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योगी सरकार में मंत्री पद पर सवर्ण और पश्चिम यूपी पर होगा फोकस, एक नेता की नियुक्ति तय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का कैबिनेट विस्तार होने की तैयारी है। लखनऊ से दिल्ली तक यह वीकेंड काफी गहमागहमी वाला रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े अचानक ही लखनऊ पहुंचे और एक के बाद एक कई नेताओं से मुलाकात की। इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ संगठन महामंत्री धर्मपाल एवं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मुलाकात हुई। यही नहीं पंकज चौधरी ने दिल्ली में भी मुलाकातें की हैं। माना जा रहा है कि विनोद तावड़े ने सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक एवं केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की है। इनसे राज्य के कामकाज पर बात की गई और मंत्री बनाए जाने को लेकर भी चर्चा हुई। यही नहीं विनोद तावड़े की मुलाकात पूर्व प्रदेश अध्यक्षों रमापति राम त्रिपाठी और सूर्यप्रताप शाही से भी हुई। इसके अलावा पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह जैसे नेता भी उनसे मिले। ये सारी बैठकें फीडबैक के लिए हुईं और मंथन हुआ कि कौन से नेता मंत्री बन सकते हैं। इसके अलावा किन लोगों को निगमों, सहकारी संस्थाओं आदि में पद देकर नवाजा जा सकता है। इस बीच चर्चा है कि पश्चिम यूपी से आने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का मंत्री बनना तय है। वह प्रदेश अध्यक्ष पद से हटे हैं और जाट नेता हैं। बिरादरी का पश्चिम यूपी में अच्छा असर है। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि उन्हें कोई अहम विभाग देकर समाज में एक संदेश दिया जाए। 6 मंत्रियों के लिए एंट्री की संभावना, कौन हैं रेस में उत्तर प्रदेश सरकार में फिलहाल 54 मंत्री हैं। इनमें से 21 कैबिनेट मंत्री हैं और 14 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। इसके अलावा 19 राज्यमंत्री हैं। अब भी 6 मंत्री और बन सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि विधानसभा की कुल क्षमता के 15 फीसदी के बराबर का मंत्री परिषद हो सकता है। यूपी में आखिरी कैबिनेट विस्तार मार्च 2024 में हुआ था। सूत्रों का कहना है कि अब होने वाले कैबिनेट विस्तार में कुछ लोगों को सरकार से संगठन में भेजा सकता है। इसके अलावा सालों से संगठन में मेहनत कर रहे कुछ लोग मंत्री पद पा सकते हैं। यही नहीं आयोग और निगमों में भी पद दिए जा सकते हैं। दिल्ली से लखनऊ तक मंथन, किन्हें मिलेगा जिम्मा और कौन बाहर कहा जा रहा है कि राज्य में कुछ नियुक्तियों को लेकर दिल्ली और लखनऊ के बीच मतभेद की स्थिति है। ऐसे में इस बार नियुक्तियां ऐसी करने पर विचार हो रहा है कि कहीं भी नाराजगी का स्कोप ना रहे। इसके अलावा मंत्री परिषद के गठन में पश्चिम यूपी पर फोकस करने की तैयारी है। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएम, दोनों डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष में से सभी मध्य अथवा पूर्वी यूपी के हैं। ऐसे में पश्चिम यूपी के किसी नेता को अहमियत मिल सकती है। वहीं सामाजिक समीकरण की बात की जाए तो ओबीसी और दलित के अलावा सवर्ण समाज पर भी फोकस रह सकता है। यूजीसी रूल्स वाले विवाद के बाद सवर्णों में नाराजगी के चर्चे हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा सरकार इन्हें 2027 से पहले निश्चित तौर पर साधना चाहेगी।

विज्ञान मंथन यात्रा: सतना के 17 छात्रों को ISRO और श्रीहरिकोटा जाने का अवसर, चयन व्यंकट-वन स्कूल से

सतना  मध्यप्रदेश के सतना के मेधावी छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (MP CST) की विज्ञान मंथन यात्रा के तहत व्यंकट-वन स्कूल के 17 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन हुआ है। ये होनहार बच्चे अब बेंगलुरु स्थित ISRO हेडक्वार्टर और श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर की सैर करेंगे। 95% से ज्यादा नंबर लाने वाले इन छात्रों को रॉकेट साइंस और अंतरिक्ष की बारीकियों को लाइव समझने का शानदार मौका मिलेगा। छात्र 20 से 27 अप्रैल तक देश की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के बेंगलुरु (कर्नाटक) मुख्यालय और श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) की सैर करेंगे। दल के लिए रसायन विज्ञान के शिक्षक डॉ. रामानुज पाठक और भौतिक विज्ञान की शिक्षिका नविता जायसवाल को ग्रुप हेड नियुक्त किया गया है, जिनके नेतृत्व में विद्यार्थी प्रयोग, अवलोकन और विश्लेषण की वैज्ञानिक पद्धति को प्रत्यक्ष रूप से समझेंगे। 95% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों का होता है चयन एमपी सीएसटी की विज्ञान मंथन यात्रा के लिए प्रदेश के एमपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के विज्ञान संकाय के 10वीं, 11वीं और 12वीं के मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन होता है। इसमें वे विद्यार्थी पात्र होते हैं जिन्होंने अपनी पिछली कक्षा में 95 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हों। विज्ञान मंथन के लिए चयनित विद्यार्थियों के लिए बाद में एक परीक्षा भी आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में सफल होने वाले प्रतिभागियों को 5 साल तक प्रतिमाह 1200 से 1500 रुपए की छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है। व्यंकट-वन स्कूल के इन विद्यार्थियों को मिला अवसर एक्सीलेंस स्कूल व्यंकट-1 से चयनित छात्र-छात्राओं में 12वीं कक्षा से तोषी गौतम, पल्लवी राठौड़, ऋषिका त्रिपाठी और रुद्राक्ष त्रिपाठी शामिल हैं। 11वीं कक्षा से आदित्य पांडेय, अखंड प्रताप यादव, कंचन चौधरी, रितिक तिवारी और नेहा पटेल का चयन हुआ है। वहीं, 10वीं कक्षा से कृष्णा गुप्ता, मोहिना गुप्ता, प्राची कुशवाहा, राधे गुप्ता और अंशराज सिंह तोमर को यह अवसर मिला है। प्राचार्य बोले- नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है उद्देश्य एक्सीलेंस स्कूल के प्राचार्य केएस बघेल ने बताया कि, "मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित विज्ञान मंथन यात्रा का उद्देश्य राज्य में वैज्ञानिक चेतना का प्रसार और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक प्रतिभा की पहचान, उनमें वैज्ञानिक समझ को सुदृढ़ करना और उन्हें वैज्ञानिक विकास की सक्रिय भागादारी के प्रति प्रेरित करना है।" यह 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत राज्य सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना है। ISRO-श्रीहरिकोटा टूर का पूरा शेड्यूल ये शानदार साइंटिफिक जर्नी 20 अप्रैल से शुरू होकर 27 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान बच्चे बेंगलुरु स्थित इसरो (ISRO) के मुख्यालय का दौरा करेंगे। साथ ही वे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) भी जाएंगे। वहां वे देखेंगे कि रॉकेट और सैटेलाइट कैसे काम करते हैं। इस टीम की लीडरशिप केमिस्ट्री के टीचर डॉ. रामानुज पाठक करेंगे। उनके साथ फिजिक्स की टीचर नविता जायसवाल भी मौजूद रहेंगी। व्यंकट-वन स्कूल के इन बच्चों ने किया नाम रोशन     व्यंकट-वन स्कूल के कई होनहार बच्चों ने इस लिस्ट में जगह बनाई है।      12वीं कक्षा से तोषी, पल्लवी, ऋषिका और रुद्राक्ष का चयन हुआ है।      11वीं से आदित्य, अखंड, कंचन, रितिक और नेहा को अवसर मिला है।      वहीं 10वीं कक्षा से कृष्णा, मोहिना, प्राची, राधे और अंशराज शामिल हैं।      ये सभी बच्चे अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से देखने के लिए उत्साहित हैं। किसे मिलता है विज्ञान मंथन यात्रा का मौका इस यात्रा के लिए चयन की प्रक्रिया बहुत ही कड़ी होती है। केवल वही छात्र इसके लिए एलिजिबल होते हैं जिनके नंबर 95% से अधिक हों। इसमें एमपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के विज्ञान छात्र शामिल होते हैं। 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के मेधावी छात्रों को प्रॉयोरिटी दी जाती है। ये बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की एक बहुत अच्छी पहल है। साइंटिफिक कॉन्शसनेस को बढ़ावा देना है लक्ष्य विज्ञान मंथन यात्रा (Vigyan Manthan Yatra) सिर्फ एक टूर या सैर-सपाटा नहीं है। चयनित विद्यार्थियों के लिए बाद में एक विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी। जो छात्र इस परीक्षा को पास करेंगे, उन्हें स्कॉलरशिप दी जाएगी। उन्हें अगले 5 साल तक पर मंथ 12 सौ से 15 सौ रुपए मिलेंगे।  इससे उनकी आगे की पढ़ाई में काफी मदद मिल सकेगी। स्कूल के प्राचार्य केएस बघेल ने इस अचीवमेंट पर खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि इस टूर का मेन ऑब्जेक्टिव साइंटिफिक कांशसनेस फैलाना है। ये योजना 11वीं फाइव ईयर प्लान के तहत शुरू की गई थी। ISRO क्या है? ISRO का फुल फॉर्म Indian Space Research Organisation है। सरल शब्दों में कहें तो यह भारत की एक सरकारी संस्था  है जो अंतरिक्ष यान, सैटेलाइट और रॉकेट बनाने का काम करती है। इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु में है। इसरो का काम है नई-नई टेक्नोलॉजी विकसित करना, जैसे कि चंद्रयान या मंगलयान। यह वो 'दिमाग' है जो पूरी प्लानिंग करता है कि भारत स्पेस की दुनिया में कैसे आगे बढ़ेगा। श्रीहरिकोटा क्या है? श्रीहरिकोटा असल में एक जगह का नाम है, जो आंध्र प्रदेश के तट पर स्थित एक छोटा सा आइलैंड है। यहां पर इसरो का Sathish Dhawan Space Centre (SDSC) बना हुआ है। आप इसे भारत का 'रॉकेट पोर्ट' कह सकते हैं। इसरो जो भी रॉकेट या सैटेलाइट बनाता है, उसे लॉन्च करने के लिए श्रीहरिकोटा लाया जाता है। यहां से रॉकेट अंतरिक्ष में उड़ान भरते हैं। समुद्र के किनारे होने के कारण यह जगह रॉकेट लॉन्चिंग के लिए सबसे सुरक्षित और सही मानी जाती है।

मध्‍यप्रदेश पुलिस ने किया e-Zero FIR, फर्जी कॉल सेंटर, म्यूल अकाउंट व ऑनलाइन ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश

भोपाल. आधुनिक तकनीक, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली एवं सुनियोजित रणनीति के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस लगातार सायबर अपराधियों पर शिकंजा कस रही है। पुलिस ने देवास ओर विदिशा में सायबर अपराधों के विरुद्ध अलग-अलग प्रकरणों में प्रभावी कार्यवाही करते हुए सायबर ठगी में संलिप्त आरोपियों पर सख्त कार्रवाई कीगयी। देवास में “e-Zero FIRके तहत अंतर्राज्‍यीय सायबर ठग गिरोह का पर्दाफाश जिले में दिनांक 02 जनवरी को दर्ज एक प्रकरण में फरियादी के मोबाइल पर “RTOChalan. apk”नामक संदिग्ध लिंक भेजकर मोबाइल हैक कर 7 लाख 98 हजार रुपए की ठगी की गई थी। प्रकरण में थाना नाहर दरवाजा में अपराध पंजीबद्ध कर तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस टीम द्वारा 1600 किलोमीटर दूर हावड़ा (पश्चिम बंगाल) एवं 800 किलोमीटर दूर दिल्ली से जुड़े संगठित गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से 4 लाख 96 हजार 500 रुपए नगद एवं 02 एंड्रॉइड मोबाइल फोन जप्त किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में लागू “e- ZeroFIR”प्रणाली के अंतर्गत ₹1,00,000/- से अधिक की सायबर ठगी की शिकायत 1930 हेल्पलाइन अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज होते ही स्वतः सायबर मुख्यालय भोपाल में पंजीबद्ध की जाती है, जिसे संबंधित जिले में जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज कर त्वरित विवेचना प्रारंभ की जाती है। इस प्रणाली के माध्यम से “गोल्डन ऑवर”में बैंक खातों को फ्रीज कर डिजिटल साक्ष्य संकलित किए जाते हैं, जिससे ठगी गई राशि की रिकवरी की संभावना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विदिशा में 5 वर्षों से संचालित फर्जी कॉल सेंटर ध्वस्त कर मास्टरमाइंड को किया गिरफ्तार राज्य सायबर पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा प्राप्त मुखबिर सूचना के आधार पर विदिशा जिले के गंजबासोदा क्षेत्र में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर पर दबिश देकर आरोपी एवं उसकी महिला सहकर्मी को गिरफ्तार किया गया ।  आरोपी  द्वारा विगत 4-5 वर्षों से “QuikrJob”के नाम पर फर्जी कॉल कर अभ्यर्थियों से रजिस्ट्रेशन, इंटरव्यू एवं ज्वाइनिंग किट के नाम पर राशि विभिन्न खातों में जमा कराकर सुनियोजित तरीके से ठगी की जा रही थी। दबिश के दौरान मौके से 20 मोबाइल फोन, 01 लैपटॉप, 12 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, 03 पासबुक, 02 चेकबुक, 01 पेन ड्राइव, डाटा रजिस्टर एवं अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं। दोनों आरोपियों  के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं आईटी एक्ट की धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। रतलाम— मल्टी-स्टेट फ्रॉड में प्रयुक्त म्यूल अकाउंट का खुलासा, 03 आरोपी गिरफ्तार जिले में साइबर अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत रतलाम पुलिस ने बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए एक मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े म्यूल अकाउंट का खुलासा किया है। साइबर सेल टीम द्वारा “Operation MATRIX (Mule Account Tracking, Removal Investigation Exercise)”के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए, NCRP एवं JCCT पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर फेडरल बैंक के एक संदिग्ध खाते की जांच की गई। जांच में यह खाता प्रथम मित्तल (23 वर्ष, निवासी माणकचौक, रतलाम) के नाम पर संचालित पाया गया, जिसमें 47 लाख  75 हजार 301 रूपए की संदिग्ध राशि जमा हुई थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह खाता म्यूल अकाउंट के रूप में उपयोग किया जा रहा था, जिसका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा ऑनलाइन ठगी एवं आर्थिक अपराधों में धन के प्रवाह को छिपाने हेतु किया जाता है। प्रकरण की जांच में यह भी सामने आया कि उक्त खाता तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी के.सी. श्रीधर के साथ हुए “डिजिटल अरेस्ट स्कैम” से जुड़ा है, जिसमें कुल 67 लाख 75 हजार 301 रूपएकी ठगी की गई थी और उसकी आंशिक राशि इसी खाते में ट्रांसफर हुई थी। प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध होने पर थाना माणकचौक में प्रकरण पंजीबद्ध कर प्रथम मित्तल सहित उसके सहयोगी हेमंत रायक उर्फ मोनू (निवासी रुद्राक्ष कॉलोनी) एवं शुभम रेडा उर्फ चीकू (निवासी नगरवास) को गिरफ्तार किया गया। इटारसी- वर्क फ्रॉम होम टास्क के नाम पर साइबर ठगी का खुलासा वर्क फ्रॉम होम टास्क के नाम पर ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के विरुद्ध थाना इटारसी पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया ‍है। दिनांक 02जनवरी को फरियादिया को व्हाट्सएप के माध्यम से वर्क फ्रॉम होम का लालच देकर टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया, जहां होटल-रेस्टोरेंट रेटिंग के टास्क दिए गए। प्रारंभ में छोटे-छोटे भुगतान (1हजार 40रूपए , 3 हजार 900रूपए , 1 हजार 350) देकर विश्वास अर्जित किया गया, इसके बाद अधिक राशि निवेश करने के नाम पर 3लाख 36 हजार 800रूपए की धोखाधड़ी की गई। विवेचना के दौरान साइबर सेल नर्मदापुरम एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने अंतरराज्यीय कार्रवाई करते हुए राजस्थान के बीकानेर से आरोपी एहसान अली उर्फ प्रिंस तथा मध्यप्रदेश के नीमच से मोहम्मद फरहान एवं मुसरफ को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से ठगी की राशि एवं प्रयुक्त मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा की गई इन कार्यवाहियों से स्पष्ट है कि सायबर अपराधों के विरुद्ध पुलिस पूर्णतः सतर्क, तकनीकी रूप से सक्षम एवं त्वरित कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। आमजन से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल अथवा मैसेज से सतर्क रहें तथा साइबर फ्रॉड की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन अथवा राष्ट्रीय सायबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। 

ट्रैक्टर से बदली तकदीर: हरदोली की भगवती देवी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

सफलता की कहानी ट्रैक्टर से बदली तकदीर: हरदोली की भगवती देवी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल भोपाल  कभी गरीबी और अभावों में जीवन यापन करने वाली बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड के ग्राम हरदोली की भगवती देवी आज आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी बन चुकी हैं। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी एक नई राह दिखाई है। भगवती देवी का जीवन पहले बेहद कठिन दौर से गुजर रहा था। उनके पति दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते थे। सीमित आय के कारण बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता था। कई बार हालात ऐसे बनते कि परिवार को उधार लेकर गुजारा करना पड़ता था। वर्ष 2018 में भगवती देवी ने ‘विकास स्व-सहायता समूह’ हरदोली से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव की नींव रखी। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत करना सीखा, वित्तीय प्रबंधन की समझ विकसित की और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। छोटे-छोटे ऋण लेकर उन्होंने बकरी पालन और खेती जैसे कार्य शुरू किए, जिससे आय में धीरे-धीरे वृद्धि होने लगी। आजीविका मिशन के तहत उन्हें विभिन्न योजनाओं से आर्थिक सहयोग मिला, सीआईएफ से 10 हजार रुपए समूह ऋण 02 हजार रुपए और सीसीएल के तहत 01 लाख रुपए । इन संसाधनों का उपयोग करते हुए भगवती देवी ने एक बड़ा निर्णय लिया और ट्रैक्टर खरीदा। इसके बाद उन्होंने गांव में जुताई, बुवाई जैसे कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर सेवाएं देना शुरू किया। यह कदम उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। अब उन्हें नियमित और सम्मानजनक आय मिलने लगी। ट्रैक्टर गतिविधि शुरू होने के बाद उनकी मासिक आय लगभग 12 हजार रुपए तक पहुंच गई। साथ ही खेती और बकरी पालन से भी अतिरिक्त आय होने लगी। पहले जहां परिवार की कुल आय लगभग 05 हजार रुपए प्रतिमाह थी, वहीं अब यह बढ़कर 20 हजार रुपए से अधिक हो गई है। आर्थिक सशक्तिकरण के साथ भगवती देवी का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं और परिवार का पालन-पोषण सम्मानपूर्वक कर रही हैं। गांव में उनकी पहचान एक सफल महिला उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी है। भगवती देवी की सफलता से प्रेरित होकर अब गांव की कई महिलाएं स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका संघर्ष और सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मजबूत संदेश है कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से बदलाव संभव है। भगवती देवी की यह कहानी बताती है कि यदि सही अवसर, मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प मिल जाए, तो कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

1 लाख कमाने वाली पत्नी का मेंटिनेंस अनुरोध, कोर्ट ने सुनाया विवादास्पद फैसला

जबलपुर  महीने के एक लाख से ज्यादा कमाने वाली महिला के मेंटिनेंस मांगने को गलत बताते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। जस्टिस विवेक जैन ने अंग्रेजी साहित्यकार शेक्सपीयर के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेंट ऑफ वेनिस' का एक डायलॉग का जिक्र करते हुए कहा कि यह तो उसी तरह है जैसे किसी के शरीर से मांस का टुकड़ा मांग लिया जाए। कोर्ट ने कहा कि महिला पहले से ही इतना कमाती है कि वह अपना घर बहुत अच्छी तरह चला सकती है। 1 लाख से ज्यादा महिला की मासिक आय जस्टिस जैन ने कहा, यह याचिका कुछ और नहीं बल्कि पति के मांस नोचने जैसा है। इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि महिला पहले से ही अच्छा कमा रही है और रख-रखाव के लिए उनका कोई बच्चा भी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि महिला की हर महीने की आय 1 लाख से ज्यादा है। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि महिला को कोई मेंटिनेंस देने की जरूरत नहीं है। 18 फरवरी 2026 को फैमिली कोर्ट ने आदेश सुनाया था कि तलाक की प्रक्रिया पूरी होने तक महिला को कोई मेंटिनेंस नहीं दिया जाएगा। दंपती का विवाह 4 नवंबर 2022 को हुआ था। 2023 से ही वे दोनों अलग रह रहे हैं। पति ने ही कोर्ट में तलाक की याचिका फाइल की थी। पत्नी का कहना है कि जब तक तलाक पर फैसला नहीं आ जाता पति उसे मेंटिनेंस दे। याचिका में महिला ने स्वीकार किया था कि वह नौकरी करती है और साल में 20 लाख के करीब कमाती हैं। उन्होंने कहा कि उनके पति साल का 30 लाख से भी ज्यादा कमाते हैं। इसपर फैमिली कोर्ट ने भी कहा था कि महिला की आय पर्याप्त है। उनका कोई बच्चा भी नहीं है और इसलिए अलग से कोई मुआवजा नहीं बनता है। मामला जब हाई कोर्ट पहुंचा तो महिला ने कहा कि अब परिस्थितियां बदल गई हैं और उसकी आय साल की 14 लाख ही रह गई है। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर इसको भी सही मान लिया जाए तो भी उसकी आय पर्याप्त है। वह महीने का लगभग 1.25 लाख रुपये कमाती है। ऐसे में वह आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट का फैसला एकदम सही है। कोर्ट ने कहा कि मेंटिनेंस तब बनता है जब कि पत्नी पति पर पूरी तरह से आश्रित हो या फिर उनका कोई बच्चा हो जिसके रखरखाव पर खर्च होना हो।

नरवाई में आग से 1016 जगह प्रभावित, 19 किसानों पर जुर्माना, 852 मामले चिह्नित

भोपाल  नरवाई जलाने वालों की सैटेलाइट से हो रही मॉनीटरिंग में पिछले एक माह में 1016 प्रकरण सामने आए हैं। इनमें से औसतन 15% मामूली आग को हटाते हुए 852 किसानों को चिह्नित किया। नरवाई जलाने वाले 19 किसानों पर प्रशासन ने 57 हजार का जुर्माना भी लगाया है। सैटेलाइट रिपोर्ट की पुष्टि के बाद 852 नरवाई जलाने के मामले में 19 किसानों पर कार्रवाई के बाद शेष पर भी कार्रवाई की तैयारी है। 22 किसानों को एसडीएम स्तर से नोटिस जारी हो चुके हैं। वहीं 133 किसानों के पंचनामे तैयार हैं। नोटिस देकर 2500 से 15 हजार रु. जुर्माने की कार्रवाई होगी। कार्रवाई गलत : मामले में किसानों ने विरोध भी किया था। भाकिसं के प्रांत महामंत्री भारतसिंह बैस ने आरोप लगाया सरकार नरवाई नष्ट करने के उपकरण उपलब्ध कराने के बजाय कार्रवाई कर रही है। यह गलत है। उप संचालक कृषि यूएस तोमर ने बताया सैटेलाइट रिपोर्ट पर कार्रवाई हो रही है। सबसे ज्यादा खाचरौद में 45 पंचनामा, महिदपुर में एक भी नहीं- सैटेलाइट रिपोर्ट के बाद विभागीय स्तर पर 133 पंचनामा में सबसे ज्यादा खाचरौद ब्लॉक में 45 पंचनामे बने हैं, जबकि महिदपुर में एक भी नहीं बना। उज्जैन में 38, तराना में 35, घट्टिया में 10 और बड़नगर में 5 पंचनामा बनाकर टीम ने एसडीएम कार्यालय पहुंचा दिए हैं। यहां से सभी को नोटिस जारी होंगे।

दिसम्बर 2026 तक फेस रिकग्निशन से होगा राशन वितरण, बोले खाद्य मंत्री राजपूत

दिसम्बर 2026 तक होगा फेस रिकग्निशन के माध्यम से राशन वितरण : खाद्य मंत्री राजपूत भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि पात्र परिवारों को उचित मूल्य दुकानों से फेस रिकग्निशन के माध्यम से राशन वितरण की योजना है। इसे दिसम्बर, 2026 तक प्रदेश में लागू किया जाएगा। मंत्री राजपूत ने बताया है कि माह मार्च, 2026 में 1 करोड़ 24 लाख 34 हजार परिवारों को 2 लाख 72 हजार मीट्रिक टन खा‌द्यान्न का वितरण किया जा चुका है। शेष रहे परिवारों को 15 अप्रैल तक राशन का वितरण किया जाएगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों को बायोमेट्रिक सत्यापन के आधार पर राशन का वितरण नियमित रूप से किया जा रहा है। परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा उचित मूल्य दुकानों पर जाकर पीओएस मशीन पर बायोमेट्रिक सत्यापन कर राशन वितरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। वृद्ध/दिव्यांगजन के बायोमेट्रिक सत्यापन विफल होने पर ऐसे हितग्राहियों को उनके आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर OTP भेजकर राशन का वितरण किया जाता है। शारीरिक रूप से अक्षम हितग्राही जो उचित मूल्य दुकान पर जाकर राशन प्राप्त नहीं कर सकते हैं, ऐसे लगभग 44 हजार 671 परिवार नामिनी के माध्यम से राशन लेने के लिये नामित किये गये हैं। पात्र परिवार द्वारा वन नेशन वन राशनकार्ड के तहत देश/प्रदेश की किसी भी उचित मूल्य दुकान से राशन प्राप्त किया जा सकता है। मध्यप्रदेश के 36 हजार 486 परिवारों द्वारा अन्य राज्यों में तथा अन्य राज्यों के 7,252 परिवारों द्वारा मध्यप्रदेश में प्रति माह राशन प्राप्त किया गया है। अंतर जिला पोर्टेबिलिटी के तहत 18 लाख 55 हजार 554 परिवारों द्वारा अन्य जिले/अन्य दुकान से राशन प्राप्त किया गया है। इस प्रकार उचित मूल्य दुकान से संलग्न पात्र परिवारों को अपनी दुकान से राशन लेने की बाध्यता न होकर अपनी पसंद एवं नज़दीक की दुकान से राशन लेने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सभी पात्र परिवारों को सुविधाजनक तरीके से राशन वितरण किया जा रहा है।  

पेट्रोलियम पदार्थों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित, बोले खाद्य मंत्री राजपूत

पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध : खाद्य मंत्री राजपूत 2904 स्थानों पर हुई जाँच, 4369 गैस सिलेण्डर किये गये जब्त भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्त संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिये निरंतर कार्यवाही की जा रही है, अभी तक 2904 स्थानों पर जांच की गई, 4369 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किये गए तथा 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रदेश के 751 रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की जांच कराई गई है। इसमें 1 प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रदेश के समस्त जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को सतत् रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध है। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भण्डार है, देश एवं प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की निरंतर सप्लाई हो सके एवं सप्लाई में कोई रुकावट न आए। मध्यप्रदेश और पूरे देश में एलपीजी (LPG) पेट्रोल, डीजल, पीएनजी एवं सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खाद्य मंत्री राजपूत ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित 70% सीमा के अधीन संस्थाओं एवं प्रतिष्ठानों को तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार सप्लाई निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं। यह भी ध्यान रखा जाये कि सड़क पर कारोबार कर रहे छोटे व्यवसायी (स्ट्रीट वेण्डर) को भी उक्त अनुसार कमर्शियल सिलेण्डर प्रदाय किये जायें। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय (Extended Hours) तक काम कर रहे हैं। प्रदेश के जिलों में स्थित बॉटलिंग प्लांट तथा वितरकों के पास उपलब्धता एवं प्रदाय की सतत् रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही माइग्रेन्ट लेबर, छात्रों आदि के लिए खाना पकाने के लिये 05kg के सिलेण्डेर ऑयल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वह वैकल्पिक साधनों, जैसे इंडक्शतन,सोलर कुकर, बायो गैस, गोबर धन तथा स्वससहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ का उपयोग करें। वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग को उनके यहां रजिस्‍टर्ड 44 कम्‍प्रेस्‍ड बायोगैस (सीबीजी) प्रोजेक्‍ट को चालू करने के निर्देश दिये गये हैं। इसी प्रकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 44 जिलों में 136 बायोगैस प्‍लांट संचालित होना बताया गया है। इन बायोगैस प्‍लांटों को क्रियाशील करने के निर्देश भी दिये गये हैं। रसोई गैस की स्थिति रसोई गैस का प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के विरूद्ध एलपीजी सिलेण्डर का प्रदाय निरंतर रूप से किया जा रहा है। साथ ही कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार आवंटन प्रतिशत के आधार पर कमर्शियल गैस सिलेण्डरों की सप्लाई सतत् रूप से की जा रही है। घरेलू एवं कॉमर्शियल की सप्लाई में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। घरेलू एवं कॉमर्शियल सिलेण्डर की सप्लाई एवं वितरण सामान्य है। पीएनजी गैस सीजीडी संस्थाओं तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रतिदिन समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिन घरों में पाईपलाईन की अधोसंरचना उपलब्ध है, एवं सप्लाई प्राप्तज नहीं कर रहे है, ऐसे 1.5 लाख घरों को आगामी 03 माह में पीएनजी से कनेक्ट करने के लिये निर्देशित किया गया। इस हेतु सभी सीजीडी संस्था एवं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कैम्प लगायें, जिसमें जिला प्रशासन, खाद्य विभाग नगर निगम/नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी संस्थाओं के जिला अधिका‍री उपस्थित रहें। ऐसे सभी घरों एवं व्यवसाईयों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराई जाये। अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन स्थानों पर पूर्व से पीएनजी की पाइप लाईन है, सर्वप्रथम उन्हें प्राथमिकता से कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइन लाईन डालकर कनेक्श‍न का कार्य भी साथ-साथ किया जाए। सीजीडी संस्थाओं द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होंने जिला कलेक्टर्स के माध्यम से आवश्यक मैन पॉवर प्राप्त करने की कार्यवाही कर ली है तथा आगामी माहों में लक्ष्य् के अनुसार नये पीएनजी कनेक्शनन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशनुसार जिन स्थानों से पीएनजी की पाइन लाईन गई है, उसके आस पास के घरेलू एवं कमर्शियल उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन प्राप्त कर लें क्योंकि पीएनजी कनेक्शन प्राप्त न करने की स्थिति में आगामी 03 माह में एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। समस्त सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरूद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शरन की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य शासन द्वारा पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिए सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन किये जाने के 24 घंटे के अंदर पाइपलाइन बिछाने की ROU स्वी्कृतियां जारी की जा रही हैं। अभी तक प्राप्त सभी स्वीकृतियां जारी की जा चुकी है तथा कोई भी आवेदन शेष नहीं है। गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थाओं/सुधार ग़ृ़हों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्यं प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी, आदि में जहां से आस-पास पाईपलाईन बिछी हुई है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शेन प्रदाय करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां आस-पास पाईपलाईन गई है, उन क्षेत्रों की औद्योगिक इकाईयों की पहचान की जाकर पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश सीजीडी संस्थाओं को दिये गये हैं।  

सहारा इंडिया की 75 लंबित शिकायतें, 4 साल बाद CID करेगी खुलासा

भोपाल   4 साल बाद जागी उम्मीद की किरण, अब CID खोलेगी दबी हुई फाइलों के राज। अपनी गाढ़ी कमाई के लिए दर-दर भटक रहे लाखों परिवारों को मिली बड़ी राहत। बरसों का इंतज़ार, आंखों में आंसू और अपनी ही मेहनत की कमाई को वापस पाने की जद्दोजहद… सहारा इंडिया में पैसा निवेश करने वाले लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों की यह कहानी अब एक नया मोड़ लेने वाली है। पुलिस मुख्यालय में पिछले चार सालों से धूल फांक रही शिकायतों की फाइलें अब फिर से खुल गई हैं। क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने इस महा-घोटाले की कमान अपने हाथों में ले ली है।। ​​सहारा इंडिया का यह संकट सिर्फ कागजों पर दर्ज आंकड़ा नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के सपनों के टूटने की दास्तां है।     ​फंसा हुआ पैसा: ₹6,689 करोड़ (मध्य प्रदेश के 9.66 लाख निवेशकों का)।     ​अब तक वापसी: ऊंट के मुंह में जीरे के समान, केवल ₹355 करोड़।     ​बड़ा गैप: 9.66 लाख निवेशकों में से केवल 1.55 लाख के आवेदन ही अब तक प्रक्रिया में आ पाए हैं। ​2. CID का 'एक्शन प्लान' और रिफंड की नई उम्मीद ​CID की शुरुआती जांच में टीकमगढ़, विदिशा, अशोकनगर, गुना, सागर और मैहर जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी सामने आई है।     ​पोर्टल से जुड़ाव: CID अब उन निवेशकों की पहचान कर रही है जिन्होंने अभी तक 'सहारा रिफंड पोर्टल' पर आवेदन नहीं किया है।     ​घर-घर दस्तक: विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी पीड़ित छूट न जाए, ताकि रिफंड की प्रक्रिया को गति दी जा सके। ​3. EOW की रडार पर 'जमीन का खेल' ​सहारा समूह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) सहारा की 312 एकड़ जमीन के संदिग्ध सौदों की पड़ताल कर रहा है। आरोप है कि पैसे को सेबी-सहारा के संयुक्त खाते में जमा करने के बजाय अन्य कंपनियों में 'डायवर्ट' कर दिया गया। ​4. अन्य चिटफंड कंपनियां भी निशाने पर ​केवल सहारा ही नहीं, बल्कि केएमजे, परिवार डेयरी और सक्षम जैसी अन्य चिटफंड कंपनियां भी अब जांच के घेरे में हैं। इन कंपनियों ने भी दोगुना मुनाफा और रियल एस्टेट का झांसा देकर लोगों को करोड़ों का चूना लगाया है। पुलिस की चेतावनी:  ​ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पैसा लौटाने की प्रक्रिया भले ही जारी हो, लेकिन एमपी में अब भी 90% निवेशक खाली हाथ हैं। CID की यह सक्रियता उन बुजुर्गों और परिवारों के लिए एक नई उम्मीद है जिन्होंने अपनी बेटियों की शादी या बुढ़ापे के सहारे के लिए पाई-पाई जोड़कर सहारा में जमा की थी।

गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में वन विहार बनेगा अंतर्राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र

वन विहार हो रहा है गिद्ध संरक्षण के अंतर्राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय समन्वय से घायल गिद्ध को मिली नई उड़ान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पर्यावरण, वन एवं वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बना हुआ है। वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। गिद्ध संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में लगभग 2 वर्ष आयु की एक मादा सिनेरेयस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) को रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में उसके प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक छोड़ा गया। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान एवं जू स्थित वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (वीसीबीसी) आज वैज्ञानिक गिद्ध संरक्षण का एक उत्कृष्ट केंद्र बनकर उभरा है, जहाँ रेस्क्यू, पुनर्वास, टैगिंग, पुनर्स्थापन और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी का समन्वित मॉडल विकसित किया गया है। गिद्ध 22 जनवरी 2026 को शाजापुर जिले के सुसनेर रेंज के ग्राम परसूलिया से घायल अवस्था में रेस्क्यू किया गया था। वन विहार में विशेषज्ञों द्वारा क्वारंटाइन केंद्र में इसका उपचार किया गया तथा 9 फरवरी 2026 को इसे वीसीबीसी में स्थानांतरित कर वैज्ञानिक पद्धति से पुनर्वास किया गया। वीसीबीसी में गिद्ध पर व्यापक वैज्ञानिक प्रोटोकॉल्स के साथ उपचार किया गया, जिसमें मेटल रिंग एवं माइक्रोचिप द्वारा पहचान, क्लिनिकल, व्यवहारिक एवं मॉर्फोमेट्रिक परीक्षण, उन्नत हेमेटोलॉजिकल एवं बायोकेमिकल जांच तथा निरंतर पशु-चिकित्सकीय निगरानी शामिल रही। पैर की चोट से घायल यह गिद्ध पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद ‘फिट फॉर रिलीज’ घोषित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में नव एवं वन्य-जीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जाने की नीति के अंतर्गत 25 मार्च 2026 को इस गिद्ध पर जीपीएस–जीएसएम टेलीमेट्री डिवाइस लगाया गया, जिससे इसकी रीयल-टाइम निगरानी संभव हो सकी। यह कार्य डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया एवं बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) के सहयोग से किया गया। रिहाई के बाद निगरानी में पाया गया कि यह गिद्ध राजस्थान होते हुए अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार कर 6 अप्रैल 2026 तक पाकिस्तान पहुँच गया। सिग्नल 7 अप्रैल को प्राप्त नहीं हुए तो डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया ने तत्परता दिखाते हुए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएफ-पाकिस्तान से संपर्क स्थापित किया। पाकिस्तान वन विभाग एवं डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएफ-पाकिस्तान के सहयोग से इस गिद्ध को खानेवाल जिले में स्थानीय निवासियों से सुरक्षित बरामद किया गया। गिद्ध 7 अप्रैल 2026 को खानेवाल और मुल्तान क्षेत्रों में आए भीषण ओलावृष्टि तूफान के कारण उड़ान भरने में असमर्थ हो गई और जमीन पर पाई गई। वन्यजीव अधिकारियों ने इसे रेस्क्यू कर प्राथमिक उपचार दिया गया। डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएफ-पाकिस्तान की देखरेख में इसे स्थानीय वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में स्थानांतरित किया गया। गिद्ध को हल्की चोटें आई थीं और अब वह स्वस्थ हो रहा है। वन विहार, डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के माध्यम से डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएफ-पाकिस्तान के साथ लगातार संपर्क में है और गिद्ध के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। पूर्ण स्वस्थ होने के बाद इसे पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। यह घटना प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, वैज्ञानिक निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की महत्ता को रेखांकित करती है। वन विभाग के वीसीबीसी ने वर्ष 2025 में भी एक घायल यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध को उपचार, टैगिंग के बाद स्वस्थ बनाकर 29 मार्च 2025 को हलाली डैम में छोड़ा था। यह गिद्ध 4300 किलोमीटर से अधिक की यात्रा कर कजाकिस्तान तक पहुँचा और बाद में भारत लौट आया। इस अध्ययन से प्रवासी मार्गों एवं संरक्षण चुनौतियों पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 23 फरवरी 2026 को चार लॉन्ग-बिल्ड गिद्ध एवं एक सिनेरेयस गिद्ध सहित कुल पाँच गिद्धों का सफल पुनर्वास, टैगिंग और पुनर्स्थापन किया गया। इस पहल से वन विहार गिद्ध संरक्षण के अंतर्राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। यहाँ विज्ञान, पशु-चिकित्सकीय विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक का समन्वित उपयोग किया जा रहा है।