samacharsecretary.com

योग से निरोगी समाज बनाने की पहल, प्रदेशव्यापी प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता अभियान शुरू

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में, राज्य सरकार योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। “घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” अभियान का उद्देश्य, योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना तथा स्वस्थ एवं निरोग समाज का निर्माण करना है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के सफल आयोजन एवं व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयुष विभाग द्वारा “घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” अभियान के अंतर्गत आयोजित प्रदेशव्यापी योग प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का वर्चुअली शुभारंभ कर कही। यह अभियान 12 मई से 21 जून 2026 तक प्रदेशभर में संचालित होगा। आयुष मंत्री  परमार ने कहा कि योग, भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार है और वर्तमान समय में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का सबसे प्रभावी माध्यम भी है। मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार योग एवं आयुष को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए सतत रूप से कार्य कर रही है। मंत्री  परमार ने कहा कि अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए “योग-सखी” एवं “योग-दूत” तैयार किए जा रहे हैं, जो घर-घर जाकर नागरिकों को योग के प्रति प्रेरित करेंगे। साथ ही विद्यालयों एवं महाविद्यालयों तक भी इस अभियान का विस्तार किया जा रहा है, जिससे युवाओं में योग एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित की जा सके।  परमार ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 को व्यापक जनभागीदारी एवं उत्साह के साथ मनाने की तैयारियों को नई गति मिलेगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। संदेश में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग आज वैश्विक जनआंदोलन बन चुका है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन एवं आंतरिक चेतना को जागृत करने का प्रभावी माध्यम है। डॉ यादव ने कहा कि योग एवं आयुर्वेद भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं, जो आज संपूर्ण विश्व को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखा रही हैं। डॉ यादव ने प्रदेश में आयुष सेवाओं के विस्तार, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के सुदृढ़ीकरण तथा योग एवं वेलनेस गतिविधियों को जनसामान्य तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना करते हुए अभियान को जनभागीदारी से सफल बनाने का आह्वान किया। प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन ने बताया कि यह अभियान 21 जून तक निरंतर चलेगा, जिसके अंतर्गत प्रदेश के 800 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में योग शिक्षक नागरिकों के छोटे-छोटे समूहों को नियमित योगाभ्यास कराएंगे।  शोभित जैन ने बताया कि अभियान के अंतर्गत राज्यभर के लगभग 2000 आयुष संस्थानों आयुष महाविद्यालयों, चिकित्सालयों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रतिदिन लाइव योग प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे। पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक महाविद्यालय, भोपाल के मास्टर ट्रेनर स्टूडियो से प्रतिदिन 45 मिनट के ऑनलाइन योग सत्र आयोजित होंगे, जिनसे प्रदेशभर के हजारों नागरिक यूट्यूब में प्रसारित वीडियो से प्रशिक्षण ले सकेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाइव प्रसारण प्रदेश के लगभग 2000 आयुष संस्थानों में किया जाएगा, जिससे लगभग 15 हजार से अधिक प्रशिक्षार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित होगी।  जैन ने कहा कि अभियान को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रशिक्षण, यूट्यूब लिंक एवं अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए आमजन को साझा किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक अपने घर से ही योग प्रशिक्षण प्राप्त कर सके। उन्होंने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक योग की पहुंच सुनिश्चित करना तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों, योग विशेषज्ञों एवं आयुष संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। 

कूनो में 4 चीता शावकों की मृत्यु, माँ सुरक्षित और स्वस्थ प्रारंभिक जांच में जंगली जानवर के हमले की आशंका

भोपाल  श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता केजीपी-12 के 4 शावक मंगलवार सुबह एक मांद के पास मृत पाये गये हैं। मॉनिटरिंग टीम को श्योपुर टेरिटोरियल डिवीजन क्षेत्र में स्थित मांद के पास एक माह आयु के चारों मृत शावक क्षत-विक्षत अवस्था में मिले। शावकों का जन्म 11 अप्रैल 2026 को खुले जंगल में हुआ था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है शावकों को किसी हिंसक जानवर ने मारा है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि शावकों की मां पूरी तरह सुरक्षित, स्वस्थ और सामान्य स्थिति में है। कूनो में मौजूद अन्य सभी चीते भी स्वस्थ हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। वन विभाग के अनुसार शावकों को अंतिम बार 11 मई की शाम जीवित देखा गया था। प्रारंभिक तौर पर यह मामला किसी अन्य वन्य जीव द्वारा शिकार किए जाने का प्रतीत हो रहा है। हालांकि मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।  

देश के गेहूं निर्यात में म.प्र. का योगदान 40 प्रतिशत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी नीतियों और योजनाओं के परिणामस्वरूप इस साल गेहूँ उत्पादन 365.11 लाख मीट्र‍िक टन तक पहुंच गया है। उत्पादकता बढ़कर 3780 किलो प्रति हैक्टेयर हो गई है। मध्यप्रदेश “गेंहूं प्रदेश” बन गया है। देश के कुल गेहूँ उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान 18 प्रतिशत है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मध्यप्रदेश के गेंहूं की मांग लगातार बनी हुई है। प्राकृतिक मिठास के कारण शरबती और डयूरम गेहूँ की मांग जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई, साउथ अफ्रीका जैसे देशों में बनी हुई है। भारत से विदेशों को निर्यात किये जाने वाले गेहूँ में मध्यप्रदेश का योगदान 35 से 40 प्रतिशत होता है। प्रदेश के गेहूँ को ओमान, यमन, यूएई, साउथ कोरिया, कतर, बांग्लादेश, सउदी अरब, मलेशिया, साउथ अफ्रीका और इंडोनेशिया में पसंद किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का गेहूँ ब्रेड, बिस्किट और पास्ता के लिये सर्वाधिक उपयुक्त है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गेहूँ उत्पादक किसानों के हित में नई योजनाएं बनाने और समय पर मदद करने की रणनीति के फलस्वरूप मध्यप्रदेश ने परंपरागत गेहूँ उत्पादक राज्यों की बराबरी कर ली है। वर्ष 2004–05 में सिर्फ 42 लाख हैक्टेयर में गेहूँ होता था, जो आज बढकर 96.58 लाख हैक्टेयर हो गया है। क्या है मध्यप्रदेश के गेंहूं में भारत सरकार के गेहूँ अनुसंधान निदेशालय ने अपने अनुसंधान में दो हजार सेम्पल का परीक्षण करने के बाद उच्च स्तर की गुणवत्ता का दाना पाया। प्रदेश के सामान्य से सामान्य किस्म के गेहूँ में भी औसत रूप से 12.6 प्रतिशत प्रोटीन, 43.6 पीपीएम (पार्टस पर मिलियन) आयरन तथा 38.2 पीपीएम जिंक पाया गया है। कठिया प्रजाति के गेहूँ में भरपूर प्रोटीन, आयरन, मैग्नीज और जिंक है। इन्हीं विशेषताओं से मध्यप्रदेश के गेहूँ को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। प्रदेश में गेंहूं की उगाई जाने वाली किस्मों की अपनी विशेषताएं हैं, जैसे जे.डब्ल्यू.एस.17, जे.डब्ल्यू. 3020 और जे.डब्ल्यू. 321 नामक गेहूँ की किस्में – एक सिंचाई में 35 क्विंटल तक उत्पादन देती हैं। जे.डब्ल्यू. 1142, जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1203 किस्मों से अधिक तापमान में भी बेहतर उत्पादन मिलता है। जे.डब्ल्यू. 1202 और जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1106 किस्में प्रोटीन से भरपूर हैं। एमपीआर 1215 और जे.डब्ल्यू. 3211 किस्में निर्यात के लिये बेहतर है। गेहूँ की 51 किस्मों का विकास पौष्टिक आहार बनाने के लिये गेहूँ वर्ष 2026 में की जो 5 किस्में उपयोग में आ रही हैं उनमें से 4 मध्यप्रदेश में विकसित की गई हैं। इनमें एम.पी.ओ. 1215, एम.पी. 3211, एम.पी. 1202 एवं एम.पी. 4010 शामिल हैं। मध्यप्रदेश में अब तक गेहूँ की 51 किस्मों का विकास हुआ है। इनमें से 12 किस्मों का विकास सिर्फ एक दशक की अल्प अवधि में हुआ है। 100 लाख मीट्र‍िक टन उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से गेहूँ खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्र‍िक टन से बढ़कर 100 लाख मीट्र‍िक टन हो गया है। प्रदेश में गेहूँ का उपार्जन जारी है। किसानों के लिए उपार्जन केन्द्रों में पूरे इंतजाम किए गये हैं। गेहूँ उपार्जन 23 मई तक चलेगा। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश देश का सबसे बडा प्रामाणिक बीज उत्पादक राज्य भी है। सहकारी क्षेत्र में बीज उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है। बीज उत्पादन कंपनियों से तीन लाख से ज्यादा किसान जुडे हैं। ये कंपनियां अब भंडारण विपणन और खादय प्रसंस्‍करण से भी जुड़ रही हैं। फार्मर प्रोडयूसर कंपनियों को और ज्यादा मजबूत बनाया जा रहा है। इन सभी गतिविधियों से मध्यप्रदेश न केवल गेहूँ बल्कि अन्य फसलों के उत्पादन में राष्ट्र में अग्रणी बना हुआ है।  

प्रत्येक मृतक सदस्य को 5-5 लाख रुपए देने की घोषणा की

रायपुर दुर्ग जिले के कुम्हारी थाना क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 04 खपरी में गैस सिलेंडर ब्लास्ट की दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के चार सदस्यों होमदास वैष्णव (40 वर्ष), लक्ष्मी वैष्णव (18 वर्ष), चांदनी वैष्णव (17 वर्ष) एवं मासूम गोपिका वैष्णव (2 वर्ष) की मौके पर ही दुखद मृत्यु हो गई। दुर्ग प्रवास के दौरान घटना की जानकारी मिलते ही छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल और स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे और मौके का निरीक्षण कर स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने आसपास के लोगों से चर्चा कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा भी की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय को घटना की जानकारी मिलने पर उनके निर्देशानुसार स्वास्थ्य मंत्री  जायसवाल ने मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की। उन्होंने प्रत्येक चार मृतक को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन द्वारा आरबीसी 6-4 के तहत प्रत्येक चार मृतक के परिजन को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं स्वास्थ्य मंत्री  जायसवाल ने इस घटना पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति प्रदान करने की प्रार्थना की। इस दौरान दुर्ग लोकसभा सांसद  विजय बघेल जी, विधायक  रिकेश सेन,  डोमनलाल कोरसेवाड़ा,  ईश्वर साहू, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष  राकेश पांडेय, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष  जितेंद्र साहू, दुर्ग कलेक्टर  अभिजीत सिंह समेत जिला प्रशासन की टीम एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपथित रहे।

पटना ब्लैकआउट ड्रिल 14 मई को, आपदा तैयारी का होगा अभ्यास

 पटना  राजधानी पटना में 14 मई की शाम 7 बजे सिविल डिफेंस ब्लैकआउट और मॉकड्रिल आयोजित किया जाएगा। हवाई हमले जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी और तंत्र की प्रभावशीलता जांचने के लिए यह अभ्यास किया जा रहा है। जिलाध‍िकारी डॉ. त्‍यागराजन एसएम ने लोगों से अपील की है कि निर्धारित समय पर अपने घर, दुकान और प्रतिष्ठानों की सभी लाइटें बंद रखें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल पूर्व निर्धारित मॉकड्रिल है, वास्तविक खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं है। दो मिनट बजेगा सायरन, फिर होगा ब्लैकआउट 14 मई को निर्धारित समय पर हवाई हमले की चेतावनी के रूप में दो मिनट तक सिविल डिफेंस का सायरन बजाया जाएगा। सायरन बजते ही ब्लैकआउट शुरू होगा। इस दौरान फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस, एनसीसी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर निकाय, सिविल डिफेंस और पुलिस समेत आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों की तत्परता और समन्वय का परीक्षण किया जाएगा। इन इलाकों में होगा मॉक अभ्यास जिलाधिकारी ने बताया कि नागरिक सुरक्षा निदेशालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पटना नगर निगम क्षेत्र के अलावा दानापुर निजामत, खगौल और फुलवारीशरीफ में भी मॉकड्रिल और ब्लैकआउट कराया जाएगा। मॉक अभ्यास के लिए पटना समाहरणालय, बिस्कोमान भवन, बांकीपुर बस स्टैंड और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) को सिमुलेशन साइट के रूप में चिन्हित किया गया है। छह तरह के आपदा परिदृश्यों का होगा अभ्यास प्रशासन के अनुसार मॉकड्रिल के दौरान छह प्रमुख परिदृश्यों पर अभ्यास किया जाएगा। इनमें एयर रेड अर्ली वार्निंग सिस्टम, ब्लैकआउट व्यवस्था, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, मेडिकल रिस्पॉन्स और फायर फाइटिंग शामिल हैं। प्रत्येक सिमुलेशन स्थल पर अलग-अलग आपदा परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास कराया जाएगा। आवश्यक सेवाओं पर नहीं पड़ेगा असर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मॉकड्रिल के दौरान आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। अस्पतालों में ब्लैकआउट के लिए खिड़कियों पर क्यूबिकल पर्दे या प्राइवेसी कर्टेन का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रचार-प्रसार और नागरिक सहभागिता पर जोर जिला प्रशासन ने स्कूलों, व्यवसायिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी संगठनों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया है ताकि अधिकतम नागरिक इस अभ्यास में भागीदारी कर सकें। 13 मई को पटना समाहरणालय में हवाई हमले पर आधारित टेबल-टॉप एक्सरसाइज भी आयोजित की जाएगी। कंट्रोल रूम रहेगा सक्रिय मॉकड्रिल के दौरान जिला आपातकालीन संचालन केंद्र और जिला नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। किसी भी सूचना या सहायता के लिए लोग इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:     जिला आपातकालीन संचालन केंद्र: 0612-2210118     जिला नियंत्रण कक्ष: 0612-2219810 / 2219234     आपातकालीन सेवा: 112 प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि नागरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए इस तरह के अभ्यास साल में कम-से-कम दो बार आयोजित किए जाते हैं।  

25 उद्योगों पर 79 लाख रुपये से अधिक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित

रायपुर रायगढ़ जिले में वायु गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा लगातार सघन निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि जिले की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘संतोषजनक’ से ‘मध्यम’ श्रेणी के बीच स्थिर बनी हुई है। पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए इस वर्ष अब तक 25 उद्योगों पर 79 लाख रुपये से अधिक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित की गई है। आधुनिक तकनीक से वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी रायगढ़ जिले में वायु गुणवत्ता की सटीक निगरानी के लिए 4 सतत परिवेशीय वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (CAAQMS) स्थापित की गई हैं। ये केंद्र खनन प्रभावित क्षेत्रों—कुंजेमुरा, मिलुपारा (तमनार), छाल (धरमजयगढ़) तथा औद्योगिक क्षेत्र पूंजीपथरा में संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के अंतर्गत रायगढ़ शहर और ओ.पी. जिंदल औद्योगिक पार्क क्षेत्र में नियमित रूप से मैन्युअल मॉनिटरिंग भी की जा रही है। नियम उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस नीति मंडल द्वारा पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। जनवरी 2026 से मई 2026 तक प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाले 8 उद्योगों पर 3 लाख 22 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसी प्रकार, फ्लाई ऐश प्रबंधन एवं परिवहन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वाले 17 उद्योगों पर 76 लाख 20 हजार 255 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई है। इस प्रकार कुल 25 उद्योगों पर 79 लाख रुपये से अधिक की कार्रवाई की गई है। फ्लाई ऐश परिवहन के लिए सख्त SOP और डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था सड़कों पर उड़ने वाली धूल एवं राखड़ की समस्या को नियंत्रित करने के लिए मंडल द्वारा विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई है। इसके तहत कच्चे माल और औद्योगिक उत्पादों के परिवहन के दौरान डस्ट कंट्रोल उपायों का पालन अनिवार्य किया गया है। फ्लाई ऐश के पारदर्शी और वैज्ञानिक निपटान के लिए IWMMS पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से राखड़ के उठाव से लेकर अंतिम निपटान तक की प्रत्येक गतिविधि की डिजिटल निगरानी की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सतत प्रतिबद्धता क्षेत्रीय कार्यालय, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अनुसार रायगढ़ जिले में प्रदूषण स्तर में लगातार वृद्धि होने की आशंकाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले की वायु गुणवत्ता नियंत्रित और स्थिर बनी हुई है। मंडल द्वारा उद्योगों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

गाय संरक्षण पर सख्ती से बढ़ी अर्थव्यवस्था, यूपी में 36 हजार गिरफ्तारियां

लखनऊ भारतीय संस्कृति में गाय को जो स्थान प्राप्त है, वह न केवल आस्था का प्रश्न है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के अंतर्सबंधों की वह सुदृढ़ डोर है जिसने हजारों वर्षों से इस देश को जोड़े रखा है। भारतीय शास्त्र साहित्य में गाय की महिमा का गान अनगिनत स्थानों पर हुआ है और उन्हें विश्वस्य मातरः की संज्ञा दी गई है। अर्थात गाय पूरे विश्व की माता हैं। यही कारण है कि प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी दर पीढ़ी, अनवरत प्रवाहित होता रहा। जब इस पवित्र परंपरा पर कोई आघात होता है तो वह केवल धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करता, बल्कि उस सभ्यतागत सूत्र को भी तोड़ने का प्रयास करता है जिस पर भारतीय समाज की नींव टिकी है। आज के समय में जब विकास की अंधी दौड़ में परंपराएं पीछे छूट रही हैं तो उत्तर प्रदेश में योगी सरकार गोसंरक्षण को सनातनी दृष्टि से स्थापित करती हुई दिखाई देती है। गोवंश की रक्षा का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संकल्प सिर्फ धार्मिक भावना तक ही नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है। यह गोसंरक्षण से ग्रामोदय की राह है, जो व्यापक सामाजिक-आर्थिक अभियान के रूप में उभर आया है। गो संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल उत्तर प्रदेश में 2017 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो लोगों में विकास की उम्मीद के साथ यह आकांक्षा भी थी कि अब गोकशी के बढ़ते अपराधों, माफियाओं के आतंक और कानून के दुरुपयोग से मुक्ति मिलेगी। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही जनआकांक्षाओं को समझा और गोसंरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोच्च स्थान दिया। अब जबकि सरकार के नौ साल पूरे हो चुके हैं, परिणाम सामने है। 2017 से 2025 के मध्य योगी सरकार ने गो हिंसा से जुड़े मामलों में लगभग 36 हजार आरोपितों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़े मात्र प्रशासनिक उपलब्धियां नहीं, इस बात का प्रमाण भी है कि राज्य अब अपराधियों के समक्ष निरुपाय नहीं खड़ा, बल्कि राज्य शक्ति सनातन मूल्यों के रक्षार्थ सुदृढ़ता से खड़ी है। इन गिरफ्तारियों के साथ-साथ 13,793 आरोपियों के विरुद्ध गुण्डा अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई की गई। 178 अभियुक्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया और 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट का प्रयोग किया गया। इसके अतिरिक्त 83 करोड़ 32 लाख रुपये की सम्पत्ति जब्त की गई। इन कदमों से यह स्पष्ट संदेश गया कि गोमाता के प्रति हिंसा न केवल कानूनी दृष्टि से दंडनीय है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध संगठित होकर साजिशें रचने वालों के खिलाफ राज्य पूरी कठोरता से कार्रवाई करेगा। अर्थव्यवस्था की रीढ़ गोमाता योगी सरकार की दृष्टि यह है कि जब गाय सुरक्षित रहेगी, जब वह स्वस्थ रहेगी, तो वह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकती है। वर्तमान में इसे सुनिश्चित वास्तविकता के रूप में देखा जा सकता है। योगी सरकार ने गोशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित किया है। आज उत्तर प्रदेश में गाय के दूध से निर्मित पनीर, मक्खन, घी और अन्य दुग्ध उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि पूरे देश में अपनी पहचान बना रहे हैं। गोबर से बनाई जा रही जैविक खाद किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर किसान न केवल अपनी लागत कम कर रहे हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ा रहे हैं। गोबर गैस संयंत्रों से ग्रामीण ऊर्जा आपूर्ति को नई दिशा मिल रही है। पर्यावरण के अनुकूल इस ऊर्जा का स्रोत न केवल ग्रामीण परिवारों की ईंधन समस्या हल कर रहा है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी में भी योगदान दे रहा है। पंचगव्य आधारित उत्पादों ने तो जैसे एक नई क्रान्ति ही ला दी है। आयुर्वेदिक औषधियों में गोघृत और पंचगव्य की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। गाय के गोबर से निर्मित दीये, अगरबत्ती, धूप और मूर्तियां धार्मिक बाजारों में बड़ी तेजी से स्थान बना रहे हैं। यह उद्योग न केवल राजस्व उत्पन्न कर रहा है, बल्कि लाखों ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी दे रहा है। गोवंश आधारित उत्पादों के निर्माण में महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन रही है। कई स्वयं सहायता समूह गोबर से दीये, अगरबत्ती और अन्य उत्पाद बनाकर बाजार में बेच रहे हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह मॉडल सामाजिक परिवर्तन का बड़ा माध्यम है गोकशी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं यह समझना जरूरी है कि गोकशी पर रोक केवल एक धार्मिक या भावनात्मक प्रश्न नहीं है। यह एक संगठित अपराध जगत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। पूर्ववर्ती सरकारों के कालखंड में जो माफिया तंत्र पनपा था, उसने गोकशी को एक सुनियोजित उद्योग का रूप दे दिया था। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में गोकशी और अवैध पशु वध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत गोकशी, पशु तस्करी और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। सरकार ने कानून को और कठोर बनाते हुए उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 भी लागू किया जिसमें 10 वर्ष तक कठोर कारावास और 3 से 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया। समृद्धि व धर्म का आधार उत्तर प्रदेश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ा है। गोसंरक्षण की नीति यह संदेश देती है कि विकास का मार्ग केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि परंपराओं के सम्मान से भी प्रशस्त होता है। जब सांस्कृतिक मूल्यों को आर्थिक विकास से जोड़ा जाता है, तब समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं। शास्त्रों में गाय को समृद्धि और धर्म का आधार माना गया है। उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण भविष्य की समृद्धि का आधार बना है जिसमें संस्कृति और करुणा निहित है।

फेडरेशन ने उद्योगपतियों के हित में किया निरंतर सहयोग : मंत्री काश्यप

भोपाल  फेडेरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मध्यप्रदेश के विकास को नई गति देने वाला प्रमुख स्तंभ है। प्रदेश के स्थानीय और युवा उद्योगपतियों को नई दिशा दी है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल निजी होटल में फेडेरेशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के आयोजन और उद्योगों को दिए जा रहे नीतिगत प्रोत्साहन से प्रदेश के छोटे उद्यमियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में एक नया आत्मविश्वास जागा है, जिससे अब गांव का व्यक्ति भी उद्योग लगाने का साहस जुटा रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  चेतन्य काश्यप भी समारोह में शामिल हुए और उन्होंने भी संबोधित किया। मंत्री  पटेल ने कहा कि मजदूर और उद्योगपति के बीच का संबंध हितों के टकराव की जगह आपसी समन्वय का होना चाहिए और इसे वास्तविकता में बदलना सरकार की प्राथमिकता है। इसी दिशा में मंत्री  पटेल ने फेडरेशन के प्रतिनिधियों को श्रम संबंधी विभागीय समितियों में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने '' जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो श्रम और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप को कम करने का कार्य कर रही हैं। मंत्री  पटेल ने उद्योगों की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्किल मैपिंग पर विशेष बल दिया और उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे अपने आवश्यक 'स्किल लेवल' की पहचान कर विभाग को सूचित करें। सरकार इन जरूरतों के आधार पर स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर कुशल कार्यबल उपलब्ध कराएगी, जिससे उद्योगों को श्रमिकों की कमी का सामना न करना पड़े और स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो। मंत्री  पटेल ने कहा कि प्रदेश कृषि उत्पादन के उच्चतम स्तर को प्राप्त कर रहा है इसलिए अब हम सभी को 'प्रोसेसिंग' (प्रसंस्करण) क्षेत्र पर केंद्रित करना होगा। राज्य की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए उपयुक्त है। इसके साथ ही, उन्होंने श्रम विभाग में जारी सुधारों की चर्चा करते हुए बताया कि अनावश्यक कानूनों को समाप्त किया जा रहा है और शेष प्रमुख कानूनों में एकरूपता लाने का प्रयास किया जा रहा है। निरीक्षण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड और डिजिटल सिस्टम लागू किए गए हैं जिससे प्रक्रियाएं सिस्टम आधारित और पारदर्शी बनी रहें। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  चेतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में वर्ष 2025 को 'उद्योग वर्ष' के रूप में मनाया गया है जिसका मुख्य केंद्र स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को नए अवसर प्रदान करना था। मंत्री  काश्यप ने कहा कि फेडरेशन ने उद्योगपतियों के हित में शासन के कार्यों में निरंतर सहयोग किया है। साथ ही उन्होंने उद्यमियों से गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखने का आग्रह किया, जिससे वैश्विक बाजार में प्रदेश की साख और मजबूत हो सके। मंत्री  काश्यप ने औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के बारे बताते हुए कहा कि विभाग ने पिछले डेढ़ वर्षों में 1200 से अधिक प्लॉट पूरी पारदर्शिता के साथ ऑनलाइन आवंटित किए हैं और आगामी दो वर्षों में 3 हजार नए प्लॉट उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश ने निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए एक अनूठी पहल की है, जिसके तहत लैंड-लॉक्ड राज्य होने की चुनौतियों को देखते हुए निर्यातकों को 50 प्रतिशत परिवहन सब्सिडी प्रदान की जा रही है। सब्सिडी वितरण की इस पूरी प्रक्रिया को 'डेट ऑफ प्रोडक्शन' के आधार पर पारदर्शी और ऑनलाइन बनाया गया है, जिससे उद्यमियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।मंत्री  काश्यप ने कहा कि व्यापारियों के कल्याण के लिए एक 'व्यापार बोर्ड' का गठन किया गया है, जिसमें फेडरेशन के प्रतिनिधि को स्थायी सदस्य के रूप में स्थान दिया गया है। मंत्री द्वय ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष  हिमांशु खरे एवं संयुक्त अध्यक्ष  वीरेंद्र कुमार पोरवाल और  अखिलेश राठी को अंगवस्त्रम् भेंट कर नवनिर्वाचन का प्रमाण पत्र प्रदान किया और शुभकामनाएं दी। साथ ही निवृतमान अध्यक्ष  दीपक शर्मा को अध्यक्षीय कार्यकाल के लिए शाल, फल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। फेडेरेशन की ओर से अध्यक्ष  खड़े ने मंत्रीद्वय को स्मृति चिन्ह भेंट किया।  पूर्व अध्यक्ष डॉ. आर.एस. गोस्वामी ने स्वागत उद्बोधन में फेडरेशन द्वारा प्रदेश में उद्योगों के विकास और विस्तार के प्रयासों के लिए सरकार की सराहना की। समारोह के दौरान अध्यक्ष  दीपक शर्मा के कार्यकाल और उपलब्धियों पर आधारित वीडियो का प्रसारण किया गया। इस अवसर पर फेडरेशन के सदस्य और आमजन उपस्थित रहें।  

रेलवे कर्मियों की बढ़ी सैलरी: DA में इजाफा, जल्द खाते में आएगा 4 माह का एरियर

नई दिल्‍ली भारतीय रेलवे के कर्मचारियों के लिए गुड न्‍यूज आई है. रेलवे बोर्ड ने भी महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 फीसदी की बढ़ोतरी कर दिया है. यह वृद्धि 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी. इसका मतलब हुआ की कर्मचारियों को चार महीने का एरियर मिलेगा. इस बढ़ोतरी के साथ ही डीए अब 58% से बढ़कर 60% हो गया है। इसका बढोतरी का लाभ सभी कार्यरत रेलवे कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और फैमिली पेंशनभोगियों को मिलेगा जो 7वें वेतन आयोग के दायरे में आते हैं. उम्मीद है कि मई महीने की सैलरी और पेंशन में बढ़ी हुई दरें और बकाया राशि जुड़कर आएगी, जिससे कर्मचारियों के हाथ में आने वाला पैसा बढ़ जाएगा। साल में दो बार होता है DA में बदलाव महंगाई भत्ते में साल में दो बार संशोधन किया जाता है. पहला 1 जनवरी से और दूसरा 1 जुलाई से. डीए में बदलाव ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के आंकड़ों के आधार परकिया जाता है ताकि महंगाई के असर को कम किया जा सके. अप्रैल में ने केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों के डीए में भी 2% की बढ़ोतरी हुई थी। 12 लाख को फायदा भारतीय रेलवे देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है. इस फैसले से करीब 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को फायदा होगा और उनका वेतन वेतन बढ़ेगा। रेलवे पेंशनर्स को कितना फायदा होगा? रेल मंत्रालय के 7 मई 2026 के आदेश के मुताबिक, रेलवे पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को मिलने वाला DR अब बेसिक पेंशन का 60 फीसदी मिलेगा. इससे लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों की मासिक आय बढ़ जाएगी.यह बढ़ोतरी अलग-अलग पेंशन स्तरों पर प्रभावी रूप से लागू होगी। यहां आसान भाषा में समझें कि आपके पेंशन लेवल के हिसाब से आपकी मंथली इनकम कितनी बढ़ जाएगी….     अगर किसी पेंशनर की बेसिक पेंशन 10,000 रुपये है, तो पहले उसे 58 फीसदी DR के हिसाब से कुल 15,800 रुपये मिलते थे. अब 60 फीसदी DR लागू होने के बाद उसे हर महीने 16,000 रुपये मिलेंगे. यानी हर महीने 200 रुपये का सीधा फायदा होगा.     ₹20,000 बेसिक पेंशन पाने वालों की पेंशन अब ₹31,600 से बढ़कर ₹32,000 हो जाएगी. इससे हर महीने ₹400 का फायदा होगा.     अगर बेसिक पेंशन 30,000 रुपये है, तो 2 फीसदी DR बढ़ने से उसकी मासिक पेंशन में करीब 600 रुपये की बढ़ोतरी होगी.     ₹40,000 बेसिक पेंशन वालों की पेंशन अब ₹63,200 से बढ़कर ₹64,000 हो जाएगी. इससे ₹800 महीने का फायदा होगा.     अगर बेसिक पेंशन ₹50,000 है, तो अब कुल पेंशन ₹79,000 से बढ़कर ₹80,000 हो जाएगी. यानी हर महीने ₹1,000 ज्यादा मिलेंगे.     ₹60,000 बेसिक पेंशन पाने वाले पेंशनर्स को अब ₹94,800 की जगह ₹96,000 मिलेंगे. इससे हर महीने ₹1,200 का फायदा होगा.     वहीं ₹70,000 बेसिक पेंशन वाले पेंशनर्स की कुल पेंशन अब ₹1,10,600 से बढ़कर ₹1,12,000 हो जाएगी. यानी हर महीने ₹1,400 की बढ़ोतरी होगी. कब से लागू होगी नई DR दर? सरकार ने साफ किया है कि DR में यह 2 फीसदी बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी. इसका मतलब यह है कि रेलवे पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को बढ़ी हुई पेंशन के साथ पिछले महीनों का एरियर भी दिया जाएगा. एरियर जल्द ही उनके खातों में आ जाएगा। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स का भी DA- DR बढ़ा 18 अप्रैल 2026 को पीएम नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अतिरिक्त DA और DR किस्त को मंजूरी दी थी. इसके तहत DA और DR को 58 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी किया गया है. सरकार का कहना है कि यह फैसला बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए लिया गया है.

सरकारी भवनों में सोलर क्रांति की तैयारी: मंत्री शुक्ला बोले- RESCO मॉडल पर बढ़े जागरूकता अभियान

सौर ऊर्जा अपनाएं, भविष्य बचाएं शासकीय भवनों में रेस्को मॉडल से सोलर पैनल लगाने के लिए जागरूकता जरूरी : मंत्री शुक्ला जिला पंचायत भोपाल में शासकीय संस्थाओं और रेस्को विकासक इकाइयों के मध्य हुए विद्युत क्रय अनुबंध भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निरंतर ईंधन (फ्यूल) और ऊर्जा बचाने का आहवान किया गया है। हमें दृढ़ संकल्प के साथ इस दिशा में काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप शासन और प्रशासन को एक साथ मिलकर ग्रीन एनर्जी की ओर शिफ्ट होना होगा। मंत्री शुक्ला मंगलवार को जिला पंचायत कार्यालय के सभाकक्ष में प्रदेश के विभिन्न विभागों के शासकीय भवनों में सोलर रूफ़टॉप संयंत्र स्थापना के लिये शासकीय संस्थाओं व रेस्को विकासक इकाइयों के मध्य विद्युत क्रय अनुबंध निष्पादन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मंत्री शुक्ला ने लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि हमारी 50 प्रतिशत ऊर्जा खपत नवकरणीय ऊर्जा से होनी चाहिए और मध्यप्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आमजनों में जागरूकता लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आने वाले समय में हर घर की छत पर सोलर पैनल नजर आने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिये कि कि रेस्को पद्धति के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों में समय पर भुगतान एवं उचित मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाएं। रेस्को एक महत्वपूर्ण बचत योजना अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने कहा कि रेस्को योजना शून्य निवेश, पहले दिन से बचत और नेट जीरो की ओर बढ़ने का एक सशक्त माध्यम है। यह शासन के लिए एक महत्वपूर्ण बचत योजना है। उन्होंने कहा कि यह एक साझेदारी का प्रोजेक्ट है, इसलिए सभी संबंधित विभागों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए। आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे ही कार्यक्रम प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित किए जाएंगे। समय पर भुगतान पर मिलेगी छूट प्रबंध संचालक अमनबीर सिंह बैंस ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि रेस्को पद्धति से 3.78 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली जनरेट होगी। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को तत्परता से बेहतर प्रबंध कर कार्य करने के निर्देश दिए। एमडी बैंस ने बताया कि बिजली बिलों का भुगतान 3 से 10 तारीख के बीच करने पर भुगतान राशि में 1 प्रतिशत की छूट का प्रावधान है, जबकि देरी से भुगतान करने पर 1.5 प्रतिशत की पेनल्टी लगाई जाएगी। शासकीय कार्यालय बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण में बनेंगे सहभागी योजना के सफल एवं दक्षतापूर्ण क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश निश्चित रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा। शासकीय कार्यालय इस मॉडल को अपनाकर न केवल आर्थिक बचत करेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अपना अहम योगदान देंगे। बैठक में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती इला तिवारी एवं जिला अधिकारी उपस्थित थे।