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बस्तर में इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा, महाकुंभ 1.0 से नई पहल – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जगदलपुर में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही मंच, मार्गदर्शन और अवसर की है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिल रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर के समग्र विकास के लिए तैयार रोडमैप का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप और अधोसंरचना का विशेष ध्यान रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि “नियद नेल्ला नार योजना” का विस्तार कर इसे “नियद नेल्ला नार 2.0” के रूप में 10 जिलों में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को इनोवेशन हब बनाने के उद्देश्य से “नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30” लागू की गई है। इस नीति के तहत युवाओं को आइडिया से लेकर व्यवसाय विस्तार तक हर स्तर पर सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता जैसी सुविधाओं से स्टार्टअप को बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विकसित छत्तीसगढ़ का मार्ग विकसित बस्तर से होकर जाता है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आदिवासी कला, लघु वनोपज, जैविक कृषि, पर्यटन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें तकनीक, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर में पर्यटन के बढ़ने से होमस्टे, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और वनोपज की मांग बढ़ेगी, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्वास जताया कि बस्तर का युवा उद्यमिता के माध्यम से विकसित बस्तर, विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। कार्यक्रम में नवाचार करने वाले बेस्ट आइडिया और बेस्ट स्टार्टअप के विजयी प्रतिभागियों को  प्रोत्साहन राशि, प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि उद्यमिता और स्वरोजगार को अपनाकर युवा आगे बढ़ें, ताकि अपने घर-परिवार को खुशहाल बना सकें। उच्च शिक्षा मंत्री  वर्मा ने कहा कि इस इनोवेशन महाकुंभ के माध्यम से युवाओं को एक मंच मिला है, जिससे वे अपने नवाचार को आगे बढ़ाने के साथ ही आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि स्वयं का व्यवसाय या स्वरोजगार स्थापित कर नौकरी देने वाले बनें और अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनें। इस अवसर पर सांसद बस्तर  महेश कश्यप एवं विधायक जगदलपुर  किरण देव ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नवाचार के जरिये उद्यमिता एवं स्वरोजगार अपनाकर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सहभागिता निभाने के लिए युवाओं से आह्वान किया। कार्यक्रम के आरंभ में शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति प्रोफेसर मनोज वास्तव ने इनोवेशन महाकुंभ आयोजन के उद्देश्य और विश्वविद्यालय की स्थापना सहित संस्थान के विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों एवं नवोन्मेषी प्रयासों के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया। इस अवसर पर विधायक चित्रकोट  विनायक गोयल, छत्तीसगढ़ ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष  निवास मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रूपसिंह मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, महापौर  संजय पांडेय सहित अन्य  जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

अमेरिका की ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ तैनाती के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक तनाव और गहराया

अबू धाबी/तेल अवीव  ईरान ने सोमवार शाम को संयुक्त अरब अमीरात और ओमान की राजधानियों पर मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद एक बार फिर मिडिल ईस्ट जंग के मुहाने पर पहुंच गया है। इन हमलों के बाद इजरायल के लिए खतरा बढ़ गया है। विश्लेषकों का कहना है इजरायल जल्द ही एक बार फिर ईरान के निशाने पर हो सकता है। विश्लेषक ईरान के हमलों को उसी तैयारी की पृष्ठभूमि में देखते हैं। यह हमले ऐसे समय में हुए जब अमेरिका ने अपने दो विध्वंसक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए फारस की खाड़ी में भेजा है। ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम की घोषणा की है, जो सोमवार को शुरू हुआ है। इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए खोलना है। इसके पहले अमेरिका ने युद्धविराम का इस्तेमाल करते हुए एक विशाल नौसैनिक, हवाई और जमीनी सेना तैयार कर ली है। ईरान को किस बात का खौफ? तेहरान समझ गया है कि अगर अमेरिका होर्मुज को कमर्शियल जहाजों के लिए आंशिक रूप से भी खोलने में कामयाब हो जाता है, तो ईरान बातचीत में अपनी मोलभाव करने की ताकत खो देगा। इसके अलावा उसे ऐसी शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी जो उसके शासन के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है। अमेरिका नेवी के विध्वसंक जहाज अब ईरानी तट और जहाजों के बीच खड़े हैं और उन पर होने वाले हर हमले का जवाब देने को तैयार हैं। इसमें मिसाइल-जैमर सिस्टम के साथ सेंट्रल कमांड के टोही विमान और ड्रोन तैनात किया है। ये विध्वंसक जहाजों के ऊपर गश्त करते हुए दुश्मन के हर लॉन्च का पता लगाते हैं और उस पर हमला करते हैं। अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने ईरान की छह स्पीडबोट्स को डुबो दिया है। UAE पर तेहरान ने क्यों किया हमला? ईरान समझता है कि ऐसे किसी भी टकराव में ईरान के सफल होने की संभावना नहीं है। यही कारण है कि तेहरान ने खाड़ी देशों पर पहले हमला करने का फैसला किया। सबसे पहले UAE को निशाना बनाया, जो खाड़ी देशों के बीच ईरान के विरोध का नेतृत्व करता है। तेहरान के पास UAE की तेल सुविधाओं और बंदरगाहों पर हमला करने की असीमित क्षमता मौजूद है। UAE में इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में UAE की मिसाइल और ड्रोन रक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर काम किया है। इनमें इजरायल के आयरन डोम और लेजर वेपन आयरन बीम की UAE में तैनाती अहम है। इसके बावजूद अमीरात का तेल उद्योग ईरान के हमले के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। इजरायली विश्लेषकों का कहना है कि UAE और ओमान पर किए गए हमले अभी बस एक शुरुआत हैं। तेहरान इस बात को समझता है कि अगर वह इस अभियान में हार जाता है और ईरान पर ट्रंप की घेराबंदी जारी रहती है, तो ईरान के इस्लामिक शासन के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगेगा।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे बीजापुर से राजमिस्त्री बने रमेश पासपुल, आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर  जनपद पंचायत बीजापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत संतोषपुर, जो कभी लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहा, आज बदलाव और विकास की नई पहचान बनता जा रहा है। ‘‘नियद नेल्लनार योजना‘‘ के शुरू होने के बाद गांव में बुनियादी सुविधाओं और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस बदलाव की कहानी के केंद्र हैं संतोषपुर निवासी  रमेश पासपुल। कभी स्थायी रोजगार के अभाव में आर्थिक तंगी से जूझ रहे रमेश का जीवन आज पूरी तरह बदल चुका है। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच आय का कोई निश्चित साधन न होने से उनका भविष्य अनिश्चित नजर आता था। परिस्थितियां तब बदलीं जब  ‘‘नियद नेल्लनार योजना‘‘  के तहत उन्हें राजमिस्त्री (मेसन) का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की बारीकियों, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल में दक्षता हासिल की। यह प्रशिक्षण उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। प्रशिक्षण के बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में रमेश को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की स्वीकृति मिली। पहली किश्त प्राप्त होते ही उन्होंने अपने घर का निर्माण स्वयं शुरू किया और निर्धारित समय-सीमा में इसे पूरा कर लिया। उनके कार्य की गुणवत्ता देखकर गांव के अन्य हितग्राहियों ने भी अपने-अपने आवास निर्माण के लिए उन्हें बुलाने लगे, जिससे उनके लिए नियमित आय का साधन तैयार हो गया। आज रमेश पासपुल एक कुशल राजमिस्त्री के रूप में गांव में पहचान बना चुके हैं। वे न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। उनकी बढ़ती मांग ने उनके जीवन में स्थिरता और खुशहाली ला दी है। रमेश की यह प्रेरक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा में मिला प्रशिक्षण और अवसर किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने अपने परिश्रम और शासन की योजनाओं के सहयोग से इसे संभव कर दिखाया। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन की सशक्त मिसाल है।

SN मेडिकल कॉलेज में मिल रहा नवजीवन, सी-पैप तकनीक से बच रहे प्री-मैच्योर बच्चे

 लखनऊ/आगरा  उत्तर प्रदेश में बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अब केवल यूपी के नागरिकों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से अपग्रेड हुई स्वास्थ्य इकाइयों, विशेषकर आगरा के सरोजनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज में राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीमार नवजातों को भी नया जीवन मिल रहा है। अत्याधुनिक सी-पैप मशीनों और अनुभवी डॉक्टरों की टीम के चलते आगरा अब पड़ोसी राज्यों के लिए एक बड़े लाइफ-सेविंग हब के रूप में उभरा है। हर साल 200 बाहरी बच्चों को मिल रहा 'नवजीवन' आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज अपनी उन्नत एसएनसीयू (SNCU) इकाई के माध्यम से हर साल राजस्थान के धौलपुर व भरतपुर और मध्य प्रदेश के भिंड व मुरैना जैसे करीब एक दर्जन जिलों के मरीजों को सेवाएं दे रहा है। कॉलेज के बाल रोग विभाग में भर्ती होने वाले कुल मरीजों में से लगभग 10% (करीब 200 बच्चे) दूसरे राज्यों के होते हैं। यहां डॉक्टरों ने 800 से 1000 ग्राम वजन वाले प्री-मैच्योर बच्चों को भी सुरक्षित बचाकर एक मिसाल पेश की है। सी-पैप तकनीक: नवजातों के लिए वरदान सांस लेने में तकलीफ (Respiratory Distress) नवजात मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। योगी सरकार ने प्रदेश की 48 एसएनसीयू इकाइयों में उन्नत सी-पैप मशीनें स्थापित की हैं। नोडल अधिकारी प्रो नीरज यादव के अनुसार, "सी-पैप तकनीक वेंटिलेटर की तुलना में अधिक सुरक्षित और किफायती है। इससे बच्चों की फेफड़ों तक ऑक्सीजन सही अनुपात में पहुंचती है और 'कंगारू मदर केयर' भी जल्दी शुरू की जा सकती है। सुमन की कहानी: भरोसे की जीत राजस्थान के धौलपुर की रहने वाली सुमन के छठे दिन के नवजात को सांस लेने में गंभीर समस्या थी। स्थानीय स्तर पर सुधार न होने पर वे सीधे आगरा आए। सुमन बताती हैं, "हमें पता था कि आगरा के मेडिकल कॉलेज में बच्चों को नया जीवन मिलता है। 18 अप्रैल को भर्ती करने के बाद मेरा बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है।" यह भरोसा योगी सरकार के स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती का प्रमाण है। राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस-5) के अनुसार उत्तर प्रदेश में एक हजार में से 28 नवजात की मृत्यु विभिन्न कारणों से हो जाती है। इसको कम करने के लिए प्रदेश में इस वक्त 48 एसएनसीयू सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। एसएनसीयू में स्थापित सी-पैप मशीनें नवजातों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन प्रदेश में नवजात मृत्यु दर को कम करने में सीपैप को गेम-चेंजिंग उपाय के रूप में देखते हैं। खासकर एसएनसीयू के भीतर, जहां सांस लेने में तकलीफ़ नवजात शिशुओं की मृत्यु का मुख्य कारण बनी हुई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि पहले चरण में 48 एसएनसीयू के लिए 350 डाक्टरों, कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। दूसरे चरण में बाकी बचे सभी 72 यूनिट में ट्रेनिंग व अन्य कार्य किए जाएंगे।

वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी लक्ष्य पर योगी सरकार का नया दांव, एक्सपर्ट मॉनिटरिंग शुरू

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब जिला स्तर पर 'एक्सपर्ट मॉनिटरिंग' का दांव चला है। कैबिनेट के ताजा फैसले के अनुसार, अब प्रदेश के हर जिले में 'ओटीडी सीएम फेलो' की तैनाती की जाएगी। ये फेलो न केवल विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत परखेंगे, बल्कि डेटा के आधार पर जिले की आर्थिक प्रगति का नया रोडमैप भी तैयार करेंगे। डेटा और विशेषज्ञों से बदलेगी जिलों की तस्वीर इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली OTD सेल को मजबूती देने के लिए दो विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी।     आर्थिक विकास फेलो: जो निवेश, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों (DDP) को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहेंगे।     डेटा विश्लेषक फेलो: जिनका काम विकास योजनाओं की ऑनलाइन रिपोर्टिंग और KPI आधारित सटीक समीक्षा करना होगा। इन विशेषज्ञों के आने से कृषि, उद्योग और रोजगार जैसे क्षेत्रों में सरकारी फाइलों के बजाय वास्तविक आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकेंगे। नियोजन विभाग के डैशबोर्ड के जरिए होने वाली यह मॉनिटरिंग पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाएगी। आकर्षक मानदेय और चयन की प्रक्रिया योगी सरकार ने इस फेलोशिप के लिए योग्य युवाओं को जोड़ने हेतु मानकों को काफी कड़ा और आकर्षक रखा है।     पारिश्रमिक: चयनित युवाओं को ₹50,000 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।     सुविधाएं: इसके अलावा लैपटॉप, यात्रा भत्ता और आवासीय सुविधा/भत्ता भी प्रदान किया जाएगा।     योग्यता: 40 वर्ष तक की आयु के परास्नातक युवा इसके पात्र होंगे।     चयन: स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन द्वारा लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर चयन होगा। कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले: एक नजर में 1. न्याय प्रणाली का 'डिजिटल अवतार' नई न्याय संहिताओं को लागू करते हुए यूपी सरकार ने तीन नए नियम तय किए हैं। अब मोबाइल डेटा और वीडियो जैसे डिजिटल सबूतों को ई-साक्ष्य प्रबंधन के तहत वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही, अब अदालती समन व्हाट्सएप या ईमेल पर मिल सकेंगे। सबसे बड़ा बदलाव छोटे अपराधों को लेकर है, जहाँ अब अपराधी को जेल भेजने के बजाय सामुदायिक सेवा (जैसे पौधारोपण या गो-सेवा) का विकल्प दिया जाएगा। यह वीडियो भी देखें 2. सरकारी स्कूलों में 'स्किल की पाठशाला' छात्रों को भविष्य की तकनीक से लैस करने के लिए 150 राजकीय विद्यालयों में ड्रीम स्किल लैब्स खोली जाएंगी। टाटा नेल्को के सहयोग से बनने वाली इन लैब्स में छात्रों को रोबोटिक्स और मॉडर्न डिजाइनिंग सिखाई जाएगी, जिससे उन्हें सीधे प्लेसमेंट के अवसर मिलेंगे। 3. नोएडा-यमुना क्षेत्र के लिए 'पावर बूस्ट' औद्योगिक क्रांति को गति देने के लिए यीडा (YEIDA) के सेक्टर-28 में ₹653 करोड़ की लागत से हाईटेक बिजली उपकेंद्र बनाने की मंजूरी दी गई है। यह गैस इंसुलेटेड उपकेंद्र डेटा सेंटर, फिल्म सिटी और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।  

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से आय बढ़ाने के नए अवसरों की मिली जानकारी

रायपुर कृषि क्रांति अभियान जशपुर जिला प्रशासन द्वारा “आत्मा योजना” एवं “कृषि क्रांति अभियान” के तहत किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती की दिशा में प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में चयनित किसानों को रायपुर स्थित सेमीना एग्रो कंपनी में अध्ययन भ्रमण के लिए भेजा गया। इस भ्रमण का उद्देश्य किसानों को उच्च मूल्य वाली औषधीय एवं सुगंधित फसलों की वैज्ञानिक खेती से अवगत कराना और उन्हें कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के दौरान कंपनी के विशेषज्ञों ने मोरिंगा, पपीता, लेमनग्रास, पिपरमिंट, पचौली, अश्वगंधा, तुलसी और रोसेला जैसी फसलों की उन्नत तकनीक, लागत-लाभ विश्लेषण और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया गया कि इन फसलों की मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। उप संचालक कृषि जशपुर ने बताया कि किसानों को विशेष रूप से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल के बारे में समझाया गया, जिसमें कंपनियां पूर्व निर्धारित दर पर फसल की खरीद (बायबैक) करती हैं। इससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से राहत मिलती है और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित होता है। उन्होंने बताया कि इस पहल को आगामी खरीफ/मानसून सत्र 2026-27 की कार्ययोजना से जोड़ा गया है, जिसके तहत जिले में क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। लेमनग्रास, पाल्मारोसा, पचौली, यूकेलिप्टस सिट्रियोडोरा, हल्दी, अदरक, तुलसी, सतावर और सर्पगंधा जैसी फसलों को प्राथमिकता दी जाएगी। विकासखंड स्तर पर इच्छुक किसानों का चयन कर उनकी सहमति से जानकारी संकलित की जा रही है, ताकि उन्हें प्रशिक्षण, फील्ड विजिट और कंपनियों के साथ अनुबंधित खेती से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से अनुबंध और मूल्य संवर्धन गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि क्रांति अभियान के तहत यह पहल किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक और निर्यातोन्मुख कृषि की ओर प्रेरित कर रही है। इससे जिले में नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय में स्थायी वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम जारी रहेंगे, ताकि किसान आधुनिक तकनीकों और बाजार के अवसरों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।

रांची में वेतन भुगतान ठप, सत्यापन प्रक्रिया बनी बड़ी वजह

 रांची झारखंड में सामने आए ट्रेजरी घोटाले के बाद सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर व्यापक असर पड़ा है। राज्य के कई प्रमुख विभागों में कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी वजह अब शुरू की गई सख्त सत्यापन प्रक्रिया बताई जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक कर्मचारी का ब्योरा दोबारा जांचा जा रहा है और शपथ पत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे भुगतान में विलंब हो रहा है। सबसे अधिक असर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों पर पड़ा है। रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में डाक्टरों और अन्य कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाया है। इसके अलावा राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी वेतन भुगतान में देरी से जूझ रहे हैं। वहीं, 108 एम्बुलेंस सेवा के काल सेंटर में कार्यरत कर्मियों को भी वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल जैसी स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। सत्यापन प्रक्रिया से बढ़ी देरी सरकारी सूत्रों के अनुसार, ट्रेजरी से जुड़े अनियमितताओं के सामने आने के बाद सरकार ने पूरे भुगतान सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए सभी कर्मचारियों का पुन सत्यापन शुरू किया है। इसके तहत कर्मचारियों को अपना व्यक्तिगत व सेवा संबंधी विवरण फिर से जमा करना पड़ रहा है, साथ ही एक शपथ पत्र भी देना अनिवार्य किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में समय लग रहा है, जिसके कारण वेतन निर्गमन बाधित हो गया है। मालूम हो कि हाल ही में ट्रेजरी सिस्टम में गड़बड़ियों और अनियमित भुगतान के मामलों ने सरकार को सतर्क कर दिया। आशंका जताई गई कि कुछ मामलों में फर्जी या गलत तरीके से भुगतान हुआ है, जिसके बाद पूरे सिस्टम की समीक्षा और जांच शुरू की गई। इसी कड़ी में ट्रेजरी से भुगतान की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोककर व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। कर्मचारियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव इधर, समय पर वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित सेवाएं देने के बावजूद यदि समय पर वेतन नहीं मिलेगा तो कामकाज प्रभावित होना स्वाभाविक है। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों ने भी बच्चों की फीस, बैंक लोन और दैनिक खर्चों को लेकर चिंता जताई है। कई कर्मचारियों का कहना है कि वे पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें वेतन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में अन्य सरकारी विभागों में भी वेतन भुगतान प्रभावित हो सकता है। फिलहाल सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सत्यापन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता न हो सके। इससे संबंधित अधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों का वेतन रोका नहीं गया है, बल्कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भुगतान किया जाएगा।

फ्लाई ऐश के कुशल प्रबंधन एवं प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) द्वारा  सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया में फ्लाई ऐश के कुशल प्रबंधन एवं परिवहन के लिए एक आधुनिक रेलवे प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया गया है। यह पहल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी पीएम गतिशक्ति परियोजना के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य देश में लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को सुदृढ़ करना और परिवहन को अधिक प्रभावी बनाना है। इस नवीन रेलवे प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब ताप विद्युत गृह से उत्पन्न फ्लाई ऐश का परिवहन अत्याधुनिक मशीनों एवं विशेष कंटेनरों के जरिए होगा। इसके लिए विशेष मशीनों का उपयोग किया जाएगा, जिससे लोडिंग व अनलोडिंग की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज व पर्यावरण के अनुकूल होगी। यह प्रणाली फ्लाई ऐश परिवहन के क्षेत्र में आधुनिकता और दक्षता का नया मानक स्थापित करेगी। प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति पूर्व में फ्लाई ऐश का परिवहन मुख्यतः सड़क मार्ग से बल्करों के माध्यम से तथा रेलवे के जरिए टारपोलिन से ढंके रैक के जरिए किया जाता था। इस पारंपरिक व्यवस्था में प्रदूषण की संभावना अधिक रहती थी तथा संचालन में भी कई व्यावहारिक चुनौतियाँ सामने आती थीं। नवीन रेलवे प्लेटफॉर्म के निर्माण से इन समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित हुआ है। अब फ्लाई ऐश का परिवहन अत्यल्प प्रदूषण के साथ सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा। सुगम समाधान है आधुनिक प्लेटफॉर्म यह आधुनिक रेलवे प्लेटफॉर्म 630 मीटर लंबा है और इसका निर्माण लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया गया है। प्लेटफॉर्म की विशेषता यह है कि इस पर संपूर्ण रेल रैक को एक साथ खड़ा किया जा सकता है, जिससे खास कंटेनरों एवं वैगनों में फ्लाई ऐश तथा अन्य सामग्री की लोडिंग-अनलोडिंग अत्यंत सुगमता से की जा सकती है। यह व्यवस्था न केवल संचालन को सरल बनाएगी, बल्कि लंबी दूरी तक फ्लाई ऐश के परिवहन को अधिक किफायती और प्रभावी भी बनाएगी। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृह लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए फ्लाई ऐश के अधिकतम उपयोग और प्रबंधन के लिए नवाचारपूर्ण पहल कर रहे हैं। पीएम गतिशक्ति परियोजना का स्मार्ट उपयोग करते हुए कंपनी ने लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, अवसंरचना सुदृढ़ीकरण एवं समन्वित क्रियान्वयन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।  

झारखण्ड हाई कोर्ट ने हिरासत में मानवाधिकार उल्लंघन पर मांगा जवाब

 रांची झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के गंभीर मामले पर सख्ती दिखाते हुए स्वत: संज्ञान लिया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य प्रशासन से कड़े सवाल पूछे. कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि हिरासत में मानवाधिकारों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सीसीटीवी और निगरानी व्यवस्था पर सवाल सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरायकेला एसपी से पूछा कि राज्य के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं. अदालत ने यह जानने की कोशिश की कि क्या हिरासत में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं. कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि निगरानी व्यवस्था की कमी को गंभीरता से लिया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग से भी मांगा जवाब अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भी तलब किया है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि वे यह स्पष्ट करें कि पीड़ित तरुण महतो को “फिट फॉर कस्टडी” का प्रमाण पत्र देने वाले चिकित्सक के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है. यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि हिरासत में किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन डॉक्टर की जिम्मेदारी होती है, और इसमें लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है. पीड़ित को मिला मुआवजा राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पीड़ित तरुण महतो को 1.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है. हालांकि, अदालत का ध्यान केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरे मामले में जवाबदेही तय करना चाहती है. कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो. घटना की पृष्ठभूमि यह मामला 19 नवंबर 2025 की रात का है, जब ईचागढ़ पुलिस तरुण महतो को हिरासत में लेकर गई थी. आरोप है कि थाने में उसकी बेरहमी से पिटाई की गई. इस घटना के बाद पीड़ित की पत्नी ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई थी. इसी पत्र को आधार बनाकर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया. अगली सुनवाई 18 जून को खंडपीठ ने सभी संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है. अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन कोर्ट के सवालों का क्या जवाब देता है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है.

‘बकाया बिल से घबराने की जरूरत नहीं, समाधान योजना से मिलेगी राहत’ – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर प्रदेश के मुखिया  विष्णुदेव साय का 4 मई को सुदूर वनांचल ग्राम कमराखोल का दौरा आमजन के लिए राहत और विश्वास का संदेश लेकर आया। सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आम पेड़ के नीचे आयोजित चौपाल में मुख्यमंत्री  साय ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को आत्मीयता से सुना और मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यह दृश्य शासन और जनता के बीच विश्वास के मजबूत रिश्ते का जीवंत उदाहरण बन गया। बिजली बिल की चिंता पर मिला भरोसे का समाधान चौपाल के दौरान जब एक ग्रामीण ने बढ़ते बिजली बिल और बकाया राशि को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की, तो मुख्यमंत्री ने उसे बीच में ही आश्वस्त करते हुए कहा -“परेशान होने की जरूरत नहीं है, आपकी सरकार आपके साथ है।” उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की बिजली बिल भुगतान समाधान योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है, जिसके तहत पुराने बकाया बिलों में व्यापक छूट प्रदान की जा रही है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ कृषि पंप धारकों को भी योजना का लाभ मिल रहा है, जबकि बीपीएल परिवारों के लिए विशेष रियायतों का प्रावधान किया गया है। जमीन पर दिखी संवेदनशीलता, मौके पर निर्देश मुख्यमंत्री  साय की कार्यशैली केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने तत्काल कलेक्टर को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि कमराखोल सहित आसपास के गांवों के लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और समस्याओं का समाधान उनके अपने गांव में ही हो सके।इस दौरान कलेक्टर  गोपाल वर्मा ने जानकारी दी कि जिले में अब तक 13 हजार से अधिक उपभोक्ता इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं और उन्हें कुल 11.75 करोड़ रुपये से अधिक की छूट प्रदान की जा चुकी है। सुशासन का जीवंत उदाहरण बना कमराखोल कमराखोल की इस चौपाल ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब शासन का नेतृत्व सीधे जनता से संवाद करता है, तो जटिल समस्याओं का समाधान भी सरल हो जाता है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि सुशासन केवल योजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुंचाने की प्रतिबद्धता का नाम है।