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घर पर बनाएं डायमंड फेशियल ग्लो मास्क, ओट्स और बादाम से पाएँ नेचुरल चमकदार स्किन

 हर कोई चाहता है कि उसकी स्किन साफ, सॉफ्ट और ग्लोइंग दिखे लेकिन कोई जरूरी नहीं कि इसके लिए हर बार पार्लर जाना जरूरी नहीं है. आपकी किचन में मौजूद कुछ चीजें भी ग्लोइंग स्किन पाने में आपकी मदद कर सकती हैं. आज हम आपको घर पर नेचुरल चीजों से  डायमंड फेशियल ग्लो मास्क बनाना बताएंगे जो स्किन से जुड़ीं समस्याओं को कम कर चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में मदद करेगा. इस फेस मास्क को घर पर बनाना और लगाना दोनों ही बेहद आसान है. तो आइए जानते हैं घर पर डायमंड फेशियल ग्लो मास्क कैसे बना सकते हैं और इसे लगाने का सही तरीका क्या है. डायमंड फेशियल ग्लो मास्क घर पर कैसे बनाएं ? डायमंड फेशियल ग्लो मास्क बनाने के लिए 1 चम्मच ओट्स, 1 चम्मच चिया सीड्स, 1 चम्मच चावल 4 बादाम एक आउल में निकाल लें. इसके बाद इसमें पर्याप्त मात्रा में दूध डालें और इन्हें रातभर के लिए भिगोकर रख दें. फिर अगली सुबह इन सभी चीजों को अच्छे से पीसकर एक स्मूद पेस्ट बना लें. इस फेस पैक का इस्तेमाल कैसे करें? तैयार किए गए पेस्ट को चेहरे पर लगाने से पहले अच्छी तरह से साफ कर लें. फिर चेहरा सुखने के बाद इस पेस्ट को स्किन पर समान रूप से लगाएं. इसे 15 से 20 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें, ताकि यह स्किन में अच्छे से एब्जॉर्ब हो जाए. जब यह थोड़ा सूख जाए तो हल्के हाथों से मसाज करते हुए इसे हटाएं और फिर साफ पानी से चेहरा धो लें. इस फेस मास्क के क्या फायदे हैं? डायमंड फेशियल ग्लो मास्क स्किन के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है. इसमें मौजूद ओट्स, चिया सीड्स, चावल और बादाम स्किन को गहराई से साफ करने में मदद करते हैं और डेड स्किन को हटाते हैं, जिससे चेहरा साफ और स्मूद नजर आता है. दूध चेहरे को नमी देता है और उसे सॉफ्ट बनाता है. इस फेस मास्क के रेगुलर इस्तेमाल से स्किन को पोषण मिलता है, दाग-धब्बे हल्के होते हैं और चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है. साथ ही, यह स्किन को फ्रेश और हेल्दी दिखाने में भी मदद करता है, जिससे चेहरा ज्यादा दमकता हुआ नजर आता है.  

4 लाख 88 हजार किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं का हुआ उपार्जन

4 लाख 88 हजार किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं का हुआ उपार्जन बड़े एवं मध्यम श्रेणी के 1.60 लाख किसानों ने स्लॉट कराये बुक भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि प्रदेश में 4 लाख 88 हजार 270 किसानों से 19 लाख 90 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय करने वाले किसानों को 2548 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान किए गए हैं। उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रो पर प्रतिदिन, प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूं विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन, प्रति उपार्जन केन्द्र किया गया। तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। सभी जिलों में लघु सीमांत के साथ ही मध्यम एवं बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बड़े एवं मध्यम वर्ग के एक लाख 60 हजार किसानों ने स्लॉट बुक कराया है। पूरे प्रदेश में स्लॉ्ट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। किसानों की सुविधा के लिए खरीदी के लिये प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। अभी तक प्रदेश मे समर्थन मूल्य् पर गेहूं उपार्जन के लिये 9.60 लाख किसानों द्वारा 57.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी न हो एवं उपज विक्रय के लिए इंतजार न करना पड़े इसके लिये किसानों को जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिये बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।  

IMD का चेतावनी, 19 राज्यों में भारी बारिश, आंधी और ओले गिरेंगे, रेड अलर्ट जैसी स्थिति

नई दिल्ली  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने तपती गर्मी के बीच देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक हल्की से मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधी व बारिश की संभावना है। वहीं, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। मौसम विभाग के द्वारा 29 अप्रैल को जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, 29 अप्रैल से 4 मई के बीच जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की संभावना है। इस दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 29-30 अप्रैल और फिर 2-4 मई के बीच गरज-चमक के साथ छींटे पड़ सकते हैं। विशेष रूप से 29 अप्रैल को पंजाब और हरियाणा में 50-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है। राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में 29 अप्रैल को भीषण धूल भरी आंधी चलने की प्रबल संभावना है। इन राज्यों में 'रेड अलर्ट' जैसी स्थिति पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में अगले चार दिनों तक मौसम बेहद खराब रहने का अनुमान है। अरुणाचल प्रदेश में 30 अप्रैल से 2 मई के बीच कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। असम, मेघालय और नागालैंड में 29 अप्रैल से 3 मई तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। बिहार में चक्रवाती हवाओं का साया पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में अगले 6 दिनों तक आंधी-बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, 29 और 30 अप्रैल को बिहार, झारखंड और गंगा से सटे पश्चिम बंगाल में 50-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। झारखंड में इन दो दिनों के दौरान ओलावृष्टि की भी संभावना है। सिक्किम में 29 अप्रैल को अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है। मौसम विभाग की मानें तो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में अगले तीन दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। इसके अलावा, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में 30 अप्रैल से 2 मई के बीच भारी बारिश होने की संभावना है। कर्नाटक के आंतरिक इलाकों में 29 अप्रैल को ओले गिर सकते हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है।

18 किलो वजन कम करने का आसान तरीका: मिंडी कलिंग की फिटनेस जर्नी ने सबको चौंकाया

हॉलीवुड एक्ट्रेस और राइटर मिंडी कलिंग अपने जबरदस्त बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर चर्चा में हैं. 40 साल की मिंडी ने जिस तरह से करीब 18 किलो वजन कम किया है वो काफी आसान है और कोई भी उनके तरीके को फॉलो कर सकता है. अक्सर लोग सेलिब्रिटीज के वेट लॉस को किसी जादुई पिल्स या क्रैश डाइट से जोड़कर देखते हैं लेकिन मिंडी की कहानी पूरी तरह अलग है. उन्होंने बिना डाइटिंग के सिर्फ लाइफस्टाइल को बदलकर अपना वजन कम किया है. आइए जानते हैं कि आखिर वह कौन सा तरीका है जिसने मिंडी को इतना फिट बना दिया है. डाइट नहीं, पोर्शन कंट्रोल डेली मेल के मुताबित, मिंडी कलिंग ने अपनी पसंद का खाना पूरी तरह से नहीं छोड़ा. उनका कहना है कि वह आज भी वह सब खाती हैं जो उन्हें पसंद है, बस उसकी मात्रा (Portion Size) कम कर दी है. मिंडी का कहना है, 'अगर मैं खुद पर पाबंदी लगाती हूं तो वह मेरे लिए काम नहीं करता इसलिए मैं सब खाती हूं लेकिन कम खाती हूं. मैंने प्रोसेस्ड फूड और शुगर को कम कर दिया है और हाइड्रेशन पर खास ध्यान देती हूं. मैं सुबह 7 बजे से पहले ही करीब 1.5 लीटर पानी पी लेती हूं जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है.' हफ्ते में 32 किलोमीटर वॉक मिंडी का सबसे बड़ा फिटनेस मंत्र मूवमेंट है. वह जिम में घंटों पसीना बहाने के बजाय एक्टिव रहने की कोशिश करती हैं. वह हर हफ्ते करीब 32 किलोमीटर पैदल चलने या हाइकिंग करने का टारगेट रखती हैं. मिंडी के मुताबित,वह छोटे-छोटे समय का भी इस्तेमाल करती हैं जैसे बच्चों को स्कूल छोड़ने के बाद 3-4 किलोमीटर वॉक करना या फोन पर बात करते हुए टहलना. इसके अलावा वह हफ्ते में 3 दिन सुबह जल्दी उठकर जॉगिंग और योग भी करती हैं. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और रिसर्च? हेल्थ एक्सपर्ट्स मिंडी के इस वेट लॉस तरीके को सबसे कारगर मानते हैं. मायो क्लिनिक के एक्सपर्ट के मुताबिक, वजन घटाने के लिए क्रैश डाइट के मुकाबले धीरे-धीरे लाइफस्टाइल में बदलाव करना ज्यादा टिकाऊ होता है. रिसर्च बताती है कि पैदल चलना न केवल कैलोरी बर्न करता है बल्कि यह हार्ट हेल्थ और मेंटल क्लैरिटी के लिए भी बेहतरीन है. बोल्ट फॉर्मेसी की रिपोर्ट के अनुसार, रोजाना 30-60 मिनट की तेज वॉक कैलोरी डेफिसिट पैदा करने का सबसे सुरक्षित और साइंटिफिक तरीका है जो बिना किसी साइड इफेक्ट के वजन घटाने में मदद करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मिंडी की तरह स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कार्डियो का मेल बॉडी कंपोजिशन को सुधारने में मदद करता है.    

डॉक्टर दंपती केस में टिप्पणी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण अपील खारिज की

प्रायगराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया कि यदि पत्नी उच्च शिक्षित है, अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से पर्याप्त आय अर्जित करने में सक्षम है तो वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने डॉ. गरिमा दुबे की ओर से दायर एक अपील को खारिज करते हुए दिया। प्रयागराज की डॉ. गरिमा दुबे स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और उनके पति न्यूरोसर्जन हैं। उन्होंने ट्रायल कोर्ट में बच्चों और स्वयं के लिए भरण-पोषण की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। ट्रायल कोर्ट ने उनके स्वयं के भरण-पोषण आवेदन को खारिज कर दिया गया था। हालांकि, उनके तीन बच्चों के लिए 60 हजार रुपये प्रति माह का भरण-पोषण स्वीकार किया था। स्वयं के भरण-पोषण की मांग करते हुए डॉक्टर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को अस्पताल से निकाल दिया गया है। वह वर्तमान में कार्यरत नहीं हैं। वह उसी जीवन स्तर की हकदार हैं जो अलगाव से पहले था। वहीं, पति के वकील ने दलील दी कि वह एक विशेषज्ञ चिकित्सक हैं जो उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में पति से भी अधिक कमाने की क्षमता रखती हैं। ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, वह सालाना 31 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रही थीं।    

मई 2026 में बनेगा लक्ष्मी नारायण राजयोग, इन राशियों की चमकेगी किस्मत और धन

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल को जीवन के उतार-चढ़ाव से जोड़कर देखा जाता है. मई 2026 के अंत में एक बेहद खास योग बनने जा रहा है, लक्ष्मी नारायण राजयोग. यह योग तब बनता है जब शुक्र (धन, वैभव, सुख) और बुध (बुद्धि, व्यापार) एक ही राशि में आ जाते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, 14 मई को शुक्र मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे और 29 मई को बुध भी वहीं पहुंच जाएंगे, जिससे यह शुभ योग बनेगा. यह योग खासतौर पर कुछ राशियों के लिए आर्थिक तरक्की, करियर में ग्रोथ और भाग्य चमकने के योग बन रहे हैं. लक्ष्मी नारायण राजयोग क्या होता है? लक्ष्मी नारायण राजयोग ज्योतिष में बेहद शुभ और प्रभावशाली योगों में से एक माना जाता है. जब शुक्र और बुध एक ही राशि में युति बनाते हैं, तो यह योग बनता है. इन दोनों ग्रहों का मिलन व्यक्ति को धन, सफलता, बुद्धिमत्ता और सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाने वाला माना जाता है. इस योग के प्रभाव से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और करियर में नई ऊंचाइयां हासिल करने के मौके मिलते हैं. मिथुन राशि इस योग का सबसे ज्यादा असर मिथुन राशि वालों पर देखने को मिलेगा. नौकरी और करियर में अच्छी प्रगति हो सकती है. नई जिम्मेदारियां मिलने के साथ-साथ प्रमोशन के योग भी बनेंगे. व्यापार करने वालों को मुनाफा होगा और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. कन्या राशि कन्या राशि वालों के लिए यह योग कई रुके हुए काम पूरे करा सकता है. नौकरी में तरक्की और आय बढ़ने के संकेत हैं. पुराने कर्ज से राहत मिल सकती है. हर काम में सफलता मिलने की संभावना बढ़ेगी. तुला राशि तुला राशि के लोगों के लिए यह समय धन लाभ देने वाला रहेगा. व्यापार में फायदा हो सकता है. नई डील मिलने के संकेत हैं. निवेश से भी अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है. आय के नए रास्ते खुल सकते हैं. धनु राशि धनु राशि के लिए यह योग किस्मत बदलने वाला साबित हो सकता है. नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं. पार्टनरशिप में किए गए कामों से लाभ होगा. अगर कोई केस या विवाद चल रहा है, तो उसमें भी सफलता मिल सकती है. विदेश से जुड़े मौके भी मिल सकते हैं.

मेष राशि में बुध का प्रवेश, वृषभ-कन्या-मकर पर पड़ सकता है नकारात्मक असर

ग्रहों के राजकुमार के नाम से प्रसिद्ध बुध ग्रह 30 अप्रैल यानी कल सुबह 06 बजकर 38 मिनट पर मेष राशि में गोचर करने जा रहे हैं. बुध देव मीन राशि से विराजमान थे जो इनकी नीच राशि मानी जाती है. साथ ही, वह शनि ग्रह के साथ युति कर रहे थे. ऐसे में, बुध के मेष राशि में गोचर से इनकी स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा. बुध के गोचर से किन राशियों को नुकसान होने जा रहा है. आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में. वृषभ राशि बुध वृषभ राशि के बारहवें भाव में प्रवेश करेंगे. इस दौरान आपके खर्चों में वृद्धि हो सकती है. आप जीवन के कुछ बड़े फैसले जल्दबाज़ी में ले सकते हैं. मन में बेचैनी महसूस हो सकती है. संयम बरतने और सोच-समझकर फैसले लें. आर्थिक जीवन में आपको सावधानी बरतनी होगी. बिना सोचे-समझे कोई भी खरीदारी करने से बचें. आपको धन से जुड़े मामलों में सतर्क रहना होगा. आर्थिक जीवन पर ध्यान देना होगा, तब ही आप सही फैसले ले पाएंगे. उपाय– इस अवधि में इन जातकों को आध्यात्मिक गतिविधियां जैसे योग, ध्यान और मंत्र जाप में आपको मानसिक शांति प्रदान करेगा. कन्या राशि बुध कन्या राशि के आठवें भाव में गोचर करने जा रहे हैं. अचानक से होने वाले बदलावों के लिए तैयार रहना होगा. नौकरी में अचानक से कोई मुश्किल प्रोजेक्ट या बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. जिम्मेदारियों में भी कुछ बदलाव हो सकता है. किसी नए काम की शुरुआत असहज हो सकती है इसलिए परिस्थिति में खुद को ढालने की कोशिश करें. जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेने से बचना होगा. हर फैसला बहुत सोच-समझकर लें. स्वास्थ्य और मानसिक तनाव परेशान कर सकता है. उपाय– इस समय आपके लिए हरी घास पर चलना अच्छा रहेगा और प्रकृति के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं. मकर राशि बुध मकर राशि के चौथे भाव में गोचर करने जा रहे हैं. घर-परिवार में समस्याएं आ सकती हैं. माता की सेहत बिगड़ सकती है. थकन महसूस कर सकते हैं. इस अवधि में आपको कोई बड़ा और मुश्किल प्रोजेक्ट मिलने की संभावना है जो शुरुआत में आपको मुश्किल लग सकता है. उपाय– प्रतिदिन तुलसी के पौधे की पूजा करें और उसके सामने तेल का दीपक जलाएं.

बड़ा चार धाम यात्रा: जानें भारत के चारों दिशाओं में स्थित पवित्र तीर्थों का महत्व

 उत्तराखंड के चार धाम की यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, जो कि हिंदू धर्म में बहुत पवित्र मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 'बड़ा चार धाम' भी होता है? यह भारत के चार अलग-अलग दिशा में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है. इस यात्रा की स्थापना 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने की थी. उनका उद्देश्य पूरे भारत को आध्यात्मिक रूप से एकजुट करना था. इसके लिए उन्होंने देश के चार दिशाओं में चार प्रमुख धाम स्थापित किए- उत्तर में बद्रीनाथ दक्षिण में रामेश्वरम पश्चिम में द्वारका पूर्व में पुरी किन देवताओं से जुड़े हैं ये चार धाम? बड़ा चार धाम यात्रा में भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का महत्व है. बद्रीनाथ- भगवान विष्णु को समर्पित रामेश्वरम- भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग द्वारका- भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर पुरी- भगवान जगन्नाथ (विष्णु अवतार) बद्रीनाथ धाम (उत्तर भारत) बद्रीनाथ उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है. यह भगवान विष्णु का प्रमुख धाम है. मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी और माता लक्ष्मी ने उन्हें बद्री वृक्ष बनकर बचाया था. महाभारत से भी इसका संबंध बताया जाता है, कहा जाता है कि पांडव स्वर्ग जाते समय यहां से गुजरे थे. घूमने की जगहें: तप्त कुंड, वसुधारा फॉल्स, हेमकुंड साहिब, वैली ऑफ फ्लावर्स जाने का सही समय: मई से अक्टूबर रामेश्वरम धाम (दक्षिण भारत) रामेश्वरम तमिलनाडु में समुद्र के बीच स्थित एक पवित्र स्थान है. यहां का रामनाथस्वामी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. मान्यता है कि भगवान राम ने लंका जाने से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी. यही जगह राम सेतु से भी जुड़ी मानी जाती है. घूमने की जगहें: धनुषकोडी, राम सेतु, पंबन ब्रिज जाने का सही समय: अक्टूबर से अप्रैल द्वारका धाम (पश्चिम भारत) द्वारका गुजरात में समुद्र किनारे बसा एक पवित्र शहर है. इसे भगवान श्रीकृष्ण की नगरी कहा जाता है. यहां का द्वारकाधीश मंदिर बहुत भव्य है और इसे मोक्ष प्राप्ति का स्थान भी माना जाता है. घूमने की जगहें: बेट द्वारका, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, रुक्मिणी मंदिर जाने का सही समय: अक्टूबर से मार्च जगन्नाथ पुरी (पूर्व भारत) पुरी ओडिशा में स्थित है और यहां भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. यह भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. यहां हर साल भव्य रथ यात्रा निकलती है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं. घूमने की जगहें: पुरी बीच, चिलका झील, गुंडिचा मंदिर जाने का सही समय: अक्टूबर से जुलाई क्यों खास है बड़ा चार धाम यात्रा? बड़ा चार धाम यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन को समझने और आत्मिक शांति पाने का मार्ग है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से इस यात्रा को पूरा करता है, उसे पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह यात्रा हमें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सही संतुलन सिखाती है. चार धाम यात्रा और बड़ा चार धाम यात्रा में अंतर छोटा चार धाम, जिसे उत्तराखंड चार धाम भी कहा जाता है. इसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शामिल होती है. यह यात्रा लगभग 1600 किलोमीटर की होती है और आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। वहीं बड़ा चार धाम पूरे भारत में फैला हुआ है, जिसके उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारका और पूर्व में पुरी शामिल हैं. यह यात्रा करीब 6000 से 7000 किलोमीटर तक की होती है और भारत के चारों दिशाओं को जोड़ती है. दोनों यात्राओं में बद्रीनाथ धाम समान रूप से शामिल है, क्योंकि यह भगवान विष्णु का अत्यंत महत्वपूर्ण धाम माना जाता है और मोक्ष का धाम भी माना जाता है. छोटा चार धाम यात्रा प्रकृति से जुड़ा हुआ है, जहां आप पहाड़, नदियां और हिमालय की सुंदरता का आसानी से दीदार कर सकते हैं. वहीं बड़ा चार धाम यात्रा पूरे भारत की धार्मिक एकता को दर्शाती है, जहां भगवान विष्णु, भगवान शिव, भगवान कृष्ण और जगन्नाथ जी की उपासना की जाती है. बड़ा चार धाम यात्रा के लिए जरूरी ट्रैवल टिप्स 1. पहले से प्लान करें यह यात्रा लंबी और लोकप्रिय है, इसलिए टिकट और होटल पहले ही बुक कर लें क्योंकि बड़ा चार धाम में पूरे साल भीड़ रहती है. 2. सही समय चुनें रामेश्वरम, द्वारका और पुरी जाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है. वहीं, बद्रीनाथ धाम मई के आसपास जाना सही होता है. 3. जरूरी पेपर रखें बड़े चार धाम की यात्रा पर जाने के लिए आईडी प्रूफ साथ रखें. जो होटल और मंदिर दर्शन के लिए जरूरी होता है. 4. हल्का और जरूरी सामान ही पैक करें इस यात्रा पर जाने के लिए कॉटन कपड़े, हल्के ऊनी कपड़े, आरामदायक जूते और रेनकोट जरूर रखें. 5. लोकल गाइड लें इस यात्रा पर जाने के लिए लोकल गाइड की मदद जरूर ले सकते हैं. आपको जगह की सही जानकारी और इतिहास समझने में मदद मिलेगी. 6. कैश साथ रखें हर जगह डिजिटल पेमेंट नहीं चलता, इसलिए थोड़े पैसे कैश में रखें.

एटीएस की कमी के चलते मैनुअल फिटनेस पर फिर से मिली छूट

 लखनऊ केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने पांच जनवरी को जारी अपने उस आदेश को चार महीने में ही पलट दिया है, जिसके तहत वाहनों की मैनुअल फिटनेस जांच पूरी तरह बंद कर दी गई थी। अब प्रदेश के 51 जिलों में सशर्त मैनुअल फिटनेस जांच दोबारा शुरू होगी। दरअसल, अधिकांश जिलों में आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) न होने के कारण करीब 18 लाख वाहनों को फिटनेस के लिए 100 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ रही थी। सीतापुर और रायबरेली जैसे जिलों के वाहन स्वामियों को लखनऊ आना पड़ रहा था, जिससे भारी असुविधा हो रही थी। केंद्रीय मंत्रालय के सचिव यतेंद्र कुमार द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, जिन जिलों में एटीएस तैयार हो रहे हैं, वहां निश्चित अवधि तक ही मैनुअल जांच की अनुमति होगी। अलीगढ़ और प्रतापगढ़ में अब केवल एटीएस के जरिये ही फिटनेस होगी। गोरखपुर, अयोध्या, आजमगढ़, बुलंदशहर और हापुड़ में 30 जून तक मैनुअल जांच की सुविधा मिलेगी तथा रायबरेली, गाजीपुर, मथुरा और प्रयागराज को 30 सितंबर तक मोहलत दी गई है। इसके अलावा 31 दिसंबर तक पीलीभीत, चित्रकूट, बलरामपुर, हरदोई, ललितपुर, संभल, जौनपुर, चंदौली, भदोही, बदायूं, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बांदा, सीतापुर, अमरोहा, हमीरपुर, महोबा, कन्नौज, औरैया, शाहजहांपुर, कौशांबी, अंबेडकर नगर, अमेठी, बागपत, बहराइच, बलिया, बस्ती, देवरिया, फर्रुखाबाद, गोंडा, कासगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, महराजगंज, मऊ, संतकबीर नगर, शामली, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर व सुलतानपुर सहित 40 जिलों में यह सुविधा रहेगी। एटीएस की वर्तमान स्थिति प्रत्येक जिले में तीन-तीन निजी एटीएस खोलने की योजना थी। वर्तमान में बिजनौर, फिरोजाबाद, झांसी, कानपुर देहात, मुरादाबाद, वाराणसी, बरेली, रामपुर, फतेहपुर, कानपुर नगर, आगरा और मीरजापुर सहित कुल 26 जिलों में ही एटीएस संचालित हैं। राजधानी लखनऊ में बख्शी का तालाब स्थित एटीएस के अलावा अब बंथरा में दूसरा केंद्र बनकर तैयार है। इससे पूर्व केंद्रीय मंत्रालय ने 14 नवंबर 2024, एक अप्रैल 2025 और फिर 17 नवंबर को प्रमुख सचिव परिवहन को पत्र लिखकर एक जनवरी से अनिवार्य रूप से एटीएस के माध्यम से फिटनेस कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, धरातल पर पर्याप्त संसाधन न होने के कारण इस व्यवस्था को चार महीने के भीतर ही बदलना पड़ा। जुर्माने का प्रविधान नियम के अनुसार, नए व्यावसायिक वाहनों को पंजीकरण के बाद आठ वर्ष तक प्रत्येक दो साल में और उसके बाद हर साल फिटनेस करानी अनिवार्य है। फिटनेस न होने पर पहली बार पकड़े जाने पर 5000 रुपये और दूसरी बार 10,000 रुपये के चालान का प्रविधान है।  

कलकत्ता हाई कोर्ट ने IPS अजय पाल शर्मा को दी राहत, मतदान तक बनी रहेगी उनकी तैनाती

 कलकत्ता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार को दूसरे चरण का मतदान चल रहा है। इसके ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर और ऑब्जर्वर बनकर पश्चिम बंगाल गए यूपी कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा के बीच शुरू हुई तकरार की चर्चा देश भर में हो रही है। इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट से आईपीएस अजय पाल शर्मा को बड़ी राहत मिली है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 29 अप्रैल तक चुनाव ड्यूटी पर तैनात किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई आदेश जारी नहीं करेगा, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण होना है। एक वकील ने जस्टिस कृष्ण राव की कोर्ट में आईपीएस अफसर अजय पाल शर्मा को जोन में काम करने से रोकने के लिए मौखिक रूप से प्रार्थना की थी। आईपीएस अजय पाल साउथ 24 परगना जिले में राज्य विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक हैं। वकील का आरोप था कि अजय पाल आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं। इस पर, जस्टिस राव ने कहा कि वह 29 अप्रैल तक चुनाव ड्यूटी पर मौजूद किसी भी ऑफिसर के बारे में कोई ऑर्डर पास नहीं करेंगे। वकील ने अर्जी दी कि इस बारे में याचिका दायर करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। जब वकील ने आरोप लगाया कि अजय वोटर्स को डरा रहे हैं। इस पर जस्टिस राव ने कहा कि अगर कोई शिकायत है तो चुनाव आयोग से संपर्क करें। वकील ने दावा किया कि आयोग को बताया गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया है। मतदान से पहले छाए ‘सिंघम’ और ‘पुष्पा’ उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस अजय पाल शर्मा और टीएमसी नेतृत्व के बीच मतदान से एक दिन पहले मंगलवार को गतिरोध बढ़ गया। ‘सिंघम’ के नाम से चर्चित अफसर ने जहांगीर खान का नाम लेकर कुछ लोगों पर सख्ती दिखाई तो इसके जवाब में टीएमसी नेता ने ‘झुकेगा नहीं’ वाला पुष्पा अंदाज दिखाया। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने आरोप लगाया है कि अजय पाल शर्मा पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को डरा धमका रहे हैं। जहांगीर खान ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को मतदाताओं को डराने-धमकाने नहीं देंगे। यह बंगाल है, अगर वह (शर्मा) ‘सिंघम’ हैं, तो मैं ‘पुष्पा’ हूं। फाल्टा में यूपी के पुलिस अधिकारियों की किसी भी तरह की धमकी या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। टीएमसी उम्मीदवार ने कहा कि शर्मा पुलिस बल के साथ आए और मुझ पर तथा मेरे लोगों पर दबाव डालने की कोशिश की। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे कृत्य स्वीकार्य नहीं हैं।