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मुरैना में भय का माहौल: वन आरक्षक की हत्या और पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल

मुरैना  मुरैना की जनता लंबे समय से कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित थी। बढ़ते अपराध और वन आरक्षक की हत्या जैसी गंभीर घटनाओं ने लोगों में भय का माहौल बना दिया था।इस समस्या का बड़ा कारण पुलिस अधीक्षक की अनदेखी अनसुनी सुस्त कार्य प्रणाली रही है।  पुलिस अधीक्षक की लापरवाह कार्य प्रणाली के बारे मे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नागेंद्र तिवारी ने निरन्तर प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के सामने प्रमुखता से रखा था,आवश्यक होने पर आंदोलन की बात भी कही। माननीय मुख्य मंत्री महोदय अंतत श्री तिवारी की बात को गंभीरता से लिया और आज एसपी का परिवर्तन कर नए एसपी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह  मुरैना जिले के हर कार्यकर्ता और आमजन की जीत है। इसके लिए श्री ……………ने श्री नागेंद्र तिवारी को बधाई धन्यवाद देते हुए माननीय मुख्य मंत्री महोदय सरकार और संगठन का हृदय से आभार व्यक्त किया है, व आशा व्यक्त की है कि नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक श्री मीणा जी के निर्देश मे  जिले मे अपराधो पर नियंत्रण होकर शान्ति सुरक्षा कायम होगी।

एम्स का कमाल: 7 माह से पैरालिसिस झेल रही महिला फिर हुई सक्रिय, स्पाइनल ट्रीटमेंट से मिला राहत

भोपाल भोपाल एम्स में एक महिला को मानो नया जीवन दिया गया है। ललितपुर (उत्तर प्रदेश) की 65 वर्षीय यह महिला पिछले सात महीनों से न चैन से बैठ पा रही थी और न ही सो पा रही थी। रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण वह 'स्पास्टिक पैराप्लेजिया' जैसी गंभीर स्थिति का शिकार थीं, जिसमें मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से जकड़ जाती हैं। वह लकवे जैसी लाचारी और असहनीय पीड़ा जूझ रही थी। ल्बे समय से चल रहे उपचार व दवाओं के हैवी डोज के बावजूद कोई राहत नहीं मिल रही थी, जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से टूट चुका था। ऐसे में एम्स भोपाल दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी) और न्यूरोसर्जरी विभाग की टीमें आगे आईं। डॉक्टर्स ने आइटीबी तकनीक अपनाकर महिला की दिक्कत दूर कर दी। इतना ही नहीं, प्राइवेट अस्पतालों में लगनेवाला लाखों का खर्च भी बचा दिया। वरदान बनी आइटीबी तकनीक महिला कई माह से परेशान थीं। आखिरकार एम्स भोपाल के दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी) और न्यूरोसर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने इस जटिल चुनौती को स्वीकार किया। डॉ. अनुज जैन और डॉ. सुमित राज के नेतृत्व में डॉक्टरों ने 'इंट्राथीकल बैक्लोफेन थेरेपी' (आइटीबी) अपनाने का निर्णय लिया। यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान है जिन पर सामान्य दवाएं बेअसर हो जाती हैं। इसमें दवा को सीधे रीढ़ की हड्डी के तरल (सेरेब्रोस्पाइनल क्लुइड) में पहुंचाया जाता है, जिससे कम खुराक में ही अधिकतम लाभ मिलता है और दुष्प्रभाव कम होते हैं। उपचार की प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज को ट्रायल इंजेक्शन दिया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम मिलते ही डॉक्टरों ने त्वचा के नीचे एक छोटा 'प्रोग्रामेबल ड्रग डिलीवरी पंप' प्रत्यारोपित कर दिया। यह डिवाइस निरंतर दवा की नियंत्रित मात्रा शरीर को पहुंचाता रहता है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज अब पूरी तरह दर्दमुक्त है और सामान्य नींद ले पा रही है। एम्स में महज 7 लाख रुपए में उपचार: कम से कम 3 लाख रुपए बचाए निजी अस्पतालों में 10 लाख रुपए से अधिक में होने वाला यह उपचार एम्स में मात्र 7 लाख रुपए में संभव हुआ। डॉ. जैन ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के दौर में किसी भी मरीज को लंबे समय तक दर्द सहने की जरूरत नहीं है। डॉ. सुमित राज ने इसे टीम वर्क की जीत बताया।

बड़ी राहत का ऐलान: आउटसोर्स कर्मचारियों को ₹26 हजार वेतन और स्थायी नौकरी का वादा, तारीख पर सस्पेंस

भोपाल बीते दिन मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में बड़ी संख्या में प्रदेशभर के अस्थाई, ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों ने मांगों को लेकर 'महासंग्राम आंदोलन' किया गया। अस्थाई, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार से मुफ्त में काम कराने की आदत बदलने और न्यूनतम 26,000 रुपये वेतन व नौकरी की सुरक्षा देने की मांग की। न्यूनतम वेतन सिर्फ कागजों पर, हकीकत में शोषण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में न्यूनतम मजदूरी 12,425 से 16,769 रुपये घोषित है, लेकिन धरातल पर पंचायत चौकीदारों, पंप ऑपरेटरों और अंशकालीन कर्मियों को 3 से 5 हजार रुपये थमाए जा रहे हैं। 2003 के बाद से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की स्थायी नौकरियां खत्म कर दी गई हैं, जिससे गरीब, दलित और पिछड़ा वर्ग के युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। लोकल यूथ सर्वेयर महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र गोस्वामी ने कहा कि ६ जुलाई को हाईकोर्ट के सामने आंदोलने करेंगे। प्रशासन की सख्ती और पाबंदियों के बीच आंदोलन कर्मचारियों ने पहले भाजपा कार्यालय के घेराव और 'सामूहिक आत्मदाह' का ऐलान किया था, लेकिन प्रशासन की तीन दिनों की खींचतान और पाबंदियों के बाद शर्तों के साथ नीलम पार्क में प्रदर्शन की अनुमति मिली। आंदोलन में डॉ. अमित सिंह, राजभान रावत, उमाशंकर पाठक और विपिन पांडे सहित कई संगठनों के नेता शामिल हुए। कर्मचारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी उग्र रूप लेगा। प्रदर्शनकारियों का हुआ बुरा हाल प्रदर्शनकारियों तेज गर्मी के चलेत काफी परेशान हुए। कुछ लोगों की तबीयत भी बिगड़ गई। एक महिला गर्मी की वजह से बेहोश भी हो गई। इस दौरान महिला पुलिस उन्हें संभालती नजर आई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि हमारी मांगे पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज करेंगे। पूरे प्रदेश के 1 लाख कर्मचारी भोपाल में डेरा डालेंगे। ये है वेतन का सच (प्रति माह) लोकल यूथ सर्वेयर: 1,000 पंचायत चौकीदार/पंप ऑपरेटर: 3,000 से 4,000 मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ता, पेशा मोबिलाइजर: 4,000 स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी: 7,000 से 8,000 (वेतन रुपए में) कौन होते हैं आउटसोर्स कर्मचारी जानकारी के लिए बता दें कि आउटसोर्स कर्मचारी वे श्रमिक होते हैं जिन्हें कोई कंपनी या सरकारी विभाग सीधे तौर पर नियुक्त न करके, किसी तीसरी निजी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से काम पर रखती है। ये कर्मचारी मुख्य संस्थान के कर्मचारी नहीं माने जाते, बल्कि एजेंसी के पेरोल पर होते हैं और उन्हें आमतौर पर संविदा या अल्पकालिक (Temporary) आधार पर काम पर रखा जाता है। इनकी नियुक्ति और वेतन का प्रबंधन ठेकेदार या आउटसोर्सिंग कंपनी करती है। ये कर्मचारी स्थायी नहीं होते और उनकी नौकरी अक्सर टेंडर या ठेके की अवधि (जैसे 1-3 साल) तक ही सीमित होती है।

सोमाली डाकुओं का फिर समुद्र में राज, 10 दिन में दूसरा तेल टैंकर हाईजैक, US नेवी ने किया मूक दर्शक

वॉशिंगटन  अमेरिका और ईरान के तनाव के कारण होर्मुज बंद है. वहीं जो जहाज लाल सागर से गुजर रहे हैं उनके ऊपर भी खतरा मंडरा रहा है. यमन के तट के पास एक बार फिर समुद्री लुटेरों का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है. सोमालिया के समुद्री डाकुओं ने एक तेल टैंकर को हाईजैक कर लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स पर चिंता बढ़ गई है. यह तब हुआ है जब अमेरिकी नेवी अरब सागर में मौजूद है. BBC की रिपोर्ट में कहा गया कि सोमाली सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ‘MT यूरेका’ (MT Eureka) नाम के इस टैंकर को गल्फ ऑफ अदन में हथियारबंद लोगों ने कब्जे में ले लिया. रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 5 बजे हुआ. टैंकर टोगो के झंडे के तहत चल रहा था और यमन के काना पोर्ट के पास समुद्री लुटेरों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया. बताया जा रहा है कि हमलावर सोमालिया के पुंटलैंड क्षेत्र के क़ंदाला इलाके से निकले थे और सीधे जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया।  जहाज कहां ले जा रहे लुटेरे? सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, हाईजैक के बाद टैंकर अब यमन और सोमालिया के बीच गल्फ ऑफ अदन में आगे बढ़ रहा है और जल्द ही सोमालियाई जलक्षेत्र में लंगर डाल सकता है. इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह पिछले 10 दिनों में दूसरी बड़ी घटना है. इससे पहले 22 अप्रैल को ‘ऑनर 25′ नाम के एक और तेल टैंकर को सोमाली समुद्री डाकुओं ने कब्जे में लिया था, जिसमें 18,500 बैरल तेल था और वह मोगादिशु जा रहा था. उसके क्रू में पाकिस्तानी और एक भारतीय भी थे. लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि समुद्री लुटेरों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।   

CSK से हार के बाद MI की प्लेऑफ में पहुंचने की राह कठिन, हार्दिक पंड्या ब्रिगेड का क्या होगा हाल?

मुंबई  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में मुंबई इंडियंस (MI) का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है. पांच बार की आईपीएल चैम्पियन टीम एमआई ने 9 में से सिर्फ 2 मुकाबले जीते हैं, जबकि 7 मुकाबलों में उसे हार का सामना करना पड़ा. 2 मई (शनिवार) को चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के खिलाफ मुकाबले में मुंबई इंडियंस की बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग प्रभावहीन रही. मुंबई इंडियंस इस मैच में 7 विकेट पर 159 रनों का स्कोर ही बना सकी. मुश्किल हालात में नमन धीर ने 57 रनों की जुझारू पारी खेली, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से कोई खास साथ नहीं मिला।  159 जैसे औसत लक्ष्य का पीछा करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स ने मैच को एकतरफा बना दिया. कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने नाबाद 67 रनों की शानदार पारी खेली और टीम को 18.1 ओवर में ही जीत दिला दी. सीएसके ने यह मुकाबला आठ विकेट से जीतकर अपनी प्लेऑफ की उम्मीदों को पूरी तरह जिंदा रखा. दूसरी ओर सीएसके के खिलाफ एक और हार के साथ मुंबई इंडियंस की स्थिति और गंभीर हो गई है. मुंबई इंडियंस 4 अंकों के साथ अंकतालिका में नौवें स्थान पर है और उसका नेट रनरेट -0.803 है।  मुंबई इंडियंस के लिए इस सीजन की सबसे बड़ी समस्या उनकी मिडिल ओवरों में बल्लेबाजी रही है. टीम अच्छी शुरुआत के बाद विकेट गंवाकर दबाव में आ जाती है. सीएसके के खिलाफ भी यही देखने को मिला, जहां मजबूत स्थिति के बावजूद टीम अचानक बैकफुट पर आ गई. गेंदबाजी में भी टीम पूरी तरह प्रभावी नहीं रही है. कम स्कोर के कारण गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव रहता है, जिसका फायदा विपक्षी टीम आसानी से उठा रही है।  14 अंक भी नहीं होंगे पर्याप्त? मुंबई इंडियंस यदि अपने बाकी के पांच मैच जीतती है, तो भी वो 14 अंकों तक पहुंच पाएगी. अब मुंबई इंडियंस के लिए आगे का रास्ता बेहद कठिन हो गया है. टीम को अपने बचे सभी मैच तो जीतने ही होंगे, साथ ही नेट रनरेट में भी बड़ा सुधार करना होगा. इसके अलावा, उन्हें अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना पड़ेगा. यदि मुंबई एक भी मैच हारी, तो वो लगभग टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी. गणितीय रूप से भले ही मुंबई अभी टूर्नामेंट से बाहर नहीं हुई हो, लेकिन मौजूदा फॉर्म और लगातार हो रही गलतियों को देखते हुए प्लेऑफ में पहुंचना उनके लिए लगभग असंभव नजर आ रहा है।  मुंबई इंडियंस के बचे मुकाबले 4 मई: बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स, मुंबई 10 मई: बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, रायपुर 14 मई: बनाम पंजाब किंग्स, धर्मशाला 20 मई: बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स, कोलकाता 24 मई: बनाम राजस्थान रॉयल्स, मुंबई आईपीएल 2026 में एक और करारी हार के बाद मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पंड्या का दर्द छलक पड़ा. हार्दिक ने मान लिया कि इस सीजन उनकी टीम कभी ट्रैक पर आई ही नहीं. मैच के बाद हार्दिक पांड्या ने साफ शब्दों में कहा, "यह हमारा सीजन नहीं है. सीएसके हर विभाग में बेहतर रही. उन्होंने बेहतर गेंदबाजी की, बेहतर बल्लेबाजी की और फील्डिंग भी शानदार रही।  हार्दिक पंड्या ने यह भी स्वीकार किया कि अगर उनकी टीम 180-190 रन तक पहुंच पाती, तो मुकाबला अलग हो सकता था. लेकिन मुंबई की बल्लेबाजी कभी लय में नहीं आई और टीम पूरे मैच में दबाव में दिखी. गेंदबाजी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि टीम के पास जो विकल्प थे, उसी के साथ उन्हें उतरना पड़ा. हार्दिक कहते हैं, "हमें शायद कुछ अलग करना पड़ता, लेकिन सच कहूं तो हमें बल्लेबाजों को आउट करने के लिए 'फायरबॉल' की जरूरत थी।  कुल मिलाकर मुंबई इंडियंस के लिए यह सीजन एक ऐसी कहानी बन गया है, जहां हर मैच में वही गलती दोहराई जा रही है. अगर तुरंत बदलाव नहीं हुआ, तो पांच बार की आईपीएल चैम्पियन टीम इस बार प्लेऑफ से बाहर होती नजर आ रही है। 

यात्रियों के लिए राहत भरी खबर: इंदौर-मुंबई के बीच 4 मई से शुरू होगी स्पेशल ट्रेन

इंदौर गर्मी की छुट्टियों में इंदौर से मुंबई और मुंबई से इंदौर के लिए आवागमन करने वाले यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने मुंबई सेंट्रल और इंदौर जंक्शन के बीच एसी सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। इस ट्रेन के शुरू होने से इंदौर-मुंबई अवंतिका एक्सप्रेस, इंदौर-दौंड एक्सप्रेस और सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन में यात्रियों का दबाव काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। यह विशेष ट्रेन चार मई से 29 जून 2026 तक संचालित रहेगी। दोनों दिशाओं में कुल दूरी तय 826 किमी तय करेगी। कुल 17-17 फेरे दोनों दिशाओं में लगाए जाएंगे। ट्रेन मुंबई सेंट्रल-इंदौर के बीच प्रत्येक रविवार एवं मंगलवार को प्रस्थान रात 11:20 बजे होगी। इसी प्रकार इंदौर-मुंबई सेंट्रल के लिए प्रत्येक सोमवार एवं बुधवार को शाम 05:00 बजे प्रस्थान करेंगी। इंदौर-मुंबई के बीच प्रमुख ठहराव इंदौर से शाम 05:00 बजे चलकर उज्जैन, रतलाम, दाहोद, वडोदरा, सूरत, वापी, बोरीवली, मुंबई सेंट्रल सुबह 07:10 पर पहुंचेगी। इसी प्रकार मुंबई सेंट्रल से रात 11:20 बजे चलकर बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, इंदौर अगले दिन दोपहर 01:00 बजे पहुंचेगी। पहले से चल रही सुपरफास्ट स्पेशल इंदौर से मुंबई के बीच पहले से ही एक सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन चल रही है। मुंबई सेंट्रल-इंदौर सुपरफास्ट स्पेशल 20 अप्रैल से 29 मई तक मुंबई सेंट्रल से प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को 11.20 बजे प्रस्थान करती है और अगले दिन दोपहर 01.00 बजे इंदौर पहुंचती है। इसी प्रकार इंदौर-मुंबई सेंट्रल सुपरफास्ट स्पेशल 21 अप्रैल से 30 मई तक इंदौर से प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार को इंदौर से शाम 05.00 बजे प्रस्थान करती है और अगले दिन सुबह 07.10 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचती है।  

BJP की धांसू रणनीति: MP में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस से तीसरी सीट छीनने की तैयारी

भोपाल  मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनाव के लिए बिसातें बिछनी शुरु हो गई हैं। प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटें अगले महीने यानी की जून में रिक्त हो रही हैं, इस सीटों के खाली होने के पहले ही बीजेपी और कांग्रेस में प्योर रणनीति पर काम शुरु हो चुका है। प्रदेश की जिन सीटों पर जून 2026 में चुनाव होगों उनमें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, दूसरी पर भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी और तीसरी सीट पर राज्य मंत्री जार्ज कुरियन राज्यसभा सदस्य हैं। इन्ही तीन सीटों पर चुनाव होगें। संख्या बल के हिसाब से देखें तो 2 सीटें भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जानी तय मानी जा रही है लेकिन कांग्रेस सीट पर दिग्विजय सिंह के मना करने और कांग्रेस के बढ़ते दावेदारों के साथ ही, कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और कलह का फायदा उठाकर भाजपा तीसरी सीट को भी अपने पाले में ले जाने की योजना पर विचार कर रही है, भाजपा अपना उम्मीदवार उतारने का प्लान बना रही है। भाजपा कर रही इस ऱणनीति पर काम दरअसल पहले इस सीट के लिए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम चर्चाओं में था, लेकिन दतिया में राजेंद्र भारती की सदस्यता पर लटकी तलवार से संभावित विधानसभा उपचुनाव के चलते अब स्थिति बदल रही है।   किसी आदिवासी चेहरे को मैदान में उतारने पर विचार किया जा रहा है। इस प्लान के लिए दो वजहें है जिस पर भाजपा विचार कर रही है। पहली है कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन हासिल करने का मकसद, वहीं दूसरे कारण है  विपक्ष की शक्ति को कम करना। जानकारी के मुताबिक  भाजपा दावा कर रही है कि कांग्रेस के कुछ आदिवासी विधायक उनके संपर्क में हैं। कांग्रेस के लिए आसान मानी जाने वाली राज्यसभा की तीसरी सीट पर गणित कुछ और ही बन रहा है  क्योंकि  दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 64 हो गई है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर कोर्ट ने रोक लगाई है तो बीना विधायक निर्मला सप्रे का मामला भी कोर्ट में हैं। इस स्थिति में कांग्रेस के घटकर 62 पर पहुंच चुके हैं,यहां से बीजेपी कुछ खेल कर सकती है। वैसै बात करें तो कांग्रेस के पास अपनी राज्यसभा सीट पाने का संख्या बल है लेकिन  पार्टी में संभावित क्रास वोटिंग को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही है।

होर्मुज संकट से निपटने के लिए ग्रीन सिग्नल, 2000 मेगावाट बिजली और LPG-तेल की आपूर्ति में कोई कमी नहीं

मुंबई ईरान जंग के चलते होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों का आना-जाना बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. इससे दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस जैसे हालात पैदा हो गए हैं. तेल और गैस की आपूर्ति में कमी आने का खामियाजा अब आमलोगों को भुगतना पड़ रहा है. पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में भारी उछाल आया है. पश्चिम एशिया में तनाव से पैदा हुए संकट के बीच अब कई देशों ने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. सौर और पवन ऊर्जा के बाद अब एक और क्‍लीन एनर्जी ऑप्‍शन पर गंभीरता से काम शुरू हो गया है. वह परमाणु ऊर्जा. भारत ने कुडनकुलम न्‍यूक्लियर एनर्जी प्‍लांट की यूनिट 5 और 6 पर आगे बढ़ने का फैसला किया है।  दरअसल, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को बड़ा बढ़ावा देते हुए Atomic Energy Regulatory Board (AERB) ने तमिलनाडु के Kudankulam Nuclear Power Plant (कुडनकुलम) परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट 5 और 6 में प्रमुख उपकरणों की स्थापना के लिए मंजूरी दे दी है. यह अनुमति 30 अप्रैल 2026 को जारी की गई, जिससे देश के परमाणु ऊर्जा विस्तार को नई गति मिलने की उम्मीद है. इस मंजूरी के तहत Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) अब रिएक्टर प्रेशर वेसल, स्टीम जनरेटर और कूलेंट पंप जैसे अहम उपकरणों की स्थापना का कार्य शुरू कर सकेगा. यह चरण किसी भी परमाणु संयंत्र के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके बाद परियोजना अपने अंतिम विकास चरणों में प्रवेश करती है।  मल्‍टी-लेवल सिक्‍योरिटी रिव्‍यू AERB की यह अनुमति एक विस्तृत और मल्‍टी-लेवल सुरक्षा समीक्षा के बाद दी गई है. नियामक संस्था ने रिएक्टर डिजाइन को अपने निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाया और यह सुनिश्चित किया कि परियोजना में अब तक हुए सिविल निर्माण कार्य भी संतोषजनक हैं. इससे पहले अप्रैल 2021 में ‘फर्स्ट पोर ऑफ कंक्रीट’ के लिए अनुमति दी गई थी, जिसके बाद से निर्माण कार्य लगातार प्रगति पर है. यूनिट 5 और 6 में अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाएं शामिल की गई हैं, जो AERB के लाइट वॉटर रिएक्टर आधारित परमाणु संयंत्रों के लिए निर्धारित सुरक्षा कोड के अनुरूप हैं. ये मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर International Atomic Energy Agency (IAEA) द्वारा निर्धारित नवीनतम सुरक्षा दिशानिर्देशों से मेल खाते हैं. इन यूनिट्स में उन्नत पैसिव सेफ्टी सिस्टम और मजबूत कंटेनमेंट मैकेनिज्म लगाए जा रहे हैं, जिससे ऑपरेशन के दौरान उच्च स्तर की सुरक्षा और दुर्घटना-प्रतिरोध सुनिश्चित किया जा सके।  हर यूनिट की क्षमता 1000 मेगावाट तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम परियोजना भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा उत्पादन केंद्र है. यहां कुल छह प्रेसराइज्ड वॉटर रिएक्टर (VVER डिजाइन) स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 1000 मेगावाट है. यह परियोजना रूस के साथ तकनीकी सहयोग के तहत विकसित की जा रही है और इसे भारत-रूस परमाणु साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है. कुडनकुलम की पहली दो यूनिट्स 2013 और 2015 से ऑपरेशन में हैं और दक्षिणी ग्रिड को बिजली आपूर्ति कर रही हैं. वहीं यूनिट 3 और 4 एडवांस स्‍टेज में हैं, जिनके लिए पहले ही प्रमुख उपकरणों की स्थापना की मंजूरी दी जा चुकी है. अब यूनिट 5 और 6 के लिए मिली ताजा अनुमति से पूरे प्रोजेक्ट की गति और तेज होने की संभावना है।  परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा कुडनकुलम इन नई यूनिट्स के चालू होने से भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता भी कम होगी. साथ ही स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा की भूमिका और मजबूत होगी. कुडनकुलम परियोजना का पूर्ण रूप से छह यूनिट्स के साथ संचालन भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा. यह परियोजना देश की तकनीकी क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा मानकों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। 

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर में 5 साल में 20 हजार करोड़ का निवेश, विकास की नई दिशा

इंदौर इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के हाथों होने जा रहा है। 20 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में अगले पाँच वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस इंडस्ट्रियल जोन को बैंकिंग, बीमा, फाइनेंस जैसे अन्य सेक्टरों के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण में दो हजार करोड़ रुपये की राशि मंजूर हुई है, जिसमें से 327 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।  कॉरिडोर के जरिए आईटी, लॉजिस्टिक्स, फिनटेक, एरोसिटी और ग्रीन इंडस्ट्री जैसे सेक्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस कॉरिडोर से एक लाख से अधिक रोजगार मिलने की संभावना है। इंदौर के नैनोद से पीथमपुर के बीच बनने वाले इस कॉरिडोर की एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सरकार की कोशिश है कि यहां परंपरागत उद्योगों के बजाय ऐसे उद्योग विकसित हों, जो भारी मशीनों पर निर्भर न हों। इसी कारण डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत इंडस्ट्री के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।   इस कॉरिडोर के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसानों से जमीन अधिग्रहण की है। लगभग 60 प्रतिशत किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। 60 से 70 मीटर चौड़ाई में इस कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा, जिससे इंदौर से पीथमपुर के बीच की दूरी 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी और आवागमन भी आसान होगा।   कॉरिडोर के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में उद्योगों के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर से भी जुड़ा होगा, जिसे इंदौर विकास प्राधिकरण ने लगभग दस वर्ष पहले विकसित किया था। यहां टीसीएस, इंफोसिस जैसी कंपनियों के स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं और तीन बड़े शैक्षणिक संस्थान भी स्थित हैं।

साइलेंट फर्टिलिटी क्राइसिस की चेतावनी: न इंसान, न जानवर, वैज्ञानिकों ने कहा – नस्ल बचाना मुश्किल

 नई दिल्ली दुनिया में आज हजारों तरह के सिंथेटिक रसायन (मानव-निर्मित केमिकल) फैले हुए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इनमें से कई पेस्टिसाइड, प्लास्टिक, पॉल्यूटेंट और फॉरएवर केमिकल प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी को चुपचाप नुकसान पहुंचा रहे हैं. एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि रसायन और जलवायु परिवर्तन मिलकर मानव और जानवरों दोनों की प्रजनन क्षमता, जैव विविधता और स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल रहे हैं।  पिछले 50 सालों में पृथ्वी पर वन्यजीवों की आबादी दो-तिहाई से ज्यादा घट चुकी है. इसमें प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन बड़ी वजह माने जा रहे हैं. इंसानों में भी पुरुष और महिला दोनों में बांझपन की समस्या बढ़ रही है।  वैज्ञानिकों का मानना है कि हार्मोन बिगाड़ने वाले रसायन (Endocrine Disrupting Chemicals – EDCs) इसके मुख्य कारण हो सकते हैं. आज बाजार में 1000 से ज्यादा ऐसे केमिकल मौजूद हैं जो हमारे शरीर के प्राकृतिक हार्मोन को नकल करते या रोकते हैं।  विभिन्न जीवों पर पड़ने वाले प्रभाव एक टेबल में वैज्ञानिकों ने दिखाया है कि अलग-अलग जीवों पर कौन-कौन से रसायन और तनाव कैसे असर कर रहे हैं…      कीड़े-मकोड़े: Tributyltin, Phthalates, Microplastics आदि से लिंग परिवर्तन, प्रजनन क्षमता घटना.     मछलियां: Pyrethroids, Microplastics से अंडे कम बनना, जनसंख्या घटना.     पक्षी: PFAS, Organoclorines से अंडे से बच्चा निकलने में समस्या.     सरीसृप: धातु और तापमान से लिंग अनुपात बिगड़ना.     मेंढक: Phthalates से प्रजनन सफलता घटना.     समुद्री स्तनधारी: गर्भपात, समय से पहले जन्म.     इंसान: PFAS, Microplastics से स्पर्म की संख्या और गति कम होना, पुरुष जननांगों में समस्या. रसायन पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं और कम मात्रा में भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं.। जलवायु परिवर्तन कैसे बढ़ा रहा है खतरा? ग्लोबल वार्मिंग से तापमान बढ़ रहा है, जिससे जानवरों पर अतिरिक्त तनाव पड़ रहा है. गर्मी, ऑक्सीजन की कमी और रसायन मिलकर प्रजनन के तनाव को और बढ़ा देते हैं. स्टडी में कहा गया है कि इंसानों की फर्टिलिटी ट्रेंड वन्यजीवों जैसी ही है. दोनों ही अनजाने में हानिकारक रसायनों के संपर्क में आ रहे हैं।  दुनिया में 1,40,000 से ज्यादा सिंथेटिक केमिकल हैं, लेकिन सिर्फ 1% की पूरी सुरक्षा जांच हुई है. DDT, PFAS (Forever Chemicals) जैसे कई केमिकल पहले इस्तेमाल होते रहे और बाद में इनके नुकसान पता चले।  DDT के कारण पक्षियों के अंडे पतले हो गए. समुद्री जानवरों की प्रजनन क्षमता घटी. PFAS महिलाओं में फर्टिलिटी 40% तक कम कर सकता है. माइक्रोप्लास्टिक भी जनन अंगों में जमा हो रहे हैं, लेकिन उनके पूरे प्रभाव अभी पता नहीं हैं. वैज्ञानिक सुसान ब्रैंडर के नेतृत्व में की गई स्टडी में कहा गया है कि पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हैं. अगर वन्यजीवों की प्रजनन क्षमता खत्म हुई तो पूरा फूड चेन प्रभावित होगा, जिसका असर अंत में इंसानों पर पड़ेगा।  क्या है इस समस्या का समाधान  वैज्ञानिकों का कहना है कि Global Plastics Treaty जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते जरूरी हैं. हमें रसायनों की सुरक्षा जांच तेज करनी होगी. प्लास्टिक प्रदूषण कम करना होगा और क्लाइमेट चेंज रोकने के प्रयास बढ़ाने होंगे।  यह छिपा प्रजनन संकट कोई दूर की बात नहीं है. यह आज हमारे आसपास हो रहा है. अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियां गंभीर स्वास्थ्य और जैव विविधता संकट का सामना करेंगी. रसायनों और जलवायु दोनों पर एक साथ नियंत्रण जरूरी है, वरना साइलेंट फर्टिलिटी क्राइसिस धीरे-धीरे बड़े संकट में बदल सकता है।