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भदवासिया में गोवंश जलने की घटना, CCTV से सच तलाश रही पुलिस

जोधपुर  राजस्थान के जोधपुर जिले के भदवासिया 80 फीट रोड पर गुरुवार शाम को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब स्थानीय लोगों ने एक जला हुआ गोवंश देखा. घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में तनाव फैल गया और बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए. सूचना पर पहुंची पुलिस ने संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत गोवंश को कब्जे में लिया और रात को ही पशु चिकित्सालय भिजवाया. पुलिस प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए रात में ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करवाई. थाने पर हंगामा, रात में हुआ पोस्टमार्टम पोस्टमार्टम के बाद जब गोवंश को दोबारा माता का थान थाना लाया गया, तो वहां मौजूद गोभक्तों का गुस्सा फूट पड़ा. गोभक्त और पुलिस के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक और बहस होती रही. गोभक्तों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए जांच की मांग की. पुलिस अधिकारियों की समझाइश और काफी मशक्कत के बाद मामला शांत हुआ. इसके बाद पुलिस की भारी मौजूदगी में गोवंश का विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार करवाया गया. CCTV फुटेज में छिपा है सच पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच हर एंगल से कर रही है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोवंश जला कैसे? पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह किसी शॉर्ट सर्किट या कूड़े में लगी आग की वजह से हुआ कोई हादसा था, या फिर किसी शरारती तत्व ने शहर का माहौल बिगाड़ने के लिए जानबूझकर इस वारदात को अंजाम दिया है. फिलहाल माता का थान थाना पुलिस ने इलाके में लगे आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है. पुलिस ने की शांति बनाए रखने की अपील पुलिस का कहना है कि फुटेज के जरिए गोवंश के जलने के सही कारणों का पता लगाया जा रहा है. अधिकारियों ने आम जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

SBI हड़ताल: 16 मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी 25-26 मई को विरोध में

 रांची  स्टेट बैंक आफ इंडिया के ग्राहक अलर्ट हो जायें। क्योंकि पूरे देश के बैंक कर्मचारी 25 और 26 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। जिसके कारण केवल दो दिन नहीं बल्कि पांच दिन तक बैंक के कामकाज प्रभावित होंगे। 23 मई को चौथा शनिवार है, 24 को रविवार। 25 और 26 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल और 27 मई बुधवार को बकरीद की छुट्टी है। आल इंडिया स्टेट बैंक आफ इंडिया फेडरेशन ने बैंक प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों के हितों की अनदेखी और 16 लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया है। फेडरेशन के महासचिव एल चंद्रशेखर ने कहा कि प्रबंधन के साथ बार-बार चर्चा के बाद भी कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान नहीं हुआ, जिसके कारण हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को होने वाली असुविधा के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं, लेकिन हम यह कदम कर्मचारियों के न्यायपूर्ण अधिकार के लिए अनिवार्य है। यह वीडियो भी देखें कर्मचारियों के हड़ताल की मुख्य मांगे     एनपीएस में सुधार-नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत फंड मैनेजर बदलने का विकल्प देना     भर्ती पर रोक-पिछले तीन दशकों से मैसेंजर और कुछ वर्षों से सशस्त्र गार्ड की भर्ती न होने का विरोध     नई बहाली-कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नई बहाली सुनिश्चित हो     वेतन समानता- 12वें द्विपक्षीय समझौते के बाद वेतन विसंगति और स्पेशल पे मुद्दा     आउटसोर्सिंग का विरोध- स्थायी नौकरियों के आउटसोर्सिंग का विरोध     सुरक्षा और कामकाजी स्थितियां-बैंक में सुरक्षा की कमी और कर्मचारी विरोधी नीतियों का विरोध     एचआरएमएस की खामियों को दुरूस्त करने की मांग     क्रास सेलिंग के नाम पर मिस सेलिंग बंद करने की मांग क्यों प्रभावित रहेगा 5 दिन काम?     23 मई: चौथा शनिवार (बैंक अवकाश)    24 मई: रविवार (साप्ताहिक अवकाश) 25 मई: राष्ट्रव्यापी हड़ताल 26 मई: राष्ट्रव्यापी हड़ताल 27 मई: बकरीद (सार्वजनिक अवकाश)  

सीकर के जाजोद गांव में मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान, स्कूल में शुरू होगा विज्ञान संकाय

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का “गांव चली सरकार” अभियान के तहत शुक्रवार (7 मई) को सीकर जिले के जाजोद गांव में पहुंचे. गुरुवार (6 मई) देर रात तक ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाने के बाद मुख्यमंत्री शुक्रवार सुबह सूरज निकलते ही गांव की गलियों में पहुंच गए. ग्रामीण जब अपने घरों से बाहर निकले तो उन्होंने मुख्यमंत्री को गांव की सड़कों और गलियों में पैदल घूमते हुए पाया. इसी दौरान उन्होंने गांव की छात्राओं की उस मांग को भी पूरा कर दिया, जो रात्रि चौपाल में उनके सामने रखी गई थी. सरकार की योजनाओं का लिया फीडबैक सीएम ने बिना औपचारिकता के गांव के बुजुर्गों, महिलाओं,  किसानों, पशुपालकों, फल-सब्जी विक्रेताओं और युवाओं से आत्मीय संवाद किया. उन्होंने ग्रामीणों से राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक लिया और गांव की मूलभूत समस्याओं की जानकारी भी जुटाई. छात्राओं ने साझा की थी पीड़ा गुरुवार को रात्रि चौपाल के दौरान छात्राओं ने सीएम से कहा था कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विज्ञान संकाय की सुविधा नहीं है. जिसके कारण उन्हें या तो मजबूरी में अन्य विषयों से पढ़ाई करनी पड़ती है या फिर विज्ञान पढ़ने के लिए घर से काफी दूर जाना पड़ता है. छात्राओं की बात सुनते ही सुनकर मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनके स्कूल में विज्ञान संकाय अवश्य खोला जाएगा. रात को ही उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दे दिए. इसी सत्र से पढ़ाई शुरू शुक्रवार सुबह जब बालिकाएं स्कूल जाते समय मुख्यमंत्री से एक बार फिर मिलीं और अपनी मांग दोहराई. मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए बताया कि जाजोद के स्कूल में विज्ञान संकाय शुरू हो चुका है. राज्य सरकार की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं. अब इस विद्यालय में आप गणित और जीव विज्ञान, दोनों में से अपनी रुचि अनुसार विषय चुनकर इसी साल से पढ़ाई कर सकती हैं. मुख्यमंत्री के मुंह से खुशखबरी सुनकर बच्चियों के चेहरे खिल उठे. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त किया. उनका कहना था कि उन्हें यकीन ही नहीं हो पा रहा कि उनकी मांग इतनी जल्दी पूरी होगी.

हाई कोर्ट आदेश से क्रशर उद्योग पर गहरा असर, हजारों रोजगार खतरे में

रांची राज्य के लगभग 70 प्रतिशत खनन-क्रशर उद्योगों पर बंदी की तलवार लटक रही है। यह हाई कोर्ट के ताजे आदेश से स्थिति पैदा हुई है। हाल में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि 2015 में गठित एनओसी विशेषज्ञ कमेटी को विशेषज्ञ कमेटी नहीं माना जा सकता है, क्योंकि इस कमेटी में विषय के जानकार नहीं थे। अतः 2015 की गजट को मान्यता नहीं दी जा सकती है। इसलिए पहले से जारी वनभूमि से माइंस की दूरी 400 मीटर और पत्थर के क्रशर यूनिट की दूरी 500 मीटर ही मान्य होगी। चेंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा कहते हैं कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिला जाएगा और समाधान के लिए कहा जाएगा। यह हजारों लोगों की रोजी-रोटी का सवाल है। राज्य सरकार ने 2015 में जारी किया था गजट राज्य सरकार ने 2015 में गजट प्रकाशित किया था और उसमें बताया गया था आरक्षित वन क्षेत्र, संरक्षित वन क्षेत्र, रिहायशी क्षेत्र, नदी/अन्य जल स्रोत, शिक्षा संस्थान से 200-250 मीटर की दूरी पर खनन कर सकते हैं। जबकि 2015 से पहले यह दूरी चार सौ-पांच सौ मीटर का था। अब हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद खनन-क्रशर उद्योग संकट में पड़ गया है क्योंकि जिन लोगों ने 2015 के बाद वैध ढंग से खनन-क्रशर उद्योग के लिए लाइसेंस लिया और काम कर रहे हैं, उनके सामने भीषण संकट पैदा हो गया है। उनके साथ हजारों श्रमिक भी इससे प्रभावित होंगे। इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इस आदेश से राज्य के करीब 70 प्रतिशत उद्योग बंद हो जाएंगे और हजारों श्रमिक बेरोजगार हो जाएंगे। व्यवसायियों का कहना है कि इससे सरकार को भी राजस्व की हानि होगी। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने तय की है 200 मीटर दूरी केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने 2025 में नोटिफिकेशन जारी किया था और क्रशर-पत्थर को ओरेंज श्रेणी में रखा और उसने मानक तय किया था कि वन-नदी सीमा से दो सौ मीटर की दूरी होनी चाहिए। इसे लघु खनिज की श्रेणी में रखते हुए उसने मानक तय किए थे। जबकि झारखंड में कम से कम ढाई सौ मीटर का मानक रखा गया है। यह थी एनओसी विशेषज्ञ कमेटी एनओसी विशेषज्ञ कमेटी को विशेषज्ञ कमेटी को उच्च न्यायालय ने विशेषज्ञ कमेटी नहीं माना। दो दिसंबर 2015 की बैठक में पांच सौ मीटर को संशोधित कर स्टोन क्रशर के लिए वन-वनभूमि की न्यूनतम दूरी 250 मीटर तय किया गया। उस कमेटी में संजय कुमार सुमन, सदस्य सचिव, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, बीबी सिंह, अपर निदेशक, खान एवं भूतत्व विभाग, झारखंड सरकार, बीएम लाल दास, उप निदेशक उद्योग विभाग, झारखंड सरकार, फिलीप मैथ्यू जेएसआईए, सुधीर कुमार, पर्यावरण अभियंता, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद। यह हमारे लिए चिंता का विषय है। चार हजार से ऊपर क्रशर-खनन उद्योग झारखंड में होंगे। अच्छा-खासा सरकार को राजस्व जाता है। न्यायालय के आदेश से इस पर संकट आ गया है। अब हम लोग मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखेंगे और कहा जाएगा कि इस पर विचार हो। इसमें हम लोगों की कोई गलती नहीं है। -सीपी सिन्हा, अध्यक्ष, झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ     हमने तो नियम के अनुसार ही लाइसेंस प्राप्त किया और अब इसे निरस्त किया जा रहा है। इससे हमारा खनन-क्रशर उद्योग प्रभावित होगा। इसमें हमारी ओर से कोई गलती तो नहीं है। हमने तो कानूनी ढंग से ही काम किया। जिनका उद्योग 2015 के बाद से चल रहा है, उनके सामने तो बड़ी समस्या पैदा हो गई। हजारों लोग अचानक बेरोजगार होकर कहां जाएंगे। इसमें सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।     -पंकज सिंह, सचिव, झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ  

राजेंद्र भारती केस में नया मोड़: कपिल सिब्बल की एंट्री, क्या बच पाएगी विधायकी?

दतिया मध्य प्रदेश के दतिया के पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती से जुड़े 27 वर्ष पुराने एफडी हेराफेरी मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने त्वरित सुनवाई की याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई निर्धारित की है। न्यायालय ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसे प्राथमिकता से सूचीबद्ध किया, हालांकि शासन पक्ष की ओर से समय की मांग किए जाने के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। जानकारी के अनुसार, राजेंद्र भारती की ओर से 4 मई को शीघ्र सुनवाई हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसे 6 मई को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में रखा गया। इससे पूर्व मामले की नियमित सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तिथि निर्धारित थी, लेकिन याचिकाकर्ता पक्ष द्वारा जल्द सुनवाई की मांग के चलते यह बदलाव हुआ। पूर्व विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखते हुए अदालत से मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया और याचिका को शीघ्र सूचीबद्ध करने की मांग की। एफडी हेराफेरी मामले में दोष सिद्ध यह मामला वर्ष 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में की गई 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक के तत्कालीन पदाधिकारियों के साथ मिलकर एफडी की अवधि में अनियमित परिवर्तन कर फर्जी तरीके से ब्याज निकाला गया। इस प्रकरण में दिल्ली की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।कोर्ट ने उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी सहित विभिन्न धाराओं में दोष सिद्ध किया है। सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी समान धाराओं में सजा सुनाई गई है। राजनीतिक और कानूनी स्थिति पर असर सजा के बाद विधानसभा द्वारा राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त कर दतिया सीट को रिक्त घोषित किया जा चुका है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाती है। हालांकि, यदि हाईकोर्ट से सजा पर स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त होता है, तो उनकी राजनीतिक स्थिति पर पुनर्विचार संभव है। इस बीच, उनके पुत्र अनुज भारती ने जानकारी दी है कि फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील और जमानत के लिए आवेदन दायर किया जाएगा। मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल इस पूरे प्रकरण के बाद दतिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यदि हाईकोर्ट में राहत नहीं मिलती, तो दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।

भारतीयों के लिए खुशखबरी: कनाडा में परमिट समाप्ति के बाद भी 90 दिन तक कानूनी रूप से रह सकेंगे

चंडीगढ़  कनाडा में रह रहे भारतीयों खासकर पंजाबियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब वर्क परमिट या स्टडी परमिट खत्म होने के बाद लोगों को तुरंत भारत लौटने की मजबूरी नहीं होगी। कनाडा की इमिग्रेशन एजेंसी इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा ने नियमों में बदलाव करते हुए नया विकल्प शुरू किया है। पहले नियमों के तहत यदि किसी व्यक्ति का वर्क परमिट खत्म हो जाता था तो उसे केवल वर्कर कैटेगरी में ही अपना स्टेटस बहाल कराना पड़ता था। इसी तरह स्टूडेंट को भी स्टूडेंट कैटेगरी में ही आवेदन करना होता था। नई नौकरी या नया कोर्स न मिलने की स्थिति में लोगों को कनाडा छोड़कर भारत लौटना पड़ता था। अब नए नियमों के तहत वर्क या स्टडी परमिट खत्म होने के बाद व्यक्ति 90 दिनों के भीतर विजिटर रिकॉर्ड के लिए आवेदन कर सकता है। इससे वह बिना नौकरी या पढ़ाई के भी कानूनी रूप से कनाडा में रह सकेगा। हालांकि इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा ने स्पष्ट किया है कि स्टेटस बहाली की प्रक्रिया पूरी होने तक व्यक्ति न तो काम कर सकेगा और न ही पढ़ाई जारी रख पाएगा। इमिग्रेशन एक्सपर्ट पूजा सिंह ने बताया कि पहले भी 90 दिन का नियम लागू था लेकिन उस दौरान व्यक्ति केवल अपने पुराने स्टेटस को ही बहाल कर सकता था। अब विजिटर रिकॉर्ड का विकल्प मिलने से लोगों को अतिरिक्त राहत मिली है। नए नियम के तहत विजिटर स्टेटस बहाल करने के लिए 346.25 कनाडाई डॉलर फीस तय की गई है। यह नियम 1 मई 2026 से लागू हो चुका है। एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि लोग समय रहते आवेदन करें क्योंकि आउट ऑफ स्टेटस होने का असर भविष्य में पीआर और एक्सप्रेस एंट्री प्रोफाइल पर पड़ सकता है। 

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना: आज प्रदेशभर में 2300 से अधिक जोड़ों ने निभाई शादी

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आज 8 मई को प्रदेशभर में भव्य सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जाएंगे। राज्य के सभी जिलों में होने वाले इस आयोजन में 2300 से अधिक जोड़े विवाह सूत्र में बंधेंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह आयोजन केवल विवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और सामूहिक सहभागिता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। समारोह में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध समेत विभिन्न समुदायों और विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़े अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह करेंगे। हर नवविवाहित जोड़े को मिलेगी आर्थिक सहायता मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत राज्य सरकार प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देना और बेटियों के विवाह को सम्मानजनक तरीके से संपन्न कराना है। इसके अलावा विवाह समारोह में दूल्हा-दुल्हन और उनके परिजनों के लिए भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी इंतजाम भी किए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया सामाजिक समरसता का प्रतीक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समाज में समानता और सम्मान को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल है। उन्होंने कहा कि पहले गरीब परिवारों के लिए बेटियों का विवाह चिंता का कारण बनता था, लेकिन अब यह योजना उन्हें आर्थिक और सामाजिक संबल दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अंतिम व्यक्ति तक संवेदनशील शासन की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। पहले भी बना था वर्ल्ड रिकॉर्ड उल्लेखनीय है कि 10 फरवरी 2026 को रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 6,412 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे। इस आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया था। उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 1,316 नवविवाहित जोड़ों को प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद दिया था, जबकि अन्य जिलों के जोड़े वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। महिला एवं बाल विकास विभाग ने संभाली जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा सभी जिलों में आयोजन की व्यापक तैयारियां की गई हैं। प्रशासनिक अमला आयोजन स्थलों पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है, ताकि सभी जोड़ों और उनके परिवारों को सम्मानजनक वातावरण मिल सके।  

बस्तर का वेस्ट अब बनेगा बेस्ट: छिंद के बीजों से तैयार होगी कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी

रायपुर बस्तर के नैसर्गिक सौंदर्य और समृद्ध संसाधनों के बीच अब एक नई और सुगंधित क्रांति आकार ले रही है, जिसका श्रेय दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार को जाता है। बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की शिक्षा प्राप्त करने वाले विशाल ने अपनी जड़ों से जुड़े रहने और कुछ नया करने की चाह में छिंद (खजूर की एक स्थानीय प्रजाति) के उन बीजों से हर्बल कॉफी तैयार की है, जिन्हें अब तक बस्तर में पूरी तरह व्यर्थ समझा जाता था। इस अभिनव प्रयोग के पीछे विशाल का उद्देश्य न केवल बेकार पड़े प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करना है, बल्कि कॉफी के उन शौकीनों को एक स्वस्थ विकल्प प्रदान करना है जो स्वाद तो चाहते हैं लेकिन कैफीन के दुष्प्रभावों से बचना चाहते हैं। विशाल का यह सफर करीब दो वर्षों के गहन शोध और प्रयोगों का परिणाम है, जिसमें उन्होंने इंटरनेट की मदद और स्थानीय समझ का बखूबी तालमेल बिठाया है। विशाल की इस नवाचार को इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला, जिसके लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा सम्मानित किया गया। इस हर्बल कॉफी की सबसे प्रभावशाली विशेषता इसका पूरी तरह से कैफीन मुक्त होना है, जबकि इसमें छिंद के प्राकृतिक गुणों के कारण प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। विशाल का मानना है कि अधिकांश लोग केवल मानसिक सक्रियता के लिए ही नहीं, बल्कि कॉफी के अनूठे स्वाद और उसकी आदत के कारण इसका सेवन करते हैं, और उनकी यह खोज इसी वर्ग को ध्यान में रखकर की गई है। इस नवाचार को तब बड़ी पहचान मिली जब विशाल ने शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में अपना स्टॉल लगाया। वहाँ प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चैधरी सहित विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और आम जनता ने इस कॉफी का स्वाद चखा और इसकी खूब सराहना की। विशाल केवल एक उत्पाद बनाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के यूथ अप फाउंडेशन के माध्यम से स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि उनके इस आइडिया से बस्तर के ग्रामीणों को रोजगार मिले और गांवों और जंगल से मिलने वाले छिंद के बीजों से उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके। हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी भी टेस्टिंग और विकास के दौर में है और इसका आधिकारिक लॉन्च होना बाकी है, लेकिन विशाल के इस अटूट प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृष्टि स्पष्ट हो तो स्थानीय वेस्ट को भी वैश्विक स्तर के बेस्ट उत्पाद में बदला जा सकता है। आने वाले समय में यह हर्बल कॉफी न केवल बस्तर की पहचान बन सकती है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया के लिए एक अनूठा उपहार भी साबित हो सकती है।

Instagram DM से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन हटने का दावा, प्राइवेसी पर उठे सवाल

अगर आप Instagram पर दोस्तों या किसी खास से चैट करते हैं, तो यह खबर आपको चौंका सकती है. आज यानी 8 मई से इंस्टाग्राम के मैसेज में एन्क्रिप्शन खत्म होने वाला है. कंपनी ने पहले ही ऐलान किया था कि 8 मई से इंस्टाग्राम के डायरेक्ट मैसेज यानी DM से एंड टु एंड एन्क्रिप्शन खत्म कर दिया जाएगा. अब तक इंस्टाग्राम के DM में एंड टु एंड एन्क्रिप्शन दिया जाता था, जिसे यूजर खुद ऑन कर सकता था. इस फीचर के चालू होने पर चैट पूरी तरह एन्क्रिप्टेड रहती थी, यानी सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही मैसेज पढ़ सकता था. यहां तक कि कंपनी भी उस कंटेंट को नहीं देख सकती थी. अब एंड टु एंड एन्क्रिप्शन खत्म होने का मतलब ये है कि कंपनी यूजर्स की बातचीत देख और पढ़ सकती है. कंपनी ने दलील दी है कि लोगों को अब इंस्टाग्राम में दिए जाने वाले एन्क्रिप्शन में दिलचस्पी नहीं रही और लोग इसे कम यूज कर रहे हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी यूजर्स डेटा पर AI को ट्रेन करने के लिए ऐसा कर रही है. यूजर्स के प्राइवेट चैटे से Meta करेगा AI को ट्रेन? यही वजह है कि इस फैसले को लेकर प्राइवेसी को लेकर बड़ी बहस शुरू हो गई है. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि एन्क्रिप्शन हटने से यूजर्स की निजी बातचीत पहले जितनी सुरक्षित नहीं रहेगी. हालांकि, इस फैसले के पीछे Meta का अपना तर्क भी है. टेक कंपनियां अक्सर यह कहती हैं कि एन्क्रिप्शन की वजह से गलत गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है. हालांकि ये कंपनी का दोहरापन दिखाता है, क्योंकि जब कंपनी ने इंस्टाग्राम में एंड टु एंड एन्क्रिप्शन लाया था तो कहा था कि यूजर्स की प्राइवेसी कंपनी के लिए टॉप पर है, लेकिन अब उसका उल्टा होता हुआ दिख रहा है. रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि कंपनी AI को ट्रेन करने के लिए ऐसा कर रही है. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन हटने के बाद अब कंपनी के लिए यूजर्स के चैट पढ़ने और उससे AI को ट्रेन करना आसान होगा. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन की वजह से कंपनी खुद भी यूजर्स के चैट्स ऐक्सेस नहीं कर सकती थी. अब इंस्टाग्राम के चैट्स पढ़ेंगी कंपनी? कई बार अपराध या गलत कंटेंट को ट्रैक करना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कंपनियां बैलेंस बनाने की कोशिश करती हैं, जहां सिक्योरिटी भी बनी रहे और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी मदद मिल सके. लेकिन दूसरी तरफ यूजर्स का डर भी जायज है. आज के समय में लोग सोशल मीडिया पर सिर्फ कैजुअल चैट ही नहीं करते, बल्कि कई बार निजी बातें, फोटो, वीडियो और जरूरी जानकारी भी शेयर करते हैं. ऐसे में एन्क्रिप्शन का हटना सीधे तौर पर प्राइवेसी पर असर डाल सकता है. दिलचस्प बात यह है कि WhatsApp, जो कि Meta की ही कंपनी है, वहां एंड टु एंड एन्क्रिप्शन डिफॉल्ट रूप से ऑन रहता है और कंपनी इसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बताती है. वहीं इंस्टाग्राम पर यह फीचर पहले ऑप्शनल था और अब उसे हटा दिया गया है. इंस्टाग्राम पर चैटिंग खतरे से खाली नहीं! इससे एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि क्या अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर Meta की प्राइवेसी पॉलिसी अलग-अलग दिशा में जा रही है? टेक इंडस्ट्री में पिछले कुछ सालों से एन्क्रिप्शन को लेकर लगातार बहस चल रही है. एक तरफ यूजर्स अपनी प्राइवेसी चाहते हैं, तो दूसरी तरफ सरकारें और कंपनियां सिक्योरिटी के नाम पर कुछ एक्सेस चाहती हैं. इंस्टाग्राम का यह कदम उसी बहस को और तेज कर सकता है. खासकर उन यूजर्स के लिए जो अपनी चैट को पूरी तरह निजी रखना चाहते हैं, यह फैसला चिंता बढ़ाने वाला है. एंड टु एंड एन्क्रिप्शन हटने के बाद अब हैकर्स के लिए भी इंस्टाग्राम यूजर्स की चैट पढ़ना आसान हो जाएगा. क्योंकि बिना इस गोल्ड स्टैंडर्ड वाले एन्क्रिप्शन के इन दिनों हैकिंग आसानी से हो सकती है.

Samsung की नई स्मार्टवॉच टेक्नोलॉजी, बेहोशी का संकेत 5 मिनट पहले दे सकती है

स्मार्टवॉच अब सिर्फ कदम गिनने, हार्ट रेट देखने या कॉल उठाने का डिवाइस नहीं रह गई है. धीरे-धीरे ये छोटी सी घड़ी हेल्थ मॉनिटरिंग मशीन में बदलती जा रही है. साउथ कोरियन टेक कंपनी Samsung ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी दिखाई है जो आने वाले समय में बड़ी हेल्थ इमरजेंसी को पहले ही पकड़ सकती है. सैमसंग का दावा है कि उसकी Galaxy Watch बेहोश होने यानी फेंटिंग एपिसोड का संकेत पहले ही पहचान सकती है. Samsung ने साउथ कोरिया के Chung-Ang University ग्वांगम्योंग हॉस्पिटल के साथ मिलकर एक स्टडी की है. बेहोश होने से 5 मिनट पहले बता देगी घड़ी इस रिसर्च में Galaxy Watch6 का इस्तेमाल किया गया और दावा किया गया कि यह घड़ी बेहोश होने की स्थिति को करीब 5 मिनट पहले तक पहचान सकती है. असल में यह टेक्नोलॉजी Vasovagal Syncope यानी VVS पर काम करती है. यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें अचानक हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर तेजी से गिर जाता है और इंसान बेहोश हो सकता है. कई बार यह तनाव, दर्द, डर या लंबे समय तक खड़े रहने की वजह से भी होता है. आमतौर पर लोग कुछ सेकंड या मिनट में ठीक हो जाते हैं, लेकिन अचानक गिरने से सिर में चोट, फ्रैक्चर या दूसरी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं. सैमसंग की इस स्टडी में 132 मरीजों को शामिल किया गया. इन लोगों पर क्लीनिकल टेस्ट किए गए और Galaxy Watch6 ने उनके शरीर के बायोसिग्नल्स को ट्रैक किया. इसके बाद AI मॉडल ने हार्ट रेट और बॉडी पैटर्न को समझकर फेंटिंग के संकेत पहचानने की कोशिश की. कंपनी का दावा है कि सिस्टम ने करीब 84.6 प्रतिशत सटीकता के साथ बेहोश होने की स्थिति का अनुमान लगाया. घड़ी को कैसे पता चलता है कि इंसान बेहोश होने वाला है? काम करने का तरीका भी दिलचस्प है. Galaxy Watch में PPG सेंसर लगा होता है. यह सेंसर बॉडी में ब्लड फ्लो और हार्ट रिदम को ट्रैक करता है. इसके साथ HRV यानी Heart Rate Variability डेटा भी लिया जाता है. आसान भाषा में समझें तो यह आपके दिल की धड़कनों के बीच होने वाले छोटे-छोटे बदलाव को पढ़ता है. फिर AI एल्गोरिद्म इन पैटर्न्स को समझकर खतरे का अंदाजा लगाता है. अगर यह टेक्नोलॉजी असली दुनिया में बड़े स्तर पर काम करती है, तो इसका फायदा उन लोगों को सबसे ज्यादा हो सकता है जिन्हें बार-बार चक्कर आने या अचानक बेहोश होने की समस्या होती है. मान लीजिए कोई इंसान सड़क पर चल रहा है, गाड़ी चला रहा है या सीढ़ियों के पास खड़ा है और घड़ी पहले ही अलर्ट दे दे कि शरीर में कुछ गड़बड़ हो रही है, तो वह खुद को सुरक्षित जगह पर ले जा सकता है या मदद मांग सकता है. प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में बेहद फायदेमंद होगा ये फीचर Samsung इस टेक्नोलॉजी को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की दिशा में बड़ा कदम बता रही है. यानी बीमारी या हादसे के बाद इलाज करने के बजाय पहले ही चेतावनी देना. यही वजह है कि अब वियरेबल डिवाइसेज सिर्फ फिटनेस गैजेट नहीं, बल्कि हेल्थ कोच बनते जा रहे हैं. Galaxy Watch में पहले से कई हेल्थ फीचर्स मौजूद हैं. इसमें हार्ट रेट मॉनिटरिंग, बल्ड ऑक्सीजन ट्रैकिंग, स्लीप एपनिया और इरेगुलर हार्टबीट डिटेक्शन जैसे फीचर्स मिलते हैं. कुछ मार्केट्स में ECG और बल्ड प्रेशर मॉनिटरिंग भी दिया जाता है. अब फेंटिंग प्रेडिक्शन जैसी टेक्नोलॉजी जुड़ने से स्मार्टवॉच का रोल और बड़ा हो सकता है. हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. अभी यह फीचर आम यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है. फिलहाल यह रिसर्च स्टेज में है और सैमसंग ने यह नहीं बताया है कि इसे कब तक Galaxy Watch में रोलआउट किया जाएगा. कंपनी अभी मेडिकल संस्थानों के साथ और रिसर्च करना चाहती है. इसके अलावा स्मार्टवॉच हेल्थ फीचर्स को लेकर हमेशा एक बहस भी रहती है. कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि वियरेबल डिवाइस मददगार जरूर हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर का विकल्प नहीं माना जा सकता. हाल की कुछ स्टडी में यह भी सामने आया कि कई स्मार्टवॉच कुछ हेल्थ डेटा में गलती कर सकती हैं, खासकर अलग-अलग बॉडी टाइप्स और स्किन टोन्स में एक्यूरेसी बदल सकती है.