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चौपाल में मिली राहत, सरलाबाई मरावी की समस्या का मुख्यमंत्री ने किया त्वरित समाधान

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल में शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक भावनात्मक उदाहरण सामने आया। सरोधी की रहने वाली सरलाबाई मरावी ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के समक्ष अपनी समस्या रखी और कुछ ही पलों में उसका समाधान भी मिल गया। सरलाबाई मरावी, पति  लल्लूराम मरावी, एक साधारण कृषक परिवार से हैं। उनके पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है और परिवार में उनका एक बेटा है। खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है। चौपाल के दौरान सरलाबाई ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 1.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने जैसे ही यह बात सुनी, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और तुरंत निराकरण सुनिश्चित कराया। अपनी समस्या का त्वरित समाधान होते देख सरलाबाई भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बात इतनी जल्दी सुनी जाएगी और समाधान भी मिल जाएगा। उनकी आंखों में संतोष और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी। सरलाबाई ने यह भी बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे घरेलू खर्चों में सहारा मिलता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ कि सरकार वास्तव में गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनका समाधान कर रही है। ग्राम सरोधी की यह घटना इस बात का सजीव प्रमाण है कि सुशासन तिहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में भरोसा और राहत लेकर आने वाली पहल बन चुका है।

पराली पर कंट्रोल की तैयारी: फरीदकोट प्रशासन ने जारी किए नए निर्देश, सख्त निगरानी होगी

फरीदकोट. डिप्टी कमिश्नर पूनमदीप कौर ने फरीदकोट जिले में गेहूं की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासनिक अधिकारियों जैसे विभिन्न विभागों के साथ मीटिंग की। इस मौके पर एस.एस.पी., फरीदकोट डॉ. प्रज्ञा जैन खास तौर पर मौजूद थीं। मीटिंग में मौजूद अधिकारियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने अधीन क्लस्टर और नोडल अधिकारियों के साथ मीटिंग करें और उन्हें गांवों में जाकर किसानों को गेहूं की पराली न जलाने के बारे में जागरूक करने के लिए मजबूर करें। उन्होंने कहा कि इस काम के लिए आने वाले कुछ दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने एग्रीकल्चर डिपार्टमैंट के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे किसान ट्रेनिंग कैंप, नुक्कड़ मीटिंग, प्रचार वैन, सोशल मीडिया वगैरह के जरिए किसानों को खेतों में गेहूं के डंठल उगाने के लिए मोटिवेट करें। डिप्टी कमिश्नर ने किसानों से अपील की कि वे गेहूं के डंठलों में आग न लगाकर माहौल बचाने में अपना योगदान दें। इस मौके पर एडिशनल डिप्टी कमिश्नर संदीप मल्होत्रा, पुनीत शर्मा सब डिविजनल मैजिस्ट्रेट फरीदकोट, कुलवंत सिंह चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर फरीदकोट, गुरप्रीत सिंह एग्रीकल्चर ऑफिसर फरीदकोट, लखवीर सिंह एग्रीकल्चर डिवैल्पमैंट ऑफिसर फरीदकोट, रवि दीप सिंगला एनवायरनमैंटल इंजीनियर फरीदकोट, शुभकरमन सिंह असिस्टैंट एनवायरनमैंटल इंजीनियर पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड फरीदकोट मौजूद थे।

क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज, मैट डेमन बने ओडीसियस

क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म 'द ओडिसी' का नया ट्रेलर जारी हो गया है। इसमें मैट डेमन को ओडीसियस के रूप में दिखाया गया है और ट्रोजन युद्ध के बाद उनकी खतरनाक घर वापसी की यात्रा को करीब से देखा जा सकता है। यूनिवर्सल पिक्चर्स की यह फिल्म 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। ट्रेलर में ओडीसियस को इथाका राज्य लौटने की कोशिश करते हुए दिखाया गया है, जहां उनकी पत्नी पेनेलोप (ऐनी हैथवे द्वारा अभिनीत) और उनके बेटे टेलीमाकस (टॉम हॉलैंड द्वारा अभिनीत) पर खतरा बढ़ता जा रहा है। ट्रेलर में क्या है? फिल्म ग्रीक पौराणिक कथा के नायक ओडीसियस की कहानी पर आधारित है। इस किरदार को मैट डेमन ने निभाया है। ट्रेलर में ग्रीक हीरो को लंबी, टॉर्चर और फिक्शनल घर वापसी की यात्रा पर दिखाया गया है, जिसमें वह अपने परिवार को बचाने और इथाका में अपनी जगह वापस पाने की कोशिश करता है। इस ट्रेलर में कई महत्वपूर्ण किरदारों को भी दिखाया गया है। रॉबर्ट पैटिनसन एंटिनस के रूप में नजर आते हैं, जो रानी से शादी करके इथाका पर कब्जा करना चाहता है। चार्लीज थेरॉन अप्सरा कैलिप्सो की भूमिका निभा रही हैं। जॉन लेगुइजामो ओडीसियस के सेवक यूमेअस के रूप में नजर आते हैं, जबकि जॉन बर्न्थेल स्पार्टा के यूनानी राजा और एगामेम्नन के भाई मेनेलास की भूमिका में हैं। द ओडिसी ट्रेलर रिलीज – फोटो : यूट्यूब ग्रैब क्रिस्टोफर नोलन की 13वीं फीचर फिल्म है ‘द ओडिसी’ ‘द ओडिसी’ क्रिस्टोफर नोलन द्वारा निर्देशित 13वीं फीचर फिल्म है। फिल्म के प्रमुख कलाकारों में जेंडाया देवी एथेना के रूप में, बेनी सफ्डी एगामेम्नन के रूप में, हिमेश पटेल यूरिलोचस के रूप में, मिया गोथ मेलान्थो के रूप में, जिमी गोंजालेस सेफियस के रूप में, लुपिता न्योंगो के किरदार में नजर आएंगी। हालांकि, अभी तक विल युन ली के किरदार से पर्दा नहीं हटा है। दर्शकों को फिल्म का बेसब्री से इंतजार है।  

आवास को लेकर बढ़ी खींचतान: झुग्गियों पर सरकारी कर्मचारियों ने भी ठोका हक

भोपाल. भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित तुलसी मानस भवन, हिंदी भवन और गांधी भवन के बीच की जमीन पर बनी 27 झुग्गियों को हाल ही में प्रशासन ने हटाकर जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद यहां रह रहे परिवारों को मालीखेड़ी स्थित प्रधानमंत्री आवासों में पुनर्वासित किया गया है। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया सर्वे और दस्तावेजों के आधार पर की गई, लेकिन अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। झुग्गियों के हटने के बाद कुछ ऐसे लोग भी सामने आए हैं, जो दावा कर रहे हैं कि वहां उनकी झुग्गी थी। इनमें एक शासकीय कर्मचारी और एक सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं, जिससे पूरे मामले की जांच और जटिल हो गई है। दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई के दौरान सामान के गायब होने और नुकसान के आरोप लगाए हैं। प्रशासन इन आरोपों से इनकार कर रहा है और कह रहा है कि पूरी प्रक्रिया रहवासियों की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। अब प्रशासन द्वारा प्राप्त दावों और शिकायतों की जांच की जा रही है, जिसके बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सर्वे के आधार पर किया गया पुनर्वास प्रशासन के अनुसार कार्रवाई से पहले आदिवासी बस्ती का विस्तृत सर्वे किया गया था। इस दौरान 27 परिवारों के नाम और दस्तावेज एकत्र कर सूची तैयार की गई, जिसके आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास आवंटित किए गए। अधिकारियों का कहना है कि केवल पात्र परिवारों को ही पुनर्वास का लाभ दिया है। फर्जी दावों से बढ़ी उलझन झुग्गियां हटने के बाद दो नए दावेदार सामने आए हैं। इनमें से एक सेवानिवृत्त मंत्रालय कर्मचारी महेश सोंधिया और दूसरे वन विभाग में पदस्थ मनीष जायसवाल हैं। दोनों ने अलग-अलग झुग्गियों पर अपना दावा किया है, जबकि सर्वे में इन स्थानों पर अन्य लोगों के नाम दर्ज थे। एसडीएम ने दोनों से निवास के प्रमाण मांगे हैं। प्रभावित परिवारों के गंभीर आरोप करीब 20 प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान उनका कीमती सामान गायब हो गया या नष्ट हो गया। कुछ लोगों का कहना है कि उनके घरों की अलमारियां, जेवर, नकदी और जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। कार्रवाई के बाद वे अपने पुराने स्थान पर जाकर सामान ढूंढना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से प्रवेश रोक दिया है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा के लिए पक्की दीवार और बैरिकेडिंग कर दी है। पालीटेक्निक चौराहे से सीएम हाउस जाने वाले मार्ग पर 20 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, ताकि कोई अवांछित गतिविधि न हो सके। प्रशासन का पक्ष एसडीएम दीपक पांडे ने स्पष्ट किया है कि झुग्गियों को हटाने से पहले सभी रहवासियों की मौजूदगी में उनका सामान सुरक्षित रूप से शिफ्ट कराया गया था। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का सामान मलबे में नहीं दबा और पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की गई। 10 से अधिक आवेदन पहुंचे सूत्रों के अनुसार, अब तक 10 से अधिक आवेदन एसडीएम कार्यालय में प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें लोग झुग्गी पर अपना दावा कर रहे हैं। प्रशासन इन सभी मामलों की जांच कर रहा है और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

रेत माफिया पर प्रशासन का शिकंजा, 9 वाहन जप्त

रायपुर रेत के अवैध परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 6 हाइवा और 3 ट्रैक्टर जब्त प्रदेश में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में  राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने जांजगीर-चांपा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया। रेत के अवैध परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 6 हाइवा और 3 ट्रैक्टर जब्त जांच के दौरान बम्हनीडीह क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन करते पाए जाने पर 2 हाइवा वाहनों को जब्त कर थाना बम्हनीडीह के सुपुर्द किया गया। वहीं जांजगीर क्षेत्र में 3 ट्रैक्टर जब्त कर खनिज विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपा गया। इसके अलावा देवरहा, पीथमपुर, हाथनेवरा, गढ़ापाली, केवा नवापारा और जांजगीर मुख्य मार्ग पर जांच के दौरान 4 और हाइवा अवैध रेत परिवहन करते पाए गए, जिन्हें जब्त कर पुलिस लाइन खोखरा में सुरक्षित रखा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध परिवहन में संलिप्त लोगों के खिलाफ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 से 23(ख) के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अजब-गजब मामला खरगोन से: महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया

खरगोन  अक्सर फिल्मों और कहानियों में एक साथ कई खुशियां दरवाजे पर दस्तक देती हैं, ठीक वैसा ही कुछ यहां देखने को मिला, जब एक साधारण परिवार की जिंदगी एक ही रात में बदल गई. रात का सन्नाटा था, अस्पताल के बाहर परिजन बेचैनी से इंतजार कर रहे थे. हर बीतता पल चिंता बढ़ा रहा था, लेकिन अंदर डॉक्टरों की टीम एक मुश्किल जंग लड़ रही थी. फिर अचानक खुशखबरी आई एक नहीं, दो नहीं, बल्कि चार बच्चों की किलकारी एक साथ गूंजी है।  मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म देकर सबको चौंका दिया. खास बात यह है कि इन चारों नवजातों में दो बेटे और दो बेटियां शामिल हैं।  बच्चों की हो रही विशेष निगरानी जानकारी के मुताबिक, बड़वाह तहसील के मेहपुरा गांव की रहने वाली पूजा को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रात डॉक्टरों की टीम की निगरानी में डिलीवरी कराई गई, जिसमें महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया. डॉक्टरों के अनुसार, यह डिलीवरी काफी जटिल थी, लेकिन मेडिकल टीम की सतर्कता से सभी बच्चों का सुरक्षित जन्म हो सका. चारों नवजातों का वजन करीब 700 ग्राम से 1 किलोग्राम के बीच बताया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है. डॉक्टरों का कहना है कि इतनी कम वजन में जन्म लेना जोखिम भरा होता है, इसलिए बच्चों को लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।  फिलहाल मां और चारों बच्चे अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. इस अनोखी घटना की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है, लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं.

पुलिस विभाग में तबादलों की लहर: रायपुर में 136 कर्मियों का हुआ ट्रांसफर, कई थानों में बदलाव

रायपुर. राजधानी रायपुर में पुलिस महकमे के भीतर एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। रायपुर कमिश्नरेट में व्यापक स्तर पर पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली में नई गति और संतुलन लाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला द्वारा जारी आदेश के अनुसार कुल 136 पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर किया गया है। इस आदेश के साथ ही सभी तबादलों की विस्तृत सूची भी सार्वजनिक कर दी गई है। इस तबादला सूची में 2 सब-इंस्पेक्टर (SI), 16 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और 118 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल शामिल हैं। यह संख्या बताती है कि यह सिर्फ औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिस बल में व्यापक पुनर्गठन है। कई पुलिसकर्मियों को उनके वर्तमान थानों से हटाकर नए थानों, चौकियों और विशेष इकाइयों में पदस्थ किया गया है। प्रशासनिक दृष्टि से अहम कदम ऐसे बड़े पैमाने पर तबादले आमतौर पर प्रशासनिक आवश्यकताओं, कार्यक्षमता बढ़ाने और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से किए जाते हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलने से न सिर्फ नई ऊर्जा आती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होती है। कानून-व्यवस्था पर पड़ेगा असर रायपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में यह फेरबदल शहर के विभिन्न इलाकों में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। नए स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने अनुभव और कार्यशैली से संबंधित क्षेत्रों में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। विभागीय रणनीति का हिस्सा पुलिस विभाग समय-समय पर इस तरह के बदलाव करता रहता है, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही, पक्षपात या स्थानीय प्रभाव को कम किया जा सके। इसके अलावा, संवेदनशील इलाकों में अनुभवी पुलिसकर्मियों की तैनाती भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होती है। इससे अपराध नियंत्रण और जनसुरक्षा को मजबूती मिलती है। कर्मचारियों के लिए नई चुनौती तबादले के बाद पुलिसकर्मियों के सामने नए कार्यस्थल, नई चुनौतियां और नई जिम्मेदारियां होंगी। उन्हें नए क्षेत्र की परिस्थितियों को समझते हुए तेजी से खुद को ढालना होगा। वहीं, आम जनता को भी नई तैनाती के बाद पुलिस से बेहतर सहयोग और सेवा की उम्मीद है। बता दें रायपुर कमिश्नरेट में हुआ यह बड़ा फेरबदल प्रशासन की सक्रियता और कानून-व्यवस्था को लेकर उसकी गंभीरता को दर्शाता है। आने वाले समय में यह बदलाव शहर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में कितना कारगर साबित होता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

प्रदेश के 10 लाख दिव्यांगजनों के लिए नई नीति: मोहन यादव सरकार का ऐतिहासिक कदम, एक प्लेटफार्म पर काम

भोपाल मोहन यादव सरकार प्रदेश के दस लाख दिव्यांगजनों के लिए पहली बार नीति बनाएगी। इस नीति के लागू होने के बाद सारे विभाग दिव्यांगजनों को लेकर एक प्लेटफार्म पर काम कर सकेंगे। यहां अलग-अलग विभागों के द्वारा अलग-अलग स्कीम के जरिए दिव्यांगजन को लाभ दिया जाता है।  आयुक्त दिव्यांगजन डॉ अजय खेमरिया ने इस नीति को बनाए जाने को लेकर  चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार दिव्यांगजनों के लिए कोई नीति बनाने का काम राज्य सरकार करने जा रही है। अभी अलग-अलग विभाग अलग-अलग स्कीम चलाते हैं। अभी कोई नीति नहीं होने से दिव्यांगजन के लिए समान काम नहीं हो पाता है। अभी दिव्यांगजनों के समग्र विकास के लिए जो काम हो रहे हैं, उसमें एकरूपता की कमी है, इसलिए दिव्यांगजन के लिए नीति बनाने की जरूरत है।खेमरिया ने कहा कि जिस तरह से एमपी के बच्चों के लिए बाल नीति है, महिला नीति है, उसी तरह की दिव्यांगजन नीति भी होना चाहिए। एक्सपर्ट्स, दिव्यांगजनों से करेंगे बात डॉ खेमरिया ने बताया कि नीति तैयार करने के लिए स्टेक होल्डर्स, एक्सपर्ट, हितग्राही से बात करेंगे। साथ ही विदेशों में जाकर वहां की स्थिति देखकर आने वाले, विश्वविद्यालयों में शोध करने वालों से बातचीत कर नीति बनाएंगे। एमपी के बाहर के विषय विशेषज्ञों से भी बात की जाएगी। ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों के साथ आदिवासी बेल्ट के लोगों से भी बात करेंगे। अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी जैसे इलाकों में सरकार की योजनाओं की डिलीवरी में किस तरह की दिक्कत होती है, इसकी भी जानकारी ली जाएगी। वहां के दिव्यांग जन से बात की जाएगी। अलग-अलग विभाग के अलग-अलग नार्म्स दिव्यांगजन आयुक्त खेमरिया ने कहा कि अभी दिव्यांगों के लिए सामाजिक न्याय, एमएसएमई, एनआरएलएम, महिला बाल विकास विभाग समेत अन्य विभागों के अलग-अलग काम हैं। अगले छह माह में इसका ड्राफ्ट बना लिया जाएगा और कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर 2026 में ही इसे लागू कराया जाएगा। फरवरी में सीएम को लिखा था पत्र डॉ खेमरिया ने कहा कि नीति बनाने को लेकर फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से पत्र लिखा था जिसके लिए मुख्यमंत्री ने अब अधिकृत कर दिया है। इसके अलावा सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को भी पत्र लिखा गया था। इसलिए अब दिव्यांग जन बनाने के लिए सुझाव लेने और प्रस्ताव मंगाने का काम किया जाएगा। इसके लिए ऐसे लोगों से भी संपर्क किया जाएगा जो दिव्यांगजन के लिए काम करते हैं। जो दिव्यांग हैं, उनसे भी सुझाव लिए जाएंगे ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए नीति में वास्तविक प्रयास किए जा सकें। इसके पहले कोई नीति नहीं है। अलग-अलग विभागों ने अपने हिसाब से दिव्यांगजन के लिए अलग रोस्टर, प्रावधान तय कर रखें हैं लेकिन विभागों की दिव्यांगजन को लेकर कोई नीति नहीं है। अब मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद इसके लिए नई नीति बनाकर उसे सभी विभागों में लागू कराया जाएगा। नीति के लिए इनसे भी चर्चा करने के निर्देश डॉ अजय खेमरिया को 13 अप्रैल 2026 को सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से एमपी में दिव्यांगजन अधिनियम 2016 राज्य निधि, निराश्रित निधि, के साथ योजनाओं, पुनर्वास और कल्याण से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल करते हुए दिव्यांगजन नीति का प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। शासन की ओर से कहा गया है कि विभिन्न विभागों, शासकीय और अर्द्धशासकीय संस्थाओं, एक्सपर्ट्स, संबंधित सिविल सोसायटी के सदस्यों, प्रख्यात खिलाड़ियों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं से चर्चा कर नीति के मसौदे के निर्माण और उसे अंतिम रूप देने का काम किया जाए। तेलंगाना, त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की नीति का करेंगे अध्ययन     इस नई नीति को अंतिम रूप देने से पहले तेलंगाना और त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा।     अभी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय विभाग अपनी-अपनी योजनाओं में दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।     प्रदेश में 2011 की जनगणना और यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) के आधार पर करीब 10 लाख दिव्यांगजन दर्ज हैं।     आगामी जनगणना में दिव्यांगों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है, क्योंकि पहले जहां सात श्रेणियों के आधार पर आंकड़े जुटाए गए थे, वहीं अब 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया जाएगा।     नीति में यह भी प्रस्ताव रहेगा कि 18 वर्ष से अधिक आयु के मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संभाग स्तर पर 100 बिस्तरों वाले विशेष आश्रय गृह स्थापित किए जाएं।  

DAVV का मेडिकल कॉलेज झाबुआ में: कुलगुरु ने दी जानकारी, इंजीनियरिंग कॉलेज में शुरुआत की तैयारी

झाबुआ  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) झाबुआ में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए आवश्यक भूमि आवंटित हो चुकी है, और अब प्रारंभिक कक्षाओं के संचालन हेतु एक अस्थायी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई के नेतृत्व में यह महत्वाकांक्षी परियोजना 350 से 400 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत के साथ साकार होगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन को आशा है कि इस माह के अंत तक इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय आ सकता है। दरअसल विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इस निर्णय के तहत, मध्यप्रदेश शासन ने उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 70 एकड़ भूमि आवंटित कर दी है। यह आवंटन विश्वविद्यालय को अपने स्वयं के चिकित्सा शिक्षा संस्थान की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। झाबुआ जिला अस्पताल को भी विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार किया जा रहा परियोजना के एक अहम पहलू के रूप में, झाबुआ जिला अस्पताल को भी विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन इस संबंध में निर्णय ले रहा है कि जिला अस्पताल को विश्वविद्यालय को सौंप दिया जाए, ताकि यह नए मेडिकल कॉलेज के लिए एक शैक्षणिक अस्पताल के रूप में कार्य कर सके। वर्तमान में, झाबुआ जिला अस्पताल में लगभग 250 बिस्तर उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय मेडिकल काउंसिल (NMC) के मानदंडों के अनुसार, 100 सीटों वाले मेडिकल कॉलेज के लिए 300 बिस्तरों वाले अस्पताल की आवश्यकता होती है। विश्वविद्यालय का मानना है कि जिला अस्पताल के अधिग्रहण से यह आवश्यकता पूरी हो जाएगी, जिससे छात्रों को पर्याप्त नैदानिक अनुभव मिल सकेगा। यूनिवर्सिटी का खुद का मेडिकल कॉलेज होगा कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद में मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला लिया गया था। इसमें तय किया गया था कि झाबुआ में मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा। इसके लिए मध्यप्रदेश शासन ने हायर एजुकेशन विभाग के माध्यम से यूनिवर्सिटी को जमीन भी आवंटित कर दी है। झाबुआ डिस्टिक हॉस्पिटल है, उस हॉस्पिटल को, मध्यप्रदेश शासन ये निर्णय ले रहा है कि वह यूनिवर्सिटी को सौंप दिया जाएगा। जिससे हमारा जो शैक्षणिक अस्पताल है उसके रूप में वह जिला हॉस्पिटल काम कर सकेगा। इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की मांगी अनुमति कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि यह भी कोशिश की जा रही है कि वहां पर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का इंजीनियरिंग कॉलेज है। यदि शासन उचित समझता है तो, यूनिवर्सिटी ने मांग की है कि जब तक नए परिसर में हमारा मेडिकल कॉलेज स्थापित नहीं हो जाता तब तक इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति दे दी जाए। इसके लिए नेशनल मेडिकल कांउसिल में यूनिवर्सिटी ने आवेदन भी कर दिया है। उम्मीद है इस महीने तक निर्णय आ सकता है उन्होंने बताया कि 100 सीट के लिए 300 बैड का हॉस्पिटल होना जरूरी है। वहां हमें बताया है कि वहां 250 बैड का हॉस्पिटल है। कुल मिलाकर हमें 300 बैड का हॉस्पिटल मिल जाएगा। कुलगुरु ने कहा कि अस्पताल तो हमें मिल रहा है, इसलिए उसकी लागत नहीं है, लेकिन कॉलेज बनाने के लिए कम से कम 350 से 400 करोड़ रुपए की लागत इनिशयली आएगी। उम्मीद है कि इस महीने तक इसका कुछ निर्णय हो सकता है। आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया गया कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एक अभिनव प्रस्ताव भी रखा है। जब तक झाबुआ में मेडिकल कॉलेज का नया परिसर तैयार नहीं हो जाता, तब तक राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति मांगी गई है। विश्वविद्यालय ने नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) में इस अस्थायी व्यवस्था के लिए आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया है। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि कॉलेज की स्थापना प्रक्रिया में कोई देरी न हो और शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो सके। 350 से 400 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक होगा इस परियोजना की कुल लागत का अनुमान लगाया गया है। कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के अधिग्रहण से उसकी लागत अलग होगी, क्योंकि यह शासन द्वारा सौंपा जा रहा है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के भवन और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए प्रारंभिक तौर पर 350 से 400 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक होगा। यह राशि कॉलेज के आधुनिक कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और प्रशासनिक खंड के निर्माण पर खर्च की जाएगी।  

लखपति दीदियों के हौसले की उड़ान देख गदगद हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , सबको और मेहनतकर अब करोड़पति बनने की राह पर चलने कहा

रायपुर  मई की तपती गर्मी में आज लगातार दूसरे दिन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय दूरस्थ गांवों के औचक दौरे पर रहे । कबीरधाम ज़िले के पंडरिया स्थित लोखान पंचायत में आज मुख्यमंत्री का आगमन हुआ । इस अवसर पर वे बैगा बाहुल्य कमराखोल में पीएम जनमन योजना के तहत हुए कार्यों का निरीक्षण किए और वहीं पास में आम के पेड़ों के नीचे अपनी चौपाल लगा लिए । अपने बीच मुख्यमंत्री को देख ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई । बीरनमाला, कमल के फूल से मुख्यमंत्री का आत्मीय अभिनंदन करते हुए ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। इस दौरान महतारी शक्ति को सामने बैठा देख मुख्यमंत्री ने पूछ लिया कितनी महतारी यहाँ लखपति हो गई हैं ? एक साथ अनेक हाथ हवा में उठ गए । मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते सबको करोड़पति बनने की दिशा में आगे बढ़ने कहा । उन्होंने बारी- बारी से लखपति दीदियों से बातचीत की । यहाँ जंगल से बीन कर लाए  महुआ और चार को मुख्यमंत्री  साय को उपहार के रूप में देते हुए कुकदूर की लखपति दीदी मती कचरा तेलगाम ने मुख्यमंत्री से कहा कि महुआ का पौष्टिक लड्डू बनाकर खाइएगा , वरना मैं बना कर दूँगी । मुख्यमंत्री भी उनकी आत्मीयता देख भाव विभोर होकर मुस्कुराते हुए बोले कि घर जाकर बनवाकर खाऊँगा । मती कचरा तेलगाम दीदी आस पास के गांवों में बन रहे प्रधानमंत्री आवासों में सेंट्रिग प्लेट लगाती हैं और इससे उन्हें एक साल में ८० हज़ार की आय हुई है । उन्होंने कहा कि आज चौपाल लगा देख वे साहस वहाँ पहुँची और मुख्यमंत्री  के लिए भेंट स्वरूप जंगल से बीने महुआ और चार दी हैं ।  वहीं डीलर दीदी मती रजमत बाई धुर्वे ने बताया कि वे प्रधानमंत्री आवासों के लिए मटेरियल सप्लाई का काम करती हैं । उन्हें सालाना 2.50 – 3 लाख का मुनाफा हुआ है । लखपति पशु सखी मती शिवरानी पटेल का कहना है कि समूह से जुड़ सीआईएफ से उन्होंने व्यवसाय के लिए ऋण लिया और अपने खेत में सब्जी- भाजी लगायी । उन्हें सालाना डेढ़ लाख की आय हो रही । इस बिहान योजना से जीवन में आए सकारात्मक बदलाव के लिए धन्यवाद स्वरूप उन्होंने अपने खेत की सब्जियां टोकरी में मुख्यमंत्री को भेंट की । मुख्यमंत्री ने भी सभी दीदियों से बात कर प्रोत्साहित किया कि इसी तरह मन लगाकर काम करिए और आर्थिक रूप से सशक्त होइए।  ज्ञात हो कि लोखन पंचायत में 58 लखपति दीदियां हैं जो विभिन्न व्यवसाय से जुड़ आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं ।        चौपाल में हुआ नामकरण आज अपने नौनिहाल बच्चे के साथ मती ऋषि बघेल भी चौपाल पहुँची । यहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री से एक ही गुहार लगायी कि उनके बच्चे का नामकरण कर दें मुख्यमंत्री । बच्चे को गोद में लेकर दुलारते हुए मुख्यमंत्री  साय ने पूछा कि कब हुआ है इसका जन्म ? तब माँ ने बताया कि रविवार के दिन । मुख्यमंत्री ने बच्चे को स्नेह से देखते हुए नाम रविशंकर बघेल रखा और आशीर्वाद स्वरूप ५०० रुपए भी दिए । पंडरिया विधायक मती भावना बोहरा ने भी बच्चे को ५०० रुपए अपनी ओर से आशीर्वाद स्वरूप दिया ।मुख्यमंत्री के द्वारा नवजात का नाम रखते ही चौपाल में तालियाँ गूंज उठी । चौपाल में पहुंचे मेधावी विधार्थी आज कबीरधाम के पंडरिया के लोखान पंचायत के आश्रित ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की चौपाल को देख वहाँ से गुज़र रहे राजेंद्र मसराम और उनके पिता भी रुक गए । इस दौरान बातचीत में पता चला कि छिरहा के रहने वाले इस मेधावी बच्चे ने इस साल हाई स्कूल में 94.5 %  अंक के साथ ज़िले में नौवाँ स्थान प्राप्त किया है । मुख्यमंत्री ने उन्हें ख़ुश होकर पेन दिया और पूछा बड़ा होकर क्या बनना चाहते हैं ? इस पर उन्होंने बड़ा होकर आईएएस बनने के सपने को साझा किया । मुख्यमंत्री ने उन्हें खूब सारी शुभकामनाएँ दी ताकि वो अपना सपना पूरा कर सकें । यहाँ कमराखोल के बैगा बस्ती की कक्षा नवमी की बालिका भी चौपाल में मुख्यमंत्री से मिली और बताया कि आज पीएम जनमन से बने उनके आवास में मुख्यमंत्री पहुंचे थे । वहाँ मुख्यमंत्री से बात नहीं हो पायी इस लिए वे चौपाल में पहुँचीं । इस साल यह बच्ची हेम कुमारी 75% अंक कक्षा नौवी में लायी । एचसीएम ने आगे भी मन लगाकर पढ़ने की सलाह और बधाई देते हुए पेन दिया ।  घोषणाएँ बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज चौपाल लगाकर शासकीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली और प्रसन्न दिखे कि दूरस्थ अंचल तक हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है । उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर कमरखोल में  मिशन तालाब गहरीकरण (ट्यूबवेल के साथ), रामखिलावन के घर से ग्राम देवसरा तक मिट्टी मुरुम सड़क (६ किलोमीटर लगभग) , सामुदायिक भवन, मुक्तिधाम शेड निर्माण तथा  महतारी सदन ( स्व सहायता समूह की महिलाओं की माँग पर ) की घोषणा की । इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर  गोपाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक  धर्मेंद्र सिंह , सीओ जिला पंचायत  अभिषेक अग्रवाल और ग्रामीण चौपाल में उपस्थित रहे ।