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बक्सर से दरभंगा तक फैला फर्जी आधार नेटवर्क, सीएसपी संचालक गिरफ्तार

भोजपुर भोजपुर में फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने के मामले में हुई कार्रवाई का तार अब दरभंगा से जुड़ गया है। बक्सर पुलिस ने बिरौल थाना के सहयोग से सीएसपी सेंटर चलाकर फर्जी आधार बनाने वाले आरोपी फूलहसन को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से एक बड़े साइबर गिरोह का खुलासा हुआ है। लैपटॉप, प्रिंटर और बायोमेट्रिक मशीन बरामद गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से लैपटॉप, प्रिंटर, फिंगरप्रिंट मशीन, स्कैनर सहित कई उपकरण बरामद किए हैं। इसके अलावा जन्मतिथि, नाम और पता बदलने से जुड़े फर्जी दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस के अनुसार फूलहसन पूरे साइबर गिरोह का मास्टरमाइंड है। बक्सर से मिली थी अहम जानकारी इससे पहले बक्सर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उन्होंने फूलहसन का नाम बताया, जिसके बाद बक्सर पुलिस दरभंगा पहुंची और बिरौल थाना की मदद से उसे गिरफ्तार किया गया। 2024 में भी हो चुकी है गिरफ्तारी बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में बिरौल के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी उमेश भारती के समय भी आरोपी के कोठी पुल स्थित सीएसपी सेंटर पर फर्जी आधार कार्ड बनाने और जन्मतिथि में बदलाव की शिकायत मिली थी। उस समय कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया था।   अधिकृत आईडी का दुरुपयोग कर बनाते थे फर्जी आधार जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य अधिकृत आधार पंजीकरण केंद्र के लॉगिन आईडी, ऑपरेटर आईडी और बायोमेट्रिक पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से आधार कार्ड बना रहे थे। इसके साथ ही जन्मतिथि, पता, मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक अपडेट भी अवैध रूप से किया जाता था। इस काम के एवज में सीएसपी संचालक गरीब लोगों से 5,000 से लेकर 25,000 रुपये तक वसूलते थे। इस तरह यह गिरोह लंबे समय से लोगों को ठग रहा था। पुलिस की अपील और जांच जारी बिरौल के इंस्पेक्टर अमृत लाल वर्मन ने बताया कि बक्सर पुलिस के साथ मिलकर फूलहसन को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि आधार से जुड़े किसी भी काम के लिए केवल अधिकृत केंद्रों पर ही जाएं। पुलिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उन परिवारों के भरोसे पर हमला है जो आधार कार्ड को अपने जीवन का अहम हिस्सा मानते हैं। फिलहाल जांच जारी है कि इस गिरोह का असली मास्टरमाइंड कौन है और कहां से इस नेटवर्क को संचालित किया जा रहा है।  

बस्तर की पद्मा के घर लौटी रोशनी: साय सरकार की बिजली बिल समाधान योजना बनी सहारा

रायपुर  छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की जन-कल्याणकारी नीतियां अब धरातल पर बदलाव का पर्याय बनती जा रही हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 उन निर्धन परिवारों के लिए एक बड़ा संबल बनकर उभरी है, जो भारी भरकम बिजली बिल के कारण अंधकार में रहने को मजबूर थे। बस्तर जिले के ग्राम बालेंगा की रहने वाली पद्मा कश्यप की कहानी इस योजना की सफलता और संवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण है। पद्मा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। अपने माता-पिता को खो देने के बाद वह घर में अकेली रह गई थीं। सीमित संसाधनों और आय का कोई ठोस जरिया न होने के कारण उनके घर का बिजली बिल धीरे-धीरे बढ़कर 9,000 रुपये तक जा पहुँचा था। एक अनाथ बेटी के लिए इतनी बड़ी राशि का भुगतान करना लगभग असंभव था, जिससे घर की बिजली कटने का डर और अंधेरे का साया उनके भविष्य पर मंडराने लगा था। ऐसे कठिन समय में प्रदेश सरकार की बिजली बिल भुगतान समाधान योजना उनके लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई। इस योजना के अंतर्गत पद्मा को उनके बकाया बिल पर 4,000 रुपये की बड़ी राहत प्रदान की गई, जिससे उनकी आर्थिक चिंता काफी हद तक कम हो गई। इस सहायता ने न केवल उनके घर को फिर से रोशन किया, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा का अहसास भी कराया। अपनी खुशी जाहिर करते हुए पद्मा कहती हैं कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के इस मानवीय निर्णय ने उनके जैसे कई जरूरतमंदों को सहारा दिया है। आज वह इस योजना की बदौलत अपना बकाया बिल चुकाने में सक्षम हो पाई हैं, जिसके लिए वह मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। यह योजना न केवल वित्तीय राहत दे रही है, बल्कि प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के मन में सरकार के प्रति अटूट विश्वास भी पैदा कर रही है।

महिला आरक्षण बिल पर मंथन: छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में सीएम साय का बड़ा प्रस्ताव

रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया. आंसदी ने चर्चा के लिए 4 घण्टे का समय निर्धारित किया. मुख्यमंत्री साय के प्रस्ताव के बाद नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत अशासकीय संकल्प प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे आसंदी ने अग्राह्य कर दिया. इस पर डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री तो निंदा प्रस्ताव लाने वाले थे, लेकिन यह शासकीय संकल्प प्रस्ताव तो निंदा पर नहीं है. इसके साथ ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सदन के बाहर और अंदर सत्ता पक्ष की ओर महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है. प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक लता उसेंडी ने कहा कि महिला आरक्षण पर रुकावट बनने का काम विपक्ष ने किया. महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में गिराने का काम विपक्ष ने किया. महिलाओं की भावनाओं और सम्मान का ख्याल नहीं रखा गया. कांग्रेस का पक्ष रखते हुए अनिला भेड़िया ने कहा कि महिला आरक्षण का कांग्रेस समर्थन करती है. महिला आरक्षण 2029 में लागू किया जाना चाहिए. 2023 में बिल पारित है. इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए. जिन्होंने नारी का अपमान किया उसका विनाश हुआ है. रामायण में माता सीता का हरण और रावण का विनाश नारी अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा और सम्मान का उदाहरण है.

गुरु ग्रंथ साहिब कानून पर हाई कोर्ट में सुनवाई, समानता और धर्मनिरपेक्षता पर उठे गंभीर सवाल

चंडीगढ़  पंजाब सरकार के बहुचर्चित “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026” के खिलाफ अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक और संवैधानिक चुनौती पहुंच गई है। एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया (सीआईपीबीसी) ने इस संशोधन कानून को धर्म-विशेष आधारित, भेदभावपूर्ण और संविधान विरोधी बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसके क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने तथा इसे रद्द घोषित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि पंजाब सरकार ने एक विशेष धार्मिक ग्रंथ को पृथक और अधिक कठोर दंडात्मक संरक्षण देकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन किया है। चर्च का तर्क है कि राज्य किसी एक धर्म या उसके पवित्र प्रतीक को ऐसा विशिष्ट विधायी संरक्षण नहीं दे सकता, जिससे अन्य धार्मिक समुदायों के बीच असमानता की भावना उत्पन्न हो। याचिका में इसे संविधान की मूल संरचना में शामिल धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कदम बताया गया है। अन्य धर्म भी प्रभावित हो सकते हैं इंडियन चर्च एक्ट, 1927 के तहत गठित धार्मिक निकाय होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पंजाब सरकार स्वयं अपने पूर्व प्रस्तावित “पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ऑफेंसेज अगेंस्ट होली स्क्रिप्चर्स बिल, 2025” में स्वीकार कर चुकी थी कि पवित्र ग्रंथों के अपमान की घटनाएं केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब तक सीमित नहीं, बल्कि गीता, कुरान और अन्य धार्मिक ग्रंथ भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में 2026 के संशोधन के जरिए केवल एक धार्मिक ग्रंथ के लिए पृथक कठोर आपराधिक ढांचा तैयार करना राज्य की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। प्रावधानों पर विशेष आपत्ति याचिका में संशोधन कानून के उन प्रावधानों पर विशेष आपत्ति जताई गई है, जिनमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की प्रिंटिंग, प्रकाशन, भंडारण और वितरण पर कड़ा नियामक नियंत्रण, एसजीपीसी के माध्यम से केंद्रीय रजिस्टर, अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाना तथा गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा शामिल है। चर्च का कहना है कि इस प्रकार का विशेष दंड विधान अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों को तुलनात्मक रूप से कमतर कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। एसआर बोम्मई, केशवानंद भारती और शायरा बानो जैसे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि राज्य धार्मिक तटस्थता से विचलित नहीं हो सकता। एक धर्मग्रंथ को कानून संरक्षण साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 सहित मौजूदा केंद्रीय कानून धार्मिक भावनाओं से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं, इसलिए पृथक राज्य कानून विधायी संतुलन और संवैधानिक वैधता दोनों पर सवाल खड़े करता है। चर्च की जनरल काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि वह सभी धर्मग्रंथों के सम्मान और अंतर-धार्मिक सौहार्द के पक्ष में है, लेकिन किसी एक धर्मग्रंथ को विशिष्ट कानूनी संरक्षण देकर अन्य आस्थाओं को अपेक्षाकृत कमतर दर्जा देना संवैधानिक समानता के विरुद्ध है।  

बुद्ध पूर्णिमा 2026: वैशाख पूर्णिमा पर 1 मई को होगा स्नान-दान और पूजा का विशेष महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा मनाई जाती है, जिसका संबंध चंद्रमा से होता है. इन्हीं पूर्णिमाओं में वैशाख मास की पूर्णिमा, जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है, बेहद खास मानी जाती है. साल 2026 में यह पर्व 1 मई को मनाया जाएगा. तिथि की बात करें तो पूर्णिमा 30 अप्रैल की रात 9:12 बजे से शुरू होकर 1 मई की रात 10:52 बजे तक रहेगी. इसलिए पूजा-पाठ और दान का महत्व 1 मई को अधिक रहेगा. स्नान-दान का शुभ समय इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है. स्नान-दान का शुभ मुहूर्त सुबह 4:15 बजे से 4:58 बजे तक रहेगा. वहीं शाम को लगभग 6:52 बजे चंद्रमा के दर्शन होंगे. क्यों खास है वैशाख पूर्णिमा? बुद्ध पूर्णिमा को वैशाख पूर्णिमा भी कहते हैं. वैशाख पूर्णिमा को चंद्रमा अपनी पूर्ण अवस्था में होता है, जिससे उसकी ऊर्जा सबसे ज्यादा प्रभावशाली मानी जाती है. ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा मन और भावनाओं को नियंत्रित करता है, इसलिए इस दिन किए गए उपाय जल्दी असर दिखाते हैं. धार्मिक मान्यता यह भी है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लिया था, इसलिए इसे कूर्म जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें? इस दिन सुबह स्नान के बाद व्रत रखें और शाम को चंद्रमा निकलने पर उन्हें जल अर्पित करें. अर्घ्य देते समय सफेद फूल, चावल और कुमकुम का उपयोग करें. मन में अपनी इच्छा बोलकर प्रार्थना करें. अगर आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, तो इस दिन पूजा करने से विशेष लाभ मिल सकता है. इन उपायों से मिलेगा लाभ – इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना या करवाना शुभ होता है. – गरीबों को भोजन या कपड़े दान करने से पुण्य बढ़ता है. – भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशियां आती हैं. – हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने से मानसिक तनाव और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं. इन बातों का रखें ध्यान पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा में बासी फूल या टूटे चावल इस्तेमाल न करें. इस दिन क्रोध और नकारात्मक सोच से दूर रहें. तामसिक भोजन से बचना भी जरूरी माना गया है. रात में चांदनी में बैठकर 'ऊं सोमाय नमः’ मंत्र का जाप करना मन को शांति देता है और भविष्य में अच्छे परिणाम दिला सकता है.

गर्मी में ककड़ी खाने के फायदे, शरीर को रखे ठंडा और हाइड्रेटेड

 गर्मियों के मौसम में शरीर को ऐसे फूड्स की जरूरत होती है जो पेट को ठंडा रखें, आसानी से पच जाएं और शरीर को हाइड्रेट रखें. ककड़ी यानी लंबा खीरा एक ऐसा ही आसान और हेल्दी ऑप्शन है जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है बल्कि कई तरह से फायदा भी पहुंचाता है. यह सड़क किनारे मार्केट में आसानी से मिल जाती है और सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. आप इसे ऐसे ही खा सकते हैं या सलाद में मिलाकर भी खा सकते हैं. आइए जानते हैं कि गर्मी के इस मौसम में ककड़ी खाना आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है. शरीर को रखे हाइड्रेट गर्मियों में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है लेकिन ककड़ी खाने से यह समस्या कम हो सकती है. इसमें लगभग 96% पानी होता है जो शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने में मदद करता है. धूप में बाहर रहने पर इसे खाना बहुत फायदेमंद होता है. स्किन के लिए फायदेमंद गर्मी में धूप, पसीना और प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा हमारी स्किन पर पड़ता है. ऐसे में ककड़ी स्किन को अंदर से ठंडक देती है और उसे फ्रेश बनाए रखने में मदद करती है. इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं और झुर्रियों को कम करने में भी मदद करते हैं. शरीर को ठंडक देता है जब गर्मी बहुत ज्यादा होती है तो ऐसे खाने की जरूरत होती है जो शरीर को ठंडा रखे. ककड़ी में नेचुरल ठंडक होती है, इसलिए यह बॉडी टेंपरेचर कम करने में मदद करती है. इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण यह गर्मियों में शरीर को ठंडा और तरोताजा बनाए रखती है. वजन कम करने में मददगार अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो ककड़ी एक बेहतर ऑप्शन है. इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और पानी ज्यादा होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. इससे बार-बार खाने की आदत कम होती है और वजन कंट्रोल में रहता है. डाइजेशन को बेहतर बनाती है अगर आपको पेट भारी लग रहा है या ब्लोटिंग की समस्या है तो ककड़ी खाना फायदेमंद हो सकता है. इसमें फाइबर होता है जो डाइजेशन को बेहतर बनाता है और पेट को हल्का रखता है. यह आसानी से पच जाती है, इसलिए भारी खाना खाने के बाद भी इसे खाया जा सकता है.  

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, वैष्णो देवी से लौट रहा परिवार खत्म

अलवर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना अंतर्गत मौजपुर के चैनल नंबर 115/300 के पास चलती कार में सीएनजी लीकेज होने से लगी आग में एक ही परिवार के 5 लोग जिंदा जलकर राख हो गए. इस घटना में चालक भी बुरी तरह झुलस गया, जिसे जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में इलाज कराया गया है. यह घटना रात देर रात करीब 11 बजे हुई. सूचना पर मौके पर पहुंची लक्ष्मणगढ़ पुलिस और दमकल गाड़ी से आग पर काबू पाने की प्रयास किए गए. आग कि सूचना के बाद अलवर से पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी और डीएसपी कैलाश जिंदल मौके पर पहुंचे.  वैष्णो देवी से लौट रहा था परिवार पुलिस ने बताया कि मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के चैनपुरा गांव निवासी एक परिवार वैष्णो देवी के दर्शन करके वापस अपने घर लौट रहे थे. परिवार इस गाड़ी को किराए पर लेकर आया था, जैसे ही यह अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के मौजपुर में पहुंचे. वहां अचानक सीएनजी गैस का रिसाव हो गया और रिसाव इतना तेज था कि तुरंत ही आग लग गई और आग के चलते गाड़ी में सवार सभी लोग जिंदा जल गए. घटना के समय सभी सो रहे थे आग का गोला बनने के बाद किसी भी सवार को बचाने का मौका नहीं दिया. बताया जा रहा है गाड़ी में सवार परिवार नींद में थे. अगर जगे हुए होते तो शायद चालक की तरह वो बाहर निकल पाते. श्योपुर निवासी चालक विनोद कुमार बड़ी मुश्किल से उसमें निकाल पाया. वो भी काफी जल गया. जिसे पुलिस द्वारा एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर के लिए रेफर किया गया. जहां उसका इलाज चल रहा है. रात 11 बजे हुआ हादसा लक्ष्मणगढ़ की थाना प्रभारी नेकी राम ने बताया कि यह बीती रात करीब 11 बजे के आसपास हुई. टैक्सी पर यह परिवार गाड़ी लेकर आया था. ये श्योपुर के चैनपुर निवासी हैं. सीएनजी और पेट्रोल से चलने वाली इस गाड़ी में गैस रिसाव के कारण यह आग लगी. आग इतनी भयानक थी कि इसमें किसी को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला. इस हादसे में दो महिलाए, एक पुरुष और दो बच्ची जिंदा जलकर राख हो गए. उनके कंकाल भी नहीं बचे हैं. चालक गरीब 80 फ़ीसदी झुलस गया है, उसे पहले पिनान के अस्पताल ले लाया गया. जहां से हालत खराब होने पर उसे तुरंत जयपुर के लिए रेफर कर दिया गया. मौके पर ही मेडिकल टीम को बुलाया गया है, जिससे डीएनए सैंपल ले लिया गया. उनकी पहचान की गई. DNA टेस्ट में शवों की होगी पहचान मृतकों में परिवार का मुखिया संतोष ( 35 साल) उसकी पत्नी शशि, सास पार्वती और पुत्री रागिनी पुत्री संतोष व साक्षी पुत्री संतोष के रूप में हुई है. पुलिस ने बताया कि परिवार जनों को सूचना दे दी गई है. रात को ही दो दमकल मौके पर बुलाई गई थी. जिसे आग पर काबू पाया आग बुझाने से पहले ही चालक को छोड़कर सभी सवार आग की भेंट चढ़ गए. लक्ष्मणगढ़ सीएचसी के डॉक्टर अमित गुप्ता ने बताया कि डीएनए टेस्ट से मृतकों की पहचान होगी. शव पूरी तरह से राख़ बन चुके हैं. मेडिकल बोर्ड से परिजनों के आने के बाद उनके पोस्टमार्टम में आगे की प्रक्रिया की जाएगी.

दिल्ली के द्वारका में तीन बच्चों की मौत, गोल्फ कोर्स तालाब में डूबने से हुआ हादसा

नईदिल्ली  राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ है। द्वारका के सेक्‍टर 24 गोल्फ कोर्स डीडीए के तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत हो गई। इस मामले की सूचना दमकल को सुबह 7:07 बजे मिली। घटना के बाद से इलाके में कोहराम मचा हुआ है। 8 से 10 साल के बीच थी बच्चो की उम्र पुलिस के अनुसार, द्वारका के सेक्टर 23 पुलिस स्टेशन में सुबह लगभग 7:07 बजे एक पीसीआर कॉल आई, जिसमें गोल्फ कोर्स परिसर में स्थित एक तालाब में तीन बच्चों के डूबने की जानकारी दी गई थी। इसपर तुरंत कार्रवाई करते हुए, स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) पुलिस कर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अन्य आपातकालीन एजेंसियों को भी तत्काल सूचित किया गया। मौके पर पहुंचने पर अधिकारियों ने तालाब में डूबे हुए 8 से 10 वर्ष की आयु के तीन बच्चों को पाया। दमकल कर्मियों की सहायता से तीनों को पानी से बाहर निकाला गया। हालांकि, उन्हें घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया गया। तालाब में नहाने गए थे बच्चे प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि बच्चे शाम को देर से चारदीवारी फांदकर परिसर में दाखिल हुए होंगे। उनके कपड़े तालाब के बाहर मिले, जिससे पुलिस को संदेह है कि वे वहां नहाने गए थे और गलती से डूब गए। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि विस्तृत जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकलेगा। बच्चों की पहचान में जुटी पुलिस बच्चों की पहचान का काम फिलहाल जारी है, और इस रिपोर्ट को लिखे जाने तक उनके विवरण से मेल खाने वाली किसी भी गुमशुदा व्यक्ति की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस ने मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है।

ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट भारतीयों की फ्लाइट दिल्ली पहुंची, पंजाब सरकार ने भेजे टेंपो ट्रैवलर और गाड़ियाँ

चंडीगढ़  स्ट्रेलिया से 15 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है, उनमें एक महिला समेत 11 पंजाबी हैं। इन लोगों की फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गई है। वहीं, पंजाब सरकार की टीमें भी उन्हें लेने के लिए दिल्ली पहुंची है। उनके लिए वाहनों का इंतजाम किया गया है।  इन जिलों के रहने वाले हैं लोग मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक जो लोग डिपोर्ट किए गए हैं, वह जांलधर, होशियारपुर, खन्ना, मोगा, नवांशहर, गढ़शंकर, तरनतारन, फिरोजपुर और रूपनगर के रहने वाले हैं। सीएम भगवंत मान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इन लोगों ने आस्ट्रेलिया में जाकर वहां के नियम तोड़े हैं, जिस वजह से उन्हें डिपोर्ट किया गया है। इन लोगों की पहचान जसवंत सिंह (34 वर्ष), अंग्रेज सिंह (32 वर्ष), सतिंदरजीत सिंह शेरगिल (31 वर्ष), गुरप्रीत सिंह संधू (30 वर्ष), जगजीत सिंह (35 वर्ष), जसप्रत सिंह (35 वर्ष), निर्मल सिंह (38 वर्ष), श्रुति शर्मा (35 वर्ष), रणजी सिंह (35 वर्ष), हरप्रीत सिंह (41 वर्ष) और गगनदीप सिंह (25 वर्ष) शामिल हैं। पंजाब के 11 लोगों समेत कुल 15 भारतीय नई दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे। इनमें एक महिला भी शामिल है। यह कार्रवाई अवैध रूप से ऑस्ट्रेलिया में रहने या वीजा नियमों के उल्लंघन के चलते की जा रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह आज उन्हें रिसीव करने नई दिल्ली जा रहे हैं। डिपोर्ट किए गए कुल 15 लोगों में पंजाब के 11, तेलंगाना के दो और हरियाणा-उत्तराखण्ड के एक एक लोग शामिल हैं। ये सभी आज रात दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। पहले अमेरिका से डिपोर्ट किए गए थे पंजाबी इससे पहले अमेरिका ने एक साल पहले नई इमिग्रेशन पॉलिसी के तहत 104 अवैध प्रवासी भारतीयों को जबरन डिपोर्ट कर दिया था। अमेरिकी एयरफोर्स का विमान सी-17 ग्लोबमास्टर इन्हें लेकर अमृतसर में एयरफोर्स के एयरबेस पर उतरा था। इनमें पंजाब के 30, हरियाणा-गुजरात के 33-33 लोग शामिल थे। इनके कुछ परिवार और 8-10 साल के बच्चे भी शामिल थे। अमृतसर एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इन लोगों का वैरिफिकेशन किया गया। यहां से इमिग्रेशन और कस्टम से क्लियरेंस के बाद पंजाब पुलिस को सौंप दिया गया। करीब साढ़े 3 घंटे बाद US एयरफोर्स विमान वापस लौट गया था।

UP Transport Data Leak? निजी DBA पर गंभीर सवाल, वर्षों से एक ही जगह जमे कर्मचारी निशाने पर

लखनऊ परिवहन विभाग का संवेदनशील डेटा निजी डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर (डीबीए) के हाथों में है। प्रदेश के कई जिलों में अफसरों के खास डीबीए वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, ये डीबीए दलालों को वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंसों से संबंधित विवरण उपलब्ध करा रहे हैं। इससे विभाग का पूरा डेटा गंभीर खतरे में है और दलालों से इनकी मिलीभगत उजागर हुई है।   करीब बीस वर्ष पहले परिवहन विभाग को ऑनलाइन डेटा रखरखाव के लिए ऐसे कर्मचारियों की आवश्यकता महसूस हुई थी। आरटीओ-एआरटीओ को डेटा निकासी के लिए अधिकृत किया गया था, लेकिन डीबीए ही उनकी यूजर आईडी से डेटा निकालते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ियों की फिटनेस, परमिट और उनकी संख्या सहित पूरा डेटा डीबीए की आसान पहुंच में है। वर्षों से एक ही जिले में तैनात डीबीए की दलालों से सांठगांठ हो गई है। वे दलालों को डीएल, परमिट और फिटनेस जैसी महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मिलीभगत की जानकारी वरिष्ठ अफसरों को भी है। प्रदेशभर में कुल 80 डीबीए कार्यरत हैं, जिनमें से दो लखनऊ में तैनात हैं। बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, अमरोहा, वाराणसी, मुरादाबाद, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और कानपुर में कई डीबीए वर्षों से एक ही जगह पर हैं। भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर सवाल ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी ने डीएल बनाने वाले निजीकर्मियों की शिकायत की थी। उन्होंने दलालों से मिलीभगत का हवाला देते हुए पूर्व परिवहन आयुक्त किंजल सिंह से शिकायत की। इसके बाद बिना किसी जांच के निजी डीएलकर्मियों का प्रदेशभर में स्थानांतरण और हटाने का सिलसिला शुरू हुआ। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अपर परिवहन आयुक्त, आईटी पर निजीकर्मियों से वसूली के आरोप भी लगे थे। किंजल सिंह ने इन मामलों में कोई जांच नहीं करवाई। सवाल उठता है कि जब निजी डीएलकर्मियों का स्थानांतरण हो सकता है, तो डीबीए को क्यों बचाया जा रहा है। डीबीए के स्थानांतरण में विफलता ऐसा नहीं है कि डीबीए के स्थानांतरण की कोशिशें नहीं हुईं। तीन साल पहले परिवहन विभाग के आला अफसरों ने स्थानांतरण की कवायद शुरू की थी। हालांकि, अफसरों के खास और जुगाड़ी डीबीए इस प्रक्रिया से बच निकलने में सफल रहे। उन पर किसी भी तरह की आंच नहीं आई और वे अपनी जगह पर बने रहे। सूत्र बताते हैं कि ये डीबीए दलालों के साथ मिलकर अफसरों के लिए भी काम करते हैं। इसी कारण अफसरों ने उन्हें बचाने के लिए पूरा जोर लगा दिया। डाटा सुरक्षा और मिलीभगत का खतरा डीबीए की आसान पहुंच के कारण विभाग का संवेदनशील डाटा लगातार खतरे में है। दलालों को गोपनीय जानकारी मिलने से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है। यह स्थिति परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अफसरों की मिलीभगत या उदासीनता के कारण यह समस्या वर्षों से बनी हुई है। डाटा सुरक्षा सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है। डीबीए की तैनाती और स्थानांतरण नीतियों की समीक्षा करना महत्वपूर्ण है।