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कल तक करें आवेदन, 7 मई से शुरू होगी एमपी बोर्ड दूसरी मुख्य परीक्षा

भोपाल मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने इस साल 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक और छात्र-हितैषी बदलाव किया है। अब बोर्ड परीक्षाओं में एक या दो विषयों में कम अंक आने या फेल होने पर छात्रों को 'सप्लीमेंट्री' या 'पूरक परीक्षा' का ठप्पा झेलने की जरूरत नहीं होगी। बोर्ड ने पुरानी सप्लीमेंट्री व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और इसकी जगह ‘दूसरी मुख्य परीक्षा’ की शुरुआत की है। इस नई व्यवस्था के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 की दूसरी मुख्य परीक्षा आगामी 7 मई 2026 से शुरू होने जा रही है। यह उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण है, जो मुख्य परीक्षा में किसी कारणवश चूक गए थे या अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं हैं। सप्लीमेंट्री अब इतिहास, 'दूसरी परीक्षा' है भविष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सुझावों को लागू करते हुए एमपी बोर्ड ने यह कदम उठाया है। अब छात्रों की मार्कशीट पर 'सप्लीमेंट्री' जैसे शब्द नहीं लिखे होंगे, बल्कि इसे दूसरी मुख्य परीक्षा माना जाएगा। इससे छात्रों का मानसिक दबाव कम होगा और उन्हें उसी शैक्षणिक वर्ष में अपना स्कोर सुधारने का समान अवसर मिलेगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 10वीं (हाई स्कूल) की दूसरी परीक्षा 7 मई से शुरू होकर 19 मई तक चलेगी, जबकि 12वीं (हायर सेकेंडरी) की परीक्षाएं 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित की जाएंगी। सभी परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे की एक ही पाली में निर्धारित केंद्रों पर होंगी। आवेदन की अंतिम तिथि: 22 अप्रैल तक का है मौका जो छात्र इस दूसरी मुख्य परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, उनके पास समय बहुत कम है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 22 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। बोर्ड के निर्देशों के अनुसार, मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आने के 7 दिनों के भीतर छात्रों को एमपी ऑनलाइन (MP Online) पोर्टल के माध्यम से अपना फॉर्म भरना होगा। किन्हें मिलेगा मौका? फेल छात्र: वे छात्र जो मुख्य परीक्षा में एक या दो विषयों में फेल रहे हैं। अंक सुधार (इम्प्रूवमेंट): वे छात्र जो पास तो हैं, लेकिन किसी विषय में अपने नंबर बढ़ाना चाहते हैं। अनुपस्थित छात्र: वे परीक्षार्थी जो मुख्य परीक्षा के दौरान किसी वैध कारण से शामिल नहीं हो पाए थे। कैसे करें आवेदन? छात्र अपने नजदीकी एमपी ऑनलाइन कियोस्क पर जाकर या आधिकारिक वेबसाइट mpbse.mponline.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपना रोल नंबर और मुख्य परीक्षा का रिजल्ट साथ रखना होगा। फॉर्म भरते समय संबंधित विषयों का चुनाव सावधानीपूर्वक करें और निर्धारित शुल्क का भुगतान कर रसीद जरूर प्राप्त करें। मार्कशीट की वैधता और नई व्यवस्था का लाभ इस दूसरी परीक्षा के बाद जारी होने वाली मार्कशीट की वैधता और मूल्य मुख्य परीक्षा के बराबर ही होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्र बिना अपना साल बर्बाद किए उच्च शिक्षा या अगली कक्षा में दाखिला ले सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि इस बदलाव से छात्रों के बीच 'फेल' होने का डर कम होगा और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ दोबारा परीक्षा दे पाएंगे।

नाटक खत्म, संदेश शुरू: वनों के महत्व और जल संरक्षण पर जागरूकता मंचों ने बांधा समां

बीजापुर. बीजापुर के अति अंदरूनी इलाकों से अब बदलाव की नई तस्वीर सामने आ रही है। जो गांव कभी नक्सली प्रचार के केंद्र माने जाते थे, वहां अब जनजागरूकता की गूंज सुनाई दे रही है। पहले जहां भय के साए में चेतना नाट्य मंडलियों का मंचन होता था, अब वहां वन संरक्षण के संदेश दिए जा रहे हैं। ग्रामीण पहली बार खुले मन से नुक्कड़ नाटक देख रहे हैं और उत्साह से भागीदारी कर रहे हैं। कार्यक्रमों में जंगलों में आग नहीं लगाने और महुआ संग्रहण में सावधानी बरतने की अपील की गई। तेंदूपत्ता तोड़ाई के दौरान वन्यजीवों को नुकसान नहीं पहुंचाने का संदेश भी दिया गया। हल्बी, गोंडी, हिंदी और तेलुगु भाषा में ग्रामीणों को जागरूक किया गया। वनों के महत्व, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन पर विशेष जानकारी दी गई। इंद्रावती टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह अभियान बड़ा संदेश माना जा रहा है। जहां कभी बंदूक की भाषा थी, वहां अब संवाद की संस्कृति लौट रही है। बीजापुर की यह तस्वीर बताती है कि शांति आने पर विकास खुद रास्ता बना लेता है। नक्सल प्रभावित इलाकों में यह बदलाव आने वाले समय की उम्मीद बन गया है।

पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झंडी

पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झण्डी प्रेम, शांति और विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर गांव-गांव तक पहुंचेगा दिव्य रथ एक वर्ष तक चलेगा जन जागरण अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा में ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा संचालित किए जा रहे पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति एवं सद्भावना रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभियान समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे की भावना को सशक्त करेगा तथा प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा। प्रेम, शांति और विश्व बंधुत्व का संदेश लेकर गांव-गांव तक भ्रमण करने वाले रथ से एकता, प्रेम, सद्भावना व नशामुक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजागृति रथ में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना की। रीवा के राजनिवास सर्किट हाउस में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ब्रहृाकुमारी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे जन जागरण अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पावन और आध्यात्मिक कार्य प्रदेश में विश्व बंधुत्व की भावना जागृत करने में सहायक सिद्ध होगा। ब्रहृाकुमारी संस्थान की भोपाल जोन की डायरेक्टर बीके निर्मला के निर्देशन में जन जागरण अभियान अंतर्गत ज्योतिर्लिंग रथ रीवा जिले में महाशिवरात्रि 2027 तक भ्रमण करेगा। कार्यक्रम में जिला भाजपाध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता सहित ब्रम्हकुमारी संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

भारत की अर्थव्यवस्था 2026 तक 6.4% बढ़ेगी, अमेरिकी टैरिफ और टैक्स के बावजूद UN रिपोर्ट में आ रहा है सकारात्मक आकलन

नई दिल्ली  संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट 'इकोनॉमिक एंड सोशल सर्वे ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक 2026' के अनुसार, भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था साल 2026 में 6.4 प्रतिशत और साल 2027 में 6.6 प्रतिशत की दर से विकास करेगी।  विकास के मुख्य कारक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत रही थी. इस वृद्धि के पीछे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार, मजबूत घरेलू खपत और वस्तु एवं सेवा कर की दरों में कटौती जैसे प्रमुख कारण रहे. साथ ही, अमेरिकी टैरिफ लागू होने से पहले निर्यात में आई तेजी ने भी इसे समर्थन दिया. रिपोर्ट में सेवा क्षेत्र को भारतीय विकास का मुख्य इंजन बताया गया है।  वैश्विक व्यापार तनाव और चुनौतियां भविष्य के लिए सकारात्मक अनुमानों के बीच रिपोर्ट ने कुछ गंभीर चिंताओं की ओर भी इशारा किया है. अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद, 2025 की दूसरी छमाही में अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई।  एक और बड़ी चिंता प्रेषण को लेकर है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता देश है, जिसे 2024 में 137 अरब डॉलर मिले थे. हालांकि, जनवरी 2026 से अमेरिका द्वारा सभी प्रेषणों पर लगाए गए 1 प्रतिशत टैक्स के कारण भारत को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. भारत में प्रेषण का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे मध्यम वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर सीधा असर पड़ सकता है।  निवेश और हरित अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश (FDI) के मामले में भारत का प्रदर्शन सराहनीय रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली तीन तिमाहियों में भारत ने 50 अरब डॉलर का ग्रीनफील्ड एफडीआई आकर्षित किया, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक है।  रिपोर्ट में भारत की 'उत्पादन आधारित प्रोत्साहन' (PLI) योजना की भी प्रशंसा की गई है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सोलर मॉड्यूल, बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली यह योजना आयात पर निर्भरता कम करने और हरित औद्योगिक विकास के लिए एक बेहतरीन मॉडल है. वर्तमान में वैश्विक स्तर पर 1.66 करोड़ हरित नौकरियों में से भारत की हिस्सेदारी 13 लाख है, जिसे और बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं।  कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भारत की आर्थिक नींव मजबूत है. हालांकि, मुद्रास्फीति के 2026 में 4.4% और 2027 में 4.3% रहने का अनुमान है. यदि भारत बाहरी व्यापारिक बाधाओं और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करता है, तो वह अपनी विकास यात्रा को स्थिर रख सकता है। 

तेज प्रताप यादव का बयान: ‘राहुल गांधी को मीट-मुर्गा बनाएं, प्रियंका ही INDIA ब्लॉक की नेता बनें’

 पटना बिहार सरकार में पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के INDIA ब्लॉक का चेहरा बनने की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने इस दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना भी साधा।  बिहार की राजनीति पर राहुल गांधी के हालिया बयान पर तेज प्रताप यादव ने कहा, "राहुल गांधी इसी सब चीज में फंसे रहेंगे. शुरू से तो बुलेट चलाते हुए उनको शौक नहीं पूरा हुआ. अब इनको कुर्सी पर बैठने का लालच हो गया है. लालचपंती से दूर रहें. और वो जो अपना कुकिंग कर रहे थे, मीट-मुर्गा बना रहे थे, वही बनाते रहें।  उन्होंने आगे कहा कि प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं. वे इंदिरा जी की तरह हैं, वही चला सकती हैं. राहुल गांधी से चलने वाला नहीं है।  बिहार की गद्दी पर बैठना है क्या?' तेज प्रताप यादव ने कहा, "यात्रा लगा लेने से, बुलेट पर बैठ जाने से और एक-दूसरे पर आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा. अब नीतीश कुमार जी के बारे में बोल रहे हैं. नीतीश जी छोड़कर गए, दूसरे आदमी आए और सीएम बने. ये दूसरे राज्य में हैं, इनको क्यों लालचपंती लग रहा है. इनको बिहार की गद्दी पर बैठना है क्या।  राहुल ने नीतीश पर क्या कहा था? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा, जिन्होंने पिछले हफ़्ते मुख्यमंत्री पद इस्तीफ़ा दे दिया था. राहुल गांधी ने उन्हें 'कॉम्प्रोमाइज्ड' बताया और आरोप लगाया कि JD(U) प्रमुख के पिछले कामों की वजह से बीजेपी उन पर पूरी तरह से कंट्रोल कर पा रही है।  राहुल गांधी ने नीतीश पर यह हमला तब किया, जब कांग्रेस नेता तमिलनाडु के थूथुकुडी में एक चुनावी रैली में बोल रहे थे. गौर करने वाली बात है कि नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद हैं।  राहुल गांधी ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा, "बीजेपी नीतीश को मुख्यमंत्री पद से इसलिए हटा पाई, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री किसी दबाव में थे और राज्यसभा भेजे जाने के बाद उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला. बिहार के सबसे लंबे वक्त तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश ने 14 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था।  JD(U) नेता का नाम लिए बिना, कांग्रेस नेता ने कहा, "ज़रा देखिए कि हाल ही में बिहार में क्या हुआ है. मुख्यमंत्री को हटा दिया गया है और उनकी जगह एक बीजेपी नेता को बैठा दिया गया है. ऐसा क्यों? क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री किसी दबाव में हैं. उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला और चुपचाप राज्यसभा चले गए।  बिहार का उदाहरण देते हुए, राहुल ने तमिलनाडु के लिए भी वैसी ही चिंता जताई और कहा कि बीजेपी एक ऐसी राज्य सरकार चाहती है, जिस पर वह पूरी तरह से अपना कंट्रोल रख सके।  राहुल ने आगे कहा, “उनके (नीतीश) पिछले कामों की वजह से बीजेपी उन्हें पूरी तरह से अपने काबू में कर पाई. वे (बीजेपी) यहां तमिलनाडु में भी यही करना चाहते हैं. वे ऐसी सरकार चाहते हैं, जिस पर उनका पूरा कंट्रोल हो. वे ऐसा मुख्यमंत्री चाहते हैं, जो ठीक वही करे जो वे कहें. और ऐसा हम उन्हें कभी भी नहीं करने देंगे। 

जिनमें होते हैं ये 7 लक्षण, वही लोग आगे चलकर करते हैं बड़ा कमाल

आज से कई सौ वर्षों पहले भारतभूमि पर ऐसे महान ज्ञानी ने जन्म लिया, जिनकी बातें आज भी भटके हुओं को सही रास्ता दिखाने का काम करती हैं। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में जीवन के लगभग हर पहलू से जुड़ा ज्ञान साझा किया, जो आज के समाज में भी उतना ही सटीक बैठता है। आज हर कोई खुद को बुद्धिमान समझता है। लेकिन असल में बुद्धिमान व्यक्ति के पैमाने क्या हैं, ये शायद ही कोई समझता हो। क्या केवल डिग्री लेने से कोई बुद्धिमान हो जाता है, या इसके लिए किसी खास विषय का ज्ञान जरूरी है। आचार्य चाणक्य ने इस बारे में भी अपनी नीति में बताया है। उन्होंने बुद्धिमान व्यक्ति के कुछ संकेत बताए हैं, जिन्हें देखकर आप वाकई समझ सकते हैं कि सामने वाला केवल किताबी ज्ञानी है या असल मायनों में ज्ञानी है। अपने मन की बात हर किसी को ना बताना आचार्य चाणक्य बताते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति अपने मन की बात हर किसी के साथ साझा नहीं करते, भले ही वो कितना भी करीबी क्यों ना हो। असल में बुद्धिमान व्यक्ति जानते हैं कि आज का मित्र कल शत्रु भी बन सकता है। ऐसे में वो आपके खिलाफ सबसे पहले इन्हीं बातों का इस्तेमाल करेगा, जो अपने उन्हें विश्वास कर के बताई हैं। अपना कार्य पूरा होने से पहले किसी को नहीं बताते बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी अपने कार्य को पूरा होने से पहले नहीं बताते। आचार्य कहते हैं कि पहले से ही बात का ढोल पीट देने से काम का महत्व तो कम हो ही जाता है, साथ में शत्रु भी आपको गिराने का प्रयास कर सकता है। इसलिए भलाई इसी में है कि चुपचाप पहले काम करें, परिणाम लोगों को खुद ही दिख जाएगा। गुस्से और जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेते आचार्य चाणक्य बताते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति अपना कोई भी निर्णय जल्दीबाजी या गुस्से में नहीं लेते हैं। क्योंकि वो जानते हैं कि जल्दी में या गुस्से में लिया गया एक भी निर्णय पूरी मेहनत को बर्बाद कर सकता है। बुद्धिमान व्यक्ति कम बोलते हैं और ज्यादा सुनते हैं बुद्धिमान व्यक्ति का एक लक्षण ये भी है वो ज्यादा बोलते नहीं बल्कि लोगों को सुनते हैं। वो जानते हैं कि उन्हें कब और क्या बोलना है। इससे उनकी बातों का महत्व भी ज्यादा होता है और उनके ज्ञान में भी वृद्धि होती है। अपने हर अनुभव से सीखते हैं ऐसा नहीं है कि बुद्धिमान व्यक्ति को हार का सामना नहीं करना पड़ता है। वो भी कई बार नीचे गिरते हैं लेकिन उस अनुभव को बेकार नहीं जाने देते। वो अपने हर एक अनुभव से सीख लेते हैं, उसमें सुधार करते हैं और आगे बढ़ते हैं। एक ही गलती को बार-बार दोहराते नहीं। समय का महत्व समझते हैं आचार्य चाणक्य बताते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति अपने समय का मोल समझता है। वो जानते है कि दुनिया में सब कुछ खरीदा जा सकता है, लेकिन समय अनमोल है। इसलिए एक एक क्षण उसके लिए कीमती होता है, जिसे वो व्यर्थ नहीं जाने देता। बिना सोचे-समझे कोई काम नहीं करते बुद्धिमान व्यक्ति अपना कोई भी काम बिना सोचे-समझे कभी शुरू नहीं करते। वो कुछ नया होने से पहले उसका अच्छे से आकलन करते हैं, फिर हर परिणाम को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला करते हैं। उनकी यही सूझबूझ उन्हें औरों से अलग और सफल बनाती है।

ईरान युद्ध का असर: बांग्लादेश में मोबाइल नेटवर्क पर पड़ी मार, इंटरनेट ठप होने का खतरा

ढाका  ईरान युद्ध की वजह से कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया है। दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका और ईरान के बीच अब भी संघर्ष चल रहा है और हाल फिलहाल में कोई राहत भी मिलती नहीं दिख रही है। ऐसे में कई देशों में हालात बाद से बदतर होते जा रहे हैं। भारत के पड़ोस में बांग्लादेश में तो अब इंटरनेट ठप पड़ने के हालात बन पड़े हैं। ईंधन की भारी कमी के चलते बांग्लादेश में मोबाइल नेटवर्क पर बड़े स्तर पर बंद होने के खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि करीब 17 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश के लिए हालात इसीलिए बिगड़ गए हैं क्योंकि वह अपनी तेल और गैस जरूरतों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसमें से ज्यादातर तेल मिडिल ईस्ट से ही आता है। अब होर्मुज में शिपिंग रूट बाधित होने से बांग्लादेश में हाहाकार मच गया है। गारमेंट उद्योग पहले ही प्रभावित ढाका समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर 12-12 घंटे लंबी कतारें लग रही हैं। हालात को संभालने के लिए सरकार ने हाल ही में डीजल की कीमतों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी की है। बिजली संकट के कारण गारमेंट उद्योग पहले ही प्रभावित हो चुका है, जहां उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। अब इसकी आंच इंटरनेट तक पहुंच गई है। डेटा सेंटर के लिए चाहिए डीजल रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते सोमवार को बांग्लादेश के मोबाइल टेलीकॉम ऑपरेटर्स के संगठन (AMTOB) ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत दखल नहीं दिया, तो मौजूदा हालात में सेवाओं को जारी रखना संभव नहीं रह जाएगा। बता दें कि टेलीकॉम कंपनियां बिजली कटौती के दौरान अपने डेटा सेंटर और नेटवर्क टावर (BTS) चलाने के लिए डीजल जनरेटर पर निर्भर रहती हैं। लेकिन अब रोजाना 5 से 8 घंटे की बिजली कटौती हो रही है, जिससे स्थिति बिगड़ गई है। SMS-बैंकिंग सेवाएं भी ठप हो जाएंगी AMTOB के अनुसार, केवल डेटा सेंटर ही हर घंटे करीब 500 से 600 लीटर डीजल खपत करते हैं। संगठन के महासचिव मोहम्मद जुल्फिकार ने कहा, “डेटा सेंटर ऑपरेटर का दिमाग होता है। अगर यह बंद हो गया, तो पूरा नेटवर्क ठप हो जाएगा।” अगर नेटवर्क बंद हुआ, तो सिर्फ कॉल और इंटरनेट ही नहीं, बल्कि SMS और बैंकिंग सेवाएं भी ठप हो सकती हैं। इसका असर आम लोगों से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक पड़ेगा। बांग्लादेश में मोबाइल फाइनेंशियल सर्विसेज (MFS) रोजमर्रा के लेन-देन का अहम हिस्सा हैं, और रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

बिहार में एंट्रेंस एग्जाम फॉर्म भरने का मौका बढ़ा, BCECEB का अहम फैसला

पटना. बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा परिषद (BCECE) ने डिप्लोमा-सर्टिफिकेट प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा (DCECE) 2026 के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। परिषद द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार पाॅलिटेक्निक इंजीनियरिंग (पीई), पैरा मेडिकल (इंटरमीडिएट स्तरीय) और पैरा मेडिकल (माध्यमिक स्तरीय पीएमएम) के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि को विस्तारित किया गया है। छात्रहित को ध्यान में रखते हुए अब अभ्यर्थी 27 अप्रैल की रात 10 बजे तक पंजीकरण कर सकेंगे। जानकारी पर्षद की वेबसाइट bceceboard.bihar.gov.in से ली जा सकती है।  21 अप्रैल तक थी आवेदन की तिथ‍ि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आवेदन की प्रक्रिया 21 अप्रैल को समाप्त होनी थी, लेकिन अब नई समय-सारणी लागू कर दी गई है। नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआइ के माध्यम से शुल्क भुगतान करने की अंतिम तिथि भी बढ़ाकर 27 अप्रैल (रात 11:00 बजे) कर दी गई है। यदि किसी छात्र के आवेदन फार्म में कोई त्रुटि रह जाती है, तो वे 28 और 29 अप्रैल को आनलाइन पोर्टल के माध्यम से सुधार कर सकता है। पीई परीक्षा 23 और पैरा मेड‍िकल की 24 मई को  पर्षद ने परीक्षा की संभावित तिथियों की भी घोषणा कर दी है। पाॅलिटेक्निक इंजीनियरिंग (पीई) 23 मई को और पैरा मेडिकल (पीएम-पीएमएम) 24 मई को होगी। परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र 20 मई को वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे। परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट किया है कि 27 अप्रैल तक सफलतापूर्वक आवेदन भरने वाले अभ्यर्थी ही सुधार प्रक्रिया का लाभ ले पाएंगे। इसके बाद किसी भी परिस्थिति में डेटा सुधार का मौका नहीं दिया जाएगा। अन्य सभी नियम और शर्तें पूर्व में प्रकाशित विज्ञापन के अनुसार ही रहेंगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से जुड़ी नवीनतम जानकारियों के लिए नियमित रूप से पर्षद की आधिकारिक वेबसाइट bceceboard.bihar.gov.in पर नजर बनाए रखें।

छापेमारी के बाद ED में बड़ा फेरबदल, जालंधर के 13 अधिकारी ट्रांसफर

जालंधर. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर कार्यालय के 13 अधिकारियों का तबादला किया गया है. कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा और जालंधर के रियल स्टेट कारोबारी चंद्रशेखर अग्रवाल पर रेड के तुरंत बाद विभाग में फेर बदल पर सवालिया निशान लगा है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सम्मन भेजे जाने के बाद जालंधर में ईडी के संयुक्त निदेशक रवि तिवारी का तबादला चेन्नई कर दिया गया था। उनकी जगह दिनेश पुरुचुरी को जालंधर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जो दिल्ली से ही काम संभाल रहे हैं। विभाग में बड़ी संख्या में अधिकारियों के तबादलों से दफ्तर की कार्यप्रणाली प्रभावित होने के साथ ही हाई प्रोफाइल मामलों की जांच पर भी असर पड़ेगा। हर वर्ष तबादलों के दौरान किसी एक स्टेशन से 2-3 अधिकारियों का ट्रांसफर होता है, लेकिन इस बार जालंधर कार्यालय से 13 अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया गया। एक साथ बड़ी संख्या में अधिकारियों के जाने और नए अधिकारियों के अभी कार्यभार संभालने में देरी के कारण फिलहाल जालंधर कार्यालय में स्टाफ की कमी की स्थिति बन गई है। तबादलों में कई सहायक निदेशकों को बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और जम्मू जैसे शहरों में भेजा गया है। जालंधर कार्यालय में चंडीगढ़, जम्मू, हैदराबाद और बेंगलुरु के अधिकारी तैनात किए जा रहे है।

पहली बार कैमरे में कैद लेपर्ड गेको! अबूझमाड़ के घने जंगलों से सामने आया हैरान करने वाला नजारा

नारायणपुर. नारायणपुर जिले के कोडिल्यार क्षेत्र से दुर्लभ जीव दिखने की खबर चर्चा में है। रात गश्त के दौरान जवानों ने लेपर्ड गेको का वीडियो रिकॉर्ड किया। विशेषज्ञ इसे जैव विविधता का सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। ऐसी प्रजातियां उन्हीं क्षेत्रों में मिलती हैं जहां पर्यावरण संतुलित हो। दुर्लभ छिपकली का रंग और बनावट इसे अलग पहचान देते हैं।अबूझमाड़ के जंगलों की समृद्धि एक बार फिर सामने आई है। लेकिन इसी क्षेत्र में विकास और खनन गतिविधियों की आहट भी है। ऐसे में संरक्षण बनाम विकास की बहस तेज हो सकती है। स्थानीय लोग पहले भी दुर्लभ जीव दिखने की बातें बताते रहे हैं। पहली बार फोटो और वीडियो सामने आने से चर्चा बढ़ी है। यह दृश्य बताता है कि प्रकृति अब भी जीवित है। अब सवाल है क्या हम इसे बचा पाएंगे?