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BSP क्वार्टर पर सख्ती: सरकारी अफसरों को हटाने के लिए मंत्रालय ने दिए निर्देश

भिलाई नगर. बीएसपी आवासों में, खासकर बड़े आवासों में केन्द्र और राज्य सरकार के बड़े अफसर लंबे समय से जमे हुए हैं। तत्संबंध में की गई शिकायतों को इस्पात मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। इस्पात मंत्रालय ने बीएसपी मैनेजमेंट से कहा है कि सरकारी अफसरों से आवास खाली कराने की कार्रवाई करें, कम्पनी आवास आवंटित करने की प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करें। ज्ञात हो कि सेक्टर 9, सेक्टर 10 सहित अन्य सेक्टरों के बीएसपी आवासों में केन्द्र और खासकर राज्य के सरकारी अफसर बड़ी संख्या में जमे हुए हैं। इनमें आईएएस और आईपीएस सहित अन्य अफसर शामिल हैं। सेक्टर 9 के बड़े आवास तो ज्यादातर सरकारी अफसरों के कब्जे में ही हैं। इनमें से कई अफसर वर्षों पूर्व रिटायर हो चुके हैं या कई का तबादला हो चुका है, बावजूद अपने रुतबे के बल पर आवासों में कब्जा जमाए में हुए हैं। बीएसपी आवासों सरकारी अफसरों के बड़ीसंख्या में कब्जा जमाये रखने की शिकायत केन्द्रीय इस्पात मंत्री, इस्पात सचिव पहुंची तक है। बीएसपी आफिस स एसोसिएशन ने तो बाकायदा उनके खिलाफ मुहिम ही छेड़ रखा है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी अफसरों ने बड़े आवासों में बड़ी संख्या में कब्जा जमा रखा है इसके चलते बीएसपी के अफसरों को बड़े आवास नहीं मिल रहे हैं। इस्पात मंत्रालय के दबाव के बाद बीएसपी मैनेजमेंट अब सरकारी अफसरों द्वारा कब्जा जमाकर रखे गए आवासों को खाली कराने की कार्रवाई की जा सकती है। मैनेजमेंट ऐसे अफसरों की सूची राज्य सरकार को भेजकर भी उनसे आवास खाली कराने का अनुरोध कर सकता है। असल में राज्य के कई बड़े अफसर बीएसपी के बड़े आवासों का इस्तेमाल फार्म हाउस की तरह कर रहे हैं। इन अफसरों के पास राजधानी में भी आवास आवंटित है और वे सप्ताहांत में बीएसपी आवासों में आकर मात्र एक दो दिनों के लिए आते हैं। यह आवास खाली होने पर बीएसपी के बड़े अफसरों को आवंटित किए जा सकेंगे। जरूरी मामलों को सेल बोर्ड में रखें इस्पात मंत्रालय ने बीएसपी आवासों में सरकारी अफसरों के कब्जा जमाए रखने की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। मंत्रालय की ओर से रिव्यू मीटिंग में राज्य और केन्द्र सरकार के अफसरों को कम्पनी आवास आवंटित करने की मौजदा प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करने कहा गया।

सीएम डॉ. मोहन का कांग्रेस पर कड़ा प्रहार: महिला सशक्तिकरण बिल न पास होने पर जनता को मिलेगा जवाब

भोपाल  लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है. इस पूरे घटनाक्रम पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए और इसे महिलाओं के अधिकारों के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे अहम मुद्दे पर राजनीतिक विरोध अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. इस बीच, सरकार को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और मामला अब देश की जनता, खासकर महिला मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है।  महिला आरक्षण बिल गिरने पर सीएम मोहन यादव का कांग्रेस पर हमला मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल के पारित न होने को लेकर कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि कांग्रेस की “महिला विरोधी मानसिकता” एक बार फिर उजागर हो गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विधेयक को संसद में गिरने देना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है. डॉ. यादव ने अपने बयान में कहा कि यह घटनाक्रम देश की माताओं और बहनों के अधिकारों और सम्मान के प्रति विपक्ष की असंवेदनशीलता को दिखाता है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे विषय पर राजनीति करना उचित नहीं है।  इस मुद्दे पर राजनीति उचित नहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखा कि यह घटनाक्रम देश की माताओं और बहनों के अधिकारों व सम्मान के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर इस तरह की राजनीति उचित नहीं है. उन्होंने लिखा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब अवश्य देगी।  “जनता सब देख रही है” : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी लिखा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी. उनके अनुसार, महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर किसी तरह की चालबाजी लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारा नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक जिम्मेदारी है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।  लोकसभा में गिरी महिला आरक्षण से जुड़ी संशोधन प्रक्रिया लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं दिला सकी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को बताया कि मत विभाजन के दौरान बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े. संविधान संशोधन के लिए आवश्यक बहुमत पूरे न होने के कारण यह विधेयक विचार के स्तर पर ही गिर गया. अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संशोधन विधेयक के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में हासिल नहीं हो सका।  अन्य विधेयकों पर भी नहीं बढ़ी कार्यवाही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में बताया कि महिला आरक्षण से जुड़े बिल के गिरने के बाद दो अन्य विधेयकों पर भी आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी. विपक्ष के विरोध के बाद संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर मत विभाजन के जरिए मतदान कराया गया, लेकिन सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रही।  अमित शाह का विपक्ष पर तीखा वार इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष, खासकर कांग्रेस और इंडिया महागठबंधन पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस ने जो प्रस्ताव रखा, वह एक सुनियोजित जाल है, जिससे महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू न होने दिया जाए।  अमित शाह ने कहा कि अगर विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में वोट नहीं देता है तो यह बिल गिर जाएगा, और देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता और इसके बावजूद इंडिया महागठबंधन तुष्टिकरण की राजनीति के तहत मुस्लिम आरक्षण की मांग कर रहा है।  सियासी संग्राम तेज, महिलाओं की निगाहें संसद पर महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. जहां सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की साजिश बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार पर दोष मढ़ रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर महिला सशक्तिकरण को लेकर दलों के रुख और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब यह मुद्दा संसद से बाहर जनता, खासकर देश की महिलाओं के बीच अहम राजनीतिक बहस बनता जा रहा है। 

सीएम योगी के निर्देश पर संभल में बड़ी कार्रवाई, दो गांवों से हटे कब्जे, लैंड बैंक में वृद्धि

सीएम योगी के निर्देश पर संभल में बड़ी कार्रवाई, दो गांवों में हटे कब्जे और लैंड बैंक में निरंतर वृद्धि ग्राम सभा की जमीन से हटे ईदगाह, इमामबाड़ा, मस्जिद-मदरसा संभल  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सार्वजनिक जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के अभियान को तेज करते हुए संभल जिला प्रशासन ने दो गांवों में बड़ी कार्रवाई की। आरक्षित श्रेणी की ग्राम सभा भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा और कहीं भी तनाव की स्थिति नहीं बनने दी गई। बिछौली में आदेश के बाद हटे निर्माण तहसील संभल के ग्राम विछोली में गाटा संख्या 1240 (खाद के गड्ढे हेतु आरक्षित) और गाटा संख्या 1242 (पशुचर भूमि) पर अवैध रूप से इमामबाड़ा और ईदगाह का निर्माण किया गया था। प्रकरण में विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए तहसीलदार न्यायालय ने 31 जनवरी 2026 को बेदखली का आदेश पारित किया था। आदेश के खिलाफ किसी भी स्तर पर अपील न होने पर प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर निर्माण हटवा दिया। बिछौली और मुबारकपुर बन्द में  1.1 हैक्टेयर जमीन खाली इसी क्रम में ग्राम मुबारकपुर बन्द में ग्राम सभा की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत पर जांच कराई गई। गाटा संख्या 623 और 630 पर मस्जिद और मदरसे का निर्माण पाया गया। प्रशासन ने पहले संबंधित पक्षों को स्वयं निर्माण हटाने का अवसर दिया, लेकिन संसाधनों के अभाव का हवाला देते हुए मुतवल्ली नुसरत अली व अन्य लोगों ने प्रशासन से मदद मांगी। इसके बाद शुक्रवार को प्रशासन की मौजूदगी में अवैध निर्माण हटवाया गया। ‘नियमों के तहत हुई कार्रवाई, अभियान रहेगा जारी’ जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने बताया कि पूरी कार्रवाई धारा 67,राजस्व अभिलेखों और न्यायालय के आदेश के आधार पर की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम सभा, पशुचर, खेल मैदान, खाद के गड्ढे और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पहले संबंधित पक्षों को पूरा अवसर दिया जाता है, इसके बाद ही कार्रवाई होती है। जिले में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और जहां भी अवैध कब्जा मिलेगा, उसे हटाया जाएगा। 3 महीने के टाइम बाउंड पीरियड में पूरी कार्रवाई और 30 दिन के अपील के समय को पूर्ण कर दिया जाता है।

वायुसेना विमान का गियर फेल, पुणे एयरपोर्ट पर हार्ड लैंडिंग; रनवे बंद

पुणे   देर रात भारतीय वायुसेना (IAF) के एक लड़ाकू विमान से जुड़ी घटना के बाद पुणे हवाई अड्डे का रनवे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। हालांकि घटना के करीब 11 घंटे बाद पुणे हवाई अड्डे का रनवे अब बहाल कर दिया गया है और परिचालन के लिए चालू घोषित कर दिया गया है। क्या हुआ था? हवाई अड्डे के अधिकारियों के अनुसार, यह घटना रात करीब 10:25 बजे हुई। लैंडिंग के दौरान एक लड़ाकू विमान का लैंडिंग गियर फेल हो गया, जिसकी वजह से विमान रनवे पर ही रुक गया और रनवे ब्लॉक हो गया। एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि विमान की हार्ड लैंडिंग हुई थी। IAF की पुष्टि भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि पुणे का रनवे वायुसेना के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण अस्थायी रूप से अनुपलब्ध है। चालक दल (एयरक्रू) सुरक्षित है और किसी भी नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। उड़ानों पर असर और यात्रियों की परेशानी इस घटना के कारण हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पुणे आने वाली कम से कम आठ उड़ानों को सूरत, गोवा, नवी मुंबई, चेन्नई और कोयंबटूर सहित अन्य हवाई अड्डों पर डायवर्ट किया गया। पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के अधिकारियों ने पहले बताया कि इस घटना के कारण इंडिगो, एअर इंडिया, स्पाइसजेट, अकासा और एअर इंडिया एक्सप्रेस समेत विभिन्न विमानन कंपनियों की कुल 91 उड़ानें प्रभावित हुईं। अब सब ठीक अब परिचालन फिर से शुरू हो गया है। वायुसेना ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'पुणे हवाईअड्डे का रनवे, जो भारतीय वायुसेना के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण अस्थायी रूप से अनुपलब्ध था, अब बहाल कर दिया गया है और परिचालन के लिए चालू घोषित कर दिया गया है। सभी आवश्यक सुरक्षा जांच और मंजूरियां पूरी कर ली गई हैं। उड़ान संचालन चरणबद्ध तरीके से फिर शुरू किया जा रहा है।' केंद्रीय मंत्री का बयान इससे पहले नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और रनवे के अस्थायी निलंबन की पुष्टि की। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा- राहत की बात यह है कि एयरक्रू सुरक्षित हैं और नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है। सभी एयरलाइंस को इसकी सूचना दे दी गई है, और रनवे को सामान्य रूप से चालू करने में लगभग 5 घंटे का समय लग सकता है। उन्होंने आगे कहा कि मैं जल्द से जल्द स्थिति को सुलझाने के लिए एयरपोर्ट निदेशक और वायुसेना के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं।

PMGSY फेज-04 का शिलान्यास: एमसीबी जिले को 56 सड़कों की ऐतिहासिक सौगात, गांवों तक पहुंचेगी विकास की रफ्तार

PMGSY फेज-04 का शिलान्यास: एमसीबी जिले को 56 सड़कों की ऐतिहासिक सौगात, गांवों तक पहुंचेगी विकास की रफ्तार मनेन्द्रगढ़/एमसीबी ग्रामीण विकास को नई गति देने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया, जब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) 2025-26 के तहत सड़कों के निर्माण कार्यों का शिलान्यास एवं भूमि पूजन किया गया। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय (SAGES) ऑडिटोरियम, मनेन्द्रगढ़ में आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में विकास कार्यों की औपचारिक शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहीं। 2,225 करोड़ की लागत से 774 सड़कों को मंजूरी राज्यभर में कुल 774 सड़कों को स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लंबाई 2,426.875 किलोमीटर है। इन परियोजनाओं के लिए 2,225.44 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में आवागमन सुगम होगा और विकास को नई दिशा मिलेगी। एमसीबी जिले को 56 सड़कों का बड़ा तोहफा मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के लिए यह योजना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। जिले में 56 सड़कों के निर्माण को मंजूरी मिली है, जिन पर 23,667.83 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इनकी कुल लंबाई 264.63 किलोमीटर होगी, जिससे सुदूर गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। विकासखंडवार सड़कों का विवरण भरतपुर: 1 सड़क (2.00 किमी) – 180 लाख रुपये मनेन्द्रगढ़: 32 सड़कें (144.57 किमी) – 13,013.88 लाख रुपये खड़गवां: 23 सड़कें (118.06 किमी) – 10,473.95 लाख रुपये गांवों की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल नई सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होगी। साथ ही किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री का संदेश: “सड़क ही गांवों के विकास की रीढ़” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने देश के दूरदराज गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “भारत गांवों का देश है और विकास की असली नींव गांवों में ही है। बिना सड़क के विकास की कल्पना अधूरी है।” साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योजना को नई गति मिलने की बात भी कही।

सम्राट चौधरी ने अपनाई योगी की राह, पहले बुलडोजर फिर टोपी, बिहार CM का बड़ा बयान

पटना बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक बार फिर अपने तेवरों को लेकर चर्चा में हैं. वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राह पर चल पड़े हैं. पहले उन्होंने प्रदेश में योगी मॉडल की तरह ही बुलडोजर एक्शन शुरू किया था. उसके बाद अब टोपी पहनने से इनकार कर दिया. दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान सम्राट चौधरी ने मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार कर दिया. टोपी पहनाने वाले शख्स को तुरंत रोक दिया. वाक्ये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।  मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद एनडीए के कई नेता सम्राट चौधरी से मिलने पहुंच रहे हैं. हाल ही में जनता दरबार के दौरान कई लोग उनसे मिलने पहुंचे. सम्राट से मुलाकात के दौरान लोगों ने अलग-अलग तरीके से उनका स्वागत किया. किसी ने फूल-माला पहनाई तो किसी ने शॉल ओढ़ाकर सम्मान दिया. इसी बीच मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधि ने उन्हें टोपी पहनाने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री ने टोपी पहनने से इनकार करते हुए उसे हाथ में ले लिया और गमछा ओढ़कर सम्मान स्वीकार किया. बाद में उन्होंने टोपी पीछे खड़े गार्ड को दे दी. वीडियो में दिखता है कि व्यक्ति बार-बार टोपी पहनाने की कोशिश करता है, लेकिन सम्राट चौधरी ने उसे नहीं पहना. हालांकि, उन्होंने उसी व्यक्ति का गमछा स्वीकार किया।  टोपी न पहनने में छिपा क्या सियासी संदेश मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के टोपी न पहनने पर कई कयास लगाए जा रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सम्राट की पॉलिटिक्स अक्सर हिंदुत्व और अपने लव-कुश (कुशवाहा) वोट बैंक को मजबूत करने पर केंद्रित रहती है. बीजेपी के कई बड़े नेता सार्वजनिक रूप से मुस्लिम टोपी पहनने से बचते दिखते हैं. इसे तुष्टिकरण की राजनीति के विरोध के रूप में देखा जाता है. मालूम हो कि, बीते दिनों नीतीश कुमार ने भी मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार किया था।  सीएम बनते ही एक्शन में सम्राट बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी एक्शन मोड में हैं. वह नीतीश कुमार की तरह ही जनता दरबार के जरिए लोगों से सीधे मुलाकात कर रहे हैं. उनकी समस्याएं भी सुन रहे हैं. शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचे और कई अहम फाइलों की समीक्षा की थी. उन्होंने प्रशासनिक कामकाज को गति देने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और मुख्य सचिव समेत सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली औपचारिक बैठक की थी। 

मेरिट लिस्ट ने उड़ाए होश: हरियाणा में EWS का कटऑफ जनरल से काफी ऊपर.

चंडीगढ़. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने पुलिस कॉन्स्टेबल के 5500 पदों के लिए चल रही भर्ती परीक्षा की कटऑफ लिस्ट जारी कर दी है। विशेष बात यह कि अनारक्षित वर्ग से आरक्षित वर्गों में कटऑफ ज्यादा है। पंचकूला में 20 अप्रैल से शुरू हो रहे शारीरिक माप परीक्षण (पीएमटी) के लिए आयोग ने शुक्रवार को प्रवेश पत्र जारी कर दिए, जिन्हें अधिकृत वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। निर्धारित पदों की तुलना में 15 गुणा अभ्यर्थियों को शार्टलिस्ट किया गया है। सामान्य ड्यूटी के पदों के लिए सबसे कम कटऑफ 52.17 अनारक्षित वर्ग में रहा, जबकि ईडब्ल्यूएस कोटे में यह सबसे ज्यादा 71.93 रहा। इसी तरह रेलवे पुलिस के पदों के लिए वंचित अनुसूचित वर्ग में कटऑफ 72.97 रहा है, जबकि अनारक्षित श्रेणी का कटऑफ 75.04 और ईडब्ल्यूएस में 81.31 रहा। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने इंटरनेट मीडिया पर पीएमटी के लिए लिंक जारी करते हुए कहा कि इसके माध्यम से युवा अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। साथ ही पीएमटी के लिए साइट प्लान साझा करते हुए आह्वान किया कि स्टेडियम में आने से पहले इसे ध्यानपूर्वक देखें और एंट्री गेट, बायोमेट्रिक प्वाइंट, पीएमटी हाल और एक्जिट रूट की पूरी जानकारी प्राप्त करें। साइट प्लान के अनुसार प्रवेश एवं बाहर निकलने के लिए लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। बायोमेट्रिक के लिए विशेष काउंटर बनाए गए हैं। बैग रखने सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जिन अभ्यर्थियों का सीईटी के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हुआ था, उनका बायोमेट्रिक सत्यापन गेट नंबर तीन पर किया जाएगा। यह रहा कटऑफ पुलिस कॉन्स्टेबल सामान्य ड्यूटी अनारक्षित – 52.17 ईडब्ल्यूएस – 71.93 बीसी-ए – 65.06 बीसी-बी – 69.90 ओएससी – 64.04 डीएससी – 57.85 रेलवे पुलिस कटऑफ अनारक्षित – 75.04 ईडब्ल्यूएस- 81.31 बीसी-ए- 78.23 बीसी-बी- 80.32 ओएससी – 76.08 डीएससी – 72.97

हाईकोर्ट का अहम निर्णय: हिरासत में लेना ही माना जाएगा गिरफ्तारी

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि किसी व्यक्ति को जैसे ही पुलिस या जांच एजेंसी उसके जाने की आजादी से रोक देती है, उसी क्षण से उसे गिरफ्तार माना जाएगा। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की 24 घंटे की संवैधानिक समय सीमा भी उसी पल से शुरू होती है, न कि उस समय से जब कागजों में गिरफ्तारी दर्ज की जाती है। यह मामला अमृतसर में ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी से जुड़ी जांच से सामने आया। याचिकाकर्ता को 31 अक्टूबर 2025 की रात देहरादून से करीब 11 बजे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अपने साथ रखा। हालांकि, उसकी औपचारिक गिरफ्तारी 1 नवंबर की रात 9 बजे दिखाई गई और अगले दिन दोपहर करीब 2 बजे उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। जस्टिस सुमित गोयल ने एनसीबी द्वारा हिरासत में रखे गए याची की रिहाई का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि संबंधित व्यक्ति को न्यायिक अनुमति के बिना 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया, जो संविधान के प्रविधानों का उल्लंघन है। अदालत ने उस प्रचलित व्यवस्था को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें एजेंसियां पूछताछ के लिए हिरासत या जांच के लिए रोककर रखना जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर औपचारिक गिरफ्तारी को टालती हैं। गिरफ्तारी एक तथ्यात्मक स्थिति है, जिसे शब्दों के सहारे बदला नहीं जा सकता। यदि किसी व्यक्ति की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है और वह अपनी इच्छा से कहीं जा नहीं सकता, तो वह गिरफ्तारी ही मानी जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी मेमो या पुलिस रिकार्ड में दर्ज समय अंतिम सत्य नहीं हो सकता। न्यायालय ने कहा कि यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया है, जिसे वास्तविक गिरफ्तारी के समय का निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता। साथ ही अदालत ने मजिस्ट्रेटों को भी सचेत किया कि वे केवल दस्तावेजों पर निर्भर न रहें, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए यह तय करें कि गिरफ्तारी कब हुई। अदालत ने यह भी माना कि गिरफ्तारी के सही समय का निर्धारण किसी तय फार्मूले से नहीं किया जा सकता। इसके लिए प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को देखना होगा जैसे व्यक्ति को रातभर थाने में रखा गया या नहीं, क्या उसे बाहर जाने की अनुमति थी, क्या वह स्वजन या मित्रों से मिल सकता था और क्या वह अपनी मर्जी से वहां से जा सकता था या नहीं।

स्कूलों की मनमानी पर लगाम: निजी संस्थानों की जांच करेगा पांच सदस्यीय पैनल

दुर्ग. जिले में संचालित निजी स्कूलों द्वारा मनमानी किए जाने का आरोप लगा है। जिला शिक्षा विभाग को विभिन्न माध्यमों से इसकी शिकायत प्राप्त हुई है। इसे संज्ञान में लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया है। आरोप में कहा गया है कि कई निजी स्कूलों द्वारा गणवेश में परिवर्तन, पाठ्य पुस्तक को एक ही दुकान से क्रय करने बाध्य करना, पाठ्य पुस्तक बदलना सहित मनमाने ढंग से फीस वृद्धि की गई है। इसे लेकर विभिन्न माध्यमों से प्राप्त निजी स्कूलों संबंधी शिकायतों पर जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग द्वारा कार्यवाही करते हुए सर्व नोडल प्राचार्यों, शासकीय हाईस्कूल / हायर सेकेण्डरी जिला दुर्ग को 7 अप्रैल 2026 को सभी अशासकीय विद्यालयों से प्रतिवेदन मांगा गया। प्रतिवेदन प्राप्त होने उपरांत शिकायतों का निराकरण करने समिति का गठन किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच दल में जे. पी. पाण्डेय, प्राचार्य, सेजेस पाहुंदा पाटन, राजेन्द्र चन्द्राकर, व्याख्याता, सेजेस बोरसी दुर्ग, सुनील कश्यप, व्याख्याता, शा.उ.मा.वि. कन्या भिलाई 03 पाटन, संदेश पाण्डेय, व्याख्याता, सेजेस मर्रा पाटन, सुमीत नायडु, सहायक ग्रेड 02, शा.क.उ.मा.वि. वैशालीनगर, भिलाई शामिल है। सर्व पालक निजी विद्यालय अपना साक्ष्य सहित बयान दर्ज कराने हेतु कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग में जांच समिति के 20 अप्रैल तक उपस्थित होने कहा गया है। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ बजरंग दल व जिला अध्यक्ष, भीम आर्मी भारत एकता मिशन छग को अपना पक्ष जांच समिति के समक्ष साक्ष्य सहित प्रस्तुत करने कहा गया है। इन्हें डीईओ कार्यालय में जांच समिति के समक्ष 18 अप्रैल को प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक उपस्थित होने कहा गया है।

सिंगरौली: बैंक में 15 करोड़ की डकैती, आरोपियों की तस्वीरें सामने आईं, DGP ने लिया हालात का जायजा

सिंगरौली  सिंगरौली में दिनदहाड़े बैंक डकैती की बड़ी वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हथियारों से लैश पांच बदमाश घुसे, फायरिंग की और करीब 15 करोड़ का सोना और 20 लाख रुपए कैश लेकर फरार हो गए। वारदात के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीजीपी खुद सिंगरौली पहुंचे और मामले की जांच की। बैंक मैनेजर को पीटा और फायरिंग से फैलाई दहशत  जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे पांच हथियारबंद बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में बैंक में घुसकर डकैती को अंजाम दिया। बदमाशों ने बैंक में घुसते ही कर्मचारियों और ग्राहकों पर बंदूक तान दी। विरोध करने पर बैंक मैनेजर से मारपीट की और फायरिंग कर दहशत फैला दी।  ग्राहकों के करीब 10 किलो सोना लूटा इसके बाद कुछ ही मिनटों में बदमाश बैंक के अंदर रखे लॉकर तक पहुंच गए और वहां गिरवी रखे ग्राहकों के करीब 9 से 10 किलो सोने को अपने कब्जे में ले लिया। इसके साथ ही 20 लाख रुपये कैश भी लूट लिया। बताया जा रहा है कि लूटा गया सोना ग्राहकों का था, जिसे बैंक ने गोल्ड लोन के तहत गिरवी रखा था। पूरा सोना एक ही लॉकर में रखा गया था। बदमाश अपने साथ पिट्ठू बैग और बड़ा कपड़े का थैला लेकर आए थे और उसी में सारा माल भरकर फरार हो गए।  मैनेजर से मारपीट, हवाई फायरिंग से मची दहशत बदमाशों ने बैंक पर कब्जा करते ही दहशत फैलाने के लिए आक्रामक रुख अपनाया. जब बैंक मैनेजर ने लुटेरों का विरोध करने की कोशिश की तो आरोपियों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की. पुलिस के अनुसार मैनेजर के सिर पर बंदूक की बट से वार किया गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए. इसके बाद बदमाशों ने बैंक के अंदर और बाहर हवाई फायरिंग भी की, जिससे मौके पर मौजूद लोग सहम गए और जान बचाने के लिए जमीन पर लेट गए।  लॉकर तोड़कर सोना‑कैश समेटा डकैत सीधे बैंक के लॉकर सेक्शन की ओर बढ़े. बताया जा रहा है कि बदमाश पूरी योजना के साथ आए थे. उनके पास पिट्ठू बैग और कपड़े के बड़े थैले थे. बदमाशों ने बैंक स्टाफ को धमकाकर लॉकर खुलवाए और उसमें रखे ग्राहकों के सोने-चांदी के जेवर निकाल लिए. यह सोना गोल्ड लोन के तहत ग्राहकों द्वारा गिरवी रखा गया था. इसके साथ ही बदमाशों ने कैश काउंटर से नकदी भी समेट ली।   बैंक में जान बचाते नजर आए लोग घटना के दौरान बैंक के अंदर अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपते नजर आए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पूरे इलाके की घेराबंदी की गई। आरोपियों की तस्वीरें सीसीटीवी में कैद हो गई हैं। पुलिस अलग-अलग टीम बनाकर आरोपियों की तलाश में जुट गई है।   देर रात डीजीपी भी मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री के निर्देश पर रात करीब 10 बजकर 45 मिनट पर डीजीपी कैलाश मकवाना सिंगरौली पहुंचे। इससे पहले रीवा रेंज के आईजी साकेत प्रसाद पांडे भी मौके पर पहुंचे। रीवा से फोरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।  पुलिस ने की पूरे जिले की घेराबंदी वारदात की खबर मिलते ही सिंगरौली एसपी मनीष खत्री दलबल के साथ खुद मौके पर पहुंचे। शहर के सभी एग्जिट पॉइंट्स को सील कर दिया गया है। बैंक और आसपास के रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। एसपी ने बताया कि करीब 14.50 लाख रुपए कल के रखे थे। बाकी आज का उस समय तक का कलेक्शन था। इसके अलावा सोना-चांदी था। गार्ड नहीं था, एक फायर किया एसपी के मुताबिक, घटना के समय यहां गार्ड नहीं था। बदमाशों ने एक फायर भी किया है। प्रत्यक्षदर्शियों और बैंक कर्मचारियों के बयान लिए जाएंगे। जांच में पता चला है कि एक शख्स ने हेलमेट पहना था। बाकी चार के चेहरे खुले थे। सामने आया सीसीटीवी फुटेज बैंक के सामने स्थित एक दुकान का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें तीन आरोपी बैंक से निकलते हुए नजर आ रहे हैं। फुटेज में एक लुटेरा पहले बैंक के अंदर से निकलता है। सामने खड़ी एक बाइक पर वह इंतजार करता है। उसके बाद अंदर से दो लोग एक झोला हाथ में लेकर भागते हुए बैंक से निकलते हैं।