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केजीएमयू की बड़ी सफलता: जटिल सर्जरी में मासूम बच्चे को मिली नई जिंदगी

लखनऊ  किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवाया है। विभाग के डॉक्टरों ने महज 10 किलोग्राम वजन के एक छोटे बच्चे के शरीर से डेढ़ किलोग्राम का विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल और जोखिम भरा था, क्योंकि बच्चे के कुल वजन का लगभग पंद्रह प्रतिशत हिस्सा अकेले ट्यूमर का था। ऐसे में सर्जरी के दौरान हर पल सतर्कता बरतना अनिवार्य था। ऑपरेशन की टीम पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जेडी रावत के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने यह सर्जरी बड़ी कुशलता और धैर्य के साथ संपन्न किया। ऑपरेशन में सीनियर रेजिडेंट डॉ. श्रेया श्रीवास्तव, डॉ. मानिष राजपूत तथा अन्य चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सहायक नर्सिंग सुपरिटेंडेंट सुधा सिंह सहित पूरी टीम ने ऑपरेशन को सफल बनाने में अथक परिश्रम किया। बच्चे की सेहत सर्जरी के बाद बच्चे की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है और वह खतरे से बाहर है। बच्चे की मां ने डॉक्टरों की टीम के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनके बेटे को नई जिंदगी मिली है। केजीएमयू प्रशासन ने भी पीडियाट्रिक सर्जरी टीम की इस उपलब्धि की सराहना की है और इसे संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 40 लाख की ठगी

मुंबई से एक चौंकाने वाला साइबर क्राइम मामला सामने आया है. स्कैमर्स ने एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर को 54 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा. इस दौरान उनसे करीब 40 लाख रुपये ठग लिए गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला मुंबई के भांडुप इलाके का है, जहां एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी को साइबर ठगों ने अपना शिकार बनाया. स्कैमर्स ने खुद को एंटी टेरर एजेंसी और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताया और पीड़ित को यह कहकर डराया कि उसका नाम एक बड़ा केस है. यहां तक कि विक्टिम को स्कैमर्स ने दिल्ली बम ब्लास्ट और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया और खौफ में डाला. डिजिटल अरेस्ट और दबाव स्कैमर्स ने पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल और फोन कॉल पर रखा. उसे कहा गया कि वह किसी को इस बारे में न बताए, वरना तुरंत गिरफ्तारी हो जाएगी. इस दौरान पीड़ित को मानसिक रूप से इतना दबाव में रखा गया कि उसने धीरे-धीरे अपनी जमा पूंजी अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी. करीब 54 दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा और अंत में वह करीब 40 लाख रुपये गंवा बैठा. यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ हो. हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां बुजुर्ग या रिटायर्ड लोग इस तरह के साइबर जाल में फंस रहे हैं. कई मामलों में लोगों ने करोड़ों रुपये तक गंवा दिए हैं और कुछ मामलों में मानसिक दबाव इतना ज्यादा था कि लोगों की जान तक चली गई. एक कॉल से शुरू हुई पूरी कहानी पूरी कहानी एक फोन कॉल से शुरू होती है. पीड़ित को एक अनजान नंबर से कॉल आता है. कॉल करने वाला खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताता है. शुरुआत में वह सीधा आरोप नहीं लगाता, बल्कि कहता है कि आपके आधार कार्ड या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी बड़े अपराध में हुआ है. इसके बाद कॉल अचानक ट्रांसफर कर दिया जाता है, जैसे किसी बड़े अधिकारी से बात हो रही हो. यहां दूसरा व्यक्ति खुद को मुंबई ATS या NIA का अधिकारी बताता है. यहीं से असली डर शुरू होता है. पीड़ित को बताया गया कि उसका नाम एक गंभीर केस में जुड़ा है. उसे कहा गया कि उसके आधार कार्ड से बैंक खाते खोले गए हैं जो आतंकवादी फंडिंग और बम ब्लास्ट जैसे मामलों से जुड़े हैं. कई मामलों में ठग यह तक कहते हैं कि आपका लिंक दिल्ली बम धमाके या इंटरनेशनल टेरर नेटवर्क से जुड़ा मिला है. इसके बाद उन्हें फर्जी FIR नंबर, केस डिटेल और यहां तक कि नकली सरकारी लेटर दिखाए जाते हैं ताकि कहानी असली लगे. कई बार वीडियो कॉल पर नकली पुलिस स्टेशन या यूनिफॉर्म में लोग भी दिखाए जाते हैं. अब सवाल ये है कि आखिर डिजिटल अरेस्ट होता क्या है? असल में यह एक साइबर फ्रॉड तरीका है, जिसमें स्कैमर्स खुद को पुलिस, CBI, RBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं. वे कहते हैं कि आपके खिलाफ केस दर्ज है और आपको डिजिटल तरीके से गिरफ्तार किया गया है. इसके बाद वे नकली दस्तावेज, फर्जी FIR और कोर्ट के कागज दिखाकर भरोसा दिलाते हैं. इसके बाद पीड़ित को लगातार कॉल पर रखा जाता है, ताकि वह किसी से सलाह न ले सके. डर और दबाव में आकर लोग अपने पैसे जांच के लिए या क्लियरेंस के लिए ट्रांसफर कर देते हैं. यही वह ट्रैप है जिसमें लोग फंस जाते हैं. सबसे खतरनाक बात यह है कि इसमें ठग सिर्फ पैसे नहीं लेते, बल्कि इंसान के दिमाग पर कब्जा कर लेते हैं. वे डर, शर्म और कानून का डर दिखाकर शख्स को अकेला कर देते हैं. डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं होती सरकार ने खुद कई बार ये कहा है कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता. कोई भी एजेंसी किसी भी जांच के लिए किसी शख्स को इस तरह से अरेस्ट नहीं करती है. पुलिस और साइबर एक्सपर्ट बार-बार यह चेतावनी देते रहे हैं कि कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसे मांगती है. अगर कोई ऐसा करता है, तो वह लगभग तय है कि यह धोखाधड़ी है. लेकिन इसके बावजूद लोग फंस रहे हैं, क्योंकि ठग अब पहले से ज्यादा स्मार्ट और टेक्निकल हो चुके हैं. वे असली जैसे आईडी कार्ड, वीडियो कॉल पर नकली ऑफिस और यूनिफॉर्म तक दिखा देते हैं. साइबर अपराध अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का नहीं, बल्कि दिमाग का खेल बन चुका है. अगर एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी भी इसमें फंस सकता है, तो कोई भी इसका शिकार हो सकता है. ज्यादातर लोग बूढ़े लोगों को टारगेट करते हैं. इसलिए सबसे जरूरी है अवेयर रहना. अगर कोई फोन पर आपको डराकर पैसे मांगता है या गिरफ्तारी की धमकी देता है, तो तुरंत कॉल काटें और पुलिस से संपर्क करें.

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर CM विष्णुदेव साय ने वीर सैनिकों को किया नमन

ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वीर सैनिकों को किया नमन नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है – मुख्यमंत्री साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ पर भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा कि यह अभियान केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि नए भारत की अटूट इच्छाशक्ति, निर्भीक संकल्प और निर्णायक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज से एक वर्ष पूर्व पहलगाम में सीमा पार से आतंकियों द्वारा किए गए घिनौने हमले ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया था, लेकिन भारत ने उस चुनौती का ऐसा जवाब दिया, जिसने इतिहास में शौर्य और संकल्प का स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अब भारत चुपचाप सहने वाला राष्ट्र नहीं रहा, बल्कि मातृभूमि की ओर उठने वाली हर बुरी नजर का निर्णायक और प्रभावशाली जवाब देने में सक्षम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान ने भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, बेजोड़ रणनीति और राष्ट्र के प्रति असीम समर्पण को अमर कर दिया। जिस सटीकता, दृढ़ता और प्रभावशाली क्षमता के साथ आतंक के सरपरस्तों और उनके आकाओं को जवाब दिया गया, उसने वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य शक्ति और मजबूत नेतृत्व की नई पहचान स्थापित की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की नीति को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे धरातल पर सिद्ध भी किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं की संयुक्त शक्ति, अत्याधुनिक युद्ध तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक और प्रभावी प्रतिकार भी करता है। मुख्यमंत्री साय ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ पर राष्ट्र के उन सभी वीर सपूतों को कोटिशः नमन किया, जिनके शौर्य और पराक्रम ने हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊँचा किया है। उन्होंने पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले पर्यटकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय सेना का पराक्रम, राष्ट्रभक्ति और बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

बिजली उपभोक्ताओं को राहत: अब नहीं होगी बार-बार रिचार्ज की झंझट

लखनऊ यूपी के बिजली ग्राहकों को बड़ी सौगात देते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्ट पेड में बदलने का ऐलान हुआ है। प्रीपेड से पोस्टपेड में करने की तारीख भी आ गई है। प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलने की पूरी प्रक्रिया एक रात में पूरी हो जाएगी। 9 मई की रात से प्रक्रिया शुरू होगी और 10 मई तक सभी मीटर पोस्टपेड हो जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार पोस्टपेड होने पर बिजली ग्राहकों की कई समस्याओं का हल हो जाएगा। उपभोक्ताओं को मीटर तेज चलने, अधिक बिल आने और बिना बिजली उपयोग के बैलेंस कटने जैसी शिकायतों से मुक्ति मिल जाएगी। बचा बैलेंस बिजली बिल में जुड़ेगा लोगों को यह शंका है कि प्रीपेड में कराए गए रिचार्ज का क्या होगा? अधिकारियों के अनुसार प्रीपेड मीटर का बैलेंस पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। जैसे ही प्रीपेड मीटर कन्वर्ट होंगे, वैसे ही उनका बचा बैलेंस महीने के अंतिम में बनने वाले बिल में स्वत: जुड़ जाएगा। इसका पूरा डिटेल बिजली बिल में अंकित होगा। पूर्वांचल में एमडी कर रहे निगरानी पूर्वांचल के जिलों में स्मार्ट मीटरों के मोड परिवर्तन की निगरानी पूर्वांचल डिस्कॉम के एमडी शंभु कुमार खुद करेंगे। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में 30 लाख 17 हजार 147 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हैं। वाराणसी जोन प्रथम के 11 डिविजनों में 2.20 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटरों उपभोक्ता हैं। एमडी मीटर लगाने वाली कंपनी जीएमआर और जीनस के अफसरों के साथ मोड परिवर्तन की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। चार लाख उपभोक्ता नहीं कर रहे थे मीटर रिचार्ज पूर्वांचल के 4.11 लाख उपभोक्ता प्रीपेड मीटर रिजार्च नहीं कर रहे थे। बनारस में इनकी संख्या लगभग 12 हजार थी। जांच में सामने आया कि मीटर चार्ज न कराने वाले अनेक उपभोक्ता बिजली चोरी कर रहे हैं तो कुछ खाली परिसर पर मीटर लगे थे। विभाग ने बिजली चोरी करने वालों पर केस कराया था। उपभोक्ताओं से वापस लेंगे सिक्योरिटी मनी मीटर पोस्टपेड होने के बाद उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी मनी ली जाएगी। यह राशि बिजली बिल में जोड़कर भेजी जाएगी। बड़े उपभोक्ताओं से सिक्योरिटी मनी किस्त में ली जाएगी। स्मार्ट मीटर की खामियां जस की तस : उपभोक्ता परिषद  वर्ष 2019 से 2022 के बीच लगे 12 लाख स्मार्ट मीटरों में जो खामियां केंद्र सरकार की टीम ने पाई थीं, वही कमियां मौजूदा समय में लग रहे स्मार्ट मीटरों में भी हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर की पुरानी खामियों को नजरअंदाज कर के प्रदेश भर में नए सिरे से स्मार्ट मीटर लगाने पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा प्रदेश में लगाए गए 12 लाख स्मार्ट मीटरों की जांच केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने की थी। सितंबर 2023 में टीम ने रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में जो कमियां गिनाई गई थीं, वे अब लग रहे स्मार्ट मीटरों में भी हैं। अवधेश ने कहा कि अगर आरडीएसएस के तहत लग रहे इन स्मार्ट मीटरों में उपभोक्ता हितों के मानकों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया गया होता तो पूरी परियोजना सवालों के घेरे में नहीं आती। तब रिपोर्ट में बताया गया था कि उपभोक्ताओं को तीन से छह महीने के विलंब से एसएमएस अलर्ट नहीं मिल रहे। चेक मीटर की स्थापना में अनियमितता बरती गई थी। उपभोक्ताओं पर नियमविरुद्ध अतिरिक्त भार डाला जा रहा था। मीटर नेटवर्क में बाधा थी, जिससे डिस्कनेक्शन और रीकनेक्शन प्रभावित हो रहा था।

विदेश में फंसे युवाओं के लिए राहत योजना, विशेष सहायता कोष बनाने की तैयारी

चंडीगढ़ विदेशों में बेहतर भविष्य की तलाश में गए हरियाणा के युवाओं की मौतों और उनके परिवारों की बेबसी के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रभावित परिवारों के लिए विशेष सहायता कोष बनाने का फैसला किया है। हाल के महीनों में सामने आए दर्दनाक मामलों खासकर यूक्रेन-रूस युद्ध में फंसे युवाओं ने इस जरूरत को और अधिक गंभीर बना दिया है, जहां परिवारों को शव वापस लाने के लिए महीनों इंतजार और भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। हरियाणा विदेश सहयोग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसमें सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया और शर्तें स्पष्ट होंगी। प्रस्तावित नीति के तहत केवल वैध वीजा पर विदेश गए लोगों को ही कवर किया जाएगा। सरकार न सिर्फ आर्थिक मदद देगी, बल्कि विदेशों में फंसे लोगों और उनके परिजनों को तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी। इसके लिए विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों के साथ समन्वय कर शवों को भारत लाने की प्रक्रिया को आसान बनाने की योजना है। अधिकारियों का कहना है कि विदेश में दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में परिवारों को भारी आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। रूस से शव लाने में ही 20 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जो कई परिवारों के लिए काफी मुश्किल होता है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने ही रूस से हरियाणा के चार युवाओं के शव लाए गए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी इसे लेकर काफी चिंता जता चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर इस मामले में कोई नीति बनाने को कहा था। इस पर अधिकारियों ने अपना प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अब जल्द ही उच्च अधिकारी इसमें निर्णय लेंगे। इस संबंध में जल्द ही बैठक होने वाली है।  

रोबोट बना बौद्ध भिक्षु, साउथ कोरिया में अनोखा प्रयोग

रोबोट्स इन दिनों दुनिया में टेक्नोलॉजी हर दिन नई सीमाएं तोड़ रहे हैं. लेकिन साउथ कोरिया में जो हुआ, उसने लोगों को हैरान भी किया और सोचने पर मजबूर भी. यहां पहली बार एक ह्यूमनॉयड रोबोट को बौद्ध भिक्षु (मोंक) बना दिया गया. सियोल के मशहूर जोग्ये मंदिर में एक खास समारोह के दौरान इस रोबोट को आधिकारिक रूप से बौद्ध दीक्षा दी गई. इस रोबोट का नाम गाबी रखा गया है और इसकी ऊंचाई करीब 130 सेंटीमीटर है. असली बौद्ध भिक्षु की तरह मिली ट्रेनिंग यह कोई टेक शो नहीं था, बल्कि बिल्कुल वैसा ही धार्मिक कार्यक्रम था जैसा इंसानों के लिए होता है. इस रोबोट ने पारंपरिक बौद्ध पोशाक पहनी, हाथ जोड़कर प्रार्थना की और बौद्ध धर्म के नियमों को स्वीकार किया. समारोह में मौजूद लोगों के सामने इसने वही सारे सवालों के जवाब दिए, जो एक नए भिक्षु से पूछे जाते हैं. दीक्षा से पहले इस रोबोट ने ट्रेनिंग भी ली. इंसानों की तरह इसे भी नवदीक्षित यानी शुरुआती साधु की तरह तैयार किया गया. इसके बाद इसे आधिकारिक रूप से बौद्ध समुदाय का हिस्सा बनाया गया. ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, एशिया के कई देशों में बौद्ध मठों में साधुओं की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है. ऐसे में रोबोट को एक असिस्टेंट के तौर पर देखा जा रहा है. यह रोबोट मंदिर में आने वाले लोगों को जानकारी दे सकता है. लोगों को तौर तरीके भी सिखा सकता है. नई पीढ़ी धार्मिक जीवन में कम दिलचस्पी ले रही है और बुजुर्ग भिक्षुओं की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में मंदिरों को चलाना मुश्किल होता जा रहा है. इससे पहले भी जापान और दक्षिण कोरिया में ऐसे एक्सपेरिमेंट्स हो चुके हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड रोबोट बौद्ध ग्रंथों पर ट्रेन किए जाते हैं ताकि वे लोगों को आध्यात्मिक सलाह दे सकें. दक्षिण कोरिया में तैयार किए गए इस रोबोट में ऐसी तकनीक डाली गई है जो इंसानों की तरह बात कर सके, सवाल समझ सके और धार्मिक कॉन्टेक्स्ट में जवाब दे सके. बौद्ध ग्रंथों और उपदेशों पर किया गया ट्रेन यह रोबोट बौद्ध ग्रंथों और उपदेशों पर ट्रेन किया गया है. यानी अगर कोई शख्स इससे धर्म या जीवन से जुड़े सवाल पूछता है, तो यह जवाब दे सकता है. यह मंदिर में आने वाले लोगों को प्रार्थना के तरीके समझाता है, बौद्ध परंपराओं के बारे में जानकारी देता है और कुछ मामलों में लोगों को मानसिक शांति या सलाह भी दे सकता है. इतना ही नहीं, इसे सिर्फ बात करने वाला रोबोट नहीं रखा गया है. इसे मंदिर के कामों में मदद के लिए भी तैयार किया गया है. जैसे मंदिर में सफाई, बेसिक काम, सिक्योरिटी मॉनिटरिंग और विजिटर्स को गाइड करना. यानी यह एक तरह से डिजिटल सहायक है, जो असली भिक्षुओं का काम हल्का कर सकता है. गौरतलब है कि जापान में भी बुद्धारॉइड जैसे रोबोट बनाए गए हैं, जो धार्मिक सलाह देते हैं और लोगों से बातचीत करते हैं. वहां यह जरूरत इसलिए पैदा हुई क्योंकि कई मंदिर बंद होने की कगार पर हैं. हालांकि इस रोबोट के डेवलपर्स कहते हैं कि यह रोबोट इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं बनाया गया. इसका मकसद सिर्फ मदद करना है, न कि असली भिक्षु बनना.

Vivo X300 Ultra और X300 FE लॉन्च कैमरा और प्रीमियम फीचर्स के साथ नई फ्लैगशिप सीरीज़

Vivo ने भारत में अपनी नई फ्लैगशिप सीरीज़ X300 को लॉन्च कर दिया है. इस सीरीज़ में दो फोन आए हैं, Vivo X300 Ultra और Vivo X300 FE. कंपनी इस बार कैमरा और प्रीमियम एक्सपीरियंस पर फोकस कर रही है. Vivo X300 Ultra को कंपनी ने अपने सबसे पावरफुल और कैमरा-फोकस्ड फोन के तौर पर पेश किया है. इस फोन में बड़ी 6.82 इंच की AMOLED डिस्प्ले दी गई है, जिसमें 2K रेजोल्यूशन और 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है. स्क्रीन काफी ब्राइट है और HDR कंटेंट देखने का एक्सपीरियंस बेहतर बनाती है. परफॉर्मेंस की बात करें तो इसमें लेटेस्ट Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर दिया गया है. इसे अभी के सबसे पावरफुल चिपसेट्स में से एक माना जाता है. इसके साथ 12GB और 16GB RAM के ऑप्शन मिलते हैं और स्टोरेज 256GB से लेकर 1TB तक जाती है. यानी यह फोन गेमिंग, वीडियो एडिटिंग और हैवी यूज के लिए तैयार है. Vivo का कैमरा पर बड़ा दांव Vivo X300 Ultra में क्वाड कैमरा सेटअप मिलता है, जिसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर, 200MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा, एक और टेलीफोटो लेंस और अल्ट्रा-वाइड कैमरा शामिल है. ZEISS के साथ मिलकर इसे ट्यून किया गया है, जिससे फोटो का कलर और डिटेल बेहतर मिलती है. इसमें 8K वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रो मोड जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं, जिससे यह फोन लगभग कैमरा जैसा एक्सपीरियंस देने की कोशिश करता है. बैटरी भी बड़ी दी गई है, करीब 6600mAh से ज्यादा की, और इसमें 100W फास्ट चार्जिंग और वायरलेस चार्जिंग दोनों का सपोर्ट मिलता है. फोन Android 15 पर बेस्ड Funtouch OS पर चलता है. 40W वायरलेस चार्जिंग का भी सपोर्ट दिया गया है. Vivo X300 FE स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स अब बात करें Vivo X300 FE की, तो यह फोन उन लोगों के लिए है जो फ्लैगशिप फीचर्स चाहते हैं लेकिन Ultra जितना भारी और महंगा फोन नहीं लेना चाहते. इसमें 6.3 इंच की AMOLED डिस्प्ले दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आती है. इसमें Snapdragon 8 Gen 3 प्रोसेसर दिया गया है, जो अभी भी काफी पावरफुल माना जाता है. इसके साथ 12GB RAM और 256GB तक स्टोरेज मिलता है. कैमरा सेटअप यहां भी अच्छा है. इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा, टेलीफोटो लेंस और अल्ट्रा-वाइड कैमरा दिया गया है. ZEISS की ब्रांडिंग यहां भी मिलती है, जिससे फोटो क्वालिटी बेहतर रहती है. बैटरी 5000mAh की है और इसमें फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. डिजाइन के मामले में यह फोन Ultra के मुकाबले हल्का और कॉम्पैक्ट है, जो रोजमर्रा के इस्तेमाल में ज्यादा आरामदायक लगता है. Vivo X300 Ultra और Vivo X300 FE की कीमत कीमत की बात करें तो Vivo X300 Ultra प्रीमियम सेगमेंट में आता है और इसकी कीमत करीब 1 लाख 60 हजार रुपये से शुरू होती है, जबकि टॉप वेरिएंट फोटॉग्रफी किट के साथ 2 लाख रुपये तक का मिलेगा. वहीं Vivo X300 FE की कीमत लगभग ₹70,000 से ₹90,000 के बीच रखी गई है. Vivo अब सीधे iPhone और Samsung के प्रीमियम फोन्स को टक्कर देना चाहता है. खासकर कैमरा के मामले में कंपनी ने इस बार बड़ा दांव खेला है. अब असली टेस्ट मार्केट में होगा. अगर कैमरा और परफॉर्मेंस लोगों को पसंद आती है, तो यह सीरीज़ प्रीमियम सेगमेंट में बड़ा गेम चेंजर बन सकती है.

डीजीपी मकवाणा: रेलवे, पुलिस और प्रशासन के समन्वय से सिंहस्थ 2028 का सफल आयोजन

रेलवे–पुलिस–प्रशासन के समन्वय से सुनियोजित भीड़ प्रबंधन, कड़ी सुरक्षा और आधारभूत ढांचे के साथ होगा सिंहस्थ 2028 का सफल आयोजन – डीजीपी मकवाणा सिंहस्थ 2028 की तैयारियों हेतु रेलवे अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समन्वय बैठक कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार, भोपाल में आयोजित प्रयागराज महाकुंभ के अनुभवों के आधार पर आधुनिक तकनीक और ICCC व्यवस्था लागू करने की तैयारी भोपाल सिंहस्थ 2028 के सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित आयोजन के दृष्टिगत आज कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार, भोपाल में पुलिस, रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी सिंहस्थ के दौरान संभावित अत्यधिक भीड़, यातायात प्रबंधन, रेल संचालन, सुरक्षा व्यवस्था तथा आधारभूत संरचना के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए विस्तृत योजना पर चर्चा की गई। विशेष रूप से पूर्व में आयोजित महाकुंभ-2025, प्रयागराज के अनुभवों से सीख लेते हुए आधुनिक तकनीकों, बेहतर समन्वय एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि आगामी सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ एवं जिला प्रशासन के मध्य बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक रहने की संभावना है, जिसके लिए पूर्व से ही व्यवस्थित एवं चरणबद्ध योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भीड़ प्रबंधन के लिए संयुक्त कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए तथा शाही स्नान एवं अन्य प्रमुख अवसरों पर विशेष ट्रैफिक एवं भीड़ नियंत्रण योजना तैयार की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्राउड मैनेजमेंट के तहत एंट्री एवं एग्जिट मार्ग पृथक-पृथक रखे जाएं तथा अंतिम समय में प्लेटफॉर्म परिवर्तन से बचा जाए, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति निर्मित न हो। पुलिस महानिदेशक ने उज्जैन, इंदौर, रतलाम, भोपाल के साथ-साथ ओंकारेश्वर रोड एवं सीहोर क्षेत्र के स्टेशनों को भी ध्‍यान में रखते हुए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया। उन्होंने फुटओवर ब्रिज की चौड़ाई बढ़ाने, पर्याप्त संकेतक, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम एवं अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। डीजीपी ने अपराध नियंत्रण के संबंध में जीआरपी एवं आरपीएफ को विशेष सतर्कता बरतने, इंटेलिजेंस तंत्र को मजबूत करने तथा सभी स्टेशनों, होल्डिंग एरिया एवं पार्किंग स्थलों पर सीसीटीवी कवरेज एवं आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए संयुक्त टीमें सदैव तैयार रहें, जिससे किसी भी स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उत्तरप्रदेश डीजी (रेल) प्रकाश डी. ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभव साझा करते हुए बताया कि बड़े आयोजनों में भीड़ का सटीक आकलन (क्राउड असेसमेंट) अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने 2013 की घटना सहित पूर्व घटनाओं से सीख लेते हुए मल्टी-लेवल क्राउड मैनेजमेंट, प्लेटफॉर्म सुरक्षा, पृथक एंट्री-एग्जिट, कलर कोडिंग, साइनएज, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था एवं होल्डिंग एरिया आधारित भीड़ नियंत्रण व्यवस्था को अत्यंत प्रभावी बताया। उन्होंने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), रियल-टाइम मॉनिटरिंग, व्हाट्सएप/डिजिटल समन्वय एवं स्पेशल ट्रेनों के प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि रेलवे नेटवर्क में किसी एक स्थान की घटना का व्यापक प्रभाव पड़ता है, इसलिए भीड़ को विभिन्न स्तरों पर फिल्टर एवं नियंत्रित करना आवश्यक है। डीजी आरपीएफ सुसोनाली मिश्रा ने कहा कि सिंहस्थ जैसे आयोजन में विभिन्न रेलवे जोनों—विशेष रूप से वेस्टर्न, वेस्ट सेंट्रल एवं सेंट्रल रेलवे के मध्य सुदृढ़ समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि रेलवे द्वारा प्रतिदिन लाखों यात्री ट्रेनों का संचालन किया जाता है तथा किसी एक स्थान की घटना का व्यापक प्रभाव पूरे नेटवर्क पर पड़ता है। उन्होंने अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन, रेलवे बोर्ड स्तर पर सतत मॉनिटरिंग, संयुक्त प्रशिक्षण, एनडीआरएफ के साथ समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र एवं इंटेलिजेंस सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया। साथ ही बड़े आयोजनों में आंतरिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए। रतलाम मंडल रेल प्रबंधक अश्‍विनी कुमार ने बताया कि सिंहस्थ 2028 के लिए रेलवे द्वारा संभावित भीड़, यात्री आवागमन के समय एवं विभिन्न मार्गों के विश्लेषण के आधार पर विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरकनेक्टिविटी एवं संचालन में लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं तथा प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय एवं फीडबैक आधारित सुधार किए जा रहे हैं। उज्जैन में प्रस्तावित व्यवस्थाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए पुलिस अधीक्षक उज्जैन प्रदीप शर्मा ने बताया कि सिंहस्थ-2028 का आयोजन 09 अप्रैल से 08 मई तक प्रस्तावित है, जिसमें लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। शाही स्नान के अवसरों पर एक ही दिन में लगभग 5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। लगभग 3100 हेक्टेयर क्षेत्र में मेला विकसित किया जा रहा है तथा घाटों का विस्तार लगभग 37 किलोमीटर तक किया जा रहा है। वैज्ञानिक आकलन के अनुसार एक किलोमीटर घाट पर निर्धारित समय में हजारों श्रद्धालुओं के स्नान की क्षमता विकसित कर बड़े स्तर पर भीड़ प्रबंधन की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों के विश्लेषण के आधार पर इंदौर-देवास मार्ग से सर्वाधिक आवागमन तथा रेलवे के माध्यम से 2 से 2.5 करोड़ यात्रियों के आगमन की संभावना को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें नए फुट ओवर ब्रिज, सैटेलाइट स्टेशन विकास, त्रिस्तरीय पार्किंग, होल्डिंग एरिया, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, साइडिंग लाइन, जल आपूर्ति व्यवस्था एवं ऑप्टिकल फाइबर आधारित संचार तंत्र का निर्माण शामिल है। ट्रेन संचालन के लिए विशेष रणनीति के तहत 2016 की तुलना में तीन गुना अधिक विशेष ट्रेनें संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही पेंडुलम मूवमेंट आधारित शॉर्ट-डिस्टेंस मेला ट्रेनें, डायनेमिक टाइम टेबल, डबल-हेडेड ट्रेन संचालन, दिशा-आधारित प्लेटफॉर्म निर्धारण एवं लंबी दूरी की ट्रेनों का पूर्व नियोजित डायवर्जन सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी प्रमुख स्टेशनों पर सीसीटीवी एवं एआई आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम, बैकअप पावर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, साइबर सुरक्षा, वेंडर मैनेजमेंट एवं एक्सेस कंट्रोल को सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही RPF-GRP के संयुक्त प्रशिक्षण, मेडिकल टीमों की उपलब्धता एवं त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में सभी अधिकारियों ने एकमत होकर कहा कि पूर्व अनुभवों, तकनीक के प्रभावी उपयोग, सुदृढ़ समन्वय एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से सिंहस्थ 2028 का आयोजन सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न … Read more

चाणक्य नीति हंस के उदाहरण से रिश्तों की सच्चाई और स्वार्थ का ज्ञान

 चाणक्य नीति, आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) द्वारा रचित एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ है. यह ग्रंथ व्यक्ति को जीवन जीने की कला, राजनीति, अर्थशास्त्र और नैतिकता के सिद्धांतों के बारे में बताता है. यह मुख्य रूप से सफल, अनुशासित और सुखी जीवन जीने के लिए सूत्र प्रदान करती है. जो आज भी बिजनेस, रिश्तों और व्यक्तिगत विकास में पूरी तरह लागू होती है. अगर आप जीवन में सुख व शांति की कामना करते हैं तो चाणक्य की नीतियां आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकती हैं.   वहीं, आचार्य चाणक्य ने सूत्र चाणक्य नीति में कई पक्षियों और जानवरों के गुणों का जिक्र भी किया है. उन्हीं में से एक पक्षी है हंस. वैसे तो हंस देखने में बहुत ही सुंदर लगता है. लेकिन, हंस में कुछ ऐसे गुण हैं, जो व्यक्ति अपने जीवन में कभी नहीं अपनाने चाहिए. श्लोक- यत्रोदकं तत्र वसन्ति हंसाः तथैव शुष्कं परिवर्जयन्ति। न हंसतुल्येन नरेण भाव्यं पुनस्त्यजन्तः पुनराश्रयन्ते ॥ अर्थ: इस श्लोक के माध्यम से चाणक्य नीति रिश्तों व इंसान के स्वभाव को लेकर गहरी सीख देता है. इसमें आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जैसे हंस केवल वहीं रहते हैं जहां पानी होता है और पानी सूखने पर उस जगह को छोड़ देते हैं. वैसे ही कुछ लोग भी सिर्फ स्वार्थ और लाभ के लिए रिश्ते निभाते हैं. जीवन में ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए, जो केवल अच्छे समय में साथ रहते हैं. जब तक व्यक्ति के पास पैसा, सफलता या शक्ति होती है, तब तक लोग उसके पास होते हैं. परंतु यह सब समाप्त होने के बाद मुश्किल समय आने पर वही लोग दूरी बना लेते हैं. यह श्लोक ये भी सिखाता है कि इंसान को खुद कभी स्वार्थी स्वभाव नहीं अपनाना चाहिए और ना घमंड करना चाहिए. रिश्तों की असली पहचान कठिन समय में होती है. जो लोग सुख-दुख दोनों में साथ निभाते हैं, वही सच्चे रिश्ते कहलाते हैं. इसके अलावा, यह श्लोक रिश्तों में स्थिरता और निष्ठा का महत्व भी बताता है. अगर कोई व्यक्ति बार-बार अपने लाभ के अनुसार रिश्ते बनाता और छोड़ता है, तो वह कभी सच्चा मित्र नहीं होता है. ना वह व्यक्ति कभी विश्वास जीत पाता है. इसलिए, जीवन में ऐसे संबंध बनाने चाहिए, जिनमें भरोसा, अपनापन और निस्वार्थ भावना हो.

हस्तरेखा शास्त्र से कैसे जानें लव मैरिज या अरेंज मैरिज होगी

आज कल सोशल मीडिया लव मैरिज और अरेंज मैरिज टॉपिक काफी ज्यादा चर्चा में है. जिसको लेकर हर पंडित इस टॉपिक पर अपनी राय रख रहा है. लेकिन, क्या आपको मालूम है कि हाथों की रेखाओं को देखकर भी लव मैरिज और अरेंज मैरिज का पता किया जा सकता है. चौंकिए मत! दरअसल, हस्तरेखा शास्त्र एक ऐसी विद्या है जिसमें हाथ की रेखाओं और हथेली को देखकर इंसान के स्वभाव और भविष्य के बारे में पता लगाया जाता है. इसमें हाथ की मुख्य रेखाएं जैसे जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा को देखा जाता है. इन रेखाओं के आधार पर व्यक्ति के जीवन, करियर, हेल्थ और रिश्तों के बारे में जानकारी जानने की कोशिश की जाती है. वहीं, हाथ की रेखाएं देखकर व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति, आने वाले शादी-शुदा जीवन कैसे रहेगा और लव मैरिज होगी या अरेंज मैरिज ये भी पता किया जा सकता है. कैसे पता करें कि लव मैरिज होगी या अरेंज मैरिज? हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक, हथेली की रेखाओं से शादी और रिश्तों से जुड़े कई संकेत मिलते हैं. खासकर छोटी उंगली के नीचे मौजूद विवाह रेखा को देखकर यह पता किया जा सकता है कि व्यक्ति की शादी लव होगी या अरेंज. अगर विवाह रेखा ऊपर की ओर मुड़कर हृदय रेखा की तरफ जाती दिखाई दे, तो इसे लव मैरिज का संकेत माना जाता है. ऐसे लोग अपने मन से जीवनसाथी चुनते हैं और प्रेम संबंध को शादी तक ले जाने की संभावना अधिक होती है. वहीं, यदि विवाह रेखा सीधी, साफ और हृदय रेखा से अलग हो, तो इसे अरेंज मैरिज का संकेत माना जाता है. ऐसे मामलों में परिवार की भूमिका ज्यादा होती है और वैवाहिक जीवन सामान्यतः स्थिर माना जाता है. हथेली में विवाह रेखा कहां होती है? हस्तरेखा शास्त्र में छोटी उंगली के नीचे, हथेली के किनारे पर जो रेखा होती है, उसे विवाह रेखा कहा जाता है. कुछ लोगों के हाथ में इस जगह एक से ज्यादा रेखाएं भी दिखाई देती हैं, लेकिन हर रेखा का अलग मतलब माना जाता है. अगर विवाह रेखा साफ, गहरी और बिना कटाव के हो, तो इसे अच्छा संकेत माना जाता है. ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन आमतौर पर सुखी और स्थिर रहता है. वहीं, अगर यह रेखा टूटी हुई हो, कटी-फटी हो या बीच-बीच में मिलती-जुलती दिखे, तो शादीशुदा जीवन में परेशानियां आ सकती हैं. अगर विवाह रेखा हृदय रेखा के पास हो, तो जल्दी शादी के संकेत माने जाते हैं. वहीं, छोटी और बीच में स्थित रेखा थोड़ी देर से विवाह होने का इशारा देती है. अगर इस स्थान पर कई छोटी-छोटी रेखाएं हों, तो इसे एक से ज्यादा प्रेम संबंधों का संकेत माना जाता है. अगर विवाह रेखा की शुरुआत में कोई निशान हो या यह हृदय रेखा को पार करती हुई दिखे, तो इसे अच्छा नहीं माना जाता. ऐसे लोगों को रिश्तों में धोखा, जीवनसाथी से जुड़ी समस्याएं या वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है.