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घायलों के इलाज में कलेक्टर और एसपी ने बढ़ाई मुस्तैदी

घायलों के बेहतर उपचार हेतु कलेक्टर–एसपी मुस्तैद मृतकों के परिजनों से संपर्क एवं सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी स्वास्थ्य मंत्री भी निरंतर जिला प्रशासन के संपर्क में रायपुर  सक्ति जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता प्लांट में बॉयलर फटने से हुए भीषण हादसे के बाद जिला प्रशासन त्वरित रूप से सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय घटना एवं घायलों के उपचार को लेकर कलेक्टर श्री अमृत विकास टोपनो तथा पुलिस अधीक्षक  प्रफुल्ल ठाकुर से लगातार संपर्क में हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल भी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और कलेक्टर के साथ समन्वय बनाए हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर, एसपी तथा प्रशासन की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया गया। घायलों को प्राथमिकता के साथ रायगढ़ के फोर्टीस हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज एवं अपेक्स अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार हेतु रायपुर के कालड़ा अस्पताल रेफर किया गया। प्रशासन द्वारा घटनास्थल को बैरिकेड कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। कलेक्टर  टोपनो ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। पोस्टमार्टम उपरांत पार्थिव देह को उनके गृहग्राम तक एम्बुलेंस के माध्यम से भेजने और तात्कालिक सहायता राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। हादसे में घायल अथवा प्रभावित श्रमिकों को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक बिना उपस्थिति के वेतन देने पर भी सहमति बनाई गई है। कलेक्टर ने बताया कि मुआवजा राशि को लेकर देर रात तक चर्चा कर सहमति स्थापित की गई है। घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं तथा जांच टीम जल्द ही घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। रेस्क्यू कार्य में एसडीआरएफ की टीम भी सक्रिय है। मुख्यमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। इसी प्रकार, प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों हेतु 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की गई है। पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल ठाकुर ने जानकारी दी कि इस हादसे में कुल 36 श्रमिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 17 की मृत्यु हो चुकी है तथा 19 घायल हैं, जिनका उपचार जारी है।  कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि वे प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग, तथा घायलों को 15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। घायलों को पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन जारी रहेगा और परामर्श (काउंसलिंग) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मृतकों के नाम हादसे में मृतकों में छत्तीसगढ़ के 5, बिहार के 2, झारखंड के 3, पश्चिम बंगाल के 5 तथा उत्तर प्रदेश के 2 मजदूर शामिल हैं। मृतकों के नाम इस प्रकार हैं– रितेश कुमार (सोनबर्शा, भागलपुर, बिहार), अमृत लाल पटेल (मंझापारा, डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़), थंडा राम लहरे (मालखरौदा, सक्ती, छत्तीसगढ़), तरुण कुमार ओझा (सिंदरी, धनबाद, झारखंड), आकिब खान (दरभंगा, बिहार), सुसांत जना (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल), अब्दुल करीम (झारखंड), उधव सिंह यादव (रायगढ़, छत्तीसगढ़), शेख सैफुद्दीन (हल्दिया, पश्चिम बंगाल), पप्पू कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश), अशोक परहिया (पलामू, झारखंड), मनस गिरी (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल), बृजेश कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश), रामेश्वर महिलांगे (जांजगीर–चांपा, छत्तीसगढ़), कार्तिक महतो (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल), नदीम अंसारी (सक्ती, छत्तीसगढ़), शिबनाथ मुर्मू (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल)।

सरिता विहार में बड़ा एक्शन,मुठभेड़ के बाद 6 अपराधी दबोचे गए

दिल्ली साउथ-ईस्ट दिल्ली के सरिता विहार इलाके में बीती रात पुलिस और बदमाशों के बीच एकनाउंटर हुआ। दोनों ओर से 6 राउंड गोलियां चलीं। हालांकि गोली किसी को नहीं लगी। इसके बाद पुलिस ने 6 बदमाशों को पकड़ा। ये सभी बांग्लादेशी हैं। जो यहां डकैती की वारदात करते थे। खबर लिखे जाने तक आरोपियों से पूछताछ की जा रही थी। पुलिस सूत्र ने बताया कि क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन किडनैपिंग सेल टीम को सूचना मिली थी कि सरिता विहार इलाके में कुछ बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम उन्हें पकड़ने पहुंची थी। टीम ने मौके पर घेराबंदी कर बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की तो उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी। 6 बांग्लादेशी बदमाशों को दबोचा बदमाशों की ओर से कुल तीन राउंड फायर किए गए। आत्मरक्षा और अपराधियों को काबू करने के लिए पुलिस टीम ने भी जवाबी कार्रवाई में तीन राउंड गोलियां चलाईं। गनीमत रही कि इस गोलाबारी में पुलिस टीम का कोई भी सदस्य या आरोपी घायल नहीं हुआ। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी छह बांग्लादेशी बदमाशों को दबोच लिया। बड़ी संभावित वारदात को टली तलाशी के दौरान बदमाशों के पास से तीन देसी कट्टे, 1 देसी 12 बोर की बंदूक, पांच कारतूस और एक बटनदार चाकू बरामद हुआ। पकड़े गए सभी आरोपी मूल रूप से बांग्लादेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि ये लोग कब से दिल्ली में रह रहे थे और इनके तार किन-किन वारदातों से जुड़े हैं। साथ ही, इनके अवैध रूप से सीमा पार करने और स्थानीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि सफल ऑपरेशन ने इलाके में एक बड़ी संभावित वारदात को टाल दिया है।  

गूगल का बड़ा अपडेट: अब आपकी ऐप्स से जुड़कर जवाब देगा AI

गूगल ने इस साल की शुरुआत में सर्चिंग को बेहतर बनाने के लिए पर्सनल इंटेलीजेंस फीचर को लॉन्च किया था. साल की शुरुआत में इसको अमेरिका में लॉन्च किया था और अब इसको भारत में लॉन्च कर दिया गया है. Gemini के लिए पर्सनल इंटेलिजेंस फीचर की मदद से यूजर्स को बेहतर सर्चिंग एक्सपीरियंस मिलेगा. ये लेटेस्ट फीचर गूगल के ऐप्स जैसे जीमेल, गूगल फोटोज, यूट्यूब और गूगल सर्च से जानकारी को सुरक्षित तरीके से जोड़ता है, जिसके बाद यूजर्स की पसंद के आधार पर जवाब देता है. उदाहरण के तौर पर समझें तो आप जयपुर घूमने का प्लान बनाते हैं और ट्रिप को लेकर सर्च करते हैं. इसके बाद पर्सनल इंटेलिजेंस फीचर जीमेल पर रिसीव टिकट और होटल की डिटेल्स को लेगा, जिसके बाद वह यूट्यूब पर देखे वीडियो के आधार पर घूमने की सलाह देगा. साथ लगने वाले समय को भी बताएगा. दो कैपिबिलिटीज पर काम करता है पर्सनल इंटेलिजेंस फीचर असल में दो कैपिबिलिटीज पर काम करता है. इसमें एक कॉम्प्लैक्स और अलग-अलग सोर्स से आने वाली को समझना है. दूसरा कनेक्टेड ऐप्स से खास जानकारी निकालना है.  यह सिस्टम टेक्स्ट, फोटो और वीडियो डेटा को मिलाकर AI ज्यादा सटीक जवाब देने की कोशिश करता है. डेटा प्राइवेसी का रखा है ध्यान Google का दावा है कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. वैसे तो इस फीचर बंद करके रखा जाता है, जिसे यूजर्स को खुद मैनुअली जाकर ऑन करना होता है. इसमें यूजर्स को पूरा कंट्रोल मिलता है, जिसमें यूजर्स तय कर सकते हैं कि कौन-कौन से ऐप्स से डेटा ले सकते हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह सिस्टम थर्ड पार्टी ऐप्स के पास जाता नहीं है. यहां सोर्स को एकदम ट्रांस्परेंट रखा है, जहां AI बता सकता है कि जवाब किस स्रोत से आया है. मॉडल ट्रेनिंग कैसे होती है गूगल ने साफ कर दिया है कि जेमिनाई सीधे यूजर के जीमेल या फोटोज के डेटा पर ट्रेन नहीं होगा. ये ट्रेनिंग लिमिटेड डेटा पर होगी, जिसमें प्रॉम्प्ट और AI के जवाब पर होती है. बताते चलें कि मौजूदा वर्जन अभी बीटा फेज में है, जिसमें कुछ लिमिटेशन मौजूद हैं. भारत में यह फीचर अभी सिर्फ गूगल एआई प्लस, प्रो और अल्ट्रा सब्सक्राइबर के लिए रोलआउट हो रहा है. जल्द ही फ्री वर्जन यूजर्स के लिए भी यह उपलब्ध होगा. यह वेब और स्मार्टफोन पर काम करेगा. AI पर्सनालाइज को कैसे करें ऑन गूगल का पर्सनल इंटीलेंज फीचर को ऑन करना बहुत ही सिंपल है. एलिजिबल यूजर्स को जेमिनाई ऐप्स को ओपन करना होगा, फिर सेटिंग्स में जाना होगा. इसके बाद पर्सनल इंटेलीजेंस पर क्लिक करें, जिसके बाद कनेक्टेड ऐप्स को चुनना होगा.

श्यामसर गांव में ऐतिहासिक मायरा, चार भाइयों ने बहन को दिया करोड़ों का उपहार

 नागौर राजस्थान में नागौर जिले के श्यामसर गांव में भाई-बहन के रिश्ते ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे मारवाड़ ही नहीं, बल्कि राजस्थान भर में चर्चा की लहर पैदा कर दी है. यहां चार भाइयों ने अपनी बहन के लिए ऐसा मायरा भरा, जो अब इतिहास बन गया है. यह मायरा सिर्फ धन-दौलत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और संस्कारों का अनोखा संगम बनकर सामने आया है. इतिहास रच गया मायरा श्यामसर निवासी सुरजाराम सियाग की बेटी रामी देवी के परिवार में शादी का अवसर था. उनके बच्चों के विवाह समारोह में मायरे की रस्म के दौरान उनके चार भाइयों- गंगाराम, शिवलाल, खीयाराम और श्रवणराम ने मिलकर दिल खोलकर मायरा भरा. 21 लाख 51 हजार रुपये नगद, 25 बीघा खेती योग्य जमीन,7 बरी सोना, 21 बरी चांदी, 51 हजार रुपये टीका-  कुल मिलाकर यह मायरा 1 करोड़ 51 लाख रुपये का रहा, जिसने इस परंपरा को एक नई ऊंचाई दे दी. 1 करोड़ 51 लाख का उपहार स्थानीय लोगों के अनुसार, 'इतना बड़ा मायरा पहले कभी नहीं देखा गया. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह आयोजन केवल आर्थिक संपन्नता नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है. यह घटना यह भी दिखाती है कि जहां कई जगह मायरा केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, वहीं श्यामसर के इन भाइयों ने इसे फिर से भावनाओं और जिम्मेदारी का उत्सव बना दिया. पूरा इलाका इस अनोखे मायरे की चर्चा कर रहा है. आस-पास के गांवों से लोग इस आयोजन को देखने और इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं. सोशल स्तर पर भी यह खबर तेजी से फैल रही है और लोग इसे राजस्थानी परंपरा का स्वर्णिम उदाहरण बता रहे हैं. परंपरा और आधुनिकता का संगम राजस्थान में मायरा केवल रस्म नहीं, बल्कि भाई द्वारा बहन के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान का प्रतीक माना जाता है. श्यामसर की इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक समय में भी परंपराएं जीवित हैं, बस उन्हें निभाने का जज्बा होना चाहिए. क्या श्यामसर का यह मायरा आने वाले समय में नई परंपरा बनेगा? या फिर यह केवल एक अनोखी मिसाल बनकर रह जाएगा? श्यामसर का यह मायरा केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है.

छोटे बच्चों का अंतिम संस्कार दफनाकर क्यों किया जाता है? जानें धार्मिक कारण

क्या आपने कभी सोचा है कि हिंदू धर्म में छोटे बच्चों का अंतिम संस्कार जलाकर नहीं, बल्कि दफनाकर क्यों किया जाता है? हिंदू धर्म में आमतौर पर मृत्यु के बाद अग्नि संस्कार को सबसे पवित्र माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि अग्नि शरीर को पंचतत्वों में मिलाकर आत्मा को उसके बंधनों से मुक्त करती है. लेकिन जब बात छोटे बच्चों या अविवाहित बच्चों की आती है, तो यह परंपरा बदल जाती है. इसका मुख्य कारण बच्चों की निर्मलता और निष्कपट स्वभाव माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, छोटे बच्चों ने अभी तक कोई ऐसे कर्म नहीं किए होते हैं, जिनके कारण उन्हें जन्म-मरण के बंधन में फंसना पड़े. उनकी आत्मा पहले से ही शुद्ध और मुक्त होती है. इसलिए उन्हें अग्नि से शुद्ध करने की जरूरत नहीं मानी जाती है. नहीं होता है बच्चों का अग्नि संस्कार गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस बच्चे के दूध के दांत नहीं निकले हों या जो बहुत छोटा हो, उसका दाह संस्कार नहीं किया जाता है. कई मान्यताओं में 2 से 5 साल तक के बच्चों को दफनाने की परंपरा बताई गई है. ऐसा माना जाता है कि इस उम्र तक बच्चे में 'मैं' और 'मेरा' का भाव विकसित नहीं होता है. आध्यात्मिक दृष्टि से भी कहा जाता है कि मनुष्य के तीन शरीर होते हैं- स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर. बड़े लोगों में ये तीनों आपस में मजबूत रूप से जुड़े होते हैं, जिन्हें अलग करने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है. लेकिन बच्चों में यह संबंध बहुत हल्का और सरल होता है, इसलिए उनकी आत्मा आसानी से शरीर छोड़ देती है. क्या है वैज्ञानिक कारण? वैज्ञानिक रूप से भी देखा जाए तो छोटे बच्चों का शरीर बहुत कोमल होता है. उनके सिर का ऊपरी हिस्सा (जिसे ब्रह्मरंध्र कहा जाता है) पूरी तरह बंद नहीं होता है, जिससे प्राण आसानी से बाहर निकल जाते हैं. इसलिए कपाल क्रिया जैसी प्रक्रिया की भी जरूरत नहीं पड़ती. प्रकृति से जुड़ा है रहस्य हिंदू धर्म में शरीर को पंचतत्व मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, से बना माना गया है. बड़े व्यक्ति के शरीर को अग्नि के माध्यम से इन तत्वों में मिलाया जाता है, लेकिन बच्चे का शरीर अभी प्रकृति के सबसे करीब माना जाता है. इसलिए, उसे सीधे मिट्टी को सौंप देना अधिक स्वाभाविक और शांतिपूर्ण माना जाता है. एक और कारण भी है कि छोटे बच्चे की मृत्यु परिवार के लिए बहुत दुखद होती है. ऐसे में दफनाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांत होती है और यह एहसास देती है कि बच्चा धरती मां की गोद में सुरक्षित है.

सूर्यकुमार यादव की फॉर्म पर सवाल, कप्तानी पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली भारतीय टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव के लिए आगामी कुछ महीने उनके करियर की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं। हालांकि उनकी कप्तानी में भारत ने इसी साल टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया लेकिन बल्ले के साथ उनकी हालिया फॉर्म ने टीम मैनेजमेंट और बीसीसीआई की चिंता बढ़ा दी है। टूर्नामेंट में 242 रन बनाने वाले सूर्या ने अमेरिका के खिलाफ 84 रनों की नाबाद पारी से शुरुआत तो धमाकेदार की थी लेकिन इसके बाद नॉकआउट और बड़े मुकाबलों में उनके बल्ले से रन निकलना बंद हो गए। नहीं चल रहा सूर्या का बल्ला दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसी बड़ी टीमों के खिलाफ उनका फ्लॉप शो अब चर्चा का विषय बन गया है। सूर्या की यह खराब फॉर्म आईपीएल 2026 में भी जारी है जहां मुंबई इंडियंस के लिए चार मैचों में वह केवल 106 रन ही बना सके हैं। इस गिरावट को देखते हुए अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या 35 वर्षीय सूर्यकुमार 2028 के टी20 वर्ल्ड कप और लॉस एंजिल्स ओलंपिक में टीम का नेतृत्व करने के लिए सही विकल्प हैं। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ आगामी सीरीज सूर्या के लिए अग्निपरीक्षा की तरह होगी। गौतम गंभीर ने भी की मांग इसी बीच कोच गौतम गंभीर अब अपने कार्यकाल को विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। जुलाई 2024 में वनडे वर्ल्ड कप 2027 तक के लिए नियुक्त हुए गंभीर अब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप 2028 तक टीम के साथ बने रहना चाहते हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार दो आईसीसी खिताब जीतने वाले पहले कोच बनने का गौरव हासिल करने के बाद गंभीर अब 2028 के मेगा इवेंट तक अनुबंध बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। सूर्या को ही चाहते हैं कप्तान कप्तानी के मोर्चे पर गंभीर ने एक बार फिर सूर्यकुमार यादव पर अपना भरोसा जताया है और वह अब भी टी20 फॉर्मेट में उन्हें ही पहली पसंद मानते हैं। हालांकि अजीत अगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा क्योंकि 2028 के ओलंपिक और टी20 वर्ल्ड कप तक सूर्या की उम्र 38 वर्ष के करीब होगी। बीसीसीआई के सूत्र ने क्या कहा? बीसीसीआई के एक सूत्र ने पीटीआई से बातचीत में स्पष्ट कहा, 'जाहिर तौर पर सूर्या अभी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। लेकिन एक बल्लेबाज के तौर पर उन्हें अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखनी होगी। वह यूके दौरे पर कप्तानी करेंगे लेकिन उसके बाद 2028 तक के रोडमैप पर चर्चा पूरी तरह से उनके निजी प्रदर्शन पर आधारित हो सकती है।'

चलती कार में अर्धनग्न स्टंट का वीडियो वायरल, पुलिस ने की कार्रवाई

हापुड़ हापुड़ पुलिस ने दिल्ली-लखनऊ हाईवे NH-9 पर चलती कार की सनरूफ से बाहर निकलकर अर्धनग्न हालत में स्टंट करने वाले एक युवक के खिलाफ 21,500 रुपये का ऑनलाइन चालान काटकर कार्रवाई की है. गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र में युवक ने तेज रफ्तार कार में गाने बजाकर हंगामा किया, जिसका वीडियो पीछे चल रहे राहगीर ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. यातायात पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेकर तत्काल एमवी एक्ट के अंतर्गत गाड़ी का चालान किया. चलती कार की सनरूफ से किया स्टंट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि नेशनल हाईवे-9 पर एक कार तेजी से दौड़ रही है. इसी दौरान एक युवक कार की सनरूफ से आधा बाहर निकलकर खतरनाक तरीके से स्टंट कर रहा है. कार के भीतर तेज आवाज में गाने बज रहे थे और युवक लगातार हंगामा कर रहा था. राहगीरों द्वारा बनाए गए इस वीडियो के इंटरनेट पर फैलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया और गाड़ी के नंबर के आधार पर कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने सिखाया सबक, काटा भारी चालान वीडियो का संज्ञान लेते हुए हापुड़ यातायात पुलिस ने इसे यातायात नियमों का गंभीर उल्लंघन माना. पुलिस ने बिना देरी किए एमवी एक्ट के तहत संबंधित वाहन का कुल 21,500 रुपये का ऑनलाइन चालान काट दिया. पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे स्टंटबाजों को कड़ा संदेश देना है जो सड़क पर अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं. पुलिस अब वायरल वीडियो के आधार पर मामले की आगे की जांच कर रही है. यातायात पुलिस की जनता से अपील हापुड़ के यातायात निरीक्षक नरेश कुमार ने इस घटना के बाद जिलेवासियों से विशेष अपील की है. उन्होंने कहा कि लोग यातायात नियमों के अनुरूप ही अपने वाहन का प्रयोग करें और ऐसी कोई हरकत न करें जिससे किसी की जान को खतरा हो. पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई भी चालक नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर विधिक कार्यवाही की जाएगी.

2026 में आएगा अधिकमास, जानें कब से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास

 कई सालों में एक बार हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. साल 2026 में भी ऐसा ही खास साल आने वाला है. इस महीने को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. यह समय त्योहारों से ज्यादा पूजा, साधना और आत्मचिंतन के लिए माना जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार, हिंदू कैलेंडर चंद्रमा के हिसाब से चलता है, जो सूर्य के साल से करीब 11 दिन छोटा होता है. इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर 3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है. 2026 में अधिकमास कब है? द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा. इस बार यह ज्येष्ठ महीने में पड़ रहा है, जिसकी वजह साल 2026 में 1 महीना ज्यादा बढ़ गया है. यानी यह साल 13 महीने को होगा. एक साल में दो ज्येष्ठ महीने विक्रम संवत 2083 में एक खास बात यह भी होगी कि दो ज्येष्ठ मास पड़ेंगे. एक होगा सामान्य ज्येष्ठ मास और दूसरा होगा अधिक ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम) मास. अधिकमास के कारण ज्येष्ठ महीना लगभग 58-59 दिनों तक चलेगा और दोनों महीने कुछ समय के लिए आपस में मिलेंगे. इस बार अधिक ज्येष्ठ मास की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा. वहीं, सामान्य ज्येष्ठ मास की शुरुआत 22 मई 2026 से होगी और समापन 29 जून 2026 को होगी. इसी वजह से यह साल पंचांग और खगोलीय दृष्टि से बहुत खास माना जा रहा है. अधिकमास में क्या करें? – दान-पुण्य करें- अधिकमास में गरीबों को भोजन, कपड़े या जरूरत की चीजें दान करना बहुत शुभ माना जाता है. – दीपदान करें- हर दिन या खास दिनों पर दीपक जलाने से मानसिक शांति मिलती है. – मंत्र जाप करें- 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना शुभ होता है. – धार्मिक ग्रंथ सुनें या पढ़ें- इस महीने में श्रीमद्भागवत कथा सुनना या पढ़ना लाभकारी माना जाता है. – पवित्र स्नान करें- गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है. अधिकमास में क्या न करें? अधिकमास में किसी नए काम की शुरुआत न करें. शादी या सगाई जैसे मांगलिक कार्य टालें. गृह प्रवेश या जमीन-घर से जुड़े बड़े फैसले न लें. मुंडन या जनेऊ जैसे संस्कार न करें. बड़े निवेश या लेन-देन से बचें. व्रत की शुरुआत या उद्यापन न करें.

लखनऊ समेत पूरे यूपी में पारा चढ़ा, मौसम विभाग ने दी और गर्मी की चेतावनी

लखनऊ  यूपी में पड़ रही गर्मी अब अपने पूरे तेवर दिखाने लगी है। अभी अप्रैल का महीना आधा ही बीता है और तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में कुछ शहरों का पारा 40 डिग्री सेल्सियस और कुछ का इसके भी पार पहुंच गया है। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल इस चुभती गर्मी से किसी तरह की राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। आने वाले अगले कुछ दिनों में ये गर्मी और सितम ढा सकती है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को यूपी के पांच जिले ऐसे रहे, जिनमें तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रिकॉर्ड किया गया। इनमें 42.6 डिग्री सेल्सियस के साथ बांदा जिला यूपी में सबसे ज्यादा गर्म रहा। इसके साथ ही झांसी में 40.5 डिग्री, प्रयागराज में 40.4 डिग्री, वाराणसी में 40.1 डिग्री और सुल्तानपुर में 40 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं, आगरा में 39.8 डिग्री और यूपी की राजधानी लखनऊ में भी मंगलवार को पारा 38.1 डिग्री तक पहुंच गया। दिनभर चली गर्म हवाओं ने लोगों को एहसास करा दिया कि इस बार यूपी में गर्मी जमकर पसीने छुड़ाएगी। मौसम विभाग के सीनियर वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने बताया कि अगले चार से पांच दिनों में इस गर्मी भरे मौसम में किसी तरह के बदलाव के संकेत नहीं है। फिलहाल कोई एक्टिव वेदर सिस्टम बनता हुआ नहीं दिख रहा है। यूपी में चलती रहेंगी पछुआ हवाएं मोहम्मद दानिश ने बताया कि अभी अगले चार-पांच दिन शुष्क पछुआ हवाएं चलती रहेंगी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित प्रायद्वीपीय इलाकों के ऊपर एक एंटीसाइक्लोन बना हुआ है, जो मध्य भारत की तरफ बढ़ रहा है। ऐसे में अगले एक हफ्ते के भीतर, यूपी के अलग-अलग जिलों में तापमान 3 से 4 डिग्री तक बढ़ सकता है। यूपी में अगले 7 दिनों की मौसम रिपोर्ट अनुमान है कि 18 अप्रैल के बाद यूपी के अलग-अलग जिलों में पारा तेजी से ऊपर चढ़ेगा। मौसम विभाग की तरफ से बुधवार को जारी की गई 7 दिनों की वेदर रिपोर्ट में भी बताया गया है कि 15 अप्रैल से 21 अप्रैल तक पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मौसम शुष्क ही बना रहेगा। हालांकि, मौसम विभाग की इस रिपोर्ट में किसी तरह की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।  

कुष्ठ रोग पर अलर्ट: पंजाब में 352 सक्रिय मामले, विकलांगता के संकेतों से स्वास्थ्य विभाग सतर्क

चंडीगढ़. राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक राज्य में कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के संक्रमण को पूरी तरह रोकने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, लेकिन अब तक केवल 23 में से 8 जिले ही इंटरप्शन आफ ट्रांसमिशन का दर्जा हासिल कर पाए हैं। यह स्थिति जहां एक ओर प्रगति को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर अभी लंबा रास्ता तय किए जाने की जरूरत भी बताती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में इस समय कुल 352 कुष्ठ रोगी हैं। इनमें 341 मल्टीबैसिलरी और 11 पासीबैसिलरी केस शामिल हैं। इसके अलावा 4 ग्रेड- 2 विकलांगता के मामले सामने आए हैं और 5 बच्चे भी मल्टीबैसिलरी श्रेणी में पाए गए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि राज्य के कुछ इलाकों में संक्रमण अभी भी जारी है और समय पर पहचान नहीं हो पा रही। जिन 8 जिलों ने संक्रमण की कड़ी तोड़ने में सफलता हासिल की है, उनमें फाजिल्का, फिरोजपुर, कपूरथला, मानसा, मुक्तसर, पठानकोट, रूपनगर (रोपड़) और संगरूर शामिल हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कुष्ठ रोग उन्मूलन केवल मामलों की संख्या घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना, विकलांगता को रोकना और समाज में फैले कलंक को खत्म करना भी उतना ही जरूरी है। ग्रेड-2 विकलांगता और बच्चों में पाए गए मामलों को देर से पहचान और जागरूकता की कमी का संकेत माना जा रहा है। हाल ही में आयोजित सिविल सर्जनों की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि 2027 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए साल में दो बार चलने वाले केस डिटेक्शन अभियानों को और तेज किया जाए। साथ ही संवेदनशील जिलों के लिए अलग रणनीति बनाई जाए, ग्रेड-2 मामलों का अनिवार्य आडिट किया जाए और संदिग्ध मरीजों की जांच को स्वास्थ्य केंद्रों पर मजबूत किया जाए। राज्य को यह भी सलाह दी गई है कि कुष्ठ रोग को नोटिफाएबल डिजीज घोषित किया जाए ताकि हर केस की रिपोर्टिंग अनिवार्य हो सके। निजी डाक्टरों को भी निर्देश दिए जाएंगे कि वे सभी मामलों की जानकारी जिला कुष्ठ रोग अधिकारियों को दें। आशा वर्करों की ट्रेनिंग मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है ताकि वे शुरुआती लक्षण जैसे अंगों में कमजोरी या चलने-फिरने में दिक्कत को पहचान सकें। स्वास्थ्य विभाग ने लुधियाना, मोहाली, जालंधर और अमृतसर जैसे हाई-प्रायोरिटी जिलों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। यहां संक्रमण की पहचान कर उसकी श्रृंखला तोड़ने पर फोकस रहेगा। पंजाब में हर साल फरवरी और अक्टूबर में लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन चलाया जाता है, जिसमें 14 दिन तक घर-घर जाकर मरीजों की पहचान की जाती है। इसके अलावा स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान भी हर साल 30 अक्टूबर से शुरू किया जाता है, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े और बीमारी को समय रहते रोका जा सके।