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खनिजो के अवैध परिवहन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, 02 हाइवा व 03 ट्रैक्टर ट्राली जप्त

बिलासपुर कलेक्टर बिलासपुर के निर्देशानुसार एंव उप संचालक के मार्गदर्शन मे जिला बिलासपुर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एंव भण्डारण पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।  खनिज अमला बिलासपुर द्वारा सकरी, गनियारी, तुरकाडीह, कोनी, मस्तूरी, पचपेड़ी, जोंधरा, गोपालपुर, कुकुरदिकला, भिलोनी, मानिकचौरी क्षेत्र की जाँच की गयी। जाँच के दौरान सकरी क्षेत्र में खनिज गिट्टी का परिवहन करते 1 हाइवा वाहन को जप्त किया गया। पचपेड़ी क्षेत्र में खनिज ईट मिट्टी का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली वाहन को जप्त किया गया। गोपालपुर क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली को जप्त किया गया। जोंधरा क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली वाहन को जप्त किया गया।मानिकचौरी क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली को जप्त किया गया। इस प्रकार जप्त कुल 05 वाहनों को पुलिस थाना सकरी व पचपेड़ी कि अभिरक्षा में रखा गया है। खनिजों के  अवैध उत्खनन,परिवहन, और भण्डारण पर खनिज विभाग,राजस्व विभाग व पुलिस विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है।

नासिक धर्मांतरण कांड पर TCS का बयान: निदा खान HR मैनेजर हैं या नहीं?

 नासिक हाल ही में आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक इकाई में यौन दुर्व्यवहार और धर्मांतरण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कई अफवाहों का खंडन किया है और अपनी आगे की कार्रवाई के बारे में विस्तार से बताया है। साथ ही कंपनी ने ये भी स्पष्ट किया है कि नासिक में निदा खान नाम की कर्मचारी का HR मैनेजर पद से कोई लेना-देना नहीं है। 'एचआर मैनेजर' की भूमिका पर कंपनी की सफाई दरअसल इस विवाद में एक महिला (निदा खान) का नाम बार-बार उछाला जा रहा था और उसे नासिक यूनिट की एचआर मैनेजर बताया जा रहा था। टीसीएस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उक्त महिला न तो एचआर मैनेजर है और न ही उसका कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया से कोई लेना-देना है। वह केवल एक 'प्रोसेस एसोसिएट' के रूप में काम कर रही थी और उसके पास लीडरशिप या मैनेजमेंट से जुड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं थी। नासिक यूनिट बंद होने की अफवाहें झूठीं ऐसी खबरें फैल रही थीं कि इस बड़े विवाद के बाद टीसीएस ने अपनी नासिक फैसिलिटी को बंद कर दिया है। कंपनी ने इन दावों को पूरी तरह से असत्य और निराधार बताया है। यूनिट का कामकाज पहले की तरह ही जारी है। 'जीरो-टॉलरेंस' नीति और सुरक्षा का आश्वासन टीसीएस ने अपने बयान में कहा कि वह कर्मचारियों के कल्याण और संस्थागत आचरण के उच्चतम मानकों का पालन करती है। कंपनी ने दोहराया कि वह अपने हर एक कर्मचारी की सुरक्षा, सम्मान और भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार के दबाव या दुर्व्यवहार के खिलाफ कंपनी की 'जीरो-टॉलरेंस' नीति है, यानी ऐसे मामलों में कोई भी कोताही नहीं बरती जाएगी। टाटा संस के चेयरमैन की कड़ी प्रतिक्रिया इससे पहले इसी सप्ताह, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने भी इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी। उन्होंने नासिक ब्रांच से सामने आ रहे इन आरोपों को बेहद चिंताजनक और दुखद बताया था। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है और आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आंतरिक चैनलों पर कोई शिकायत नहीं मिली कंपनी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात यह बताई है कि उनके पास कर्मचारियों की शिकायत सुनने के लिए जो आंतरिक व्यवस्थाएं हैं, वहां इस मामले की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। शुरुआती जांच से पता चला है कि कंपनी की 'एथिक्स कमेटी' या POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) चैनलों पर इस तरह के आरोपों से जुड़ी कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। जांच के लिए बाहरी एजेंसियों की नियुक्ति मामले की गंभीरता को देखते हुए और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए टीसीएस ने कड़े कदम उठाए हैं। कंपनी ने एक विशेष निगरानी पैनल का गठन किया है। आंतरिक जांच को सही तरीके से आगे बढ़ाने के लिए दो बड़ी बाहरी एजेंसियों को स्वतंत्र सलाहकार के रूप में काम पर रखा गया है: मशहूर कंसल्टेंसी फर्म डेलॉयट और जानी-मानी लॉ फर्म ट्राईलीगल। टीसीएस ने पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी जांच में पूरा सहयोग देने का वादा किया है ताकि मामले की पारदर्शी जांच हो सके और दोषियों को सजा मिल सके।

70 ट्रैक्टर अवैध डंप रेत जब्त, कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई

70 ट्रैक्टर अवैध डंप रेत जब्त, कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई अवैध खनन करते रंगे हाथ पकड़ाया जेसीबी और हाइवा बिलासपुर कलेक्टर  संजय अग्रवाल के सख्त निर्देशों के पालन में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ जिले में बड़ी कार्रवाई की गई। एसडीएम तखतपुर के मार्गदर्शन में आज सुबह ग्राम निरतु के घाट पर राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने दबिश दी।कार्रवाई के दौरान मौके पर अवैध रूप से रेत उत्खनन एवं परिवहन करते हुए एक जेसीबी और हाइवा को रंगे हाथों पकड़ा गया। दोनों वाहनों को तत्काल जब्त कर थाना कोनी के सुपुर्द किया गया। इस दौरान टीम ने ग्राम निरतु में अवैध रूप से डंप की गई रेत पर भी बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 70 ट्रैक्टर रेत को जब्त किया। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से अवैध खनन करने वालों में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने चेतावनी दी  है कि अवैध खनन एवं परिवहन के खिलाफ इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

प्रोत्यूष बालापुरे ने 10वीं CBSE बोर्ड में हासिल किए 99% अंक, स्व-अध्ययन और दृढ़ संकल्प से रचा कीर्तिमान

सिवनी मालवा प्रोत्यूष बालापुरे (कक्षा 10वीं, CBSE) ने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 495 अंक प्राप्त कर 99% अंक हासिल किए हैं। जिस के लिए उनके सागर पब्लिक स्कूल भोपाल ने उन्हें 135000.00  छात्रवत्ति भी प्रदान की है।  इस उपलब्धि के पीछे छात्र का दृढ़ संकल्प, स्व-अध्ययन तथा परिवार और शिक्षकों का सहयोग प्रमुख रहा। छात्र के पिता डॉ. सतीश बालापुरे, शासकीय कन्या महाविद्यालय, सिवनी मालवा में पदस्थ हैं, जबकि माता सुमना बालापुरे मत्स्य विभाग में क्षेत्रीय प्रबंधक, भोपाल  के रूप में कार्यरत हैं। छात्र ने बताया कि उसने 10वीं कक्षा की शुरुआत से ही यह तय कर लिया था कि उसे बोर्ड परीक्षा में 99% अंक प्राप्त करने हैं। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उसने अपने नाम के साथ सभी विषयों में पूरे अंक लिखकर कई स्टिकी नोट्स बनाए और उन्हें अपने PC, स्टडी टेबल, ड्रेसिंग मिरर, यहाँ तक कि अपनी पानी की बोतल पर भी चिपका दिया। सिलेबस की शुरुआत अच्छी रही, जिसका पूरा श्रेय शिक्षकों को जाता है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्र ने क्विज़ और एलोक्यूशन जैसी गतिविधियों में भाग लेकर अपनी अन्य क्षमताओं को भी निखारा। छात्र के अनुसार, उसके शिक्षक अत्यंत सहयोगी रहे और किसी भी कॉन्सेप्ट में कठिनाई होने पर उन्होंने तुरंत सहायता प्रदान की। पूरे वर्ष छात्र ने स्व-अध्ययन जारी रखा, हालांकि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव भी आए। प्री-बोर्ड 1 में अपेक्षित अंक नहीं मिलने पर छात्र ने इसे चुनौती के रूप में लिया और अपने कमजोर पक्षों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। परीक्षाओं से पहले छात्र ने अपने सीनियर्स से पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र (PYQs) और तैयारी सामग्री एकत्र की, जिससे उसे CBSE के प्रश्नों के पैटर्न को समझने में सहायता मिली। प्रत्येक PYQ पर उसने स्वयं नोट्स तैयार किए, जिसमें प्राप्त अंक, गलतियाँ और सुधार के बिंदु शामिल थे। अंतिम दो महीनों में छात्र ने पूरी तरह से PYQs पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा। विशेष रूप से उत्तर लेखन और कॉन्सेप्ट क्लैरिटी पर कार्य किया गया। हाल ही में घोषित परिणाम में छात्र ने 495 अंक प्राप्त कर 99% अंक हासिल किए। इस सफलता में माता-पिता, दादी, चाचा, बड़े पापा   का महत्वपूर्ण योगदान रहा। छात्र के अनुसार, कठिन समय में माता-पिता ने उसे प्रेरित किया और उसका हौसला बढ़ाया। माता ने विभिन्न स्थानों से अध्ययन सामग्री जुटाकर सहायता की, जबकि पिता ने कठिन वैज्ञानिक विषयों को सरलता से समझाया। बहन श्रुष्टि एवं  देव्यानी  ने भी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया। शिक्षकों के मार्गदर्शन तथा पिछले 10 वर्षों के प्रश्न-पत्रों का अभ्यास करने से छात्र को उत्तर लेखन शैली और समय प्रबंधन में विशेष लाभ मिला। छात्र ने आगे की पढ़ाई के लिए कॉमर्स विषय का चयन किया है और उसका लक्ष्य एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सलाहकार बनना है, जिसके लिए वह निरंतर प्रयासरत है।

चीन द्वारा ईरान को हथियार भेजने का शक, रहस्यमय विमान पहुंचे तेहरान – क्या ले आए?

तेहरान  मध्य एशिया में जारी तनाव के बीच एक नई घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कमेंटेटर मारियो नॉफाल ने दावा किया है कि चीन के चार कार्गो विमान ईरान में गुपचुप तरीके से उतरे हैं। उन्होंने दावा किया कि लैंडिंग से पहले विमानों ने अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिए जिससे उनकी जानकारी किसी को हासिल ना हो सके। एक दिन पहले ही शी जिनपिंग ने अमेरिका से वादा किया था कि वह ईरान को हथियारों की कोई सप्लाई नहीं करेंगे। अब इस मामले के जानकारों कहना है कि चारों विमानों का इस तरह से लैंडिंग से पहले ट्रांसपॉन्डर बंद करना कोई तकनीकी खामी नहीं हो सकती है। हालांकि इन विमानों को लेकर ना तो ईरान की तरफ से और ना ही चीन की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। चीन ने ईरान को किसी तरह के सहयोग देने के आरोपों को खारिज किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को कहा कि इस तरह की रिपोर्ट एकदम झूठी हैं। चीन ने ईरान को कोई सैटलाइट हेल्प भी नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि पड़ोसी देशों में अमेरिका के बेस ध्वस्त करने के लिए चीन उनसकी सहायता कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को धमकी दी थी कि वह अगर किसी भी रूप में दखल देता है तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह से विमानों का ट्रांसपॉन्डर बंद कर लेना सामान्य तो नहीं है। हो सकता है कि किसी ऑपरेशनल या फिर सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया हो। चीन का क्या कहना है? रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को साफ कहा कि सैटेलाइट जानकारी देने का दावा ‘पूरी तरह मनगढ़ंत’ हैं और अगर अमेरिका ने इन आधारहीन आरोपों के आधार पर कोई कार्रवाई की, तो जवाब दिया जाएगा. दूसरी तरफ, अमेरिका पहले ही संकेत दे चुका है कि अगर कोई देश ईरान की सैन्य मदद करता पाया गया, तो उसके खिलाफ आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं।  ट्रांसपोंडर बंद करना क्या संकेत है? विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसपोंडर बंद करना असामान्य जरूर है, लेकिन हमेशा गलत इरादे का संकेत नहीं होता. कभी-कभी यह सुरक्षा या तकनीकी कारणों से भी हो सकता है. लेकिन यहां एक साथ कई विमानों का ऐसा करना और वह भी कम समय में संदेह को बढ़ाता है. इस बीच, जमीन पर कूटनीति भी जारी है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू होने के संकेत हैं और लेबनान सीजफायर के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य भी आंशिक रूप से खुल चुका है।  जानकारों का कहना है कि लगातार कई विमानों का एक ही पैटर्न पर लैंड करना संदेह बढ़ाता है। अमेरिका और इजरायल के बीच थोड़ा तनाव इस बात से कम होता नजर आ रहा है कि दोनों ही देशों ने दावा किया है कि कमर्शल जहाजों के लिए होर्मुज को खोल दिया गया है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि ईरान के लिए उनकी नाकेबंदी जारी रहेगी। वाशिंगटन और तेहरान ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। अब वार्ता और युद्ध को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। होर्मुज की खबर आने के बाद वैश्विक बाजार में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है।

फिल्म में कटे रोल पर एक्ट्रेस का बयान: ‘बॉलीवुड को फर्क नहीं पड़ता, साउथ है बेहतर’

मुंबई  बॉलीवुड एक्ट्रेस एली अवराम ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में दस साल पूरे कर लिए हैं. ऐसे में उन्होंने अपने लंबे सफर के बारे में खुलकर बात की. एक्ट्रेस ने बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में बढ़िया काम किया है. दोनों फिल्म इंडस्ट्री के वर्किंग कल्चर के बीच होने वाली तुलना पर एली ने अपने विचार रखे. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में एली अवराम ने अपने एक्सपीरिएंस को ईमानदारी से शेयर करते हुए बताया कि उन्हें साउथ फिल्म सेट्स ज्यादा शांतिभरे लगते हैं।  बॉलीवुड बबल के साथ बातचीत में एली अवराम ने कहा कि उन्हें दोनों इंडस्ट्रीज में अच्छा अनुभव मिला है. लेकिन साउथ में काम करने का उनका एक्सपीरिएंस ज्यादा बेहतर रहा. उन्होंने कहा, 'मुझे साउथ के सेट पर ज्यादा शांतिपूर्ण माहौल मिला है. बॉलीवुड से ज्यादा…' इससे उनका इशारा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भागदौड़ और हलचल भरे माहौल की तरफ था. उन्होंने आगे कहा, 'साउथ फिल्म क्रू शांत माहौल बनाए रखना पसंद करते हैं. वे चीखने-चिल्लाने की बजाय वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते हैं.' एली के अनुसार, अंतर सिर्फ रफ्तार का नहीं है, बल्कि पूरे सेट के मैनेजमेंट का भी है।  बॉलीवुड को नहीं परवाह एक्ट्रेस ने बॉलीवुड के कुछ खराब अनुभवों के बारे में भी खुलकर बताया. हिंदी फिल्म सेट्स पर कभी-कभी मिलने वाली बेपरवाही का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरा बॉलीवुड अनुभव ज्यादातर ऐसा रहा है कि अगर आप खाना खा भी रहे हों, फिर भी आपको बताया जाता है कि आपका शॉट तैयार है. हमें इसकी परवाह नहीं कि आपने खाना खाया है या नहीं, भले ही आप बेहोश हो जाएं, लेकिन शॉट तैयार है।  हालांकि उन्होंने साफ किया कि हर जगह ऐसा नहीं होता, यह काफी हद तक टीम पर निर्भर करता है. एली अवराम ने अपने एक नेटफ्लिक्स प्रोजेक्ट का जिक्र भी किया जहां फिल्ममेकर और क्रू ने सभी का अच्छा ख्याल रखा और मेहमाननवाजी भी की।  टाइपकास्टिंग हुई थीं एली एली अवराम ने यह भी बताया कि साउथ इंडस्ट्री महिलाओं को कंटेंट-ड्रिवन भूमिकाओं में बेहतर मौके देती है. जबकि बॉलीवुड अक्सर एक्टर्स को टाइपकास्ट कर देता है. उन्होंने समझाया, 'जैसे अगर आपको प्रिटी गर्ल रोल्स में कास्ट कर दिया जाए, तो आप उसी में अटक जाते हैं.' उन्होंने बताया कि लोगों की पहले से बनी हुई सोच एक्टर्स को मिलने वाले रोल्स की रेंज को कैसे सीमित कर देती हैं।  एली अवराम को आदित्य रॉय कपूर की फिल्म 'मलंग' में एकदम अलग रोल में देखा गया था. अपने उस रोल को याद करते हुए एक्ट्रेस ने बताया कि जब उन्होंने पिक्चर में सीरियस और इंटेंस किरदार निभाया, तो इंडस्ट्री में कई लोग हैरान रह गए थे. उन्होंने कहा, 'जब मुझे मलंग में कास्ट किया गया और मुझे अलग तरीके से दिखाया गया, तो किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि मैं ऐसा रोल करूंगी. मुझे बताया गया कि फिल्ममेकर्स शॉक हो गए थे कि एली एक सीरियस एक्टर भी है।  सीन्स हटा दिए गए सिनेमा के सफर में आगे निकल चुकीं एली अवराम ने मुश्किल दिन भी देखे हैं. उन्होंने याद किया कि एक फिल्म की एडिटिंग के दौरान उनके ज्यादातर सीन्स, यहां तक कि उनका इंट्रोडक्शन भी काट दिया गया था. ये उनके लिए झटके की बात थी. ऐसे में एक्ट्रेस ने फिल्म में खुद को 'प्रॉप' जैसा महसूस किया. अपने करियर के सबसे अपमानजनक पलों में से एक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वो एक 'बहुत बड़ी फिल्म’ थी, जो अंत में फ्लॉप हो गई. हालांकि उन्होंने इसका नाम नहीं बताया।  उन्होंने कहा, 'एक फिल्म थी जिसमें मुझे सेकंड लीड रोल मिला था. वो फिल्म हीरो और दो लीड एक्ट्रेस के साथ बननी थी. मैं सिर्फ इसलिए वो फिल्म कर रही थी, क्योंकि मुझे सेकंड लीड रोल दिया गया था. वरना मैं कभी साइन नहीं करती.' एली के अनुसार, फाइनल कट से पहले उनके कई सीन्स हटा दिए गए. डबिंग के समय उन्हें लगा कि उनकी भूमिका अभी भी कुछ महत्व रखती है, लेकिन बाद में पता चला कि वो हिस्से भी एडिट कर दिए गए. फिल्म रिलीज होने तक उनका रोल इतना कम हो गया था कि वो खुद को एक किरदार के बजाए 'प्रॉप' जैसा समझने लगीं।  उन्होंने कहा, 'मेरा पूरा इंट्रोडक्शन हटा दिया गया, मतलब मैं उस फिल्म में जैसे एक प्रॉप बन गई. लग रहा था कि एली अवराम इस फिल्म में है ही क्यों? अपने पूरे करियर में मैंने कभी इतना अपमान महसूस नहीं किया. बहुत बुरा लगा. वो बहुत बड़ी फिल्म थी. और फिल्म भी डिजास्टर रही, बड़ी फ्लॉप. वो फिल्म बैठकर देखने की कोशिश करना भी बेतुका था. क्योंकि अब वो पूरी तरह अलग कहानी बन गई थी. ये बिल्कुल बेतुका था।  उन्होंने आगे बताया कि डायरेक्टर का भी पिक्चर के फाइनल आउटकम पर ज्यादा नियंत्रण नहीं था. बड़े फैसले प्रोड्यूसर्स के करीब बैठे लोगों के हाथ में थे, जिससे स्थिति और भी निराशाजनक हो गई. उन्होंने कहा, 'डायरेक्टर का भी कोई कहना नहीं था. जो प्रोड्यूसर्स के करीब बैठे थे, उनका कहना मान्य था. डायरेक्टर के लिए भी ये दिल तोड़ने वाला होता है।  एली अवराम ने अपना करियर साल 2013 में 'बिग बॉस 7' से शुरू किया था. उसी साल उन्होंने 'मिकी वायरस' नाम की फिल्म के साथ बॉलीवुड में डेब्यू किया. समय के साथ उन्होंने 'गुडबाय' और 'गणपथ' जैसी फिल्मों में काम किया. साथ ही तमिल सिनेमा में भी प्रोजेक्ट्स किए, जिसमें 'नाने वरुवेन' और 'कॉन्ज्यूरिंग कन्नप्पन' शामिल हैं. उन्होंने 'द वर्डिक्ट स्टेट वर्सेज नानावटी' और 'इनसाइड एज 2' जैसी वेब सीरीज में भी काम किया है। 

बाढ़ से बचाव की तैयारी तेज: पंजाब में नदियों-नालों से गाद निकालने की मंजूरी

चंडीगढ. मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब मंत्रिमंडल ने मानसून से पहले बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने दरियाओं, चोओं और सेम नालों से गाद निकालने की प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से जमीन मालिकों को अपनी लागत पर सफाई की अनुमति दे दी है। साथ ही, खुदाई से निकली सामग्री को मुफ्त उपयोग करने का अधिकार भी प्रदान किया गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल गाद निकालने के काम में तेजी आएगी, बल्कि दरियाओं के पानी के प्रवाह में भी सुधार होगा। इससे संभावित बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी और सार्वजनिक व निजी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। यह निर्णय सतलुज, ब्यास और सिसवां समेत अन्य दरियाओं और नालों की सफाई के लिए लिया गया है। लंबे समय से इन जल स्रोतों में जमा गाद के कारण पानी का बहाव प्रभावित हो रहा था, जिससे मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ की स्थिति बन जाती थी। सरकार ने ऐसे 9 संवेदनशील स्थानों की पहचान भी की है, जहां मानसून से पहले गाद निकालना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते इन क्षेत्रों में सफाई नहीं की गई, तो पानी का प्रवाह बाधित हो सकता है और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसको देखते हुए संबंधित जमीन मालिकों को आगे आकर इस कार्य में सहयोग देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने पंचायत स्तर पर आरक्षण व्यवस्था में संतुलन बनाने के लिए भी अहम निर्णय लिया है। सरपंचों, जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के पदों के लिए आरक्षण नियम-6 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन का उद्देश्य विभिन्न वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना है। नई व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति, महिलाओं और सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण का रोस्टर पुनः निर्धारित किया जाएगा, ताकि हर वर्ग को बराबर अवसर मिल सके। कैबिनेट के फैसले जमीन मालिकों को आप सरकार ने दी सफाई की अनुमति। खोदाई से निकली सामग्री को मुफ्त उपयोग का भी अधिकार।

कानून का कड़ा शिकंजा: बस्तर में बाल विवाह मामले में 5 आरोपी, दोनों पक्षों पर FIR

बस्तर. बस्तर जिले में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन ने पहली बार कड़ा रुख अपनाया है. नगर कोतवाली में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई. मामला जगदलपुर ब्लॉक के 21 मार्च 2026 को हुए विवाह समारोह से जुड़ा है. शुरुआत में यह सामान्य शादी लगी, लेकिन शिकायत के बाद जांच शुरू हुई. जांच में सामने आया कि वधु की उम्र 18 वर्ष से कम थी. सत्यापन के बाद बाल संरक्षण विभाग ने तत्काल कानूनी कार्रवाई की. वर और वधु पक्ष के कुल 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है. जिले में चार वर्षों में 15 मामले सामने आने की जानकारी मिली है. पहले ऐसे मामलों में समझाइश देकर छोड़ने की परंपरा रही. अब प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से समझौता नहीं होगा. 18 से कम लड़की और 21 से कम लड़के की शादी अपराध है. दोषियों को 2 साल सजा या 1 लाख जुर्माना हो सकता है. यह कार्रवाई सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

ग्रामीण कनेक्टिविटी को बूस्ट: 250 करोड़ से बनेंगी 235.45 किमी सड़कें

बस्तर. बस्तर जिले में विकास को नई गति देने वाली बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत हुई. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेस-4 के तहत 86 कार्यों की आधारशिला रखी गई. इन सड़कों की कुल लंबाई 235.45 किलोमीटर बताई गई है परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 250 करोड़ रुपये है. कार्यक्रम का प्रसारण कुम्हरावंड सभागार में किया गया. ग्रामीण अंचलों की कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर दिया गया. लोहंडीगुड़ा, दरभा, बास्तानार और तोकापाल को बड़ा लाभ मिलेगा. दशकों पुरानी आवागमन समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है. जनप्रतिनिधियों ने इसे विकास की नई लकीर बताया. स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होगी. सड़कें गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देंगी. अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ समय पर काम पूरा करने निर्देश दिए गए. बस्तर के दूरस्थ इलाकों में अब विकास की रफ्तार और तेज होगी. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नई तकनीक की एंट्री जगदलपुर. बस्तर संभाग की स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी तकनीकी सौगात मिली है. शहर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आधुनिक स्टेरलाइजर मशीन लगी है. यह सुविधा संभाग के सरकारी या निजी अस्पतालों में पहली बताई जा रही है. अब संवेदनशील उपकरणों को बाहर भेजने की जरूरत कम होगी. रायपुर या विशाखापत्तनम पर निर्भरता घटेगी. इलाज की लागत और समय दोनों में राहत मिलेगी. कैथेटर, ट्यूब, ग्लव्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित होंगे. गर्मी से खराब होने वाले उपकरण अब सुरक्षित तरीके से साफ होंगे. 250 लीटर क्षमता वाली मशीन अस्पताल में स्थापित की गई है. क्रॉस इन्फेक्शन का खतरा कम होने की उम्मीद है. आपातकालीन सर्जरी में भी तेज तैयारी संभव होगी. स्थानीय मरीजों को अब उच्च स्तरीय सुविधा घर के पास मिलेगी. यह उपलब्धि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है.

डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा: जनकल्याण कार्यों में तेजी लाकर गांवों में करें रात्रि विश्राम

जनकल्याण के कामों में तेज़ी लायें, निरीक्षण करें, गांवों में करें रात्रि विश्राम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव छोटे किसानों का गेहूं उपार्जन पहले करायें, उपार्जन केन्द्रों में हों सभी जरूरी सुविधाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स के साथ वीसी से की विभिन्न अभियानों की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय से प्रदेश में चलाये जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान, पूर्ण हो चुके संकल्प से समाधान अभियान और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स के साथ योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा कर समुचित दिशा-निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विभागीय अधिकारियों एवं कलेक्टर्स से कहा कि प्रदेश और समाज की बेहतरी के लिए सरकार द्वारा विभिन्न अभियानों के माध्यम से महती प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार के इन सभी प्रयासों एवं अभियानों में जन जुड़ाव एवं सहभागिता बेहद जरूरी है। इन सभी अभियानों की सार्थकता और सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब इनमें अधिकाधिक जनसहयोग एवं जन भागीदारी भी हो। इसके लिए सभी समर्पित और फोकस्ड होकर प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे जनता के कल्याण के कामों को तेजी से पूर्ण करायें। सरकार की योजनाओं का फील्ड में पूर्णतया क्षमता और दक्षता के साथ व्यापक स्तर पर सुचारु एवं बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर, उनकी जरुरतों और सुझावों पर अमल करते हुए जनोन्मुखी प्रशासन से खुद की और सरकार की साख बढ़ायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स लगातार जिले में भ्रमण करें, लोगों से चर्चा करें, उनकी समस्या सुनकर समाधान करें और गांवों में रात्रि विश्राम करें, इससे सरकारी योजनाओं का मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 12 जनवरी से 31 मार्च तक 2026 तक "संकल्प से समाधान अभियान" चलाया गया। इस अभियान से सरकार की 106 प्रकार की योजनाओं का सीधा लाभ जनता और जरुरतमंदों तक पहुंचाया गया। सभी कलेक्टर्स इस अभियान के मूल लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हमेशा क्रियाशील रहें और जनता को अधिकतम लाभ दिलायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान 19 मार्च से प्रारंभ हुआ है। यह 30 जून 2026 तक चलेगा। विगत 2 सालों में अभियान के अंतर्गत हुए जल संचयन के कार्यों से यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की पहचान बन चुका है। अब आवश्यकता है कि इस साल भी जल संरक्षण और सूख चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के भरसक प्रयास किये जायें। गेहूं उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चल रही गेहूं उपार्जन प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए कहा कि छोटे किसानों का गेहूं पहले खरीदा जाये। उन्हें समय पर भुगतान भी करायें। सभी कलेक्टर्स गेहूं उपार्जन केन्द्रों का सघन निरीक्षण करें और यह देखें कि खरीदी केंद्र पर समुचित छाया-पानी, बारदाना, तेज गर्मी के चलते ओआरएस घोल, पावडर आदि सभी जरूरी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहें। किसानों को किसी भी तरह की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत परेशानी नही हो। अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने बताया कि गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया निर्बाध रूप में से जारी है।अब तक 1 लाख 13 हज़ार से अधिक किसानों से 4 लाख 96 हज़ार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इन किसानों को करीब 355 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान भी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष ऐसा पहली बार हुआ है कि पहले दिन तुलाई वाले किसानों को दूसरे दिन ही भुगतान भी कर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय विकास एवं प्रशासन विभाग से कहा कि वे अपने विभागीय स्वच्छता अभियान को जल गंगा संवर्धन अभियान से जोड़ लें। जनसहयोग से जगह-जगह पर प्याऊ लगवायें। इनकी साफ़-सफाई पर भी विशेष ध्यान दें।तकनीक से जुड़कर नवाचार भी करें। सांदीपनि विद्यालयों में करें रैन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के कारण बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट में आये उल्लेखनीय परिणामों को राष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आई गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों को लेकर अभिभावकों की धारणा इस कदर परिवर्तित हुई है कि वे अपने बच्चों के दाखिले निजी विद्यालयों से निकालकर शासकीय सांदीपनि विद्यालयों में भर्ती करा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग को निर्देश दिए कि वे प्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवायें। जून में जब स्कूल पुनः खुलेंगे, तब अधिकाधिक लोगों को सांदीपनि विद्यालयों का अवलोकन करायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बड़ी उपलब्धि है कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कारण हमारा स्कूल ड्रॉप आउट रेशियो जीरो हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के सभी बड़े धार्मिक स्थलों पर कम से कम 50 बेडेड हास्पिटल होने चाहिए। प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों में बर्न यूनिट्स स्थापित की जाये। ग्रीष्मकालीन स्थायी निर्देशों (मेडिकल प्रोटोकॉल्स) का कढ़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। सभी अस्पतालों में जरूरी दवाएं उपलब्ध रहें। सभी कलेक्टर्स एवं नगरीय निकाय स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी पूरी कर लें। पेयजल आपूर्ति में न रहे कोई कमी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर से बेहतर बनाएं ताकि ग्रीष्मकाल में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था हर हाल में निर्बाध रहे। आवश्यकतानुसार टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की जाये। पेयजल संरचनाओं के संरक्षण एवं संधारण पर विशेष ध्यान दें। किसी को भी पेयजल संबंधी परेशानी न होने पाये। ज्ञान भारतम ऐप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा एक "ज्ञान भारतम ऐप" तैयार किया गया है। कोई भी नागरिक पुरानी साहित्यिक या धार्मिक पांडुलिपियों को इस ऐप में अपलोड कर सकता है। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने बताया कि 17 अप्रैल 26 तक इस ऐप में साढ़े 6 लाख से अधिक पांडुलिपियां अपलोड की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलेक्टर्स को इस विषय के … Read more