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मुंबई की शानदार वापसी, गुजरात को 99 रन से रौंदा, अश्वनी का कमाल

अहमदाबाद इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का 31वां मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में गुजरात टाइटंस और मुंबई इंडियंस के बीच आज यानी 20 अप्रैल को खेला गया। इस मैच को मुंबई इंडियंस ने 99 रन से अपने नाम कर लिया। एमआई ने गुजरात पर यह बड़ी जीत दर्ज की है। इसका फायदा उनको नेट रन रेट में मिलेगा। बता दें कि मुंबई इंडियंस की यह लगातार चौथी हार के बाद पहली जीत थी। वहीं सीजन की एमआई की यह दूसरी जीत थी। उनके 4 अंक हो गए हैं। अब आईपीएल 2026 के पॉइंट्स टेबल में मुंबई 7वें पायदान पर आ गई है। गुजरात टाइटंस की बैटिंग पूरी तरह से फेल 200 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए गुजरात टाइटंस की बल्लेबाजी पूरी तरह से फेल हो गई। 15.5 ओवर में 100 रन बनाकर ऑल आउट हो गए। गुजरात टाइटंस के लिए सर्वाधिक 26 रन वाशिंगटन सुंदर ने बनाए। उनके अलावा कोई भी खिलाड़ी गुजरात का 20 रन का आंकड़ा पार नहीं कर पाया। मुंबई इंडियंस के लिए अश्विनी कुमार ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। 2 विकेट मिचेल सैंटनर- अल्लाह गजनफर को मिले। 1-1 विकेट हार्दिक पंड्या और जसप्रीत बुमराह ने भी लिया।साई सुदर्शन पहली बॉल पर ही पारी के आउट हो गए थे। उनको जसप्रीत बुमराह ने डक पर आउट कर दिया था। बता दें कि साई सुदर्शन आईपीएल 2026 में बुमराह की पहली विकेट बने। इन फॉर्म शुभमन गिल 14 तो जोस बटलर भी 5 रन बनाकर आउट हो गए। तिलक वर्मा ने ठोका तूफानी शतक तिलक वर्मा के नाबाद तूफानी शतक से मुंबई इंडियंस ने इंडियन प्रीमियर लीग में सोमवार को गुजरात टाइटंस के खिलाफ पांच विकेट पर 199 रन बनाने में सफल रही। तिलक ने आईपीएल के अपने पहले शतक के दौरान 45 गेंद में 8 चौकों और 7 छक्कों से नाबाद 101 रन की पारी खेलने के अलावा कप्तान हार्दिक पंड्या (15 रन, 16 गेंद, एक चौका) के साथ पांचवें विकेट के लिए 81 और नमन धीर (45) के साथ चौथे विकेट के लिए 52 रन की साझेदारी भी की। गेंदबाजी में चमके अश्वनी कुमार 200 रनों का पीछा करने उतरी गुजरात टाइटंस को पहली गेंद पर ही तगड़ा झटका लगा. जसप्रीत बुमराह ने साई सुदर्शन को आउट कर इस सीजन अपनी पहली विकेट हासिल की. इसके बाद बाएं हाथ के मीडियम पेसर अश्वनी कुमार ने जलवा दिखाते हुए 4 ओवर में 24 रन देकर 4 विकेट चटकाए. मिचेल सैंटनर और गजनफर ने 2-2 विकेट झटके. गुजरात के लिए वाशिंगटन सुंदर ने सबसे अधिक 26 रन बनाए।  मुंबई ने आखिरी 4 ओवर में 73 रन जोड़े तिलक की पारी की बदौलत मुंबई की टीम अंतिम चार ओवर में 73 रन जोड़ने में सफल रही। टाइटंस की ओर से कागिसो रबाडा सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने 33 रन देकर 3 विकेट चटकाए। मोहम्मद सिराज ने 25 जबकि प्रसिद्ध कृष्णा ने 54 रन देकर 1-1 विकेट हासिल किया।

रोबोट ने 21 KM हाफ मैराथन 50 मिनट 26 सेकेंड में पूरी करके इंसान का रिकॉर्ड तोड़ा

बीजिंग बीजिंग में एक हैरान करने वाली घटना हुई. चीन की स्मार्टफोन कंपनी Honor के रोबोट लाइटनिंग ने 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन दौड़ पूरी की मात्र 50 मिनट और 26 सेकंड में. यह समय किसी भी इंसान के वर्तमान विश्व रिकॉर्ड से भी ज्यादा तेज है।   युगांडा के धावक जैकब किप्लिमो का मानव विश्व रिकॉर्ड 57 मिनट 20 सेकंड का है. लाइटनिंग ने इसे 6 मिनट 54 सेकंड से बेहतर समय में पूरा कर दिया. यह उपलब्धि चीन की रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी में बड़ी छलांग साबित हुई है।  लाइटनिंग एक ब्राइट रेड कलर का ह्यूमनॉइड रोबोट है. इसकी ऊंचाई 169 सेंटीमीटर है. दौड़ते समय यह अपने छोटे-छोटे हाथों को बैलेंस बनाए रखने के लिए हिलाता रहा. पूरा रेस खत्म होने तक इसकी रफ्तार नहीं घटी।  यह बिना थके, बिना रुके लगातार दौड़ता रहा और फिनिश लाइन पार कर गया. आयोजकों ने बताया कि इसकी स्वायत्त नेविगेशन सिस्टम और ताकतवर बर्स्ट पावर ने इसे जीत दिलाई।  पिछले साल से कितना सुधार हुआ? सिर्फ एक साल पहले लाइटनिंग और दूसरे रोबोट इंसानों से काफी पीछे चल रहे थे. लेकिन इस साल लाइटनिंग ने पूरे मैदान को पीछे छोड़ दिया. पिछले साल का चैंपियन रोबोट भी इस बार लाइटनिंग से लगभग दो घंटे पीछे रहा. हाफ मैराथन में 100 से ज्यादा टीमों ने हिस्सा लिया, जो पिछले साल से पांच गुना ज्यादा है।  चीन रोबोटिक्स में क्यों आगे बढ़ रहा है? चीन सरकार 2015 से ही रोबोटिक्स को बहुत महत्व दे रही है. सरकार ने रोबोटिक्स को 10 प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया था ताकि चीन सस्ते मजदूर का देश होने की इमेज से बाहर निकल सके. 2025 तक बड़े पैमाने पर उत्पादन और मुख्य पार्ट्स की सप्लाई चेन मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है. इसी वजह से चीन में रोबोट स्पोर्ट्स इवेंट्स तेजी से बढ़ रहे हैं।  पिछले साल बीजिंग में दुनिया का पहला ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स आयोजित किया गया था, जिसमें रोबोट्स ने फुटबॉल, बॉक्सिंग और मार्शल आर्ट्स जैसी स्पर्धाओं में हिस्सा लिया. कुछ महीने पहले चीन के न्यू ईयर गाला में कुंग-फू कपड़े पहने रोबोट्स ने अपनी मार्शल आर्ट परफॉर्मेंस से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था. अब हाफ मैराथन जैसी घटनाएं इस क्षेत्र में चीन की तेज प्रगति को दिखा रही हैं।  अमेरिका से टेक्नोलॉजी की होड़ यह उपलब्धि चीन और अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी प्रतिस्पर्धा में चीन की बढ़ती ताकत को दर्शाती है. अमेरिका के पास अभी भी ज्यादा एडवांस्ड ह्यूमनॉइड रोबोट मॉडल हैं, लेकिन चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है. लाइटनिंग की यह जीत चीन के लिए बड़ी बात है. लाइटनिंग रोबोट द्वारा बनाया गया 50 मिनट 26 सेकंड का रिकॉर्ड अभी के लिए किसी भी इंसान से बेहतर है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है। 

टूटी सांसें, थमा जीवन: मनेंद्रगढ़ सड़क हादसे में युवक की दर्दनाक मौत, मुआवजे के बाद हुआ अंतिम विदाई का फैसला

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी मनेंद्रगढ़ की सड़कों पर एक और ज़िंदगी अचानक थम गई, पीछे छोड़ गई रोता-बिलखता परिवार और गहरे दर्द की लकीरें। सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले युवक की पहचान होने के बाद जहां एक ओर परिजनों का दुख और गहरा हो गया, वहीं मुआवजे को लेकर चल रहा विवाद भी अंततः समाप्त हो गया। भारी मन से परिजनों ने अब अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया है। इस बीच डीवी ग्रुप ने मृतक परिवार को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बंजी निवासी 37 वर्षीय राजभान सिंह अपने ससुराल ग्राम परसगढ़ी गए हुए थे। किसे पता था कि यह सफर उनका आखिरी सफर साबित होगा। परसगढ़ी में मेडिकल कॉलेज निर्माण कार्य में लगे डीवी ग्रुप के पानी टैंकर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट लगी और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसा इतना भयावह था कि उनके सिर पर आई गंभीर चोटों के कारण शुरुआत में शव की पहचान तक मुश्किल हो गई। परिजनों की बेचैनी और अनिश्चितता के बीच मनेंद्रगढ़ सिटी कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मोबाइल के जरिए मृतक की पहचान की और परिवार को सूचना दी। जैसे ही घटना की खबर गांव पहुंची, माहौल गम और गुस्से से भर गया। परिजन और ग्रामीण सड़कों पर उतर आए, न्याय और उचित मुआवजे की मांग को लेकर विरोध शुरू हो गया। इस दुख की घड़ी में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर अध्यक्ष सौरव मिश्रा अपने साथियों के साथ पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। आखिरकार जनदबाव और विरोध के बाद डीवी ग्रुप ने मृतक के परिजनों को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। साथ ही बीमा की राशि दिलाने का आश्वासन भी दिया गया। मुआवजा मिलने के बाद परिजनों ने भारी मन से अंतिम संस्कार के लिए सहमति जताई। इस फैसले के साथ ही क्षेत्र में फैला तनाव कुछ हद तक कम हुआ, लेकिन एक परिवार की जिंदगी में जो खालीपन आया है, उसे कोई भी मुआवजा कभी भर नहीं पाएगा। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

जंगल की खामोशी में गूंजी चीख: महुआ बीनने गए ग्रामीण की हाथी हमले में दर्दनाक मौत

जंगल की खामोशी में गूंजी चीख: महुआ बीनने गए ग्रामीण की हाथी हमले में दर्दनाक मौत मनेन्द्रगढ़/एमसीबी मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनकपुर क्षेत्र में एक हृदय विदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। जीवनयापन की साधारण दिनचर्या निभाने जंगल गए एक ग्रामीण की जंगली हाथी के हमले में असमय मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा जनकपुर पार्क परिक्षेत्र के खोहरा गांव में घटित हुआ, जहां अब हर ओर सन्नाटा और भय पसरा हुआ है। मृतक की पहचान 55 वर्षीय प्रेमलाल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि 19 अप्रैल की शाम करीब 6 बजे वे खड़घाट जंगल में महुआ बीनने गए थे, शायद रोज की तरह कुछ उम्मीदों के साथ। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। जंगल में अचानक सामने आए एक हाथी ने उन पर हमला कर दिया। असहाय प्रेमलाल उस भीषण हमले का सामना नहीं कर सके और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार का सहारा छीन लिया, बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव में मातम का माहौल बना हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है तथा मृतक के परिजनों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। इधर, इस हादसे के बाद ग्रामीणों में हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही को लेकर डर और चिंता दोनों बढ़ गए हैं। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में सतत निगरानी, अलर्ट सिस्टम और सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी और घर का चिराग यूं न बुझ जाए।

कांग्रेस के कई जिला अध्यक्षों की बढ़ी मुश्किलें, दिग्गज नेताओं की कुर्सी पर मंडराया खतरा

भोपाल  मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर सख्त फैसले की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक 9 से ज्यादा जिला अध्यक्षों की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है। खास बात यह है कि जिन नेताओं से संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और जनता के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाने की उम्मीद की गई थी, वे उसी कसौटी पर खरे नहीं उतर सके। बताया जा रहा है कि कई ऐसे जिला अध्यक्ष भी डेंजर जोन में हैं, जिन्हें सीधे राहुल गांधी की सहमति से जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन संगठन विस्तार, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और जमीनी सक्रियता के मामले में उनकी रिपोर्ट बेहद कमजोर पाई गई। यही वजह है कि अब कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं दिख रहा। सूत्रों के अनुसार डिंडोरी जिला अध्यक्ष ओमकार सिंह मरकाम, सतना ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाह, मंडला के अशोक मर्सकोले समेत ग्वालियर ग्रामीण, रतलाम शहर, मंदसौर, अनूपपुर, दतिया, रीवा ग्रामीण, मऊगंज और आगर मालवा के जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट खराब बताई जा रही है। हालांकि कुछ जिलाध्यक्ष जातिगत और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण राहत पा सकते हैं। करीब 8 महीने पहले संगठन सृजन अभियान के तहत इन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी। उद्देश्य था कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाए, कांग्रेस की गतिविधियों को तेज किया जाए और जनता के मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया जाए। लेकिन कई जिलों में अपेक्षित काम नहीं हुआ। AICC की ओर से वामसी चंद रेड्डी को समीक्षा के लिए भेजा गया था। उन्होंने चार दिनों तक वन-टू-वन चर्चा कर जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट तैयार की। इस दौरान संगठन की मजबूती, ब्लॉक-मंडलम-पंचायत और वार्ड समितियों के गठन, AICC और PCC के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, प्रेस कॉन्फ्रेंस, धरना-प्रदर्शन, जिला कार्यकारिणी बैठकों और कनेक्ट सेंटर को रिपोर्टिंग जैसे कई बिंदुओं पर सवाल पूछे गए। जानकारी के मुताबिक डिंडोरी के ओमकार सिंह मरकाम और रतलाम ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाहा ने तो अपने कामकाज की रिपोर्ट तक कनेक्ट सेंटर को नहीं भेजी, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर मानी जा रही है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जिन नेताओं को संगठन की नई ऊर्जा बनने के लिए जिम्मेदारी दी गई थी, वे अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। अब पार्टी ऐसे चेहरों को हटाकर नए और सक्रिय नेतृत्व को मौका देने के पक्ष में नजर आ रही है। आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है, जिससे प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में हलचल और तेज होना तय है।  

नई BMW F 450 GS भारत में 23 अप्रैल को होगी लॉन्च, कंपनी ने खोली प्री-बुकिंग

मुंबई   प्रीमियम दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी BMW Motorrad भारतीय बाजार में अपनी नई BMW F 450 GS एडवेंचर मोटरसाइकिल को 23 अप्रैल को आधिकारिक पर लॉन्च करने वाली है. लेकिन इससे पहले कंपनी ने अपनी इस मोटरसाइकिल की प्री-बुकिंग शुरू कर दी है. यह मिडिलवेट एडवेंचर मोटरसाइकिल, TVS Motor Company द्वारा BMW Motorrad के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के तहत स्थानीय रूप से निर्मित की जाएगी. BMW-TVS साझेदारी के तहत स्थानीय रूप से निर्मित दोनों कंपनियों के सहयोग से पहले ही BMW G 310 R और BMW G 310 RR जैसे मॉडल तैयार किए जा चुके हैं, और इसके साथ ही इनके TVS समकक्ष — TVS Apache RR 310 और TVS Apache RTR 310 — भी आए हैं. भारत में BMW G 310 GS को रिप्लेस करेगी नई F 450 GS नई BMW F 450 GS, भारत की लाइनअप में BMW G 310 GS की जगह लेगी. बाजार में लॉन्च होने के बाद, संभावना जताई जा रही है कि यह देश में बिकने वाली सबसे किफ़ायती BMW Motorrad एडवेंचर मोटरसाइकिल बन जाएगी. यह मॉडल पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में बेचा जा रहा है. BMW F 450 GS का इंजन इस मोटरसाइकिल में मिलने वाले इंजन की बात करें तो नई BMW F 450 GS में 420 cc का वॉटर-कूल्ड, ट्विन-सिलेंडर इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो 8,750 rpm पर 48 hp की पावर और 6,750 rpm पर 32 Nm का टॉर्क उत्पन्न करता है. इस इंजन में 13.0:1 का हाई कम्प्रेशन रेश्यो मिलता है, और यह थ्रॉटल-बाय-वायर के साथ इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल इंजेक्शन का इस्तेमाल करता है. इस इंजन को 6-स्पीड गियरबॉक्स और स्लिपर क्लच के साथ जोड़ा गया है, जबकि ट्रैक्शन कंट्रोल को BMW Motorrad DTC के ज़रिए मैनेज किया जाता है. यह मोटरसाइकिल एक स्टील ट्यूब फ्रेम पर बनाई गई है, जिसमें इंजन एक 'स्ट्रेस्ड मेंबर' (stressed member) के तौर पर काम करता है. BMW F 450 GS का हार्डवेयर बाइक में मिलने वाले सस्पेंशन की बात करें तो इसमें आगे की तरफ 43 mm के अपसाइड-डाउन फोर्क लगाए गए हैं, जबकि पीछे की तरफ एडजस्टेबल कम्प्रेशन और रिबाउंड डैम्पिंग वाले मोनोशॉक का इस्तेमाल किया गया है. इस बाइक में आगे की तरफ 19-इंच के व्हील्स और पीछे की तरफ 17-​​इंच के क्रॉस-स्पोक व्हील्स लगाए गए हैं. बाइक में ब्रेकिंग का काम 310 mm की फ्रंट डिस्क से लिया जाता है, जिसमें Brembo का चार-पिस्टन वाला कैलिपर लगाया गया है, और इसके साथ ही इसमें 240 mm की रियर डिस्क भी मिलती है, इन दोनों को BMW Motorrad ABS Pro का सपोर्ट मिलता है. इसके डाइमेंशन की बात करें तो, BMW F450 GS की सीट की ऊंचाई 33.3 इंच और व्हीलबेस 57.7 इंच है. इसमें 13.6 लीटर का फ्यूल टैंक मिलता है, और इसका वज़न 178 kg होने वाला है.

मिडिल ईस्ट संकट बेअसर, भारतीय जेनेरिक दवाओं की विदेशों में बढ़ी डिमांड

इंदौर  पीथमपुर के स्पेशल इकोनॉमिक जोन (मल्टी प्रोडक्ट एसईजेड) की फार्मा कंपनियों के शानदार प्रदर्शन से जेनेरिक दवाओं (Generic Medicine) का निर्यात बढ़ा है। ट्रंप टैरिफ और ईरान-अमरीका युद्ध (Middle east crisis) के बीच भी निर्यात में इजाफा हुआ। हालांकि अब शिपमेंट में परेशानी हो रही है। कंटेनर समय पर रवाना नहीं हो पा रहे। वाणिज्यिक और उद्योग विभाग के सेज कमिश्नर और मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआइडीसी) द्वारा एसईजेड के कारोबार की प्रगति रिपोर्ट में फार्मा इंडस्ट्री का अच्छा प्रदर्शन नजर आया है। पीथमपुर एसईजेड में 70 से 80 फीसदी फार्मा कंपनियां हैं। अप्रेल 2025 से मार्च 2026 के बीच 14302.25 करोड़ का निर्यात हुआ। यह बीते साल से करीब 10.46 फीसदी ज्यादा है। अमरीका-जर्मनी और खाड़ी देशों में सप्लाई एसईजेड में स्थापित फार्मा कंपनियों की दवाइयां अमरीका, जर्मनी, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया, यूके के साथ ही खाड़ी देशों में भी एक्सपोर्ट की जाती हैं। एसईजेड की दवा कंपनियों को विदेश के साथ देश में भी बिक्री करने की अनुमति मिल चुकी है। इसका भी फायदा हो रहा है। विदेशों में क्यों बढ़ रही मांग भारत को फॉर्मेसी ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण है सस्ती दवाएं। यहां कम लागत और भरोसेमंद गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं हैं। ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले भारत में बनी जेनेरिक दवाएं 30-40 फीसदी तक सस्ती होती हैं।यही वजह है कि अमेरिका-यूरोप जैसे देशों में इन दवाओं की डिमांड तेजी से बढ़ी है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां खुद भारत में बनवा रही हैं दवाएं इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य खर्च बढ़ने और बीमा कंपनियों के दबाव के कारण भी अब दुनिया भर की कंपनियों का रुझान भारत की सस्ती दवा कंपनियों की ओर बढ़ा है। इसके अलावा कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां खुद भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के जरिए दवाएं बनवाकर अपने ब्रांड नाम से भी बेच रही हैं। मांग लगातार बढ़ने से निर्यात बढ़ रहा है एसईजेड और अन्य जगहों की फार्मा कंपनियों की बनाई जेनेरिक दवा की विदेशों में मांग ज्यादा है। खाड़ी देशों में भी यहां से दवा सप्लाई होती है। विदेशी कंपनियां सरकार से एनओसी लेकर स्थानीय कंपनियों को ऑर्डर देकर अपने ब्रांड की दवाइयां यहीं बनवाती हैं। मांग लगातार बढ़ने से निर्यात बढ़ रहा है। -जेपी मूलचंदानी, प्रेसिडेंट बेसिक ड्रग्स डीलर्स एसोसिएशन, मध्यप्रदेश हमारे यहां सस्ती दवाएं इसलिए विदेश में बढ़ी मांग युद्ध का असर फार्मा इंडस्ट्री पर है। हमारे यहां की दवाइयां सस्ती हैं, इसलिए विदेश में मांग रहती है। युद्ध के कारण निर्यात में परेशानी हो रही है। समय पर माल नहीं भेज पा रहे। लेकिन जल्द हालात सामान्य होने की उम्मीद है। -डॉ. दर्शन कटारिया, अध्यक्ष, एमपी स्मॉल ड्रग मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन

BCCI करने जा रहा है बड़ा बदलाव, श्रेयस अय्यर को T20 कप्तानी, वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा मौका

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट में अगले कुछ महीनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मजबूत लाइन ने चयनकर्ताओं को बड़ा सोचने का मौका दिया है. आईपीएल लगातार मैच के लिए तैयार खिलाड़ी तैयार कर रहा है. ऐसे में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) 30-35 खिलाड़ियों का एक पूल बनाने की योजना बना रहा है, जो एक साथ दो मजबूत टी20 टीमें मैदान में उतार सके. एक ही मुख्य टीम से आगे की योजनाएं तुरंत बनानी होंगी क्योंकि इस साल के अंत में भारत को एक साथ कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने हैं, जिसमें एशियन गेम्स और वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज एक ही समय पर होंगी।  बीसीसीआई के एक अधिकारी ने एनडीटीवी से कहा, “एशियन गेम्स और भारत बनाम वेस्टइंडीज टी20 सीरीज एक ही समय पर होंगी. इसलिए हमें दो टी20 टीमें उतारने के बारे में सोचना होगा. अभी से 30-35 खिलाड़ियों का पूल बनाना जरूरी है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए बुलाया जा सके. आने वाले आयरलैंड दौरे के लिए, यूके के ज्यादातर दौरों की तरह, टीम में ज्यादा खिलाड़ियों को शामिल किया जाएगा. यही व्यवस्था एशियन गेम्स तक जारी रहेगी।  बोर्ड इस साल और भविष्य में भी एक साथ कई टूर्नामेंट के लिए योजना बना रहा है. अब क्रिकेट भी मल्टी-डिसिप्लिन स्पोर्टिंग इवेंट्स का हिस्सा बन गया है, जिसमें 2028 के ओलंपिक गेम्स भी शामिल हैं. फोकस गहराई, लचीलापन और तैयार रहने पर है. ये वे खूबियां हैं, जिनकी आज के व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में सबसे ज्यादा जरूरत है।  आगामी आयरलैंड दौरा एक टेस्टिंग ग्राउंड के रूप में देखा जा रहा है. ऐसे दौरों का इस्तेमाल आमतौर पर नए खिलाड़ियों को मौका देने के लिए किया जाता है. इस बार टीम में ज्यादा खिलाड़ियों को शामिल किया जा सकता है, जो एशियन गेम्स तक बढ़े हुए टैलेंट पूल की लंबी योजना को दर्शाता है. भारत सितंबर में अफगानिस्तान के खिलाफ 3 मैचों की टी20 सीरीज भी खेलेगा, हालांकि इसका शेड्यूल अभी तय नहीं हुआ है।  चयनकर्ताओं के विचार में जिन खिलाड़ियों के नाम हैं, वे आईपीएल के बढ़ते प्रभाव को दिखाते हैं. बल्लेबाजी में वैभव सूर्यवंशी, यशस्वी जायसवाल, प्रियंश आर्य और अंगकृष रघुवंशी ने अपने बेखौफ खेल से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है. रजत पाटीदार और आयुष बडोनी भी चयनकर्ताओं की नजर में हैं. शशांक सिंह और अनुकूल रॉय जैसे खिलाड़ियों को मौका मिल सकता है। 

मध्य प्रदेश में मजदूरों के लिए यूनिक हेल्थ आईडी, सरकारी योजनाओं से बढ़ेगी खुशहाली

भोपाल  मोहन सरकार अब मध्यप्रदेश के लाखों मजदूरों के हेल्थ रेकार्ड तैयार कराएगी। इसका जिम्मा शासन ने अपने श्रम विभाग को सौंप दिया है। रेकार्ड में प्रत्येक मजदूरों के स्वास्थ्य से जुड़ी रिपोर्ट होंगी। इसके लिए उन्हें आभा आइडी की तरह विभाग अलग से एक पहचान संख्या जारी करेगा। यह संख्या यूनिक होगी, जिसके जरिए इनका रेकार्ड कभी भी, कहीं भी देखा जा सकेगा। हेल्थ रिपोर्ट्स का बनेगा ऑनलाइन बैंक यहां तक कि भविष्य में श्रम विभाग मजदूरों के इलाज को लेकर अतिरिक्त सतर्कता संबंधी प्रयास भी करने जा रहा है, जिसमें उनके स्वास्थ्य से जुड़ी रिपोर्टों का ऑनलाइन बैंक भी बनवाया जाएगा। बता दें कि मध्यप्रदेश में असंगठित और निर्माण मजदूरों को संबल 2.0 योजना, ई-श्रम पोर्टल और विभिन्न कल्याणकारी बोर्डों के माध्यम से अनेक योजनाओं का लाभ दिया जाता है। क्यों पड़ी मजदूर हेल्थ रेकॉर्ड की जरूरत     मजदूरों की असमय मौत के बाद सरकार द्वारा दिए जाने वाले हित लाभों के लिए दस्तावेजों के अभाव में परेशानी     हितग्राहियों को भटकना न पड़े।     काम के चलते मजदूर और उनके परिवार के सदस्य शहर बदलते रहते हैं। दुर्घटनाग्रस्त स्थिति में सरकार कई लाभ देती हैं, लेकिन रेकॉर्ड की कमी आड़े आती है।     किसी मजदूर के साथ कोई अप्रिय स्थिति न बने, इसके लिए अतिरिक्त निगरानी करवा रहे हैं। तब भी घटनाएं होती हैं। ऐसे में आसानी से उनकी मदद की जा सकेगी। जो मजदूर पंजीकृत उन्हें मिलते हैं ये लाभ     मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल 2.0 योजना:पंजीकृत मजदूरों की सामान्य मौत पर परिजनों को 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है।     दुर्घटना में मौत पर यह सहायता राशि 4 लाख रुपए तय की गई है। इसके अलावा अनुग्रह सहायता भी।     प्रसूति सहायता:महिला श्रमिकों को प्रसव के दौरान एक निश्चित सहायता राशि दी जाती है। ताकि उनके और नवजात शिशु की सेहत का ख्याल रखा जा सके।     शिक्षा सहायता:मजदूरों के बच्चों को श्रमोदय स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा, स्कूल यूनिफॉर्म के साथ ही छात्रवृत्ति का भी प्रावधान किया गया है।     कल्याणी सहायता योजना:मृत मजदूरों की विधवाओं को हर 6 महीने में 6,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है। आभा (ABHA) योजना से कनेक्शन बता दें की आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत हर नागरिक को एक यूनिक हेल्थ आईडी दी जाती है। इसे ABHA ID कहा जाता है। इस आई के माध्यम से मेडिकल हिस्ट्री जैसे जांच रिपोर्ट, डॉक्टर की पर्ची और इलाज का रिकॉर्ड डिजिटली सुरक्षित रहता है। अब मध्य प्रदेश सरकार इसी मॉडल पर प्रदेश भर के मजदूरों के लिए अलग यूनिक हेल्थ आईडी नंबर तैयार करवा रही है। ये है फर्क फर्क सिर्फ इतना है कि यह रिकॉर्ड खासतौर पर श्रमिकों की जरूरत के हिसाब से तैयार करवाया जाएगा। इसमें काम के दौरान होने वाली बीमारियों, दुर्घटना और नियमित स्वास्थ्य जांच का पूरा डाटा शामिल होगा। मजदूरों का जीवन होगा आसान मजदूरों का जीवन आसान करने के जितने भी प्रयास हो सकते हैं, वे सभी प्रयास हमारी सरकार कर रही है। श्रम विभाग को विशेष दिशा-निर्देश दिए है कि पंजीकृत मजदूरों और उनके परिवारजनों के स्वास्थ्य संबंधी रेकॉर्ड को संधारित करने की मजबूत व्यवस्था बनाई जाए। -प्रह्लाद पटेल, मंत्री, श्रम एवं पंचायत ग्रामीण विकास विभाग, मध्यप्रदेश

नामांतरण’ प्रक्रिया में नया नियम, पार्टनरशिप डॉक्यूमेंट्स होंगे अमान्य

भोपाल  भोपाल शहर में नामांतरण कराने वालों के लिए खबर है। अब एमओयू, अनुबंध या पार्टनरशीप के दस्जावेजों को नामांतरण का आधार नहीं बनाया जाएगा। प्रशासन की ओर से तहसील कार्यालयों को इसे लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। रजिस्टर्ड डीड की बजाय अन्य दस्तावेज लगाकर नामांतरण के लिए आ रहे आवेदनों की संख्या व स्थिति देखने के बाद ये निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश समेत जिले में नामांतरण के लिए खरीद-बिक्री की रजिस्डर्ट डीड, विरासत दस्तावेज, गिफ्ट डीड, वसीयत, विभाजन, कोर्ट आदेश, पट्टा या अधिकार पत्र को आधार बनाया। इसलिए दिए ये निर्देश दरअसल कंपनियों के आपसी मर्जर एग्रीमेंट से नामांतरण के आवेदन आ रहे हैं। आठ नजूल क्षेत्रों में इस समय 100 से अधिक आवेदन हैं। मर्जर में कंपनी का संचालन तो चल जाता है, लेकिन पुरानी कंपनी के नाम रजिस्टर्ड संपत्ति का हस्तांतरण नहीं होता है। अन्य प्रदेशों की हाइकोर्ट ने कुछ मामलों में मर्जर एग्रीमेंट से नामांतरण के आदेश दिए। जिले में नामांतरण के लिए लगे मामलों में इन्हीं कोर्ट के आदेश का आधार लिया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में भू राजस्व संहिता 1959 में रजिस्टर्ड डीड का ही उल्लेख है। ऐसे में यहां इस तरह के मामलों में अन्य दस्तावेज से किए आवेदनों को अमान्य किया जाए। रोजाना 700 आवेदन, 15% अन्य दस्तावेज वाले इस समय रोजाना 700 आवेदन विभिन्न माध्यमों से नामांतरण के लिए दर्ज होते हैं। 50 फीसदी आवेदन पारिवारिक संपत्ति, बंटवारा, वसीयत के हैं, जबकि 30 फीसदी नई संपत्ति खरीदी-बिक्री वाले हैं। बाकी में अन्य दस्तावेज हैं। इन पर ही सवाल उठ रहा है। प्रशासनिक स्तर पर गलती न हो इसलिए अलर्ट भेजा गया है। गौरतलब है कि हुजूर तहसील में किंगफिशर के विजय माल्या की एक संपत्ति के नामांतरण का काफी विवाद बना था। नामांतरण को लेकर शासन ने दस्तावेज व नियम तय किए हुए हैं। इन्हीं के आधार पर हो। इसे ही सुनिश्चित कराया जा रहा है।- प्रकाश नायक, एडीएम 33 अवैध कालोनी के नामांतरण पर लगी रोक शहर में 70 अवैध कॉलोनियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जबकि 63 लोगों पर नामजद एफआइआर दर्ज की है। प्रशासन की ओर से 33 कॉलोनियों में रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक लगा दी गई है। हताईखेड़ा और रोलूखेड़ी जैसे क्षेत्रों में अवैध निर्माणों को जेसीबी मशीनों की मदद से ध्वस्त किया गया है। अवैध कॉलोनियों की अधिकता वाले क्षेत्रों में रातीबड़, नीलबड़, पिपलिया बरखेड़ी, अमरावदकलां, शोभापुर, रोलूखेड़ी, कानासैय्या, कालापानी, पचामा, थुआखेड़ा, छावनी पठार, विदिशा रोड, बैरसिया रोड, सेवनिया ओंकारा, कोलुआ खुर्द, हथाईखेड़ा, रायसेन रोड, बिशनखेड़ी, कलखेड़ा, करोंद, संतनगर, भौंरी आदि शामिल है।