाकर स्थानीय प्रजाति के पौधरोपण के संबंध में जानकारी दी। बैठक में शहडोल संभाग की कमिश्नर सुरभि गुप्ता, पुलिस महानिरीक्षक सुचैत्रा एन, डीआईजी सविता सुहाने, पुलिस अधीक्षक मोतिउर रहमान, वनमण्डलाधिकारी डेविड व्यंकटेश, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अर्चना कुमारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगन्नाथ मरकाम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

एमपी में 14 जिलों और 42 मोहल्लों के अटपटे नाम बदलने की मांग, भोपाल भी शामिल

भोपाल   जब नाम बदलने का दौर चल ही रहा है तो लगे हाथ इनके नाम भी बदल दीजिए ना हुजूर। शुरुआत हुजूर शब्द से ही करते हैं। मध्यप्रदेश में दो तहसीलों के नाम हुजूर है। पहली हुजूर तहसील भोपाल जिले में है, तो दूसरी रीवा जिले में। एक जैसा नाम होने के कारण कई बार बड़ी गफलत की स्थिति बन जाती है। तहसील हुजूर बनी हुई है अजूबा राजधानी भोपाल की तहसील हुजूर में तो अजूबा यह कि इस नाम का कोई नगर, बस्ती या मोहल्ला तक नहीं है, फिर भी आधा भोपाल हुजूर तहसील में आता है। सिर्फ तहसील ही नहीं, भोपाल में तो एक विधानसभा सीट का नाम भी हुजूर है। कुछ साल पहले ही बनी इस सीट की भौगोलिक परिस्थिति भी विचित्र है। इसका एक सिरा सीहोर जिले के नजदीक है, तो दूसरा रायसेन जिले के सर्पाकार क्षेत्र वाली इस सीट के तहत अधिकांश हिस्सा ग्रामीण मतदाताओं का आता है। हुजूर सीट का नामकरण संभवत: तहसील हुजूर के कारण ही किया गया है, लेकिन इसमें दूसरी तहसीलों का भी कुछ क्षेत्र समाहित है। तो हुजूर, यह शब्द वैसे भी सामंतवादी सम्मान और गुलामी की मानसिकता को प्रदर्शित करता है, इसे बदला जा सकता है। क्या जातिसूचक नाम भी बदले जाएंगे? प्रदेश कांग्रेस के नेता भूपेंद्र गुप्ता ने कुछ समय पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जातिसूचक नामों वाले मोहल्लों का नाम बदलने की मांग की थी। कुछ नाम हैं, लोहारपुरा, सुनारपुरा, ढीमरखेड़ा, गुजरपुरा, तेलीपुरा, चमारपुरा, चमारटोला, ब्राह्मणपुरा, कायस्थपुरा, लखेरापुरा, दांगी मोहल्ला, भाटखेड़ी, इस्लाम मोहल्ला, कसाईपुरा, पवारखेड़ा, कोठा, खिड़किया, जाटखेड़ी, बंजारा, बंजारी आदि। ये अटपटे नाम बंदरकोल, बाबा की बरोली, बैसनपुर, बाराती, बौना, चंडी, चिल्लाखुर्द, दाढ़, घोड़ाबंद, चोरघटा (रीवा), चटाईपुरा (भोपाल), झुंड (शिवपुरी), ठीकरी (बड़वानी), फुटेरा (दमोह), भड़भडिय़ा (नीमच), लंगोटी, लालबर्रा (बालाघाट), चोली (खरगोन), चोरपुरा (मुरैना), बिहार (झाबुआ), बालमपुर (भोपाल), कुडिय़ा (सतना)। नाम बदलने की प्रक्रिया किसी भी मोहल्ले, गांव या शहर का नाम बदलने की सरकारी प्रक्रिया निर्धारित है। सबसे पहले स्थानीय निकाय से प्रस्ताव पारित कराकर जिला प्रशासन को भेजा जाता है। जिला प्रशासन से यह प्रस्ताव राज्य सरकार को और फिर केंद्र सरकार को भेजा जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी के बाद इसका गजट नोटिफिकेशन होता है। अब तक बदले गए नाम पुराना नाम – नया नाम होशंगाबाद – नर्मदापुरम नसरूल्लागंज – भैरुंदा फंदा – हरिहरनगर गंजबासौदा -वासुदेवनगर मुलताई – मूलतापी कांटाफोड़ – कांतापुर गजनीखेड़ी – चामुंडा महानगरी मौला – मोहनपुरा मौलाना – विक्रम नगर जहांगीरपुर – जगदीशपुर मिर्जापुर – मीरापुर सलामतपुरा – श्रीरामपुरा रेहमानपुरा – हनुमानपुरा इनके नाम में बदलाव की मांग पुराना नाम – नया नाम भोपाल – भोजपाल कटनी – कनकपुर जैसीनगर – जयशिव नगर औबेदुल्लागंज – हिरानिया विदिशा – वैदवती बेगमगंज – सियावास गौहरगंज – कलियाखेड़ी शमशाबाद – सूर्यनगर नूरगंज – रूपनगर सीहोर – सिद्धपुर उज्जैन – अवंतिका नगरी दतिया – दिलीपनगर महेश्वर – महिष्मती जबलपुर – जबालिपुरम

बिहार में आज तय होगा सत्ता का मालिक, लोकभवन सजा और तैयारियां पूरी

 पटना बिहार के लिए आज यानि मंगलवार का दिन बड़ा रहने वाला है. प्रदेश के मुखिया नीतीश कुमार इस्तीफा दे सकते हैं और साथ ही नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है. इस कड़ी में एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस) ने राजधानी पटना में विधयक दल की अहम बैठक बुलाई है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ऑब्जर्वर के तौर पर पहुंचेंगे।  14 अप्रैल को शाम 4 बजे पटना के विधानसभा भवन के सेंट्रल हॉल में एनडीए के सभी विधायक एक साथ बैठेंगे. इसे विधायक दल की बैठक कहते हैं. इसी बैठक में तय होगा कि एनडीए का नेता कौन होगा यानी बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा. जिस नेता को सबसे ज्यादा समर्थन मिलेगा उनके नाम पर सहमति बनेगी।  शपथ ग्रहण कब और कहां होगा? 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे पटना के लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा. लोकभवन बिहार सरकार का एक बड़ा सरकारी भवन है जहां ऐसे बड़े कार्यक्रम होते हैं. वहां तैयारियां जोरों पर हैं और काम को आखिरी रूप दिया जा रहा है।  सम्राट चौधरी का नाम क्यों आया? सूत्रों के मुताबिक लोकभवन के अधिकारियों ने डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों की जानकारी दी. इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि वो इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम भूमिका में हैं।  नए मुख्यमंत्री का नाम अभी क्यों तय नहीं? यह सवाल सबके मन में है. एनडीए के गठबंधन में कई पार्टियां हैं और सभी की अपनी-अपनी पसंद होती है. इसीलिए पहले विधायक दल की बैठक होती है जहां सभी मिलकर एक नाम पर सहमति बनाते हैं. उसके बाद ही मुख्यमंत्री का चेहरा सामने आता है. कल की बैठक के बाद यह रहस्य खुल जाएगा।