samacharsecretary.com

बरखा बिष्ट का एग्जिट कंफर्म, शो से खत्म हुआ वैम्प ट्रैक

टेलीविजन सीरियल्स के दर्शकों के लिए एक अच्छी खबर है और एक बुरी. 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में शांति निकेतन की शांति फिर से लौटने वाली है. नोइना अपने बुरे मकसद में कामयाब होती उससे पहले तुलसी ने उसके झूठे कैंसर का पर्दाफाश कर दिया है. नोइना का सच सामने आने के बाद शो से बरखा बिष्ट की विदाई हो जाएगी. यानि शो से एक वैम्प का किरदार खत्म कर दिया जाएगा. हो सकता है कि आने वाले समय में इसका असर शो की टीआरपी पर पड़े. नोइना का सच आया सामने नोइना कैंसर होने का बहाना करके मिहिर से शादी करने जा रही थी, लेकिन तुलसी ने ऐसे नहीं होने दिया. नोइना और मिहिर का गठबंधन जुड़ने से पहले ही तुलसी ने उसका सच सबके सामने ला दिया. तुलसी ने खुलासा किया कि असल में नोइना को अल्सर है, कैंसर नहीं. इस खुलासे के बाद शो से नोइना का ट्रैक खत्म हो जाएगा. बरखा बिष्ठ ने कंफर्म किया है कि शो से उनका ट्रैक खत्म हो चुका है. अपना ट्रैक खत्म होने के बाद बरखा ने इंस्टाग्राम पर लंबा नोट लिखा. उन्होंने लिखा- हमने इस शो से हिस्ट्री बनाई है और मैं सबको इतने प्यार और भरोसे के लिए काफी शुक्रिया कहती हूं. बिष्ट ने ये भी बताया कि लोग नोइना से नफरत करते-करते प्यार करने लगे थे. इससे ज्यादा कुछ और चाहिए भी नहीं था. बरखा ने टीम को धन्यवाद दिया. वो लिखती हैं कि टीम को बहुत-बहुत थैंक्यू, जो हर कदम पर मेरे साथ खड़ी रही. बरखा ने नोइना के रोल के लिए एकता कपूर को भी धन्यवाद कहा. वो लिखती हैं कि थैंक्यू नोइना देने के लिए और मुझ पर भरोसा करने के लिए. अभी के लिए साइन ऑफ मिलते हैं फिर कभी. बरखा का एग्जिट कंफर्म होते ही दर्शकों ने उनके स्ट्रॉन्ग रोल की तारीफ की, कहा कि किरदार भले ही नफरत का पात्र था, लेकिन परफॉर्मेंस कमाल की थी. एक यूजर ने लिखा, नोइना से नफरत कितनी भी हो, लेकिन इग्नोर नहीं कर सकते. क्या कमाल का कैरेक्टर प्ले किया. शो में तुम्हारी कमी खलेगी. ये भी देखना होगा कि नोइना का कैरेक्टर खत्म होने के बाद शो की टीआरपी पर कितना फर्क पड़ता है. क्योंकि अब तक नोइना और मिहिर की शादी की ट्रैक की वजह दर्शक शो से जुड़े हुए दिख रहे थे. दूसरी बात ये भी है कि शो में जब तक विलेन परेशानियां ना खड़ी करे, तब उसे देखने में भी मजा नहीं आता. कहना गलत नहीं होगा कि नोइना का कैरेक्टर जाते-जाते शो का चार्म ले गया.

सुरक्षित मातृत्व की दिशा में बड़ा कदम: बस्तर में शुरू हुआ ‘रेड कॉल सेंटर’, हर डिलीवरी होगी मॉनिटर

जगदलपुर. बस्तर जिले में सुरक्षित मातृत्व की अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन और यूनिसेफ़ ने एक अत्यंत संवेदनशील और अनूठी पहल की शुरुआत की है. सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर जिला कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में महारानी अस्पताल में ‘रेड (रिचिंग एवरी डिलिवरी) कॉल सेंटर’ का विधिवत शुभारंभ किया गया. इस गौरवपूर्ण क्षण को और भी विशेष बनाते हुए कलेक्टर ने स्वयं पहल की और अस्पताल में उपस्थित एक नवजात शिशु की माता को सादर आमंत्रित कर उनके हाथों से ही इस केंद्र का उद्घाटन करवाया. यह हृदयस्पर्शी दृश्य इस सशक्त संदेश का प्रतीक बना कि मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी समस्त सरकारी योजनाएं वास्तव में माताओं के समर्पण के लिए हैं और उनकी सक्रिय सहभागिता ही इन प्रयासों को सफल बनाएगी. इस नई व्यवस्था के तहत संचालित “हरिक मांय, हरिक पिला”(खुश मां, खुश बच्चा) पहल के माध्यम से अब बस्तर की हर गर्भवती महिला तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है, जैसा कि इसके नाम ‘रेड’ यानी ‘रिचिंग एवरी डिलिवरी’ से स्पष्ट होता है. महारानी अस्पताल परिसर में स्थित इस हाई-टेक कॉल सेंटर के जरिए जिले की उन महिलाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिनकी गर्भावस्था 7 से 9 माह के बीच है और जो उच्च जोखिम की श्रेणी में आती हैं. सेंटर के प्रतिनिधि सप्ताह में एक से दो बार इन महिलाओं से सीधे फोन पर संपर्क साधेंगे, जिसका उद्देश्य उन्हें सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव के फायदों के प्रति जागरूक करना और उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ समन्वय स्थापित करने में हरसंभव सहायता प्रदान करना है. प्रशासन की यह दूरगामी योजना केवल प्रसव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह जन्म के उपरांत भी सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगी. प्रसव के बाद के शुरुआती 30 दिनों तक माँ और नवजात शिशु की सेहत की बारीकी से निगरानी की जाएगी. इस दौरान कॉल सेंटर के माध्यम से नियमित फॉलो-अप लिया जाएगा ताकि प्रसव पश्चात होने वाली किसी भी संभावित स्वास्थ्य संबंधी जटिलता का समय रहते पता लगाया जा सके और त्वरित चिकित्सकीय समाधान सुनिश्चित किया जा सके. स्वास्थ्य और तकनीक के इस अनूठे संगम से बस्तर प्रशासन का विजन प्रत्येक प्रसव को सुरक्षित बनाना और जिले में स्वस्थ मातृ-शिशु परंपरा को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है.

सम्राट चौधरी ने संभाली कमान, एनडीए सरकार में बड़ा बदलाव

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शपथ ग्रहण करने के बाद कहा, “मैं आज से ही बिहार के लिए काम करना शुरू कर दूंगा। बिहार में सिर्फ मोदी-नीतीश मॉडल ही चलेगा।” बता दें कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की कमान आज से भाजपा के हाथों में है और सम्राट चौधरी ने सीएम पद की शपथ ले ली है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सम्राट चौधरी ने कामकाज संभाल लिया है। पटना स्थित लोकभवन के बाहर सम्राट चौधरी के सामने बुलडोजर बाबा जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। लेकिन सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि बिहार में सिर्फ और सिर्फ मोदी-नीतीश मॉडल ही चलेगा। नीतीश का सपना पूरा करेंगे सम्राट केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, "जैसी सरकार  नीतीश कुमार ने 20 साल तक चलाई, हम समझते हैं कि यदि कोई कमी रही भी होगी तो उसे पूरा करके सम्राट चौधरी बिहार को आगे ले जाएंगे। जो जीतन मांझी आज है, उसे नीतीश कुमार ने ही बनाया है। अगर 2014 में उन्होंने मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनाया होता तो हमारी इतनी चर्चा नहीं होती। सबसे बड़ी बात कि एक दलित के बच्चे को उन्होंने पद दिया तो स्वाभाविक है कि मेरी आंखों से आंसू कैसे न आते। वहीं, बीजेपी नेता दिलीप जायसवाल ने कहा, "बहुत अच्छा लग रहा है। आज सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। जिस तरह से हमारे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकसित बिहार का सपना देखा है, सम्राट चौधरी उनके मार्गदर्शन में बिहार को विकसित बिहार की ओर ले जाएंगे।" पहली बार बिहार में भाजपा का सीएम बना बिहार में एनडीए की सरकार है, लेकिन सत्ता में शामिल भाजपा ने पहली बार राज्य में अपना सीएम बनाया है। विधानसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद सीएम नीतीश कुमार को ही बनाया गया, लेकिन बदले हालात में उनके राज्यसभा जाने के बाद अब भाजपा को सरकार का नेतृत्व करने का मौका मिला है। सम्राट चौधरी नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम के पद पर थे। अब डिप्टी सीएम के तौर पर जदयू नेता विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र कुमार यादव ने शपथ ली है। सम्राट चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पसंदीदा रहे हैं। नीतीश कुमार पहले से ही कहते रहे थे कि अब बिहार इन्हें ही संभालना है।  

गर्मी में कितना पानी पीना चाहिए? उम्र के हिसाब से जानें सही मात्रा

गर्मी का मौसम आते ही शरीर में पानी की जरूरत कई गुना बढ़ जाती है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण शरीर से पसीने के रूप में पानी तेजी से निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अगर समय पर और सही मात्रा में पानी नहीं पिया जाए, तो इसका असर सीधे सेहत पर पड़ता है। दरअसल, कई लोग अपनी उम्र और शरीर की जरूरत के अनुसार पानी नहीं पीते, जिससे थकान, चक्कर, सिरदर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी उम्र, वजन और दिनभर की गतिविधियों के अनुसार पानी का सेवन करें। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि किस उम्र के लोगों को कितना पानी पीना चाहिए और क्यों यह आपकी सेहत के लिए बेहद जरूरी है।  बच्चे (5–12 साल) इस उम्र में बच्चों का शरीर तेजी से एक्टिव रहता है और वे ज्यादा खेलकूद करते हैं, जिससे उनके शरीर से पसीने के रूप में पानी जल्दी निकलता है। इसलिए बच्चों को रोजाना 1 से 1.5 लीटर पानी देना जरूरी होता है। अगर बच्चा बाहर खेलता है या गर्मी ज्यादा है, तो पानी की मात्रा और बढ़ानी चाहिए। ध्यान रखें कि बच्चों को जूस या कोल्ड ड्रिंक के बजाय सादा पानी या प्राकृतिक पेय जैसे नारियल पानी देना ज्यादा फायदेमंद होता है। किशोर (13–18 साल) किशोरावस्था में शरीर का विकास तेजी से होता है, इसलिए पानी की जरूरत भी बढ़ जाती है। इस उम्र में 1.5 से 2.5 लीटर पानी पीना जरूरी है। स्कूल, स्पोर्ट्स और फिजिकल एक्टिविटी के कारण शरीर में पानी की कमी जल्दी हो सकती है। अगर पानी की कमी हो जाए तो थकान, ध्यान में कमी और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वयस्क (18–50 साल) वयस्कों के लिए रोजाना 2.5 से 3.5 लीटर पानी पीना जरूरी माना जाता है। जो लोग धूप में काम करते हैं या ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करते हैं, उन्हें इससे भी ज्यादा पानी की जरूरत हो सकती है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है, पाचन तंत्र सही काम करता है और शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं। बुजुर्ग (50+ साल) बढ़ती उम्र में प्यास लगने की क्षमता कम हो जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी की जरूरत कम हो जाती है। बुजुर्गों को रोजाना कम से कम 2 से 2.5 लीटर पानी पीना चाहिए। पानी की कमी से उन्हें चक्कर, कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए उन्हें समय-समय पर पानी पीने की आदत डालनी चाहिए, भले ही प्यास न लगे।

राघव चड्ढा को मिली Z कैटेगरी सुरक्षा, पंजाब ने छीनी, केंद्र ने दी

चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पंजाब सरकार द्वारा दी गई जेड प्लस (Z+) कैटेगरी की सुरक्षा वापस ले ली गई। इस खबर के सामने आने के कुछ ही देर बाद केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें सुरक्षा मुहैया करा दी गई। मौजूदा खतरे की आशंका के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा उन्हें जेड (Z) श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। यह सुरक्षा दिल्ली और पंजाब, दोनों जगहों पर उपलब्ध होगी। उनकी सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों को तैनात किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जब तक औपचारिकता पूरी नहीं कर ली जाती है, तब तक दिल्ली पुलिस को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। आपको बता दें कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने पिछले सप्ताह ही राघव चड्ढा का सुरक्षा घेरा हटा लिया था। पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद उन्हें राज्य सरकार की ओर से सबसे उच्च स्तर की Z+ सुरक्षा प्रदान की गई थी। राघव चड्ढा और 'आप' नेतृत्व के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया। इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चड्ढा ने कहा था कि उन्हें "खामोश किया गया है, पराजित नहीं किया गया।" ‘आवाज उठाई, कीमत चुकाई’ आपको बता दें कि हाल ही में राघव चड्ढा ने इंस्टाग्राम पर ''आवाज उठाई, कीमत चुकाई'' शीर्षक वाला एक वीडियो शेयर किया था। यह वीडियो संसद में उनके द्वारा विभिन्न मुद्दे उठाते हुए दिखाने वाली कई 'क्लिप' का संकलन है। चड्ढा ने पोस्ट में कहा, ''पूरे सम्मान के साथ, मैं मेरे संसदीय प्रदर्शन पर सवाल उठाने वालों से यही कहूंगा कि मेरा काम ही बोलेगा।'' आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से दो अप्रैल को हटा दिया था। पार्टी ने उन पर आरोप लगाया है कि वह संसद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र के खिलाफ मुखर होकर बोलने से बचते रहे और इसके बजाय अपने प्रचार-प्रसार में लगे रहे। चड्ढा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए पार्टी के आरोपों को 'झूठ करार दिया और कहा कि वह संसद में लोगों के मुद्दे उठाने गए थे, हंगामा करने नहीं। राज्यसभा में 'आप' के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद से चड्ढा सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट साझा कर चुके हैं। इससे यह साफ संकेत गया है कि वह उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे।

पवन खेड़ा की बढ़ी मुश्किलें, SC ने अग्रिम जमानत पर लगाई रोक, तुषार मेहता ने दी अहम दलील

नई दिल्ली कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगता दिख रहा है. पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट में मिली जमानत के खिलाफ दायर असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मिली अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।  सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की बेंच के सामने असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीखे सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘अपराध असम में हुआ, मामला भी वहीं दर्ज है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट ने जमानत क्यों दी?’ उन्होंने यह भी पूछा कि पवन खेड़ा ने असम हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया।  तुषार मेहता ने कोर्ट से तेलंगाना हाईकोर्ट के 10 अप्रैल के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, जिसमें खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलें सुनने के बाद फिलहाल उस आदेश पर रोक लगा दी है।  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग की है, जिस पर अब अदालत विचार करेगी।  जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने इन बातों को सुनने के बाद यह माना कि कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से मामला असम की अदालत का ही बनता है. अब पवन खेड़ा के पास कोई और रास्ता नहीं बचा है, उन्हें राहत के लिए असम की कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ही पड़ेगा।  यह पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी के खिलाफ कुछ गंभीर बातें कही थीं. इसी को लेकर असम में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. अब मामला वापस वहीं पहुंच गया है जहां से शुरू हुआ था. आने वाले तीन हफ्ते पवन खेड़ा के लिए काफी भागदौड़ भरे हो सकते हैं क्योंकि उन्हें अब सुप्रीम कोर्ट को जवाब देने के साथ-साथ असम की कोर्ट में भी अपना पक्ष रखना होगा।  क्या है पूरा मामला? दरअसल, यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित मानहानिकारक टिप्पणियों से जुड़ा है. असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है, जिसमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।  तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को यह राहत इस आधार पर दी थी कि वे असम जाकर सक्षम अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें. सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी थी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का है और इसमें गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।  वहीं, असम सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट में ही इस याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया था और कहा था कि खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं, ऐसे में असम के बाहर राहत मांगने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।  यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील बन गया है. असम विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस और भाजपा के बीच इस मुद्दे पर तीखा टकराव देखने को मिला था. कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि भाजपा ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कार्रवाई को सही ठहराया।  अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई के बाद यह तय होगा कि पवन खेड़ा को मिली राहत बरकरार रहती है या नहीं, और क्या उन्हें असम हाईकोर्ट का रुख करना होगा। 

खेल नर्सरियों की संख्या में बढ़ोतरी, युवाओं का रुझान नए खेलों की ओर

 चंडीगढ़ हरियाणा लंबे समय से कुश्ती और कबड्डी खेल के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब प्रदेश में खेलों का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है और खिलाड़ियों की एक नई पौध तैयार हो रही है। नए सत्र 2026-27 के लिए खेल विभाग की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक खेलों के साथ-साथ फुटबॉल और वॉलीबाॅल का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इन खेलों की नर्सरियों की संख्या भी लगातार बढ़ाई जा रही है और युवा खिलाड़ियों का रुझान इनकी ओर साफ दिखाई दे रहा है। प्रत्येक नर्सरी में 25 खिलाड़ी खेलते हैं। प्रदेशभर में इस बार 1063 खेल नर्सरियां अलॉट की गई हैं, जो पिछले साल की 976 नर्सरियों से 87 ज्यादा हैं। लेकिन सरकार की ओर से कुल 2 हजार नर्सरियों के संचालित करवाने का लक्ष्य है। इन नर्सरियों के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही ट्रेनिंग दी जाएगी। अब भी कबड्डी 148 नर्सरियों के साथ टॉप पर है, लेकिन फुटबॉल (69) और वॉलीबाॅल (64) तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। कुश्ती की 74 नर्सरियां हैं। अन्य खेलों की बढ़ती संख्या बताती है कि युवाओं की पसंद और नजरिया अब बदल रहा है। फुटबॉल-वॉलीबाॅल के क्रेज बढ़ने के मुख्य वजह हरियाणा में फुटबॉल कोच हरविंदर सिंह के मुताबिक इस बदलाव के पीछे सबसे पहली वजह प्रदेश के स्कूल और कॉलेज स्तर पर इन खेलों को ज्यादा बढ़ावा मिलना है। गांवों में भी अब फुटबॉल और वॉलीबाॅल के मैदान आसानी से तैयार हो जाते हैं। इससे बच्चों की भागीदारी बढ़ी है। इसी तरह दूसरी वजह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के लिए तेजी से बढ़ते मौके भी है। फुटबॉल और वॉलीबाॅल में करियर के विकल्प बढ़ने से युवा इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया और टीवी पर बड़े टूर्नामेंट देखने से भी बच्चों में इन खेलों के प्रति उत्साह बढ़ा है। वहीं, तीसरी अहम वजह इन खेलों में कम खर्च और आसान संसाधन है, जहां कुश्ती के लिए अखाड़ा और विशेष व्यवस्था चाहिए, इसी तरह दूसरे खेलों में संसाधनों की व्यवस्था पर भारी खर्च है। वहीं फुटबॉल और वॉलीबाॅल कम संसाधनों में भी खेले जा सकते हैं। जिलों में भी दिखा नया ट्रेंड खेल नर्सरियों के आंकड़ों में भी यह बदलाव साफ नजर आता है। हिसार 119 नर्सरियों के साथ सबसे बड़ा स्पोर्ट्स हब बनकर उभरा है, जबकि जींद 108 के साथ दूसरे स्थान पर है। कैथल, भिवानी, करनाल और रोहतक जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नर्सरियां अलॉट की गई हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला अभी पीछे हैं, जबकि सबसे पीछे नूंह है। इन जिलों में इतनी नर्सरियां अलॉट हिसार –     119 जीद –        108 कैथल –        82 भिवानी –      67 करनाल –     75 रोहतक –     65 सोनीपत –     65 झज्जर –        28 यमुनानगर –   28 दादरी –         25 अंबाला –        22 पंचकूला –      18 नूंह –             12  

अजमेर में पानी सप्लाई बहाल, कई इलाकों को राहत

अजमेर अजमेर में बीसलपुर पाइपलाइन मरम्मत का काम पूरा हो गया. 30 घंटे का शटडाउन खत्‍म हो गया. कई इलाकों में सप्लाई बहाल हो गई. कल तक जलापूर्ति पूरी तरह पटरी पर आने की उम्मीद है. अब लोगों को पानी की समस्‍या नहीं होगी. पहले की तरह से पानी की सप्‍लाई शुरू हो जाएगी. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने बीसलपुर-अजमेर पेयजल परियोजना के अंतर्गत 30 घंटे का शटडाउन लिया था. 30 घंटे का शटडाउन अजमेर में 12 अप्रैल रात 12 बजे से 14 अप्रैल सुबह 6 बजे तक 30 घंटे पेयजल सप्लाई बंद थी. इस दौरान 1600 एमएम और 1500 एमएम पाइपलाइन पर जरूरी तकनीकी कार्य किए गए. इन इलाको में सप्लाई बाधित शटडाउन के कारण अजमेर शहर के साथ-साथ ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद, सरवाड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित रही. शहर के प्रमुख इलाकों में वैशाली नगर, पंचशील, आदर्श नगर, माकड़वाली रोड, धोलाभाटा, क्रिश्चियनगंज, केसरगंज, रामगंज, सिविल लाइंस, फॉयसागर रोड और दरगाह क्षेत्र सहित कई कॉलोनियों में पानी की सप्लाई बंद थी. लोगों को हुई परेशानी? 30 घंटे पानी की सप्लाई बंद रहने से नागरिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. घरों में पानी स्टोरेज सीमित होने से खाना बनाना, नहाना और साफ-सफाई जैसी दैनिक जरूरतें प्रभावित हुई. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ी. होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर भी इसका असर पड़ा.

मायावती का बयान: महिला आरक्षण बिल का BSP ने किया समर्थन, SC, ST और OBC को अलग से कोटा मिलना चाहिए

 लखनऊ  बसपा प्रमुख मायावती ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का स्वागत किया है. उन्होंने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसमें SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग से कोटा देने की मांग की. मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण के पक्ष में है।  मायावती ने कहा- "हमारी पार्टी देश की संसद, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित 33% आरक्षण का और इसे आगे बढ़ाने के लिए उठाए गए सही और उचित कदम का स्वागत करती है. हालांकि इसमें काफी देरी हुई है, लेकिन देरी के बावजूद, हमारी पार्टी इसका स्वागत करती है. यदि वास्तव में शोषित और हाशिए पर पड़ी महिलाओं के लिए, विशेष रूप से SC, ST और OBC समुदायों की उन महिलाओं के लिए, जिन्हें सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से लगातार हाशिए पर धकेला जा रहा है, अलग से आरक्षण प्रदान किया जाता है, तो यह उचित और ऐतिहासिक दोनों होगा।  बकौल मायावती- "जीवन के हर पहलू में महिलाओं को समानता और आत्म-सम्मान का अधिकार देने के साथ-साथ, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 'हिंदू कोड बिल' के माध्यम से उन्हें मजबूत कानूनी अधिकार देने का भी प्रयास किया था. तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अपने संकीर्ण जातिवाद से प्रभावित होकर इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और बाद में इसे टुकड़ों-टुकड़ों में पारित किया. इस प्रकार, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को OBCs के लिए आरक्षण की कमी और महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और बेहतरी के लिए कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में देश के पहले कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।  बसपा प्रमुख ने आगे कहा कि हमारी पार्टी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के वर्तमान केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करती है. हालांकि, हमारी पार्टी हमेशा से महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में रही है. हमारी पार्टी 33 प्रतिशत आरक्षण का भी स्वागत करती है। 

शिक्षा व्यवस्था में सुधार: हरियाणा के 14 हजार स्कूलों को मिले 200 करोड़, अब ड्यूल डेस्क पर बैठेंगे छात्र

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री नायब सिंह की ओर से बजट भाषण में बताई गई योजनाओं पर क्रियान्वयन आरंभ हो गया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों को टाटपट्टी की जगह बैठने के ड्यूल डेस्क उपलब्ध कराई जाएगी। योजना को सिरे चढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने शिक्षा विभाग के लिए 200 करोड़ की रकम स्वीकृत कर दी है। अक्टूबर माह में टेंडर प्रकिया पूरी कर एक नवंबर से प्रदेश के सभी जिलों के स्कूलों में ड्यूल डेस्क पहुंचनी आरंभ हो जाएंगी। सरकार ने तय कर दिया है कि दिसंबर माह में स्कूलों में कोई भी बच्चा टाटपट्टी पर नहीं बैठेगा यह शिक्षा विभाग जिम्मेदारी होगी। तीन लाख ड्यूल डेस्क खरीदने की तैयारी बता दें कि अभी प्रदेश के कई जिलों में ऐसे स्कूल काफी संख्या में हैं जिनमें बच्चे जमीन पर टाटपट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। हालांकि पहले भी कई जिलों ड्यूल डेस्क भेजी गई थी। लेकिन उनको खरीदने में घोटाला हुआ था। जिसे देखते हुए खरीद बंद कर दी गई थी। अब विभिन्न जिला के 14 हजार स्कूलों के लिए करीब तीन लाख ड्यूल डेस्क खरीदने की तैयारी है। सरकार खरीद प्रकिया को पूरी पारदर्शिता के साथ अपनाएगी। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने बताया कि अक्टूबर माह में टेंडर प्रकिया आरंभ कर तय एजेंसी नवंबर में स्कूलों में ड्यूल डेस्क भेजने का काम करेगी। ड्यूल डेस्क लोहे की बनी होंगी और ऐसी डिजाइन की ली जाएगी कि बच्चों को बैठकर पढ़ाई करने में कियी तरह की परेशानी नही हो।